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Thursday, April 16, 2026

संभवत चड्डा के पास एक सीडी है शीश महल वाली सीडी

संभवत चड्डा के पास एक सीडी है शीश महल वाली सीडी
संभवत चड्डा के पास एक सीडी है शीश महल वाली सीडी
संभवत चड्डा के पास एक सीडी है शीश महल वाली सीडी
संभवत चड्डा के पास एक सीडी है शीश महल वाली सीडी

 


भारतीय राजनीति में बदलाव के लिए आया था केजरी। एक जन आंदोलन की उपज किए थे। लीक से हटकर राजनीति करने के लिए आया केजरी। शराब माफियागिरी के धंधा करने लगा। इस धुर् और शातिर केजरी को यह लगता है कि इस धरती पर उससे ज्यादा कोई काबिल नहीं। केजरीवाल को हमेशा लगता है कि वही सिर्फ पढ़ा लिखा है इस धरती पर और वही सिर्फ मूर्ख बना सकता है।अब उसी के पाले हुए खिलाड़ी उसी को उसी का घोड़ा पिलाने लगे। केजरीवाल भारतीय राजनीति का सही मायने में एक ऐसा घणित चेहरा है


जो भारत में उम्मीदों की राजनीति की हत्या करता है। केजरीवाल से भारतीय राजनीति में एक ऐसा शख्स जो एक आंदोलन से निकला और जनता ने उस पर भरोसा किया। वो केजरी दिल्ली को बदलने निका था। दिल्ली को बर्बाद करके छोड़ दिया। वो कमाई के लिए शराब की माफियागिरी करने लगा। शराब घोटाला करने वाला केजरी जिसे देश की सबसे बड़ी अदालत तक ने बेल नहीं दिया। लेकिन एक खेल हुआ उस पर कभी और चर्चा करूंगा। एक ऐसा खेल केजरी गैंग ने किया कि वो आरोप मुक्त हो गया। लेकिन हाई कोर्ट ने जब ट्रायल कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुनवाई की तो उस ट्रायल


कोर्ट की साख खराब करने की आतुर हो गया।कांडी केजरी के आंदोलन के समय जितने प्रभावशाली व्यक्ति थे सबको केजरी ने अपमानित करके बाहर कर दिया और कुछ चेहरे चपाटे इसने पा लिए। इसमें एक चिकना चड्डा था राघव चड्डा। चार्टर्ड अकाउंटेंट चड्डा केजरी का सबसे प्रिय था। केजरी उसे अपने घर का हिस्सा बनाना चाहता था। केजरी ने इस चिकने चड्डा में ये देखा कुछ सपना देखा। तो सोचिए इस चड्डा को केजरी ने राज्यसभा भेज दिया। यह चड्डा इतना प्यारा हो गया, इतना दुलारा हो गया कि इसके लिए घरेलू सपना देखने लगा। ये सपना उसका चकनाचूर जब तक हुआ तब तक चड्डा बहुत कुछ पा चुका था। चड्डा राज्यसभा जा चुका था और राज्यसभा ऐसी जगह है जहां से आप किसी को हटा नहीं सकते। छ साल उसकी बुकिंग हो गई। वो पार्टी विरोधी गतिविधि करे या ना करे। चड्डा केजरी के पहले सपने को तोड़ दिया जब उसने एक हीरोइन से ब्याह करने का की घोषणा कर दी और केजरी का वो कविराज ने इस बात की घोषणा कर दी कि बेटा ये मरा जिस दिन उसने हीरोइन से शादी करने की बात कर दी उसी दिन केजरी का वो सपना टूट गया जिस सपने के तहत केजरी ने उसे उसे राज्यसभा भेजा और जब पंजाब में सरकार बनी तो केजरी ने चड्डा को सुपर सीएम बना दिया। अब सोचिए कि चड्डा में ऐसा क्या था कि केजरी ने उसे राज्यसभा भेज दिया। इतने काबिल काबिल लोग इस आंदोलन से जिसने अपने आप को पार्टी में खपाया वो कुमार विश्वास, वो योगेंद्र यादव, वो आनंद कुमार, वो प्रशांत भूषण, वो शांति भूषण वो तमाम लोग बाहर हो गए। लेकिन चिकना चड्डा केजरी का प्रिय हो गया।केजरी घर में उसे लाना चाहता था और घरेलू सपने देखे जाने लगे। इसीलिए चड्डा को पूरी छूट दी गई। चड्डा पंजाब का प्रभारी बन गया। चड्डा को जेड प्लस सुरक्षा दी गई। आ घर में आएंगे चिकने हैं जेड प्लस सुरक्षा होगा चड्डा को वो तमाम सुविधाएं मिलने लगी जो कांडी केजरी को मिलती थी जो भग्गू को मिलती थी वो तमाम सुविधाएं चड्डा को मिलने लगी लेकिन जो ही चड्डा ने हीरोइन से शादी करने की बात की चड्डा की चमक केजरी ने उतारनी शुरू कर दी और चड्डा से कहा गया कि बेटा राज्यसभा छोड़ दो इस्तीफा दे दो चड्डा बीबी संग हनीमून खून मनाने लंदन चला गया अपनी आंख में परेशानी बताकर कहते हैं चड्डा की शीश महल में ठुकाई वैसी हुई जैसे स्वाति मालीवाल की हुई स्वाति मालीवाल ने इसे पब्लिक कर दिया स्वाति मालीवाल भाग करके गई थाने में रिकॉर्ड दर्ज किया लेकिन चड्डा ने कुछ लाज रख ली केजरी की और चड्डा भाग कर लंदन चला गया अब चड्डा केजरी का प्रिय नहीं रहा तो चड्डा की जेड प्लस सुरक्षा छीन ली गई। उसके बाद चड्डा नेता प्रतिपक्ष उपनेता था राज्यसभा में। सोचिए इस चड्डा में ऐसी क्या खासियत थी सीए था। तो पूरी पार्टी का माल कहां है कैसे है जाना है सब चड्डा को पता है। केजरी को डर इसी बात का था कि चड्डा कहीं पोल ना खोल दे। अब क्योंकि चड्डा केजरी का प्रिय नहीं रहा। सपना तोड़ने वाला रहा। घर में एंट्री अब बैन बैन हो गई। तो पर कतरने शुरू कर दिए। माना जा रहा है कि चड्डा को और स्वाति मालीवाल दोनों को राज्यसभा छोड़ने के लिए कहा गया था। ना चड्डा ने छोड़ा ना स्वाति ने छोड़ा। ये हर किसी को भ्रम होता है। मैंने उसे बनाया। आज केजरी के चमचे मैदान में आकर के कह रहे हैं केजरी के चेले चपाटे कि चड्डा को केजरी ने ये सब दिया। ये वो लोग कह रहे हैं जिनको नहीं मिला। यह सब उसी लायक थे। चड्डा के स्टैंडर्ड के ही थे। लेकिन चड्डा बड़ा बन गया। अब इस चड्डा के जगह जो एक गुप्ता जी आए अशोक मित्तल मालदार अशोक मित्तल इस कांडी केजरी की पार्टी में कमाल की है आंदोलन से संघर्ष करके इस पार्टी को जिन लोगों ने बड़ा किया केजरी ने उसे किनारे कर दिया और दोद बनिया ले आए मालदार जो पार्टी को सींच सके क्योंकि शराब माफियागिरी का धंध था खत्म खत्म हो गया था। शराब से लूट का खेल खत्म हो चुका था। तो इसीलिए पंजाब से राज्यसभा में जो सांसद लाए गए चड्डा के अलावा सब वो मालदार लोग थे। उसी में से एक अशोक मित्तल है। अशोक मित्तल को चड्डा की जगह पे मालदार होने के कारण माल देने के कारण केजरी ने उसे उपनेता बना दिया। तब पता चला कि उसका जो

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी है वो भ्रष्टाचार का केंद्र है। ईडी ने लवली प्रोफेशनल इंस्टट्यूट पर छापेमारी कर दी। अशोक मित्तल के घर पर और उसके लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी पर। जालंधर और फगवाड़ा में ईडी की छापेमारी से केजरी गैंग में कोहराम मच गया है। मतलब केजरी का शराब माफियागिरी का धंधा बंद होते ही पार्टी का कमाई का खेल खत्म हुआ। अब ये जितने बनिया भाई हैं जो सिर्फ मालदार होने की वजह से पार्टी सोचिए जो पार्टी नैतिकता की बड़ी-बड़ी बातें करने आई। जो पार्टी पढ़े लिखे लोगों की पार्टी बनकर आई उसमें ऐसे ऐसे लोगों को लाया जाने लगा राज्यसभा भेजा

जाने लगा जिनका इस पार्टी के आंदोलन से संघर्ष से जिसका कोई वास्ता नहीं था केजरी को सिर्फ माल चाहिए था तो केजरी यूज़ करने लगा सवाल यह है कि जिस चड्डा पर केजरी के लोग सवाल उठा रहे हैं उस चड्डा को केजरी ने बनाया क्यों किस स्वार्थ से क्या योग्यता थी चड्डा की अब वो चड्डा काम का हो गया है संभवत चड्डा के पास एक सीडी है। शीश महल वाली सीडी। अब एक गसिप चल रही है कि चड्डा के पास शीश महल वाली वो सीडी है जिसमें स्वाति मालीवाल की पिटाई का चड्डा की ठुकाई का और फिर कई ऐसे खेल है जो चड्डा के पास है। दरअसल चड्डा अकाउंटेंट है, सीए है। आम आदमी पार्टी के इस तमाम पाप के धन का की जानकारी चड्डा के पास है। चड्डा के पास एक एक रिकॉर्ड है। पंजाब से कमाई कैसे की गई? दिल्ली में कैसे कमाई की गई? शराब माफिया गिरी के धंधे में कहां क्या हुआ क्योंकि चड्डा को केजरी ने इतना विश्वास किया हुआ था कि घरेलू है घर का है कल को घर का ही रहेगा अपने घर में रहेगा कल तो सब कुछ घर का माल घर में आ जाएगा राज्यसभा भी जाएगा माल भी कमाएगा पंजाब का प्रभारी भी बन जाएगा तो सब कुछ करेगा दरअसल भगवंत मान एक चीफ मिनिस्टर था चड्डा ही पंजाब का सुपर चीफ मिनिस्टर था चड्डा को पंजाब के पूरे पाप पता है। कहां खेल हो रहा है सब पता है। इसीलिए चड्डा अब गले की हड्डी बन चुका है। इस चड्डा को राज्यसभा में उप नेता से हटाकर केजरी ने अपनी कब्र खोद ली। दरअसल ये सब कुछ स्वार्थ का खेल था। चड्डा को बनाया क्यों? चड्डा का बिगाड़ा क्यों? इसी में केजरी फस गया है। स्वाति मालीवाल तो बस कटाक्ष मार रही है। चड्डा के पास वो तमाम साक्ष्य है। डॉक्यूमेंट्री प्रूफ है। स्वाति मालीवाल सिर्फ इतिहास बता रही है। हमारा ऐसा संबंध था। हम ऐसे थे। लेकिन चड्डा के पास पूरे रिकॉर्ड है। स्वाति वहां तक नहीं घुस पाई

जहां तक चड्डा घुसा हुआ था। इसीलिए यह चड्डा अब केजरी के लिए काल बन गया है। इस केजरी को लगता है कि वो बहुत चालाक है। उससे बड़ा धूर्त कोई नहीं। उससे बड़ा कनिंग नहीं। कोई उससे बड़ा बेईमान कोई नहीं। लेकिन उसे लगता है कि वो इस कदर कनिंग है। वो जिस कदर दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता का अपमान कर रहा है। उसे लगता है कि सिर्फ अपमान करने का ठेका उसे ही मिला हुआ है। लेकिन अब चड्डा ने तय कर लिया है कि वो सीडी अमित शाह को थमाएंगी। तो क्या चड्डा ने सीधी अमित शाह को थमा दी है या थमाना बाकी है? क्या चड्डा ही वो असली खिलाड़ी है जिसके वजह से अशोक मित्तल के घर पे छापेमारी हुई है? उसके ठिकानों पर क्या चड्डा ने पूरा क्लू दिया है? क्या आने वाले दिनों में चड्डा के निशाने पर चड्डा की सीढ़ी के निशाने पर कांडी केजरी के टीम के बहुत सारे लोगों का खेल होगा। चड्डा असली खिलाड़ी बनकर सामने आ गया है।जरा सोचिए चड्डा को लेकर अब जिनकी कोई औकात नहीं चड्डा के सामने वो सब मुंह खोल रहे हैं चड्डा को लेकर के कि जैसे चड्डा के ऊपर एहसान किया है कांडी ने जरा इनको सुनिए इस मोहतरमा को टेलीविजन चैनल पर उत्पात मचाते आती है सबसे लड़ती झगड़ती रहती है इसको चड्ढा जी अपने लिए जेड प्लस सिक्योरिटी भी मांगते हैं जो आज पता चल रहा है उनको मिल गई इस इस बात का दुख है कि अरविंद केजरीवाल जी ने आम आदमी पार्टी ने एक आम परिवार से आए लड़के को एक सामान्य कार्यकर्ता को सड़क से उठाकर संसद तक पहुंचा दिया और बदले में वो कैसी पेटी और अनग्रेटफुल हरकतें कर रहे हैं। इस बात का दुख है। इसको बहुत दुख है।फॉर एग्जांपल कैप्टन अमरिंदर को ईडी ने समंस भेजे थे हाल ही में फरवरी में और जिस ऑफिसर ने ईडी अधिकारी ने समन भेजे उनका तबादला हो गया तो सबको पता है कि भाजपा के नेता के यहां कोई यही यही उलजुलूल बातें हैं। अब सवाल यह है कि सड़क से उठाकर चड्डा ऐसा चड्डा में क्या था कि सड़क से उठा लिया चड्डा को चड्डा को सड़क से सड़क से उठा केजरी ने राज्यसभा क्यों भेज दिया? चड्डा को पंजाब जैसे राज्य का प्रभारी क्यों बना दिया? ये मोहतरमा जो कह रही हैं कि चड्डा को सड़क से उठा के एक आम आदमी को य बना दिया। एक और बाबू साहब आ गए हैं। अनुराग डांडा है। पार्टी लाइन पे अपना काम कर रहे हैं। ये भी आ गए चड्डा की चड्डी उतारने के लिए। जिनको हाल ही में ये लगता है कि भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब में भी चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। और जनता में भारतीय जनता पार्टी इतनी लोकप्रिय हो चुकी है। पार्टी का प्रवक्ता है अभी। आज तक हेडलाइंस टुडे में अंग्रेजी वाले चड्डा के जगह पे मित्तल साहब बन गए हैं प्रभारी आम आदमी पार्टी के। किस गुण से? तो ऐसे ऐसे आम आपियों से पूछा जाना चाहिए कि चड्डा के बारे में जो कह रहे हो सड़क से उठाकर तो सड़क छापों को क्यों राज्यसभा भेजा ऐसे सड़क छापों को राज्यसभा क्यों भेजा और यह सवाल उठा रहे हैं जेड प्लस जेड सुरक्षा दे दिया गया सोचिए चड्डा को आम आदमी

