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Wednesday, May 7, 2025

भारत ने किया पाकिस्तान के F16 और JF17 को ढेर

 भारत ने किया पाकिस्तान के F16 और JF17 को ढेर। भारत पर हमले की कोशिश में थे दोनों जेट्स। आकाश मिसाइल ने किया काम तमाम। आकाश मिसाइल की ऐसी पावर देख अमेरिका और चीन भी हिले। F16 और JF17 का ऐसा हाल देख रसातल में पहुंच जाएगा दोनों का डिफेंस मार्केट। भारत की सैन्य ताकत ने एक बार फिर दुनिया को हैरान कर दिया। राफेल लड़ाकू विमानों की गर्जना और उनकी घातक मिसाइलों ने पड़ोसी मुल्क को रातों रात थर्रा दिया। भारत ने इतनी तेजी और सटीकता से कार्रवाई की कि पाकिस्तान हिल गया। कुल नौ ठिकानों पर भारत ने अपने पराक्रम का लोहा मनवाया और ये सब इतनी चतुराई से किया कि दुश्मन को जवाब देने का मौका तक नहीं मिला। लेकिन रुकिए कहानी यहीं खत्म नहीं होती।


पाकिस्तान ने जवाबी कार्य्रवाही की कोशिश में अपने दो सबसे आधुनिक फाइटर जेट्स F16 और JF78 को हवा में उतारा। मगर भारत की आकाश मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने इन दोनों को चंद सेकंड्स में हवा में ही धूल चटा दी। जी हां, आकाश मिसाइल की इस अजय ताकत ने ना सिर्फ पाकिस्तान के इरादों को कुचल दिया बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान भारत की इस स्वदेशी तकनीक की ओर खींच लिया। कई देश पहले से ही इस मिसाइल सिस्टम को खरीदने की बात कर रहे थे और अब इस कार्यवाही के बाद तो बड़े-बड़े देश इसे हासिल करने की होड़ में लग सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक जिस तरह से आकाश मिसाइल सिस्टम ने इन फाइटर जेट को आसमान में ही ठोका है उसके बाद तो इन जेट्स के निर्माता देश यानी अमेरिका और चीन के भी पसीने छूट रहे हैं। क्योंकि जिस तरह से यह जेट्स आकाश मिसाइल से ढेर हुए हैं। इसके बाद तो इन दोनों विमानों का डिफेंस मार्केट बर्बाद होना तय है। तो सवाल है कि आखिर भारत की मिसाइल यह किया कैसे? क्या है आकाश मिसाइल की ताकत जिसने पाकिस्तान के सारे हथियार बेकार कर दिए? कैसे भारत ने इतनी सटीकता से यह जवाबी कार्यवाही की? और क्यों दुनिया अब भारत की इस तकनीक की कायल हो रही है?

भारत ने जिस ऑपरेशन को अंजाम दिया उसे नाम दिया गया ऑनप्रेशन सिंदूर। 7 मई 2025 की आधी रात जब दुनिया सो रही थी भारतीय वायु सेना ने अपने सबसे ताकतवर हथियारों को मैदान में उतारा। जानकारी के मुताबिक राफेल, Sukhoi 30ki और मिराज 2000 जैसे विमानों ने आसमान में उड़ान भरी और नौ ठिकानों पर सटीक निशाना साधा। ये ठिकाने पाकिस्तान और उसके कब्जे वाले इलाकों में थे। जैसे मुजफराबाद, बहावलपुर और कोटली। खास बात यह कि भारत ने यह कार्यवाही अपनी सीमा के भीतर रहकर की। यानी Standoff ऑफ हथियारों का इस्तेमाल किया जो दूर से ही टारगेट को भेज सकते हैं। इनमें हैमर बम जैसे हथियार, स्कैल्प और ब्रह्मोस जैसी मिसाइल शामिल थे जो रडार को चकमा देने में माहिर हैं। रक्षा मंत्रालय ने साफ किया कि इस ऑपरेशन का मकसद किसी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाना नहीं था बल्कि उन संगठनों को सबक सिखाना था जो भारत में अशांति फैलाने की कोशिश करते हैं।

इस ऑपरेशन की सटीकता 100% थी और इसका सबूत है कि कोई भी गलत टारगेट नहीं मारा गया। भारत ने इस ऑन ऑपरेशन को इतनी गोपनीयता और रणनीति के साथ अंजाम दिया कि पाकिस्तान को संभलने का मौका तक नहीं मिला और जब उन्होंने अपने फाइटर जेट्स F16 और J17 भेजे तो भारत की आकाश मिसाइल ने उनका खेल हवा में ही खत्म कर दिया। जिसके बाद चीन से लेकर अमेरिका तक हैरान है। भारत को लेकर पाकिस्तान ने कर डाली बड़ी गलती। पल भर में भारत ने ढेर कर दिए पाक के फाइटर जेट्स। अब बात करते हैं उस आकाश मिसाइल की जिसने पाकिस्तान के दोनों फाइटर जेट्स को हवा में ही ढेर कर दिया। आकाश मिसाइल सिस्टम भारत का वो गौरव है जिसे डीआरडीओ ने पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनाया है। इस मिसाइल की रेंज 25 से 30 कि.मी. है और यह 60 कि.ग्र. तक का वॉर हेड ले जा सकती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसकी सुपरसोनिक स्पीड यानी ढाई मैक जो ध्वनि की गति से ढाई गुना ज्यादा है। 7 मई 2025 को जब पाकिस्तान ने अपने F16 और JF7 को भारतीय सीमा की ओर भेजा तब आकाश मिसाइल ने अखनूर और पुलवामा के प्पोर इलाके में इन जेट्स को निशाना बनाया। F16 जिसे अमेरिका ने पाकिस्तान को दिया था। और JF7 जो चीन के साथ मिलकर बनाया गया था।

एक राफेल विमान 3700 कि.मी. तक उड़ान भर सकता है और 24,500 कि.ग्र. तक हथियार ले जा सकता है। इस ऑपरेशन में राफेल ने हैमर बम का इस्तेमाल किया जो 70 कि.मी. तक की दूरी से टारगेट को भेज सकता है। भारतीय सेना ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी नागरिक क्षेत्र प्रभावित ना हो और इसके लिए लेजर गाइडेड म्युनिशंस का इस्तेमाल किया गया। इस ऑपरेशन की सक्सेस रेट 100% रही और इसका सबूत है कि पाकिस्तान के दोनों फाइटर जेट्स बिना कोई नुकसान पहुंचाए ढेर हो गए। इस कार्यवाही ने भारत की स्ट्रेटेजिक क्षमता को दुनिया के सामने ला दिया और साथ ही यह मैसेज भी दिया कि भारत अपनी सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।

गुरु देव बृहस्पति अतिचारी मोड में आ रहे हैं

      One of the Asrologer who Analysed this in Jupitar Transit

एक तरफ राहु आ रहे हैं और एक तरफ गुरु देव बृहस्पति अतिचारी मोड में आ रहे हैं। जब दोनों की युति बनेगी तो युद्ध तो होना तय है। और साइन से 8th पड़ता है जेमिनाई साइन। वहां पर चले गए हैं गुरुदेव बृहस्पति। तो कहीं ना कहीं इमरजेंसी वाली सिचुएशन लाइफ डेथ वाली सिचुएशन सिनेरियो किसी तरह का स्ट्राइक होना इस तरह की चीजें भी कहीं ना कहीं ट्रिगर होती हुई नजर आ रही है।

आप सभी का स्वागत है वैदिक एस्ट्रोलॉजी यानी लाइफ जीपीएस एक ऐसा लाइफ जीपीएस जो आपको बताता है आने वाले समय काल के बारे में और डिस्कस करने वाला हूं डिकोड करने वाला हूं गुरुदेव बृहस्पति के राशि परिवर्तन के बारे में इसका क्या इंपैक्ट पड़ेगा हम सबके जीवन पर हर लग्न राशि के ऊपर इसका क्या इंपैक्ट पड़ने वाला है मैं बात करूंगा कैसे इवेंट ट्रिगर होने वाले हैं जियोपॉलिटिकल लेवल पर क्या सिनेरियोस बनने वाले हैं उसका कैसा इंपैक्ट पड़ेगा हमारी ऊर्जा पर हमारे कॉन्शियस लेवल पर मैं डिस्कस करूंगा साथ-साथ उस अनयूजुअल स्पीड के बारे में जो गुरुदेव बृहस्पति की अब होने वाली है यानी कि गुरुदेव बृहस्पति अति अतिचारी होकर कैसा इंपैक्ट लेकर आने वाले हैं।

