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Wednesday, December 10, 2025

संघ का संदेश बीजेपी तुरंत संजय जोशी का नाम अध्यक्ष के लिए घोषित करें बीजेपी नेतृत्व की फिर टालमटोल

संघ का संदेश बीजेपी तुरंत संजय जोशी का नाम अध्यक्ष के लिए घोषित करें बीजेपी नेतृत्व की फिर टालमटोल

 

  संघ का संदेश बीजेपी तुरंत संजय जोशी का नाम अध्यक्ष के लिए घोषित करें बीजेपी नेतृत्व  की फिर टालमटोल

नागपुर से एक औपचारिक संदेश दिल्ली भेजा गया। इतना सीधा, इतना साफ और इतना कठोर कि कई वरिष्ठ बीजेपी नेताओं ने पहले तो इसे अफवाह समझा। लेकिन यह अफवाह नहीं बल्कि आरएसएस की अंतिम समय सीमा थी। संदेश था बीजेपी तुरंत संजय जोशी का नाम अध्यक्ष के लिए घोषित करें। इस महीने के भीतर कोई देरी स्वीकार नहीं। इस संदेश का स्वर अनुरोध नहीं आदेश जैसा था। संघ ने कहा कि अब राजनीतिक गणित, लोकसभा सीटें, व्यक्तिगत रिश्ते कुछ भी इस निर्णय में बाधा नहीं बन सकता।और पहली बार नागपुर ने यह भी जोड़ दिया कि यदि बीजेपी नेतृत्व फिर भी टालमटोल करता है तो संगठन का अगला कदम अपनी स्वतंत्र दिशा तय करना होगा। जिसमें संजय जोशी को उच्चतम संघ नेतृत्व की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है।

यानी 14 जनवरी 2026 संघ बीजेपी संबंधों का टर्निंग पॉइंट बन गया। बिहार चुनाव का शोर अब आखिरकार थम चुका था और दिल्ली के सत्ता गलियारों में एक नई तरह की खामोशी तैर रही थी। वही खामोशी जो किसी बड़े तूफान से पहले महसूस होती है। बीजेपी हेड क्वार्टर में जश्न का माहौल धीरे-धीरे खत्म हो रहा था। लेकिन नागपुर में आरएसएस के दफ्तर में माहौल बिल्कुल उल्टा। तनावपूर्ण, गंभीर और बेहद निर्णायक। संघ के बड़े पदाधिकारी साफ

बोल चुके थे कि अब बहाने नहीं चलेंगे। चुनाव खत्म जीत मिली। ठीक है। पर अब संगठन को दिशा देनी है और उसके लिए बीजेपी प्रेसिडेंट का नाम तुरंत घोषित किया जाना चाहिए। और यहीं से असली पेंच शुरू हुआ। क्योंकि इस बार संघ ने सिर्फ एक सुझाव नहीं दिया बल्कि एक स्पष्ट आदेश जैसा कुछ भेजा। किसी और का नहीं संजय जोशी का नाम। और यह नाम जब संघ ने सीधे पीएम मोदी और अमित शाह को भेजा तो पावर कॉरिडोर में हलचल दौड़ गई। संजय जोशी वह नाम जिसे बीजेपी का कार्यकर्ता आज भी सम्मान के साथ लेता है। लेकिन सत्ता के शीर्ष पर बैठे कई लोग जिसकी वापसी से घबराए रहते हैं। बिहार के नतीजों ने यह दिखा दिया था कि मोदी शाह की रणनीति अभी भी मजबूत है। लेकिन आरएसएस का मानना था कि जमीन पर संगठन की पकड़ पिछले कुछ वर्षों में कमजोर हुई है। और इसी कमजोरी को ठीक करने के लिए संघ चाहता था कि बीजेपी का मुखिया अब कोई ऐसा बने जो पूरी तरह से संघ शिक्षित संघ शैली वाला और संघ के प्रति 100% समर्पित हो। संघ अपना विश्वास जिस नाम पर रख रहा था वह केवल और केवल संजय जोशी थे। आरएसएस ने स्पष्ट कहा यदि बीजेपी नेतृत्व संजय जोशी को अध्यक्ष नहीं बनाता, तो संघ अपनी दिशा खुद तय करेगा। यहां तक कि अगले सरसघ चालक के रूप में भी वही नाम सोचा जा रहा है।


 नरेंद्र मोदी को यह बात सबसे ज्यादा चुभ कि संघ ने पहली बार इतनी सख्त भाषा में चेतावनी दी। अमित शाह भी हैरान थे क्योंकि पिछले कई वर्षों की राजनीतिक चाले, संगठनात्मक फैसले और केंद्रीय नेतृत्व का नियंत्रण सब कुछ एक तरह से पीएमओ और गृह मंत्रालय की स्क्रिप्ट पर चलता रहा था। लेकिन इस बार मामला अलग था। संघ अपनी उस मूल भावना में लौट चुका था जिसके अनुसार संगठन सरकार से बड़ा है और उन्हीं गलियारों में चर्चा चल रही थी कि इस बार संघ सिर्फ दबाव नहीं डाल रहा बल्कि लिमिट सेट कर रहा है। एक रेखा कि मोदी शाह सरकार को पार नहीं करनी चाहिए और यदि वे फिर भी नहीं समझे तो संघ संजय जोशी को सिर्फ बीजेपी अध्यक्ष नहीं बल्कि आरएसएस चीफ के रूप में भी आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। मोहन भागवत पिछले कई वर्षों से संतुलन साधने की कोशिश कर रहे थे। एक तरफ सरकार की ताकत दूसरी ओर संगठन की परंपरा लेकिन यह संतुलन अब टूटता हुआ दिख रहा था। भागवत जानते थे कि मोदी और शाह दोनों ही संजय जोशी की वापसी से असहज है। लेकिन वे यह भी समझते थे कि संगठन की जड़ों को मजबूत करने के लिए जोशी जैसा व्यक्ति ही सबसे उपयुक्त है। भागवत ने कई बार पीएम को संकेतों में बताया कि आरएसएस और बीजेपी के बीच दूरी बढ़ रही है। लेकिन उन संकेतों को सत्ता की चमक में शायद उतनी गंभीरता से नहीं लिया गया और अब संघ का धैर्य समाप्त हो चुका था। इसलिए भागवत ने पहली बार अपने ही लोगों से कहा, अब संतुलन का दूसरा तरीका अपनाना पड़ेगा। सत्ता को संगठन का महत्व समझाना होगा। दिल्ली में बैठे रणनीतिकारों का मानना था कि आरएसएस का यह दबाव साधारण नहीं है। क्योंकि बिहार जीत से उत्साहित बीजेपी चाहती थी कि वही कहानी देश भर में दोहराई जाए। जहां चुनावी रणनीति मोदी शाह केंद्रित हो और संगठन की भूमिका पीछे सरक जाए। लेकिन आर एस एस यह मॉडल अब स्वीकार करने के मूड में नहीं था। वे चाहते थे कि बीजेपी का अगला अध्यक्ष ऐसा हो जो पार्टी को फिर से केंद्र से बाहर चलाए यानी दिल्ली की सत्ता से स्वतंत्र। और यही विचार मोदी शाह के लिए सबसे कठिन था क्योंकि संजय जोशी के आने का मतलब था पार्टी का असल कंट्रोल फिर नागपुर की तरफ झुकना और यह दोनों नेताओं को मंजूर नहीं।

आरएसएस का अंतिम संदेश बेहद कठोर था। या तो बीजेपी अध्यक्ष संजय जोशी होंगे या फिर संघ अपना रास्ता अलग तय करेगा। यह बात सुनकर दिल्ली में कई वरिष्ठ नेता चुप हो गए क्योंकि यह केवल नाम का विवाद नहीं था। यह शक्ति संतुलन की लड़ाई थी। एक तरफ चुनी हुई सरकार की ताकत। दूसरी तरफ एक विचारधारा की दशकों पुरानी शाखाएं और इन शाखाओं में वही लोग काम करते हैं, जिन्हें आज भी लगता है कि पार्टी नेतृत्व ने संघ की सलाह को लगातार अनसुना किया है। संघ चाहता था कि 2026 के चुनावों से पहले पार्टी पूरी तरह से वैचारिक दिशा में लौटे और इसके लिए संजय जोशी से बेहतर कोई चेहरा नहीं। दिल्ली की बैठकों में कई विकल्प सामने आए। किसी नए चेहरे को लाना, किसी पुराने नेता को आगे करना या आरएसएस को मनाने के लिए कुछ और प्रस्ताव भेजना। लेकिन नागपुर की तरफ से एक ही उत्तर हर बार मिला। नाम सिर्फ संजय जोशी। यह एक तरह का सीधा संदेश था कि इस बार संघ समझौता करने वाला नहीं। मोदी शाह को यह बात चुभियन लग रही थी कि वही संजय जोशी जिनकी राजनीतिक वापसी को उन्होंने वर्षों तक रोक कर रखा। अब बीजेपी और आरएसएस दोनों का संभावित मुखिया बन सकते हैं और यही डर इस कहानी को और दिलचस्प बना रहा था।

 कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने भी मन में यह बात स्वीकार कर ली थी कि जोशी यदि अध्यक्ष बनते हैं तो जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का मनोबल अचानक बढ़ जाएगा। क्योंकि जोशी की पहचान संगठन के आदमी वाली है जो बिना प्रचार के बिना कैमरे के रात-रात भर बूथ स्तर पर काम करते हैं। वहीं मोदी शाह का मॉडल है प्रचार नेतृत्व और चुनावी प्रबंधन। दोनों के काम करने के तरीकों में जमीन आसमान का अंतर है। आरएसएस चाहता था कि बीजेपी का पुनर्गठन खाली सत्ता के लिए नहीं बल्कि विचारधारा के लिए हो और जोशी इस काम के लिए आदर्श माने जाते थे। आरएसएस के अंदरूनी हलकों में यहां तक चर्चा शुरू हो गई कि संजय जोशी को सर संघचालक बनाने का प्रस्ताव तभी लागू होगा जब बीजेपी नेतृत्व उन्हें पार्टी अध्यक्ष बनाने से साफ इंकार कर दे। यानी एक तरह से यह संघ की बैकअप प्लान थी और यह धमकी नहीं बल्कि रणनीतिक संकेत था कि संघ अब पूरी तरह से तैयार है शक्ति संतुलन को बदलने के लिए। इस स्थिति ने मोदी शाह को ऐसी पोजीशन में ला दिया जहां उन्हें पहली बार महसूस हुआ कि बिहार की जीत के बाद सत्ता का नशा जितना तेज था उससे ज्यादा तेज संघ का दबाव उतर सकता है। अब पूरी कहानी एक ऐसे मोड़ पर आ गई जहां बीजेपी और आरएसएस की दशकों पुरानी साझेदारी की परीक्षा हो रही है। मोहन भागवत के प्रयास असफल होते दिख रहे  हैं क्योंकि नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोनों एक मजबूत राजनीतिक ढांचे के समर्थक हैं। जबकि संघ वैचारिक और संगठनात्मक ढांचे को प्राथमिकता देता है। अगर जोशी को अध्यक्ष बनाया जाता है तो सत्ता का केंद्र बदल जाएगा। अगर नहीं बनाया जाता तो संघ अपने सबसे अनुभवी अनुशासन प्रिय और वैचारिक रूप से कठोर कार्यकर्ता को अपनी सर्वोच्च कुर्सी पर बैठाकर बीजेपी को एक सीधा संदेश दे देगा। कहानी अब केवल नाम की नहीं आने वाले वर्षों में भारतीय राजनीति के शक्ति संतुलन की है और इस संघर्ष का सबसे बड़ा किरदार बन चुका है संजय जोशी।





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December 10, 2025 at 09:59AM

संघ का संदेश बीजेपी तुरंत संजय जोशी का नाम अध्यक्ष के लिए घोषित करें बीजेपी नेतृत्व की फिर टालमटोल

 

  संघ का संदेश बीजेपी तुरंत संजय जोशी का नाम अध्यक्ष के लिए घोषित करें बीजेपी नेतृत्व  की फिर टालमटोल

नागपुर से एक औपचारिक संदेश दिल्ली भेजा गया। इतना सीधा, इतना साफ और इतना कठोर कि कई वरिष्ठ बीजेपी नेताओं ने पहले तो इसे अफवाह समझा। लेकिन यह अफवाह नहीं बल्कि आरएसएस की अंतिम समय सीमा थी। संदेश था बीजेपी तुरंत संजय जोशी का नाम अध्यक्ष के लिए घोषित करें। इस महीने के भीतर कोई देरी स्वीकार नहीं। इस संदेश का स्वर अनुरोध नहीं आदेश जैसा था। संघ ने कहा कि अब राजनीतिक गणित, लोकसभा सीटें, व्यक्तिगत रिश्ते कुछ भी इस निर्णय में बाधा नहीं बन सकता।और पहली बार नागपुर ने यह भी जोड़ दिया कि यदि बीजेपी नेतृत्व फिर भी टालमटोल करता है तो संगठन का अगला कदम अपनी स्वतंत्र दिशा तय करना होगा। जिसमें संजय जोशी को उच्चतम संघ नेतृत्व की जिम्मेदारी भी दी जा सकती है।

यानी 14 जनवरी 2026 संघ बीजेपी संबंधों का टर्निंग पॉइंट बन गया। बिहार चुनाव का शोर अब आखिरकार थम चुका था और दिल्ली के सत्ता गलियारों में एक नई तरह की खामोशी तैर रही थी। वही खामोशी जो किसी बड़े तूफान से पहले महसूस होती है। बीजेपी हेड क्वार्टर में जश्न का माहौल धीरे-धीरे खत्म हो रहा था। लेकिन नागपुर में आरएसएस के दफ्तर में माहौल बिल्कुल उल्टा। तनावपूर्ण, गंभीर और बेहद निर्णायक। संघ के बड़े पदाधिकारी साफ

बोल चुके थे कि अब बहाने नहीं चलेंगे। चुनाव खत्म जीत मिली। ठीक है। पर अब संगठन को दिशा देनी है और उसके लिए बीजेपी प्रेसिडेंट का नाम तुरंत घोषित किया जाना चाहिए। और यहीं से असली पेंच शुरू हुआ। क्योंकि इस बार संघ ने सिर्फ एक सुझाव नहीं दिया बल्कि एक स्पष्ट आदेश जैसा कुछ भेजा। किसी और का नहीं संजय जोशी का नाम। और यह नाम जब संघ ने सीधे पीएम मोदी और अमित शाह को भेजा तो पावर कॉरिडोर में हलचल दौड़ गई। संजय जोशी वह नाम जिसे बीजेपी का कार्यकर्ता आज भी सम्मान के साथ लेता है। लेकिन सत्ता के शीर्ष पर बैठे कई लोग जिसकी वापसी से घबराए रहते हैं। बिहार के नतीजों ने यह दिखा दिया था कि मोदी शाह की रणनीति अभी भी मजबूत है। लेकिन आरएसएस का मानना था कि जमीन पर संगठन की पकड़ पिछले कुछ वर्षों में कमजोर हुई है। और इसी कमजोरी को ठीक करने के लिए संघ चाहता था कि बीजेपी का मुखिया अब कोई ऐसा बने जो पूरी तरह से संघ शिक्षित संघ शैली वाला और संघ के प्रति 100% समर्पित हो। संघ अपना विश्वास जिस नाम पर रख रहा था वह केवल और केवल संजय जोशी थे। आरएसएस ने स्पष्ट कहा यदि बीजेपी नेतृत्व संजय जोशी को अध्यक्ष नहीं बनाता, तो संघ अपनी दिशा खुद तय करेगा। यहां तक कि अगले सरसघ चालक के रूप में भी वही नाम सोचा जा रहा है।


