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Wednesday, May 14, 2025

मोदी सरकार भारत के इंटरनल खतरे के ऊपर इतना बड़ा कदम ले लेगी?

 मोदी सरकार भारत के इंटरनल खतरे के ऊपर इतना बड़ा कदम ले लेगी, इतना डिसाइसिव एक्शन ले लेगी, पूरी नीति बदल देगी ये किसी ने सोचा नहीं होगा। ये बातें सुप्रीम कोर्ट के सामने जब हियरिंग हो रही है तो पिटिशनर्स ने जो क्लेम्स करे अगर आप वो सुनेंगे तो आप समझेंगे के जिस तरह पाकिस्तान के अंदर घुस के जो किसी की कल्पना में नहीं था उनके एयर बेसिस पे स्ट्राइक किया। आप सोचिए पाकिस्तान जो सोचता था उसके पास इन ब्लैकमेल है। जिसको प्रधानमंत्री ने कल कहा कोई ब्लैकमेल नहीं चलेगा। अगर तुम्हें लगता है तुम भारत पे हमला करोगे तो घर में घुस के मारेंगे। पर हमारे घर के अंदर जो घुस हैं उनके ऊपर बहुत लोगों को प्रॉब्लम थी। बहुत लोग कह चुके हैं मोदी सरकारजो स्टेप्स लेने हैं वो कड़क स्टेप्स नहीं लिए जा रहे हैं या नहीं ले पा रहे हैं क्योंकि कई बारी ब्यूरोक्रेटिक डिलेस है कुछ लोग जाते हैं कोर्ट चले जाते हैं वहां से स्टे ऑर्डर ले आते हैं तो बहुत सारे रीज़ंस है अब ये रीज़ंस क्या है क्यों है किसलिए है ये एक लंबी डिबेट है पर जो हुआ और ये पिटिशनर्स सुप्रीम कोर्ट में कह रहे हैं पिटिशनर्स दावा कर रहे हैं वो आप जानिए है। इसकी हेडलाइन क्या है वो शायद कल्पना से परे है। और सुप्रीम कोर्ट की हियरिंग में क्या हुआ? जो ऑर्डर हुआ वो क्रूशियल है। क्योंकि जो क्लेम है जो बातें सामने आ रही है उसकी एक लाइन बता देता हूं। क्लेम किया जा रहा है कि रोहिंग्या रिफ्यूजीस को भारत सरकार ने उठाकर समुंदर में फेंक दिया। अब सोचिए देखिए इसके पीछे क्या है? क्या आर्गुममेंट है? क्या गवर्नमेंट का स्टैंड है? क्या सुप्रीम कोर्ट का आर्डर है? ये समझना जरूरी है। क्योंकि सुन के ये बात चौंकाने वाली लगती है।पर एक बात तो है क्या इललीगल्स का भारत में रहने का हक है? इस पर सुप्रीम कोर्ट का क्या व्यू है? यह भी जानिए। क्या भारत सरकार ने एक्शन किया? कैसे शुरू हुआ? यह भी जानिए।


दो रोहिंगियों ने जनहित याचिका दायर करी। उसमें उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस के अधिकारी बायोमेट्रिक डाटा इकट्ठा करने के बहाने में उनको अरेस्ट करते हैं रोहिंग्यास को। उनको वैन में डालते हैं और 24 घंटे तक अलग-अलग पुलिस स्टेशन में रखते हैं। उसके बाद उनको ले जाते हैं डिटेंशन सेंटर में।ये बहुत जगह से खबर आ रही है कि पुलिस वेरिफिकेशन ड्राइव रन कर रही है। रोहिंग्या उसको पकड़ रही है। पुलिस बहुत अकलमंदी से काम करती है। वो कुछ बहाने से ही पकड़ती है कि सड़क पे ना उस समय हल्ला ना हो जाए।किसी को अरेस्ट करने जाए जिसके सपोर्ट में लोग वायलेंट हो सकते हैं। जो वायलेंस करते हैं वो क्रिमिनल्स है पर हो तो सकते हैं। तो पुलिस बड़ी चतुराई से अपना काम करती है। ये क्लेम किया जा रहा है कि उनको ऐसे पकड़ के ले आते हैं।