कैसा परिवर्तन, कैसा चेंज, कैसा शिफ्ट हमारे जीवन में आने वाला है। प्लस मैं बात करूंगा गुरुदेव बृहस्पति जब मिथुन राशि में जाएंगे जो कालपुरुष कुंडली के हिसाब से तीसरे घर की राशि होती है। वहां पर गुरुदेव बृहस्पति मरण कारक स्थान में पहुंच जाते हैं। तो वहां पर क्या इंपैक्ट लेके आएंगे? कैसी एनर्जीज़ का फ्लो बनने वाला है। हमारे जीवन पर उसका क्या इंपैक्ट पड़ने वाला है? सबके बारे में डिस्कस करता हूं। आइए शुरुआत करता हूं गुरुदेव बृहस्पति के अतिचारी होने पर। अतिचारी मींस जो ग्रह एक राशि परिवर्तन करने के लिए 12 से 13 महीने का टाइम पीरियड लेता था, वही ग्रह 5 महीने 4 दिन के अंदर एक राशि परिवर्तन कर लेगा। इस अनयुअल स्पीड को 2x स्पीड को कहा गया है अतिचारी और यह गुरुदेव अतिचारी रहने वाले हैं 15 मई 2025 से 2032 अगस्त तक। तो ये 7 साल हमारी लाइफ के बहुत इंपॉर्टेंट पीरियड होने वाले हैं। एक एक ऐसा हिस्सा, एक ऐसा समय काल जो एक युग परिवर्तन को दिखा रहा है। एक शिफ्ट को दिखा रहा है। यानी कि हमारी लाइफ बहुत जल्दी बदलने वाली है। जो हम 80ज 90ज 20 में जिया करते थे। जो हमारा जीने का पैटर्न था वो जीने का पैटर्न वो देखने का नजरिया वो जिंदगी जीने का नजरिया सब कुछ इवॉल्व करने वाला है बदलने वाला है। हमारे जीवन एक शिफ्ट की तरफ जा रहा है। हिस्ट्री अपने आप को लिखने वाली है जिसका एक बहुत बड़ा एक एग्जांपल हम सब बनने वाले हैं। साथ-साथ ये हमको बता जाएगा कि इस धरती पर जो सबसे क्रूर जाति है वो मानव जाति है। हमारे अंदर दुर्योधन को जगा जाएगी। यानी कि हम सबके अंदर एक दुर्योधन जागने वाला है। उसकी नेगेटिविटी हमारे अंदर पीक पे जाने वाली है। दुशासन की भांति चीर हरण करना हमारी आदत बन जाएगी। शकुनी मामा जैसे लोग हमें पसंद आने लगेंगे। जो हमें प्लीज करेंगे, जो हमें प्रमोट करेंगे, हमारी सही गलत बातों को खत्म कर देंगे। शायद इसी बीच हम एक मर्यादा को लांग जाएंगे। युधिष्ठिर जैसे लोगों को कमजोर समझा जाएगा। शायद देवुरु बृहस्पति का अतिचारी होना उन लोगों का अब सबसे बड़ा टेस्ट होने वाला है जो धर्म पर विश्वास रखते हैं। और देवुरु बृहस्पति यहां एक चक्रव्यूह रच रहे हैं। एक माया जाल रच रहे हैं जिसकी तरफ हम ड्रिफ्ट होते हुए जा रहे हैं। और इसका परिणाम होगा हम इल्यूजन को चस करेंगे। अधर्म बढ़ेगा। युग धूमिल होगा। अपनों का साथ छूटेगा।

लेकिन एक बात का ध्यान रखिएगा समय कैसा भी हो माना आपकी परीक्षा लेगा। लेकिन जीत धर्म की होगी। अधर्म को गलत बातों को खत्म कर देंगे। शायद इसी बीच हम एक मर्यादा को लांग जाएंगे। युधिष्ठिर जैसे लोगों को कमजोर समझा जाएगा। शायद देवुरु बृहस्पति का अतिचारी होना उन लोगों का अब सबसे बड़ा टेस्ट होने वाला है जो धर्म पर विश्वास रखते हैं। और देवुरु बृहस्पति यहां एक चक्रव्यूह रच रहे हैं। एक माया जाल रच रहे हैं जिसकी तरफ हम ड्रिफ्ट होते हुए जा रहे हैं। और इसका परिणाम होगा हम इल्यूजन को चस करेंगे। अधर्म बढ़ेगा। युग धूमिल होगा। अपनों का साथ छूटेगा। लेकिन एक बात का ध्यान रखिएगा। समय कैसा भी हो माना आपकी परीक्षा लेगा। लेकिन जीत धर्म की होगी। अधर्म को टूटना पड़ेगा।

जब देव गुरु बृहस्पति भ्रमण करेंगे धनु राशि में एक युद्ध की राशि में एक इनिशिएशन की राशि में तब प्रकृति एक नए युग की स्थापना कर चुकी होगी। धर्म की स्थापना कर चुकी होगी। एक नई महाभारत लिखी जा चुकी होगी। तो इतना समझ लीजिए कुछ क्रिएट करने के लिए कुछ बदलाव करने के लिए एक परीक्षा की घड़ी तो आएगी। कुछ का तो अपनों का साथ छूट जाएगा। लेकिन इतना समझ लीजिए वही होगा जो युगों युगों से चलता आ रहा है। धर्म की जीत होगी। अधर्म का नाश होगा। लोगों में सद्भावना होगी। विश्व का कल्याण होगा। अब इतना समझ लीजिए अधर्म कितना भी पीक पर चला जाए कितना भी तरह तांडव कर ले कितना भी डेवलपमेंट ले आ जाए जीत तो धर्म की होनी है सत्य की होनी है तो ये समझ लीजिए जो शांत है वो कमजोर नहीं है जो विष पी सकता है वो शिव है और शिव से बड़ी कोई शक्ति नहीं है|अपनी स्थिति को चेक करते रहिएगा आप नारायण की तरफ खड़े हैं या नारायणी सेना की तरफ क्योंकि एक तरफ तरफ राहु आ रहे हैं और एक तरफ गुरु देव बृहस्पति अतिचारी मोड में आ रहे हैं। जब दोनों की युति बनेगी तो युद्ध तो होना तय है और इस युद्ध में दो धर्म लड़ेंगे और इस धर्म में अपनों का बंटवारा होगा। इस धर्म में बहुत खूनखरावर होगा। लेकिन अगर आप अभी भी समझदारी से चलते हैं तो चीजें बहुत सरल हो सकती हैं। चीजें परिवर्तनशील हो सकती हैं।स्थिति कंट्रोल हो सकती है। चलिए अब बात करते हैं 2025 में जब गुरुदेव बृहस्पति मिथुन राशि में आएंगे तो क्या इंपैक्ट लेके आएंगे? देखिए गुरुदेव बृहस्पति अतिचारी होकर मिथुन राशि में जा रहे हैं। मरणकारक का स्थान में जा रहे हैं। और गुरुदेव बृहस्पति ज्ञान के कारक हैं। नॉलेज, विज़डम, फॉर्च्यून के कारक हैं। ब्लेसिंग्स के कारक हैं। गुड लक लेके आते हैं हमारी लाइफ में।ABUNDANCE लेके आते हैं। ब्लेसिंग्स के कारक हैं। तो इनका जब मिथुन की राशि में जाएंगे यानी कि बुध ग्रह का बहुत प्रॉमिनेंट रोल होने वाला है। तो आपकी कुंडली में बुध ग्रह कैसे बैठे हैं? तो उसका मेजर इंपैक्ट बहुत पड़ेगा। यानी कि बुध ग्रह की बहुत अच्छी स्थिति होने से हमारी लाइफ में अबंडेंस आएगा। हमारी लाइफ में क्लेरिटी आएगी। हम एक टैक्टिकल एक अच्छी किसी भी सिचुएशन में हम एक अच्छा स्टेप ले पाएंगे। बट अगर यहां पे कुछ भी नेगेटिव पोजीशंस बन रहे हैं या कुछ भी किसी तरीके से आपका पैटर्न नेगेटिव जा रहा है तो आपके लिए ट्रबल आ सकता है। और देखिए बुध ग्रह ना एक इमैच्योर प्लनेट है। एक निजक रिएक्शन वाले हैं। कभी-कभी हम सोचते हैं शनि की वजह से हमारी लाइफ में ट्रबल आ रहा है। शनि की वजह से डिले आ रहा है। मंगल की वजह से अग्रेशन आ रहा है। राहु की वजह से इल्यूजन आ रहा है। केतु की वजह से डिटचमेंट आ रहा है। तो इस तरह का सिनेरियो हम बनाते हैं और हमारा जो ध्यान होता है वो बुध ग्रह पे जाता ही नहीं। लेकिन बुध ग्रह वो एनर्जी है जो हमारी थॉट को एक कम्युनिकेशन के रूप में स्पीच के रूप में बाहर लेके आती है। यानी कि लॉजिकल का मालिक लॉजिकल थिंकिंग का मालिक एक एक अपने आप को एक्सप्रेस करने की पावर जिसके अंदर है डिस्ट्रैक्ट हो जाता है। लेकिन कन्वेंसिंग पावर उससे ज्यादा किसी के पास नहीं है। यानी कि वो अपने आप को गलत को सही और सही को गलत एक्सप्लेन करके वो जस्टिफाई कर सकता है कि ही इज़ द परफेक्ट पर्सन। बुध ग्रह लॉजिकल है लेकिन Curiosityके चक्कर में मात खा जाते हैं। कम्युनिकेशन बहुत अच्छे से ट्रिगर करना जानते हैं। यानी कि मार्केटिंग वाले लोगों के लिए सेल वालों के लिए इस समय बहुत अच्छा सिनेरियो बनेगा कि जब वो किसी भी चीज को बहुत अच्छे बेहतर तरीके से प्रेजेंट कर पाएंगे। अपनी चीजों को अपने प्रोडक्ट को बहुत अच्छे से सेल कर पाएंगे। लेकिन हमें छोटी-छोटी चीजों पे बहुत ध्यान देना पड़ेगा। डेप्थ में जाना पड़ेगा क्योंकि गुरुदेव बृहस्पति वहां-जहां बैठते हैं वहां पर स्थान हानि करते हैं। तो हमें छोटी-छोटी गलतियों को इग्नोर कर सकते हैं। जिसकी वजह से हमें बहुत बड़ी सजा मिल सकती है। इस चीज़ का हमें ध्यान रखना पड़ेगा।