 नरेंद्र मोदी को यह बात सबसे ज्यादा चुभ कि संघ ने पहली बार इतनी सख्त भाषा में चेतावनी दी। अमित शाह भी हैरान थे क्योंकि पिछले कई वर्षों की राजनीतिक चाले, संगठनात्मक फैसले और केंद्रीय नेतृत्व का नियंत्रण सब कुछ एक तरह से पीएमओ और गृह मंत्रालय की स्क्रिप्ट पर चलता रहा था। लेकिन इस बार मामला अलग था। संघ अपनी उस मूल भावना में लौट चुका था जिसके अनुसार संगठन सरकार से बड़ा है और उन्हीं गलियारों में चर्चा चल रही थी कि इस बार संघ सिर्फ दबाव नहीं डाल रहा बल्कि लिमिट सेट कर रहा है। एक रेखा कि मोदी शाह सरकार को पार नहीं करनी चाहिए और यदि वे फिर भी नहीं समझे तो संघ संजय जोशी को सिर्फ बीजेपी अध्यक्ष नहीं बल्कि आरएसएस चीफ के रूप में भी आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। मोहन भागवत पिछले कई वर्षों से संतुलन साधने की कोशिश कर रहे थे। एक तरफ सरकार की ताकत दूसरी ओर संगठन की परंपरा लेकिन यह संतुलन अब टूटता हुआ दिख रहा था। भागवत जानते थे कि मोदी और शाह दोनों ही संजय जोशी की वापसी से असहज है। लेकिन वे यह भी समझते थे कि संगठन की जड़ों को मजबूत करने के लिए जोशी जैसा व्यक्ति ही सबसे उपयुक्त है। भागवत ने कई बार पीएम को संकेतों में बताया कि आरएसएस और बीजेपी के बीच दूरी बढ़ रही है। लेकिन उन संकेतों को सत्ता की चमक में शायद उतनी गंभीरता से नहीं लिया गया और अब संघ का धैर्य समाप्त हो चुका था। इसलिए भागवत ने पहली बार अपने ही लोगों से कहा, अब संतुलन का दूसरा तरीका अपनाना पड़ेगा। सत्ता को संगठन का महत्व समझाना होगा। दिल्ली में बैठे रणनीतिकारों का मानना था कि आरएसएस का यह दबाव साधारण नहीं है। क्योंकि बिहार जीत से उत्साहित बीजेपी चाहती थी कि वही कहानी देश भर में दोहराई जाए। जहां चुनावी रणनीति मोदी शाह केंद्रित हो और संगठन की भूमिका पीछे सरक जाए। लेकिन आर एस एस यह मॉडल अब स्वीकार करने के मूड में नहीं था। वे चाहते थे कि बीजेपी का अगला अध्यक्ष ऐसा हो जो पार्टी को फिर से केंद्र से बाहर चलाए यानी दिल्ली की सत्ता से स्वतंत्र। और यही विचार मोदी शाह के लिए सबसे कठिन था क्योंकि संजय जोशी के आने का मतलब था पार्टी का असल कंट्रोल फिर नागपुर की तरफ झुकना और यह दोनों नेताओं को मंजूर नहीं।

आरएसएस का अंतिम संदेश बेहद कठोर था। या तो बीजेपी अध्यक्ष संजय जोशी होंगे या फिर संघ अपना रास्ता अलग तय करेगा। यह बात सुनकर दिल्ली में कई वरिष्ठ नेता चुप हो गए क्योंकि यह केवल नाम का विवाद नहीं था। यह शक्ति संतुलन की लड़ाई थी। एक तरफ चुनी हुई सरकार की ताकत। दूसरी तरफ एक विचारधारा की दशकों पुरानी शाखाएं और इन शाखाओं में वही लोग काम करते हैं, जिन्हें आज भी लगता है कि पार्टी नेतृत्व ने संघ की सलाह को लगातार अनसुना किया है। संघ चाहता था कि 2026 के चुनावों से पहले पार्टी पूरी तरह से वैचारिक दिशा में लौटे और इसके लिए संजय जोशी से बेहतर कोई चेहरा नहीं। दिल्ली की बैठकों में कई विकल्प सामने आए। किसी नए चेहरे को लाना, किसी पुराने नेता को आगे करना या आरएसएस को मनाने के लिए कुछ और प्रस्ताव भेजना। लेकिन नागपुर की तरफ से एक ही उत्तर हर बार मिला। नाम सिर्फ संजय जोशी। यह एक तरह का सीधा संदेश था कि इस बार संघ समझौता करने वाला नहीं। मोदी शाह को यह बात चुभियन लग रही थी कि वही संजय जोशी जिनकी राजनीतिक वापसी को उन्होंने वर्षों तक रोक कर रखा। अब बीजेपी और आरएसएस दोनों का संभावित मुखिया बन सकते हैं और यही डर इस कहानी को और दिलचस्प बना रहा था।

 कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने भी मन में यह बात स्वीकार कर ली थी कि जोशी यदि अध्यक्ष बनते हैं तो जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का मनोबल अचानक बढ़ जाएगा। क्योंकि जोशी की पहचान संगठन के आदमी वाली है जो बिना प्रचार के बिना कैमरे के रात-रात भर बूथ स्तर पर काम करते हैं। वहीं मोदी शाह का मॉडल है प्रचार नेतृत्व और चुनावी प्रबंधन। दोनों के काम करने के तरीकों में जमीन आसमान का अंतर है। आरएसएस चाहता था कि बीजेपी का पुनर्गठन खाली सत्ता के लिए नहीं बल्कि विचारधारा के लिए हो और जोशी इस काम के लिए आदर्श माने जाते थे। आरएसएस के अंदरूनी हलकों में यहां तक चर्चा शुरू हो गई कि संजय जोशी को सर संघचालक बनाने का प्रस्ताव तभी लागू होगा जब बीजेपी नेतृत्व उन्हें पार्टी अध्यक्ष बनाने से साफ इंकार कर दे। यानी एक तरह से यह संघ की बैकअप प्लान थी और यह धमकी नहीं बल्कि रणनीतिक संकेत था कि संघ अब पूरी तरह से तैयार है शक्ति संतुलन को बदलने के लिए। इस स्थिति ने मोदी शाह को ऐसी पोजीशन में ला दिया जहां उन्हें पहली बार महसूस हुआ कि बिहार की जीत के बाद सत्ता का नशा जितना तेज था उससे ज्यादा तेज संघ का दबाव उतर सकता है। अब पूरी कहानी एक ऐसे मोड़ पर आ गई जहां बीजेपी और आरएसएस की दशकों पुरानी साझेदारी की परीक्षा हो रही है। मोहन भागवत के प्रयास असफल होते दिख रहे  हैं क्योंकि नरेंद्र मोदी और अमित शाह दोनों एक मजबूत राजनीतिक ढांचे के समर्थक हैं। जबकि संघ वैचारिक और संगठनात्मक ढांचे को प्राथमिकता देता है। अगर जोशी को अध्यक्ष बनाया जाता है तो सत्ता का केंद्र बदल जाएगा। अगर नहीं बनाया जाता तो संघ अपने सबसे अनुभवी अनुशासन प्रिय और वैचारिक रूप से कठोर कार्यकर्ता को अपनी सर्वोच्च कुर्सी पर बैठाकर बीजेपी को एक सीधा संदेश दे देगा। कहानी अब केवल नाम की नहीं आने वाले वर्षों में भारतीय राजनीति के शक्ति संतुलन की है और इस संघर्ष का सबसे बड़ा किरदार बन चुका है संजय जोशी।




Tuesday, December 2, 2025

भारत का अपना सोशल मीडिया ऐप -Nyburs:Hyper Local Social App

भारत का अपना सोशल मीडिया ऐप -Nyburs:Hyper Local Social App
भारत का अपना सोशल मीडिया ऐप -Nyburs:Hyper Local Social App
भारत का अपना सोशल मीडिया ऐप -Nyburs:Hyper Local Social App
भारत का अपना सोशल मीडिया ऐप -Nyburs:Hyper Local Social App
भारत का अपना सोशल मीडिया ऐप -Nyburs:Hyper Local Social App

 


मोदी जी ने एक बार अपील किया था कि भारत के पास अपना सोशल मीडिया का प्लेटफार्म होना चाहिए। मोदी जी ने अनाउंस किया और किसी ने बैंगलोर में बैठकर इसको हकीकत में उन्होंने कन्वर्ट भी कर दिया। ये है भारत का


Nyburs:Hyper Social Local App

आपने सोशल मीडिया के एप्स को यूज़ किया होगा। उसके अंदर आपको Instagram, Twitter, Facebook, WhatsApp के ग्रुप्स यह सारे आपको अलग-अलग से नए एप्स लेने पड़ते हैं। लेकिन यह एक ऐसा ऐप है जिसके अंदर ये सारे के सारी चीजें एक ही ऐप के अंदर डाल दी। यह है भारत का आंसर और इसके अंदरआप जो अपनी पोस्ट करते हैं या फ्रेंड्स के साथ अगर आप इनको रेकमेंड करते हैं तो आपको पैसे भी मिलते हैं। यहां तक कि जैसे YouTube के अंदर आप वीडियो डाल सकते हैं। इसके अंदर भी वो फैसिलिटी है। 

अब आते हैं कि ये जो ऐप है ये बाकी ऐप से डिफरेंट क्यों है?पहली बात ये है जैसे अपने जितने भी सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म्स है वो माने जाते हैं कि हमें ये तो मालूम है कि ईलॉन मस्क ने क्या खाया? राहुल गांधी ने क्या खाया वो उसके उसके घर में क्या हो रहा है लेकिन हमें अपने घर में क्या हो रहा है या हमारे जो नेबर्स हैं वहां पर क्या हो रहा है हमें पता ही नहीं है ये एक्सीडेंट नहीं है ये डिजाइन है इनका ये डिजाइन है इनका कि हम दुनिया से कनेक्ट हो लेकिन हम अपने ही घर में हम डिस्कनेक्ट हो जाए नाउ ये जो छोटी सी कंपनी है बैंगलोर के अंदर उन्होंने स्टार्टअप शुरू कर दिया स्टार्टअप ये शुरू किया है जो सब कुछ चेंज कर देगा समथिंग वि इस गोइंग टू फ्लिप सोशल मीडिया कंप्लीटली अपसाइड डाउन।सोशल मीडिया आपको दुनिया से कनेक्ट करता है। अपने आप से डिस्कनेक्ट करता है। इस इसको समझा और उन्होंने ऐप बना  दिया जहां पर आप सिंपली डाउनलोड कर सकते हैं। और उसके बाद आप अपने लोगों के साथ कनेक्ट कर सकते हैं। अपने लोगों का मतलब क्या है? जो आपके घर के आसपास रहते हैं। Facebook के ऊपर आपके पास हो सकता है 5000 दोस्त हो। लेकिन उनका पता है आपको उसकी लाइफ में क्या चल रहा है। लेकिन आपके नेबर बिल्कुल साथ में जो जिसकी दीवार आपके घर के साथ लगती है उसके बारे में आपको पता नहीं है। आपके घर के पास एक नया रेस्टोरेंट खुल गया। एक नया कैफे खुल गया। आपको उसके बारे में पता नहीं है। लेकिन ग्लोबल कंटेंट आपको मालूम है क्योंकि उन्होंने इस तरह बनाया है इसको कंटेंट को ताकि वो पैसे बनाए। आप डाटा कंज्यूम कर रहे हैं। पैसा वो बना रहे हैं।

 अब आपकी जो कम्युनिटी है वो आपके साथ कनेक्ट कर सकती है ना कि दुनिया में क्या हो रहा है उसको कनेक्ट करने की बजाय। आपको डिस्कनेक्ट करने के लिए आप ही के लोगों के लिए आप ही आप ही के लोगों के साथ। अब जो मॉडर्न सोशल मीडिया का प्लेटफार्म है भारत ने उसको उल्टा कर दिया। आपको आइसोलेट करने की कोशिश करनी थी।


अब हमारा जो भारत का अपना डाटा है अपना जो सोशल मीडिया ऐप है वो आपको अपने आप से वो कनेक्ट करेगा सॉल्व करेगा आपकी बेसिक प्रॉब्लम्स को क्यों ये जो ऐप है ये नवीन शर्मा हिंदू सनातनी है विशाल चौधरी नवीन शर्मा दो नाम जिन्होंने इसको इन्होंने शुरू किया पिच क्या थी पिच इनकी ये है मेड फॉर इंडिया बाय इंडिया टू इंडिया अब इसका मतलब क्या है फिर Twitter आपको कनेक्ट करता है दुनिया से। इन्होंने बोल दिया आपकी जो लोकल कम्युनिटी है कॉलोनी है पहले वो आपके साथ कनेक्ट करेंगे। Instagram आपको दिखाएगा इनफ्लुएंसर्स। नेबर्स आपको दिखाएगा आपकी लोकालिटी में कौन सा इनफ्लुएंसरर है। आपका इशू क्या है आपके एरिया का वो आपको दिखाई देगा। इसको बोलते हैं लाइफ हाइपर लोकल