पार्टी ने जेड प्लस सुरक्षा दी हुई थी पंजाब में पंजाब में क्योंकि चड्डा कांग्रेस केजरी का खासम खास था तो चड्डा को जेड प्लस सुरक्षा थी तामझाम था घर में आएगा चड्डा अपना है चड्डा जेड प्लस सुरक्षा थी चड्डा को और उसकी सुरक्षा हटा ली क्यों हटा ली सुरक्षा किसी को दी जाती है थ्रेटनिंग के आधार पे उसके ऊपर खतरा होता है तो पंजाब में और दिल्ली में चड्डा के ऊपर खतरा बता के पंजाब और दिल्ली मेंकि सरकार है आम आदमी पार्टी की तो दोनों राज्यों में चड्डा को जेड प्लस सुरक्षा थी छीन ली गई तो गृह मंत्रालय ने थ्रेट के आधार पे चड्डा को जेड प्लस के बदले जेड श्रेणी की सुरक्षा दे दी है दिल्ली दिल्ली में क्योंकि अब पंजाब जाने का मतलब नहीं पंजाब का प्रभारी है नहीं अब सोचिए इस बात से आपत्ति है कि चड्डा को तो क्या चड्डा को मरवा करके कांडी केजरी एक बड़ा षड्यंत्र करना करना चाह रहा है। क्या चड्डा की हत्या की साजिश रचना चाह रहा है क्या बदला सबूत नष्ट करने के लिए? अब इस खेल को जरा समझने की कोशिश कीजिए। यदि राघव चड्डा आम आदमी पार्टी का सांसद उसके ऊपर खतरा था और वो आम आदमी पार्टी का राज्यसभा का सांसद है। राज्यसभा में उपनेता है। वो पंजाब का प्रभारी है। यदि


आम आदमी पार्टी ने उसके ऊपर खतरे को ध्यान में रखते हुए उसे जेड प्लस सुरक्षा दी। वो सीए है। पूरे आम आदमी पार्टी का लेखाजोखा उसके पास है। शराब घोटाला का लेखाजोखा है। उसके पास शीश महल बनाने में जो जो पाप किया गया है उसका लेखाजोखा है। तो क्या सबूत नष्ट करने के लिए कांडी केजरी गैंग इस राघव चड्डा की हत्या करवाना चाह रहा है। क्या सुरक्षा इसलिए हटा लिया गया ताकि राघव चड्डा की हत्या हो जाए। क्या एक बड़ी घातक इस चड्डाकि केजरी के राह में रो रहा है। चड्डाकि केजरी के खिलाफ सबूत है। चड्डा के पासकि सीढ़ी है। चड्डाकि कांडी केजरी का खेल कर सकता है। चड्डा स्वाति मालीवाल से ज्यादा घातक हो सकता है। चड्डा कोई आशुतोष जैसा चिरकुट नहीं है। वो कोई गंधौर यादव या कविराज की तरह चिरकुट नहीं है। चड्डा के पास पूरे सबूत और साक्ष्य है। चड्डा के पास डॉक्यूमेंट्री प्रूफ है। तो क्या उस चड्डा की हत्या की साजिश है? आखिर जब जेड प्लस सुरक्षा थी तो उसकी जेट सुरक्षा क्यों हटा ली गई? अमित शाह ने इसी को ध्यान में रखते हुए गृह मंत्रालय से सुरक्षा दी है। क्या गृह मंत्रालय को इस बात का अंदाजा है कि चड्डा की हत्या की साजिश रची गई है? क्या पंजाब में चड्डा की  हत्या की साजिश थी? ताकि चड्डा की हत्या करके सबूत नष्ट कर लिया जाए। उसको बचाया गया है? क्या चड्डा के पास कोई घातक सीडी है? ये बहुत महत्वपूर्ण है। यूं ही नहीं केजरी ने चड्डा को किनारा किया है और यूं ही नहीं चड्डा चड्डा की जेड प्लस सुरक्षा छीन ली गई और जब गृह मंत्रालय ने चड्डा को सुरक्षा दी तो पूरा आम आदमी पार्टी तिलमिला गया कि हम तो इसकी हत्या करवाना चाह रहे थे लेकिन ये तो अब बच गया। इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए कि क्या चड्डा की हत्या की साजिश थी? क्या चड्डा के पास कोई गंभीर सबूत है जिसकी वजह से चड्डा को निपटाना चाह रहा है? इस पार्टी को छोड़ के बहुत सारे लोग गए। आशुतोष गया है, कविराज गया है, गंधौर यादव गया है, स्वाति मालीवाल गई है। चड्डा के खिलाफ जिस तरह से आप ये हमलावर हो चुके हैं। इस तरह से आम आदमी पार्टी अपने पार्टी से निकाले गए या पार्टी छोड़ के गए। किसी भी आदमी के खिलाफ हमलावर नहीं हुआ। लेकिन चड्डा तूने तो अभी पार्टी भी नहीं छोड़ी है। फिर चड्डा के खिलाफ हमलावर क्यों है? इस मामले को बहुत गंभीरता से समझना चाहिए। गृह मंत्रालय को गंभीरता से लेना चाहिए। मुझे लगता है सरकार की पैनी नजर होगी कि क्या


चड्डा को मार करके एक बहुत बड़ा सबूत नष्ट करने की कोशिश की जा रही है। आखिर चड्डा से इतनी नफरत क्यों है आपियों को ये पता किया जाना बहुत जरूरी है। आपको पूरा ये खेल अब बेहतर तरीके से समझ में आ गया होगा कि चड्डा के लिए इतनी नफरत क्यों है। फिर से समझिए आम आदमी पार्टी छोड़ के शांति भूषण गए। प्रशांत भूषण गए। कविराज गया, गंध यादव गया, आनंद कुमार गए, स्वाति मालीवाल भी एक तरह से गई। लेकिन आम आदमी पार्टी किसी के खिलाफ इतना हमलावर नहीं हुई। चड्डा ने तो अभी पार्टी भी नहीं छोड़ी है। चड्डा से इतनी नफरत क्यों? चड्डा का चरित्र हनन के लिए पूरा कांडी केजरी गैंग क्यों मैदान में आ गया है? चड्डा का चरित्र हनन तो छोड़िए। चड्डा की हत्या की साजिश इसका मतलब है। इसीलिए उसकी जेड प्लस सुरक्षा हटाई गई और जब सरकार ने दी अब देखिए ऐसा नहीं कि चड्डा चड्डा को स्पेशली सुरक्षा दे दी गई। चड्डा को जेड प्लस सुरक्षा थी। उसको छीन लिया गया। उसके जगह पे जेड सुरक्षा दी गई है। और ये बेचैन कर रहा है कांडी केजरी गैंग को। सोचिए ये आदमी कितना शातिर है और भारतीय राजनीति का कितना कनिंग कितना घिनौना चेहरा है और दिल्ली लगातार तीन बार ऐसे घिनौने चेहरे को चुनती रही और बर्बाद हो गई।


इस दिल्ली को इस देश को कांडी राजनेताओं से बचाने की जरूरत है।



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संभवत चड्डा के पास एक सीडी है शीश महल वाली सीडी

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भारतीय राजनीति में बदलाव के लिए आया था केजरी। एक जन आंदोलन की उपज किए थे। लीक से हटकर राजनीति करने के लिए आया केजरी। शराब माफियागिरी के धंधा करने लगा। इस धुर् और शातिर केजरी को यह लगता है कि इस धरती पर उससे ज्यादा कोई काबिल नहीं। केजरीवाल को हमेशा लगता है कि वही सिर्फ पढ़ा लिखा है इस धरती पर और वही सिर्फ मूर्ख बना सकता है।अब उसी के पाले हुए खिलाड़ी उसी को उसी का घोड़ा पिलाने लगे। केजरीवाल भारतीय राजनीति का सही मायने में एक ऐसा घणित चेहरा है


जो भारत में उम्मीदों की राजनीति की हत्या करता है। केजरीवाल से भारतीय राजनीति में एक ऐसा शख्स जो एक आंदोलन से निकला और जनता ने उस पर भरोसा किया। वो केजरी दिल्ली को बदलने निका था। दिल्ली को बर्बाद करके छोड़ दिया। वो कमाई के लिए शराब की माफियागिरी करने लगा। शराब घोटाला करने वाला केजरी जिसे देश की सबसे बड़ी अदालत तक ने बेल नहीं दिया। लेकिन एक खेल हुआ उस पर कभी और चर्चा करूंगा। एक ऐसा खेल केजरी गैंग ने किया कि वो आरोप मुक्त हो गया। लेकिन हाई कोर्ट ने जब ट्रायल कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुनवाई की तो उस ट्रायल


कोर्ट की साख खराब करने की आतुर हो गया।कांडी केजरी के आंदोलन के समय जितने प्रभावशाली व्यक्ति थे सबको केजरी ने अपमानित करके बाहर कर दिया और कुछ चेहरे चपाटे इसने पा लिए। इसमें एक चिकना चड्डा था राघव चड्डा। चार्टर्ड अकाउंटेंट चड्डा केजरी का सबसे प्रिय था। केजरी उसे अपने घर का हिस्सा बनाना चाहता था। केजरी ने इस चिकने चड्डा में ये देखा कुछ सपना देखा। तो सोचिए इस चड्डा को केजरी ने राज्यसभा भेज दिया। यह चड्डा इतना प्यारा हो गया, इतना दुलारा हो गया कि इसके लिए घरेलू सपना देखने लगा। ये सपना उसका चकनाचूर जब तक हुआ तब तक चड्डा बहुत कुछ पा चुका था। चड्डा राज्यसभा जा चुका था और राज्यसभा ऐसी जगह है जहां से आप किसी को हटा नहीं सकते। छ साल उसकी बुकिंग हो गई। वो पार्टी विरोधी गतिविधि करे या ना करे। चड्डा केजरी के पहले सपने को तोड़ दिया जब उसने एक हीरोइन से ब्याह करने का की घोषणा कर दी और केजरी का वो कविराज ने इस बात की घोषणा कर दी कि बेटा ये मरा जिस दिन उसने हीरोइन से शादी करने की बात कर दी उसी दिन केजरी का वो सपना टूट गया जिस सपने के तहत केजरी ने उसे उसे राज्यसभा भेजा और जब पंजाब में सरकार बनी तो केजरी ने चड्डा को सुपर सीएम बना दिया। अब सोचिए कि चड्डा में ऐसा क्या था कि केजरी ने उसे राज्यसभा भेज दिया। इतने काबिल काबिल लोग इस आंदोलन से जिसने अपने आप को पार्टी में खपाया वो कुमार विश्वास, वो योगेंद्र यादव, वो आनंद कुमार, वो प्रशांत भूषण, वो शांति भूषण वो तमाम लोग बाहर हो गए। लेकिन चिकना चड्डा केजरी का प्रिय हो गया।केजरी घर में उसे लाना चाहता था और घरेलू सपने देखे जाने लगे। इसीलिए चड्डा को पूरी छूट दी गई। चड्डा पंजाब का प्रभारी बन गया। चड्डा को जेड प्लस सुरक्षा दी गई। आ घर में आएंगे चिकने हैं जेड प्लस सुरक्षा होगा चड्डा को वो तमाम सुविधाएं मिलने लगी जो कांडी केजरी को मिलती थी जो भग्गू को मिलती थी वो तमाम सुविधाएं चड्डा को मिलने लगी लेकिन जो ही चड्डा ने हीरोइन से शादी करने की बात की चड्डा की चमक केजरी ने उतारनी शुरू कर दी और चड्डा से कहा गया कि बेटा राज्यसभा छोड़ दो इस्तीफा दे दो चड्डा बीबी संग हनीमून खून मनाने लंदन चला गया अपनी आंख में परेशानी बताकर कहते हैं चड्डा की शीश महल में ठुकाई वैसी हुई जैसे स्वाति मालीवाल की हुई स्वाति मालीवाल ने इसे पब्लिक कर दिया स्वाति मालीवाल भाग करके गई थाने में रिकॉर्ड दर्ज किया लेकिन चड्डा ने कुछ लाज रख ली केजरी की और चड्डा भाग कर लंदन चला गया अब चड्डा केजरी का प्रिय नहीं रहा तो चड्डा की जेड प्लस सुरक्षा छीन ली गई। उसके बाद चड्डा नेता प्रतिपक्ष उपनेता था राज्यसभा में। सोचिए इस चड्डा में ऐसी क्या खासियत थी सीए था। तो पूरी पार्टी का माल कहां है कैसे है जाना है सब चड्डा को पता है। केजरी को डर इसी बात का था कि चड्डा कहीं पोल ना खोल दे। अब क्योंकि चड्डा केजरी का प्रिय नहीं रहा। सपना तोड़ने वाला रहा। घर में एंट्री अब बैन बैन हो गई। तो पर कतरने शुरू कर दिए। माना जा रहा है कि चड्डा को और स्वाति मालीवाल दोनों को राज्यसभा छोड़ने के लिए कहा गया था। ना चड्डा ने छोड़ा ना स्वाति ने छोड़ा। ये हर किसी को भ्रम होता है। मैंने उसे बनाया। आज केजरी के चमचे मैदान में आकर के कह रहे हैं केजरी के चेले चपाटे कि चड्डा को केजरी ने ये सब दिया। ये वो लोग कह रहे हैं जिनको नहीं मिला। यह सब उसी लायक थे। चड्डा के स्टैंडर्ड के ही थे। लेकिन चड्डा बड़ा बन गया। अब इस चड्डा के जगह जो एक गुप्ता जी आए अशोक मित्तल मालदार अशोक मित्तल इस कांडी केजरी की पार्टी में कमाल की है आंदोलन से संघर्ष करके इस पार्टी को जिन लोगों ने बड़ा किया केजरी ने उसे किनारे कर दिया और दोद बनिया ले आए मालदार जो पार्टी को सींच सके क्योंकि शराब माफियागिरी का धंध था खत्म खत्म हो गया था। शराब से लूट का खेल खत्म हो चुका था। तो इसीलिए पंजाब से राज्यसभा में जो सांसद लाए गए चड्डा के अलावा सब वो मालदार लोग थे। उसी में से एक अशोक मित्तल है। अशोक मित्तल को चड्डा की जगह पे मालदार होने के कारण माल देने के कारण केजरी ने उसे उपनेता बना दिया। तब पता चला कि उसका जो

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी है वो भ्रष्टाचार का केंद्र है। ईडी ने लवली प्रोफेशनल इंस्टट्यूट पर छापेमारी कर दी। अशोक मित्तल के घर पर और उसके लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी पर। जालंधर और फगवाड़ा में ईडी की छापेमारी से केजरी गैंग में कोहराम मच गया है। मतलब केजरी का शराब माफियागिरी का धंधा बंद होते ही पार्टी का कमाई का खेल खत्म हुआ। अब ये जितने बनिया भाई हैं जो सिर्फ मालदार होने की वजह से पार्टी सोचिए जो पार्टी नैतिकता की बड़ी-बड़ी बातें करने आई। जो पार्टी पढ़े लिखे लोगों की पार्टी बनकर आई उसमें ऐसे ऐसे लोगों को लाया जाने लगा राज्यसभा भेजा

जाने लगा जिनका इस पार्टी के आंदोलन से संघर्ष से जिसका कोई वास्ता नहीं था केजरी को सिर्फ माल चाहिए था तो केजरी यूज़ करने लगा सवाल यह है कि जिस चड्डा पर केजरी के लोग सवाल उठा रहे हैं उस चड्डा को केजरी ने बनाया क्यों किस स्वार्थ से क्या योग्यता थी चड्डा की अब वो चड्डा काम का हो गया है संभवत चड्डा के पास एक सीडी है। शीश महल वाली सीडी। अब एक गसिप चल रही है कि चड्डा के पास शीश महल वाली वो सीडी है जिसमें स्वाति मालीवाल की पिटाई का चड्डा की ठुकाई का और फिर कई ऐसे खेल है जो चड्डा के पास है। दरअसल चड्डा अकाउंटेंट है, सीए है। आम आदमी पार्टी के इस तमाम पाप के धन का की जानकारी चड्डा के पास है। चड्डा के पास एक एक रिकॉर्ड है। पंजाब से कमाई कैसे की गई? दिल्ली में कैसे कमाई की गई? शराब माफिया गिरी के धंधे में कहां क्या हुआ क्योंकि चड्डा को केजरी ने इतना विश्वास किया हुआ था कि घरेलू है घर का है कल को घर का ही रहेगा अपने घर में रहेगा कल तो सब कुछ घर का माल घर में आ जाएगा राज्यसभा भी जाएगा माल भी कमाएगा पंजाब का प्रभारी भी बन जाएगा तो सब कुछ करेगा दरअसल भगवंत मान एक चीफ मिनिस्टर था चड्डा ही पंजाब का सुपर चीफ मिनिस्टर था चड्डा को पंजाब के पूरे पाप पता है। कहां खेल हो रहा है सब पता है। इसीलिए चड्डा अब गले की हड्डी बन चुका है। इस चड्डा को राज्यसभा में उप नेता से हटाकर केजरी ने अपनी कब्र खोद ली। दरअसल ये सब कुछ स्वार्थ का खेल था। चड्डा को बनाया क्यों? चड्डा का बिगाड़ा क्यों? इसी में केजरी फस गया है। स्वाति मालीवाल तो बस कटाक्ष मार रही है। चड्डा के पास वो तमाम साक्ष्य है। डॉक्यूमेंट्री प्रूफ है। स्वाति मालीवाल सिर्फ इतिहास बता रही है। हमारा ऐसा संबंध था। हम ऐसे थे। लेकिन चड्डा के पास पूरे रिकॉर्ड है। स्वाति वहां तक नहीं घुस पाई