आइए अब बात करते हैं मिथुन राशि में गुरुदेव बृहस्पति का क्या इंपैक्ट हमें जियोपॉलिटिकल लेवल पे देखने को मिलेगा। देखिए कम्युनिकेशन सेक्टर बहुत ज्यादा एंपलीफाई होने वाला है। सेल्स मार्केटिंग ये बहुत ज्यादा एंपलीफाई होती हुई दिखाई देंगी। ट्रेडिंग बहुत ज्यादा दिखाई देगी। बिज़नेस ट्रेड करना कहीं ना कहीं ये स्पेकुलेशन का मार्केट भी बहुत ज्यादा बूम करता हुआ नजर आ रहा है। कम्युनिकेशन इस तरह की होंगी जिसमें डेप नहीं होगा। तो हम क्या किस कम्युनिकेशन में बिलीव कर रहे हैं? किस पे नहीं कर रहे हैं? इस चीज को ऑडिट करना आपको बहुत कॉन्शियसली इस चीज को करना पड़ेगा। ये चीज आपने ध्यान रखनी है। देखिए स्कर्पियो साइन से 8th पड़ता है जेमिनाई साइन। वहां पर चले गए हैं गुरुदेव बृहस्पति। तो कहीं ना कहीं इमरजेंसी वाली सिचुएशन, लाइफ डेथ वाली सिचुएशन, सिनेरियो, किसी तरह का स्ट्राइक होना इस तरह की चीजें भी कहीं ना कहीं ट्रिगर होती हुई नजर आ रही हैं। कुछ-कुछ प्लेसेस पे कहीं ना कहीं इंटरनेट ब्लॉक होना, बंद होना इस तरह की चीजें भी कहीं ना कहीं दिखाई दे रही हैं। प्लस एक पॉजिटिवली बोलूं तो कहीं ना कहीं राहुल कुंभ राशि में आ जाएंगे तो न्यू टेक्नोलॉजी, न्यू स्पीड यानी कि हो सकता है इंटरनेट की 6G, 7G इंडिया में आ जाए। इस तरह की चीज़ें भी हो सकती हैं। लेकिन इस समय काल में ना सुनी-सुनाई चीज़ों को बहुत ज़्यादा पुश किया जाएगा। शायद हो सकता है लोग अपने विज़डम पे, अपनी नॉलेज पे कम बिलीव करें। सामने वाले पे ज्यादा बिलीव करने लगे। क्योंकि मैं जैसा कि मैंने बोला बुध ग्रह लॉजिकल है। वो किसी भी चीज को बिल्कुल सही हिट कर सकते हैं। यानी कि वो दिखा सकते हैं कि ही इज द बेस्ट। तो ये चीजें आपको बहुत ज्यादा क्लियर माइंड से सोचनी पड़ेगी। क्या सही है, क्या गलत है, क्या दूध है, क्या पानी है। इस चीज़ में आपने बहुत ज्यादा क्लेरिटी रखने की बहुत ज्यादा जरूरत है।

गुरुदेव बृहस्पति एजुकेशन के कारक हैं। तो कहीं ना कहीं मुझे दिखाई दे रहा है आने वाले 7 साल के अंदर एजुकेशन सेक्टर बदलने वाला है। बहुत कुछ इवॉल्व करने वाला है। हो सकता है दोबारा से वो सिनेरियो क्रिएट हो कि एजुकेशन फ्रॉम होम वाली सिनेरियो ट्रिगर कर सकती हैं। ठीक है? लोगों के बैग ले जाना या फिर आपका जो एजुकेशन का जो पैटर्न है वो चेंज करेगा, इवॉल्व करेगा। तो बहुत सारी चीजें बदलती हुई इवॉल्व करती हुई नजर आ रही हैं। तो ये चीजें कहीं ना कहीं देखने को मिलेगी। अगर आप टीचर हैं तो कहीं ना कहीं आपको बहुत स्ट्रेंथ मिलने का समय है। आपको एक एक बहुत अच्छी अपॉर्चुनिटीज मिलने का समय है। लेकिन समय के साथ खुद को इवॉल्व करना बहुत ज्यादा जरूरी है। अगर आप इवॉल्व नहीं कर पाए अपने कंफर्ट ज़ोन में आ गए तो शायद हो सकता है थोड़ा ट्रबल आ जाए। तो ये इस समय जब ज्ञान की बात हो रही है और ऊपर से लॉजिकल थिंकिंग ये दोनों मिक्स कर रहे हैं, ब्लेंड कर रहे हैं

सुप्रीम कोर्ट के जजेस के एसेट डिक्लेरेशन

सुप्रीम कोर्ट के जजेस के एसेट डिक्लेरेशन
सुप्रीम कोर्ट के जजेस के एसेट डिक्लेरेशन
सुप्रीम कोर्ट के जजेस के एसेट डिक्लेरेशन
सुप्रीम कोर्ट के जजेस के एसेट डिक्लेरेशन

 क्या आपको पता है कि सुप्रीम कोर्ट के जजेस के एसेट डिक्लेरेशन ने एक बार फिर से कितने बड़े राज खोल दिए हैं? भारतीय सुप्रीम कोर्ट की सेंक्शन स्ट्रेंथ 34 जजेस की है और अप्रैल 2025 तक 31 जजेस हैं। उनमें से 21 जजेस ने अपने एसेट्स ओपनली डिक्लेअ किए हैं जो जुडिशरी की ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी की तरफ एक जबरदस्त कदम माना जा रहा है। लेकिन यह सिर्फ एक फॉर्मल एक्सरसाइज नहीं थी। जब इन डिक्लेरेशन का डिटेल में विश्लेषण किया गया तो कुछ ऐसे फैक्ट सामने आए हैं जो सचमुच में आंखें खोल देने वाले हैं।

किसी के पास पांच अलग-अलग शहरों में प्रॉपर्टीज हैं और फॉरेन इन्वेस्टमेंट्स भी तो कोई जज सिर्फ 3.5 लाख के मूवेबल एसेट के साथ अपना जीवन गुजार रहा है। कहीं किसी की टैक्स हिस्ट्री ₹91 करोड़ तक की पहुंच गई है तो कहीं सिर्फ एक Honda WRV गाड़ी और थोड़ी बहुत ज्वेलरी। यह तो सच में एक रात के अंधेरों में छुपा हुआ बॉम्ब शेल है। तो चलिए देखते हैं कि इस डाटा ने क्या कुछ रिवील किया है और कौन कितना अमीर है और किसके पास सबसे कम पैसा है। स्टे ट्यून विद दिस वीडियो टिल द एंड। सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई 2025 को अपनी वेबसाइट पर 21 जजेस के एसेट्स पब्लिक किए। टोटल 33 जजेस में से और यह सब हुआ बिल्कुल चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया संजीव खन्ना के रिटायरमेंट के ठीक पहले जो 13 मई को सुपरनोट हो रहे हैं। सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के पांचों जजेस जिनके हाथ में नए जजेस की अपॉइंटमेंट और ट्रांसफर की ताकत होती है, उन्होंने अपने एसेट्स डिस्क्लोज़ किए हैं। यानी कि सिस्टम के सबसे पावरफुल जजेस ने भी अपने फाइनेंशियल पोजीशन को जनता के सामने रख दिया है। यह इंडियन जुडिशरी के इतिहास में एक रेयर मोमेंट है। जहां इतनी सीनियर जुडिशरी ने वॉलंटरी अपने प्राइवेट फाइनेंसियल डिटेल्स को डिस्क्लोज़ किया है। सिमिलरली उन दो जजेस जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस केबी विश्वनाथन जो डायरेक्टली बाहर से सुप्रीम कोर्ट में आए थे उन्होंने भी अपने एसेट्स डिस्क्लोज़ कर दिए हैं।

इनके अलावा 12 जजेस जिन्होंने अभी तक अपना स्टेटमेंट नहीं दिया है वो हैं जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस जे के महेश्वरी, जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस एसानुद्दीन अमन उल्ला, जस्टिस मनोज मिश्रा, जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस पीके मिश्रा, जस्टिस एस सी शर्मा, जस्टिस पीबी वरले, जस्टिस एन कोटीश्वर सिंह, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस जयमला बागची। जब हमने अभी तक के 18 जजेस के डिक्लेरेशन का कंपैरेटिव एनालिसिस किया तो हमें पता चला कि सबसे ज्यादा मटेरियलिस्टिक एसेट्स जस्टिस केवी विश्वनाथन के पास हैं। इन्होंने डिक्लेअर किया है कि उनके पास सरफतगंज इंक्लेव, गुलमोहर पार्क और कोयंबतूर जैसे प्रीमियम लोकेशनेशंस पर पांच प्रॉपर्टीज हैं। इंडिया में उन्होंने $20 करोड़ से ज्यादा की म्यूच्यूल फंड्स, इक्विटी और फिक्स्ड डिपॉजिट्स में से इन्वेस्ट किए हैं। साथ ही उन्होंने आरबीआई के लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के जरिए $1 मिलियन लगभग ₹8.4 करोड़ फॉरेन फंड्स को भी ट्रांसफर किए हैं जो उनके और उनके स्पाउस के नाम पर है। जस्टिस केवी विश्वनाथन के पास Toyota, कैमरी और एलटीएस जैसी गाड़ियां भी है। ज्वेलरी के रूप में उन्होंने लगभग 1.45 कि.ग्र. सोना चांदी डिक्लेअ किया है। सबसे खास बात यह है कि उनके ऊपर कोई भी टैक्स लायबिलिटी नहीं है। उन्होंने पिछले 15 सालों में 91.47 करोड़ का इनकम टैक्स दिया है। यह सब दिखाता है कि जज बनने से पहले उन्होंने टॉप सीनियर एडवोकेट के रूप में कितनी सफलता हासिल की थी।

अब अगर हम बात करें जमीन की तो जस्टिस सूर्यकांत सबसे आगे हैं। उन्होंने पंचकूला में 13.5 एकड़ की एग्रीकल्चर लैंड डिक्लेअर की है। हिसार में 1/3 शेयर के रूप में 12 एकड़ और चंडीगढ़, गुरुग्राम और न्यू दिल्ली जैसे शहरों में प्लॉट्स और हाउसेस हैं। उनके स्पाउस के पास इकोसिटी टू न्यू चंडीगढ़ में 500 स्क्वायर यार्ड का प्लॉट भी है। समाग्रा रूप में उनके पास 8 टू 10 प्रॉपर्टीज और लगभग 17 प्लस एकड़ की लैंड होल्डिंग्स हैं। साफ है कि लैंड के मामले में यह जस्ट किसी से कम नहीं है।