सोशल नेटवर्किंग। अब ये सोशल नेटवर्किंग क्या होती डिवोर्स का जो ये सिस्टम है वो है एक ही सिंपल सिस्टम सर्कल आपके घर के पास और जो चैनल है वो भी आपके घर के पास यानी कि आपके नेबरहुड में क्या हो रहा है आपको वो दिखेगा एल्गोरिदम यहां पर यूज़ नहीं हो रहा उनको लोकेशन मालूम है आपकी आपकी लोकेशन के हिसाब से आपके लोकेशन बेस्ड जो आपके घर के आसपास है उसी के फीड मिलेंगे आपको दूसरे एरिया में वो क्या हो रहा है आपको मतलब नहीं है सपोजिंग साउथ दिल्ली में आप रहते हैं। वहां पर एक रेस्टोरेंट खुला तो साउथ दिल्ली के जितने रेजिडेंट्स हैं जो लोग वहां पर रहते हैं उनको उसका मैसेज पहुंचेगा कि आपके घर के आसपास दो चार किलोमीटर में ये नया रेस्टोरेंट खुला है। आप पटना में रहते हैं। वार्ड नंबर 12 है आपका। वहां पर कोई इंफ्रास्ट्रक्चर का नया प्रोजेक्ट लगने वाला है। जो वार्ड नंबर 12 में जो लोग रहते हैं उस उनको अपने वार्ड की हर इंफॉर्मेशन उनके पास पहुंचेगी। दोस्तों अब आप सोच के देखिए अब आप कम्युनिटीज को ऑर्गेनाइज कर पाएंगे मोबलाइज कर पाएंगे आपका सड़क में आपकी जो सड़क है वो गंदी पड़ी है वहां पर कोई सफाई करने नहीं आया है आप वहां पर ऐप में डाल सकते है आपके एरिया का आदमी उसको देखेगा आप कनेक्ट कर सकते है अपने लोकल मंत्रियों के साथ वोटर रजिस्ट्रेशन है आपके एरिया में कब हो रही है कब नहीं हो रही आपको पता लगेगा यानि की लोकल इश्यूज आपके घर के आसपास के वो सारे आपके सामने फिंगर टिप्स के ऊपर होंगे इसलिए इसको बनाया गया है इसको सुपर लोकल हाइपर लूप बोलते हैं और ये स्वदेशी ऐप है जहां पर एक तो ये चीज है कि आप कनेक्ट करेंगे अपने ही लोगो के साथ रियल वर्ल्ड के अंदर क्या एक्शन हो रहा है वो आपको पता लगेगा बट सबसे बड़ी चीज है आपको अपनी लैंग्वेज में ये ऐप आप चला सकते है 12  लैंग्वेज इन्होंने ऑलरेडी डाल दिए मैं कोई इनका एफिलिएट नहीं हूं आपको लगेगा मुझे सर इसमें पैसे मिलने वाले है जनरली सनातनियों को सबसे बड़ी प्रॉब्लम यही आती है नहीं इसमें ये सिर्फ इसलिए कि भारत का ऐप है। मोदी जी खुद इसको प्रमोट कर रहे हैं।दूसरा जो डाटा है वो भारत में रहेगा। यानी कि सर्वर भारत में है। कोई अमेरिकन कंपनी हमारे डाटा को यूज़ करके हमें मार्केटिंग का प्रोडक्ट वो बेच नहीं पाएगी। एंड लास्टली यू कैन अर्न मनी फ्रॉम दिस ऐप। वो कैसे? इन्होंने क्या किया? जब इसको ल्च किया इसके अंदर कांटेस्ट रखे हैं। हर रोज का कांटेस्ट है जहां पर आपको कैश मिलता है। वीकली चैलेंजेस है। आप लाइव स्ट्रीमिंग कर सकते हैं। लाइव स्ट्रीमिंग के आपको पैसे मिलते हैं। अगर आप रेफर करते हैं किसी को उसका बोनस भी है। यानी कि आप अपनी कम्युनिटी में एंगेज करेंगे और उस एंगेजमेंट का आपको रिवॉर्ड भी मिलेगा। बिजनेस मॉडल बड़ा ही सिंपल है और जीनियस भी है। वो कैसे? भारत का जो डिजिटल एडवरटाइजिंग का मार्केट है वो डेढ़ लाख करोड़ रुपया है 2025 का निबोर्स ने क्या किया वो जो लोकल बेस्ड एडवरटाइजिंग होती है जो छोटी सी दुकान है उसने खोली है अभी वो अपने आप को एडवर्टाइज करना चाहता है अगर वो सोशल मीडिया पे जाएगा तो सोशल मीडिया पे पूरे इंडिया में बैंगलोर के अंदर किसी ने छोटी सी दुकान खोली उसका उसका मैसेज अगर दिल्ली वाले के पास जाएगा उसका फायदा नहीं है लेकिन आपको देने पड़ते हैं मोटे इन सारे कामों के लिए अब आपकी दुकान छोटी है। आप अपने ही आदमी जो आपके एरिया के आसपास है उनको मैसेज पहुंचाना चाहते हैं। इट इस गोइंग टू बी वेरी वेरीरी चीप। लेकिन अगर कोई नेशनल लेवल पर काम कर रहा है। उसकी प्रीमियम सर्विज है, फीचर्स है जो आप ले सकते हैं। यानी कि बड़ा आदमी बड़ी कंपनी है उसके लिए अलग पैकेज है। छोटा जो आदमी है लोकल आदमी उसके लिए अलग पैकेज है। सस्टेनेबल है, स्केलेबल है। एंड जमीन से जुड़ा हुआ सशन निकाला है। क्यों? क्योंकि एक तो बड़े-बड़े जो वेंचर कैपिटल होते हैं उनसे पैसा नहीं लिया तो हमें ये नहीं है कि कोई फॉरेन इन्वेस्टर है एंड दे आर गोइंग टू पुल द शॉट्स नॉट एट ऑल। भारतीय कंपनी भारत में बैठकर भारतीयों का जो सोलशन है वो निकाल रही है। अब ये मैटर क्यों करता है? एक ऐप ने पूरी सोशल मीडिया मार्केट को हिला के रख देना है। जब ये चलेगा। एक तो हमारे पास 90 करोड़ इंटरनेट यूज़र्स है 2025 में। सभी के पास ऑलमोस्ट स्मार्टफोनस है और जो हमारा डिजिटल लिटरेसी है वो बढ़ता जा रहा है। हम अभी तक डिपेंडेंट थे फॉरेन के प्लेटफॉर्म्स के ऊपर लेकिन वो प्लेटफार्म भारतीय कम्युनिटी को और हमारे कल्चर को वो समझते ही नहीं है। इसलिए वो ना तो रीजनल लैंग्वेज के अंदर वो प्रॉपर्ली समझते हैं ना ही कोई एप्स उनके रीजनल लैंग्वेज के ऊपर है। एंड जो लोकल हमारे इश्यूज है उसके नीड्स को वो कभी पूरा करते ही नहीं। लेकिन निबुर्स ने क्या किया? डिजिटल इंडिपेंडेंस लेकर आए। स्वदेशी टेक्नोलॉजी है 100% जो भारत की बनी हुई है। एंड एक्चुअली इट वर्क्स और सशन डिजाइन किए कि हमें डिफरेंट डिफरेंट प्लेटफॉर्म्स की जरूरत क्या है? जब एक ही ऐप आपके सारे काम कर सकता है तो आपको 10 प्लेटफार्म बनाने की जरूरत क्या थी? क्योंकि उन्होंने सब जगह पे आपको ऐड भेजनी है। और हमने जो बनाया है ये कोई कॉपी पेस्ट नहीं किया वेस्टर्न मॉडल को। दुनिया का पहला ये लोकल ऐप है ज पर हम अलाइन कर रहे है कहां पर लोकल इश्यूज को प्लस गवर्नमेंट के जो ई गवर्नेंस के इनिशिएटिव है उसके साथ इसको अलाइन कर दिया गवर्नमेंट की कौन सी पॉलिसी है आपके एरिया में कौन से इश्यूज है हर चीज को आपके साथ कनेक्ट कर दिया यानी कि जो डिजिटल डिवाइड था वो खत्म कर दिया और जो लोकल सिटीजन लोकल बॉडी है वो अपने लोगों के साथ जैसे आपका म्युनिसिपल कॉरपोरेशन है आपका एमपी है आपका एमएलए है वो वो आपके इश्यूज के साथ वो इंटरेक्ट कर सकता है आपके साथ। इसलिए इसको बनाया गया है और ये है भारत की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की स्टोरी दोस्तों। लेकिन रियलिटी चेक भी मैं देता हूं आपको एक। अब बड़ा अच्छा लगता है कि यस हमने बना लिया।

 जब तक हम भारतीय इन चीजों को सपोर्ट नहीं करेंगे। ये चीजें नहीं चल सकती।ऐप इस कंसर्न इसके अंदर रेवोल्यूशन आने वाला है। और ये रेवोल्यूशन तब आएगा जब हम खुद इसको प्रमोट करेंगे। ये अर्ली स्टेज है। छोटी सी टीम है उनकी। जमीन से जुड़े हुए हैं। कमट कर रहे हैं ट्रिलियन डॉलर के जॉइंट्स के साथ। ऑड्स कुछ ज्यादा अच्छे नहीं है। लेकिन हर रेवोल्यूशन छोटे से शुरू होता है। जब Jio ने शुरू किया था पूरे टेलीकॉम इंडस्ट्री को उसने हिला के रख दिया। यूपीआई ने पूरा पेमेंट सिस्टम को ट्रांसफॉर्म कर दिया। और अब ये इंडियन ऐप है जैसे आराई है। उसने पूरे वर्ल्ड में तहलका मचाया हुआ है। और भाई चाइना में बसेस के पीछे ट्रक के पीछे यहां पर कहीं भी चले जाइए। आपको आरताई की जोहो है उसकी ऐड दिखती है चाइना के अंदर। मार्केट हमारे भारत की रेडी है। नीड है सिर्फ आपकी ताकि आप अपने ही कंट्री के ऐप को प्रमोट करना शुरू करें। मैंने नाम दे दिया था दोबारा से निबुs नाम थोड़ा डिफिकल्ट लगता है। ये लोकल ऐप है। आप खुद भी यूज़ करें। अपनी कम्युनिटी में भी बाकी लोगों को यूज़ करवाएं ताकि हम ये जो फॉरेन के एप्स है उससे हम बाहर निकल

जाएंगे। जहां पर एक ही चीज की जाती है जो टॉक्सिक जो डाटा है ग्लोबल वाला गंदे वाला वो हमें फील किया जा रहा है। अब देखिए उनको देख देख कर हमारे भारत की लड़कियां कैसे किस तरह की वीडियोस आजकल Instagram पे बना रही है।भारत के एप्स अपने बनने शुरू हो गए हैं। एंड द क्वेश्चन इज आर यू गोइंग टू बी अर्ली अडॉप्टर? पैसे बना सकते हैं आप? अभी तक तो आप पैसे देते रहे। अब आप पैसे बना सकते हैं। और जितनी जल्दी आप अडॉप्ट करेंगे उतना ही ज्यादा अच्छी तरह से हम अपने अपने नेबरहुड के साथ, अपने घर के कम्युनिटी के साथ हम उनके साथ जुड़ सकते हैं। और भारत के सोशल मीडिया रेवोल्यूशन को हम हम शुरू करवा सकते हैं। 

 मुझे नहीं लगता कि अभी iPhone पे आया है। जब आएगा तो उसके ऊपर भी मैं आपको इंडिकेशन दे दूंगा।

 जय हिंद


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गाजा में कंस्ट्रक्शन करनी है करोड़ों मुसलमान के लिए रास्ता खोल दिया जाएगा -जॉर्डन ओमान की यात्रा पर जा रहे हैं नरेंद्र मोदी

 


 पंचायत वैश्विक क्यों भारत को अब भारत की तरफ देख रही है। दरअसल एक समाचार आपको बता दें। जॉर्डन और ओमान की यात्रा पर जा रहे हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। संसद का शीतकालीन सत्र कल से शुरू हुआ है। यहां ड्रामे के अलावा और कुछ है नहीं। लेकिन सरकार भी उस्ताद है। पिछले 10 साल से हम देख रहे हैं इनके ड्रामे चलते रहते हैं संसद में। लेकिन सरकार अपने सारे काम भी करा लेती है उसी संसद से और यह ड्रामा करते ही रह जाते हैं। सदन से लेके चुनाव के मैदान तक में इनके ड्रामे ही चल रहे हैं। प्रधानमंत्री की ओमान और जॉर्डन यात्रा और गाजा ये क्या है कनेक्शन? हमारी भारतीय मीडिया इसको कवर नहीं कर रहा लेकिन चाइनीस मीडिया ने कवर किया है और जो बिजनेसमैन है वो बात कर रहे हैं कि आपने पूरा केक खा लिया। चाइना बोल रहा है मोदी जी ने केक खा लिया। अब केक कौन सा है? आप देखिए गाजा का बजाय बाजा इजराइल ने अमेरिका के साथ मिलकर। और हमेशा ही जब युद्ध होता है तो उसके बाद ये बोलते है रिहबिलिटेशन के लिए करोड़ों रुपए चाहिए। अरबों चाहिए बिलिय डॉलर चाहिए तो उसके लिए फिर ये पैसे इकटठा करते है यूनाइटेड नेश और कॉन्ट्रैक्ट किसको मिलते है हमेशा ही आपको अमेरिकन कंपनी जो बड़ी बड़ी कंपनिया होती है कंस्ट्रक्शन की वो सारे कॉन्ट्रैक्ट ले जाती है यानी कि युद्ध में भी पैसा बनाओ फिर युद्ध के बाद भी आप पोस्ट युद्ध भी आप पैसा बनाते है अब इसके अंदर चाइना घुसने की कोशिश कर रहा था पूरे गाजा को दोबारा से कंस्ट्रक्शन करनी है हम कर देंगे लेकिन मोदी जी ने बोला की भाई हमने तो आवास योजना में करोड़ों घर बना के दे दिए। क्या चाइना आवास योजना टाइप घर बना के दे सकता है?नहीं। और हमारे से सस्ता कोई बना नहीं सकता। उसका रीजन है जो हमारी मिनिमम वेजेस है भारत की वो है एक डॉलर पोजिंग एक घंटे की। चाइना की है 5 घंटे और 5 हमारे से 5 गुना ज्यादा और जो ये सारे

घर बनाए जा रहे हैं गाजा में उस सबसे ज्यादा आपकी लेबर कॉस्ट आती है। हमारे से सस्ता कोई है नहीं। पहली बात ये इसलिए हमारा भी प्लान है कि भारत पहली दूसरी बात जब गाजा में कंस्ट्रक्शन करने को जाएगा तो काफिर तो जाएगा नहीं सर वहां पर जाएगी एक ही कम्युनिटी क्योंकि वो फील एट होम करेगी चाइनीस गाजा में जाना नहीं चाहेंगे क्योंकि पहली बात ये है कि ये गाजा से प्यार तो करते है लेकिन चाइनीस कौन जाएगा वहां पर अपनी लाइफ को जोखिम में डालकर तो चाइनीस जाएगा नहीं काम करने के लिए इसलिए पैलेस्तीन के जो एंबेसडर्स है भारत में बैठे है उन्होंने मोदी जी को अप्रोच किया कि मोदी जी हमारी कंट्री की जो रिहबिलिटेशन है ये आप कर दीजिए। अब मैं इसका लिंक ओमान और जॉर्डन से  है।

अब गाजा में आपको क्या चाहिए? कंस्ट्रक्शन करनी है। अब कंस्ट्रक्शन करने के लिए आपको कुछ लोग चाहिए होते हैं। जैसे प्लमबर है, मिस्त्री है, मेसन है, ईंटे ढूंढने वाला है, ईंटें तोड़ने वाला है।फिर उसके बाद इलेक्ट्रिशियन प्लंबर ये सारे कौन सी कम्युनिटी भारत में काम करती है? ये सारे काम पहली बात ये दूसरा ये तो हो गया पैलेस्तीन के लोगों को ये लोगों की जरूरत है घर बनाने की अब हमास के लोग हैं उनको भी चाहिए कुछ उनको भी डॉक्टर चाहिए इंजीनियर चाहिए किसके लिए बॉम्ब बनाने के लिए रेजिन बनाने के लिए वो भी हमारे पास उपलब्ध है ट्रेनिंग ली हुई है तो हमें जिस चीज की गाजा को जरूरत है हमारे पास पर्याप्त है मुझे लगता है एक और भी चीज है  Palestine में जाएंगे तो वहां पर पलेन के झंडे उठाने वाले भी चाहिए। तो भारत में उनकी भी कमी नहीं है। जो पलेन के झंडे उठा उठाकर सड़कों पे जाते रहते हैं। रोते हैं उनके लिए। तो आपको रोने की जरूरत नहीं है।

आपके लिए मोदी जी ने सिस्टम बना दिया कि

टिकट है। भैया वहां पे जाके फील एट होम क्योंकि भारत में तो डर लग रहा है आपको। SIR हो गया है। अब आपने कल बताया कि डिटेंशन कैंप बन रहे हैं। यहां पर आपको जब इतना अनफ सेफ फील कर रहे हैं वहां पर अब फील एट होम है तो जाइए आपके लिए रास्ता खोल दिया जाएगा। इसलिए हमने बोल दिया रिहबिलिटेशन प्रोग्राम में वी विल हेल्प यू।अब ये पैसा कहां से आएगा? पैसा देगा यूनाइटेड नेशंस। मोदी जी बिना बिजनेस के काम नहीं करते। करोड़ों मुसलमान जिसको हम बोलते हैं कि चले आएंगे तो स्वच्छ भारत अभियान हो जाएगा। स्वच्छ भारत अभियान ऐसे नहीं होगा। उसके लिए एसआईआर और रिटेंशन कैंप बहुत है।लेकिन अब आएगा की यहां से ये सारे लायबिलिटी ऑफ द कंट्री ये जाएंगे गाजा में। पहली बात ये दूसरा पैसा आएगा यूनाइटेड नेशन से जो धंधे की बात है। अब इसका ओमान और जॉर्डन के साथ लिंक क्या है?अब देखिए हमारा एक आईक प्रोग्राम है जो हमारा मुंबई से जाकर इजराइल तक हमारा एक कॉरिडोर बनना है वो निकलता है यहां से जाएगा दुबई, दुबई से सऊदी अरेबिया, सऊदी अरेबिया से उसके बाद ओमान जॉर्डन इजराइल और उसके बाद यूरोप ये आपको रोड मालूम है लेकिन उसमें से एक प्रॉब्लम है कि जब ये इस रास्ते से जाएगा बीच में गाजा भी आता है अब जब गाजा के आप घर बना के देंगे तो आपके जो रूट है उसकी सिक्योरिटी भी आपको मिल जाएगी।अफगानिस्तान आपके लिए एक लायबिलिटी बन गया था। जब उन्होंने 15 अगस्त 2021 को अपनी इंडिपेंडेंस ली। आपने उनको घर बना के दिए। आपने उनको गेहूं उगा के दिया।आपने उनकी हर प्रॉब्लम का समाधान दिया। वो भी मुसलमान कंट्री है। तो जब आपका कोई अन्न खाता है या आपकी मदद लेता है तो थोड़ा सा