जहां तक चड्डा घुसा हुआ था। इसीलिए यह चड्डा अब केजरी के लिए काल बन गया है। इस केजरी को लगता है कि वो बहुत चालाक है। उससे बड़ा धूर्त कोई नहीं। उससे बड़ा कनिंग नहीं। कोई उससे बड़ा बेईमान कोई नहीं। लेकिन उसे लगता है कि वो इस कदर कनिंग है। वो जिस कदर दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता का अपमान कर रहा है। उसे लगता है कि सिर्फ अपमान करने का ठेका उसे ही मिला हुआ है। लेकिन अब चड्डा ने तय कर लिया है कि वो सीडी अमित शाह को थमाएंगी। तो क्या चड्डा ने सीधी अमित शाह को थमा दी है या थमाना बाकी है? क्या चड्डा ही वो असली खिलाड़ी है जिसके वजह से अशोक मित्तल के घर पे छापेमारी हुई है? उसके ठिकानों पर क्या चड्डा ने पूरा क्लू दिया है? क्या आने वाले दिनों में चड्डा के निशाने पर चड्डा की सीढ़ी के निशाने पर कांडी केजरी के टीम के बहुत सारे लोगों का खेल होगा। चड्डा असली खिलाड़ी बनकर सामने आ गया है।जरा सोचिए चड्डा को लेकर अब जिनकी कोई औकात नहीं चड्डा के सामने वो सब मुंह खोल रहे हैं चड्डा को लेकर के कि जैसे चड्डा के ऊपर एहसान किया है कांडी ने जरा इनको सुनिए इस मोहतरमा को टेलीविजन चैनल पर उत्पात मचाते आती है सबसे लड़ती झगड़ती रहती है इसको चड्ढा जी अपने लिए जेड प्लस सिक्योरिटी भी मांगते हैं जो आज पता चल रहा है उनको मिल गई इस इस बात का दुख है कि अरविंद केजरीवाल जी ने आम आदमी पार्टी ने एक आम परिवार से आए लड़के को एक सामान्य कार्यकर्ता को सड़क से उठाकर संसद तक पहुंचा दिया और बदले में वो कैसी पेटी और अनग्रेटफुल हरकतें कर रहे हैं। इस बात का दुख है। इसको बहुत दुख है।फॉर एग्जांपल कैप्टन अमरिंदर को ईडी ने समंस भेजे थे हाल ही में फरवरी में और जिस ऑफिसर ने ईडी अधिकारी ने समन भेजे उनका तबादला हो गया तो सबको पता है कि भाजपा के नेता के यहां कोई यही यही उलजुलूल बातें हैं। अब सवाल यह है कि सड़क से उठाकर चड्डा ऐसा चड्डा में क्या था कि सड़क से उठा लिया चड्डा को चड्डा को सड़क से सड़क से उठा केजरी ने राज्यसभा क्यों भेज दिया? चड्डा को पंजाब जैसे राज्य का प्रभारी क्यों बना दिया? ये मोहतरमा जो कह रही हैं कि चड्डा को सड़क से उठा के एक आम आदमी को य बना दिया। एक और बाबू साहब आ गए हैं। अनुराग डांडा है। पार्टी लाइन पे अपना काम कर रहे हैं। ये भी आ गए चड्डा की चड्डी उतारने के लिए। जिनको हाल ही में ये लगता है कि भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब में भी चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। और जनता में भारतीय जनता पार्टी इतनी लोकप्रिय हो चुकी है। पार्टी का प्रवक्ता है अभी। आज तक हेडलाइंस टुडे में अंग्रेजी वाले चड्डा के जगह पे मित्तल साहब बन गए हैं प्रभारी आम आदमी पार्टी के। किस गुण से? तो ऐसे ऐसे आम आपियों से पूछा जाना चाहिए कि चड्डा के बारे में जो कह रहे हो सड़क से उठाकर तो सड़क छापों को क्यों राज्यसभा भेजा ऐसे सड़क छापों को राज्यसभा क्यों भेजा और यह सवाल उठा रहे हैं जेड प्लस जेड सुरक्षा दे दिया गया सोचिए चड्डा को आम आदमी

पार्टी ने जेड प्लस सुरक्षा दी हुई थी पंजाब में पंजाब में क्योंकि चड्डा कांग्रेस केजरी का खासम खास था तो चड्डा को जेड प्लस सुरक्षा थी तामझाम था घर में आएगा चड्डा अपना है चड्डा जेड प्लस सुरक्षा थी चड्डा को और उसकी सुरक्षा हटा ली क्यों हटा ली सुरक्षा किसी को दी जाती है थ्रेटनिंग के आधार पे उसके ऊपर खतरा होता है तो पंजाब में और दिल्ली में चड्डा के ऊपर खतरा बता के पंजाब और दिल्ली मेंकि सरकार है आम आदमी पार्टी की तो दोनों राज्यों में चड्डा को जेड प्लस सुरक्षा थी छीन ली गई तो गृह मंत्रालय ने थ्रेट के आधार पे चड्डा को जेड प्लस के बदले जेड श्रेणी की सुरक्षा दे दी है दिल्ली दिल्ली में क्योंकि अब पंजाब जाने का मतलब नहीं पंजाब का प्रभारी है नहीं अब सोचिए इस बात से आपत्ति है कि चड्डा को तो क्या चड्डा को मरवा करके कांडी केजरी एक बड़ा षड्यंत्र करना करना चाह रहा है। क्या चड्डा की हत्या की साजिश रचना चाह रहा है क्या बदला सबूत नष्ट करने के लिए? अब इस खेल को जरा समझने की कोशिश कीजिए। यदि राघव चड्डा आम आदमी पार्टी का सांसद उसके ऊपर खतरा था और वो आम आदमी पार्टी का राज्यसभा का सांसद है। राज्यसभा में उपनेता है। वो पंजाब का प्रभारी है। यदि


आम आदमी पार्टी ने उसके ऊपर खतरे को ध्यान में रखते हुए उसे जेड प्लस सुरक्षा दी। वो सीए है। पूरे आम आदमी पार्टी का लेखाजोखा उसके पास है। शराब घोटाला का लेखाजोखा है। उसके पास शीश महल बनाने में जो जो पाप किया गया है उसका लेखाजोखा है। तो क्या सबूत नष्ट करने के लिए कांडी केजरी गैंग इस राघव चड्डा की हत्या करवाना चाह रहा है। क्या सुरक्षा इसलिए हटा लिया गया ताकि राघव चड्डा की हत्या हो जाए। क्या एक बड़ी घातक इस चड्डाकि केजरी के राह में रो रहा है। चड्डाकि केजरी के खिलाफ सबूत है। चड्डा के पासकि सीढ़ी है। चड्डाकि कांडी केजरी का खेल कर सकता है। चड्डा स्वाति मालीवाल से ज्यादा घातक हो सकता है। चड्डा कोई आशुतोष जैसा चिरकुट नहीं है। वो कोई गंधौर यादव या कविराज की तरह चिरकुट नहीं है। चड्डा के पास पूरे सबूत और साक्ष्य है। चड्डा के पास डॉक्यूमेंट्री प्रूफ है। तो क्या उस चड्डा की हत्या की साजिश है? आखिर जब जेड प्लस सुरक्षा थी तो उसकी जेट सुरक्षा क्यों हटा ली गई? अमित शाह ने इसी को ध्यान में रखते हुए गृह मंत्रालय से सुरक्षा दी है। क्या गृह मंत्रालय को इस बात का अंदाजा है कि चड्डा की हत्या की साजिश रची गई है? क्या पंजाब में चड्डा की  हत्या की साजिश थी? ताकि चड्डा की हत्या करके सबूत नष्ट कर लिया जाए। उसको बचाया गया है? क्या चड्डा के पास कोई घातक सीडी है? ये बहुत महत्वपूर्ण है। यूं ही नहीं केजरी ने चड्डा को किनारा किया है और यूं ही नहीं चड्डा चड्डा की जेड प्लस सुरक्षा छीन ली गई और जब गृह मंत्रालय ने चड्डा को सुरक्षा दी तो पूरा आम आदमी पार्टी तिलमिला गया कि हम तो इसकी हत्या करवाना चाह रहे थे लेकिन ये तो अब बच गया। इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए कि क्या चड्डा की हत्या की साजिश थी? क्या चड्डा के पास कोई गंभीर सबूत है जिसकी वजह से चड्डा को निपटाना चाह रहा है? इस पार्टी को छोड़ के बहुत सारे लोग गए। आशुतोष गया है, कविराज गया है, गंधौर यादव गया है, स्वाति मालीवाल गई है। चड्डा के खिलाफ जिस तरह से आप ये हमलावर हो चुके हैं। इस तरह से आम आदमी पार्टी अपने पार्टी से निकाले गए या पार्टी छोड़ के गए। किसी भी आदमी के खिलाफ हमलावर नहीं हुआ। लेकिन चड्डा तूने तो अभी पार्टी भी नहीं छोड़ी है। फिर चड्डा के खिलाफ हमलावर क्यों है? इस मामले को बहुत गंभीरता से समझना चाहिए। गृह मंत्रालय को गंभीरता से लेना चाहिए। मुझे लगता है सरकार की पैनी नजर होगी कि क्या


चड्डा को मार करके एक बहुत बड़ा सबूत नष्ट करने की कोशिश की जा रही है। आखिर चड्डा से इतनी नफरत क्यों है आपियों को ये पता किया जाना बहुत जरूरी है। आपको पूरा ये खेल अब बेहतर तरीके से समझ में आ गया होगा कि चड्डा के लिए इतनी नफरत क्यों है। फिर से समझिए आम आदमी पार्टी छोड़ के शांति भूषण गए। प्रशांत भूषण गए। कविराज गया, गंध यादव गया, आनंद कुमार गए, स्वाति मालीवाल भी एक तरह से गई। लेकिन आम आदमी पार्टी किसी के खिलाफ इतना हमलावर नहीं हुई। चड्डा ने तो अभी पार्टी भी नहीं छोड़ी है। चड्डा से इतनी नफरत क्यों? चड्डा का चरित्र हनन के लिए पूरा कांडी केजरी गैंग क्यों मैदान में आ गया है? चड्डा का चरित्र हनन तो छोड़िए। चड्डा की हत्या की साजिश इसका मतलब है। इसीलिए उसकी जेड प्लस सुरक्षा हटाई गई और जब सरकार ने दी अब देखिए ऐसा नहीं कि चड्डा चड्डा को स्पेशली सुरक्षा दे दी गई। चड्डा को जेड प्लस सुरक्षा थी। उसको छीन लिया गया। उसके जगह पे जेड सुरक्षा दी गई है। और ये बेचैन कर रहा है कांडी केजरी गैंग को। सोचिए ये आदमी कितना शातिर है और भारतीय राजनीति का कितना कनिंग कितना घिनौना चेहरा है और दिल्ली लगातार तीन बार ऐसे घिनौने चेहरे को चुनती रही और बर्बाद हो गई।


इस दिल्ली को इस देश को कांडी राजनेताओं से बचाने की जरूरत है।



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संभवत चड्डा के पास एक सीडी है शीश महल वाली सीडी

संभवत चड्डा के पास एक सीडी है शीश महल वाली सीडी
संभवत चड्डा के पास एक सीडी है शीश महल वाली सीडी

 


भारतीय राजनीति में बदलाव के लिए आया था केजरी। एक जन आंदोलन की उपज किए थे। लीक से हटकर राजनीति करने के लिए आया केजरी। शराब माफियागिरी के धंधा करने लगा। इस धुर् और शातिर केजरी को यह लगता है कि इस धरती पर उससे ज्यादा कोई काबिल नहीं। केजरीवाल को हमेशा लगता है कि वही सिर्फ पढ़ा लिखा है इस धरती पर और वही सिर्फ मूर्ख बना सकता है।अब उसी के पाले हुए खिलाड़ी उसी को उसी का घोड़ा पिलाने लगे। केजरीवाल भारतीय राजनीति का सही मायने में एक ऐसा घणित चेहरा है


जो भारत में उम्मीदों की राजनीति की हत्या करता है। केजरीवाल से भारतीय राजनीति में एक ऐसा शख्स जो एक आंदोलन से निकला और जनता ने उस पर भरोसा किया। वो केजरी दिल्ली को बदलने निका था। दिल्ली को बर्बाद करके छोड़ दिया। वो कमाई के लिए शराब की माफियागिरी करने लगा। शराब घोटाला करने वाला केजरी जिसे देश की सबसे बड़ी अदालत तक ने बेल नहीं दिया। लेकिन एक खेल हुआ उस पर कभी और चर्चा करूंगा। एक ऐसा खेल केजरी गैंग ने किया कि वो आरोप मुक्त हो गया। लेकिन हाई कोर्ट ने जब ट्रायल कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुनवाई की तो उस ट्रायल