वकील कौन पेश हुए ये भी जान लीजिए क्योंकि ये दावा जब हो रहा है बहस भी हो रही है।गुजालविस और प्रशांत भूषण।उन्होंने बोला महिलाएं थी बच्चे थे और इनको डिपोर्ट किया गया। डिपोर्ट के अंदर जो वो कह रहे हैं शॉकिंग एलगेशन उनके अनुसार है। उनका आरोप है ये क्या है? पढ़िए के परिवारों को यह देखकर बड़ा सरप्राइज हुआ के बंदियों को रिहा नहीं किया गया। उसके बजाय उनको हवाई अड्डों पर ले गए और अंडमान निकोबार पोर्ट ब्लेयर ले जाया गया। बाद में जबरन नेवी ने जहाजों पर चढ़ा दिया और हाथ बांध दिए। आंखों पर पट्टी बांध दी। फिर वो कहते हैं इसमें तो 15 16 साल के बच्चे थे, बुजुर्ग थे, महिलाएं थी तो चुपचाप ले गए।

अंडमान निकोबार आइलैंड्स पे हाथ बांधे, पट्टी बांधी। यूएस यही करता है। हाथों में चैन बांध के उठा के फें था। एक केस जो सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। यहां भी चल रहा है। क्योंकि लोग पूछते हैं सुप्रीम कोर्ट क्यों? हर देश में जहां भी डेमोक्रेसी है केस सुप्रीम कोर्ट जाता है। सुप्रीम कोर्ट फैसला क्या करता है?

तो सुप्रीम कोर्ट का फैसला जो मैं अंत में बताने जा रहा हूं वो इंपॉर्टेंट है कि क्या होता है। तो ये क्लेम किया गया हाथ पैर बांध दिए उठा के फेंक दिया। यूएस में भी वहां पर भी बहुत बड़ी-बड़ी लॉबीज है। वो हर कोर्ट जाती है। सुप्रीम कोर्ट तक जाती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने तो वहां पर यह भी कह दिया कि वापस लेके आ जाओ जिसको भेजा है। वापस लेके आ जाओ एक व्यक्ति को जिसको भेजा है। पर भारत के सुप्रीम कोर्ट की बात करते हैं। भारत के कानून की बात करते हैं। तो ये जब डिपोर्ट किया गया तो उसके बाद कहते हैं कि इनसे सवाल पूछा वहां पे कि आपको इंडोनेशिया जाना है या म्यांमार जाना है। सबने कहा हमें इंडोनेशिया जाना है। म्यांमार नहीं जाना है। जाना तो पड़ ही रहा था। फिर कहते हैं यहां भी उनका कहना अथॉरिटीज ने धोखा दिया। धोखा नहीं होता। अथॉरिटीज को अपना काम करना है। स्मूथली जैसे हो करना है। कार्य पूरा होना चाहिए। स्मूथली करना है। तो वो उनको डिसीव की जगह उनको ये कहते हैं इंटरनेशनल पानी में छोड़ दिया। यह कहते हुए कि तुम्हें इंडोनेशिया से कोई आएगा इंडोनेशिया ले जाएगा पर वो खाली पानी में स्टैंडेड थे कोई बोट होगी लाइक बोट होगी जो भी होगा छोड़ दिया तभी कह रहे हैं हमें समुंदर में फेंक दिया एकदम तट के सामने आइलैंड के सामने छोड़ दिया फिर वो कहते हैं उन बेचारों को इनका एक कहना फिर स्विमिंग करना पड़ा और जब वो स्विमिंग करके पहुंचे तो पता चला वो म्यांमार में लैंड कर गए वो बोलते हैं सारी फैमिली सेपरेट हो कितना देखो इमोशनल जो आर्गुममेंट किया कोर्ट में वो बहुत जानना आपके लिए जरूरी है।