सिक्योरिटी भी प्रोवाइड होती है। सेकंडली गाजा के अंदर दो पोर्ट बनाए जा रहे हैं। एक पोर्ट नॉर्थ में है जो इजराइल अपने कंट्रोल में करेगा। एक साउथ में है जो गाजा के लोग अपने कंट्रोल में करेंगे। भारत ने पेशकश कर दी है कि जो साउथ में गाजा के लोगों के पास जो कंट्रोल में पोर्ट होगा हम उसे यूज़ करेंगे ताकि उसका भाड़ा उसका किराया हम आपको दे। आपके पास इनकम आनी शुरू होगी। अभी पोर्ट बना नहीं है।

दूसरा अब जब गाजा की सिक्योरिटी आएगी जब वहां पर शांति आनी शुरू होगी, कंस्ट्रक्शन शुरू हो जाएगा। इसके इस लग जाएंगे 10 साल। ये छोटा काम नहीं है। क्योंकि यूनाइटेड नेशंस की अभी रिपोर्ट आई है कि 69% गाजा का बाजा इजराइल ने बजा दिया है। पिछले दो साल में। एक भी बिल्डिंग वहां पर ठीक नहीं है। अब उसको तोड़ने के लिए आपको बंदे चाहिए, कबाड़ी चाहिए, उस से लोहा निकालने वाले चाहिए। ये काम कौन करता है? मुझे बताने की जरूरत नहीं है। हमने पूरा इंतजाम किया हुआ है। लास्टली इजराइल वहां पे बॉम्बिंग बंद कर देगा। ऐसा हो नहीं सकता। वो बॉम्ब करेगा। गाड़ियों के पास जाके बम गिरेंगे, पंक्चर लगेंगे। अब पंक्चर लगाने के लिए बंदे चाहिए। वो कौन जाएगा? तो आपने पूरा इंतजाम किया है कि आपको वहां पर डॉक्टर इंजीनियर सन ये सब के साथ साथ पंक्चर वाले भी आपको वहां पर भेजने के लिए आपको सिर्फ गुहार लगानी है जाइए गाजा में झंडे यहां पे उठाने की जरूरत नहीं है आपके लिए रास्ता हमने खोल दिया और उसके लिए आपको जाना पड़ेगा ओमान और जॉर्डन क्योंकि आपने आईक करना है हमारी नजर आईक के ऊपर है आईक की सिक्योरिटी के ऊपर है उसके लिए गाजा के लिए हैबिलिटेशन भारत से स्वच्छ

भारत अभियान ये सारा कुछ जोड़कर ये प्लान बन रहा है।की गाजा में तो चले गए आप सिक्योरिटी ले ली आपने घर भी बना लिया। अब ओमान और जॉर्डन ये आपकी मदद क्यों करेंगे? रीजन दो है। एक ये दो कंट्रीज ऐसी है ज पर पेलेस्टीन के लोग बहुत ज्यादा अपने गाजा से और वेस्ट बैंक से निकल कर वो इनके कंट्री में आकर बस गए। इनके लिए भी ये लोग एक प्रॉब्लम बने हुए है। क्योंकि ये जहा जाएंगे प्रॉब्लम बने हुए है। अब हम क्या कह रहे हैं कि इनके घर जब बनेंगे गाजा में तो ये अपने घरों में वापसआएंगे। देखिए अपना देश तो अपना देश होता है। जब भी कोई ओपोरर्चुनिटी आएगा तो जब गाजा में घर बनने शुरू होंगे तो ये लोग वहां से निकल के वापस अपने घरों को जाएंगे। तो उनकी प्रॉब्लम को भी हम सॉल्व कर रहे हैं।

वहां के जो किंग्स है उनकी मोदी जी के साथ बहुत अच्छी मित्रता है। उन्हें भाई बोलते है वो भी मोदी जी को भाई बोलते है। अब जा रहे है हम लोग दो चीजों के लिए। आपकी प्रॉब्लम गाजा के लोग है। उनको वापस भेजने का काम हम आपकी हेल्प करेंगे। आप हमारी हेल्प कीजिए की आईक को तेजी से पूरा कीजिए ताकि हमारी कनेक्टिविटी बनती है यूरोप के साथ। अब मजे की बात देखिए आईक हमारे लिए इतना इमोर्ट्ट है की हमारा जो ट्रांजिट टाइम है वो 40% कम हो जाएगा। यानी कि अगर आज 50 दिन लगते हैं तो वो 25- 30 दिनों में हमारा माल हमारे पास पहुंच जाएगा थ्रू रेल। सेकंड हम जो मेरिटरियन सी का रूट है जैसे रेड सी है अरेबियन सी में से SUEZ कैनाल से निकल के आते है वहां पर कौन बैठा है? हाउथ बैठे हैं। सोमालिया के पायरेट्स बैठे हैं। वहां पर ईरान हर रोज जो स्ट्रेट ऑफ हार्मोस है उसको बंद करने की धमकी देता है। हमने सब कुछ बाईपास करके अपनी जो एनर्जी सिक्योरिटी है, अपने ट्रेड का सिक्योरिटी है उसको भी हमने मैच कर लिया। हमारी जो ट्रांसपोर्ट कॉस्ट है उसको 30% कम कर लिया। टाइम को हमने कम करवा लिया। इसलिए आईक का पूरा होना हमारे लिए जरूरी है। लेकिन ये एग्रीमेंट तो हमने 2022 में 23 में कर लिया था। उसके ऊपर दो साल में कुछ काम हुआ नहीं। उसका रीजन था इजराइल और हमास का युद्ध। अब वो हमास का युद्ध जो है वो ऑलरेडी पीस प्रोसेस के अंदर चला गया है। वहां पर शांति आ रही है।शांति आने के कारण अब मोदी जी बिल्कुल परफेक्ट टाइम के ऊपर ओमान और इसका जॉर्डन का विजिट कर रहे हैं। उनकी सपोर्ट लेने के लिए, उनकी प्रॉब्लम्स को सॉल्व करने के लिए और भारत से स्वच्छ भारत अभियान शुरू करने के लिए। इतनी कड़ियां है जिसको करने के लिए मोदी जी जा रहे हैं।

अब आते हैं कि कॉस्ट या बेनिफिट। आप हमेशा बोलते हैं भारत का फायदा की। अब फायदा बता देता हूं कि जो गाजा के अंदर रिहबिलिटेशन है यूनाइटेड नेशंस का अभी अभी प्लान आया कि वहां पर घर बनाने के लिए 80 बिलियन डॉलर चाहिए 80 बिलियन डॉल ये छ सात लाख करोड़ हो गया जो आप लेके जाने की कोशिश कर रहे है पहली बात दूसरा जब हमारा रूट बनता है उसको बनने में दो या तीन साल लग जाएंगे क्योंकि रेल की लाइन लगनी है और आज की डेट में जो हमारी टेक्नोलॉजी है रेलवे लाइन डालने की वो बहुत ज्यादा फास्ट है क्यों बोल रहा हूं क्योंकि हमने अभी अभी जो डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर है। हमने नर्थ टू साउथ ऑलरेडी पंजाब से लेकर मुंबई तक बना लिया। फिर वेस्ट टू ईस्ट हमारी कनेक्टिविटी ऑलरेडी बन रही है। और दो तीन सालों में हमने ये करके दिखाया है। अरे जो हमने भारत में टेस्ट किया है। ये आपके सुनने वालों को पता होना चाहिए। जो फ्रेट कॉरिडोर है उसके अंदर इस तरह की टेक्नोलॉजी बनाई है कि दो कंटेनर एक के ऊपर रखकर हम ट्रांसपोर्ट कर सकते हैं ताकि तेजी से माल जाए। जो ये आईक का कॉरिडोर है जो रेलवे में से कंटेनर जाने है उस पर जब डबल डबल जाएंगे तो आप समझ सकते हैं कि टाइम कितना कम हो जाएगा कॉस्ट कितनी कम हो जाएगी और हमने पहले अपने घर में बनाया दो चीजें हमने आवास योजना में करोड़ों घर बना के दिए करोड़ों टॉयलेट बना के दिए ये आपने देखा है और बहुत कम समय में हमने करके दिखा दिया साथ में हमने फ्रेड कॉरिडोर बनाया वो भी हमने कम समय में बना के दे दिया अब दोनों का कनेक्ट कीजिए गाजा में घर चाहिए करोड़ों में हम बना के देंगे हमारे तेजी से कोई कर नहीं हमारे से कॉस्ट कम कोई दे नहीं सकता और फ्रेट कॉरिडोर भी हम पैरेलली दोनों काम पैरेलल चलेंगे। ये है हमारी खूबसूरती जिसके ऊपर काम चल रहा है। अब जो आईmक है इसका जो ट्रेड है वो ऑलमोस्ट 500 बिलियन डॉल का ट्रेड हम सिर्फ एक आईमेक के कॉरिडोर से करने वाले हैं। मैं आपको एक एक मिनट और लूंगा देन आई विल गिव द स्टेज टू यू।जब ये आईmक का ट्रेड बनेगा अभी बना नहीं है। हमारे जो जयशंकर जी है रिसेंटली वो साउथ ईस्ट के कंट्रीज में गए वियतनाम में मलेशिया में सब जगह और वहां उनको बोल दिया कि भ आपका जो ट्रेड है वो जाता है स्विस कैनाल से और से आपके माल की रिस्पसिबिलिटी हमारी हम आपका माल यूरोप तक पहुंचाने का वो हम जिम्मा लेते है हमारा आईक बन रहा है आप अपने जो हब है आपका ट्रेड का उसको हमारे हब के साथ आप जोड़ दीजिए अब क्या हो रहा है साउथ ईस्ट एशिया की कंट्रीज वो अपना माल माल हमारे चेन्नई पोर्ट पर भेज रही है। चेन्नई को आप कांडला