कोर्ट की साख खराब करने की आतुर हो गया।कांडी केजरी के आंदोलन के समय जितने प्रभावशाली व्यक्ति थे सबको केजरी ने अपमानित करके बाहर कर दिया और कुछ चेहरे चपाटे इसने पा लिए। इसमें एक चिकना चड्डा था राघव चड्डा। चार्टर्ड अकाउंटेंट चड्डा केजरी का सबसे प्रिय था। केजरी उसे अपने घर का हिस्सा बनाना चाहता था। केजरी ने इस चिकने चड्डा में ये देखा कुछ सपना देखा। तो सोचिए इस चड्डा को केजरी ने राज्यसभा भेज दिया। यह चड्डा इतना प्यारा हो गया, इतना दुलारा हो गया कि इसके लिए घरेलू सपना देखने लगा। ये सपना उसका चकनाचूर जब तक हुआ तब तक चड्डा बहुत कुछ पा चुका था। चड्डा राज्यसभा जा चुका था और राज्यसभा ऐसी जगह है जहां से आप किसी को हटा नहीं सकते। छ साल उसकी बुकिंग हो गई। वो पार्टी विरोधी गतिविधि करे या ना करे। चड्डा केजरी के पहले सपने को तोड़ दिया जब उसने एक हीरोइन से ब्याह करने का की घोषणा कर दी और केजरी का वो कविराज ने इस बात की घोषणा कर दी कि बेटा ये मरा जिस दिन उसने हीरोइन से शादी करने की बात कर दी उसी दिन केजरी का वो सपना टूट गया जिस सपने के तहत केजरी ने उसे उसे राज्यसभा भेजा और जब पंजाब में सरकार बनी तो केजरी ने चड्डा को सुपर सीएम बना दिया। अब सोचिए कि चड्डा में ऐसा क्या था कि केजरी ने उसे राज्यसभा भेज दिया। इतने काबिल काबिल लोग इस आंदोलन से जिसने अपने आप को पार्टी में खपाया वो कुमार विश्वास, वो योगेंद्र यादव, वो आनंद कुमार, वो प्रशांत भूषण, वो शांति भूषण वो तमाम लोग बाहर हो गए। लेकिन चिकना चड्डा केजरी का प्रिय हो गया।केजरी घर में उसे लाना चाहता था और घरेलू सपने देखे जाने लगे। इसीलिए चड्डा को पूरी छूट दी गई। चड्डा पंजाब का प्रभारी बन गया। चड्डा को जेड प्लस सुरक्षा दी गई। आ घर में आएंगे चिकने हैं जेड प्लस सुरक्षा होगा चड्डा को वो तमाम सुविधाएं मिलने लगी जो कांडी केजरी को मिलती थी जो भग्गू को मिलती थी वो तमाम सुविधाएं चड्डा को मिलने लगी लेकिन जो ही चड्डा ने हीरोइन से शादी करने की बात की चड्डा की चमक केजरी ने उतारनी शुरू कर दी और चड्डा से कहा गया कि बेटा राज्यसभा छोड़ दो इस्तीफा दे दो चड्डा बीबी संग हनीमून खून मनाने लंदन चला गया अपनी आंख में परेशानी बताकर कहते हैं चड्डा की शीश महल में ठुकाई वैसी हुई जैसे स्वाति मालीवाल की हुई स्वाति मालीवाल ने इसे पब्लिक कर दिया स्वाति मालीवाल भाग करके गई थाने में रिकॉर्ड दर्ज किया लेकिन चड्डा ने कुछ लाज रख ली केजरी की और चड्डा भाग कर लंदन चला गया अब चड्डा केजरी का प्रिय नहीं रहा तो चड्डा की जेड प्लस सुरक्षा छीन ली गई। उसके बाद चड्डा नेता प्रतिपक्ष उपनेता था राज्यसभा में। सोचिए इस चड्डा में ऐसी क्या खासियत थी सीए था। तो पूरी पार्टी का माल कहां है कैसे है जाना है सब चड्डा को पता है। केजरी को डर इसी बात का था कि चड्डा कहीं पोल ना खोल दे। अब क्योंकि चड्डा केजरी का प्रिय नहीं रहा। सपना तोड़ने वाला रहा। घर में एंट्री अब बैन बैन हो गई। तो पर कतरने शुरू कर दिए। माना जा रहा है कि चड्डा को और स्वाति मालीवाल दोनों को राज्यसभा छोड़ने के लिए कहा गया था। ना चड्डा ने छोड़ा ना स्वाति ने छोड़ा। ये हर किसी को भ्रम होता है। मैंने उसे बनाया। आज केजरी के चमचे मैदान में आकर के कह रहे हैं केजरी के चेले चपाटे कि चड्डा को केजरी ने ये सब दिया। ये वो लोग कह रहे हैं जिनको नहीं मिला। यह सब उसी लायक थे। चड्डा के स्टैंडर्ड के ही थे। लेकिन चड्डा बड़ा बन गया। अब इस चड्डा के जगह जो एक गुप्ता जी आए अशोक मित्तल मालदार अशोक मित्तल इस कांडी केजरी की पार्टी में कमाल की है आंदोलन से संघर्ष करके इस पार्टी को जिन लोगों ने बड़ा किया केजरी ने उसे किनारे कर दिया और दोद बनिया ले आए मालदार जो पार्टी को सींच सके क्योंकि शराब माफियागिरी का धंध था खत्म खत्म हो गया था। शराब से लूट का खेल खत्म हो चुका था। तो इसीलिए पंजाब से राज्यसभा में जो सांसद लाए गए चड्डा के अलावा सब वो मालदार लोग थे। उसी में से एक अशोक मित्तल है। अशोक मित्तल को चड्डा की जगह पे मालदार होने के कारण माल देने के कारण केजरी ने उसे उपनेता बना दिया। तब पता चला कि उसका जो

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी है वो भ्रष्टाचार का केंद्र है। ईडी ने लवली प्रोफेशनल इंस्टट्यूट पर छापेमारी कर दी। अशोक मित्तल के घर पर और उसके लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी पर। जालंधर और फगवाड़ा में ईडी की छापेमारी से केजरी गैंग में कोहराम मच गया है। मतलब केजरी का शराब माफियागिरी का धंधा बंद होते ही पार्टी का कमाई का खेल खत्म हुआ। अब ये जितने बनिया भाई हैं जो सिर्फ मालदार होने की वजह से पार्टी सोचिए जो पार्टी नैतिकता की बड़ी-बड़ी बातें करने आई। जो पार्टी पढ़े लिखे लोगों की पार्टी बनकर आई उसमें ऐसे ऐसे लोगों को लाया जाने लगा राज्यसभा भेजा

जाने लगा जिनका इस पार्टी के आंदोलन से संघर्ष से जिसका कोई वास्ता नहीं था केजरी को सिर्फ माल चाहिए था तो केजरी यूज़ करने लगा सवाल यह है कि जिस चड्डा पर केजरी के लोग सवाल उठा रहे हैं उस चड्डा को केजरी ने बनाया क्यों किस स्वार्थ से क्या योग्यता थी चड्डा की अब वो चड्डा काम का हो गया है संभवत चड्डा के पास एक सीडी है। शीश महल वाली सीडी। अब एक गसिप चल रही है कि चड्डा के पास शीश महल वाली वो सीडी है जिसमें स्वाति मालीवाल की पिटाई का चड्डा की ठुकाई का और फिर कई ऐसे खेल है जो चड्डा के पास है। दरअसल चड्डा अकाउंटेंट है, सीए है। आम आदमी पार्टी के इस तमाम पाप के धन का की जानकारी चड्डा के पास है। चड्डा के पास एक एक रिकॉर्ड है। पंजाब से कमाई कैसे की गई? दिल्ली में कैसे कमाई की गई? शराब माफिया गिरी के धंधे में कहां क्या हुआ क्योंकि चड्डा को केजरी ने इतना विश्वास किया हुआ था कि घरेलू है घर का है कल को घर का ही रहेगा अपने घर में रहेगा कल तो सब कुछ घर का माल घर में आ जाएगा राज्यसभा भी जाएगा माल भी कमाएगा पंजाब का प्रभारी भी बन जाएगा तो सब कुछ करेगा दरअसल भगवंत मान एक चीफ मिनिस्टर था चड्डा ही पंजाब का सुपर चीफ मिनिस्टर था चड्डा को पंजाब के पूरे पाप पता है। कहां खेल हो रहा है सब पता है। इसीलिए चड्डा अब गले की हड्डी बन चुका है। इस चड्डा को राज्यसभा में उप नेता से हटाकर केजरी ने अपनी कब्र खोद ली। दरअसल ये सब कुछ स्वार्थ का खेल था। चड्डा को बनाया क्यों? चड्डा का बिगाड़ा क्यों? इसी में केजरी फस गया है। स्वाति मालीवाल तो बस कटाक्ष मार रही है। चड्डा के पास वो तमाम साक्ष्य है। डॉक्यूमेंट्री प्रूफ है। स्वाति मालीवाल सिर्फ इतिहास बता रही है। हमारा ऐसा संबंध था। हम ऐसे थे। लेकिन चड्डा के पास पूरे रिकॉर्ड है। स्वाति वहां तक नहीं घुस पाई

जहां तक चड्डा घुसा हुआ था। इसीलिए यह चड्डा अब केजरी के लिए काल बन गया है। इस केजरी को लगता है कि वो बहुत चालाक है। उससे बड़ा धूर्त कोई नहीं। उससे बड़ा कनिंग नहीं। कोई उससे बड़ा बेईमान कोई नहीं। लेकिन उसे लगता है कि वो इस कदर कनिंग है। वो जिस कदर दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता का अपमान कर रहा है। उसे लगता है कि सिर्फ अपमान करने का ठेका उसे ही मिला हुआ है। लेकिन अब चड्डा ने तय कर लिया है कि वो सीडी अमित शाह को थमाएंगी। तो क्या चड्डा ने सीधी अमित शाह को थमा दी है या थमाना बाकी है? क्या चड्डा ही वो असली खिलाड़ी है जिसके वजह से अशोक मित्तल के घर पे छापेमारी हुई है? उसके ठिकानों पर क्या चड्डा ने पूरा क्लू दिया है? क्या आने वाले दिनों में चड्डा के निशाने पर चड्डा की सीढ़ी के निशाने पर कांडी केजरी के टीम के बहुत सारे लोगों का खेल होगा। चड्डा असली खिलाड़ी बनकर सामने आ गया है।जरा सोचिए चड्डा को लेकर अब जिनकी कोई औकात नहीं चड्डा के सामने वो सब मुंह खोल रहे हैं चड्डा को लेकर के कि जैसे चड्डा के ऊपर एहसान किया है कांडी ने जरा इनको सुनिए इस मोहतरमा को टेलीविजन चैनल पर उत्पात मचाते आती है सबसे लड़ती झगड़ती रहती है इसको चड्ढा जी अपने लिए जेड प्लस सिक्योरिटी भी मांगते हैं जो आज पता चल रहा है उनको मिल गई इस इस बात का दुख है कि अरविंद केजरीवाल जी ने आम आदमी पार्टी ने एक आम परिवार से आए लड़के को एक सामान्य कार्यकर्ता को सड़क से उठाकर संसद तक पहुंचा दिया और बदले में वो कैसी पेटी और अनग्रेटफुल हरकतें कर रहे हैं। इस बात का दुख है। इसको बहुत दुख है।फॉर एग्जांपल कैप्टन अमरिंदर को ईडी ने समंस भेजे थे हाल ही में फरवरी में और जिस ऑफिसर ने ईडी अधिकारी ने समन भेजे उनका तबादला हो गया तो सबको पता है कि भाजपा के नेता के यहां कोई यही यही उलजुलूल बातें हैं। अब सवाल यह है कि सड़क से उठाकर चड्डा ऐसा चड्डा में क्या था कि सड़क से उठा लिया चड्डा को चड्डा को सड़क से सड़क से उठा केजरी ने राज्यसभा क्यों भेज दिया? चड्डा को पंजाब जैसे राज्य का प्रभारी क्यों बना दिया? ये मोहतरमा जो कह रही हैं कि चड्डा को सड़क से उठा के एक आम आदमी को य बना दिया। एक और बाबू साहब आ गए हैं। अनुराग डांडा है। पार्टी लाइन पे अपना काम कर रहे हैं। ये भी आ गए चड्डा की चड्डी उतारने के लिए। जिनको हाल ही में ये लगता है कि भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब में भी चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। और जनता में भारतीय जनता पार्टी इतनी लोकप्रिय हो चुकी है। पार्टी का प्रवक्ता है अभी। आज तक हेडलाइंस टुडे में अंग्रेजी वाले चड्डा के जगह पे मित्तल साहब बन गए हैं प्रभारी आम आदमी पार्टी के। किस गुण से? तो ऐसे ऐसे आम आपियों से पूछा जाना चाहिए कि चड्डा के बारे में जो कह रहे हो सड़क से उठाकर तो सड़क छापों को क्यों राज्यसभा भेजा ऐसे सड़क छापों को राज्यसभा क्यों भेजा और यह सवाल उठा रहे हैं जेड प्लस जेड सुरक्षा दे दिया गया सोचिए चड्डा को आम आदमी

पार्टी ने जेड प्लस सुरक्षा दी हुई थी पंजाब में पंजाब में क्योंकि चड्डा कांग्रेस केजरी का खासम खास था तो चड्डा को जेड प्लस सुरक्षा थी तामझाम था घर में आएगा चड्डा अपना है चड्डा जेड प्लस सुरक्षा थी चड्डा को और उसकी सुरक्षा हटा ली क्यों हटा ली सुरक्षा किसी को दी जाती है थ्रेटनिंग के आधार पे उसके ऊपर खतरा होता है तो पंजाब में और दिल्ली में चड्डा के ऊपर खतरा बता के पंजाब और दिल्ली मेंकि सरकार है आम आदमी पार्टी की तो दोनों राज्यों में चड्डा को जेड प्लस सुरक्षा थी छीन ली गई तो गृह मंत्रालय ने थ्रेट के आधार पे चड्डा को जेड प्लस के बदले जेड श्रेणी की सुरक्षा दे दी है दिल्ली दिल्ली में क्योंकि अब पंजाब जाने का मतलब नहीं पंजाब का प्रभारी है नहीं अब सोचिए इस बात से आपत्ति है कि चड्डा को तो क्या चड्डा को मरवा करके कांडी केजरी एक बड़ा षड्यंत्र करना करना चाह रहा है। क्या चड्डा की हत्या की साजिश रचना चाह रहा है क्या बदला सबूत नष्ट करने के लिए? अब इस खेल को जरा समझने की कोशिश कीजिए। यदि राघव चड्डा आम आदमी पार्टी का सांसद उसके ऊपर खतरा था और वो आम आदमी पार्टी का राज्यसभा का सांसद है। राज्यसभा में उपनेता है। वो पंजाब का प्रभारी है। यदि


आम आदमी पार्टी ने उसके ऊपर खतरे को ध्यान में रखते हुए उसे जेड प्लस सुरक्षा दी। वो सीए है। पूरे आम आदमी पार्टी का लेखाजोखा उसके पास है। शराब घोटाला का लेखाजोखा है। उसके पास शीश महल बनाने में जो जो पाप किया गया है उसका लेखाजोखा है। तो क्या सबूत नष्ट करने के लिए कांडी केजरी गैंग इस राघव चड्डा की हत्या करवाना चाह रहा है। क्या सुरक्षा इसलिए हटा लिया गया ताकि राघव चड्डा की हत्या हो जाए। क्या एक बड़ी घातक इस चड्डाकि केजरी के राह में रो रहा है। चड्डाकि केजरी के खिलाफ सबूत है। चड्डा के पासकि सीढ़ी है। चड्डाकि कांडी केजरी का खेल कर सकता है। चड्डा स्वाति मालीवाल से ज्यादा घातक हो सकता है। चड्डा कोई आशुतोष जैसा चिरकुट नहीं है। वो कोई गंधौर यादव या कविराज की तरह चिरकुट नहीं है। चड्डा के पास पूरे सबूत और साक्ष्य है। चड्डा के पास डॉक्यूमेंट्री प्रूफ है। तो क्या उस चड्डा की हत्या की साजिश है? आखिर जब जेड प्लस सुरक्षा थी तो उसकी जेट सुरक्षा क्यों हटा ली गई? अमित शाह ने इसी को ध्यान में रखते हुए गृह मंत्रालय से सुरक्षा दी है। क्या गृह मंत्रालय को इस बात का अंदाजा है कि चड्डा की हत्या की साजिश रची गई है? क्या पंजाब में चड्डा की  हत्या की साजिश थी? ताकि चड्डा की हत्या करके सबूत नष्ट कर लिया जाए। उसको बचाया गया है? क्या चड्डा के पास कोई घातक सीडी है? ये बहुत महत्वपूर्ण है। यूं ही नहीं केजरी ने चड्डा को किनारा किया है और यूं ही नहीं चड्डा चड्डा की जेड प्लस सुरक्षा छीन ली गई और जब गृह मंत्रालय ने चड्डा को सुरक्षा दी तो पूरा आम आदमी पार्टी तिलमिला गया कि हम तो इसकी हत्या करवाना चाह रहे थे लेकिन ये तो अब बच गया। इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए कि क्या चड्डा की हत्या की साजिश थी? क्या चड्डा के पास कोई गंभीर सबूत है जिसकी वजह से चड्डा को निपटाना चाह रहा है? इस पार्टी को छोड़ के बहुत सारे लोग गए। आशुतोष गया है, कविराज गया है, गंधौर यादव गया है, स्वाति मालीवाल गई है। चड्डा के खिलाफ जिस तरह से आप ये हमलावर हो चुके हैं। इस तरह से आम आदमी पार्टी अपने पार्टी से निकाले गए या पार्टी छोड़ के गए। किसी भी आदमी के खिलाफ हमलावर नहीं हुआ। लेकिन चड्डा तूने तो अभी पार्टी भी नहीं छोड़ी है। फिर चड्डा के खिलाफ हमलावर क्यों है? इस मामले को बहुत गंभीरता से समझना चाहिए। गृह मंत्रालय को गंभीरता से लेना चाहिए। मुझे लगता है सरकार की पैनी नजर होगी कि क्या