सोलेस्टर जनरल ने साफ किया कि पहले भी केसेस चल चुके हैं इस इशू के ऊपर और ये जो यहां पर रहना चाह रहे हैं वो इस तरह नहीं रह सकते। और उनको भेजा जाएगा कानून का पालन करते हुए भेजा जाएगा। उनको यहां रखा नहीं जाएगा किसी भी हालत। बार-बार आर्गुममेंट हो रहा है बार-बार। अब इसमें क्या्ट है कि सुप्रीम कोर्ट क्या डिसाइड करता है? सुप्रीम कोर्ट रोकता है या नहीं रोकता है। फाइनल केस डिसाइड होना अलग होता है। स्टे अलग होता है। उस पर आने से पहले कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला से पहले आप सोचिए ये मांग क्या रहे थे? जो ये रोहिंग्याज है ये मांग क्या रहे? तीन मैं सुनाने जा रहा हूं प्रेयर। आप देखिए हिम्मत चाहिए ये मांगने के लिए। स्पेशली इनमें से एक प्रेयर। पहले देखिए पहले कहते हैं कि जो ये फोर्स और क्लैंडस्टाइन डिपटेशन है यह अनक्स्टिट्यूशनल है और भारत सरकार स्टेप्स ले के रोहिंग्यास को फ्लाई करके वापस दिल्ली लेके आए और उनको रिलीज करे बताओ जी पाकिस्तान से अपन जंग लड़ रहे हैं। इललीगल लोगों को टैक्स पेयर के पैसे पे भारत जहाज भेजे और लेके आए। यह पहला प्रेयर है। देखिए ये हमारे सिस्टम के अंदर क्या क्या एक लोगों में कॉन्फिडेंस आ जाता है इललीगल्स के अंदर कि वो ऐसी चीजें डिमांड कर सकते हैं। प्रे कर सकते हैं। डिमांड तो नहीं है। प्रे कर सकते दूसरा कि भारत कोई अरेस्ट ना करे या रोहिंग्या जिसके पास यूएन एक्सआर कार्ड है उसको डिग्निटी से ट्रीट करे। उसको ये करे तीसरा प्रेयर 50 लाख हर रोहिंग्या को कंपनसेशन दो। 50 लाख हर रोहिंग्या को दिया जाए। जिसको डिपोर्ट किया गया।हमारे फौजी मरते हैं। हमारे जवान जाते हैं बॉर्डर पे।हमारा एक एक व्यक्ति काम करता है। टैक्स भरता है तुम्हारे लिए। तुम्हारे हेल्थ के लिए तुम्हारे वेलफेयर के लिए। तुम्हें 50 लाख भी देने चाहिए। कोर्ट क्या डिसाइड करता है? वो बाद की बात है। आपकी प्रेयर्स देखिए। क्या आप कोर्ट से मांगना चाह रहे हैं? लंबी बहस हुई। इस पे सोलिस्टर जनरल ने कहा कि आप जो कहे जा रहे हैं बार-बार भारत पार्टी ही नहीं है। भारत ने वो यूएसीआर कर रहे हो भारत ने वो रेफ्यूजी कन्वेंशन साइन ही नहीं किया। भारत उसका पार्टी ही नहीं है। भारत उसको मानता ही नहीं है। और जो ये यूएन यूएन साइड कर रहे हैं चले जाओ ना अमेरिका। देखते हो कितने लेता है अमेरिका रोहिंग्या चले जाओ। और वैसे तो आप बोलते हो भारत सेफ नहीं है। इतने सारे और देश है पाकिस्तान ही चले जाओ बांग्लादेश। सॉलिस्टर जनरल ने कहा कि भारत पार्टी ही नहीं है। थ्री जज बेंच सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी रिलीफ नहीं