से या मुंबई से जोड़ रहे हैं। वहां से आईक्स से माल चला जाएगा यूरोप में। सारा कुछ आपने स्विस कैनाल सब कुछ आपने बायपास कर दिया। उनको अपने ऊपर डिपेंडेंट भी कर दिया है। अखंड भारत किसको बोलते हैं? जहां पर उनकी इकॉनमी आपके साथ रिलेटेड हो। उनकी मिलिट्री आपके साथ रिलेटेड हो। क्यों बोल रहा हो? बराबर कौन दे रहा है? हम दे रहे हैं। उनकी शिप्स के ऊपर सिक्योरिटी उनके पोर्ट्स के ऊपर कौन खड़ा है? हम खड़े है तो हमने इतना इंटेग्रेटेड लेवल पर काम किया है दिस इस दिस इस व्हाट आई कॉल एस की 360 डिग्री की जगह के ऊपर मोदी जी की नजर है इसलिए बोल रहा हूं कि आपने आईक बनाया बाद में है आपने पेज उसको पहले दिया इसी को बोलते है प्रॉपर बिजनेसमैन मोदी जी गुजराती है हमें मालूम था लेकिन अच्छे बिजनेसमैन भी है ये आज पता लगा जहां पे आपने पहले से कस्टमर तैयार है पेमेंट तैयार है और आईmक को लगाने बनाने के लिए आपके पैसे कौन से लग रहे हैं जीरो क्योंकि जब दुबई से सऊदी जाएगा तो पैसा लगाएगा दुबई। सऊदी से जब वो ओमान, जॉर्डन और वहां जाएगा तो पैसा लगेगा लगाएगा सऊदी और वहां से जब आगे जाएगा यूरोप में तो पैसा लगाएगा यूरोप। तो सिर्फ मलाई खाओ। तो ये काम हो रहा है जो आपके साथ मुझे शेयर करना था। अब आखरी चीज जब आपने ये ट्रेड रूट बनाया आईक का तो आपको सिक्योरिटी चाहिए। आपको मालूम है कि ये एक बहुत ही वोलेटाइल एरिया में से निकल के जाता है। दुबई में कुछ नहीं होगा और सऊदी में कुछ नहीं होगा। लेकिन उसके बाद जब गाजा के पास जाएगा एक तो आपको गाजा वाले उम्मीद है कि आपको वो सपोर्ट करेंगे क्योंकि आपने घर बना के दिए है। लेकिन पागलपन का तो कोई इलाज नहीं है। आपको मालूम है। तो अब उसको भी करने के लिए आपने ऑलरेडी ओमान के अंदर उनका जो पोर्ट है दुकम पोर्ट वहां पर अपनी शिप्स खड़ी करी हुई है। वहां पर 12 शिप्स खड़ी है हमारी। वो हमारी जो नेवी है वो ऑलरेडी ओमान की जॉर्डन की जो कंट्रीज है उनको सिक्योरिटी दे रही है। उनके साथ जॉइंटली हम एक्सरसाइज कर रहे हैं। सिक्योरिटी पहले ले ली। ऊपर से हाइफा पोर्ट है इजराइल में। अब वहां पर ऑलरेडी बैठे हैं। हमारी पोर्ट हमारे हाथ में है। शिप्स हमारी खड़ी है। तो आपने पहले सिक्योरिटी का काम किया है। उसके बाद आपने ट्रेड रूट का बात किया। ऊपर से जो उनकी प्रॉब्लम्स है उनको सॉल्व करने के लिए आपने आवास योजना ऑफर कर दी।पुराने जमाने में जब हमारे सनातनी जो राजे होते थे जब वो रूल करते थे वो सबसे पहले ट्रेड शुरू नहीं करते थे वो सबसे पहले ट्रेड रूट्स को सिक्योर करते थे अपनी बोट्स एंड शिप्स के थ्रू मोदी जी ने वही काम किया पहले वहां पर जाकर पोर्ट्स बनाए अपने कब्जे में किए वहां पर अपनी शिप्स खड़ी करी उसको करने के बाद जब सिक्योरिटी आ गई फिर हमने अपना ट्रेड रूट बनाया और ट्रेड रूट को खत्म करने के लिए जो जो रास्ते में प्लान बना रहे थे उनको घर बना के दे ये है टोटल प्लान। जी सुमित जी आपने जितने विस्तार से बताया और बिल्कुल एक्सक्लूसिव सही बताया तो भारतीय मीडिया में कहीं कोई चर्चा नहीं और दर्शकों मुझे भी ऐसा लगता है कि आपने यह पूरा जो मसला है यह पूरा जो जानकारी है पहली बार सुनी होगी।प्रधानमंत्री जी गुजराती तो हैं लेकिन वो बिजनेसमैन भी हैं। प्रधानमंत्री जी का एक व्यक्तव्य आपको याद दिलाता हूं। प्रधानमंत्री जी ने एक बार कहा था कि मैं गुजराती हूं और हमारे खून में व्यापार होता है। तो प्रधानमंत्री तो कह रहे हैं अच्छा दूसरा आपने कहा बड़ा इंपॉर्टेंट पॉइंट है। वो जो आपने एक बात कही कि साहब देखिए पहले हमने क्या किया? अपने घर में करोड़ों घर बनाए। अपने देश में करोड़ों घर बनाए। सक्सेसफुली बनाए। इंदिरा आवास की तरह नहीं बनाए कि उसमें कूड़ा कर्कट रखा जाता था। आज उन घरों में लोग रह रहे हैं। उनकी समृद्धि है। एक यह दूसरा आपने क्या कहा कि हमने पहले अपने यहां डबल डेकर जिसको कहते हैं वो ट्रैक भी बना दिया। उसको चलाया। अब उसको ले जा रहे हैं बाहर। हमने ऑपरेशन सिंदूर में पहले पाकिस्तान को निपटाया अपने इंडजीनस हथियार से और उसके बाद पूरे विश्व का रक्षा बाजार हमारे लिए खुला हुआ है। तो यह होता है कि पहले आप अपने प्रोडक्ट को चला के दिखाएं पूरी दुनिया को उसके सक्सेस रेट को बड़ी अच्छे तरीके से एस्टैब्लिश करें और उसके बाद फिर ले जाएं। तो आप यह बताइए यह इससे बड़ा कॉरपोरेट स्ट्रेटजी इससे बड़ा वाणिज्य का ज्ञान इससे बड़ी व्यापार की सफलता और क्या हो सकती है कि पहले हमारा एकदम हंसता खेलता घर है ले लो हम तुम्हारे लिए बना देंगे एक बात आपने कही आपने ये कहा कि भरभर के इनको भेज दिए जाएंगे यही जाएंगे सरिया गिट्टी बालू और भाई साहब आपने यह भी कहा कि हमास रुकने वाला है नहीं गाड़ियों के पास बम भी गिराएगा तो आप बताइए यह कहां फंसा रहे हैं अब्दुल को इस बहाने अब्दुल कहां फंसेगा और एक जानकारी और आपको मैं दे दूं आपके पास तो ये जानकारी होगा ही लेकिन वहां गाजा में पाकिस्तान भी पहुंच रहा है कटोरा लेके और कौन पहुंच रहा है पाकिस्तानी मिलिट्री और क्या करने पहुंच रही है पीस कीपिंग फोर्स आय हाय आय पाकिस्तान में पीस कीपिंग फोर्स लेकिन भारत की एक तरह से एक कंस्ट्रक्टिव एंट्री और दूसरी तरफ पाकिस्तान की भिखारी वाली एंट्री कि हम तुम्हारे यहां एटीएम गार्ड की नौकरी करने आ रहे हैं और उन्होंने कहा क्या है उन्होंने उन्होंने कहा देखो हम जाएंगे वहां पीस कीपिंग करेंगे लेकिन हमास से हम ये नहीं कहेंगे कि हमले बंद कर दो ये दोगलापन तो अब क्या ऐसा आपको लगता है कि फिलिस्तीन और हमास और फिलि इजराइल के बीच में जब भी चला है तो हमने बिल्कुल बैलेंस व्यवहार किया है तो इसको कहते हैं कि अमेरिका के सेंशन के बाद भी हम एक तरफ रशिया से तेल खरीद रहे हैं। दूसरी तरफ एक तरफ इजराइल भी हमारा पार्टनर है। दूसरी तरफ फिलिस्तीन को भी हम ठीक है ठीक है बच्चा हां ठीक है ये जो नया बैलेंसवादी और राष्ट्र प्रथम वाली नीति है आखिर कौन सी जमीन पर ये खड़ी है मतलब कई लोगों को ये चीज समझ में नहीं आएगी अब हमें याद आता है कि कहीं ये उस जमीन पर तो नहीं खड़ी है जब मोदी जी 2014 से 19 के अपने पहले टर्म में लगातार विश्व की यात्राएं करते थे मुझे याद आता है तमाम यह अब ब्याज मिल रहा है एक तरह से सूद हम खा रहे हैं। हमेशा बोला जाता है हिंदू हिंदू नेता हिंदू नेशनलिस्ट हिंदू फोबिया मोदी जी के लिए ये टर्म्स यूज़ की जाती है। जब आप वहां पर घर बनाएंगे गाजा में हमास के लोगों के लिए तो वो जो टर्मिनोलॉजी आपके लिए है उसको आप खत्म करते हैं। कई बार लोग बोलते हैं मैंने भी वीडियो बनाई है कि हमें बांग्लादेश को चावल भेजने की जरूरत क्या है? बिजली देने की जरूरत क्या है? हमें तुर्की में भूकंप आया वो हमेशा कश्मीर के ऊपर बोलते हैं हमें देने की जरूरत क्या है? ये नरेटिव होता है कि हिंदू फोबिया जो लगाया है हिंदू राष्ट्र राष्ट्रवादी है। भाई मुस्लिम राष्ट्रवादी हो सकता है। क्रिश्चियन राष्ट्रवादी हो सकता है। हिंदू राष्ट्रवादी क्यों नहीं हो सकता? क्योंकि आदत नहीं है। मंदिरों को ढक दिया जाता था क्योंकि मुसलमान का कोई शेख आया है इधर उनको आदत पड़ी है इसलिए आज हिंदू एक लीडर जो अनपोलजेटिकली मंदिरों में जाता है शिलान्यास करवाता है और जब झंडा लहराया जाता है तो हाथ कांपते हैं कि हे भगवान तूने मेरे हाथ से ये काम करवाया ये वो चीजें है जो दुनिया को तंग कर रही है तो आपने बैलेंसिंग एक्ट के लिए ये काम किया दूसरा एक काम और किया आपने मैंने शुरू में बताया आपको एक चीज आपने मुझे पूछा था कि आपको खबर कहां से मिली? अब खबर जो मिली है उसका राज भी बता देता हूं कि कैसे प्रति मिली है। चाइना का एक प्रोग्राम है जिसको पीआरआई बोलते हैं। बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव सबको मालूम है। इनके जो मसूबे थे कि पूरा सेंट्रल एशिया से यूरोप, यूरोप से मिडिल ईस्ट ये वहां पर पूरा कनेक्टिविटी करेंगे। जब हमारा आई वो प्रोजेक्ट चाइना खुद कर रहा है अपने पैसो से हम कर रहे हैं दूसरों के पैसो से ये दोनों में बड़ा फर्क है और जब हम करेंगे तो दुनिया के जो मोस्ट रिचेस्ट कंट्रीज है जो मिडिल ईस्ट में सऊदी अरेबिया यूएई वो मिलकर इन्वेस्टमेंट्स करने वाले है जॉर्डन है ओमान है ये सब लग रहे हैं उसके बीच में अब तो कतर ने बोल दिया तुर्किया ने बोल दिया मेरा भी कुछ हिस्सा रख लीजिए तो जब ये कंट्रीज हमारे साथ मिलकर काम करेंगे आपने चाइना के बीआरआई को भी आपने मात दे दिया।

क्यों? उनके ऊपर ट्रस्ट नहीं है। आप डेमोक्रेटिकली काम कर रहे हैं। तो आपने इतने मल्टीपल लेवल्स पे चीजों को आपने बैलेंस किया है की कुछ प्यारी बात नहीं है। अब आपने पाकिस्तान का नाम ले लिया तो हम उसके भी थोड़ा बता देते है आपको। देखिए पाकिस्तान में उन्होंने बोला कि हम वहां पर पीस कीपिंग फोर्स हम भेजने वाले हैं। उनकी थोड़ी सी इंग्लिश कमजोर होती है। पीस का मतलब होता है टुकड़ा ना कि शांति। तो वो गाजा में कुछ कुछ टुकड़ा अपने हाथों में दे देंगे क्योंकि टुकड़ों पर पलने वाले बेशक टुकड़ों की ही बात करते हैं।

इसलिए भारत में भी टुकड़ेटुकड़े गैंग ये सारे पाकिस्तानी है सारे जो टुकड़ों की बात करेंगे क्योंकि टुकड़ों पे पलने वाले ये लोग है अब ये जो वहां पे जा रहे है पीस कीपिंग कुछ पीस अपने हाथ में कर लेंगे पहली बात दूसरा वहां पे जब हमारे घर बनाए जाएंगे कॉलोनीस बनेगी तो उसके बाहर सिक्योरिटी गार्ड चाहिए तो जो पाकिस्तान की आर्मी है वो हमारी जो पूरी कॉलोनीस होंगी उसके बाहर दे विल बी स्टैंडिंग आउटसाइड इसलिए बोलते है की हमारी आर्मी आउटस्टैंडिंग है क्योंकि हमेशा हमारी बिल्डिंग के बाहर ही खड़े खड़े होने वाली ये कौम है तो आप समझिए बात को हम एक भी रुपया अपनी तरफ से गाजा में नहीं लगाएंगे दैट बेवकूफी हम ना कभी करी है मोदी जी ने ना करेंगे पैसा लगेगा यूनाइटेड नेश का हमने चाइना को टिमटा दिया हमने मिडिल ईस्ट को खुश कर दिया हमने गाजा के लोगों को घर बना के दे दिया उसके आसपास की जो कंट्रीज उनको हमने बचा लिया। अब एक चीज आपके दिमाग में आएगी कि सर इजराइल के साथ धोखा तो नहीं किया? हम हम इजराइल से हथियार ले रहे हैं। हम हथियार ले रहे हैं। हमारे जितने ड्रोंस है वो इजराइल से आते हैं। और हमास वाले लोग ये कभी भी अपने जो पागलपन है इनके अंदर वो बंद नहीं कर सकते। क्योंकि पागलपन सिखाया जाता है मदरसे में। मदरसे का नाम ही है मैड रस आ। मैड रस आ मतलब की पागलपन का रस आने दे। जो ये चीजें वहां पर सीख के आते है ये अंदर से नहीं जा सकती ये मामला है इसराइल का और हमास का ये दुनिया निपटेगी उस हमें जाने की जरूरत नहीं है हमारा काम है कि हम अपना रास्ता कैसे निकालते है और जो फार्मूला हम यहां पे बनाएंगे उस फार्मूले को भारत में भी इम्लीमेंट ऑलरेडी कर रहे है सक्सेसफुली कर रहे है पिछले 11 सालों से पूरे पागलपन को कंट्रोल करके रखा है हमने आप सोच के देखिए क्या आपने कभी सुना है कि यहां पे बम ब्लास्ट हो गए गोलियां चल गई या हमारे किसी चीज को खराब कर दिया नहीं हर चीज को कंट्रोल है। तो हम यहां पर 30 करोड़ जिहादियों को कंट्रोल कर सकते हैं जो इललीगली 1947 से यहां रह रहे हैं। तो हमास के अंदर तो सर 60-70 लाख है। सिर्फ उनको कंट्रोल करना हमारे लिए कौन सी कोई खास बात है।हमारी शिप्स खड़ी है। इजराइल हमारा मित्र है। अमेरिका हमें ऑलरेडी अपने लेटेस्ट हथियार दे रहा है।

वहां पर कुछ भिखारी जा रहे हैं टुकड़े लेने के लिए उनको टुकड़े इकट्ठे करने दीजिए। हम पूरा गाजा ही अपने कब्जे में करने वाले हैं। जी बिल्कुल साहब और अब समझ में आया मैंने जो वो लाइन बनाई थी कि सलमा को मिल गया बलमा और सलमा हमको छोड़ चली गाजा का बज गया बाजा और भारत अब वहां पर जाकर कह रहा है लाओ हमारे हिस्से का ख्वाजा हम मानवता के धनी है। हम विश्व गुरु हैं और विश्व गुरु के साथ ही हमारे पास 140 करोड़ आबादी है। भारत को इकोनॉमिक ग्रोथ भी करनी है। हमें

आगे भी बढ़ना है तो हमें माल भी चाहिए और हमें मानवता भी। तो यह दोनों काम एक साथ इसको कहते हैं हींग लगे ना फिटकरी और रंग इतना चोखा हो कि कई सारे लोगों के मुंह चोखे हो जाए।आपने 140 करोड़ गलत नंबर दे दिया। मोदी जी आलरेडी 130 हो चुके हैं।हम भारत प्रथम की बात करते हैं और इसीलिए मैं कहता हूं इन्हें औकात में लेकर रखना। औकात में लाकर रखना यही सही है। क्योंकि इन्हें आप किसी समंदर में नहीं फेंक सकते। इसलिए इन्हें कायदे से इनके लिए डिटेंशन कैप तक की इंतजाम आप करके रखिए। और दूसरा जो सबसे बड़ा इंतजाम हम करके रखते हैं दर्शकों और लगातार कर रहे हैं वो यह है 2014 से सांस्कृतिक क्रांति एक सरकार के बाद दूसरी दूसरे के बाद तीसरी तीसरे के बाद चौथी इनका काम अपने आप लग जाएगा। मदनी ने चिल्लाया है। जब बहुत कष्ट में होता है आदमी तो फिर वह खड़ा होता है और जिहाद करता है। लेकिन उसी समय योगी आदित्यनाथ जो भारत की राजनीति के भविष्य के रूप में देखे जा रहे हैं वो कहते हैं गजवाए हिंदोगे तो जहन्नुम का टिकट रसीद कराएंगे। तो ये कहते हैं खट्टा और मीठा एक साथ चल रहा है।



भारत का अपना सोशल मीडिया ऐप -Nyburs:Hyper Local Social App

भारत का अपना सोशल मीडिया ऐप -Nyburs:Hyper Local Social App
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भारत का अपना सोशल मीडिया ऐप -Nyburs:Hyper Local Social App
भारत का अपना सोशल मीडिया ऐप -Nyburs:Hyper Local Social App

 


मोदी जी ने एक बार अपील किया था कि भारत के पास अपना सोशल मीडिया का प्लेटफार्म होना चाहिए। मोदी जी ने अनाउंस किया और किसी ने बैंगलोर में बैठकर इसको हकीकत में उन्होंने कन्वर्ट भी कर दिया। ये है भारत का


Nyburs:Hyper Social Local App

आपने सोशल मीडिया के एप्स को यूज़ किया होगा। उसके अंदर आपको Instagram, Twitter, Facebook, WhatsApp के ग्रुप्स यह सारे आपको अलग-अलग से नए एप्स लेने पड़ते हैं। लेकिन यह एक ऐसा ऐप है जिसके अंदर ये सारे के सारी चीजें एक ही ऐप के अंदर डाल दी। यह है भारत का आंसर और इसके अंदरआप जो अपनी पोस्ट करते हैं या फ्रेंड्स के साथ अगर आप इनको रेकमेंड करते हैं तो आपको पैसे भी मिलते हैं। यहां तक कि जैसे YouTube के अंदर आप वीडियो डाल सकते हैं। इसके अंदर भी वो फैसिलिटी है। 

अब आते हैं कि ये जो ऐप है ये बाकी ऐप से डिफरेंट क्यों है?पहली बात ये है जैसे अपने जितने भी सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म्स है वो माने जाते हैं कि हमें ये तो मालूम है कि ईलॉन मस्क ने क्या खाया? राहुल गांधी ने क्या खाया वो उसके उसके घर में क्या हो रहा है लेकिन हमें अपने घर में क्या हो रहा है या हमारे जो नेबर्स हैं वहां पर क्या हो रहा है हमें पता ही नहीं है ये एक्सीडेंट नहीं है ये डिजाइन है इनका ये डिजाइन है इनका कि हम दुनिया से कनेक्ट हो लेकिन हम अपने ही घर में हम डिस्कनेक्ट हो जाए नाउ ये जो छोटी सी कंपनी है बैंगलोर के अंदर उन्होंने स्टार्टअप शुरू कर दिया स्टार्टअप ये शुरू किया है जो सब कुछ चेंज कर देगा समथिंग वि इस गोइंग टू फ्लिप सोशल मीडिया कंप्लीटली अपसाइड डाउन।सोशल मीडिया आपको दुनिया से कनेक्ट करता है। अपने आप से डिस्कनेक्ट करता है। इस इसको समझा और उन्होंने ऐप बना  दिया जहां पर आप सिंपली डाउनलोड कर सकते हैं। और उसके बाद आप अपने लोगों के साथ कनेक्ट कर सकते हैं। अपने लोगों का मतलब क्या है? जो आपके घर के आसपास रहते हैं। Facebook के ऊपर आपके पास हो सकता है 5000 दोस्त हो। लेकिन उनका पता है आपको उसकी लाइफ में क्या चल रहा है। लेकिन आपके नेबर बिल्कुल साथ में जो जिसकी दीवार आपके घर के साथ लगती है उसके बारे में आपको पता नहीं है। आपके घर के पास एक नया रेस्टोरेंट खुल गया। एक नया कैफे खुल गया। आपको उसके बारे में पता नहीं है। लेकिन ग्लोबल कंटेंट आपको मालूम है क्योंकि उन्होंने इस तरह बनाया है इसको कंटेंट को ताकि वो पैसे बनाए। आप डाटा कंज्यूम कर रहे हैं। पैसा वो बना रहे हैं।