चड्डा को मार करके एक बहुत बड़ा सबूत नष्ट करने की कोशिश की जा रही है। आखिर चड्डा से इतनी नफरत क्यों है आपियों को ये पता किया जाना बहुत जरूरी है। आपको पूरा ये खेल अब बेहतर तरीके से समझ में आ गया होगा कि चड्डा के लिए इतनी नफरत क्यों है। फिर से समझिए आम आदमी पार्टी छोड़ के शांति भूषण गए। प्रशांत भूषण गए। कविराज गया, गंध यादव गया, आनंद कुमार गए, स्वाति मालीवाल भी एक तरह से गई। लेकिन आम आदमी पार्टी किसी के खिलाफ इतना हमलावर नहीं हुई। चड्डा ने तो अभी पार्टी भी नहीं छोड़ी है। चड्डा से इतनी नफरत क्यों? चड्डा का चरित्र हनन के लिए पूरा कांडी केजरी गैंग क्यों मैदान में आ गया है? चड्डा का चरित्र हनन तो छोड़िए। चड्डा की हत्या की साजिश इसका मतलब है। इसीलिए उसकी जेड प्लस सुरक्षा हटाई गई और जब सरकार ने दी अब देखिए ऐसा नहीं कि चड्डा चड्डा को स्पेशली सुरक्षा दे दी गई। चड्डा को जेड प्लस सुरक्षा थी। उसको छीन लिया गया। उसके जगह पे जेड सुरक्षा दी गई है। और ये बेचैन कर रहा है कांडी केजरी गैंग को। सोचिए ये आदमी कितना शातिर है और भारतीय राजनीति का कितना कनिंग कितना घिनौना चेहरा है और दिल्ली लगातार तीन बार ऐसे घिनौने चेहरे को चुनती रही और बर्बाद हो गई।


इस दिल्ली को इस देश को कांडी राजनेताओं से बचाने की जरूरत है।



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April 16, 2026 at 09:05AM
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April 16, 2026 at 09:13AM

संभवत चड्डा के पास एक सीडी है शीश महल वाली सीडी

संभवत चड्डा के पास एक सीडी है शीश महल वाली सीडी

 


भारतीय राजनीति में बदलाव के लिए आया था केजरी। एक जन आंदोलन की उपज किए थे। लीक से हटकर राजनीति करने के लिए आया केजरी। शराब माफियागिरी के धंधा करने लगा। इस धुर् और शातिर केजरी को यह लगता है कि इस धरती पर उससे ज्यादा कोई काबिल नहीं। केजरीवाल को हमेशा लगता है कि वही सिर्फ पढ़ा लिखा है इस धरती पर और वही सिर्फ मूर्ख बना सकता है।अब उसी के पाले हुए खिलाड़ी उसी को उसी का घोड़ा पिलाने लगे। केजरीवाल भारतीय राजनीति का सही मायने में एक ऐसा घणित चेहरा है


जो भारत में उम्मीदों की राजनीति की हत्या करता है। केजरीवाल से भारतीय राजनीति में एक ऐसा शख्स जो एक आंदोलन से निकला और जनता ने उस पर भरोसा किया। वो केजरी दिल्ली को बदलने निका था। दिल्ली को बर्बाद करके छोड़ दिया। वो कमाई के लिए शराब की माफियागिरी करने लगा। शराब घोटाला करने वाला केजरी जिसे देश की सबसे बड़ी अदालत तक ने बेल नहीं दिया। लेकिन एक खेल हुआ उस पर कभी और चर्चा करूंगा। एक ऐसा खेल केजरी गैंग ने किया कि वो आरोप मुक्त हो गया। लेकिन हाई कोर्ट ने जब ट्रायल कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुनवाई की तो उस ट्रायल


कोर्ट की साख खराब करने की आतुर हो गया।कांडी केजरी के आंदोलन के समय जितने प्रभावशाली व्यक्ति थे सबको केजरी ने अपमानित करके बाहर कर दिया और कुछ चेहरे चपाटे इसने पा लिए। इसमें एक चिकना चड्डा था राघव चड्डा। चार्टर्ड अकाउंटेंट चड्डा केजरी का सबसे प्रिय था। केजरी उसे अपने घर का हिस्सा बनाना चाहता था। केजरी ने इस चिकने चड्डा में ये देखा कुछ सपना देखा। तो सोचिए इस चड्डा को केजरी ने राज्यसभा भेज दिया। यह चड्डा इतना प्यारा हो गया, इतना दुलारा हो गया कि इसके लिए घरेलू सपना देखने लगा। ये सपना उसका चकनाचूर जब तक हुआ तब तक चड्डा बहुत कुछ पा चुका था। चड्डा राज्यसभा जा चुका था और राज्यसभा ऐसी जगह है जहां से आप किसी को हटा नहीं सकते। छ साल उसकी बुकिंग हो गई। वो पार्टी विरोधी गतिविधि करे या ना करे। चड्डा केजरी के पहले सपने को तोड़ दिया जब उसने एक हीरोइन से ब्याह करने का की घोषणा कर दी और केजरी का वो कविराज ने इस बात की घोषणा कर दी कि बेटा ये मरा जिस दिन उसने हीरोइन से शादी करने की बात कर दी उसी दिन केजरी का वो सपना टूट गया जिस सपने के तहत केजरी ने उसे उसे राज्यसभा भेजा और जब पंजाब में सरकार बनी तो केजरी ने चड्डा को सुपर सीएम बना दिया। अब सोचिए कि चड्डा में ऐसा क्या था कि केजरी ने उसे राज्यसभा भेज दिया। इतने काबिल काबिल लोग इस आंदोलन से जिसने अपने आप को पार्टी में खपाया वो कुमार विश्वास, वो योगेंद्र यादव, वो आनंद कुमार, वो प्रशांत भूषण, वो शांति भूषण वो तमाम लोग बाहर हो गए। लेकिन चिकना चड्डा केजरी का प्रिय हो गया।केजरी घर में उसे लाना चाहता था और घरेलू सपने देखे जाने लगे। इसीलिए चड्डा को पूरी छूट दी गई। चड्डा पंजाब का प्रभारी बन गया। चड्डा को जेड प्लस सुरक्षा दी गई। आ घर में आएंगे चिकने हैं जेड प्लस सुरक्षा होगा चड्डा को वो तमाम सुविधाएं मिलने लगी जो कांडी केजरी को मिलती थी जो भग्गू को मिलती थी वो तमाम सुविधाएं चड्डा को मिलने लगी लेकिन जो ही चड्डा ने हीरोइन से शादी करने की बात की चड्डा की चमक केजरी ने उतारनी शुरू कर दी और चड्डा से कहा गया कि बेटा राज्यसभा छोड़ दो इस्तीफा दे दो चड्डा बीबी संग हनीमून खून मनाने लंदन चला गया अपनी आंख में परेशानी बताकर कहते हैं चड्डा की शीश महल में ठुकाई वैसी हुई जैसे स्वाति मालीवाल की हुई स्वाति मालीवाल ने इसे पब्लिक कर दिया स्वाति मालीवाल भाग करके गई थाने में रिकॉर्ड दर्ज किया लेकिन चड्डा ने कुछ लाज रख ली केजरी की और चड्डा भाग कर लंदन चला गया अब चड्डा केजरी का प्रिय नहीं रहा तो चड्डा की जेड प्लस सुरक्षा छीन ली गई। उसके बाद चड्डा नेता प्रतिपक्ष उपनेता था राज्यसभा में। सोचिए इस चड्डा में ऐसी क्या खासियत थी सीए था। तो पूरी पार्टी का माल कहां है कैसे है जाना है सब चड्डा को पता है। केजरी को डर इसी बात का था कि चड्डा कहीं पोल ना खोल दे। अब क्योंकि चड्डा केजरी का प्रिय नहीं रहा। सपना तोड़ने वाला रहा। घर में एंट्री अब बैन बैन हो गई। तो पर कतरने शुरू कर दिए। माना जा रहा है कि चड्डा को और स्वाति मालीवाल दोनों को राज्यसभा छोड़ने के लिए कहा गया था। ना चड्डा ने छोड़ा ना स्वाति ने छोड़ा। ये हर किसी को भ्रम होता है। मैंने उसे बनाया। आज केजरी के चमचे मैदान में आकर के कह रहे हैं केजरी के चेले चपाटे कि चड्डा को केजरी ने ये सब दिया। ये वो लोग कह रहे हैं जिनको नहीं मिला। यह सब उसी लायक थे। चड्डा के स्टैंडर्ड के ही थे। लेकिन चड्डा बड़ा बन गया। अब इस चड्डा के जगह जो एक गुप्ता जी आए अशोक मित्तल मालदार अशोक मित्तल इस कांडी केजरी की पार्टी में कमाल की है आंदोलन से संघर्ष करके इस पार्टी को जिन लोगों ने बड़ा किया केजरी ने उसे किनारे कर दिया और दोद बनिया ले आए मालदार जो पार्टी को सींच सके क्योंकि शराब माफियागिरी का धंध था खत्म खत्म हो गया था। शराब से लूट का खेल खत्म हो चुका था। तो इसीलिए पंजाब से राज्यसभा में जो सांसद लाए गए चड्डा के अलावा सब वो मालदार लोग थे। उसी में से एक अशोक मित्तल है। अशोक मित्तल को चड्डा की जगह पे मालदार होने के कारण माल देने के कारण केजरी ने उसे उपनेता बना दिया। तब पता चला कि उसका जो

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी है वो भ्रष्टाचार का केंद्र है। ईडी ने लवली प्रोफेशनल इंस्टट्यूट पर छापेमारी कर दी। अशोक मित्तल के घर पर और उसके लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी पर। जालंधर और फगवाड़ा में ईडी की छापेमारी से केजरी गैंग में कोहराम मच गया है। मतलब केजरी का शराब माफियागिरी का धंधा बंद होते ही पार्टी का कमाई का खेल खत्म हुआ। अब ये जितने बनिया भाई हैं जो सिर्फ मालदार होने की वजह से पार्टी सोचिए जो पार्टी नैतिकता की बड़ी-बड़ी बातें करने आई। जो पार्टी पढ़े लिखे लोगों की पार्टी बनकर आई उसमें ऐसे ऐसे लोगों को लाया जाने लगा राज्यसभा भेजा

जाने लगा जिनका इस पार्टी के आंदोलन से संघर्ष से जिसका कोई वास्ता नहीं था केजरी को सिर्फ माल चाहिए था तो केजरी यूज़ करने लगा सवाल यह है कि जिस चड्डा पर केजरी के लोग सवाल उठा रहे हैं उस चड्डा को केजरी ने बनाया क्यों किस स्वार्थ से क्या योग्यता थी चड्डा की अब वो चड्डा काम का हो गया है संभवत चड्डा के पास एक सीडी है। शीश महल वाली सीडी। अब एक गसिप चल रही है कि चड्डा के पास शीश महल वाली वो सीडी है जिसमें स्वाति मालीवाल की पिटाई का चड्डा की ठुकाई का और फिर कई ऐसे खेल है जो चड्डा के पास है। दरअसल चड्डा अकाउंटेंट है, सीए है। आम आदमी पार्टी के इस तमाम पाप के धन का की जानकारी चड्डा के पास है। चड्डा के पास एक एक रिकॉर्ड है। पंजाब से कमाई कैसे की गई? दिल्ली में कैसे कमाई की गई? शराब माफिया गिरी के धंधे में कहां क्या हुआ क्योंकि चड्डा को केजरी ने इतना विश्वास किया हुआ था कि घरेलू है घर का है कल को घर का ही रहेगा अपने घर में रहेगा कल तो सब कुछ घर का माल घर में आ जाएगा राज्यसभा भी जाएगा माल भी कमाएगा पंजाब का प्रभारी भी बन जाएगा तो सब कुछ करेगा दरअसल भगवंत मान एक चीफ मिनिस्टर था चड्डा ही पंजाब का सुपर चीफ मिनिस्टर था चड्डा को पंजाब के पूरे पाप पता है। कहां खेल हो रहा है सब पता है। इसीलिए चड्डा अब गले की हड्डी बन चुका है। इस चड्डा को राज्यसभा में उप नेता से हटाकर केजरी ने अपनी कब्र खोद ली। दरअसल ये सब कुछ स्वार्थ का खेल था। चड्डा को बनाया क्यों? चड्डा का बिगाड़ा क्यों? इसी में केजरी फस गया है। स्वाति मालीवाल तो बस कटाक्ष मार रही है। चड्डा के पास वो तमाम साक्ष्य है। डॉक्यूमेंट्री प्रूफ है। स्वाति मालीवाल सिर्फ इतिहास बता रही है। हमारा ऐसा संबंध था। हम ऐसे थे। लेकिन चड्डा के पास पूरे रिकॉर्ड है। स्वाति वहां तक नहीं घुस पाई

जहां तक चड्डा घुसा हुआ था। इसीलिए यह चड्डा अब केजरी के लिए काल बन गया है। इस केजरी को लगता है कि वो बहुत चालाक है। उससे बड़ा धूर्त कोई नहीं। उससे बड़ा कनिंग नहीं। कोई उससे बड़ा बेईमान कोई नहीं। लेकिन उसे लगता है कि वो इस कदर कनिंग है। वो जिस कदर दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता का अपमान कर रहा है। उसे लगता है कि सिर्फ अपमान करने का ठेका उसे ही मिला हुआ है। लेकिन अब चड्डा ने तय कर लिया है कि वो सीडी अमित शाह को थमाएंगी। तो क्या चड्डा ने सीधी अमित शाह को थमा दी है या थमाना बाकी है? क्या चड्डा ही वो असली खिलाड़ी है जिसके वजह से अशोक मित्तल के घर पे छापेमारी हुई है? उसके ठिकानों पर क्या चड्डा ने पूरा क्लू दिया है? क्या आने वाले दिनों में चड्डा के निशाने पर चड्डा की सीढ़ी के निशाने पर कांडी केजरी के टीम के बहुत सारे लोगों का खेल होगा। चड्डा असली खिलाड़ी बनकर सामने आ गया है।जरा सोचिए चड्डा को लेकर अब जिनकी कोई औकात नहीं चड्डा के सामने वो सब मुंह खोल रहे हैं चड्डा को लेकर के कि जैसे चड्डा के ऊपर एहसान किया है कांडी ने जरा इनको सुनिए इस मोहतरमा को टेलीविजन चैनल पर उत्पात मचाते आती है सबसे लड़ती झगड़ती रहती है इसको चड्ढा जी अपने लिए जेड प्लस सिक्योरिटी भी मांगते हैं जो आज पता चल रहा है उनको मिल गई इस इस बात का दुख है कि अरविंद केजरीवाल जी ने आम आदमी पार्टी ने एक आम परिवार से आए लड़के को एक सामान्य कार्यकर्ता को सड़क से उठाकर संसद तक पहुंचा दिया और बदले में वो कैसी पेटी और अनग्रेटफुल हरकतें कर रहे हैं। इस बात का दुख है। इसको बहुत दुख है।फॉर एग्जांपल कैप्टन अमरिंदर को ईडी ने समंस भेजे थे हाल ही में फरवरी में और जिस ऑफिसर ने ईडी अधिकारी ने समन भेजे उनका तबादला हो गया तो सबको पता है कि भाजपा के नेता के यहां कोई यही यही उलजुलूल बातें हैं। अब सवाल यह है कि सड़क से उठाकर चड्डा ऐसा चड्डा में क्या था कि सड़क से उठा लिया चड्डा को चड्डा को सड़क से सड़क से उठा केजरी ने राज्यसभा क्यों भेज दिया? चड्डा को पंजाब जैसे राज्य का प्रभारी क्यों बना दिया? ये मोहतरमा जो कह रही हैं कि चड्डा को सड़क से उठा के एक आम आदमी को य बना दिया। एक और बाबू साहब आ गए हैं। अनुराग डांडा है। पार्टी लाइन पे अपना काम कर रहे हैं। ये भी आ गए चड्डा की चड्डी उतारने के लिए। जिनको हाल ही में ये लगता है कि भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब में भी चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। और जनता में भारतीय जनता पार्टी इतनी लोकप्रिय हो चुकी है। पार्टी का प्रवक्ता है अभी। आज तक हेडलाइंस टुडे में अंग्रेजी वाले चड्डा के जगह पे मित्तल साहब बन गए हैं प्रभारी आम आदमी पार्टी के। किस गुण से? तो ऐसे ऐसे आम आपियों से पूछा जाना चाहिए कि चड्डा के बारे में जो कह रहे हो सड़क से उठाकर तो सड़क छापों को क्यों राज्यसभा भेजा ऐसे सड़क छापों को राज्यसभा क्यों भेजा और यह सवाल उठा रहे हैं जेड प्लस जेड सुरक्षा दे दिया गया सोचिए चड्डा को आम आदमी