दिया था और कहा था कि राइट टू रिजाइड इन इंडिया इज ओनली फॉर इंडियन सिटीजंस, नॉट फॉर इंडियंस। अब कोर्ट ने फैसला क्या किया? कोर्ट ने फैसला यह किया कि कोई रिलीफ नहीं दिया। कोर्ट ने नहीं दिया सिर्फ इंडियंस को रहने का हक रोहिंग्यास को नहीं है। रोहिंग्यास को फॉरेनर्स माना जाएगा अंडर द फॉरेनर्स एक्ट। जिससे उनको लायबल फॉर डिपोटेशन किया जाता है। सरकार ने आर्ग्यू किया है रोहिंग्या सिक्योरिटी थ्रेट है और पांच डिपोटेशन का हवाला दिया आसाम जम्मू कश्मीर से साफ कर दिया कि यूएचसीआर जो यूनाइटेड नेशंस का है उस पे हवाला जो दे रहे हो वो स्टेटस रिफ्यूजीस नहीं क्लेम कर सकते हम उसकी सिग्नेटरी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट डिड नॉट गव एनी इंटरिम रिलीफ। कोई रिलीफ नहीं मिला। इतनी भावुक, इतनी बड़ी बातें, इतनी इमोशनल बातें करी कि हमें उठा के पानी में फेंक दिया गया है। हमारे बच्चे भी हैं, बूढ़े भी हैं। सब जो स्टोरीज करी कोर्ट ने सिंपली डेट लगा दी। वो भी जुलाई की। 31 जुलाई डेट होगी। इसके अंदर 31 जुलाई की डेट लगा दी है। भारत सरकार पे कुछ नहीं उन्होंने पाया कि कुछ भी ऐसा रीज़न है कि भारत सरकार पे स्टे लगाया जाए। अच्छा एक बिकॉज़ इतनी बड़ी अगर स्टेप्स हो रहे हैं। एक और बात जो एक्शन हुआ है ना ये पाकिस्तान के ऊपर ये मुझे लगता है भारत के जो इंटरनल थ्रेट्स है ना उस पे भी सरकार अब टर्बो चार्ज हो गई है। गुजरात हाईकोर्ट ने रिजेक्ट कर दी है कि डिमोलिशन हो रहे थे बांग्लादेशी इमीग्रेंट्स के घर अहमदाबाद में। गए होंगे वहां पे गुजरात हाईकोर्ट गुजरात हाईकोर्ट ने रिजेक्ट कर दी। प्ली हो रहे हैं वहां पे गुजरात में। तो ये नई एक नीति कि पाकिस्तान इतना बड़ा खतरा है। भारत के इंटरनल खतरे जो है जो इललीगल्स भारत में है उसमें जैसे पाकिस्तान पे एक नई मोदी नीति आई है लग रहा है बहुत लोगों ने कहा है कि इंटरनल थ्रेट्स नेशनल सिक्योरिटी इकोनमिक हेल्थ क्राइसिस क्लियर कर दे अगर हेल्थ केयर में कि आपको ना मिल पाए हॉस्पिटल वो बैठे हो 50-50 लाख की वो क्लेम्स मांग रहे हैं ने रिजेक्ट कर दी। प्ली हो रहे हैं वहां पे गुजरात में। तो ये नई एक नीति कि भाई पाकिस्तान इतना बड़ा खतरा है।आपको ना पैसे मिल रहे हो उनको मिल रहे में हो आपको ना राशन कार्ड मिल रहा हो, अनाज मिल रहा हो, उनको मिल रहा हो, मल्टीपल लेवल थिएट है। मैं नेशनल सिक्योरिटी तो फुल वायलेंस को अलग बात कर रहा हूं। मैं ए्प्लॉयमेंट करेक्ट है। तो उस पे भी भारत सरकार सीरियस हो गई है। सुप्रीम कोर्ट में जाके ऐसी बातें कर रहे हैं पिटिशन क्लेम कि उठा के उनको समुंदर में फेंका जा रहा है

