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Tuesday, April 29, 2025

बीजेपी के अध्यक्ष का चुनाव अब टल गया है

बीजेपी के अध्यक्ष का चुनाव अब टल गया है
बीजेपी के अध्यक्ष का चुनाव अब टल गया है

 बीजेपी के अध्यक्ष का चुनाव अब टल गया है और यह तय हो चुका है कि बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ही रहेंगे।अध्यक्ष पद को लेकर आरएसएस और बीजेपी हाईकमान के बीच में जो टकराव चल रहा है उस टकराव के केंद्र में जेपी नड्डा हैं। संघ चाहता है कि जेपी नड्डा को हटाया जाए और दूसरी तरफ बीजेपी हाईकमान यानी कि मोदी और शाह ये चाहते हैं कि जेपी नड्डा ही अध्यक्ष बने रहे और इसको लेकर लगातार क्योंकि अक्टूबर से चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अक्टूबर से लेकर अप्रैल आ गया है। हर बार एक नई तारीख आती है और तारीख निकल जाती है उसके बाद एक नई तारीख फिर आ जाती है और अब तो चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरीके से ही रोक दिया गया है और अब ये चुनाव प्रक्रिया कब से शुरू होगी क्योंकि पहले ये कहा जा रहा था कि अप्रैल में बीजेपी को नया अध्यक्ष मिल जाएगा लेकिन अप्रैल तो पूरा निकल ही गया है लगभग 2 दिन बचे हुए हैं। अब ये क्या कहा जा रहा है कि मई में भी बीजेपी को अध्यक्ष नहीं मिलेगा। यहां तक कि ये कहा अब तो सीधा-सीधा ये कह दिया गया जो बीजेपी की उच्च स्तरीय कमेटी है उसने ये बोल दिया है कि अभी हम चुनाव प्रक्रिया को रोक रहे हैं। यानी कि आगे भी कब भी अध्यक्ष पद बीजेपी को अध्यक्ष नया मिलेगा। इस पर सवाल खड़े हो गए हैं और साफ-साफ यह कहा गया है कि जेपी नड्डा ही बीजेपी के अध्यक्ष बने रहेंगे। जबकि जेपी नड्डा को लेकर बीजेपी और आरएसएस के बीच लगातार तनातनी बनी हुई है। आपको याद होगा लोकसभा 204 चुनाव के दौरान बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने संघ को लेकर एक विवादित बयान दे दिया था।

उन्होंने साफ-साफ कहा था कि अब बीजेपी को संघ की जरूरत नहीं है। संघ अपने और काम देखे। और इस बयान ने संघ और बीजेपी के बीच दूरियां बढ़ा दी थी। संघ की नाराजगी इस बात पर भी थी कि जेपी नड्डा ने जो बयान दिया है इस पर बीजेपी आलाकमान यानी मोदी और शाह की तरफ से कोई टिप्पणी क्यों नहीं आई? क्यों उन्होंने इस बयान को खारिज नहीं किया? क्यों उन्होंने जेपी नड्डा के खिलाफ कोई एक्शन नहीं दिया? यानी उनकी जो चुप्पी थी उसे उनका समर्थन मान लिया गया।

यानी संघ ने यह मान लिया कि जो भी जेपी नड्डा ने कहा है वह बीजेपी आलाकमान के इशारे पर ही कहा है। ऐसे में संघ लगातार जेपी नड्डा के खिलाफ रहा और इसका असर यह हुआ कि लोकसभा चुनाव के नतीजे जब आए तो बीजेपी को करारा झटका लगा क्योंकि बीजेपी अकेले के दम पर बहुमत हासिल इस बार चुनाव में नहीं कर पाई। जबकि बीजेपी तो चार सुपार के सपने देख रही थी। इसके बाद बीजेपी समझ गई कि बिना संघ के उसका गुजारा नहीं हो सकता और इसीलिए संघ को मनाने की कोशिश की। लेकिन संघ अपनी मांग पर लगातार अड़ा रहा। संघ यह बात लगातार दोहराता रहा कि अगर हमारा समर्थन चाहिए तो अध्यक्ष हमारे पसंद का होना चाहिए और इसी के चलते लगातार चुनाव प्रक्रिया स्लो पर स्लो कराई गई। बीजेपी की तरफ से संघ की तरफ से बार-बार अल्टीमेटम दिया गया। पहले यह माना जा रहा था कि जनवरी में चुनाव होंगे। जब 2024 के अगस्त में चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई थी तब यह माना जा रहा था कि जनवरी में बीजेपी के अध्यक्ष पद के चुनाव होंगे। लेकिन जनवरी में भी चुनाव नहीं हुए। उसके बाद बीजेपी आलाकमान की तरफ से ऐलान हुआ कि जब दिल्ली विधानसभा चुनाव हो जाएंगे तब वहां पर चुनाव कराए जाएंगे बीजेपी अध्यक्ष को लेकर। लेकिन फिर दिल्ली चुनाव के बाद भी चुनाव को टाला गया, आगे बढ़ाया गया और फिर यह माना जा रहा था कि संघ ने अल्टीमेटम दे दिया है कि अप्रैल में हर हाल में बीजेपी अध्यक्ष मिल जाना चाहिए नया।

लेकिन अब जो खबर आ रही है उसने साफ-साफ बता दिया है कि बीजेपी आलाकमान संघ को पूरी तरह किनारे लगा चुका है और अब संघ के साथ बीजेपी आलाकमान आर-पार के मूड में है। जबकि पिछले दिनों खबर यह आ रही थी कि संघ ने साफ-साफ अल्टीमेटम दे दिया है कि एक चीज आप अपने पसंद की रख सकते हैं। या तो बीजेपी अध्यक्ष का पद अपने हाथ में रखिए या फिर पीएम की कुर्सी। तो अब बड़ा सवाल यह हैअब संघ क्या करेगा? यानी बीजेपी आलाकमान ने तो दो टोक बता दिया कि हमारा जो अध्यक्ष है वह तो जेपी नड्डा ही रहेंगे। लेकिन आगे अब पीएम पद को लेकर क्या स्थितियां बनेंगी? क्या संभावनाएं दिखाई दे रही हैं?अभी तो चुनाव है नहीं है।

लोकसभा का चुनाव जो होना है वो 2029 में होगा। और इसी को लेकर क्योंकि नरेंद्र मोदी को भी इस चीज का एहसास है कि अगर आरएसएस की पसंद के व्यक्ति को बीजेपी का अध्यक्ष बना दिया जाता है तो फिर अगला नंबर उन्हीं का आने वाला है। क्योंकि फिर यह कहा जाएगा कि आप 75 साल के हो गए हैं। आप कुर्सी छोड़िएगा और बहुत ज्यादा यदि नरेंद्र मोदी को आरएसएस फिर उसके बाद समय देगा तो एक या 2 साल तक का समय दे सकता है। लेकिन 2029 का चुनाव फिर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए और बीजेपी नहीं लड़ेगी।दूसरा यह है कि यदि नड्डा की जगह किसी और को बनाना पड़े तो फिर वह बीजेपी हाईकमान ही तय करे उसमें संघ की ज़्यादा कोई बस खाली उनको नाम भेज दिया जाएगा| संघ मोहर लगा दे लेकिन संघ की तरफ से नाम तय नहीं किया जाए। ये शुरुआत से ही चल रहा था जो लोकसभा चुनाव के समय पर जो बयान दिया था जेपी नड्डा ने ये बात तो संघ के सभी नेताओं को पता है कि विदाउट अमित शाह और नरेंद्र मोदी की सहमति के जेपी नड्डा इतना बड़ा बयान नहीं दे सकते हैं। और इसको लेकर ही संघ की नाराजगी तो वो अलग है ही है। क्योंकि संघ नहीं चाहता कि जेपी नड्डा या जेपी नड्डा जैसा कोई दूसरा शख्स बीजेपी का अध्यक्ष बने। और इसीलिए जो संघ की तरफ से शुरुआत में संजय जोशी का नाम लेकर आया गया। लेकिन संजय जोशी को लेकर तो आपको पता है कि किस तरीके से बीजेपी हाईकमान में साफ-साफ रेड सिग्नल दिखा दिया गया। यहां तक कि जिन लोगों ने संजय जोशी के नाम के पोस्टर भी लगाए उन सभी को नोटिस जारी कर दिए गए। जी तो यह तो तय हो गया कि जो आरएसएस की तरफ से जो नाम आएगा उसको बीजेपी हाईकमान पूरी तरीके से खारिज कर देगा और इसी के चलते क्योंकि ना तो आरएसएस का नाम बीजेपी हाईकमान मानने को तैयार है और ना ही बीजेपी हाईकमान की तरफ से जो नाम दिया जा रहा है उसको संघ स्वीकार कर रहा है और इसी के चलते जेपी नड्डा के नाम पर अब मोदी और शाह भी अड़ गए हैं और उन्होंने साफ कर दिया है कि जेपी नड्डा ही हमारे अध्यक्ष रहेंगे और जहां तक चुनाव प्रक्रिया की बात है कि जब तक आरएसएस अपनी तरफ से इसको सहमति नहीं देता है तब तक के लिए चुनाव प्रक्रिया भी टाल दी गई है।

चुनाव प्रक्रिया को इसीलिए इतना स्लो किया जा रहा है जिससे कि आखिर में जेपी नड्डा को ही अध्यक्ष चुना जा सके। यानी अब बीजेपी आलाकमान की तरफ से ऐलान कर दिया गया है कि कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है। जेपी नड्डा ही अध्यक्ष रहेंगे। यानी ये तो साफ है कि बिहार विधानसभा चुनाव अब जेपी नड्डा के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा और उसके आगे हो सकता है बंगाल विधानसभा चुनाव और जो दूसरे राज्यों के चुनाव हैं बंगाल के साथ वो सभी के सब अब बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के नेतृत्व में ही लड़े जाएंगे क्योंकि जैसा कि आपको बता दें 2024-25 में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव कई राज्यों में हुए क्योंकि राष्ट्रीय अध्यक्ष का जो चुनाव है शुरू होने से पहले कम से कम 50% राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे होने जरूरी होते हैं। ऐसा नियम है बीजेपी का और उस मीटिंग में यह अल्टीमेटम दे दिया गया था बीजेपी आलाकमान को कि आप जल्द से जल्द बीजेपी अध्यक्ष चुन लीजिए नया और तभी संघ आपको आगे समर्थन करेगा लेकिन जिस तरह से बीजेपी आलाकमान ने अपना फैसला संघ को सुना दिया है अब संघ नाराज दिखाई दे रहा है और यह माना जा रहा था कि संघ ने जिस तरह से अल्टीमेटम दिया उसको देखते हुए अप्रैल में कम से कम 19 राज्यों के चुनाव बीजेपी करवा लेगी लेकिन अब खबर आ रही है कि बीजेपी ने अपना जो चुनाव प्रक्रिया है उसको आगे के लिए टाल दिया है टालने का साफ-साफ मतलब है कि जेपी नड्डा को बनाए रखने के लिए बीजेपी आलाकमान जो अभी तक दूसरी तड़मे लगा रही थी जब उसकी कोई भी तड़म नहीं चली तो उसने सीधे-सीधे अपना फरमान अब संघ को भी सुना दिया है कि इसमें कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है। हां बिल्कुल क्योंकि जिस तरीके से चुनाव टाला गया है क्योंकि अभी अप्रैल चल रहा है और मई पहले ये चल एक बात कही जा रही थी कि मई में चुनाव प्रक्रिया शुरू की जा सकती है क्योंकि जो 36 राज्य और यूनियन टेरिटरी हैं उनमें से आधे यानी आधे से ज्यादा यानी 19 राज्यों में या यूनियन टेरिटरी में बीजेपी के जो संगठन चुनाव पूरे हो जाने चाहिए थे। लेकिन जिस तरीके से पिछले 4 महीने में सिर्फ दो राज्यों में चुनाव हुए क्योंकि 12 राज्यों में तो चुनाव पहले ही हो चुके थे। सिर्फ दो राज्यों में चुनाव हुए हैं। उससे साफ दिख रहा था कि इतना स्लो ये प्रक्रिया कर दी गई है कि चुनाव अप्रैल मई में हो ही ना हो पाए। अब इस चुनाव को अनिश्चितकाल के लिए टाला गया है और यह तय है कि यदि तीन चार महीने चुनाव नहीं होते हैं तो फिर ये कहा जाएगा कि अब बिहार चुनाव आ गया है क्योंकि चुनाव से जस्ट पहले यदि चुनाव नया अध्यक्ष पार्टी को मिलेगा तो वो अपनी नई टीम नहीं बना पाएगा और उसका असर बिहार जैसे राज्य पर पड़ेगा। तो फिर बिहार चुनाव के चलते चुनाव चुनाव टाला जाएगा। फिर बिहार चुनाव जैसे ही खत्म होगा वैसे ही पांच राज्य के चुनाव प्रक्रिया टाली गई है उनका एक साल और बढ़ जाएगा। यानी एक्सटेंशन पर ही उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष का ये कार्यकाल पूरा कर लिया है।