पार्टी ने जेड प्लस सुरक्षा दी हुई थी पंजाब में पंजाब में क्योंकि चड्डा कांग्रेस केजरी का खासम खास था तो चड्डा को जेड प्लस सुरक्षा थी तामझाम था घर में आएगा चड्डा अपना है चड्डा जेड प्लस सुरक्षा थी चड्डा को और उसकी सुरक्षा हटा ली क्यों हटा ली सुरक्षा किसी को दी जाती है थ्रेटनिंग के आधार पे उसके ऊपर खतरा होता है तो पंजाब में और दिल्ली में चड्डा के ऊपर खतरा बता के पंजाब और दिल्ली मेंकि सरकार है आम आदमी पार्टी की तो दोनों राज्यों में चड्डा को जेड प्लस सुरक्षा थी छीन ली गई तो गृह मंत्रालय ने थ्रेट के आधार पे चड्डा को जेड प्लस के बदले जेड श्रेणी की सुरक्षा दे दी है दिल्ली दिल्ली में क्योंकि अब पंजाब जाने का मतलब नहीं पंजाब का प्रभारी है नहीं अब सोचिए इस बात से आपत्ति है कि चड्डा को तो क्या चड्डा को मरवा करके कांडी केजरी एक बड़ा षड्यंत्र करना करना चाह रहा है। क्या चड्डा की हत्या की साजिश रचना चाह रहा है क्या बदला सबूत नष्ट करने के लिए? अब इस खेल को जरा समझने की कोशिश कीजिए। यदि राघव चड्डा आम आदमी पार्टी का सांसद उसके ऊपर खतरा था और वो आम आदमी पार्टी का राज्यसभा का सांसद है। राज्यसभा में उपनेता है। वो पंजाब का प्रभारी है। यदि


आम आदमी पार्टी ने उसके ऊपर खतरे को ध्यान में रखते हुए उसे जेड प्लस सुरक्षा दी। वो सीए है। पूरे आम आदमी पार्टी का लेखाजोखा उसके पास है। शराब घोटाला का लेखाजोखा है। उसके पास शीश महल बनाने में जो जो पाप किया गया है उसका लेखाजोखा है। तो क्या सबूत नष्ट करने के लिए कांडी केजरी गैंग इस राघव चड्डा की हत्या करवाना चाह रहा है। क्या सुरक्षा इसलिए हटा लिया गया ताकि राघव चड्डा की हत्या हो जाए। क्या एक बड़ी घातक इस चड्डाकि केजरी के राह में रो रहा है। चड्डाकि केजरी के खिलाफ सबूत है। चड्डा के पासकि सीढ़ी है। चड्डाकि कांडी केजरी का खेल कर सकता है। चड्डा स्वाति मालीवाल से ज्यादा घातक हो सकता है। चड्डा कोई आशुतोष जैसा चिरकुट नहीं है। वो कोई गंधौर यादव या कविराज की तरह चिरकुट नहीं है। चड्डा के पास पूरे सबूत और साक्ष्य है। चड्डा के पास डॉक्यूमेंट्री प्रूफ है। तो क्या उस चड्डा की हत्या की साजिश है? आखिर जब जेड प्लस सुरक्षा थी तो उसकी जेट सुरक्षा क्यों हटा ली गई? अमित शाह ने इसी को ध्यान में रखते हुए गृह मंत्रालय से सुरक्षा दी है। क्या गृह मंत्रालय को इस बात का अंदाजा है कि चड्डा की हत्या की साजिश रची गई है? क्या पंजाब में चड्डा की  हत्या की साजिश थी? ताकि चड्डा की हत्या करके सबूत नष्ट कर लिया जाए। उसको बचाया गया है? क्या चड्डा के पास कोई घातक सीडी है? ये बहुत महत्वपूर्ण है। यूं ही नहीं केजरी ने चड्डा को किनारा किया है और यूं ही नहीं चड्डा चड्डा की जेड प्लस सुरक्षा छीन ली गई और जब गृह मंत्रालय ने चड्डा को सुरक्षा दी तो पूरा आम आदमी पार्टी तिलमिला गया कि हम तो इसकी हत्या करवाना चाह रहे थे लेकिन ये तो अब बच गया। इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए कि क्या चड्डा की हत्या की साजिश थी? क्या चड्डा के पास कोई गंभीर सबूत है जिसकी वजह से चड्डा को निपटाना चाह रहा है? इस पार्टी को छोड़ के बहुत सारे लोग गए। आशुतोष गया है, कविराज गया है, गंधौर यादव गया है, स्वाति मालीवाल गई है। चड्डा के खिलाफ जिस तरह से आप ये हमलावर हो चुके हैं। इस तरह से आम आदमी पार्टी अपने पार्टी से निकाले गए या पार्टी छोड़ के गए। किसी भी आदमी के खिलाफ हमलावर नहीं हुआ। लेकिन चड्डा तूने तो अभी पार्टी भी नहीं छोड़ी है। फिर चड्डा के खिलाफ हमलावर क्यों है? इस मामले को बहुत गंभीरता से समझना चाहिए। गृह मंत्रालय को गंभीरता से लेना चाहिए। मुझे लगता है सरकार की पैनी नजर होगी कि क्या


चड्डा को मार करके एक बहुत बड़ा सबूत नष्ट करने की कोशिश की जा रही है। आखिर चड्डा से इतनी नफरत क्यों है आपियों को ये पता किया जाना बहुत जरूरी है। आपको पूरा ये खेल अब बेहतर तरीके से समझ में आ गया होगा कि चड्डा के लिए इतनी नफरत क्यों है। फिर से समझिए आम आदमी पार्टी छोड़ के शांति भूषण गए। प्रशांत भूषण गए। कविराज गया, गंध यादव गया, आनंद कुमार गए, स्वाति मालीवाल भी एक तरह से गई। लेकिन आम आदमी पार्टी किसी के खिलाफ इतना हमलावर नहीं हुई। चड्डा ने तो अभी पार्टी भी नहीं छोड़ी है। चड्डा से इतनी नफरत क्यों? चड्डा का चरित्र हनन के लिए पूरा कांडी केजरी गैंग क्यों मैदान में आ गया है? चड्डा का चरित्र हनन तो छोड़िए। चड्डा की हत्या की साजिश इसका मतलब है। इसीलिए उसकी जेड प्लस सुरक्षा हटाई गई और जब सरकार ने दी अब देखिए ऐसा नहीं कि चड्डा चड्डा को स्पेशली सुरक्षा दे दी गई। चड्डा को जेड प्लस सुरक्षा थी। उसको छीन लिया गया। उसके जगह पे जेड सुरक्षा दी गई है। और ये बेचैन कर रहा है कांडी केजरी गैंग को। सोचिए ये आदमी कितना शातिर है और भारतीय राजनीति का कितना कनिंग कितना घिनौना चेहरा है और दिल्ली लगातार तीन बार ऐसे घिनौने चेहरे को चुनती रही और बर्बाद हो गई।


इस दिल्ली को इस देश को कांडी राजनेताओं से बचाने की जरूरत है।



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April 16, 2026 at 09:05AM

संभवत चड्डा के पास एक सीडी है शीश महल वाली सीडी

 


भारतीय राजनीति में बदलाव के लिए आया था केजरी। एक जन आंदोलन की उपज किए थे। लीक से हटकर राजनीति करने के लिए आया केजरी। शराब माफियागिरी के धंधा करने लगा। इस धुर् और शातिर केजरी को यह लगता है कि इस धरती पर उससे ज्यादा कोई काबिल नहीं। केजरीवाल को हमेशा लगता है कि वही सिर्फ पढ़ा लिखा है इस धरती पर और वही सिर्फ मूर्ख बना सकता है।अब उसी के पाले हुए खिलाड़ी उसी को उसी का घोड़ा पिलाने लगे। केजरीवाल भारतीय राजनीति का सही मायने में एक ऐसा घणित चेहरा है


जो भारत में उम्मीदों की राजनीति की हत्या करता है। केजरीवाल से भारतीय राजनीति में एक ऐसा शख्स जो एक आंदोलन से निकला और जनता ने उस पर भरोसा किया। वो केजरी दिल्ली को बदलने निका था। दिल्ली को बर्बाद करके छोड़ दिया। वो कमाई के लिए शराब की माफियागिरी करने लगा। शराब घोटाला करने वाला केजरी जिसे देश की सबसे बड़ी अदालत तक ने बेल नहीं दिया। लेकिन एक खेल हुआ उस पर कभी और चर्चा करूंगा। एक ऐसा खेल केजरी गैंग ने किया कि वो आरोप मुक्त हो गया। लेकिन हाई कोर्ट ने जब ट्रायल कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुनवाई की तो उस ट्रायल


कोर्ट की साख खराब करने की आतुर हो गया।कांडी केजरी के आंदोलन के समय जितने प्रभावशाली व्यक्ति थे सबको केजरी ने अपमानित करके बाहर कर दिया और कुछ चेहरे चपाटे इसने पा लिए। इसमें एक चिकना चड्डा था राघव चड्डा। चार्टर्ड अकाउंटेंट चड्डा केजरी का सबसे प्रिय था। केजरी उसे अपने घर का हिस्सा बनाना चाहता था। केजरी ने इस चिकने चड्डा में ये देखा कुछ सपना देखा। तो सोचिए इस चड्डा को केजरी ने राज्यसभा भेज दिया। यह चड्डा इतना प्यारा हो गया, इतना दुलारा हो गया कि इसके लिए घरेलू सपना देखने लगा। ये सपना उसका चकनाचूर जब तक हुआ तब तक चड्डा बहुत कुछ पा चुका था। चड्डा राज्यसभा जा चुका था और राज्यसभा ऐसी जगह है जहां से आप किसी को हटा नहीं सकते। छ साल उसकी बुकिंग हो गई। वो पार्टी विरोधी गतिविधि करे या ना करे। चड्डा केजरी के पहले सपने को तोड़ दिया जब उसने एक हीरोइन से ब्याह करने का की घोषणा कर दी और केजरी का वो कविराज ने इस बात की घोषणा कर दी कि बेटा ये मरा जिस दिन उसने हीरोइन से शादी करने की बात कर दी उसी दिन केजरी का वो सपना टूट गया जिस सपने के तहत केजरी ने उसे उसे राज्यसभा भेजा और जब पंजाब में सरकार बनी तो केजरी ने चड्डा को सुपर सीएम बना दिया। अब सोचिए कि चड्डा में ऐसा क्या था कि केजरी ने उसे राज्यसभा भेज दिया। इतने काबिल काबिल लोग इस आंदोलन से जिसने अपने आप को पार्टी में खपाया वो कुमार विश्वास, वो योगेंद्र यादव, वो आनंद कुमार, वो प्रशांत भूषण, वो शांति भूषण वो तमाम लोग बाहर हो गए। लेकिन चिकना चड्डा केजरी का प्रिय हो गया।केजरी घर में उसे लाना चाहता था और घरेलू सपने देखे जाने लगे। इसीलिए चड्डा को पूरी छूट दी गई। चड्डा पंजाब का प्रभारी बन गया। चड्डा को जेड प्लस सुरक्षा दी गई। आ घर में आएंगे चिकने हैं जेड प्लस सुरक्षा होगा चड्डा को वो तमाम सुविधाएं मिलने लगी जो कांडी केजरी को मिलती थी जो भग्गू को मिलती थी वो तमाम सुविधाएं चड्डा को मिलने लगी लेकिन जो ही चड्डा ने हीरोइन से शादी करने की बात की चड्डा की चमक केजरी ने उतारनी शुरू कर दी और चड्डा से कहा गया कि बेटा राज्यसभा छोड़ दो इस्तीफा दे दो चड्डा बीबी संग हनीमून खून मनाने लंदन चला गया अपनी आंख में परेशानी बताकर कहते हैं चड्डा की शीश महल में ठुकाई वैसी हुई जैसे स्वाति मालीवाल की हुई स्वाति मालीवाल ने इसे पब्लिक कर दिया स्वाति मालीवाल भाग करके गई थाने में रिकॉर्ड दर्ज किया लेकिन चड्डा ने कुछ लाज रख ली केजरी की और चड्डा भाग कर लंदन चला गया अब चड्डा केजरी का प्रिय नहीं रहा तो चड्डा की जेड प्लस सुरक्षा छीन ली गई। उसके बाद चड्डा नेता प्रतिपक्ष उपनेता था राज्यसभा में। सोचिए इस चड्डा में ऐसी क्या खासियत थी सीए था। तो पूरी पार्टी का माल कहां है कैसे है जाना है सब चड्डा को पता है। केजरी को डर इसी बात का था कि चड्डा कहीं पोल ना खोल दे। अब क्योंकि चड्डा केजरी का प्रिय नहीं रहा। सपना तोड़ने वाला रहा। घर में एंट्री अब बैन बैन हो गई। तो पर कतरने शुरू कर दिए। माना जा रहा है कि चड्डा को और स्वाति मालीवाल दोनों को राज्यसभा छोड़ने के लिए कहा गया था। ना चड्डा ने छोड़ा ना स्वाति ने छोड़ा। ये हर किसी को भ्रम होता है। मैंने उसे बनाया। आज केजरी के चमचे मैदान में आकर के कह रहे हैं केजरी के चेले चपाटे कि चड्डा को केजरी ने ये सब दिया। ये वो लोग कह रहे हैं जिनको नहीं मिला। यह सब उसी लायक थे। चड्डा के स्टैंडर्ड के ही थे। लेकिन चड्डा बड़ा बन गया। अब इस चड्डा के जगह जो एक गुप्ता जी आए अशोक मित्तल मालदार अशोक मित्तल इस कांडी केजरी की पार्टी में कमाल की है आंदोलन से संघर्ष करके इस पार्टी को जिन लोगों ने बड़ा किया केजरी ने उसे किनारे कर दिया और दोद बनिया ले आए मालदार जो पार्टी को सींच सके क्योंकि शराब माफियागिरी का धंध था खत्म खत्म हो गया था। शराब से लूट का खेल खत्म हो चुका था। तो इसीलिए पंजाब से राज्यसभा में जो सांसद लाए गए चड्डा के अलावा सब वो मालदार लोग थे। उसी में से एक अशोक मित्तल है। अशोक मित्तल को चड्डा की जगह पे मालदार होने के कारण माल देने के कारण केजरी ने उसे उपनेता बना दिया। तब पता चला कि उसका जो