Tuesday, May 13, 2025

भारत का ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है

भारत का ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है
भारत का ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है
भारत का ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है
भारत का ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है
Rescue workers clear rubble with an excavator at the site of the missile attack by Indian armed forces, in Muridke
 
पाकिस्तान पर तगड़ी तबाही करने के बाद फिलहाल भारत ने हमला रोक दिया है। लेकिन अभी भारत का ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है। बल्कि जारी है। पाकिस्तान के छह एयरबेस तबाह करने के बाद जब भारत के अगले निशाने पर पाकिस्तान के परमाणु भंडार थे तब पाकिस्तान भारत से युद्ध रोकने के लिए गिड़गिड़ाने लगा था। लेकिन तभी कुछ ऐसा होता है कि अमेरिका जो पहले यह कह रहा था कि इस युद्ध से उसका कोई लेना देना नहीं। अचानक आकर इस युद्ध में सीज फायर के लिए कहता है जो एक चौंकाने वाली बात थी। अब परत दर परत इस मामले में खुलासे हो रहे हैं और अब सीज फायर को लेकर एक ऐसा बड़ा खुलासा हुआ है जिसने दुनिया को हिला कर रख दिया है। क्योंकि भारत के पाकिस्तान पर प्रहार से सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं हिला हुआ था बल्कि अमेरिका भी संकट में था। क्योंकि भारत कुछ ऐसा करने जा रहा था जो पाकिस्तान, चीन और अमेरिका को भी दहशत में ला रहा था। एक ऐसा तूफान जिसने वाशिंगटन से लेकर बीजिंग तक की नींदें उड़ा दी थी। अब सवाल है कि पाकिस्तान के छह एयरबेस तो राख करने के बाद क्या था? भारत का वो सातवां टारगेट जिसके बाद दुनिया हिल उठी थी। ट्रंप ने मिलाया भारत को। फोन भारत ने सके F16 के साथ। भारत की आकाश मिसाइल ने ऐसा क्या किया जिससे बर्बाद हो रहा था अमेरिका। मच गई पेंटागन में खलबली। S400 और ब्रह्मोस से पहले ही खौफ में था अमेरिका। फिर भारत के आकाश मिसाइल सिस्टम ने ऐसा क्या किया जो भारत की टेक्नोलॉजी को दिखा रही थी? क्या पाकिस्तान के साथ में भारत के बनाए हथियार पड़ रहे थे? अमेरिकी हथियारों पर भारी? क्या भारत की तकनीक को सामने आने से जबरदस्ती रोक रहे ट्रंप? क्या भारत का बढ़ता हथियार उद्योग अमेरिका और चीन के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है? पाक के साथ जंग बढ़ती तो दुनिया खरीदने भारत दौड़ती। क्या पाकिस्तान के नूरखान एयरबेस पर हुई स्ट्राइक सिर्फ एक हमला था या पाकिस्तान के न्यूक्लियर कमांड को सीधी चेतावनी? इन सवालों के जवाब इतने सीधे नहीं है।


यह एक ऐसा चक्रव्यूह है जिसमें कई खिलाड़ी अपने-अपने मोहरे चल रहे हैं। लेकिन आज इस चक्रव्यूह को भेद कर सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश करेंगे।ट्रंप का कूदना पर्दे के पीछे का खेल क्या है? तो सबसे पहले बात करते हैं डोनाल्ड ट्रंप की। अचानक से शांतिदूत बनने का यह शौक क्यों जागा? वजह कई हैं और एक से बढ़कर एक चौंकाने वाली। पहली वजह है अमेरिकी हथियारों की सरेआम हुई फजीहत। याद है ना? कैसे पाकिस्तान को दिए F-16 फाइटर जेट्स और दूसरे अमेरिकी हथियार भारतीय कार्यवाही में कबाड़ साबित हुए। यह अमेरिका के लिए सिर्फ एक झटका नहीं बल्कि उसकी ग्लोबल इमेज पर करारा तमाचा था। उनका F35 जिसे कुछ एक्सपर्ट्स पहले ही कबाड़ बता चुके हैं। उसकी डील कई देशों ने रोक दी। अब इस डैमेज को कंट्रोल तो करना ही था। तो ट्रंप कूद पड़े मैदान में क्रेडिट लेने। दूसरी बड़ी वजह है भारत और रूस की दोस्ती खासकर S400 और ब्राह्मोस मिसाइल की जोड़ी। इस जोड़ी ने जो कहर बरपाया उसने सिर्फ ट्रंप की राजनीति नहीं हिलाई बल्कि वाशिंगटन की हथियार मंडी में भूचाल ला दिया। अमेरिका कब से रूस के हथियारों पर रोक लगाने के लिए भारत पर दबाव बना रहा था। लेकिन भारत ने तो अपने दम पर ऐसा खेल कर दिया कि दुनिया देखती रह गई। यह कामयाबी अमेरिका को कैसे हजम होती? इसलिए ट्रंप को बीच में आना पड़ा ताकि कहानी को थोड़ा अपने फेवर में मोड़ा जा सके।