संघ कुछ भी करे लेकिन बीजेपी हाईकमान ने जो सोच रखा है वही होना है और ये तय हो गया है कि जेपी नड्डा ही बीजेपी के अध्यक्ष रहेंगे और जेपी नड्डा की जगह यदि कोई दूसरा शख्स आएगा भी तो बीजेपी हाईकमान की पसंद का ही आएगा। इस पूरे मामले में अब आरएसएस को बीजेपी हाईकमान यानी मोदी और अमित शाह ने एक तरह से पूरी तरीके से किनारे कर दिया है। जी बिल्कुल उन्होंने अपना मैसेज संघ तक पहुंचा दिया है कि मर्जी तो अब बीजेपी आलाकमान की ही चलेगी। यानी अगर जेपी नड्डा जाएंगे तो भी जो दूसरा अध्यक्ष होगा वो बीजेपी आलाकमान यानी बीजेपी हाईकमान की पसंद का ही होगा। ऐसे में अब सभी की निगाहें हैं संघ पर कि संघ इस पूरे मामले को लेकर अब क्या प्रतिक्रिया देता है।


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बीजेपी के अध्यक्ष का चुनाव अब टल गया है

बीजेपी के अध्यक्ष का चुनाव अब टल गया है

 बीजेपी के अध्यक्ष का चुनाव अब टल गया है और यह तय हो चुका है कि बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ही रहेंगे।अध्यक्ष पद को लेकर आरएसएस और बीजेपी हाईकमान के बीच में जो टकराव चल रहा है उस टकराव के केंद्र में जेपी नड्डा हैं। संघ चाहता है कि जेपी नड्डा को हटाया जाए और दूसरी तरफ बीजेपी हाईकमान यानी कि मोदी और शाह ये चाहते हैं कि जेपी नड्डा ही अध्यक्ष बने रहे और इसको लेकर लगातार क्योंकि अक्टूबर से चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अक्टूबर से लेकर अप्रैल आ गया है। हर बार एक नई तारीख आती है और तारीख निकल जाती है उसके बाद एक नई तारीख फिर आ जाती है और अब तो चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरीके से ही रोक दिया गया है और अब ये चुनाव प्रक्रिया कब से शुरू होगी क्योंकि पहले ये कहा जा रहा था कि अप्रैल में बीजेपी को नया अध्यक्ष मिल जाएगा लेकिन अप्रैल तो पूरा निकल ही गया है लगभग 2 दिन बचे हुए हैं। अब ये क्या कहा जा रहा है कि मई में भी बीजेपी को अध्यक्ष नहीं मिलेगा। यहां तक कि ये कहा अब तो सीधा-सीधा ये कह दिया गया जो बीजेपी की उच्च स्तरीय कमेटी है उसने ये बोल दिया है कि अभी हम चुनाव प्रक्रिया को रोक रहे हैं। यानी कि आगे भी कब भी अध्यक्ष पद बीजेपी को अध्यक्ष नया मिलेगा। इस पर सवाल खड़े हो गए हैं और साफ-साफ यह कहा गया है कि जेपी नड्डा ही बीजेपी के अध्यक्ष बने रहेंगे। जबकि जेपी नड्डा को लेकर बीजेपी और आरएसएस के बीच लगातार तनातनी बनी हुई है। आपको याद होगा लोकसभा 204 चुनाव के दौरान बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने संघ को लेकर एक विवादित बयान दे दिया था।

उन्होंने साफ-साफ कहा था कि अब बीजेपी को संघ की जरूरत नहीं है। संघ अपने और काम देखे। और इस बयान ने संघ और बीजेपी के बीच दूरियां बढ़ा दी थी। संघ की नाराजगी इस बात पर भी थी कि जेपी नड्डा ने जो बयान दिया है इस पर बीजेपी आलाकमान यानी मोदी और शाह की तरफ से कोई टिप्पणी क्यों नहीं आई? क्यों उन्होंने इस बयान को खारिज नहीं किया? क्यों उन्होंने जेपी नड्डा के खिलाफ कोई एक्शन नहीं दिया? यानी उनकी जो चुप्पी थी उसे उनका समर्थन मान लिया गया।

यानी संघ ने यह मान लिया कि जो भी जेपी नड्डा ने कहा है वह बीजेपी आलाकमान के इशारे पर ही कहा है। ऐसे में संघ लगातार जेपी नड्डा के खिलाफ रहा और इसका असर यह हुआ कि लोकसभा चुनाव के नतीजे जब आए तो बीजेपी को करारा झटका लगा क्योंकि बीजेपी अकेले के दम पर बहुमत हासिल इस बार चुनाव में नहीं कर पाई। जबकि बीजेपी तो चार सुपार के सपने देख रही थी। इसके बाद बीजेपी समझ गई कि बिना संघ के उसका गुजारा नहीं हो सकता और इसीलिए संघ को मनाने की कोशिश की। लेकिन संघ अपनी मांग पर लगातार अड़ा रहा। संघ यह बात लगातार दोहराता रहा कि अगर हमारा समर्थन चाहिए तो अध्यक्ष हमारे पसंद का होना चाहिए और इसी के चलते लगातार चुनाव प्रक्रिया स्लो पर स्लो कराई गई। बीजेपी की तरफ से संघ की तरफ से बार-बार अल्टीमेटम दिया गया। पहले यह माना जा रहा था कि जनवरी में चुनाव होंगे। जब 2024 के अगस्त में चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई थी तब यह माना जा रहा था कि जनवरी में बीजेपी के अध्यक्ष पद के चुनाव होंगे। लेकिन जनवरी में भी चुनाव नहीं हुए। उसके बाद बीजेपी आलाकमान की तरफ से ऐलान हुआ कि जब दिल्ली विधानसभा चुनाव हो जाएंगे तब वहां पर चुनाव कराए जाएंगे बीजेपी अध्यक्ष को लेकर। लेकिन फिर दिल्ली चुनाव के बाद भी चुनाव को टाला गया, आगे बढ़ाया गया और फिर यह माना जा रहा था कि संघ ने अल्टीमेटम दे दिया है कि अप्रैल में हर हाल में बीजेपी अध्यक्ष मिल जाना चाहिए नया।

लेकिन अब जो खबर आ रही है उसने साफ-साफ बता दिया है कि बीजेपी आलाकमान संघ को पूरी तरह किनारे लगा चुका है और अब संघ के साथ बीजेपी आलाकमान आर-पार के मूड में है। जबकि पिछले दिनों खबर यह आ रही थी कि संघ ने साफ-साफ अल्टीमेटम दे दिया है कि एक चीज आप अपने पसंद की रख सकते हैं। या तो बीजेपी अध्यक्ष का पद अपने हाथ में रखिए या फिर पीएम की कुर्सी। तो अब बड़ा सवाल यह हैअब संघ क्या करेगा? यानी बीजेपी आलाकमान ने तो दो टोक बता दिया कि हमारा जो अध्यक्ष है वह तो जेपी नड्डा ही रहेंगे। लेकिन आगे अब पीएम पद को लेकर क्या स्थितियां बनेंगी? क्या संभावनाएं दिखाई दे रही हैं?अभी तो चुनाव है नहीं है।

लोकसभा का चुनाव जो होना है वो 2029 में होगा। और इसी को लेकर क्योंकि नरेंद्र मोदी को भी इस चीज का एहसास है कि अगर आरएसएस की पसंद के व्यक्ति को बीजेपी का अध्यक्ष बना दिया जाता है तो फिर अगला नंबर उन्हीं का आने वाला है। क्योंकि फिर यह कहा जाएगा कि आप 75 साल के हो गए हैं। आप कुर्सी छोड़िएगा और बहुत ज्यादा यदि नरेंद्र मोदी को आरएसएस फिर उसके बाद समय देगा तो एक या 2 साल तक का समय दे सकता है। लेकिन 2029 का चुनाव फिर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए और बीजेपी नहीं लड़ेगी।दूसरा यह है कि यदि नड्डा की जगह किसी और को बनाना पड़े तो फिर वह बीजेपी हाईकमान ही तय करे उसमें संघ की ज़्यादा कोई बस खाली उनको नाम भेज दिया जाएगा| संघ मोहर लगा दे लेकिन संघ की तरफ से नाम तय नहीं किया जाए। ये शुरुआत से ही चल रहा था जो लोकसभा चुनाव के समय पर जो बयान दिया था जेपी नड्डा ने ये बात तो संघ के सभी नेताओं को पता है कि विदाउट अमित शाह और नरेंद्र मोदी की सहमति के जेपी नड्डा इतना बड़ा बयान नहीं दे सकते हैं। और इसको लेकर ही संघ की नाराजगी तो वो अलग है ही है। क्योंकि संघ नहीं चाहता कि जेपी नड्डा या जेपी नड्डा जैसा कोई दूसरा शख्स बीजेपी का अध्यक्ष बने। और इसीलिए जो संघ की तरफ से शुरुआत में संजय जोशी का नाम लेकर आया गया। लेकिन संजय जोशी को लेकर तो आपको पता है कि किस तरीके से बीजेपी हाईकमान में साफ-साफ रेड सिग्नल दिखा दिया गया। यहां तक कि जिन लोगों ने संजय जोशी के नाम के पोस्टर भी लगाए उन सभी को नोटिस जारी कर दिए गए। जी तो यह तो तय हो गया कि जो आरएसएस की तरफ से जो नाम आएगा उसको बीजेपी हाईकमान पूरी तरीके से खारिज कर देगा और इसी के चलते क्योंकि ना तो आरएसएस का नाम बीजेपी हाईकमान मानने को तैयार है और ना ही बीजेपी हाईकमान की तरफ से जो नाम दिया जा रहा है उसको संघ स्वीकार कर रहा है और इसी के चलते जेपी नड्डा के नाम पर अब मोदी और शाह भी अड़ गए हैं और उन्होंने साफ कर दिया है कि जेपी नड्डा ही हमारे अध्यक्ष रहेंगे और जहां तक चुनाव प्रक्रिया की बात है कि जब तक आरएसएस अपनी तरफ से इसको सहमति नहीं देता है तब तक के लिए चुनाव प्रक्रिया भी टाल दी गई है।