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी है वो भ्रष्टाचार का केंद्र है। ईडी ने लवली प्रोफेशनल इंस्टट्यूट पर छापेमारी कर दी। अशोक मित्तल के घर पर और उसके लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी पर। जालंधर और फगवाड़ा में ईडी की छापेमारी से केजरी गैंग में कोहराम मच गया है। मतलब केजरी का शराब माफियागिरी का धंधा बंद होते ही पार्टी का कमाई का खेल खत्म हुआ। अब ये जितने बनिया भाई हैं जो सिर्फ मालदार होने की वजह से पार्टी सोचिए जो पार्टी नैतिकता की बड़ी-बड़ी बातें करने आई। जो पार्टी पढ़े लिखे लोगों की पार्टी बनकर आई उसमें ऐसे ऐसे लोगों को लाया जाने लगा राज्यसभा भेजा

जाने लगा जिनका इस पार्टी के आंदोलन से संघर्ष से जिसका कोई वास्ता नहीं था केजरी को सिर्फ माल चाहिए था तो केजरी यूज़ करने लगा सवाल यह है कि जिस चड्डा पर केजरी के लोग सवाल उठा रहे हैं उस चड्डा को केजरी ने बनाया क्यों किस स्वार्थ से क्या योग्यता थी चड्डा की अब वो चड्डा काम का हो गया है संभवत चड्डा के पास एक सीडी है। शीश महल वाली सीडी। अब एक गसिप चल रही है कि चड्डा के पास शीश महल वाली वो सीडी है जिसमें स्वाति मालीवाल की पिटाई का चड्डा की ठुकाई का और फिर कई ऐसे खेल है जो चड्डा के पास है। दरअसल चड्डा अकाउंटेंट है, सीए है। आम आदमी पार्टी के इस तमाम पाप के धन का की जानकारी चड्डा के पास है। चड्डा के पास एक एक रिकॉर्ड है। पंजाब से कमाई कैसे की गई? दिल्ली में कैसे कमाई की गई? शराब माफिया गिरी के धंधे में कहां क्या हुआ क्योंकि चड्डा को केजरी ने इतना विश्वास किया हुआ था कि घरेलू है घर का है कल को घर का ही रहेगा अपने घर में रहेगा कल तो सब कुछ घर का माल घर में आ जाएगा राज्यसभा भी जाएगा माल भी कमाएगा पंजाब का प्रभारी भी बन जाएगा तो सब कुछ करेगा दरअसल भगवंत मान एक चीफ मिनिस्टर था चड्डा ही पंजाब का सुपर चीफ मिनिस्टर था चड्डा को पंजाब के पूरे पाप पता है। कहां खेल हो रहा है सब पता है। इसीलिए चड्डा अब गले की हड्डी बन चुका है। इस चड्डा को राज्यसभा में उप नेता से हटाकर केजरी ने अपनी कब्र खोद ली। दरअसल ये सब कुछ स्वार्थ का खेल था। चड्डा को बनाया क्यों? चड्डा का बिगाड़ा क्यों? इसी में केजरी फस गया है। स्वाति मालीवाल तो बस कटाक्ष मार रही है। चड्डा के पास वो तमाम साक्ष्य है। डॉक्यूमेंट्री प्रूफ है। स्वाति मालीवाल सिर्फ इतिहास बता रही है। हमारा ऐसा संबंध था। हम ऐसे थे। लेकिन चड्डा के पास पूरे रिकॉर्ड है। स्वाति वहां तक नहीं घुस पाई

जहां तक चड्डा घुसा हुआ था। इसीलिए यह चड्डा अब केजरी के लिए काल बन गया है। इस केजरी को लगता है कि वो बहुत चालाक है। उससे बड़ा धूर्त कोई नहीं। उससे बड़ा कनिंग नहीं। कोई उससे बड़ा बेईमान कोई नहीं। लेकिन उसे लगता है कि वो इस कदर कनिंग है। वो जिस कदर दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता का अपमान कर रहा है। उसे लगता है कि सिर्फ अपमान करने का ठेका उसे ही मिला हुआ है। लेकिन अब चड्डा ने तय कर लिया है कि वो सीडी अमित शाह को थमाएंगी। तो क्या चड्डा ने सीधी अमित शाह को थमा दी है या थमाना बाकी है? क्या चड्डा ही वो असली खिलाड़ी है जिसके वजह से अशोक मित्तल के घर पे छापेमारी हुई है? उसके ठिकानों पर क्या चड्डा ने पूरा क्लू दिया है? क्या आने वाले दिनों में चड्डा के निशाने पर चड्डा की सीढ़ी के निशाने पर कांडी केजरी के टीम के बहुत सारे लोगों का खेल होगा। चड्डा असली खिलाड़ी बनकर सामने आ गया है।जरा सोचिए चड्डा को लेकर अब जिनकी कोई औकात नहीं चड्डा के सामने वो सब मुंह खोल रहे हैं चड्डा को लेकर के कि जैसे चड्डा के ऊपर एहसान किया है कांडी ने जरा इनको सुनिए इस मोहतरमा को टेलीविजन चैनल पर उत्पात मचाते आती है सबसे लड़ती झगड़ती रहती है इसको चड्ढा जी अपने लिए जेड प्लस सिक्योरिटी भी मांगते हैं जो आज पता चल रहा है उनको मिल गई इस इस बात का दुख है कि अरविंद केजरीवाल जी ने आम आदमी पार्टी ने एक आम परिवार से आए लड़के को एक सामान्य कार्यकर्ता को सड़क से उठाकर संसद तक पहुंचा दिया और बदले में वो कैसी पेटी और अनग्रेटफुल हरकतें कर रहे हैं। इस बात का दुख है। इसको बहुत दुख है।फॉर एग्जांपल कैप्टन अमरिंदर को ईडी ने समंस भेजे थे हाल ही में फरवरी में और जिस ऑफिसर ने ईडी अधिकारी ने समन भेजे उनका तबादला हो गया तो सबको पता है कि भाजपा के नेता के यहां कोई यही यही उलजुलूल बातें हैं। अब सवाल यह है कि सड़क से उठाकर चड्डा ऐसा चड्डा में क्या था कि सड़क से उठा लिया चड्डा को चड्डा को सड़क से सड़क से उठा केजरी ने राज्यसभा क्यों भेज दिया? चड्डा को पंजाब जैसे राज्य का प्रभारी क्यों बना दिया? ये मोहतरमा जो कह रही हैं कि चड्डा को सड़क से उठा के एक आम आदमी को य बना दिया। एक और बाबू साहब आ गए हैं। अनुराग डांडा है। पार्टी लाइन पे अपना काम कर रहे हैं। ये भी आ गए चड्डा की चड्डी उतारने के लिए। जिनको हाल ही में ये लगता है कि भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब में भी चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। और जनता में भारतीय जनता पार्टी इतनी लोकप्रिय हो चुकी है। पार्टी का प्रवक्ता है अभी। आज तक हेडलाइंस टुडे में अंग्रेजी वाले चड्डा के जगह पे मित्तल साहब बन गए हैं प्रभारी आम आदमी पार्टी के। किस गुण से? तो ऐसे ऐसे आम आपियों से पूछा जाना चाहिए कि चड्डा के बारे में जो कह रहे हो सड़क से उठाकर तो सड़क छापों को क्यों राज्यसभा भेजा ऐसे सड़क छापों को राज्यसभा क्यों भेजा और यह सवाल उठा रहे हैं जेड प्लस जेड सुरक्षा दे दिया गया सोचिए चड्डा को आम आदमी

पार्टी ने जेड प्लस सुरक्षा दी हुई थी पंजाब में पंजाब में क्योंकि चड्डा कांग्रेस केजरी का खासम खास था तो चड्डा को जेड प्लस सुरक्षा थी तामझाम था घर में आएगा चड्डा अपना है चड्डा जेड प्लस सुरक्षा थी चड्डा को और उसकी सुरक्षा हटा ली क्यों हटा ली सुरक्षा किसी को दी जाती है थ्रेटनिंग के आधार पे उसके ऊपर खतरा होता है तो पंजाब में और दिल्ली में चड्डा के ऊपर खतरा बता के पंजाब और दिल्ली मेंकि सरकार है आम आदमी पार्टी की तो दोनों राज्यों में चड्डा को जेड प्लस सुरक्षा थी छीन ली गई तो गृह मंत्रालय ने थ्रेट के आधार पे चड्डा को जेड प्लस के बदले जेड श्रेणी की सुरक्षा दे दी है दिल्ली दिल्ली में क्योंकि अब पंजाब जाने का मतलब नहीं पंजाब का प्रभारी है नहीं अब सोचिए इस बात से आपत्ति है कि चड्डा को तो क्या चड्डा को मरवा करके कांडी केजरी एक बड़ा षड्यंत्र करना करना चाह रहा है। क्या चड्डा की हत्या की साजिश रचना चाह रहा है क्या बदला सबूत नष्ट करने के लिए? अब इस खेल को जरा समझने की कोशिश कीजिए। यदि राघव चड्डा आम आदमी पार्टी का सांसद उसके ऊपर खतरा था और वो आम आदमी पार्टी का राज्यसभा का सांसद है। राज्यसभा में उपनेता है। वो पंजाब का प्रभारी है। यदि


आम आदमी पार्टी ने उसके ऊपर खतरे को ध्यान में रखते हुए उसे जेड प्लस सुरक्षा दी। वो सीए है। पूरे आम आदमी पार्टी का लेखाजोखा उसके पास है। शराब घोटाला का लेखाजोखा है। उसके पास शीश महल बनाने में जो जो पाप किया गया है उसका लेखाजोखा है। तो क्या सबूत नष्ट करने के लिए कांडी केजरी गैंग इस राघव चड्डा की हत्या करवाना चाह रहा है। क्या सुरक्षा इसलिए हटा लिया गया ताकि राघव चड्डा की हत्या हो जाए। क्या एक बड़ी घातक इस चड्डाकि केजरी के राह में रो रहा है। चड्डाकि केजरी के खिलाफ सबूत है। चड्डा के पासकि सीढ़ी है। चड्डाकि कांडी केजरी का खेल कर सकता है। चड्डा स्वाति मालीवाल से ज्यादा घातक हो सकता है। चड्डा कोई आशुतोष जैसा चिरकुट नहीं है। वो कोई गंधौर यादव या कविराज की तरह चिरकुट नहीं है। चड्डा के पास पूरे सबूत और साक्ष्य है। चड्डा के पास डॉक्यूमेंट्री प्रूफ है। तो क्या उस चड्डा की हत्या की साजिश है? आखिर जब जेड प्लस सुरक्षा थी तो उसकी जेट सुरक्षा क्यों हटा ली गई? अमित शाह ने इसी को ध्यान में रखते हुए गृह मंत्रालय से सुरक्षा दी है। क्या गृह मंत्रालय को इस बात का अंदाजा है कि चड्डा की हत्या की साजिश रची गई है? क्या पंजाब में चड्डा की  हत्या की साजिश थी? ताकि चड्डा की हत्या करके सबूत नष्ट कर लिया जाए। उसको बचाया गया है? क्या चड्डा के पास कोई घातक सीडी है? ये बहुत महत्वपूर्ण है। यूं ही नहीं केजरी ने चड्डा को किनारा किया है और यूं ही नहीं चड्डा चड्डा की जेड प्लस सुरक्षा छीन ली गई और जब गृह मंत्रालय ने चड्डा को सुरक्षा दी तो पूरा आम आदमी पार्टी तिलमिला गया कि हम तो इसकी हत्या करवाना चाह रहे थे लेकिन ये तो अब बच गया। इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए कि क्या चड्डा की हत्या की साजिश थी? क्या चड्डा के पास कोई गंभीर सबूत है जिसकी वजह से चड्डा को निपटाना चाह रहा है? इस पार्टी को छोड़ के बहुत सारे लोग गए। आशुतोष गया है, कविराज गया है, गंधौर यादव गया है, स्वाति मालीवाल गई है। चड्डा के खिलाफ जिस तरह से आप ये हमलावर हो चुके हैं। इस तरह से आम आदमी पार्टी अपने पार्टी से निकाले गए या पार्टी छोड़ के गए। किसी भी आदमी के खिलाफ हमलावर नहीं हुआ। लेकिन चड्डा तूने तो अभी पार्टी भी नहीं छोड़ी है। फिर चड्डा के खिलाफ हमलावर क्यों है? इस मामले को बहुत गंभीरता से समझना चाहिए। गृह मंत्रालय को गंभीरता से लेना चाहिए। मुझे लगता है सरकार की पैनी नजर होगी कि क्या


चड्डा को मार करके एक बहुत बड़ा सबूत नष्ट करने की कोशिश की जा रही है। आखिर चड्डा से इतनी नफरत क्यों है आपियों को ये पता किया जाना बहुत जरूरी है। आपको पूरा ये खेल अब बेहतर तरीके से समझ में आ गया होगा कि चड्डा के लिए इतनी नफरत क्यों है। फिर से समझिए आम आदमी पार्टी छोड़ के शांति भूषण गए। प्रशांत भूषण गए। कविराज गया, गंध यादव गया, आनंद कुमार गए, स्वाति मालीवाल भी एक तरह से गई। लेकिन आम आदमी पार्टी किसी के खिलाफ इतना हमलावर नहीं हुई। चड्डा ने तो अभी पार्टी भी नहीं छोड़ी है। चड्डा से इतनी नफरत क्यों? चड्डा का चरित्र हनन के लिए पूरा कांडी केजरी गैंग क्यों मैदान में आ गया है? चड्डा का चरित्र हनन तो छोड़िए। चड्डा की हत्या की साजिश इसका मतलब है। इसीलिए उसकी जेड प्लस सुरक्षा हटाई गई और जब सरकार ने दी अब देखिए ऐसा नहीं कि चड्डा चड्डा को स्पेशली सुरक्षा दे दी गई। चड्डा को जेड प्लस सुरक्षा थी। उसको छीन लिया गया। उसके जगह पे जेड सुरक्षा दी गई है। और ये बेचैन कर रहा है कांडी केजरी गैंग को। सोचिए ये आदमी कितना शातिर है और भारतीय राजनीति का कितना कनिंग कितना घिनौना चेहरा है और दिल्ली लगातार तीन बार ऐसे घिनौने चेहरे को चुनती रही और बर्बाद हो गई।


इस दिल्ली को इस देश को कांडी राजनेताओं से बचाने की जरूरत है।


Saturday, April 11, 2026

अमेरिका-इज़राइल-ईरान युद्ध मोर्चा 2026: झूठा युद्धविराम और इस संकट का ज़िम्मेदार कौन?