जहां तक लिक्विड वेल्थ का सवाल है, मतलब वो धन जो तुरंत कैश में बदला जा सकता है, इसमें भी जस्टिस केवी विश्वनाथन सबसे आगे हैं। उन्होंने 12.09 करोड़ सेल्फ के नाम पर, 6.43 करोड़ स्पाउस के नाम पर और 1.31 करोड़ चाइल्ड के नाम पर डिक्लेअ किए हैं। साथ ही 8.4 करोड़ का फॉरेन फंड्स भी है। मतलब लगभग 28 करोड़ का लिक्विड एसेट्स इन्होंने डिक्लेअ किया है जो किसी और जज के पास नहीं है। अब अगर बात करें सबसे ज्यादा टैक्स भरने वाले जज की तो उसमें भी जस्टिस विश्वनाथन सबसे आगे हैं। उन्होंने फाइनेंसियल ईयर 2010 से 20202 के बीच ₹91.47 करोड़ टैक्स पे किया था और केवल 2023 और 24 के एक साल में उन्होंने 17.48 करोड़ टैक्स पे किया है। यह रिकॉर्ड दिखाता है कि जज बनने से पहले उनका लीगल प्रैक्टिस कितना सफल था और वह इंडिया के टॉप टैक्स पेयर्स में शामिल रहे होंगे। ज्वेलरी के मामले में जस्टिस सूर्यकांत ने अपने पास 1.2 कि.ग्र. गोल्ड, सेल्फ और डॉटर्स के नाम पर और 6 कि.ग्र. सिल्वर डिक्लेअर किया है। इतना गोल्ड और सिल्वर किसी और जज के पास नहीं है। यह ज्वेलरी मोस्टली इनहेरिटेंट और गिफ्टेड कैटेगरी में डिक्लेअर की गई है।

आपको बता दूं कि कुछ डिक्लेरेशंस में कुछ कंट्रोवर्शियल या सरप्राइजिंग चीजें भी सामने आई है। जैसे जस्टिस बी आर गवई ने अपने एचयूएफ के नाम पर 1.07 करोड़ की लायबिलिटी डिक्लेअर की है जो इन्हहेरिटेंट प्रॉपर्टी या फैमिली सेटलमेंट से जुड़ी जिम्मेदारियां दिखाती है। जस्टिस केवी विश्वनाथन का 1 मिलियन का फॉरेन ट्रांसफर बिल्कुल लीगल है। लेकिन पब्लिक परसेप्शन के लिए सेंसिटिव माना जा सकता है। जस्टिस अगस्तिन जी मशीन ने 1.12 करोड़ का होम लोन डिक्लेअ किया है। जिसमें उन्होंने जीपीएफ इनहेरिटेंट प्रॉपर्टी की सेल और फैमिली से लोन का यूज किया है।


आपको बता दूं कि जस्टिस एसवी भट्टी ने सिर्फ LIC और सेविंग्स को ही डिक्लेअ किया है और उनके पास कोई भी इन्वेस्टमेंट नहीं दिखाई दी है। जिससे सवाल उठता है कि क्या यह अंडर रिपोर्टिंग है या बस एक मॉडस लिविंग का प्रमाण? तो इस पूरे अपलोडेड डाटा को एनालाइज करने के बाद यही सामने आया है कि अगर सबसे कम अमीर जज की बात करें तो वह जस्टिस एसवी भट्टी है। उन्होंने सिर्फ 3.5 लाख के मूवेबल एसेट्स डिक्लेअर किए हैं। उनके पास चार प्रॉपर्टीज हैं जो मोस्टली बेसिक और एनस्ट्रल है। उन्होंने म्यूच्यूल फंड्स या शेयर्स में कोई इन्वेस्टमेंट नहीं किया है और उनके पास 2017 से Honda Wआरवी गाड़ी है। यह डिक्लेरेशन दिखाता है कि शायद उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी पब्लिक सर्विस में बिताई होगी। आखिर में इस एसेट डिक्लेरेशन से क्या सीख मिलती है?

यह साफ है कि जुडिशरी के अंदर भी इकोनमिक डिस्पैरिटी है। किसी के पास 50 करोड़ के एसेट्स हैं तो कोई जज सिर्फ 3 लाख के मूवेबल एसेट के साथ काम चला रहा है। जस्टिस विश्वनाथन क्लियरली सबसे वेल्थी और ग्लोबलाइज एसेट होल्डर है। जबकि जस्टिस सूर्यकांत के पास सबसे ज्यादा ट्रेडिशनल लैंड होल्डिंग्स हैं। ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक अकाउंटेबिलिटी की दिशा में यह डिक्लेरेशन सिर्फ एक स्ट्रांग स्टेप है। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि क्या जजेस के लिए भी वैसे ही एक यूनिफॉर्म एसेट डिक्लेरेशन फ्रेमवर्क होना चाहिए जैसे पॉलिटिशियंस के लिए होता है। जब हमने देखा कि कुछ डिक्लेरेशन में ट्रांसपेरेंसी हाई थी तो कुछ में काफी गैप्स भी थे। तो यह चर्चा अब और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।


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May 07, 2025 at 09:06AM
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सुप्रीम कोर्ट के जजेस के एसेट डिक्लेरेशन

सुप्रीम कोर्ट के जजेस के एसेट डिक्लेरेशन
सुप्रीम कोर्ट के जजेस के एसेट डिक्लेरेशन
सुप्रीम कोर्ट के जजेस के एसेट डिक्लेरेशन

 क्या आपको पता है कि सुप्रीम कोर्ट के जजेस के एसेट डिक्लेरेशन ने एक बार फिर से कितने बड़े राज खोल दिए हैं? भारतीय सुप्रीम कोर्ट की सेंक्शन स्ट्रेंथ 34 जजेस की है और अप्रैल 2025 तक 31 जजेस हैं। उनमें से 21 जजेस ने अपने एसेट्स ओपनली डिक्लेअ किए हैं जो जुडिशरी की ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी की तरफ एक जबरदस्त कदम माना जा रहा है। लेकिन यह सिर्फ एक फॉर्मल एक्सरसाइज नहीं थी। जब इन डिक्लेरेशन का डिटेल में विश्लेषण किया गया तो कुछ ऐसे फैक्ट सामने आए हैं जो सचमुच में आंखें खोल देने वाले हैं।

किसी के पास पांच अलग-अलग शहरों में प्रॉपर्टीज हैं और फॉरेन इन्वेस्टमेंट्स भी तो कोई जज सिर्फ 3.5 लाख के मूवेबल एसेट के साथ अपना जीवन गुजार रहा है। कहीं किसी की टैक्स हिस्ट्री ₹91 करोड़ तक की पहुंच गई है तो कहीं सिर्फ एक Honda WRV गाड़ी और थोड़ी बहुत ज्वेलरी। यह तो सच में एक रात के अंधेरों में छुपा हुआ बॉम्ब शेल है। तो चलिए देखते हैं कि इस डाटा ने क्या कुछ रिवील किया है और कौन कितना अमीर है और किसके पास सबसे कम पैसा है। स्टे ट्यून विद दिस वीडियो टिल द एंड। सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई 2025 को अपनी वेबसाइट पर 21 जजेस के एसेट्स पब्लिक किए। टोटल 33 जजेस में से और यह सब हुआ बिल्कुल चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया संजीव खन्ना के रिटायरमेंट के ठीक पहले जो 13 मई को सुपरनोट हो रहे हैं। सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के पांचों जजेस जिनके हाथ में नए जजेस की अपॉइंटमेंट और ट्रांसफर की ताकत होती है, उन्होंने अपने एसेट्स डिस्क्लोज़ किए हैं। यानी कि सिस्टम के सबसे पावरफुल जजेस ने भी अपने फाइनेंशियल पोजीशन को जनता के सामने रख दिया है। यह इंडियन जुडिशरी के इतिहास में एक रेयर मोमेंट है। जहां इतनी सीनियर जुडिशरी ने वॉलंटरी अपने प्राइवेट फाइनेंसियल डिटेल्स को डिस्क्लोज़ किया है। सिमिलरली उन दो जजेस जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस केबी विश्वनाथन जो डायरेक्टली बाहर से सुप्रीम कोर्ट में आए थे उन्होंने भी अपने एसेट्स डिस्क्लोज़ कर दिए हैं।

इनके अलावा 12 जजेस जिन्होंने अभी तक अपना स्टेटमेंट नहीं दिया है वो हैं जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस जे के महेश्वरी, जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस एसानुद्दीन अमन उल्ला, जस्टिस मनोज मिश्रा, जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस पीके मिश्रा, जस्टिस एस सी शर्मा, जस्टिस पीबी वरले, जस्टिस एन कोटीश्वर सिंह, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस जयमला बागची। जब हमने अभी तक के 18 जजेस के डिक्लेरेशन का कंपैरेटिव एनालिसिस किया तो हमें पता चला कि सबसे ज्यादा मटेरियलिस्टिक एसेट्स जस्टिस केवी विश्वनाथन के पास हैं। इन्होंने डिक्लेअर किया है कि उनके पास सरफतगंज इंक्लेव, गुलमोहर पार्क और कोयंबतूर जैसे प्रीमियम लोकेशनेशंस पर पांच प्रॉपर्टीज हैं। इंडिया में उन्होंने $20 करोड़ से ज्यादा की म्यूच्यूल फंड्स, इक्विटी और फिक्स्ड डिपॉजिट्स में से इन्वेस्ट किए हैं। साथ ही उन्होंने आरबीआई के लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के जरिए $1 मिलियन लगभग ₹8.4 करोड़ फॉरेन फंड्स को भी ट्रांसफर किए हैं जो उनके और उनके स्पाउस के नाम पर है। जस्टिस केवी विश्वनाथन के पास Toyota, कैमरी और एलटीएस जैसी गाड़ियां भी है। ज्वेलरी के रूप में उन्होंने लगभग 1.45 कि.ग्र. सोना चांदी डिक्लेअ किया है। सबसे खास बात यह है कि उनके ऊपर कोई भी टैक्स लायबिलिटी नहीं है। उन्होंने पिछले 15 सालों में 91.47 करोड़ का इनकम टैक्स दिया है। यह सब दिखाता है कि जज बनने से पहले उन्होंने टॉप सीनियर एडवोकेट के रूप में कितनी सफलता हासिल की थी।