चुनाव प्रक्रिया को इसीलिए इतना स्लो किया जा रहा है जिससे कि आखिर में जेपी नड्डा को ही अध्यक्ष चुना जा सके। यानी अब बीजेपी आलाकमान की तरफ से ऐलान कर दिया गया है कि कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है। जेपी नड्डा ही अध्यक्ष रहेंगे। यानी ये तो साफ है कि बिहार विधानसभा चुनाव अब जेपी नड्डा के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा और उसके आगे हो सकता है बंगाल विधानसभा चुनाव और जो दूसरे राज्यों के चुनाव हैं बंगाल के साथ वो सभी के सब अब बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के नेतृत्व में ही लड़े जाएंगे क्योंकि जैसा कि आपको बता दें 2024-25 में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव कई राज्यों में हुए क्योंकि राष्ट्रीय अध्यक्ष का जो चुनाव है शुरू होने से पहले कम से कम 50% राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे होने जरूरी होते हैं। ऐसा नियम है बीजेपी का और उस मीटिंग में यह अल्टीमेटम दे दिया गया था बीजेपी आलाकमान को कि आप जल्द से जल्द बीजेपी अध्यक्ष चुन लीजिए नया और तभी संघ आपको आगे समर्थन करेगा लेकिन जिस तरह से बीजेपी आलाकमान ने अपना फैसला संघ को सुना दिया है अब संघ नाराज दिखाई दे रहा है और यह माना जा रहा था कि संघ ने जिस तरह से अल्टीमेटम दिया उसको देखते हुए अप्रैल में कम से कम 19 राज्यों के चुनाव बीजेपी करवा लेगी लेकिन अब खबर आ रही है कि बीजेपी ने अपना जो चुनाव प्रक्रिया है उसको आगे के लिए टाल दिया है टालने का साफ-साफ मतलब है कि जेपी नड्डा को बनाए रखने के लिए बीजेपी आलाकमान जो अभी तक दूसरी तड़मे लगा रही थी जब उसकी कोई भी तड़म नहीं चली तो उसने सीधे-सीधे अपना फरमान अब संघ को भी सुना दिया है कि इसमें कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है। हां बिल्कुल क्योंकि जिस तरीके से चुनाव टाला गया है क्योंकि अभी अप्रैल चल रहा है और मई पहले ये चल एक बात कही जा रही थी कि मई में चुनाव प्रक्रिया शुरू की जा सकती है क्योंकि जो 36 राज्य और यूनियन टेरिटरी हैं उनमें से आधे यानी आधे से ज्यादा यानी 19 राज्यों में या यूनियन टेरिटरी में बीजेपी के जो संगठन चुनाव पूरे हो जाने चाहिए थे। लेकिन जिस तरीके से पिछले 4 महीने में सिर्फ दो राज्यों में चुनाव हुए क्योंकि 12 राज्यों में तो चुनाव पहले ही हो चुके थे। सिर्फ दो राज्यों में चुनाव हुए हैं। उससे साफ दिख रहा था कि इतना स्लो ये प्रक्रिया कर दी गई है कि चुनाव अप्रैल मई में हो ही ना हो पाए। अब इस चुनाव को अनिश्चितकाल के लिए टाला गया है और यह तय है कि यदि तीन चार महीने चुनाव नहीं होते हैं तो फिर ये कहा जाएगा कि अब बिहार चुनाव आ गया है क्योंकि चुनाव से जस्ट पहले यदि चुनाव नया अध्यक्ष पार्टी को मिलेगा तो वो अपनी नई टीम नहीं बना पाएगा और उसका असर बिहार जैसे राज्य पर पड़ेगा। तो फिर बिहार चुनाव के चलते चुनाव चुनाव टाला जाएगा। फिर बिहार चुनाव जैसे ही खत्म होगा वैसे ही पांच राज्य के चुनाव प्रक्रिया टाली गई है उनका एक साल और बढ़ जाएगा। यानी एक्सटेंशन पर ही उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष का ये कार्यकाल पूरा कर लिया है।

संघ कुछ भी करे लेकिन बीजेपी हाईकमान ने जो सोच रखा है वही होना है और ये तय हो गया है कि जेपी नड्डा ही बीजेपी के अध्यक्ष रहेंगे और जेपी नड्डा की जगह यदि कोई दूसरा शख्स आएगा भी तो बीजेपी हाईकमान की पसंद का ही आएगा। इस पूरे मामले में अब आरएसएस को बीजेपी हाईकमान यानी मोदी और अमित शाह ने एक तरह से पूरी तरीके से किनारे कर दिया है। जी बिल्कुल उन्होंने अपना मैसेज संघ तक पहुंचा दिया है कि मर्जी तो अब बीजेपी आलाकमान की ही चलेगी। यानी अगर जेपी नड्डा जाएंगे तो भी जो दूसरा अध्यक्ष होगा वो बीजेपी आलाकमान यानी बीजेपी हाईकमान की पसंद का ही होगा। ऐसे में अब सभी की निगाहें हैं संघ पर कि संघ इस पूरे मामले को लेकर अब क्या प्रतिक्रिया देता है।


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बीजेपी के अध्यक्ष का चुनाव अब टल गया है?

 बीजेपी के अध्यक्ष का चुनाव अब टल गया है और यह तय हो चुका है कि बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ही रहेंगे।अध्यक्ष पद को लेकर आरएसएस और बीजेपी हाईकमान के बीच में जो टकराव चल रहा है उस टकराव के केंद्र में जेपी नड्डा हैं। संघ चाहता है कि जेपी नड्डा को हटाया जाए और दूसरी तरफ बीजेपी हाईकमान यानी कि मोदी और शाह ये चाहते हैं कि जेपी नड्डा ही अध्यक्ष बने रहे और इसको लेकर लगातार क्योंकि अक्टूबर से चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और अक्टूबर से लेकर अप्रैल आ गया है। हर बार एक नई तारीख आती है और तारीख निकल जाती है उसके बाद एक नई तारीख फिर आ जाती है और अब तो चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरीके से ही रोक दिया गया है और अब ये चुनाव प्रक्रिया कब से शुरू होगी क्योंकि पहले ये कहा जा रहा था कि अप्रैल में बीजेपी को नया अध्यक्ष मिल जाएगा लेकिन अप्रैल तो पूरा निकल ही गया है लगभग 2 दिन बचे हुए हैं। अब ये क्या कहा जा रहा है कि मई में भी बीजेपी को अध्यक्ष नहीं मिलेगा। यहां तक कि ये कहा अब तो सीधा-सीधा ये कह दिया गया जो बीजेपी की उच्च स्तरीय कमेटी है उसने ये बोल दिया है कि अभी हम चुनाव प्रक्रिया को रोक रहे हैं। यानी कि आगे भी कब भी अध्यक्ष पद बीजेपी को अध्यक्ष नया मिलेगा। इस पर सवाल खड़े हो गए हैं और साफ-साफ यह कहा गया है कि जेपी नड्डा ही बीजेपी के अध्यक्ष बने रहेंगे। जबकि जेपी नड्डा को लेकर बीजेपी और आरएसएस के बीच लगातार तनातनी बनी हुई है। आपको याद होगा लोकसभा 204 चुनाव के दौरान बीजेपी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने संघ को लेकर एक विवादित बयान दे दिया था।

उन्होंने साफ-साफ कहा था कि अब बीजेपी को संघ की जरूरत नहीं है। संघ अपने और काम देखे। और इस बयान ने संघ और बीजेपी के बीच दूरियां बढ़ा दी थी। संघ की नाराजगी इस बात पर भी थी कि जेपी नड्डा ने जो बयान दिया है इस पर बीजेपी आलाकमान यानी मोदी और शाह की तरफ से कोई टिप्पणी क्यों नहीं आई? क्यों उन्होंने इस बयान को खारिज नहीं किया? क्यों उन्होंने जेपी नड्डा के खिलाफ कोई एक्शन नहीं दिया? यानी उनकी जो चुप्पी थी उसे उनका समर्थन मान लिया गया।

यानी संघ ने यह मान लिया कि जो भी जेपी नड्डा ने कहा है वह बीजेपी आलाकमान के इशारे पर ही कहा है। ऐसे में संघ लगातार जेपी नड्डा के खिलाफ रहा और इसका असर यह हुआ कि लोकसभा चुनाव के नतीजे जब आए तो बीजेपी को करारा झटका लगा क्योंकि बीजेपी अकेले के दम पर बहुमत हासिल इस बार चुनाव में नहीं कर पाई। जबकि बीजेपी तो चार सुपार के सपने देख रही थी। इसके बाद बीजेपी समझ गई कि बिना संघ के उसका गुजारा नहीं हो सकता और इसीलिए संघ को मनाने की कोशिश की। लेकिन संघ अपनी मांग पर लगातार अड़ा रहा। संघ यह बात लगातार दोहराता रहा कि अगर हमारा समर्थन चाहिए तो अध्यक्ष हमारे पसंद का होना चाहिए और इसी के चलते लगातार चुनाव प्रक्रिया स्लो पर स्लो कराई गई। बीजेपी की तरफ से संघ की तरफ से बार-बार अल्टीमेटम दिया गया। पहले यह माना जा रहा था कि जनवरी में चुनाव होंगे। जब 2024 के अगस्त में चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई थी तब यह माना जा रहा था कि जनवरी में बीजेपी के अध्यक्ष पद के चुनाव होंगे। लेकिन जनवरी में भी चुनाव नहीं हुए। उसके बाद बीजेपी आलाकमान की तरफ से ऐलान हुआ कि जब दिल्ली विधानसभा चुनाव हो जाएंगे तब वहां पर चुनाव कराए जाएंगे बीजेपी अध्यक्ष को लेकर। लेकिन फिर दिल्ली चुनाव के बाद भी चुनाव को टाला गया, आगे बढ़ाया गया और फिर यह माना जा रहा था कि संघ ने अल्टीमेटम दे दिया है कि अप्रैल में हर हाल में बीजेपी अध्यक्ष मिल जाना चाहिए नया।

लेकिन अब जो खबर आ रही है उसने साफ-साफ बता दिया है कि बीजेपी आलाकमान संघ को पूरी तरह किनारे लगा चुका है और अब संघ के साथ बीजेपी आलाकमान आर-पार के मूड में है। जबकि पिछले दिनों खबर यह आ रही थी कि संघ ने साफ-साफ अल्टीमेटम दे दिया है कि एक चीज आप अपने पसंद की रख सकते हैं। या तो बीजेपी अध्यक्ष का पद अपने हाथ में रखिए या फिर पीएम की कुर्सी। तो अब बड़ा सवाल यह हैअब संघ क्या करेगा? यानी बीजेपी आलाकमान ने तो दो टोक बता दिया कि हमारा जो अध्यक्ष है वह तो जेपी नड्डा ही रहेंगे। लेकिन आगे अब पीएम पद को लेकर क्या स्थितियां बनेंगी? क्या संभावनाएं दिखाई दे रही हैं?अभी तो चुनाव है नहीं है।

लोकसभा का चुनाव जो होना है वो 2029 में होगा। और इसी को लेकर क्योंकि नरेंद्र मोदी को भी इस चीज का एहसास है कि अगर आरएसएस की पसंद के व्यक्ति को बीजेपी का अध्यक्ष बना दिया जाता है तो फिर अगला नंबर उन्हीं का आने वाला है। क्योंकि फिर यह कहा जाएगा कि आप 75 साल के हो गए हैं। आप कुर्सी छोड़िएगा और बहुत ज्यादा यदि नरेंद्र मोदी को आरएसएस फिर उसके बाद समय देगा तो एक या 2 साल तक का समय दे सकता है। लेकिन 2029 का चुनाव फिर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए और बीजेपी नहीं लड़ेगी।दूसरा यह है कि यदि नड्डा की जगह किसी और को बनाना पड़े तो फिर वह बीजेपी हाईकमान ही तय करे उसमें संघ की ज़्यादा कोई बस खाली उनको नाम भेज दिया जाएगा| संघ मोहर लगा दे लेकिन संघ की तरफ से नाम तय नहीं किया जाए। ये शुरुआत से ही चल रहा था जो लोकसभा चुनाव के समय पर जो बयान दिया था जेपी नड्डा ने ये बात तो संघ के सभी नेताओं को पता है कि विदाउट अमित शाह और नरेंद्र मोदी की सहमति के जेपी नड्डा इतना बड़ा बयान नहीं दे सकते हैं। और इसको लेकर ही संघ की नाराजगी तो वो अलग है ही है। क्योंकि संघ नहीं चाहता कि जेपी नड्डा या जेपी नड्डा जैसा कोई दूसरा शख्स बीजेपी का अध्यक्ष बने। और इसीलिए जो संघ की तरफ से शुरुआत में संजय जोशी का नाम लेकर आया गया। लेकिन संजय जोशी को लेकर तो आपको पता है कि किस तरीके से बीजेपी हाईकमान में साफ-साफ रेड सिग्नल दिखा दिया गया। यहां तक कि जिन लोगों ने संजय जोशी के नाम के पोस्टर भी लगाए उन सभी को नोटिस जारी कर दिए गए। जी तो यह तो तय हो गया कि जो आरएसएस की तरफ से जो नाम आएगा उसको बीजेपी हाईकमान पूरी तरीके से खारिज कर देगा और इसी के चलते क्योंकि ना तो आरएसएस का नाम बीजेपी हाईकमान मानने को तैयार है और ना ही बीजेपी हाईकमान की तरफ से जो नाम दिया जा रहा है उसको संघ स्वीकार कर रहा है और इसी के चलते जेपी नड्डा के नाम पर अब मोदी और शाह भी अड़ गए हैं और उन्होंने साफ कर दिया है कि जेपी नड्डा ही हमारे अध्यक्ष रहेंगे और जहां तक चुनाव प्रक्रिया की बात है कि जब तक आरएसएस अपनी तरफ से इसको सहमति नहीं देता है तब तक के लिए चुनाव प्रक्रिया भी टाल दी गई है।