 अब आपकी जो कम्युनिटी है वो आपके साथ कनेक्ट कर सकती है ना कि दुनिया में क्या हो रहा है उसको कनेक्ट करने की बजाय। आपको डिस्कनेक्ट करने के लिए आप ही के लोगों के लिए आप ही आप ही के लोगों के साथ। अब जो मॉडर्न सोशल मीडिया का प्लेटफार्म है भारत ने उसको उल्टा कर दिया। आपको आइसोलेट करने की कोशिश करनी थी।


अब हमारा जो भारत का अपना डाटा है अपना जो सोशल मीडिया ऐप है वो आपको अपने आप से वो कनेक्ट करेगा सॉल्व करेगा आपकी बेसिक प्रॉब्लम्स को क्यों ये जो ऐप है ये नवीन शर्मा हिंदू सनातनी है विशाल चौधरी नवीन शर्मा दो नाम जिन्होंने इसको इन्होंने शुरू किया पिच क्या थी पिच इनकी ये है मेड फॉर इंडिया बाय इंडिया टू इंडिया अब इसका मतलब क्या है फिर Twitter आपको कनेक्ट करता है दुनिया से। इन्होंने बोल दिया आपकी जो लोकल कम्युनिटी है कॉलोनी है पहले वो आपके साथ कनेक्ट करेंगे। Instagram आपको दिखाएगा इनफ्लुएंसर्स। नेबर्स आपको दिखाएगा आपकी लोकालिटी में कौन सा इनफ्लुएंसरर है। आपका इशू क्या है आपके एरिया का वो आपको दिखाई देगा। इसको बोलते हैं लाइफ हाइपर लोकल

सोशल नेटवर्किंग। अब ये सोशल नेटवर्किंग क्या होती डिवोर्स का जो ये सिस्टम है वो है एक ही सिंपल सिस्टम सर्कल आपके घर के पास और जो चैनल है वो भी आपके घर के पास यानी कि आपके नेबरहुड में क्या हो रहा है आपको वो दिखेगा एल्गोरिदम यहां पर यूज़ नहीं हो रहा उनको लोकेशन मालूम है आपकी आपकी लोकेशन के हिसाब से आपके लोकेशन बेस्ड जो आपके घर के आसपास है उसी के फीड मिलेंगे आपको दूसरे एरिया में वो क्या हो रहा है आपको मतलब नहीं है सपोजिंग साउथ दिल्ली में आप रहते हैं। वहां पर एक रेस्टोरेंट खुला तो साउथ दिल्ली के जितने रेजिडेंट्स हैं जो लोग वहां पर रहते हैं उनको उसका मैसेज पहुंचेगा कि आपके घर के आसपास दो चार किलोमीटर में ये नया रेस्टोरेंट खुला है। आप पटना में रहते हैं। वार्ड नंबर 12 है आपका। वहां पर कोई इंफ्रास्ट्रक्चर का नया प्रोजेक्ट लगने वाला है। जो वार्ड नंबर 12 में जो लोग रहते हैं उस उनको अपने वार्ड की हर इंफॉर्मेशन उनके पास पहुंचेगी। दोस्तों अब आप सोच के देखिए अब आप कम्युनिटीज को ऑर्गेनाइज कर पाएंगे मोबलाइज कर पाएंगे आपका सड़क में आपकी जो सड़क है वो गंदी पड़ी है वहां पर कोई सफाई करने नहीं आया है आप वहां पर ऐप में डाल सकते है आपके एरिया का आदमी उसको देखेगा आप कनेक्ट कर सकते है अपने लोकल मंत्रियों के साथ वोटर रजिस्ट्रेशन है आपके एरिया में कब हो रही है कब नहीं हो रही आपको पता लगेगा यानि की लोकल इश्यूज आपके घर के आसपास के वो सारे आपके सामने फिंगर टिप्स के ऊपर होंगे इसलिए इसको बनाया गया है इसको सुपर लोकल हाइपर लूप बोलते हैं और ये स्वदेशी ऐप है जहां पर एक तो ये चीज है कि आप कनेक्ट करेंगे अपने ही लोगो के साथ रियल वर्ल्ड के अंदर क्या एक्शन हो रहा है वो आपको पता लगेगा बट सबसे बड़ी चीज है आपको अपनी लैंग्वेज में ये ऐप आप चला सकते है 12  लैंग्वेज इन्होंने ऑलरेडी डाल दिए मैं कोई इनका एफिलिएट नहीं हूं आपको लगेगा मुझे सर इसमें पैसे मिलने वाले है जनरली सनातनियों को सबसे बड़ी प्रॉब्लम यही आती है नहीं इसमें ये सिर्फ इसलिए कि भारत का ऐप है। मोदी जी खुद इसको प्रमोट कर रहे हैं।दूसरा जो डाटा है वो भारत में रहेगा। यानी कि सर्वर भारत में है। कोई अमेरिकन कंपनी हमारे डाटा को यूज़ करके हमें मार्केटिंग का प्रोडक्ट वो बेच नहीं पाएगी। एंड लास्टली यू कैन अर्न मनी फ्रॉम दिस ऐप। वो कैसे? इन्होंने क्या किया? जब इसको ल्च किया इसके अंदर कांटेस्ट रखे हैं। हर रोज का कांटेस्ट है जहां पर आपको कैश मिलता है। वीकली चैलेंजेस है। आप लाइव स्ट्रीमिंग कर सकते हैं। लाइव स्ट्रीमिंग के आपको पैसे मिलते हैं। अगर आप रेफर करते हैं किसी को उसका बोनस भी है। यानी कि आप अपनी कम्युनिटी में एंगेज करेंगे और उस एंगेजमेंट का आपको रिवॉर्ड भी मिलेगा। बिजनेस मॉडल बड़ा ही सिंपल है और जीनियस भी है। वो कैसे? भारत का जो डिजिटल एडवरटाइजिंग का मार्केट है वो डेढ़ लाख करोड़ रुपया है 2025 का निबोर्स ने क्या किया वो जो लोकल बेस्ड एडवरटाइजिंग होती है जो छोटी सी दुकान है उसने खोली है अभी वो अपने आप को एडवर्टाइज करना चाहता है अगर वो सोशल मीडिया पे जाएगा तो सोशल मीडिया पे पूरे इंडिया में बैंगलोर के अंदर किसी ने छोटी सी दुकान खोली उसका उसका मैसेज अगर दिल्ली वाले के पास जाएगा उसका फायदा नहीं है लेकिन आपको देने पड़ते हैं मोटे इन सारे कामों के लिए अब आपकी दुकान छोटी है। आप अपने ही आदमी जो आपके एरिया के आसपास है उनको मैसेज पहुंचाना चाहते हैं। इट इस गोइंग टू बी वेरी वेरीरी चीप। लेकिन अगर कोई नेशनल लेवल पर काम कर रहा है। उसकी प्रीमियम सर्विज है, फीचर्स है जो आप ले सकते हैं। यानी कि बड़ा आदमी बड़ी कंपनी है उसके लिए अलग पैकेज है। छोटा जो आदमी है लोकल आदमी उसके लिए अलग पैकेज है। सस्टेनेबल है, स्केलेबल है। एंड जमीन से जुड़ा हुआ सशन निकाला है। क्यों? क्योंकि एक तो बड़े-बड़े जो वेंचर कैपिटल होते हैं उनसे पैसा नहीं लिया तो हमें ये नहीं है कि कोई फॉरेन इन्वेस्टर है एंड दे आर गोइंग टू पुल द शॉट्स नॉट एट ऑल। भारतीय कंपनी भारत में बैठकर भारतीयों का जो सोलशन है वो निकाल रही है। अब ये मैटर क्यों करता है? एक ऐप ने पूरी सोशल मीडिया मार्केट को हिला के रख देना है। जब ये चलेगा। एक तो हमारे पास 90 करोड़ इंटरनेट यूज़र्स है 2025 में। सभी के पास ऑलमोस्ट स्मार्टफोनस है और जो हमारा डिजिटल लिटरेसी है वो बढ़ता जा रहा है। हम अभी तक डिपेंडेंट थे फॉरेन के प्लेटफॉर्म्स के ऊपर लेकिन वो प्लेटफार्म भारतीय कम्युनिटी को और हमारे कल्चर को वो समझते ही नहीं है। इसलिए वो ना तो रीजनल लैंग्वेज के अंदर वो प्रॉपर्ली समझते हैं ना ही कोई एप्स उनके रीजनल लैंग्वेज के ऊपर है। एंड जो लोकल हमारे इश्यूज है उसके नीड्स को वो कभी पूरा करते ही नहीं। लेकिन निबुर्स ने क्या किया? डिजिटल इंडिपेंडेंस लेकर आए। स्वदेशी टेक्नोलॉजी है 100% जो भारत की बनी हुई है। एंड एक्चुअली इट वर्क्स और सशन डिजाइन किए कि हमें डिफरेंट डिफरेंट प्लेटफॉर्म्स की जरूरत क्या है? जब एक ही ऐप आपके सारे काम कर सकता है तो आपको 10 प्लेटफार्म बनाने की जरूरत क्या थी? क्योंकि उन्होंने सब जगह पे आपको ऐड भेजनी है। और हमने जो बनाया है ये कोई कॉपी पेस्ट नहीं किया वेस्टर्न मॉडल को। दुनिया का पहला ये लोकल ऐप है ज पर हम अलाइन कर रहे है कहां पर लोकल इश्यूज को प्लस गवर्नमेंट के जो ई गवर्नेंस के इनिशिएटिव है उसके साथ इसको अलाइन कर दिया गवर्नमेंट की कौन सी पॉलिसी है आपके एरिया में कौन से इश्यूज है हर चीज को आपके साथ कनेक्ट कर दिया यानी कि जो डिजिटल डिवाइड था वो खत्म कर दिया और जो लोकल सिटीजन लोकल बॉडी है वो अपने लोगों के साथ जैसे आपका म्युनिसिपल कॉरपोरेशन है आपका एमपी है आपका एमएलए है वो वो आपके इश्यूज के साथ वो इंटरेक्ट कर सकता है आपके साथ। इसलिए इसको बनाया गया है और ये है भारत की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की स्टोरी दोस्तों। लेकिन रियलिटी चेक भी मैं देता हूं आपको एक। अब बड़ा अच्छा लगता है कि यस हमने बना लिया।

 जब तक हम भारतीय इन चीजों को सपोर्ट नहीं करेंगे। ये चीजें नहीं चल सकती।ऐप इस कंसर्न इसके अंदर रेवोल्यूशन आने वाला है। और ये रेवोल्यूशन तब आएगा जब हम खुद इसको प्रमोट करेंगे। ये अर्ली स्टेज है। छोटी सी टीम है उनकी। जमीन से जुड़े हुए हैं। कमट कर रहे हैं ट्रिलियन डॉलर के जॉइंट्स के साथ। ऑड्स कुछ ज्यादा अच्छे नहीं है। लेकिन हर रेवोल्यूशन छोटे से शुरू होता है। जब Jio ने शुरू किया था पूरे टेलीकॉम इंडस्ट्री को उसने हिला के रख दिया। यूपीआई ने पूरा पेमेंट सिस्टम को ट्रांसफॉर्म कर दिया। और अब ये इंडियन ऐप है जैसे आराई है। उसने पूरे वर्ल्ड में तहलका मचाया हुआ है। और भाई चाइना में बसेस के पीछे ट्रक के पीछे यहां पर कहीं भी चले जाइए। आपको आरताई की जोहो है उसकी ऐड दिखती है चाइना के अंदर। मार्केट हमारे भारत की रेडी है। नीड है सिर्फ आपकी ताकि आप अपने ही कंट्री के ऐप को प्रमोट करना शुरू करें। मैंने नाम दे दिया था दोबारा से निबुs नाम थोड़ा डिफिकल्ट लगता है। ये लोकल ऐप है। आप खुद भी यूज़ करें। अपनी कम्युनिटी में भी बाकी लोगों को यूज़ करवाएं ताकि हम ये जो फॉरेन के एप्स है उससे हम बाहर निकल

जाएंगे। जहां पर एक ही चीज की जाती है जो टॉक्सिक जो डाटा है ग्लोबल वाला गंदे वाला वो हमें फील किया जा रहा है। अब देखिए उनको देख देख कर हमारे भारत की लड़कियां कैसे किस तरह की वीडियोस आजकल Instagram पे बना रही है।भारत के एप्स अपने बनने शुरू हो गए हैं। एंड द क्वेश्चन इज आर यू गोइंग टू बी अर्ली अडॉप्टर? पैसे बना सकते हैं आप? अभी तक तो आप पैसे देते रहे। अब आप पैसे बना सकते हैं। और जितनी जल्दी आप अडॉप्ट करेंगे उतना ही ज्यादा अच्छी तरह से हम अपने अपने नेबरहुड के साथ, अपने घर के कम्युनिटी के साथ हम उनके साथ जुड़ सकते हैं। और भारत के सोशल मीडिया रेवोल्यूशन को हम हम शुरू करवा सकते हैं। 

 मुझे नहीं लगता कि अभी iPhone पे आया है। जब आएगा तो उसके ऊपर भी मैं आपको इंडिकेशन दे दूंगा।

 जय हिंद


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भारत का अपना सोशल मीडिया ऐप -Nyburs:Hyper Local Social App

भारत का अपना सोशल मीडिया ऐप -Nyburs:Hyper Local Social App
भारत का अपना सोशल मीडिया ऐप -Nyburs:Hyper Local Social App
भारत का अपना सोशल मीडिया ऐप -Nyburs:Hyper Local Social App

 


मोदी जी ने एक बार अपील किया था कि भारत के पास अपना सोशल मीडिया का प्लेटफार्म होना चाहिए। मोदी जी ने अनाउंस किया और किसी ने बैंगलोर में बैठकर इसको हकीकत में उन्होंने कन्वर्ट भी कर दिया। ये है भारत का


Nyburs:Hyper Social Local App

आपने सोशल मीडिया के एप्स को यूज़ किया होगा। उसके अंदर आपको Instagram, Twitter, Facebook, WhatsApp के ग्रुप्स यह सारे आपको अलग-अलग से नए एप्स लेने पड़ते हैं। लेकिन यह एक ऐसा ऐप है जिसके अंदर ये सारे के सारी चीजें एक ही ऐप के अंदर डाल दी। यह है भारत का आंसर और इसके अंदरआप जो अपनी पोस्ट करते हैं या फ्रेंड्स के साथ अगर आप इनको रेकमेंड करते हैं तो आपको पैसे भी मिलते हैं। यहां तक कि जैसे YouTube के अंदर आप वीडियो डाल सकते हैं। इसके अंदर भी वो फैसिलिटी है। 