अब अगर हम बात करें जमीन की तो जस्टिस सूर्यकांत सबसे आगे हैं। उन्होंने पंचकूला में 13.5 एकड़ की एग्रीकल्चर लैंड डिक्लेअर की है। हिसार में 1/3 शेयर के रूप में 12 एकड़ और चंडीगढ़, गुरुग्राम और न्यू दिल्ली जैसे शहरों में प्लॉट्स और हाउसेस हैं। उनके स्पाउस के पास इकोसिटी टू न्यू चंडीगढ़ में 500 स्क्वायर यार्ड का प्लॉट भी है। समाग्रा रूप में उनके पास 8 टू 10 प्रॉपर्टीज और लगभग 17 प्लस एकड़ की लैंड होल्डिंग्स हैं। साफ है कि लैंड के मामले में यह जस्ट किसी से कम नहीं है।

जहां तक लिक्विड वेल्थ का सवाल है, मतलब वो धन जो तुरंत कैश में बदला जा सकता है, इसमें भी जस्टिस केवी विश्वनाथन सबसे आगे हैं। उन्होंने 12.09 करोड़ सेल्फ के नाम पर, 6.43 करोड़ स्पाउस के नाम पर और 1.31 करोड़ चाइल्ड के नाम पर डिक्लेअ किए हैं। साथ ही 8.4 करोड़ का फॉरेन फंड्स भी है। मतलब लगभग 28 करोड़ का लिक्विड एसेट्स इन्होंने डिक्लेअ किया है जो किसी और जज के पास नहीं है। अब अगर बात करें सबसे ज्यादा टैक्स भरने वाले जज की तो उसमें भी जस्टिस विश्वनाथन सबसे आगे हैं। उन्होंने फाइनेंसियल ईयर 2010 से 20202 के बीच ₹91.47 करोड़ टैक्स पे किया था और केवल 2023 और 24 के एक साल में उन्होंने 17.48 करोड़ टैक्स पे किया है। यह रिकॉर्ड दिखाता है कि जज बनने से पहले उनका लीगल प्रैक्टिस कितना सफल था और वह इंडिया के टॉप टैक्स पेयर्स में शामिल रहे होंगे। ज्वेलरी के मामले में जस्टिस सूर्यकांत ने अपने पास 1.2 कि.ग्र. गोल्ड, सेल्फ और डॉटर्स के नाम पर और 6 कि.ग्र. सिल्वर डिक्लेअर किया है। इतना गोल्ड और सिल्वर किसी और जज के पास नहीं है। यह ज्वेलरी मोस्टली इनहेरिटेंट और गिफ्टेड कैटेगरी में डिक्लेअर की गई है।

आपको बता दूं कि कुछ डिक्लेरेशंस में कुछ कंट्रोवर्शियल या सरप्राइजिंग चीजें भी सामने आई है। जैसे जस्टिस बी आर गवई ने अपने एचयूएफ के नाम पर 1.07 करोड़ की लायबिलिटी डिक्लेअर की है जो इन्हहेरिटेंट प्रॉपर्टी या फैमिली सेटलमेंट से जुड़ी जिम्मेदारियां दिखाती है। जस्टिस केवी विश्वनाथन का 1 मिलियन का फॉरेन ट्रांसफर बिल्कुल लीगल है। लेकिन पब्लिक परसेप्शन के लिए सेंसिटिव माना जा सकता है। जस्टिस अगस्तिन जी मशीन ने 1.12 करोड़ का होम लोन डिक्लेअ किया है। जिसमें उन्होंने जीपीएफ इनहेरिटेंट प्रॉपर्टी की सेल और फैमिली से लोन का यूज किया है।


आपको बता दूं कि जस्टिस एसवी भट्टी ने सिर्फ LIC और सेविंग्स को ही डिक्लेअ किया है और उनके पास कोई भी इन्वेस्टमेंट नहीं दिखाई दी है। जिससे सवाल उठता है कि क्या यह अंडर रिपोर्टिंग है या बस एक मॉडस लिविंग का प्रमाण? तो इस पूरे अपलोडेड डाटा को एनालाइज करने के बाद यही सामने आया है कि अगर सबसे कम अमीर जज की बात करें तो वह जस्टिस एसवी भट्टी है। उन्होंने सिर्फ 3.5 लाख के मूवेबल एसेट्स डिक्लेअर किए हैं। उनके पास चार प्रॉपर्टीज हैं जो मोस्टली बेसिक और एनस्ट्रल है। उन्होंने म्यूच्यूल फंड्स या शेयर्स में कोई इन्वेस्टमेंट नहीं किया है और उनके पास 2017 से Honda Wआरवी गाड़ी है। यह डिक्लेरेशन दिखाता है कि शायद उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी पब्लिक सर्विस में बिताई होगी। आखिर में इस एसेट डिक्लेरेशन से क्या सीख मिलती है?

यह साफ है कि जुडिशरी के अंदर भी इकोनमिक डिस्पैरिटी है। किसी के पास 50 करोड़ के एसेट्स हैं तो कोई जज सिर्फ 3 लाख के मूवेबल एसेट के साथ काम चला रहा है। जस्टिस विश्वनाथन क्लियरली सबसे वेल्थी और ग्लोबलाइज एसेट होल्डर है। जबकि जस्टिस सूर्यकांत के पास सबसे ज्यादा ट्रेडिशनल लैंड होल्डिंग्स हैं। ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक अकाउंटेबिलिटी की दिशा में यह डिक्लेरेशन सिर्फ एक स्ट्रांग स्टेप है। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि क्या जजेस के लिए भी वैसे ही एक यूनिफॉर्म एसेट डिक्लेरेशन फ्रेमवर्क होना चाहिए जैसे पॉलिटिशियंस के लिए होता है। जब हमने देखा कि कुछ डिक्लेरेशन में ट्रांसपेरेंसी हाई थी तो कुछ में काफी गैप्स भी थे। तो यह चर्चा अब और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।


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सुप्रीम कोर्ट के जजेस के एसेट डिक्लेरेशन

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सुप्रीम कोर्ट के जजेस के एसेट डिक्लेरेशन

 क्या आपको पता है कि सुप्रीम कोर्ट के जजेस के एसेट डिक्लेरेशन ने एक बार फिर से कितने बड़े राज खोल दिए हैं? भारतीय सुप्रीम कोर्ट की सेंक्शन स्ट्रेंथ 34 जजेस की है और अप्रैल 2025 तक 31 जजेस हैं। उनमें से 21 जजेस ने अपने एसेट्स ओपनली डिक्लेअ किए हैं जो जुडिशरी की ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी की तरफ एक जबरदस्त कदम माना जा रहा है। लेकिन यह सिर्फ एक फॉर्मल एक्सरसाइज नहीं थी। जब इन डिक्लेरेशन का डिटेल में विश्लेषण किया गया तो कुछ ऐसे फैक्ट सामने आए हैं जो सचमुच में आंखें खोल देने वाले हैं।

किसी के पास पांच अलग-अलग शहरों में प्रॉपर्टीज हैं और फॉरेन इन्वेस्टमेंट्स भी तो कोई जज सिर्फ 3.5 लाख के मूवेबल एसेट के साथ अपना जीवन गुजार रहा है। कहीं किसी की टैक्स हिस्ट्री ₹91 करोड़ तक की पहुंच गई है तो कहीं सिर्फ एक Honda WRV गाड़ी और थोड़ी बहुत ज्वेलरी। यह तो सच में एक रात के अंधेरों में छुपा हुआ बॉम्ब शेल है। तो चलिए देखते हैं कि इस डाटा ने क्या कुछ रिवील किया है और कौन कितना अमीर है और किसके पास सबसे कम पैसा है। स्टे ट्यून विद दिस वीडियो टिल द एंड। सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई 2025 को अपनी वेबसाइट पर 21 जजेस के एसेट्स पब्लिक किए। टोटल 33 जजेस में से और यह सब हुआ बिल्कुल चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया संजीव खन्ना के रिटायरमेंट के ठीक पहले जो 13 मई को सुपरनोट हो रहे हैं। सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के पांचों जजेस जिनके हाथ में नए जजेस की अपॉइंटमेंट और ट्रांसफर की ताकत होती है, उन्होंने अपने एसेट्स डिस्क्लोज़ किए हैं। यानी कि सिस्टम के सबसे पावरफुल जजेस ने भी अपने फाइनेंशियल पोजीशन को जनता के सामने रख दिया है। यह इंडियन जुडिशरी के इतिहास में एक रेयर मोमेंट है। जहां इतनी सीनियर जुडिशरी ने वॉलंटरी अपने प्राइवेट फाइनेंसियल डिटेल्स को डिस्क्लोज़ किया है। सिमिलरली उन दो जजेस जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस केबी विश्वनाथन जो डायरेक्टली बाहर से सुप्रीम कोर्ट में आए थे उन्होंने भी अपने एसेट्स डिस्क्लोज़ कर दिए हैं।