चुनाव प्रक्रिया को इसीलिए इतना स्लो किया जा रहा है जिससे कि आखिर में जेपी नड्डा को ही अध्यक्ष चुना जा सके। यानी अब बीजेपी आलाकमान की तरफ से ऐलान कर दिया गया है कि कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है। जेपी नड्डा ही अध्यक्ष रहेंगे। यानी ये तो साफ है कि बिहार विधानसभा चुनाव अब जेपी नड्डा के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा और उसके आगे हो सकता है बंगाल विधानसभा चुनाव और जो दूसरे राज्यों के चुनाव हैं बंगाल के साथ वो सभी के सब अब बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा के नेतृत्व में ही लड़े जाएंगे क्योंकि जैसा कि आपको बता दें 2024-25 में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव कई राज्यों में हुए क्योंकि राष्ट्रीय अध्यक्ष का जो चुनाव है शुरू होने से पहले कम से कम 50% राज्यों में संगठनात्मक चुनाव पूरे होने जरूरी होते हैं। ऐसा नियम है बीजेपी का और उस मीटिंग में यह अल्टीमेटम दे दिया गया था बीजेपी आलाकमान को कि आप जल्द से जल्द बीजेपी अध्यक्ष चुन लीजिए नया और तभी संघ आपको आगे समर्थन करेगा लेकिन जिस तरह से बीजेपी आलाकमान ने अपना फैसला संघ को सुना दिया है अब संघ नाराज दिखाई दे रहा है और यह माना जा रहा था कि संघ ने जिस तरह से अल्टीमेटम दिया उसको देखते हुए अप्रैल में कम से कम 19 राज्यों के चुनाव बीजेपी करवा लेगी लेकिन अब खबर आ रही है कि बीजेपी ने अपना जो चुनाव प्रक्रिया है उसको आगे के लिए टाल दिया है टालने का साफ-साफ मतलब है कि जेपी नड्डा को बनाए रखने के लिए बीजेपी आलाकमान जो अभी तक दूसरी तड़मे लगा रही थी जब उसकी कोई भी तड़म नहीं चली तो उसने सीधे-सीधे अपना फरमान अब संघ को भी सुना दिया है कि इसमें कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है। हां बिल्कुल क्योंकि जिस तरीके से चुनाव टाला गया है क्योंकि अभी अप्रैल चल रहा है और मई पहले ये चल एक बात कही जा रही थी कि मई में चुनाव प्रक्रिया शुरू की जा सकती है क्योंकि जो 36 राज्य और यूनियन टेरिटरी हैं उनमें से आधे यानी आधे से ज्यादा यानी 19 राज्यों में या यूनियन टेरिटरी में बीजेपी के जो संगठन चुनाव पूरे हो जाने चाहिए थे। लेकिन जिस तरीके से पिछले 4 महीने में सिर्फ दो राज्यों में चुनाव हुए क्योंकि 12 राज्यों में तो चुनाव पहले ही हो चुके थे। सिर्फ दो राज्यों में चुनाव हुए हैं। उससे साफ दिख रहा था कि इतना स्लो ये प्रक्रिया कर दी गई है कि चुनाव अप्रैल मई में हो ही ना हो पाए। अब इस चुनाव को अनिश्चितकाल के लिए टाला गया है और यह तय है कि यदि तीन चार महीने चुनाव नहीं होते हैं तो फिर ये कहा जाएगा कि अब बिहार चुनाव आ गया है क्योंकि चुनाव से जस्ट पहले यदि चुनाव नया अध्यक्ष पार्टी को मिलेगा तो वो अपनी नई टीम नहीं बना पाएगा और उसका असर बिहार जैसे राज्य पर पड़ेगा। तो फिर बिहार चुनाव के चलते चुनाव चुनाव टाला जाएगा। फिर बिहार चुनाव जैसे ही खत्म होगा वैसे ही पांच राज्य के चुनाव प्रक्रिया टाली गई है उनका एक साल और बढ़ जाएगा। यानी एक्सटेंशन पर ही उन्होंने बीजेपी अध्यक्ष का ये कार्यकाल पूरा कर लिया है।

संघ कुछ भी करे लेकिन बीजेपी हाईकमान ने जो सोच रखा है वही होना है और ये तय हो गया है कि जेपी नड्डा ही बीजेपी के अध्यक्ष रहेंगे और जेपी नड्डा की जगह यदि कोई दूसरा शख्स आएगा भी तो बीजेपी हाईकमान की पसंद का ही आएगा। इस पूरे मामले में अब आरएसएस को बीजेपी हाईकमान यानी मोदी और अमित शाह ने एक तरह से पूरी तरीके से किनारे कर दिया है। जी बिल्कुल उन्होंने अपना मैसेज संघ तक पहुंचा दिया है कि मर्जी तो अब बीजेपी आलाकमान की ही चलेगी। यानी अगर जेपी नड्डा जाएंगे तो भी जो दूसरा अध्यक्ष होगा वो बीजेपी आलाकमान यानी बीजेपी हाईकमान की पसंद का ही होगा। ऐसे में अब सभी की निगाहें हैं संघ पर कि संघ इस पूरे मामले को लेकर अब क्या प्रतिक्रिया देता है।

Monday, April 28, 2025

दिल्ली हाईकोर्ट के विद्वान न्यायाधीश -स्पेशल हियरिंग शीनाज पाकिस्तान

 पहलगाम इस्लामिक टेरर अटैक के बाद जिसमें हिंदुओं की पहचान करके उनकी हत्याएं की गई। हमारी सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ बहुत सारे फैसले लिए। चाहे वह इंडस वाटर ट्रीटी को सस्पेंड करने का हो और उसी के साथ-साथ बॉर्डर्स बंद करने का हो। बॉर्डर्स बंद करने के ही साथ 48 घंटे में पाकिस्तानी सिटीजंस जिनके पास पाकिस्तानी पासपोर्ट है और वह भारत में मौजूद हैं उनको देश खाली करने का आदेश। बहुत जगह मैंने इस तरह की टिप्पणियां देखी।

अपने वीडियोस में भी देखी और उसी के साथ यत्र तत्र सोशल मीडिया पर भी इस तरह की शंकाएं देखी और यह बड़ा वाजिब है और यह मामला जुड़ा हुआ है हमारी देश की जुडिशरी न्यायपालिका से बहुत सारे लोगों ने चाहे वो सरकार का फैसला इंडस्ट्री वाला रहा हो चाहे 48 घंटे में नागरिकों को पाकिस्तानी भारत छोड़ देने का मामला रहा हो मुझे बहुत सारे लोग यह कहते हुए दिखाई दिए कि साहब देखिएगा कोर्ट है कोर्ट है कोर्ट है कोर्ट इसमें में इंटरवेन करेगा और कोर्ट कुछ ना कुछ ऐसा खुराफाती निर्णय दे देगा जो कि सरकार के इन फैसलों के खिलाफ होंगे। यह चिंताएं मौलिक भी हैं। जो विमर्श इस समय हमारे देश में जुडिशरी को लेकर चल रहा है। तो उसके बीच में अगर इस तरह की चर्चाएं हो रही है, शंकाएं हो रही हैं तो यह कोई उतना गैर वाजिब भी नहीं है। इसकी गुंजाइश खुद न्यायपालिका ने बनाई है। सवाल यह बड़ा है।

लेकिन क्या वाकई में ऐसे किसी मामले में हमारी जुडिशरी दखल दे सकती है? मैं जब इसके पड़ताल पर लगा तो मेरे हाथ लगा एक ऐसा निर्णय जो कि कोर्ट से निकल के आया है और इसी मामले से जुड़ा हुआ है जो कि यह आधार साफ करता है कि सरकार के पाकिस्तान के खिलाफ लिए गए किसी अभी तक के फैसले या आगे आने वाले किसी तरह के फैसले उनमें कोर्ट कभी भी दखल नहीं देगा। जी हां, यह मामला जुड़ा है पाकिस्तान के पासपोर्ट धारी एक महिला शीना नाच से। शीना नाच जिसकी आपने तमाम वो वीडियोस देखे होंगे। अटारी बाघा बॉर्डर से रोती हुई महिलाएं, कलपती हुई महिलाएं, विक्टिम कार्ड खेलती हुई महिलाएं, हमारे बच्चे सीमा के उस पार हैं। हमारा शौहर इधर है, हम उधर है। इस पर जरा बाद में आएंगे। लेकिन उन्हीं में भीड़ में से एक औरत शीनाज उसको भी 29 तारीख तक यानी कल तक भारत छोड़ देना है। लेकिन वो सीधे पहुंच जाती है दिल्ली हाई कोर्ट और उसने दिल्ली हाई कोर्ट में यह तर्क दिया कि साहब देखिए हमारा रेजिडेंशियल जो परमिट है भारत में वो 26 मार्च से 9 मई तक वैध है। इसलिए आप 9 मई तक तो हमको मत भेजिए और 9 मई तक भेजिए ही नहीं बल्कि इसके बाद हमारे लॉन्ग टर्म वीजा एप्लीकेशन पर विचार कीजिए। दिल्ली हाई कोर्ट में यह केस गया।

दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस सचिन दत्ता ने शनिवार को यह स्पेशल हियरिंग की। और इस स्पेशल हियरिंग में जस्टिस दत्ता ने जो डिसीजन दिया और जो दो बड़ी बातें कही और किस आधार पर कही यह बहुत कुछ साफ कर देता है और इस तमाम आशंकाओं को और इन तमाम ऐसे सवालों को कि क्या कोर्ट दखल दे सकता है या उसका देने का अधिकार है इसको साफ कर देगा। इस स्पेशल हियरिंग को शीनाज के मामले को सुनते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस सचिन दत्ता ने यह कहा कि सरकार का यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के कारण लिया गया है। इसलिए सरकार के ऐसे किसी निर्णय का न्यायिक समीक्षा का अधिकार हमें प्राप्त नहीं है। एक बार फिर सुनिए। दिल्ली हाई कोर्ट ने सीना नाच के मामले में यह कहा कि तुम्हें 48 आवर्स के अंदर यानी कल 29 तारीख तक भारत छोड़ देना है। भले तुम्हारे पास 9 मई तक का परमिट हो। भले तुमने लॉन्ग टर्म वीजा अप्लाई कर रखा हो। भले तुम्हारा शौहर यहां का हो या तुम्हारा शौहर वहां कराची में हो। इससे हमें कोई मतलब नहीं है।