अब आते हैं कि ये जो ऐप है ये बाकी ऐप से डिफरेंट क्यों है?पहली बात ये है जैसे अपने जितने भी सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म्स है वो माने जाते हैं कि हमें ये तो मालूम है कि ईलॉन मस्क ने क्या खाया? राहुल गांधी ने क्या खाया वो उसके उसके घर में क्या हो रहा है लेकिन हमें अपने घर में क्या हो रहा है या हमारे जो नेबर्स हैं वहां पर क्या हो रहा है हमें पता ही नहीं है ये एक्सीडेंट नहीं है ये डिजाइन है इनका ये डिजाइन है इनका कि हम दुनिया से कनेक्ट हो लेकिन हम अपने ही घर में हम डिस्कनेक्ट हो जाए नाउ ये जो छोटी सी कंपनी है बैंगलोर के अंदर उन्होंने स्टार्टअप शुरू कर दिया स्टार्टअप ये शुरू किया है जो सब कुछ चेंज कर देगा समथिंग वि इस गोइंग टू फ्लिप सोशल मीडिया कंप्लीटली अपसाइड डाउन।सोशल मीडिया आपको दुनिया से कनेक्ट करता है। अपने आप से डिस्कनेक्ट करता है। इस इसको समझा और उन्होंने ऐप बना  दिया जहां पर आप सिंपली डाउनलोड कर सकते हैं। और उसके बाद आप अपने लोगों के साथ कनेक्ट कर सकते हैं। अपने लोगों का मतलब क्या है? जो आपके घर के आसपास रहते हैं। Facebook के ऊपर आपके पास हो सकता है 5000 दोस्त हो। लेकिन उनका पता है आपको उसकी लाइफ में क्या चल रहा है। लेकिन आपके नेबर बिल्कुल साथ में जो जिसकी दीवार आपके घर के साथ लगती है उसके बारे में आपको पता नहीं है। आपके घर के पास एक नया रेस्टोरेंट खुल गया। एक नया कैफे खुल गया। आपको उसके बारे में पता नहीं है। लेकिन ग्लोबल कंटेंट आपको मालूम है क्योंकि उन्होंने इस तरह बनाया है इसको कंटेंट को ताकि वो पैसे बनाए। आप डाटा कंज्यूम कर रहे हैं। पैसा वो बना रहे हैं।

 अब आपकी जो कम्युनिटी है वो आपके साथ कनेक्ट कर सकती है ना कि दुनिया में क्या हो रहा है उसको कनेक्ट करने की बजाय। आपको डिस्कनेक्ट करने के लिए आप ही के लोगों के लिए आप ही आप ही के लोगों के साथ। अब जो मॉडर्न सोशल मीडिया का प्लेटफार्म है भारत ने उसको उल्टा कर दिया। आपको आइसोलेट करने की कोशिश करनी थी।


अब हमारा जो भारत का अपना डाटा है अपना जो सोशल मीडिया ऐप है वो आपको अपने आप से वो कनेक्ट करेगा सॉल्व करेगा आपकी बेसिक प्रॉब्लम्स को क्यों ये जो ऐप है ये नवीन शर्मा हिंदू सनातनी है विशाल चौधरी नवीन शर्मा दो नाम जिन्होंने इसको इन्होंने शुरू किया पिच क्या थी पिच इनकी ये है मेड फॉर इंडिया बाय इंडिया टू इंडिया अब इसका मतलब क्या है फिर Twitter आपको कनेक्ट करता है दुनिया से। इन्होंने बोल दिया आपकी जो लोकल कम्युनिटी है कॉलोनी है पहले वो आपके साथ कनेक्ट करेंगे। Instagram आपको दिखाएगा इनफ्लुएंसर्स। नेबर्स आपको दिखाएगा आपकी लोकालिटी में कौन सा इनफ्लुएंसरर है। आपका इशू क्या है आपके एरिया का वो आपको दिखाई देगा। इसको बोलते हैं लाइफ हाइपर लोकल

सोशल नेटवर्किंग। अब ये सोशल नेटवर्किंग क्या होती डिवोर्स का जो ये सिस्टम है वो है एक ही सिंपल सिस्टम सर्कल आपके घर के पास और जो चैनल है वो भी आपके घर के पास यानी कि आपके नेबरहुड में क्या हो रहा है आपको वो दिखेगा एल्गोरिदम यहां पर यूज़ नहीं हो रहा उनको लोकेशन मालूम है आपकी आपकी लोकेशन के हिसाब से आपके लोकेशन बेस्ड जो आपके घर के आसपास है उसी के फीड मिलेंगे आपको दूसरे एरिया में वो क्या हो रहा है आपको मतलब नहीं है सपोजिंग साउथ दिल्ली में आप रहते हैं। वहां पर एक रेस्टोरेंट खुला तो साउथ दिल्ली के जितने रेजिडेंट्स हैं जो लोग वहां पर रहते हैं उनको उसका मैसेज पहुंचेगा कि आपके घर के आसपास दो चार किलोमीटर में ये नया रेस्टोरेंट खुला है। आप पटना में रहते हैं। वार्ड नंबर 12 है आपका। वहां पर कोई इंफ्रास्ट्रक्चर का नया प्रोजेक्ट लगने वाला है। जो वार्ड नंबर 12 में जो लोग रहते हैं उस उनको अपने वार्ड की हर इंफॉर्मेशन उनके पास पहुंचेगी। दोस्तों अब आप सोच के देखिए अब आप कम्युनिटीज को ऑर्गेनाइज कर पाएंगे मोबलाइज कर पाएंगे आपका सड़क में आपकी जो सड़क है वो गंदी पड़ी है वहां पर कोई सफाई करने नहीं आया है आप वहां पर ऐप में डाल सकते है आपके एरिया का आदमी उसको देखेगा आप कनेक्ट कर सकते है अपने लोकल मंत्रियों के साथ वोटर रजिस्ट्रेशन है आपके एरिया में कब हो रही है कब नहीं हो रही आपको पता लगेगा यानि की लोकल इश्यूज आपके घर के आसपास के वो सारे आपके सामने फिंगर टिप्स के ऊपर होंगे इसलिए इसको बनाया गया है इसको सुपर लोकल हाइपर लूप बोलते हैं और ये स्वदेशी ऐप है जहां पर एक तो ये चीज है कि आप कनेक्ट करेंगे अपने ही लोगो के साथ रियल वर्ल्ड के अंदर क्या एक्शन हो रहा है वो आपको पता लगेगा बट सबसे बड़ी चीज है आपको अपनी लैंग्वेज में ये ऐप आप चला सकते है 12  लैंग्वेज इन्होंने ऑलरेडी डाल दिए मैं कोई इनका एफिलिएट नहीं हूं आपको लगेगा मुझे सर इसमें पैसे मिलने वाले है जनरली सनातनियों को सबसे बड़ी प्रॉब्लम यही आती है नहीं इसमें ये सिर्फ इसलिए कि भारत का ऐप है। मोदी जी खुद इसको प्रमोट कर रहे हैं।दूसरा जो डाटा है वो भारत में रहेगा। यानी कि सर्वर भारत में है। कोई अमेरिकन कंपनी हमारे डाटा को यूज़ करके हमें मार्केटिंग का प्रोडक्ट वो बेच नहीं पाएगी। एंड लास्टली यू कैन अर्न मनी फ्रॉम दिस ऐप। वो कैसे? इन्होंने क्या किया? जब इसको ल्च किया इसके अंदर कांटेस्ट रखे हैं। हर रोज का कांटेस्ट है जहां पर आपको कैश मिलता है। वीकली चैलेंजेस है। आप लाइव स्ट्रीमिंग कर सकते हैं। लाइव स्ट्रीमिंग के आपको पैसे मिलते हैं। अगर आप रेफर करते हैं किसी को उसका बोनस भी है। यानी कि आप अपनी कम्युनिटी में एंगेज करेंगे और उस एंगेजमेंट का आपको रिवॉर्ड भी मिलेगा। बिजनेस मॉडल बड़ा ही सिंपल है और जीनियस भी है। वो कैसे? भारत का जो डिजिटल एडवरटाइजिंग का मार्केट है वो डेढ़ लाख करोड़ रुपया है 2025 का निबोर्स ने क्या किया वो जो लोकल बेस्ड एडवरटाइजिंग होती है जो छोटी सी दुकान है उसने खोली है अभी वो अपने आप को एडवर्टाइज करना चाहता है अगर वो सोशल मीडिया पे जाएगा तो सोशल मीडिया पे पूरे इंडिया में बैंगलोर के अंदर किसी ने छोटी सी दुकान खोली उसका उसका मैसेज अगर दिल्ली वाले के पास जाएगा उसका फायदा नहीं है लेकिन आपको देने पड़ते हैं मोटे इन सारे कामों के लिए अब आपकी दुकान छोटी है। आप अपने ही आदमी जो आपके एरिया के आसपास है उनको मैसेज पहुंचाना चाहते हैं। इट इस गोइंग टू बी वेरी वेरीरी चीप। लेकिन अगर कोई नेशनल लेवल पर काम कर रहा है। उसकी प्रीमियम सर्विज है, फीचर्स है जो आप ले सकते हैं। यानी कि बड़ा आदमी बड़ी कंपनी है उसके लिए अलग पैकेज है। छोटा जो आदमी है लोकल आदमी उसके लिए अलग पैकेज है। सस्टेनेबल है, स्केलेबल है। एंड जमीन से जुड़ा हुआ सशन निकाला है। क्यों? क्योंकि एक तो बड़े-बड़े जो वेंचर कैपिटल होते हैं उनसे पैसा नहीं लिया तो हमें ये नहीं है कि कोई फॉरेन इन्वेस्टर है एंड दे आर गोइंग टू पुल द शॉट्स नॉट एट ऑल। भारतीय कंपनी भारत में बैठकर भारतीयों का जो सोलशन है वो निकाल रही है। अब ये मैटर क्यों करता है? एक ऐप ने पूरी सोशल मीडिया मार्केट को हिला के रख देना है। जब ये चलेगा। एक तो हमारे पास 90 करोड़ इंटरनेट यूज़र्स है 2025 में। सभी के पास ऑलमोस्ट स्मार्टफोनस है और जो हमारा डिजिटल लिटरेसी है वो बढ़ता जा रहा है। हम अभी तक डिपेंडेंट थे फॉरेन के प्लेटफॉर्म्स के ऊपर लेकिन वो प्लेटफार्म भारतीय कम्युनिटी को और हमारे कल्चर को वो समझते ही नहीं है। इसलिए वो ना तो रीजनल लैंग्वेज के अंदर वो प्रॉपर्ली समझते हैं ना ही कोई एप्स उनके रीजनल लैंग्वेज के ऊपर है। एंड जो लोकल हमारे इश्यूज है उसके नीड्स को वो कभी पूरा करते ही नहीं। लेकिन निबुर्स ने क्या किया? डिजिटल इंडिपेंडेंस लेकर आए। स्वदेशी टेक्नोलॉजी है 100% जो भारत की बनी हुई है। एंड एक्चुअली इट वर्क्स और सशन डिजाइन किए कि हमें डिफरेंट डिफरेंट प्लेटफॉर्म्स की जरूरत क्या है? जब एक ही ऐप आपके सारे काम कर सकता है तो आपको 10 प्लेटफार्म बनाने की जरूरत क्या थी? क्योंकि उन्होंने सब जगह पे आपको ऐड भेजनी है। और हमने जो बनाया है ये कोई कॉपी पेस्ट नहीं किया वेस्टर्न मॉडल को। दुनिया का पहला ये लोकल ऐप है ज पर हम अलाइन कर रहे है कहां पर लोकल इश्यूज को प्लस गवर्नमेंट के जो ई गवर्नेंस के इनिशिएटिव है उसके साथ इसको अलाइन कर दिया गवर्नमेंट की कौन सी पॉलिसी है आपके एरिया में कौन से इश्यूज है हर चीज को आपके साथ कनेक्ट कर दिया यानी कि जो डिजिटल डिवाइड था वो खत्म कर दिया और जो लोकल सिटीजन लोकल बॉडी है वो अपने लोगों के साथ जैसे आपका म्युनिसिपल कॉरपोरेशन है आपका एमपी है आपका एमएलए है वो वो आपके इश्यूज के साथ वो इंटरेक्ट कर सकता है आपके साथ। इसलिए इसको बनाया गया है और ये है भारत की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की स्टोरी दोस्तों। लेकिन रियलिटी चेक भी मैं देता हूं आपको एक। अब बड़ा अच्छा लगता है कि यस हमने बना लिया।

 जब तक हम भारतीय इन चीजों को सपोर्ट नहीं करेंगे। ये चीजें नहीं चल सकती।ऐप इस कंसर्न इसके अंदर रेवोल्यूशन आने वाला है। और ये रेवोल्यूशन तब आएगा जब हम खुद इसको प्रमोट करेंगे। ये अर्ली स्टेज है। छोटी सी टीम है उनकी। जमीन से जुड़े हुए हैं। कमट कर रहे हैं ट्रिलियन डॉलर के जॉइंट्स के साथ। ऑड्स कुछ ज्यादा अच्छे नहीं है। लेकिन हर रेवोल्यूशन छोटे से शुरू होता है। जब Jio ने शुरू किया था पूरे टेलीकॉम इंडस्ट्री को उसने हिला के रख दिया। यूपीआई ने पूरा पेमेंट सिस्टम को ट्रांसफॉर्म कर दिया। और अब ये इंडियन ऐप है जैसे आराई है। उसने पूरे वर्ल्ड में तहलका मचाया हुआ है। और भाई चाइना में बसेस के पीछे ट्रक के पीछे यहां पर कहीं भी चले जाइए। आपको आरताई की जोहो है उसकी ऐड दिखती है चाइना के अंदर। मार्केट हमारे भारत की रेडी है। नीड है सिर्फ आपकी ताकि आप अपने ही कंट्री के ऐप को प्रमोट करना शुरू करें। मैंने नाम दे दिया था दोबारा से निबुs नाम थोड़ा डिफिकल्ट लगता है। ये लोकल ऐप है। आप खुद भी यूज़ करें। अपनी कम्युनिटी में भी बाकी लोगों को यूज़ करवाएं ताकि हम ये जो फॉरेन के एप्स है उससे हम बाहर निकल

जाएंगे। जहां पर एक ही चीज की जाती है जो टॉक्सिक जो डाटा है ग्लोबल वाला गंदे वाला वो हमें फील किया जा रहा है। अब देखिए उनको देख देख कर हमारे भारत की लड़कियां कैसे किस तरह की वीडियोस आजकल Instagram पे बना रही है।भारत के एप्स अपने बनने शुरू हो गए हैं। एंड द क्वेश्चन इज आर यू गोइंग टू बी अर्ली अडॉप्टर? पैसे बना सकते हैं आप? अभी तक तो आप पैसे देते रहे। अब आप पैसे बना सकते हैं। और जितनी जल्दी आप अडॉप्ट करेंगे उतना ही ज्यादा अच्छी तरह से हम अपने अपने नेबरहुड के साथ, अपने घर के कम्युनिटी के साथ हम उनके साथ जुड़ सकते हैं। और भारत के सोशल मीडिया रेवोल्यूशन को हम हम शुरू करवा सकते हैं। 

 मुझे नहीं लगता कि अभी iPhone पे आया है। जब आएगा तो उसके ऊपर भी मैं आपको इंडिकेशन दे दूंगा।

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भारत का अपना सोशल मीडिया ऐप -Nyburs:Hyper Local Social App

भारत का अपना सोशल मीडिया ऐप -Nyburs:Hyper Local Social App
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मोदी जी ने एक बार अपील किया था कि भारत के पास अपना सोशल मीडिया का प्लेटफार्म होना चाहिए। मोदी जी ने अनाउंस किया और किसी ने बैंगलोर में बैठकर इसको हकीकत में उन्होंने कन्वर्ट भी कर दिया। ये है भारत का