इनके अलावा 12 जजेस जिन्होंने अभी तक अपना स्टेटमेंट नहीं दिया है वो हैं जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस जे के महेश्वरी, जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस एसानुद्दीन अमन उल्ला, जस्टिस मनोज मिश्रा, जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस पीके मिश्रा, जस्टिस एस सी शर्मा, जस्टिस पीबी वरले, जस्टिस एन कोटीश्वर सिंह, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस जयमला बागची। जब हमने अभी तक के 18 जजेस के डिक्लेरेशन का कंपैरेटिव एनालिसिस किया तो हमें पता चला कि सबसे ज्यादा मटेरियलिस्टिक एसेट्स जस्टिस केवी विश्वनाथन के पास हैं। इन्होंने डिक्लेअर किया है कि उनके पास सरफतगंज इंक्लेव, गुलमोहर पार्क और कोयंबतूर जैसे प्रीमियम लोकेशनेशंस पर पांच प्रॉपर्टीज हैं। इंडिया में उन्होंने $20 करोड़ से ज्यादा की म्यूच्यूल फंड्स, इक्विटी और फिक्स्ड डिपॉजिट्स में से इन्वेस्ट किए हैं। साथ ही उन्होंने आरबीआई के लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के जरिए $1 मिलियन लगभग ₹8.4 करोड़ फॉरेन फंड्स को भी ट्रांसफर किए हैं जो उनके और उनके स्पाउस के नाम पर है। जस्टिस केवी विश्वनाथन के पास Toyota, कैमरी और एलटीएस जैसी गाड़ियां भी है। ज्वेलरी के रूप में उन्होंने लगभग 1.45 कि.ग्र. सोना चांदी डिक्लेअ किया है। सबसे खास बात यह है कि उनके ऊपर कोई भी टैक्स लायबिलिटी नहीं है। उन्होंने पिछले 15 सालों में 91.47 करोड़ का इनकम टैक्स दिया है। यह सब दिखाता है कि जज बनने से पहले उन्होंने टॉप सीनियर एडवोकेट के रूप में कितनी सफलता हासिल की थी।

अब अगर हम बात करें जमीन की तो जस्टिस सूर्यकांत सबसे आगे हैं। उन्होंने पंचकूला में 13.5 एकड़ की एग्रीकल्चर लैंड डिक्लेअर की है। हिसार में 1/3 शेयर के रूप में 12 एकड़ और चंडीगढ़, गुरुग्राम और न्यू दिल्ली जैसे शहरों में प्लॉट्स और हाउसेस हैं। उनके स्पाउस के पास इकोसिटी टू न्यू चंडीगढ़ में 500 स्क्वायर यार्ड का प्लॉट भी है। समाग्रा रूप में उनके पास 8 टू 10 प्रॉपर्टीज और लगभग 17 प्लस एकड़ की लैंड होल्डिंग्स हैं। साफ है कि लैंड के मामले में यह जस्ट किसी से कम नहीं है।

जहां तक लिक्विड वेल्थ का सवाल है, मतलब वो धन जो तुरंत कैश में बदला जा सकता है, इसमें भी जस्टिस केवी विश्वनाथन सबसे आगे हैं। उन्होंने 12.09 करोड़ सेल्फ के नाम पर, 6.43 करोड़ स्पाउस के नाम पर और 1.31 करोड़ चाइल्ड के नाम पर डिक्लेअ किए हैं। साथ ही 8.4 करोड़ का फॉरेन फंड्स भी है। मतलब लगभग 28 करोड़ का लिक्विड एसेट्स इन्होंने डिक्लेअ किया है जो किसी और जज के पास नहीं है। अब अगर बात करें सबसे ज्यादा टैक्स भरने वाले जज की तो उसमें भी जस्टिस विश्वनाथन सबसे आगे हैं। उन्होंने फाइनेंसियल ईयर 2010 से 20202 के बीच ₹91.47 करोड़ टैक्स पे किया था और केवल 2023 और 24 के एक साल में उन्होंने 17.48 करोड़ टैक्स पे किया है। यह रिकॉर्ड दिखाता है कि जज बनने से पहले उनका लीगल प्रैक्टिस कितना सफल था और वह इंडिया के टॉप टैक्स पेयर्स में शामिल रहे होंगे। ज्वेलरी के मामले में जस्टिस सूर्यकांत ने अपने पास 1.2 कि.ग्र. गोल्ड, सेल्फ और डॉटर्स के नाम पर और 6 कि.ग्र. सिल्वर डिक्लेअर किया है। इतना गोल्ड और सिल्वर किसी और जज के पास नहीं है। यह ज्वेलरी मोस्टली इनहेरिटेंट और गिफ्टेड कैटेगरी में डिक्लेअर की गई है।

आपको बता दूं कि कुछ डिक्लेरेशंस में कुछ कंट्रोवर्शियल या सरप्राइजिंग चीजें भी सामने आई है। जैसे जस्टिस बी आर गवई ने अपने एचयूएफ के नाम पर 1.07 करोड़ की लायबिलिटी डिक्लेअर की है जो इन्हहेरिटेंट प्रॉपर्टी या फैमिली सेटलमेंट से जुड़ी जिम्मेदारियां दिखाती है। जस्टिस केवी विश्वनाथन का 1 मिलियन का फॉरेन ट्रांसफर बिल्कुल लीगल है। लेकिन पब्लिक परसेप्शन के लिए सेंसिटिव माना जा सकता है। जस्टिस अगस्तिन जी मशीन ने 1.12 करोड़ का होम लोन डिक्लेअ किया है। जिसमें उन्होंने जीपीएफ इनहेरिटेंट प्रॉपर्टी की सेल और फैमिली से लोन का यूज किया है।


आपको बता दूं कि जस्टिस एसवी भट्टी ने सिर्फ LIC और सेविंग्स को ही डिक्लेअ किया है और उनके पास कोई भी इन्वेस्टमेंट नहीं दिखाई दी है। जिससे सवाल उठता है कि क्या यह अंडर रिपोर्टिंग है या बस एक मॉडस लिविंग का प्रमाण? तो इस पूरे अपलोडेड डाटा को एनालाइज करने के बाद यही सामने आया है कि अगर सबसे कम अमीर जज की बात करें तो वह जस्टिस एसवी भट्टी है। उन्होंने सिर्फ 3.5 लाख के मूवेबल एसेट्स डिक्लेअर किए हैं। उनके पास चार प्रॉपर्टीज हैं जो मोस्टली बेसिक और एनस्ट्रल है। उन्होंने म्यूच्यूल फंड्स या शेयर्स में कोई इन्वेस्टमेंट नहीं किया है और उनके पास 2017 से Honda Wआरवी गाड़ी है। यह डिक्लेरेशन दिखाता है कि शायद उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी पब्लिक सर्विस में बिताई होगी। आखिर में इस एसेट डिक्लेरेशन से क्या सीख मिलती है?

यह साफ है कि जुडिशरी के अंदर भी इकोनमिक डिस्पैरिटी है। किसी के पास 50 करोड़ के एसेट्स हैं तो कोई जज सिर्फ 3 लाख के मूवेबल एसेट के साथ काम चला रहा है। जस्टिस विश्वनाथन क्लियरली सबसे वेल्थी और ग्लोबलाइज एसेट होल्डर है। जबकि जस्टिस सूर्यकांत के पास सबसे ज्यादा ट्रेडिशनल लैंड होल्डिंग्स हैं। ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक अकाउंटेबिलिटी की दिशा में यह डिक्लेरेशन सिर्फ एक स्ट्रांग स्टेप है। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि क्या जजेस के लिए भी वैसे ही एक यूनिफॉर्म एसेट डिक्लेरेशन फ्रेमवर्क होना चाहिए जैसे पॉलिटिशियंस के लिए होता है। जब हमने देखा कि कुछ डिक्लेरेशन में ट्रांसपेरेंसी हाई थी तो कुछ में काफी गैप्स भी थे। तो यह चर्चा अब और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।


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सुप्रीम कोर्ट के जजेस के एसेट डिक्लेरेशन

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 क्या आपको पता है कि सुप्रीम कोर्ट के जजेस के एसेट डिक्लेरेशन ने एक बार फिर से कितने बड़े राज खोल दिए हैं? भारतीय सुप्रीम कोर्ट की सेंक्शन स्ट्रेंथ 34 जजेस की है और अप्रैल 2025 तक 31 जजेस हैं। उनमें से 21 जजेस ने अपने एसेट्स ओपनली डिक्लेअ किए हैं जो जुडिशरी की ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी की तरफ एक जबरदस्त कदम माना जा रहा है। लेकिन यह सिर्फ एक फॉर्मल एक्सरसाइज नहीं थी। जब इन डिक्लेरेशन का डिटेल में विश्लेषण किया गया तो कुछ ऐसे फैक्ट सामने आए हैं जो सचमुच में आंखें खोल देने वाले हैं।

किसी के पास पांच अलग-अलग शहरों में प्रॉपर्टीज हैं और फॉरेन इन्वेस्टमेंट्स भी तो कोई जज सिर्फ 3.5 लाख के मूवेबल एसेट के साथ अपना जीवन गुजार रहा है। कहीं किसी की टैक्स हिस्ट्री ₹91 करोड़ तक की पहुंच गई है तो कहीं सिर्फ एक Honda WRV गाड़ी और थोड़ी बहुत ज्वेलरी। यह तो सच में एक रात के अंधेरों में छुपा हुआ बॉम्ब शेल है। तो चलिए देखते हैं कि इस डाटा ने क्या कुछ रिवील किया है और कौन कितना अमीर है और किसके पास सबसे कम पैसा है। स्टे ट्यून विद दिस वीडियो टिल द एंड। सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई 2025 को अपनी वेबसाइट पर 21 जजेस के एसेट्स पब्लिक किए। टोटल 33 जजेस में से और यह सब हुआ बिल्कुल चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया संजीव खन्ना के रिटायरमेंट के ठीक पहले जो 13 मई को सुपरनोट हो रहे हैं। सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के पांचों जजेस जिनके हाथ में नए जजेस की अपॉइंटमेंट और ट्रांसफर की ताकत होती है, उन्होंने अपने एसेट्स डिस्क्लोज़ किए हैं। यानी कि सिस्टम के सबसे पावरफुल जजेस ने भी अपने फाइनेंशियल पोजीशन को जनता के सामने रख दिया है। यह इंडियन जुडिशरी के इतिहास में एक रेयर मोमेंट है। जहां इतनी सीनियर जुडिशरी ने वॉलंटरी अपने प्राइवेट फाइनेंसियल डिटेल्स को डिस्क्लोज़ किया है। सिमिलरली उन दो जजेस जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस केबी विश्वनाथन जो डायरेक्टली बाहर से सुप्रीम कोर्ट में आए थे उन्होंने भी अपने एसेट्स डिस्क्लोज़ कर दिए हैं।