तुम्हारे बच्चे प्राइमाफेसी जो फॉरेन एक्ट है 1946 उसकी धारा 3 वन के तहत जारी किया गया। यह नोटिस है और ऐसे कोई आदेश की कोई न्यायिक समीक्षा नहीं हो सकती। न्यायिक समीक्षा नहीं हो सकती का मतलब किसी कोर्ट में इसकी चैलेंज नहीं किया जा सकता। इसको सुनवाई नहीं की जा सकती। क्योंकि इसको जारी करने के पीछे सरकार का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर विचार स्टैंड और स्ट्रेटजी है। इसके आगे की लाइन और महत्वपूर्ण है। जो दिल्ली हाईकोर्ट के विद्वान न्यायाधीश ने कहा। उन्होंने यह कहा कि इसके लिए कोई अपवाद निकालना भी यानी कोई एक्सेप्शन निकालना भी इस न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है। यानी अगर तुम्हारा बच्चा वहां बिलख रहा है तुम्हारा शौहर वहां पर रातें कैसे काटेगा? तुम यहां पर अपने ससुराल कैसे आ पाओगे? इस तरह का अगर कोई विक्टिम कार्ड भी खेला जाता है इस एनिमी कंट्री के लोगों के लिए तो फिर यह भी किसी कोर्ट में चैलेंज नहीं किया जा सकता। यहां कोर्ट ने साफ कर दिया दिल्ली हाई कोर्ट ने शीनाज के इस मामले में। उसके बाद भी आपको विक्टिम कार्ड तमाम खेलते हुए दिखाई दे जाएंगे। शांति के सफेद कबूतर उड़ाने वाले यह गिरोह आपको दिखाई दे जाएंगे।

Sunday, April 27, 2025

गृह मंत्री अमित शाह 32 से अधिक पाकिस्तान समर्थक नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करेंगे

गृह मंत्री अमित शाह 32 से अधिक पाकिस्तान समर्थक नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करेंगे
गृह मंत्री अमित शाह 32 से अधिक पाकिस्तान समर्थक नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करेंगे
गृह मंत्री अमित शाह 32 से अधिक पाकिस्तान समर्थक नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करेंगे
गृह मंत्री अमित शाह 32 से अधिक पाकिस्तान समर्थक नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करेंगे

 पाकिस्तान के खिलाफ एक्शन तो लिए जा रहे हैं लेकिन उसके साथ-साथ देश में वो लोग भी हैं वक्फ गैंग के वो मेंबर भी हैं जो छुपे तौर पर पाकिस्तान का सपोर्ट कर रहा है। भारत सरकार को कमजोर करने की कोशिश कर रही है और वहीं विपक्षी पार्टी के कुछ नेता भी हैं जो चाहते हैं कि किसी तरीके से सरकार पाकिस्तान के खिलाफ एक्शन कमजोर कर दे ताकि उन लोगों को बताने के लिए हो कि देखो हमने मुसलमानों की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई कम कर दी है। अब एक्शन उन लोगों के खिलाफ हो रहा है। यह वक्फ गैंग के 180 संगठनों की बात कर रहा था ताल कटोरा स्टेडियम में। सब लोग इकट्ठा होकर बोला कि देखो भाई बफ की सुरक्षा के लिए हम लोग एकजुट हैं। सिया और सुन्नी भी एकजुट हैं। कोई एक दूसरे से बैर नहीं है। हम इकट्ठा होकर सरकार को झुका देंगे। लेकिन वो 180 संगठन आज बिल में दुबका हुआ है। ओवैसी पहले उतरा था मैदान में। पहला दिन उसने ऐसी बातें की कि लगा इमोशनल हो गया है। लगा उसे हिंदुओं की हत्या किए जाने पर इतना बड़ा अफसोस है। लेकिन यह सच्चाई नहीं थी क्योंकि उसका भाई अकबरुद्दीन ओवैसी ये असदुद्दीन ओवैसी का भाई अकबरुद्दीन ओवैसी जो कि बार-बार यह चैलेंज करता रहा था 5 मिनट के लिए पुलिस हटा लो हम दिखा देंगे। वो भी कुछ दिन के अंदर बदला और उसने इस मुद्दे पर सीधे तौर पर कहा ये हिंदू मुसलमान की बात नहीं है।


ये तो फर्जी बातें फैलाई जा रही है। यहां तक कि 26 जो लोगों की लिस्ट जिनको हत्या की गई थी उनकी लिस्ट सामने आई और उस लिस्ट में ऐसे फर्जीवाड़ा किया गया कि बताया जाने लगा देखो सरकार ने गलत इंफॉर्मेशन दिया है और वो लिस्ट सोशल मीडिया पर इधर-उधर वायरल किया जाने लगा जिसमें कहा गया कि मरने वालों में से 14 तो कश्मीर के मुसलमान थे। सरकार गलत बात कह रही है और ना ही यह जो हंगामा चल रहा है पूरे देश में कि हिंदुओं को पहचान करके मारा गया था ये पूरी तरह से गलत है। फर्जी ऐसी कि असम से लेकर कर्नाटक और केरल तक यही कांस्परेसी यह मौलाना गैंग चला रहा है। इसलिए एक्शन तो इसके खिलाफ हो रहा है। कश्मीर से शुरू हुआ।

एक्शन अलग-अलग स्टेट में भी है और तभी विपक्ष और मौलाना गैंग के 32 से ज्यादा नेताओं के खिलाफ एक्शन चल रहा है। क्योंकि इन लोगों ने अलग-अलग समय पर पाकिस्तान के सपोर्ट करने के नए-नए तरीके अपनाए हैं। उसमें उमर अब्दुल्लाह को देखिए, महबूबा मुफ्त को देखिए और ओवैसी को देखिए। ये तीनों के चार दिन के स्टेटमेंट में ऐसी बातें हैं जिससे दिख रहा है यह पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई नहीं चाहता। उमर अब्दुल्लाह जो कि पूरा खानदान ही इसका पाकिस्तान के सपोर्ट में रहा है। फारूक अब्दुल्लाह यह कहा करता है अभी चुपचाप बैठा है कुछ दिन से। लेकिन यही फारूक अब्दुल्लाह बार-बार इस बात के लिए सरकार को कहता था कि पाकिस्तान के साथ बातचीत के बिना कश्मीर की समस्या का समाधान नहीं होगा। और यही फारूक अब्दुल्लाह बार-बार ये धमकी देता रहा कि देखो अगर हिंदुस्तान पाकिस्तान के खिलाफ कोई कड़ी कारवाई करती है तो पाकिस्तान भी उल्टा कारवाई करेगा। उसके पास परमाणु बम है। ये फारूक अब्दुल्लाह की बात है। और उसी का बेटा उमर अब्दुल्लाह अभी फंसा हुआ है इस बात के लिए कि जितने परेशानियां लोकल ऑथॉरिटी ने पैदा की है और जम्मू कश्मीर में जो पूरा नेटवर्क तोड़ा जा रहा है। इसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के कई सपोर्टर हैं, नेता हैं। डिस्ट्रिक्ट लेवल पर इनके नेता भी पकड़े जा रहे हैं। 75 से ज्यादा लोगों को हिरासत में जो लिया गया वो केवल आतंकी नहीं थे बल्कि आतंकी फंडिंग के इनके सोर्स इन्हीं लोगों ने बनाया था। यानी टेरर फंडिंग भी ये करता रहा था। राशिद इंजीनियर जैसे लोग जो टेरर फंडिंग में अभी जेल के अंदर है उसकी पार्टी के भी कई नेता पकड़े जा रहे हैं। क्योंकि राशिद इंजीनियर जिसका ऊपर आरोप ही इस बात के लिए है कि ये टेरर फंडिंग करके वहां कश्मीर में आतंकवाद फैलाता है और जिसके कारण कश्मीर के लोगों की स्थिति देखिए कि ऐसे टेरर फंडिंग के आरोप में जेल में बैठा हुआ उस व्यक्ति को वोट देकर सांसद बना देता है। क्योंकि इन लोगों को हिंदुस्तान की परवाह नहीं। यह अभी भी पाकिस्तान से जुड़ा हुआ है। इसके सिंपैथी हिंदुस्तान के प्रति नहीं पाकिस्तान के प्रति है। और जितना भी अभी चार दिन से चीख-चिल्ला कर बोल ले ऊपरी तौर पर कह ले राष्ट्रभक्ति दिखाने की कोशिश कर ले विश्वास इसके ऊपर नहीं है। इसलिए जम्मू कश्मीर में तो एक्शन हो ही रहे हैं। लेकिन दूसरे जगह पर भी एक्शन हो रहे हैं। असम के अंदर पांच छह ऐसे नेताओं को पकड़ा गया है जो कि डायरेक्ट नहीं तो इनडायरेक्ट सपोर्ट पाकिस्तान का कर रहा है और इनडायरेक्ट सपोर्ट का तरीका क्या है कि भारत के इस कार्रवाई का विरोध करो। इनडायरेक्टली यह कहने की कोशिश करो कि नहीं भारत सरकार यह जो कारवाई कर रही है वो सफिशिएंट नहीं है। यह समस्या का स्थाई समाधान नहीं है। भले ही पाकिस्तान कितना भी कांपते रहे। पाकिस्तान की परेशानी कितनी बढ़ते रहे। पाकिस्तान एक-एक देश का दरवाजा खटखटा रहा है। लेकिन यहां पर ऐसी बातें की जा रही है कि देखो पाकिस्तान को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इसीलिए इन लोगों के खिलाफ एक्शन हो रहा है।

ये विपक्ष में बैठे हुए नेता जिनके दिमाग में चल रहा है मुस्लिम तुष्टीरण और आज भी वही बात बार-बार दोहरा रहे हैं जो कि पिछले 70 सालों से दोहरा रहा था कि पाकिस्तान के साथ बातचीत से ही समाधान हो सकता है। उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती क्योंकि अभी तो सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ है और पाकिस्तानी जो हिंदुस्तान में बैठे हुए हैं एक-एक कर बाहर निकाला जा रहा है। 2 दिन का समय और है। सारे हॉस्पिटल को अलर्ट जारी कर दिया गया है कि कितना भी क्रिटिकल केस हो ऐसा नहीं कि आप मेडिकल सपोर्ट के आधार पर कह दोगे कि इनका मामला तो ज्यादा क्रिटिकल है। इसलिए अभी ऑपरेशन थिएटर से बाहर निकले हैं। 10 दिन की जरूरत है इन्हें हॉस्पिटल में रहने के लिए। ऐसा नहीं होगा। कितना भी क्रिटिकल केस हो जितना समय दिया गया यानी कि 30 तारीख के अंदर उसको बाहर भेजने की व्यवस्था करो। चाहे वो एयर एंबुलेंस के सहारे ही क्यों ना जाना पड़े उसे लेकिन हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।

ये सार्क का कोई भी ये डील जो चल रहा था पहले से इन लोगों ने सहानुभूति दिखाने की कोशिश की थी। अब कोई सहानुभूति नहीं है। पाकिस्तान का हर नागरिक पाकिस्तानी है और वो हमारा दुश्मन है। यही विचार करके सरकार ने एक्शन शुरू किया है। इसलिए सारे हॉस्पिटल में ये खोजबीन भी जारी है कि इन लोगों पर भी पूरा तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता। यह पैसे के लिए जमीर बेच सकते हैं। अभी हॉस्पिटल का धंधा ऐसे ही है कि पाकिस्तान से भी इन लोगों की कमाई हो रही है। इसलिए सबसे पहले शुरुआत की गई है दिल्ली एनसीआर के सारे हॉस्पिटल से कि वहां पर एक भी जो भी पाकिस्तान के लोग यहां के हॉस्पिटल में इलाज करवा रहा है उसकी लिस्ट सरकार को सौंपी जाए और वो खाली करके जाएगा। इसकी सूचना भी सरकार को दी जानी चाहिए। इसलिए पाकिस्तान के खिलाफ आंतरिक तरीके से देश के अंदर कारवाई हो रही है और परेशानी इसलिए वक्त बैंक के हुए है जो कि मुसलमान मुसलमान के नाम पर कुछ समय से हंगामा खड़ा कर रहा था और आज थोड़ा बैकफुट पर आया दो दिन तक और तीसरे दिन से अपना असली चेहरा दिखाने लगा। 3032 ऐसे बड़े नेता हैं जो टारगेट लिस्ट में हैं। मोदी ने आदेश दिया है और अमित शाह एक्शन मोड में आ गए हैं इन लोगों के खिलाफ कारवाई करने के लिए और ओवैसी जो कि बहुत दिनों से चीख-चिल्ला रहा था। पाकिस्तान के खिलाफ बोलता तो है लेकिन कांस्परेसी पाकिस्तान के लिए करता है।