अमेरिका-इज़राइल-ईरान युद्ध मोर्चा 2026: झूठा युद्धविराम और इस संकट का ज़िम्मेदार कौन?
अमेरिका-इज़राइल-ईरान युद्ध मोर्चा 2026: झूठा युद्धविराम और इस संकट का ज़िम्मेदार कौन?
अमेरिका-इज़राइल-ईरान युद्ध मोर्चा 2026: झूठा युद्धविराम और इस संकट का ज़िम्मेदार कौन?
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नई दिल्ली, 11 अप्रैल 2026: आज की तारीख में अमेरिका-इज़राइल-ईरान का युद्ध मोर्चा एक ऐसे विस्फोटक मोड़ पर खड़ा है जहाँ हर "युद्धविराम" की घोषणा महज़ एक कूटनीतिक छल बनकर रह जाती है। मध्य पूर्व की धरती पर आग की लपटें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। पिछले डेढ़ वर्षों में सात से अधिक युद्धविराम समझौते हुए और सभी महज़ 72 घंटे से एक सप्ताह में टूट गए। इस भीषण सैन्य संकट का गहन विश्लेषण ज़रूरी है।

युद्ध हेलीकॉप्टर मध्य पूर्व
चित्र 1: मध्य पूर्व में सैन्य हेलीकॉप्टर — युद्ध का प्रतीक (स्रोत: Pixabay CC0)

⚔️ वर्तमान युद्ध मोर्चे की स्थिति (अप्रैल 2026)

वर्ष 2025 के अंत में शुरू हुए अमेरिका-इज़राइल संयुक्त सैन्य अभियान के बाद से मध्य पूर्व में संघर्ष की तीव्रता कई गुना बढ़ गई है। इज़राइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की, जिसके जवाब में ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार कर दी। अमेरिका के 5वें नौसेना बेड़े ने फ़ारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में अपनी उपस्थिति और मज़बूत कर ली है।

आज अप्रैल 2026 में ज़मीनी हालात:

  • 🔴 इज़राइल-लेबनान मोर्चा: हिज़बुल्लाह के रॉकेट हमले जारी, IDF का ज़मीनी ऑपरेशन चल रहा।
  • 🔴 इज़राइल-गाज़ा मोर्चा: गाज़ा में मानवीय संकट चरम पर, युद्धविराम बार-बार टूट रहा।
  • 🔴 ईरान-अमेरिका नौसेना तनाव: होर्मुज़ जलडमरूमध्य में खतरनाक टकराव।
  • 🔴 यमन (हूती) मोर्चा: लाल सागर में व्यापारिक जहाज़ों पर हमले जारी।
  • 🔴 सीरिया-इराक प्रॉक्सी युद्ध: ईरान समर्थित मिलिशिया का अमेरिकी ठिकानों पर हमला।
ईरानी मिसाइल प्रणाली
चित्र 2: मिसाइल प्रणाली — युद्धविराम के दौरान भी सक्रिय रहती है (स्रोत: Pixabay CC0)

🎭 युद्धविराम: एक भ्रामक नाटक — क्यों?

पिछले डेढ़ वर्षों में कम से कम सात बड़े युद्धविराम समझौते हो चुके हैं और सभी महज़ कुछ दिनों में टूट गए। यह युद्धविराम क्यों भ्रामक हैं?

🔹 कारण 1 — अधूरी शर्तें: इज़राइल "बंधकों की रिहाई" मांगता है, हमास "स्थायी युद्धविराम और सैन्य वापसी" की — दोनों माँगें एक साथ पूरी होना असंभव है।

🔹 कारण 2 — ईरान का प्रॉक्सी खेल: ईरान युद्धविराम वार्ता में प्रत्यक्ष भागीदार नहीं होता, लेकिन हमास, हिज़बुल्लाह और हूती के ज़रिए लड़ाई जारी रखता है।

🔹 कारण 3 — अमेरिका की दोहरी नीति: एक तरफ कूटनीतिक समाधान की बात, दूसरी तरफ इज़राइल को अरबों डॉलर की सैन्य सहायता।

🔹 कारण 4 — घरेलू राजनीति: दोनों पक्षों के नेता युद्ध से राजनीतिक फायदा उठाते हैं, इसलिए स्थायी शांति उनके हित में नहीं।

स्कड मिसाइल लांचर सैन्य शक्ति
चित्र 3: भू-से-भू मिसाइल लांचर — भू-राजनीतिक तनाव का प्रतीक (स्रोत: Pixabay CC0)

🔥 इस संकट का ज़िम्मेदार कौन?

1. 🇮🇱 इज़राइल की ज़िम्मेदारी

गाज़ा में अनुपातहीन सैन्य बल का प्रयोग, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों की अनदेखी, और लेबनान में स्थायी सीमा उल्लंघन इज़राइल को इस संकट का एक प्रमुख कारण बनाते हैं। इज़राइल का तर्क है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए लड़ रहा है, लेकिन गाज़ा में 50,000 से अधिक लोगों की मौत और 20 लाख विस्थापित — यह आँकड़े सिर्फ "आत्मरक्षा" का जवाब नहीं देते।

2. 🇮🇷 ईरान की ज़िम्मेदारी

ईरान ने दशकों से "प्रतिरोध की धुरी" (Axis of Resistance) बनाकर पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता फैलाई है। हमास, हिज़बुल्लाह और हूती को सैन्य एवं वित्तीय सहायता देकर ईरान ने क्षेत्रीय शांति को बाधित किया है। परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान की हठधर्मिता ने स्थिति को और विकट बनाया है।

3. 🇺🇸 अमेरिका की ज़िम्मेदारी

अमेरिका की मध्य पूर्व नीति की विफलता इस संकट में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है। 2003 में इराक युद्ध, 2011 में लीबिया हस्तक्षेप, और अफगानिस्तान से अव्यवस्थित वापसी — इन सबने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बिगाड़ दिया। आज भी अमेरिका एक तरफ इज़राइल को समर्थन देता है और दूसरी तरफ ईरान से परमाणु वार्ता करता है।

अमेरिकी सेना मध्य पूर्व
चित्र 4: अमेरिकी सैन्य दल — मध्य पूर्व में तैनाती (स्रोत: Pixabay CC0)

📊 वैश्विक प्रभाव और भारत की स्थिति

इस युद्ध का वैश्विक प्रभाव गहरा है। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हैं, शिपिंग मार्ग बाधित हो रहे हैं। भारत के लिए यह संकट विशेष रूप से चिंताजनक है:

  • 🇮🇳 भारत के 90 लाख से अधिक नागरिक खाड़ी देशों में कार्यरत।
  • 🛢️ भारत अपनी 80% तेल ज़रूरत मध्य पूर्व से पूरी करता है।
  • 🚢 भारत-यूरोप व्यापार का बड़ा हिस्सा लाल सागर मार्ग से होता है।
  • 🤝 भारत के इज़राइल और ईरान दोनों से महत्वपूर्ण संबंध हैं।
युद्ध विनाश मध्य पूर्व
चित्र 5: युद्ध का विनाश — मध्य पूर्व में तबाही (स्रोत: Pixabay CC0)

🔮 आगे क्या? तीन संभावित परिदृश्य

परिदृश्य 1 — विस्तारित क्षेत्रीय युद्ध (30% संभावना): यदि ईरान परमाणु कार्यक्रम में तेज़ी लाता है और अमेरिका-इज़राइल प्रत्यक्ष सैन्य हमला करते हैं, तो पूरे मध्य पूर्व में व्यापक युद्ध छिड़ सकता है।

परिदृश्य 2 — कूटनीतिक समाधान (20% संभावना): यदि बड़ी शक्तियाँ (अमेरिका, रूस, चीन) एक साथ मिलकर दबाव बनाएं, तो एक वास्तविक युद्धविराम संभव है — लेकिन यह अभी बहुत दूर है।

परिदृश्य 3 — लंबा खिंचाव (50% संभावना): सबसे संभावित परिदृश्य — यह संघर्ष "कम तीव्रता" की स्थिति में वर्षों तक जारी रहे — न पूर्ण युद्ध, न वास्तविक शांति।

✍️ निष्कर्ष

एक अनुभवी सैन्य विश्लेषक के रूप में मेरा मानना है कि जब तक तीन मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होता, यह संकट खत्म नहीं होगा: (1) फिलिस्तीन प्रश्न का स्थायी राजनीतिक समाधान, (2) ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक समझौता, और (3) मध्य पूर्व में नई क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था। युद्धविराम की हर घोषणा जब तक इन बुनियादी मुद्दों को संबोधित नहीं करती, वह महज़ एक झूठा नाटक ही साबित होगी।


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अमेरिका-इज़राइल-ईरान युद्ध मोर्चा 2026: झूठा युद्धविराम और इस संकट का ज़िम्मेदार कौन?

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नई दिल्ली, 11 अप्रैल 2026: आज की तारीख में अमेरिका-इज़राइल-ईरान का युद्ध मोर्चा एक ऐसे विस्फोटक मोड़ पर खड़ा है जहाँ हर "युद्धविराम" की घोषणा महज़ एक कूटनीतिक छल बनकर रह जाती है। मध्य पूर्व की धरती पर आग की लपटें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। पिछले डेढ़ वर्षों में सात से अधिक युद्धविराम समझौते हुए और सभी महज़ 72 घंटे से एक सप्ताह में टूट गए। इस भीषण सैन्य संकट का गहन विश्लेषण ज़रूरी है।

युद्ध हेलीकॉप्टर मध्य पूर्व
चित्र 1: मध्य पूर्व में सैन्य हेलीकॉप्टर — युद्ध का प्रतीक (स्रोत: Pixabay CC0)

⚔️ वर्तमान युद्ध मोर्चे की स्थिति (अप्रैल 2026)

वर्ष 2025 के अंत में शुरू हुए अमेरिका-इज़राइल संयुक्त सैन्य अभियान के बाद से मध्य पूर्व में संघर्ष की तीव्रता कई गुना बढ़ गई है। इज़राइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर एयर स्ट्राइक की, जिसके जवाब में ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार कर दी। अमेरिका के 5वें नौसेना बेड़े ने फ़ारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में अपनी उपस्थिति और मज़बूत कर ली है।

आज अप्रैल 2026 में ज़मीनी हालात:

  • 🔴 इज़राइल-लेबनान मोर्चा: हिज़बुल्लाह के रॉकेट हमले जारी, IDF का ज़मीनी ऑपरेशन चल रहा।
  • 🔴 इज़राइल-गाज़ा मोर्चा: गाज़ा में मानवीय संकट चरम पर, युद्धविराम बार-बार टूट रहा।
  • 🔴 ईरान-अमेरिका नौसेना तनाव: होर्मुज़ जलडमरूमध्य में खतरनाक टकराव।
  • 🔴 यमन (हूती) मोर्चा: लाल सागर में व्यापारिक जहाज़ों पर हमले जारी।
  • 🔴 सीरिया-इराक प्रॉक्सी युद्ध: ईरान समर्थित मिलिशिया का अमेरिकी ठिकानों पर हमला।
ईरानी मिसाइल प्रणाली
चित्र 2: मिसाइल प्रणाली — युद्धविराम के दौरान भी सक्रिय रहती है (स्रोत: Pixabay CC0)

🎭 युद्धविराम: एक भ्रामक नाटक — क्यों?

पिछले डेढ़ वर्षों में कम से कम सात बड़े युद्धविराम समझौते हो चुके हैं और सभी महज़ कुछ दिनों में टूट गए। यह युद्धविराम क्यों भ्रामक हैं?

🔹 कारण 1 — अधूरी शर्तें: इज़राइल "बंधकों की रिहाई" मांगता है, हमास "स्थायी युद्धविराम और सैन्य वापसी" की — दोनों माँगें एक साथ पूरी होना असंभव है।

🔹 कारण 2 — ईरान का प्रॉक्सी खेल: ईरान युद्धविराम वार्ता में प्रत्यक्ष भागीदार नहीं होता, लेकिन हमास, हिज़बुल्लाह और हूती के ज़रिए लड़ाई जारी रखता है।

🔹 कारण 3 — अमेरिका की दोहरी नीति: एक तरफ कूटनीतिक समाधान की बात, दूसरी तरफ इज़राइल को अरबों डॉलर की सैन्य सहायता।

🔹 कारण 4 — घरेलू राजनीति: दोनों पक्षों के नेता युद्ध से राजनीतिक फायदा उठाते हैं, इसलिए स्थायी शांति उनके हित में नहीं।

स्कड मिसाइल लांचर सैन्य शक्ति
चित्र 3: भू-से-भू मिसाइल लांचर — भू-राजनीतिक तनाव का प्रतीक (स्रोत: Pixabay CC0)

🔥 इस संकट का ज़िम्मेदार कौन?

1. 🇮🇱 इज़राइल की ज़िम्मेदारी

गाज़ा में अनुपातहीन सैन्य बल का प्रयोग, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों की अनदेखी, और लेबनान में स्थायी सीमा उल्लंघन इज़राइल को इस संकट का एक प्रमुख कारण बनाते हैं। इज़राइल का तर्क है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए लड़ रहा है, लेकिन गाज़ा में 50,000 से अधिक लोगों की मौत और 20 लाख विस्थापित — यह आँकड़े सिर्फ "आत्मरक्षा" का जवाब नहीं देते।

2. 🇮🇷 ईरान की ज़िम्मेदारी

ईरान ने दशकों से "प्रतिरोध की धुरी" (Axis of Resistance) बनाकर पूरे मध्य पूर्व में अस्थिरता फैलाई है। हमास, हिज़बुल्लाह और हूती को सैन्य एवं वित्तीय सहायता देकर ईरान ने क्षेत्रीय शांति को बाधित किया है। परमाणु कार्यक्रम को लेकर ईरान की हठधर्मिता ने स्थिति को और विकट बनाया है।

3. 🇺🇸 अमेरिका की ज़िम्मेदारी

अमेरिका की मध्य पूर्व नीति की विफलता इस संकट में सबसे बड़ी भूमिका निभाती है। 2003 में इराक युद्ध, 2011 में लीबिया हस्तक्षेप, और अफगानिस्तान से अव्यवस्थित वापसी — इन सबने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन बिगाड़ दिया। आज भी अमेरिका एक तरफ इज़राइल को समर्थन देता है और दूसरी तरफ ईरान से परमाणु वार्ता करता है।

अमेरिकी सेना मध्य पूर्व
चित्र 4: अमेरिकी सैन्य दल — मध्य पूर्व में तैनाती (स्रोत: Pixabay CC0)

📊 वैश्विक प्रभाव और भारत की स्थिति

इस युद्ध का वैश्विक प्रभाव गहरा है। तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर हैं, शिपिंग मार्ग बाधित हो रहे हैं। भारत के लिए यह संकट विशेष रूप से चिंताजनक है:

  • 🇮🇳 भारत के 90 लाख से अधिक नागरिक खाड़ी देशों में कार्यरत।
  • 🛢️ भारत अपनी 80% तेल ज़रूरत मध्य पूर्व से पूरी करता है।
  • 🚢 भारत-यूरोप व्यापार का बड़ा हिस्सा लाल सागर मार्ग से होता है।
  • 🤝 भारत के इज़राइल और ईरान दोनों से महत्वपूर्ण संबंध हैं।
युद्ध विनाश मध्य पूर्व
चित्र 5: युद्ध का विनाश — मध्य पूर्व में तबाही (स्रोत: Pixabay CC0)

🔮 आगे क्या? तीन संभावित परिदृश्य

परिदृश्य 1 — विस्तारित क्षेत्रीय युद्ध (30% संभावना): यदि ईरान परमाणु कार्यक्रम में तेज़ी लाता है और अमेरिका-इज़राइल प्रत्यक्ष सैन्य हमला करते हैं, तो पूरे मध्य पूर्व में व्यापक युद्ध छिड़ सकता है।

परिदृश्य 2 — कूटनीतिक समाधान (20% संभावना): यदि बड़ी शक्तियाँ (अमेरिका, रूस, चीन) एक साथ मिलकर दबाव बनाएं, तो एक वास्तविक युद्धविराम संभव है — लेकिन यह अभी बहुत दूर है।

परिदृश्य 3 — लंबा खिंचाव (50% संभावना): सबसे संभावित परिदृश्य — यह संघर्ष "कम तीव्रता" की स्थिति में वर्षों तक जारी रहे — न पूर्ण युद्ध, न वास्तविक शांति।

✍️ निष्कर्ष

एक अनुभवी सैन्य विश्लेषक के रूप में मेरा मानना है कि जब तक तीन मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं होता, यह संकट खत्म नहीं होगा: (1) फिलिस्तीन प्रश्न का स्थायी राजनीतिक समाधान, (2) ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर व्यापक समझौता, और (3) मध्य पूर्व में नई क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था। युद्धविराम की हर घोषणा जब तक इन बुनियादी मुद्दों को संबोधित नहीं करती, वह महज़ एक झूठा नाटक ही साबित होगी।


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