तीसरा पॉइंट भी समझिए। यूक्रेन से लेकर गाजा तक ट्रंप ने जहां-जहां अपनी चौधराहट दिखाने की कोशिश की वहांवहां उनकी हवा निकल गई। अब जब कश्मीर का मुद्दा फिर से ग्लोबल हेडलाइन बना तो ट्रंप को लगा कि यही मौका है अपनी इमेज चमकाने का। लेकिन भारत को यहां अमेरिका से बहुत सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि अमेरिका की दोस्ती और दुश्मनी दोनों का भरोसा नहीं किया जा सकता। अमेरिकन डीएनए में ही धंधा है। चाहे शांति हो या युद्ध। नोट छापने से मतलब ट्रंप ने अपने बयान में कहा भी कि सीज फायर के बदले भारत पाक से धंधा बढ़ाएंगे। वाह क्या सीन है। और हां, ट्रेड वॉर का खेल कौन भूल सकता है? चीन के सामने ट्रंप की अकड़ ढीली पड़ गई थी। स्विट्जरलैंड में चीन के आगे कैसे कंधे झुकाए घूम रहे थे? सबने देखा। उन्हें पता है कि अगर भारत किसी बड़े संघर्ष में उलझता है तो इसका असर सिर्फ भारत पर नहीं बल्कि पूरे यूरोप और अमेरिका पर भी पड़ेगा। इकोनॉमी की जो वाट लगेगी उसका अंदाजा शायद उन्हें है। इसीलिए अपनी साख बचाने के लिए भी ट्रंप यह शांति का राग अलाप रहे हैं। अब आते हैं उस असली चीज पर जिसने अमेरिका और चीन जैसे देशों की नींद उड़ा रखी है और वह है भारत का अपना देसी हथियार उद्योग। इस पूरे घटनाक्रम में अगर किसी का डंका बजा है तो वह है भारत के अपने बनाए हथियार। हमारे आकाश मिसाइल डिफेंस सिस्टम, क्यूआर सैम सिस्टम, बराकेट मिसाइल डिफेंस सिस्टम, एंटी ड्रोन सिस्टम, बीएएमडी मिसाइल डिफेंस सिस्टम, पिनाका मल्टीबैरल रॉकेट लांचर सिस्टम इन सब ने जो कमाल दिखाया है, वह दुनिया की नजरों में आ चुका है। भारत की आर्टिलरी, इसरो के ट्रैकिंग इक्विपमेंट और डीआरडीओ के बनाए दूसरे वेपंस ने साबित कर दिया कि भारत अब किसी पर निर्भर नहीं है और ब्राह्मोस मिसाइल। इस मिसाइल ने तो पाकिस्तान में ऐसा हलका मचाया कि दुश्मन के होश फाखता हो गए। भारत का हथियार बाजार इस वक्त ₹23,000 करोड़ का एक्सपोर्ट कर रहा है और यह तो बस शुरुआत है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कुछ ही सालों में यह आंकड़ा कई लाख करोड़ को पार कर जाएगा। सोचिए यह अमेरिका और चीन के लिए किसी सदमे से कम है क्या? उनका मार्केट जो हिलने लगा है, यह सिर्फ हथियारों की बात नहीं है। यह भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और तकनीकी कौशल की कहानी है। यह कहानी है एक नए भारत की जो अब दुनिया से आंख मिलाकर बात करता है अपने दम पर और यही बात कुछ देशों को हजम नहीं हो रही। अमेरिकी हथियारों का भारत बजा रहा था बैंड। भारत के हथियार पड़ रहे थे भारी। अब जरा उस पहलू पर भी गौर कीजिए जिसने अमेरिका को सबसे ज्यादा परेशान किया है। इस पूरे टकराव में एक बात शीशे की तरह साफ हो गई।