ये सेटिंग करने वाले ये पूरा गैंग के अब एक-एक मेंबर को तोड़ा जा रहा है। इसलिए ये विपक्ष में बैठे हुए बड़े-बड़े नेता भी परेशान हैं। शरद पवार हो, अखिलेश यादव हो या फिर राहुल गांधी हो इन लोगों ने एक माहौल चेंज करने की कोशिश की है कि देखो देश के अंदर अभी सेंटीमेंट जागा हुआ है। और वो सेंटीमेंट किसके प्रति है? वो सेंटीमेंट है कि मुसलमानों ने मिलजुलकर हिंदुओं के खिलाफ जंग का ऐलान किया है। यह वक्फ गैंग ने कहा था जंगे आजादी की दूसरी लड़ाई है। तो ये जो जंग छेड़ने की कोशिश की थी अब हम उस जंग का अंत करने जा रहे हैं। इसीलिए इन लोगों को लगता है कि अगर इसमें माहौल इस तरह से हिंदुओं के अंदर से बनपा तो फिर हमारी राजनीतिक सियासती सियासत का पूरा रंग बिखर जाएगा और आगे भविष्य में राजनीति करने के लायक नहीं रहेंगे। इसलिए यह पीठ पीछे छुड़ा भोकने की रणनीति पर काम करता है। मीटिंग होती है रात में फोन पर बातचीत होती है। 28 पार्टियां जो इंडी अलायंस का पार्टनर हुआ करती थी। ये सारे के सारी पार्टियां आपस में मिलजुलकर यही रणनीति बना रही है कि कैसे इस माहौल को शांत करें और उसके लिए उपाय इसके पास एक ही है कि जितनी भी समस्या है उसका जिम्मेदार सरकार को ठहराओ जैसे पुलवामा के समय ठहराए थे उरी के समय ठहराए थे ऐसे ही कहो और ये कहना भी शुरू कर दिया कि जब पुलवामा में आरडीएक्स आ गया था उसके बाद सिक्योरिटी की इतनी बड़ी व्यवस्था थी तो यहां पर बंदूक लेकर AK- 47 लेकर टेररिस्ट कैसे आ गया? इसके लिए सुरक्षा चूक है। यह हिंदुस्तान के उन गद्दारों की बात नहीं है। बल्कि सरकार ने कुछ ऐसा करवाया। अखिलेश यादव तोयहां तक बोल दिया कि ये सारी घटनाओं के पीछे कौन है? यह बच्चा-बच्चा समझ सकता है। ये मुद्दे डायवर्ट करने की कोशिश है। बेरोजगारी, महंगाई। यह हमेशा जब भी कोई सेंसिटिव मुद्दा आता है, जब भी कोई राष्ट्रीय हित का मुद्दा आता है, देश के स्वाभिमान का मुद्दा आता है, तो ये लोग यही चार पांच शब्द अल्पसंख्यक, बेरोजगारी, महंगाई ऐसे ही शब्द गढ़ के लोगों का दिमाग भटकाने की कोशिश करता है। और इन्हीं लोगों के कारण अभी तक इसके खिलाफ कार्रवाई कभी कठोर नहीं हो पाई। 70 साल हो गया। अब तक पाकिस्तान कब का निपट गया होता लेकिन हमने कार्रवाई नहीं की। अब जब कार्रवाई हो रही है तो ये बिल से धीरे-धीरे निकल कर हंगामा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं और दो-चार दिन के अंदर यह फिर से हंगामा करेगा।

यह 5 तारीख को जो वक्त पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। उस समय फिर से इकट्ठा होगा और इस मुद्दे को डायवर्ट करने की कोशिश करेगा। लेकिन उससे पहले इसका इलाज शुरू हो गया है। धरपकड़ चल रहा है। गिरफ्तारियां हो रही है और इन लोगों के ऐसे ऐसे कारनामे उजागर हो रहे हैं कि अब बाहर निकलने की कोशिश नहीं करेगा क्योंकि इलाज जरूरी था और ऐसे समय में जो भी पाकिस्तान का नाम लिया उसके सपोर्ट में एक बात कही उसकी खैर नहीं होगी। क्योंकि अभी देश की समस्या सिर्फ एक ही है कि पाकिस्तान ने आतंकवादी भेजे। उसने षड्यंत्र कास्परेसी की और उस साजिश में हिंदुस्तान के कुछ लोग शामिल हैं और कश्मीर के बड़े-बड़े पॉलिटिकल लीडर भी उसके सिंपैथाइजर हैं। कहीं ना कहीं इनडायरेक्ट कनेक्शन उसका है। तो इस पूरे नेटवर्क को तोड़ा जाए, क्रैकडाउन किया जाए और इसी आधार पर अमित शाह ने सारे राज्यों में अलर्ट जारी कर सबको निर्देश दिया है|


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गृह मंत्री अमित शाह 32 से अधिक पाकिस्तान समर्थक नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करेंगे

गृह मंत्री अमित शाह 32 से अधिक पाकिस्तान समर्थक नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करेंगे
गृह मंत्री अमित शाह 32 से अधिक पाकिस्तान समर्थक नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करेंगे
गृह मंत्री अमित शाह 32 से अधिक पाकिस्तान समर्थक नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करेंगे

 पाकिस्तान के खिलाफ एक्शन तो लिए जा रहे हैं लेकिन उसके साथ-साथ देश में वो लोग भी हैं वक्फ गैंग के वो मेंबर भी हैं जो छुपे तौर पर पाकिस्तान का सपोर्ट कर रहा है। भारत सरकार को कमजोर करने की कोशिश कर रही है और वहीं विपक्षी पार्टी के कुछ नेता भी हैं जो चाहते हैं कि किसी तरीके से सरकार पाकिस्तान के खिलाफ एक्शन कमजोर कर दे ताकि उन लोगों को बताने के लिए हो कि देखो हमने मुसलमानों की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई कम कर दी है। अब एक्शन उन लोगों के खिलाफ हो रहा है। यह वक्फ गैंग के 180 संगठनों की बात कर रहा था ताल कटोरा स्टेडियम में। सब लोग इकट्ठा होकर बोला कि देखो भाई बफ की सुरक्षा के लिए हम लोग एकजुट हैं। सिया और सुन्नी भी एकजुट हैं। कोई एक दूसरे से बैर नहीं है। हम इकट्ठा होकर सरकार को झुका देंगे। लेकिन वो 180 संगठन आज बिल में दुबका हुआ है। ओवैसी पहले उतरा था मैदान में। पहला दिन उसने ऐसी बातें की कि लगा इमोशनल हो गया है। लगा उसे हिंदुओं की हत्या किए जाने पर इतना बड़ा अफसोस है। लेकिन यह सच्चाई नहीं थी क्योंकि उसका भाई अकबरुद्दीन ओवैसी ये असदुद्दीन ओवैसी का भाई अकबरुद्दीन ओवैसी जो कि बार-बार यह चैलेंज करता रहा था 5 मिनट के लिए पुलिस हटा लो हम दिखा देंगे। वो भी कुछ दिन के अंदर बदला और उसने इस मुद्दे पर सीधे तौर पर कहा ये हिंदू मुसलमान की बात नहीं है।


ये तो फर्जी बातें फैलाई जा रही है। यहां तक कि 26 जो लोगों की लिस्ट जिनको हत्या की गई थी उनकी लिस्ट सामने आई और उस लिस्ट में ऐसे फर्जीवाड़ा किया गया कि बताया जाने लगा देखो सरकार ने गलत इंफॉर्मेशन दिया है और वो लिस्ट सोशल मीडिया पर इधर-उधर वायरल किया जाने लगा जिसमें कहा गया कि मरने वालों में से 14 तो कश्मीर के मुसलमान थे। सरकार गलत बात कह रही है और ना ही यह जो हंगामा चल रहा है पूरे देश में कि हिंदुओं को पहचान करके मारा गया था ये पूरी तरह से गलत है। फर्जी ऐसी कि असम से लेकर कर्नाटक और केरल तक यही कांस्परेसी यह मौलाना गैंग चला रहा है। इसलिए एक्शन तो इसके खिलाफ हो रहा है। कश्मीर से शुरू हुआ।

एक्शन अलग-अलग स्टेट में भी है और तभी विपक्ष और मौलाना गैंग के 32 से ज्यादा नेताओं के खिलाफ एक्शन चल रहा है। क्योंकि इन लोगों ने अलग-अलग समय पर पाकिस्तान के सपोर्ट करने के नए-नए तरीके अपनाए हैं। उसमें उमर अब्दुल्लाह को देखिए, महबूबा मुफ्त को देखिए और ओवैसी को देखिए। ये तीनों के चार दिन के स्टेटमेंट में ऐसी बातें हैं जिससे दिख रहा है यह पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई नहीं चाहता। उमर अब्दुल्लाह जो कि पूरा खानदान ही इसका पाकिस्तान के सपोर्ट में रहा है। फारूक अब्दुल्लाह यह कहा करता है अभी चुपचाप बैठा है कुछ दिन से। लेकिन यही फारूक अब्दुल्लाह बार-बार इस बात के लिए सरकार को कहता था कि पाकिस्तान के साथ बातचीत के बिना कश्मीर की समस्या का समाधान नहीं होगा। और यही फारूक अब्दुल्लाह बार-बार ये धमकी देता रहा कि देखो अगर हिंदुस्तान पाकिस्तान के खिलाफ कोई कड़ी कारवाई करती है तो पाकिस्तान भी उल्टा कारवाई करेगा। उसके पास परमाणु बम है। ये फारूक अब्दुल्लाह की बात है। और उसी का बेटा उमर अब्दुल्लाह अभी फंसा हुआ है इस बात के लिए कि जितने परेशानियां लोकल ऑथॉरिटी ने पैदा की है और जम्मू कश्मीर में जो पूरा नेटवर्क तोड़ा जा रहा है। इसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के कई सपोर्टर हैं, नेता हैं। डिस्ट्रिक्ट लेवल पर इनके नेता भी पकड़े जा रहे हैं। 75 से ज्यादा लोगों को हिरासत में जो लिया गया वो केवल आतंकी नहीं थे बल्कि आतंकी फंडिंग के इनके सोर्स इन्हीं लोगों ने बनाया था। यानी टेरर फंडिंग भी ये करता रहा था। राशिद इंजीनियर जैसे लोग जो टेरर फंडिंग में अभी जेल के अंदर है उसकी पार्टी के भी कई नेता पकड़े जा रहे हैं। क्योंकि राशिद इंजीनियर जिसका ऊपर आरोप ही इस बात के लिए है कि ये टेरर फंडिंग करके वहां कश्मीर में आतंकवाद फैलाता है और जिसके कारण कश्मीर के लोगों की स्थिति देखिए कि ऐसे टेरर फंडिंग के आरोप में जेल में बैठा हुआ उस व्यक्ति को वोट देकर सांसद बना देता है। क्योंकि इन लोगों को हिंदुस्तान की परवाह नहीं। यह अभी भी पाकिस्तान से जुड़ा हुआ है। इसके सिंपैथी हिंदुस्तान के प्रति नहीं पाकिस्तान के प्रति है। और जितना भी अभी चार दिन से चीख-चिल्ला कर बोल ले ऊपरी तौर पर कह ले राष्ट्रभक्ति दिखाने की कोशिश कर ले विश्वास इसके ऊपर नहीं है। इसलिए जम्मू कश्मीर में तो एक्शन हो ही रहे हैं। लेकिन दूसरे जगह पर भी एक्शन हो रहे हैं। असम के अंदर पांच छह ऐसे नेताओं को पकड़ा गया है जो कि डायरेक्ट नहीं तो इनडायरेक्ट सपोर्ट पाकिस्तान का कर रहा है और इनडायरेक्ट सपोर्ट का तरीका क्या है कि भारत के इस कार्रवाई का विरोध करो। इनडायरेक्टली यह कहने की कोशिश करो कि नहीं भारत सरकार यह जो कारवाई कर रही है वो सफिशिएंट नहीं है। यह समस्या का स्थाई समाधान नहीं है। भले ही पाकिस्तान कितना भी कांपते रहे। पाकिस्तान की परेशानी कितनी बढ़ते रहे। पाकिस्तान एक-एक देश का दरवाजा खटखटा रहा है। लेकिन यहां पर ऐसी बातें की जा रही है कि देखो पाकिस्तान को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इसीलिए इन लोगों के खिलाफ एक्शन हो रहा है।