Nyburs:Hyper Social Local App

आपने सोशल मीडिया के एप्स को यूज़ किया होगा। उसके अंदर आपको Instagram, Twitter, Facebook, WhatsApp के ग्रुप्स यह सारे आपको अलग-अलग से नए एप्स लेने पड़ते हैं। लेकिन यह एक ऐसा ऐप है जिसके अंदर ये सारे के सारी चीजें एक ही ऐप के अंदर डाल दी। यह है भारत का आंसर और इसके अंदरआप जो अपनी पोस्ट करते हैं या फ्रेंड्स के साथ अगर आप इनको रेकमेंड करते हैं तो आपको पैसे भी मिलते हैं। यहां तक कि जैसे YouTube के अंदर आप वीडियो डाल सकते हैं। इसके अंदर भी वो फैसिलिटी है। 

अब आते हैं कि ये जो ऐप है ये बाकी ऐप से डिफरेंट क्यों है?पहली बात ये है जैसे अपने जितने भी सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म्स है वो माने जाते हैं कि हमें ये तो मालूम है कि ईलॉन मस्क ने क्या खाया? राहुल गांधी ने क्या खाया वो उसके उसके घर में क्या हो रहा है लेकिन हमें अपने घर में क्या हो रहा है या हमारे जो नेबर्स हैं वहां पर क्या हो रहा है हमें पता ही नहीं है ये एक्सीडेंट नहीं है ये डिजाइन है इनका ये डिजाइन है इनका कि हम दुनिया से कनेक्ट हो लेकिन हम अपने ही घर में हम डिस्कनेक्ट हो जाए नाउ ये जो छोटी सी कंपनी है बैंगलोर के अंदर उन्होंने स्टार्टअप शुरू कर दिया स्टार्टअप ये शुरू किया है जो सब कुछ चेंज कर देगा समथिंग वि इस गोइंग टू फ्लिप सोशल मीडिया कंप्लीटली अपसाइड डाउन।सोशल मीडिया आपको दुनिया से कनेक्ट करता है। अपने आप से डिस्कनेक्ट करता है। इस इसको समझा और उन्होंने ऐप बना  दिया जहां पर आप सिंपली डाउनलोड कर सकते हैं। और उसके बाद आप अपने लोगों के साथ कनेक्ट कर सकते हैं। अपने लोगों का मतलब क्या है? जो आपके घर के आसपास रहते हैं। Facebook के ऊपर आपके पास हो सकता है 5000 दोस्त हो। लेकिन उनका पता है आपको उसकी लाइफ में क्या चल रहा है। लेकिन आपके नेबर बिल्कुल साथ में जो जिसकी दीवार आपके घर के साथ लगती है उसके बारे में आपको पता नहीं है। आपके घर के पास एक नया रेस्टोरेंट खुल गया। एक नया कैफे खुल गया। आपको उसके बारे में पता नहीं है। लेकिन ग्लोबल कंटेंट आपको मालूम है क्योंकि उन्होंने इस तरह बनाया है इसको कंटेंट को ताकि वो पैसे बनाए। आप डाटा कंज्यूम कर रहे हैं। पैसा वो बना रहे हैं।

 अब आपकी जो कम्युनिटी है वो आपके साथ कनेक्ट कर सकती है ना कि दुनिया में क्या हो रहा है उसको कनेक्ट करने की बजाय। आपको डिस्कनेक्ट करने के लिए आप ही के लोगों के लिए आप ही आप ही के लोगों के साथ। अब जो मॉडर्न सोशल मीडिया का प्लेटफार्म है भारत ने उसको उल्टा कर दिया। आपको आइसोलेट करने की कोशिश करनी थी।


अब हमारा जो भारत का अपना डाटा है अपना जो सोशल मीडिया ऐप है वो आपको अपने आप से वो कनेक्ट करेगा सॉल्व करेगा आपकी बेसिक प्रॉब्लम्स को क्यों ये जो ऐप है ये नवीन शर्मा हिंदू सनातनी है विशाल चौधरी नवीन शर्मा दो नाम जिन्होंने इसको इन्होंने शुरू किया पिच क्या थी पिच इनकी ये है मेड फॉर इंडिया बाय इंडिया टू इंडिया अब इसका मतलब क्या है फिर Twitter आपको कनेक्ट करता है दुनिया से। इन्होंने बोल दिया आपकी जो लोकल कम्युनिटी है कॉलोनी है पहले वो आपके साथ कनेक्ट करेंगे। Instagram आपको दिखाएगा इनफ्लुएंसर्स। नेबर्स आपको दिखाएगा आपकी लोकालिटी में कौन सा इनफ्लुएंसरर है। आपका इशू क्या है आपके एरिया का वो आपको दिखाई देगा। इसको बोलते हैं लाइफ हाइपर लोकल

सोशल नेटवर्किंग। अब ये सोशल नेटवर्किंग क्या होती डिवोर्स का जो ये सिस्टम है वो है एक ही सिंपल सिस्टम सर्कल आपके घर के पास और जो चैनल है वो भी आपके घर के पास यानी कि आपके नेबरहुड में क्या हो रहा है आपको वो दिखेगा एल्गोरिदम यहां पर यूज़ नहीं हो रहा उनको लोकेशन मालूम है आपकी आपकी लोकेशन के हिसाब से आपके लोकेशन बेस्ड जो आपके घर के आसपास है उसी के फीड मिलेंगे आपको दूसरे एरिया में वो क्या हो रहा है आपको मतलब नहीं है सपोजिंग साउथ दिल्ली में आप रहते हैं। वहां पर एक रेस्टोरेंट खुला तो साउथ दिल्ली के जितने रेजिडेंट्स हैं जो लोग वहां पर रहते हैं उनको उसका मैसेज पहुंचेगा कि आपके घर के आसपास दो चार किलोमीटर में ये नया रेस्टोरेंट खुला है। आप पटना में रहते हैं। वार्ड नंबर 12 है आपका। वहां पर कोई इंफ्रास्ट्रक्चर का नया प्रोजेक्ट लगने वाला है। जो वार्ड नंबर 12 में जो लोग रहते हैं उस उनको अपने वार्ड की हर इंफॉर्मेशन उनके पास पहुंचेगी। दोस्तों अब आप सोच के देखिए अब आप कम्युनिटीज को ऑर्गेनाइज कर पाएंगे मोबलाइज कर पाएंगे आपका सड़क में आपकी जो सड़क है वो गंदी पड़ी है वहां पर कोई सफाई करने नहीं आया है आप वहां पर ऐप में डाल सकते है आपके एरिया का आदमी उसको देखेगा आप कनेक्ट कर सकते है अपने लोकल मंत्रियों के साथ वोटर रजिस्ट्रेशन है आपके एरिया में कब हो रही है कब नहीं हो रही आपको पता लगेगा यानि की लोकल इश्यूज आपके घर के आसपास के वो सारे आपके सामने फिंगर टिप्स के ऊपर होंगे इसलिए इसको बनाया गया है इसको सुपर लोकल हाइपर लूप बोलते हैं और ये स्वदेशी ऐप है जहां पर एक तो ये चीज है कि आप कनेक्ट करेंगे अपने ही लोगो के साथ रियल वर्ल्ड के अंदर क्या एक्शन हो रहा है वो आपको पता लगेगा बट सबसे बड़ी चीज है आपको अपनी लैंग्वेज में ये ऐप आप चला सकते है 12  लैंग्वेज इन्होंने ऑलरेडी डाल दिए मैं कोई इनका एफिलिएट नहीं हूं आपको लगेगा मुझे सर इसमें पैसे मिलने वाले है जनरली सनातनियों को सबसे बड़ी प्रॉब्लम यही आती है नहीं इसमें ये सिर्फ इसलिए कि भारत का ऐप है। मोदी जी खुद इसको प्रमोट कर रहे हैं।दूसरा जो डाटा है वो भारत में रहेगा। यानी कि सर्वर भारत में है। कोई अमेरिकन कंपनी हमारे डाटा को यूज़ करके हमें मार्केटिंग का प्रोडक्ट वो बेच नहीं पाएगी। एंड लास्टली यू कैन अर्न मनी फ्रॉम दिस ऐप। वो कैसे? इन्होंने क्या किया? जब इसको ल्च किया इसके अंदर कांटेस्ट रखे हैं। हर रोज का कांटेस्ट है जहां पर आपको कैश मिलता है। वीकली चैलेंजेस है। आप लाइव स्ट्रीमिंग कर सकते हैं। लाइव स्ट्रीमिंग के आपको पैसे मिलते हैं। अगर आप रेफर करते हैं किसी को उसका बोनस भी है। यानी कि आप अपनी कम्युनिटी में एंगेज करेंगे और उस एंगेजमेंट का आपको रिवॉर्ड भी मिलेगा। बिजनेस मॉडल बड़ा ही सिंपल है और जीनियस भी है। वो कैसे? भारत का जो डिजिटल एडवरटाइजिंग का मार्केट है वो डेढ़ लाख करोड़ रुपया है 2025 का निबोर्स ने क्या किया वो जो लोकल बेस्ड एडवरटाइजिंग होती है जो छोटी सी दुकान है उसने खोली है अभी वो अपने आप को एडवर्टाइज करना चाहता है अगर वो सोशल मीडिया पे जाएगा तो सोशल मीडिया पे पूरे इंडिया में बैंगलोर के अंदर किसी ने छोटी सी दुकान खोली उसका उसका मैसेज अगर दिल्ली वाले के पास जाएगा उसका फायदा नहीं है लेकिन आपको देने पड़ते हैं मोटे इन सारे कामों के लिए अब आपकी दुकान छोटी है। आप अपने ही आदमी जो आपके एरिया के आसपास है उनको मैसेज पहुंचाना चाहते हैं। इट इस गोइंग टू बी वेरी वेरीरी चीप। लेकिन अगर कोई नेशनल लेवल पर काम कर रहा है। उसकी प्रीमियम सर्विज है, फीचर्स है जो आप ले सकते हैं। यानी कि बड़ा आदमी बड़ी कंपनी है उसके लिए अलग पैकेज है। छोटा जो आदमी है लोकल आदमी उसके लिए अलग पैकेज है। सस्टेनेबल है, स्केलेबल है। एंड जमीन से जुड़ा हुआ सशन निकाला है। क्यों? क्योंकि एक तो बड़े-बड़े जो वेंचर कैपिटल होते हैं उनसे पैसा नहीं लिया तो हमें ये नहीं है कि कोई फॉरेन इन्वेस्टर है एंड दे आर गोइंग टू पुल द शॉट्स नॉट एट ऑल। भारतीय कंपनी भारत में बैठकर भारतीयों का जो सोलशन है वो निकाल रही है। अब ये मैटर क्यों करता है? एक ऐप ने पूरी सोशल मीडिया मार्केट को हिला के रख देना है। जब ये चलेगा। एक तो हमारे पास 90 करोड़ इंटरनेट यूज़र्स है 2025 में। सभी के पास ऑलमोस्ट स्मार्टफोनस है और जो हमारा डिजिटल लिटरेसी है वो बढ़ता जा रहा है। हम अभी तक डिपेंडेंट थे फॉरेन के प्लेटफॉर्म्स के ऊपर लेकिन वो प्लेटफार्म भारतीय कम्युनिटी को और हमारे कल्चर को वो समझते ही नहीं है। इसलिए वो ना तो रीजनल लैंग्वेज के अंदर वो प्रॉपर्ली समझते हैं ना ही कोई एप्स उनके रीजनल लैंग्वेज के ऊपर है। एंड जो लोकल हमारे इश्यूज है उसके नीड्स को वो कभी पूरा करते ही नहीं। लेकिन निबुर्स ने क्या किया? डिजिटल इंडिपेंडेंस लेकर आए। स्वदेशी टेक्नोलॉजी है 100% जो भारत की बनी हुई है। एंड एक्चुअली इट वर्क्स और सशन डिजाइन किए कि हमें डिफरेंट डिफरेंट प्लेटफॉर्म्स की जरूरत क्या है? जब एक ही ऐप आपके सारे काम कर सकता है तो आपको 10 प्लेटफार्म बनाने की जरूरत क्या थी? क्योंकि उन्होंने सब जगह पे आपको ऐड भेजनी है। और हमने जो बनाया है ये कोई कॉपी पेस्ट नहीं किया वेस्टर्न मॉडल को। दुनिया का पहला ये लोकल ऐप है ज पर हम अलाइन कर रहे है कहां पर लोकल इश्यूज को प्लस गवर्नमेंट के जो ई गवर्नेंस के इनिशिएटिव है उसके साथ इसको अलाइन कर दिया गवर्नमेंट की कौन सी पॉलिसी है आपके एरिया में कौन से इश्यूज है हर चीज को आपके साथ कनेक्ट कर दिया यानी कि जो डिजिटल डिवाइड था वो खत्म कर दिया और जो लोकल सिटीजन लोकल बॉडी है वो अपने लोगों के साथ जैसे आपका म्युनिसिपल कॉरपोरेशन है आपका एमपी है आपका एमएलए है वो वो आपके इश्यूज के साथ वो इंटरेक्ट कर सकता है आपके साथ। इसलिए इसको बनाया गया है और ये है भारत की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की स्टोरी दोस्तों। लेकिन रियलिटी चेक भी मैं देता हूं आपको एक। अब बड़ा अच्छा लगता है कि यस हमने बना लिया।

 जब तक हम भारतीय इन चीजों को सपोर्ट नहीं करेंगे। ये चीजें नहीं चल सकती।ऐप इस कंसर्न इसके अंदर रेवोल्यूशन आने वाला है। और ये रेवोल्यूशन तब आएगा जब हम खुद इसको प्रमोट करेंगे। ये अर्ली स्टेज है। छोटी सी टीम है उनकी। जमीन से जुड़े हुए हैं। कमट कर रहे हैं ट्रिलियन डॉलर के जॉइंट्स के साथ। ऑड्स कुछ ज्यादा अच्छे नहीं है। लेकिन हर रेवोल्यूशन छोटे से शुरू होता है। जब Jio ने शुरू किया था पूरे टेलीकॉम इंडस्ट्री को उसने हिला के रख दिया। यूपीआई ने पूरा पेमेंट सिस्टम को ट्रांसफॉर्म कर दिया। और अब ये इंडियन ऐप है जैसे आराई है। उसने पूरे वर्ल्ड में तहलका मचाया हुआ है। और भाई चाइना में बसेस के पीछे ट्रक के पीछे यहां पर कहीं भी चले जाइए। आपको आरताई की जोहो है उसकी ऐड दिखती है चाइना के अंदर। मार्केट हमारे भारत की रेडी है। नीड है सिर्फ आपकी ताकि आप अपने ही कंट्री के ऐप को प्रमोट करना शुरू करें। मैंने नाम दे दिया था दोबारा से निबुs नाम थोड़ा डिफिकल्ट लगता है। ये लोकल ऐप है। आप खुद भी यूज़ करें। अपनी कम्युनिटी में भी बाकी लोगों को यूज़ करवाएं ताकि हम ये जो फॉरेन के एप्स है उससे हम बाहर निकल

जाएंगे। जहां पर एक ही चीज की जाती है जो टॉक्सिक जो डाटा है ग्लोबल वाला गंदे वाला वो हमें फील किया जा रहा है। अब देखिए उनको देख देख कर हमारे भारत की लड़कियां कैसे किस तरह की वीडियोस आजकल Instagram पे बना रही है।भारत के एप्स अपने बनने शुरू हो गए हैं। एंड द क्वेश्चन इज आर यू गोइंग टू बी अर्ली अडॉप्टर? पैसे बना सकते हैं आप? अभी तक तो आप पैसे देते रहे। अब आप पैसे बना सकते हैं। और जितनी जल्दी आप अडॉप्ट करेंगे उतना ही ज्यादा अच्छी तरह से हम अपने अपने नेबरहुड के साथ, अपने घर के कम्युनिटी के साथ हम उनके साथ जुड़ सकते हैं। और भारत के सोशल मीडिया रेवोल्यूशन को हम हम शुरू करवा सकते हैं। 

 मुझे नहीं लगता कि अभी iPhone पे आया है। जब आएगा तो उसके ऊपर भी मैं आपको इंडिकेशन दे दूंगा।

 जय हिंद


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