इनके अलावा 12 जजेस जिन्होंने अभी तक अपना स्टेटमेंट नहीं दिया है वो हैं जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस जे के महेश्वरी, जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस एसानुद्दीन अमन उल्ला, जस्टिस मनोज मिश्रा, जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस पीके मिश्रा, जस्टिस एस सी शर्मा, जस्टिस पीबी वरले, जस्टिस एन कोटीश्वर सिंह, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस जयमला बागची। जब हमने अभी तक के 18 जजेस के डिक्लेरेशन का कंपैरेटिव एनालिसिस किया तो हमें पता चला कि सबसे ज्यादा मटेरियलिस्टिक एसेट्स जस्टिस केवी विश्वनाथन के पास हैं। इन्होंने डिक्लेअर किया है कि उनके पास सरफतगंज इंक्लेव, गुलमोहर पार्क और कोयंबतूर जैसे प्रीमियम लोकेशनेशंस पर पांच प्रॉपर्टीज हैं। इंडिया में उन्होंने $20 करोड़ से ज्यादा की म्यूच्यूल फंड्स, इक्विटी और फिक्स्ड डिपॉजिट्स में से इन्वेस्ट किए हैं। साथ ही उन्होंने आरबीआई के लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के जरिए $1 मिलियन लगभग ₹8.4 करोड़ फॉरेन फंड्स को भी ट्रांसफर किए हैं जो उनके और उनके स्पाउस के नाम पर है। जस्टिस केवी विश्वनाथन के पास Toyota, कैमरी और एलटीएस जैसी गाड़ियां भी है। ज्वेलरी के रूप में उन्होंने लगभग 1.45 कि.ग्र. सोना चांदी डिक्लेअ किया है। सबसे खास बात यह है कि उनके ऊपर कोई भी टैक्स लायबिलिटी नहीं है। उन्होंने पिछले 15 सालों में 91.47 करोड़ का इनकम टैक्स दिया है। यह सब दिखाता है कि जज बनने से पहले उन्होंने टॉप सीनियर एडवोकेट के रूप में कितनी सफलता हासिल की थी।

अब अगर हम बात करें जमीन की तो जस्टिस सूर्यकांत सबसे आगे हैं। उन्होंने पंचकूला में 13.5 एकड़ की एग्रीकल्चर लैंड डिक्लेअर की है। हिसार में 1/3 शेयर के रूप में 12 एकड़ और चंडीगढ़, गुरुग्राम और न्यू दिल्ली जैसे शहरों में प्लॉट्स और हाउसेस हैं। उनके स्पाउस के पास इकोसिटी टू न्यू चंडीगढ़ में 500 स्क्वायर यार्ड का प्लॉट भी है। समाग्रा रूप में उनके पास 8 टू 10 प्रॉपर्टीज और लगभग 17 प्लस एकड़ की लैंड होल्डिंग्स हैं। साफ है कि लैंड के मामले में यह जस्ट किसी से कम नहीं है।

जहां तक लिक्विड वेल्थ का सवाल है, मतलब वो धन जो तुरंत कैश में बदला जा सकता है, इसमें भी जस्टिस केवी विश्वनाथन सबसे आगे हैं। उन्होंने 12.09 करोड़ सेल्फ के नाम पर, 6.43 करोड़ स्पाउस के नाम पर और 1.31 करोड़ चाइल्ड के नाम पर डिक्लेअ किए हैं। साथ ही 8.4 करोड़ का फॉरेन फंड्स भी है। मतलब लगभग 28 करोड़ का लिक्विड एसेट्स इन्होंने डिक्लेअ किया है जो किसी और जज के पास नहीं है। अब अगर बात करें सबसे ज्यादा टैक्स भरने वाले जज की तो उसमें भी जस्टिस विश्वनाथन सबसे आगे हैं। उन्होंने फाइनेंसियल ईयर 2010 से 20202 के बीच ₹91.47 करोड़ टैक्स पे किया था और केवल 2023 और 24 के एक साल में उन्होंने 17.48 करोड़ टैक्स पे किया है। यह रिकॉर्ड दिखाता है कि जज बनने से पहले उनका लीगल प्रैक्टिस कितना सफल था और वह इंडिया के टॉप टैक्स पेयर्स में शामिल रहे होंगे। ज्वेलरी के मामले में जस्टिस सूर्यकांत ने अपने पास 1.2 कि.ग्र. गोल्ड, सेल्फ और डॉटर्स के नाम पर और 6 कि.ग्र. सिल्वर डिक्लेअर किया है। इतना गोल्ड और सिल्वर किसी और जज के पास नहीं है। यह ज्वेलरी मोस्टली इनहेरिटेंट और गिफ्टेड कैटेगरी में डिक्लेअर की गई है।

आपको बता दूं कि कुछ डिक्लेरेशंस में कुछ कंट्रोवर्शियल या सरप्राइजिंग चीजें भी सामने आई है। जैसे जस्टिस बी आर गवई ने अपने एचयूएफ के नाम पर 1.07 करोड़ की लायबिलिटी डिक्लेअर की है जो इन्हहेरिटेंट प्रॉपर्टी या फैमिली सेटलमेंट से जुड़ी जिम्मेदारियां दिखाती है। जस्टिस केवी विश्वनाथन का 1 मिलियन का फॉरेन ट्रांसफर बिल्कुल लीगल है। लेकिन पब्लिक परसेप्शन के लिए सेंसिटिव माना जा सकता है। जस्टिस अगस्तिन जी मशीन ने 1.12 करोड़ का होम लोन डिक्लेअ किया है। जिसमें उन्होंने जीपीएफ इनहेरिटेंट प्रॉपर्टी की सेल और फैमिली से लोन का यूज किया है।


आपको बता दूं कि जस्टिस एसवी भट्टी ने सिर्फ LIC और सेविंग्स को ही डिक्लेअ किया है और उनके पास कोई भी इन्वेस्टमेंट नहीं दिखाई दी है। जिससे सवाल उठता है कि क्या यह अंडर रिपोर्टिंग है या बस एक मॉडस लिविंग का प्रमाण? तो इस पूरे अपलोडेड डाटा को एनालाइज करने के बाद यही सामने आया है कि अगर सबसे कम अमीर जज की बात करें तो वह जस्टिस एसवी भट्टी है। उन्होंने सिर्फ 3.5 लाख के मूवेबल एसेट्स डिक्लेअर किए हैं। उनके पास चार प्रॉपर्टीज हैं जो मोस्टली बेसिक और एनस्ट्रल है। उन्होंने म्यूच्यूल फंड्स या शेयर्स में कोई इन्वेस्टमेंट नहीं किया है और उनके पास 2017 से Honda Wआरवी गाड़ी है। यह डिक्लेरेशन दिखाता है कि शायद उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी पब्लिक सर्विस में बिताई होगी। आखिर में इस एसेट डिक्लेरेशन से क्या सीख मिलती है?

यह साफ है कि जुडिशरी के अंदर भी इकोनमिक डिस्पैरिटी है। किसी के पास 50 करोड़ के एसेट्स हैं तो कोई जज सिर्फ 3 लाख के मूवेबल एसेट के साथ काम चला रहा है। जस्टिस विश्वनाथन क्लियरली सबसे वेल्थी और ग्लोबलाइज एसेट होल्डर है। जबकि जस्टिस सूर्यकांत के पास सबसे ज्यादा ट्रेडिशनल लैंड होल्डिंग्स हैं। ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक अकाउंटेबिलिटी की दिशा में यह डिक्लेरेशन सिर्फ एक स्ट्रांग स्टेप है। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि क्या जजेस के लिए भी वैसे ही एक यूनिफॉर्म एसेट डिक्लेरेशन फ्रेमवर्क होना चाहिए जैसे पॉलिटिशियंस के लिए होता है। जब हमने देखा कि कुछ डिक्लेरेशन में ट्रांसपेरेंसी हाई थी तो कुछ में काफी गैप्स भी थे। तो यह चर्चा अब और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।


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May 07, 2025 at 09:06AM

सुप्रीम कोर्ट के जजेस के एसेट डिक्लेरेशन

 क्या आपको पता है कि सुप्रीम कोर्ट के जजेस के एसेट डिक्लेरेशन ने एक बार फिर से कितने बड़े राज खोल दिए हैं? भारतीय सुप्रीम कोर्ट की सेंक्शन स्ट्रेंथ 34 जजेस की है और अप्रैल 2025 तक 31 जजेस हैं। उनमें से 21 जजेस ने अपने एसेट्स ओपनली डिक्लेअ किए हैं जो जुडिशरी की ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी की तरफ एक जबरदस्त कदम माना जा रहा है। लेकिन यह सिर्फ एक फॉर्मल एक्सरसाइज नहीं थी। जब इन डिक्लेरेशन का डिटेल में विश्लेषण किया गया तो कुछ ऐसे फैक्ट सामने आए हैं जो सचमुच में आंखें खोल देने वाले हैं।