ये विपक्ष में बैठे हुए नेता जिनके दिमाग में चल रहा है मुस्लिम तुष्टीरण और आज भी वही बात बार-बार दोहरा रहे हैं जो कि पिछले 70 सालों से दोहरा रहा था कि पाकिस्तान के साथ बातचीत से ही समाधान हो सकता है। उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती क्योंकि अभी तो सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ है और पाकिस्तानी जो हिंदुस्तान में बैठे हुए हैं एक-एक कर बाहर निकाला जा रहा है। 2 दिन का समय और है। सारे हॉस्पिटल को अलर्ट जारी कर दिया गया है कि कितना भी क्रिटिकल केस हो ऐसा नहीं कि आप मेडिकल सपोर्ट के आधार पर कह दोगे कि इनका मामला तो ज्यादा क्रिटिकल है। इसलिए अभी ऑपरेशन थिएटर से बाहर निकले हैं। 10 दिन की जरूरत है इन्हें हॉस्पिटल में रहने के लिए। ऐसा नहीं होगा। कितना भी क्रिटिकल केस हो जितना समय दिया गया यानी कि 30 तारीख के अंदर उसको बाहर भेजने की व्यवस्था करो। चाहे वो एयर एंबुलेंस के सहारे ही क्यों ना जाना पड़े उसे लेकिन हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।

ये सार्क का कोई भी ये डील जो चल रहा था पहले से इन लोगों ने सहानुभूति दिखाने की कोशिश की थी। अब कोई सहानुभूति नहीं है। पाकिस्तान का हर नागरिक पाकिस्तानी है और वो हमारा दुश्मन है। यही विचार करके सरकार ने एक्शन शुरू किया है। इसलिए सारे हॉस्पिटल में ये खोजबीन भी जारी है कि इन लोगों पर भी पूरा तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता। यह पैसे के लिए जमीर बेच सकते हैं। अभी हॉस्पिटल का धंधा ऐसे ही है कि पाकिस्तान से भी इन लोगों की कमाई हो रही है। इसलिए सबसे पहले शुरुआत की गई है दिल्ली एनसीआर के सारे हॉस्पिटल से कि वहां पर एक भी जो भी पाकिस्तान के लोग यहां के हॉस्पिटल में इलाज करवा रहा है उसकी लिस्ट सरकार को सौंपी जाए और वो खाली करके जाएगा। इसकी सूचना भी सरकार को दी जानी चाहिए। इसलिए पाकिस्तान के खिलाफ आंतरिक तरीके से देश के अंदर कारवाई हो रही है और परेशानी इसलिए वक्त बैंक के हुए है जो कि मुसलमान मुसलमान के नाम पर कुछ समय से हंगामा खड़ा कर रहा था और आज थोड़ा बैकफुट पर आया दो दिन तक और तीसरे दिन से अपना असली चेहरा दिखाने लगा। 3032 ऐसे बड़े नेता हैं जो टारगेट लिस्ट में हैं। मोदी ने आदेश दिया है और अमित शाह एक्शन मोड में आ गए हैं इन लोगों के खिलाफ कारवाई करने के लिए और ओवैसी जो कि बहुत दिनों से चीख-चिल्ला रहा था। पाकिस्तान के खिलाफ बोलता तो है लेकिन कांस्परेसी पाकिस्तान के लिए करता है।

ये सेटिंग करने वाले ये पूरा गैंग के अब एक-एक मेंबर को तोड़ा जा रहा है। इसलिए ये विपक्ष में बैठे हुए बड़े-बड़े नेता भी परेशान हैं। शरद पवार हो, अखिलेश यादव हो या फिर राहुल गांधी हो इन लोगों ने एक माहौल चेंज करने की कोशिश की है कि देखो देश के अंदर अभी सेंटीमेंट जागा हुआ है। और वो सेंटीमेंट किसके प्रति है? वो सेंटीमेंट है कि मुसलमानों ने मिलजुलकर हिंदुओं के खिलाफ जंग का ऐलान किया है। यह वक्फ गैंग ने कहा था जंगे आजादी की दूसरी लड़ाई है। तो ये जो जंग छेड़ने की कोशिश की थी अब हम उस जंग का अंत करने जा रहे हैं। इसीलिए इन लोगों को लगता है कि अगर इसमें माहौल इस तरह से हिंदुओं के अंदर से बनपा तो फिर हमारी राजनीतिक सियासती सियासत का पूरा रंग बिखर जाएगा और आगे भविष्य में राजनीति करने के लायक नहीं रहेंगे। इसलिए यह पीठ पीछे छुड़ा भोकने की रणनीति पर काम करता है। मीटिंग होती है रात में फोन पर बातचीत होती है। 28 पार्टियां जो इंडी अलायंस का पार्टनर हुआ करती थी। ये सारे के सारी पार्टियां आपस में मिलजुलकर यही रणनीति बना रही है कि कैसे इस माहौल को शांत करें और उसके लिए उपाय इसके पास एक ही है कि जितनी भी समस्या है उसका जिम्मेदार सरकार को ठहराओ जैसे पुलवामा के समय ठहराए थे उरी के समय ठहराए थे ऐसे ही कहो और ये कहना भी शुरू कर दिया कि जब पुलवामा में आरडीएक्स आ गया था उसके बाद सिक्योरिटी की इतनी बड़ी व्यवस्था थी तो यहां पर बंदूक लेकर AK- 47 लेकर टेररिस्ट कैसे आ गया? इसके लिए सुरक्षा चूक है। यह हिंदुस्तान के उन गद्दारों की बात नहीं है। बल्कि सरकार ने कुछ ऐसा करवाया। अखिलेश यादव तोयहां तक बोल दिया कि ये सारी घटनाओं के पीछे कौन है? यह बच्चा-बच्चा समझ सकता है। ये मुद्दे डायवर्ट करने की कोशिश है। बेरोजगारी, महंगाई। यह हमेशा जब भी कोई सेंसिटिव मुद्दा आता है, जब भी कोई राष्ट्रीय हित का मुद्दा आता है, देश के स्वाभिमान का मुद्दा आता है, तो ये लोग यही चार पांच शब्द अल्पसंख्यक, बेरोजगारी, महंगाई ऐसे ही शब्द गढ़ के लोगों का दिमाग भटकाने की कोशिश करता है। और इन्हीं लोगों के कारण अभी तक इसके खिलाफ कार्रवाई कभी कठोर नहीं हो पाई। 70 साल हो गया। अब तक पाकिस्तान कब का निपट गया होता लेकिन हमने कार्रवाई नहीं की। अब जब कार्रवाई हो रही है तो ये बिल से धीरे-धीरे निकल कर हंगामा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं और दो-चार दिन के अंदर यह फिर से हंगामा करेगा।

यह 5 तारीख को जो वक्त पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। उस समय फिर से इकट्ठा होगा और इस मुद्दे को डायवर्ट करने की कोशिश करेगा। लेकिन उससे पहले इसका इलाज शुरू हो गया है। धरपकड़ चल रहा है। गिरफ्तारियां हो रही है और इन लोगों के ऐसे ऐसे कारनामे उजागर हो रहे हैं कि अब बाहर निकलने की कोशिश नहीं करेगा क्योंकि इलाज जरूरी था और ऐसे समय में जो भी पाकिस्तान का नाम लिया उसके सपोर्ट में एक बात कही उसकी खैर नहीं होगी। क्योंकि अभी देश की समस्या सिर्फ एक ही है कि पाकिस्तान ने आतंकवादी भेजे। उसने षड्यंत्र कास्परेसी की और उस साजिश में हिंदुस्तान के कुछ लोग शामिल हैं और कश्मीर के बड़े-बड़े पॉलिटिकल लीडर भी उसके सिंपैथाइजर हैं। कहीं ना कहीं इनडायरेक्ट कनेक्शन उसका है। तो इस पूरे नेटवर्क को तोड़ा जाए, क्रैकडाउन किया जाए और इसी आधार पर अमित शाह ने सारे राज्यों में अलर्ट जारी कर सबको निर्देश दिया है|


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गृह मंत्री अमित शाह 32 से अधिक पाकिस्तान समर्थक नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करेंगे

गृह मंत्री अमित शाह 32 से अधिक पाकिस्तान समर्थक नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करेंगे
गृह मंत्री अमित शाह 32 से अधिक पाकिस्तान समर्थक नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करेंगे

 पाकिस्तान के खिलाफ एक्शन तो लिए जा रहे हैं लेकिन उसके साथ-साथ देश में वो लोग भी हैं वक्फ गैंग के वो मेंबर भी हैं जो छुपे तौर पर पाकिस्तान का सपोर्ट कर रहा है। भारत सरकार को कमजोर करने की कोशिश कर रही है और वहीं विपक्षी पार्टी के कुछ नेता भी हैं जो चाहते हैं कि किसी तरीके से सरकार पाकिस्तान के खिलाफ एक्शन कमजोर कर दे ताकि उन लोगों को बताने के लिए हो कि देखो हमने मुसलमानों की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई कम कर दी है। अब एक्शन उन लोगों के खिलाफ हो रहा है। यह वक्फ गैंग के 180 संगठनों की बात कर रहा था ताल कटोरा स्टेडियम में। सब लोग इकट्ठा होकर बोला कि देखो भाई बफ की सुरक्षा के लिए हम लोग एकजुट हैं। सिया और सुन्नी भी एकजुट हैं। कोई एक दूसरे से बैर नहीं है। हम इकट्ठा होकर सरकार को झुका देंगे। लेकिन वो 180 संगठन आज बिल में दुबका हुआ है। ओवैसी पहले उतरा था मैदान में। पहला दिन उसने ऐसी बातें की कि लगा इमोशनल हो गया है। लगा उसे हिंदुओं की हत्या किए जाने पर इतना बड़ा अफसोस है। लेकिन यह सच्चाई नहीं थी क्योंकि उसका भाई अकबरुद्दीन ओवैसी ये असदुद्दीन ओवैसी का भाई अकबरुद्दीन ओवैसी जो कि बार-बार यह चैलेंज करता रहा था 5 मिनट के लिए पुलिस हटा लो हम दिखा देंगे। वो भी कुछ दिन के अंदर बदला और उसने इस मुद्दे पर सीधे तौर पर कहा ये हिंदू मुसलमान की बात नहीं है।


ये तो फर्जी बातें फैलाई जा रही है। यहां तक कि 26 जो लोगों की लिस्ट जिनको हत्या की गई थी उनकी लिस्ट सामने आई और उस लिस्ट में ऐसे फर्जीवाड़ा किया गया कि बताया जाने लगा देखो सरकार ने गलत इंफॉर्मेशन दिया है और वो लिस्ट सोशल मीडिया पर इधर-उधर वायरल किया जाने लगा जिसमें कहा गया कि मरने वालों में से 14 तो कश्मीर के मुसलमान थे। सरकार गलत बात कह रही है और ना ही यह जो हंगामा चल रहा है पूरे देश में कि हिंदुओं को पहचान करके मारा गया था ये पूरी तरह से गलत है। फर्जी ऐसी कि असम से लेकर कर्नाटक और केरल तक यही कांस्परेसी यह मौलाना गैंग चला रहा है। इसलिए एक्शन तो इसके खिलाफ हो रहा है। कश्मीर से शुरू हुआ।