किसी के पास पांच अलग-अलग शहरों में प्रॉपर्टीज हैं और फॉरेन इन्वेस्टमेंट्स भी तो कोई जज सिर्फ 3.5 लाख के मूवेबल एसेट के साथ अपना जीवन गुजार रहा है। कहीं किसी की टैक्स हिस्ट्री ₹91 करोड़ तक की पहुंच गई है तो कहीं सिर्फ एक Honda WRV गाड़ी और थोड़ी बहुत ज्वेलरी। यह तो सच में एक रात के अंधेरों में छुपा हुआ बॉम्ब शेल है। तो चलिए देखते हैं कि इस डाटा ने क्या कुछ रिवील किया है और कौन कितना अमीर है और किसके पास सबसे कम पैसा है। स्टे ट्यून विद दिस वीडियो टिल द एंड। सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई 2025 को अपनी वेबसाइट पर 21 जजेस के एसेट्स पब्लिक किए। टोटल 33 जजेस में से और यह सब हुआ बिल्कुल चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया संजीव खन्ना के रिटायरमेंट के ठीक पहले जो 13 मई को सुपरनोट हो रहे हैं। सबसे ज्यादा ध्यान देने वाली बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम के पांचों जजेस जिनके हाथ में नए जजेस की अपॉइंटमेंट और ट्रांसफर की ताकत होती है, उन्होंने अपने एसेट्स डिस्क्लोज़ किए हैं। यानी कि सिस्टम के सबसे पावरफुल जजेस ने भी अपने फाइनेंशियल पोजीशन को जनता के सामने रख दिया है। यह इंडियन जुडिशरी के इतिहास में एक रेयर मोमेंट है। जहां इतनी सीनियर जुडिशरी ने वॉलंटरी अपने प्राइवेट फाइनेंसियल डिटेल्स को डिस्क्लोज़ किया है। सिमिलरली उन दो जजेस जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस केबी विश्वनाथन जो डायरेक्टली बाहर से सुप्रीम कोर्ट में आए थे उन्होंने भी अपने एसेट्स डिस्क्लोज़ कर दिए हैं।

इनके अलावा 12 जजेस जिन्होंने अभी तक अपना स्टेटमेंट नहीं दिया है वो हैं जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस जे के महेश्वरी, जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस एसानुद्दीन अमन उल्ला, जस्टिस मनोज मिश्रा, जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस पीके मिश्रा, जस्टिस एस सी शर्मा, जस्टिस पीबी वरले, जस्टिस एन कोटीश्वर सिंह, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस जयमला बागची। जब हमने अभी तक के 18 जजेस के डिक्लेरेशन का कंपैरेटिव एनालिसिस किया तो हमें पता चला कि सबसे ज्यादा मटेरियलिस्टिक एसेट्स जस्टिस केवी विश्वनाथन के पास हैं। इन्होंने डिक्लेअर किया है कि उनके पास सरफतगंज इंक्लेव, गुलमोहर पार्क और कोयंबतूर जैसे प्रीमियम लोकेशनेशंस पर पांच प्रॉपर्टीज हैं। इंडिया में उन्होंने $20 करोड़ से ज्यादा की म्यूच्यूल फंड्स, इक्विटी और फिक्स्ड डिपॉजिट्स में से इन्वेस्ट किए हैं। साथ ही उन्होंने आरबीआई के लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम के जरिए $1 मिलियन लगभग ₹8.4 करोड़ फॉरेन फंड्स को भी ट्रांसफर किए हैं जो उनके और उनके स्पाउस के नाम पर है। जस्टिस केवी विश्वनाथन के पास Toyota, कैमरी और एलटीएस जैसी गाड़ियां भी है। ज्वेलरी के रूप में उन्होंने लगभग 1.45 कि.ग्र. सोना चांदी डिक्लेअ किया है। सबसे खास बात यह है कि उनके ऊपर कोई भी टैक्स लायबिलिटी नहीं है। उन्होंने पिछले 15 सालों में 91.47 करोड़ का इनकम टैक्स दिया है। यह सब दिखाता है कि जज बनने से पहले उन्होंने टॉप सीनियर एडवोकेट के रूप में कितनी सफलता हासिल की थी।

अब अगर हम बात करें जमीन की तो जस्टिस सूर्यकांत सबसे आगे हैं। उन्होंने पंचकूला में 13.5 एकड़ की एग्रीकल्चर लैंड डिक्लेअर की है। हिसार में 1/3 शेयर के रूप में 12 एकड़ और चंडीगढ़, गुरुग्राम और न्यू दिल्ली जैसे शहरों में प्लॉट्स और हाउसेस हैं। उनके स्पाउस के पास इकोसिटी टू न्यू चंडीगढ़ में 500 स्क्वायर यार्ड का प्लॉट भी है। समाग्रा रूप में उनके पास 8 टू 10 प्रॉपर्टीज और लगभग 17 प्लस एकड़ की लैंड होल्डिंग्स हैं। साफ है कि लैंड के मामले में यह जस्ट किसी से कम नहीं है।

जहां तक लिक्विड वेल्थ का सवाल है, मतलब वो धन जो तुरंत कैश में बदला जा सकता है, इसमें भी जस्टिस केवी विश्वनाथन सबसे आगे हैं। उन्होंने 12.09 करोड़ सेल्फ के नाम पर, 6.43 करोड़ स्पाउस के नाम पर और 1.31 करोड़ चाइल्ड के नाम पर डिक्लेअ किए हैं। साथ ही 8.4 करोड़ का फॉरेन फंड्स भी है। मतलब लगभग 28 करोड़ का लिक्विड एसेट्स इन्होंने डिक्लेअ किया है जो किसी और जज के पास नहीं है। अब अगर बात करें सबसे ज्यादा टैक्स भरने वाले जज की तो उसमें भी जस्टिस विश्वनाथन सबसे आगे हैं। उन्होंने फाइनेंसियल ईयर 2010 से 20202 के बीच ₹91.47 करोड़ टैक्स पे किया था और केवल 2023 और 24 के एक साल में उन्होंने 17.48 करोड़ टैक्स पे किया है। यह रिकॉर्ड दिखाता है कि जज बनने से पहले उनका लीगल प्रैक्टिस कितना सफल था और वह इंडिया के टॉप टैक्स पेयर्स में शामिल रहे होंगे। ज्वेलरी के मामले में जस्टिस सूर्यकांत ने अपने पास 1.2 कि.ग्र. गोल्ड, सेल्फ और डॉटर्स के नाम पर और 6 कि.ग्र. सिल्वर डिक्लेअर किया है। इतना गोल्ड और सिल्वर किसी और जज के पास नहीं है। यह ज्वेलरी मोस्टली इनहेरिटेंट और गिफ्टेड कैटेगरी में डिक्लेअर की गई है।

आपको बता दूं कि कुछ डिक्लेरेशंस में कुछ कंट्रोवर्शियल या सरप्राइजिंग चीजें भी सामने आई है। जैसे जस्टिस बी आर गवई ने अपने एचयूएफ के नाम पर 1.07 करोड़ की लायबिलिटी डिक्लेअर की है जो इन्हहेरिटेंट प्रॉपर्टी या फैमिली सेटलमेंट से जुड़ी जिम्मेदारियां दिखाती है। जस्टिस केवी विश्वनाथन का 1 मिलियन का फॉरेन ट्रांसफर बिल्कुल लीगल है। लेकिन पब्लिक परसेप्शन के लिए सेंसिटिव माना जा सकता है। जस्टिस अगस्तिन जी मशीन ने 1.12 करोड़ का होम लोन डिक्लेअ किया है। जिसमें उन्होंने जीपीएफ इनहेरिटेंट प्रॉपर्टी की सेल और फैमिली से लोन का यूज किया है।


आपको बता दूं कि जस्टिस एसवी भट्टी ने सिर्फ LIC और सेविंग्स को ही डिक्लेअ किया है और उनके पास कोई भी इन्वेस्टमेंट नहीं दिखाई दी है। जिससे सवाल उठता है कि क्या यह अंडर रिपोर्टिंग है या बस एक मॉडस लिविंग का प्रमाण? तो इस पूरे अपलोडेड डाटा को एनालाइज करने के बाद यही सामने आया है कि अगर सबसे कम अमीर जज की बात करें तो वह जस्टिस एसवी भट्टी है। उन्होंने सिर्फ 3.5 लाख के मूवेबल एसेट्स डिक्लेअर किए हैं। उनके पास चार प्रॉपर्टीज हैं जो मोस्टली बेसिक और एनस्ट्रल है। उन्होंने म्यूच्यूल फंड्स या शेयर्स में कोई इन्वेस्टमेंट नहीं किया है और उनके पास 2017 से Honda Wआरवी गाड़ी है। यह डिक्लेरेशन दिखाता है कि शायद उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी पब्लिक सर्विस में बिताई होगी। आखिर में इस एसेट डिक्लेरेशन से क्या सीख मिलती है?

यह साफ है कि जुडिशरी के अंदर भी इकोनमिक डिस्पैरिटी है। किसी के पास 50 करोड़ के एसेट्स हैं तो कोई जज सिर्फ 3 लाख के मूवेबल एसेट के साथ काम चला रहा है। जस्टिस विश्वनाथन क्लियरली सबसे वेल्थी और ग्लोबलाइज एसेट होल्डर है। जबकि जस्टिस सूर्यकांत के पास सबसे ज्यादा ट्रेडिशनल लैंड होल्डिंग्स हैं। ट्रांसपेरेंसी और पब्लिक अकाउंटेबिलिटी की दिशा में यह डिक्लेरेशन सिर्फ एक स्ट्रांग स्टेप है। लेकिन अब सवाल यह उठता है कि क्या जजेस के लिए भी वैसे ही एक यूनिफॉर्म एसेट डिक्लेरेशन फ्रेमवर्क होना चाहिए जैसे पॉलिटिशियंस के लिए होता है। जब हमने देखा कि कुछ डिक्लेरेशन में ट्रांसपेरेंसी हाई थी तो कुछ में काफी गैप्स भी थे। तो यह चर्चा अब और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।

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