एक्शन अलग-अलग स्टेट में भी है और तभी विपक्ष और मौलाना गैंग के 32 से ज्यादा नेताओं के खिलाफ एक्शन चल रहा है। क्योंकि इन लोगों ने अलग-अलग समय पर पाकिस्तान के सपोर्ट करने के नए-नए तरीके अपनाए हैं। उसमें उमर अब्दुल्लाह को देखिए, महबूबा मुफ्त को देखिए और ओवैसी को देखिए। ये तीनों के चार दिन के स्टेटमेंट में ऐसी बातें हैं जिससे दिख रहा है यह पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई नहीं चाहता। उमर अब्दुल्लाह जो कि पूरा खानदान ही इसका पाकिस्तान के सपोर्ट में रहा है। फारूक अब्दुल्लाह यह कहा करता है अभी चुपचाप बैठा है कुछ दिन से। लेकिन यही फारूक अब्दुल्लाह बार-बार इस बात के लिए सरकार को कहता था कि पाकिस्तान के साथ बातचीत के बिना कश्मीर की समस्या का समाधान नहीं होगा। और यही फारूक अब्दुल्लाह बार-बार ये धमकी देता रहा कि देखो अगर हिंदुस्तान पाकिस्तान के खिलाफ कोई कड़ी कारवाई करती है तो पाकिस्तान भी उल्टा कारवाई करेगा। उसके पास परमाणु बम है। ये फारूक अब्दुल्लाह की बात है। और उसी का बेटा उमर अब्दुल्लाह अभी फंसा हुआ है इस बात के लिए कि जितने परेशानियां लोकल ऑथॉरिटी ने पैदा की है और जम्मू कश्मीर में जो पूरा नेटवर्क तोड़ा जा रहा है। इसमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के कई सपोर्टर हैं, नेता हैं। डिस्ट्रिक्ट लेवल पर इनके नेता भी पकड़े जा रहे हैं। 75 से ज्यादा लोगों को हिरासत में जो लिया गया वो केवल आतंकी नहीं थे बल्कि आतंकी फंडिंग के इनके सोर्स इन्हीं लोगों ने बनाया था। यानी टेरर फंडिंग भी ये करता रहा था। राशिद इंजीनियर जैसे लोग जो टेरर फंडिंग में अभी जेल के अंदर है उसकी पार्टी के भी कई नेता पकड़े जा रहे हैं। क्योंकि राशिद इंजीनियर जिसका ऊपर आरोप ही इस बात के लिए है कि ये टेरर फंडिंग करके वहां कश्मीर में आतंकवाद फैलाता है और जिसके कारण कश्मीर के लोगों की स्थिति देखिए कि ऐसे टेरर फंडिंग के आरोप में जेल में बैठा हुआ उस व्यक्ति को वोट देकर सांसद बना देता है। क्योंकि इन लोगों को हिंदुस्तान की परवाह नहीं। यह अभी भी पाकिस्तान से जुड़ा हुआ है। इसके सिंपैथी हिंदुस्तान के प्रति नहीं पाकिस्तान के प्रति है। और जितना भी अभी चार दिन से चीख-चिल्ला कर बोल ले ऊपरी तौर पर कह ले राष्ट्रभक्ति दिखाने की कोशिश कर ले विश्वास इसके ऊपर नहीं है। इसलिए जम्मू कश्मीर में तो एक्शन हो ही रहे हैं। लेकिन दूसरे जगह पर भी एक्शन हो रहे हैं। असम के अंदर पांच छह ऐसे नेताओं को पकड़ा गया है जो कि डायरेक्ट नहीं तो इनडायरेक्ट सपोर्ट पाकिस्तान का कर रहा है और इनडायरेक्ट सपोर्ट का तरीका क्या है कि भारत के इस कार्रवाई का विरोध करो। इनडायरेक्टली यह कहने की कोशिश करो कि नहीं भारत सरकार यह जो कारवाई कर रही है वो सफिशिएंट नहीं है। यह समस्या का स्थाई समाधान नहीं है। भले ही पाकिस्तान कितना भी कांपते रहे। पाकिस्तान की परेशानी कितनी बढ़ते रहे। पाकिस्तान एक-एक देश का दरवाजा खटखटा रहा है। लेकिन यहां पर ऐसी बातें की जा रही है कि देखो पाकिस्तान को हल्के में नहीं लेना चाहिए। इसीलिए इन लोगों के खिलाफ एक्शन हो रहा है।

ये विपक्ष में बैठे हुए नेता जिनके दिमाग में चल रहा है मुस्लिम तुष्टीरण और आज भी वही बात बार-बार दोहरा रहे हैं जो कि पिछले 70 सालों से दोहरा रहा था कि पाकिस्तान के साथ बातचीत से ही समाधान हो सकता है। उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती क्योंकि अभी तो सर्च ऑपरेशन शुरू हुआ है और पाकिस्तानी जो हिंदुस्तान में बैठे हुए हैं एक-एक कर बाहर निकाला जा रहा है। 2 दिन का समय और है। सारे हॉस्पिटल को अलर्ट जारी कर दिया गया है कि कितना भी क्रिटिकल केस हो ऐसा नहीं कि आप मेडिकल सपोर्ट के आधार पर कह दोगे कि इनका मामला तो ज्यादा क्रिटिकल है। इसलिए अभी ऑपरेशन थिएटर से बाहर निकले हैं। 10 दिन की जरूरत है इन्हें हॉस्पिटल में रहने के लिए। ऐसा नहीं होगा। कितना भी क्रिटिकल केस हो जितना समय दिया गया यानी कि 30 तारीख के अंदर उसको बाहर भेजने की व्यवस्था करो। चाहे वो एयर एंबुलेंस के सहारे ही क्यों ना जाना पड़े उसे लेकिन हम बर्दाश्त नहीं करेंगे।

ये सार्क का कोई भी ये डील जो चल रहा था पहले से इन लोगों ने सहानुभूति दिखाने की कोशिश की थी। अब कोई सहानुभूति नहीं है। पाकिस्तान का हर नागरिक पाकिस्तानी है और वो हमारा दुश्मन है। यही विचार करके सरकार ने एक्शन शुरू किया है। इसलिए सारे हॉस्पिटल में ये खोजबीन भी जारी है कि इन लोगों पर भी पूरा तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता। यह पैसे के लिए जमीर बेच सकते हैं। अभी हॉस्पिटल का धंधा ऐसे ही है कि पाकिस्तान से भी इन लोगों की कमाई हो रही है। इसलिए सबसे पहले शुरुआत की गई है दिल्ली एनसीआर के सारे हॉस्पिटल से कि वहां पर एक भी जो भी पाकिस्तान के लोग यहां के हॉस्पिटल में इलाज करवा रहा है उसकी लिस्ट सरकार को सौंपी जाए और वो खाली करके जाएगा। इसकी सूचना भी सरकार को दी जानी चाहिए। इसलिए पाकिस्तान के खिलाफ आंतरिक तरीके से देश के अंदर कारवाई हो रही है और परेशानी इसलिए वक्त बैंक के हुए है जो कि मुसलमान मुसलमान के नाम पर कुछ समय से हंगामा खड़ा कर रहा था और आज थोड़ा बैकफुट पर आया दो दिन तक और तीसरे दिन से अपना असली चेहरा दिखाने लगा। 3032 ऐसे बड़े नेता हैं जो टारगेट लिस्ट में हैं। मोदी ने आदेश दिया है और अमित शाह एक्शन मोड में आ गए हैं इन लोगों के खिलाफ कारवाई करने के लिए और ओवैसी जो कि बहुत दिनों से चीख-चिल्ला रहा था। पाकिस्तान के खिलाफ बोलता तो है लेकिन कांस्परेसी पाकिस्तान के लिए करता है।

ये सेटिंग करने वाले ये पूरा गैंग के अब एक-एक मेंबर को तोड़ा जा रहा है। इसलिए ये विपक्ष में बैठे हुए बड़े-बड़े नेता भी परेशान हैं। शरद पवार हो, अखिलेश यादव हो या फिर राहुल गांधी हो इन लोगों ने एक माहौल चेंज करने की कोशिश की है कि देखो देश के अंदर अभी सेंटीमेंट जागा हुआ है। और वो सेंटीमेंट किसके प्रति है? वो सेंटीमेंट है कि मुसलमानों ने मिलजुलकर हिंदुओं के खिलाफ जंग का ऐलान किया है। यह वक्फ गैंग ने कहा था जंगे आजादी की दूसरी लड़ाई है। तो ये जो जंग छेड़ने की कोशिश की थी अब हम उस जंग का अंत करने जा रहे हैं। इसीलिए इन लोगों को लगता है कि अगर इसमें माहौल इस तरह से हिंदुओं के अंदर से बनपा तो फिर हमारी राजनीतिक सियासती सियासत का पूरा रंग बिखर जाएगा और आगे भविष्य में राजनीति करने के लायक नहीं रहेंगे। इसलिए यह पीठ पीछे छुड़ा भोकने की रणनीति पर काम करता है। मीटिंग होती है रात में फोन पर बातचीत होती है। 28 पार्टियां जो इंडी अलायंस का पार्टनर हुआ करती थी। ये सारे के सारी पार्टियां आपस में मिलजुलकर यही रणनीति बना रही है कि कैसे इस माहौल को शांत करें और उसके लिए उपाय इसके पास एक ही है कि जितनी भी समस्या है उसका जिम्मेदार सरकार को ठहराओ जैसे पुलवामा के समय ठहराए थे उरी के समय ठहराए थे ऐसे ही कहो और ये कहना भी शुरू कर दिया कि जब पुलवामा में आरडीएक्स आ गया था उसके बाद सिक्योरिटी की इतनी बड़ी व्यवस्था थी तो यहां पर बंदूक लेकर AK- 47 लेकर टेररिस्ट कैसे आ गया? इसके लिए सुरक्षा चूक है। यह हिंदुस्तान के उन गद्दारों की बात नहीं है। बल्कि सरकार ने कुछ ऐसा करवाया। अखिलेश यादव तोयहां तक बोल दिया कि ये सारी घटनाओं के पीछे कौन है? यह बच्चा-बच्चा समझ सकता है। ये मुद्दे डायवर्ट करने की कोशिश है। बेरोजगारी, महंगाई। यह हमेशा जब भी कोई सेंसिटिव मुद्दा आता है, जब भी कोई राष्ट्रीय हित का मुद्दा आता है, देश के स्वाभिमान का मुद्दा आता है, तो ये लोग यही चार पांच शब्द अल्पसंख्यक, बेरोजगारी, महंगाई ऐसे ही शब्द गढ़ के लोगों का दिमाग भटकाने की कोशिश करता है। और इन्हीं लोगों के कारण अभी तक इसके खिलाफ कार्रवाई कभी कठोर नहीं हो पाई। 70 साल हो गया। अब तक पाकिस्तान कब का निपट गया होता लेकिन हमने कार्रवाई नहीं की। अब जब कार्रवाई हो रही है तो ये बिल से धीरे-धीरे निकल कर हंगामा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं और दो-चार दिन के अंदर यह फिर से हंगामा करेगा।

यह 5 तारीख को जो वक्त पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। उस समय फिर से इकट्ठा होगा और इस मुद्दे को डायवर्ट करने की कोशिश करेगा। लेकिन उससे पहले इसका इलाज शुरू हो गया है। धरपकड़ चल रहा है। गिरफ्तारियां हो रही है और इन लोगों के ऐसे ऐसे कारनामे उजागर हो रहे हैं कि अब बाहर निकलने की कोशिश नहीं करेगा क्योंकि इलाज जरूरी था और ऐसे समय में जो भी पाकिस्तान का नाम लिया उसके सपोर्ट में एक बात कही उसकी खैर नहीं होगी। क्योंकि अभी देश की समस्या सिर्फ एक ही है कि पाकिस्तान ने आतंकवादी भेजे। उसने षड्यंत्र कास्परेसी की और उस साजिश में हिंदुस्तान के कुछ लोग शामिल हैं और कश्मीर के बड़े-बड़े पॉलिटिकल लीडर भी उसके सिंपैथाइजर हैं। कहीं ना कहीं इनडायरेक्ट कनेक्शन उसका है। तो इस पूरे नेटवर्क को तोड़ा जाए, क्रैकडाउन किया जाए और इसी आधार पर अमित शाह ने सारे राज्यों में अलर्ट जारी कर सबको निर्देश दिया है|


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