चले तो सिर्फ भारत के अपने हथियार, रूस के साथ मिलकर बनाए हथियार या फिर इजराइल और फ्रांस के हथियार। बाकी सबका क्या हुआ? अमेरिका की बड़ी-बड़ी मिसाइलें, उसके फाइटर जेट्स सब के सब या तो नाकाम रहे या फिर उनकी हवा निकल गई। चीन की तो पूरी तरह से भद पिट गई। उनका एचQ9 मिसाइल डिफेंस सिस्टम जिसे वह अपनी रीड की हड्डी बताते थे, उसे भारत और इजराइल के ड्रोंस ने खिलौने की तरह उड़ा दिया। वह उन्हें रोक तक नहीं पाया। चीन की सबसे घातक कही जाने वाली पीएल-15 मिसाइल का क्या हश्र हुआ। उसे ना सिर्फ भारत के अकैश मिसाइल सिस्टम ने हवा में ही गिरा दिया बल्कि वो मिसाइल जमीन पर बिल्कुल सही सलामत हालत में गिरी। और अब वह डीआरडीओ की लैब में है। सोचिए भारत अब इसकी रिवर्स इंजीनियरिंग करके चीन की पूरी मिसाइल टेक्नोलॉजी की परतें उधेड़ कर रख देगा। यह चीन के लिए कितना बड़ा झटका है इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं। रातोंरात उनकी टेक्नोलॉजी पुरानी हो गई। यही नहीं ईरान की न्यूक्लियर कैपेबल फाह 1और फाह 2 मिसाइलें जिन्हें बहुत खतरनाक बताया जा रहा था उन्हें भी हमारे आकाश सिस्टम ने पलक झपकते ही राख में मिला दिया। तुर्की के तथाकथित घातक ड्रोंस तो ऐसे गिरे जैसे कागज के खिलौने हो। दूसरी तरफ भारत के अपने ड्रोंस ने पाकिस्तान के अंदर तक घुसकर सटीक निशाने लगाए। तो क्या यह सब देखकर आपको नहीं लगता कि ट्रंप का अचानक शांतिदूत बनना सिर्फ अपनी और अपने मित्र देशों की इसी बेइज्जती पर पर्दा डालने की कोशिश है ताकि वो इसका क्रेडिट लेकर दुनिया का ध्यान इन नाकामियों से हटा सकें। यह एक बहुत बड़ा फेस सेविंग एक्सरसाइज हो सकता है।

पाकिस्तान की हालत पतली। नूर खान एयरबेस का सच। इस 2 रात भारत ने पाकिस्तान को ऐसी चोट पहुंचाई है जिसका दर्द उसे लंबे समय तक महसूस होगा। खबरें तो यहां तक हैं कि भारत पाकिस्तान के न्यूक्लियर कमांड को तबाह करने के बहुत करीब पहुंच गया था। पाकिस्तान के नूरखान एयरबेस पर जो भारतीय मिसाइलों ने तबाही मचाई, उससे इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक हड़कंप मच गया। कहते हैं कि शहबाज शरीफ इतने कांप गए थे कि उन्होंने तुरंत अमेरिका को फोन घुमाया। क्यों? क्योंकि नूर खान एयरबेस पर भारतीय मिसाइलों का हमला पाकिस्तान के लिए एक भयानक सपने जैसा था। उनका एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह से फेल हो गया था। वो भारतीय मिसाइलों को इंटरसेप्ट ही नहीं कर पा रहे थे। और यह तो तब था जब भारत ने अपने काफी कम तबाही मचाने वाले हथियारों का इस्तेमाल किया था। पाकिस्तान को डर सताने लगा था कि भारत अगले कुछ ही घंटों में उसके तमाम सैन्य ठिकानों और हथियार भंडारों को नेस्तनाबूद कर देगा। नूर खान एयरबेस कोई मामूली जगह नहीं है। यह पाकिस्तानी एयरफोर्स का सबसे संवेदनशील एयरबेस है और भारत ने वहां डीप स्ट्राइक की थी। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स ने भी माना कि पाकिस्तानी एयर डिफेंस और रडार सिस्टम भारतीय हमलों के सामने बेबस नजर आए। सबसे बड़ी बात नूर खान एयरबेस से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर पाकिस्तान का न्यूक्लियर कमांड ऑफिस का हेड क्वार्टर है स्ट्रेटेजिक प्लांस डिवीजन। यहीं से पाकिस्तान के लगभग 170 परमाणु हथियारों की देखरेख और कंट्रोल होता है। नूर खान पर हुए हमले को पाकिस्तान ने और यहां तक कि कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने भी पाकिस्तान के परमाणु कमांड पर हमले की अघोषित चेतावनी के तौर पर देखा। उन्हें लगा कि भारत का अगला निशाना यही एसपीडी हेडक्वार्टर हो सकता है। यह डर इतना वास्तविक था कि पाकिस्तान के हाथ-पांव फूल गए थे।

इस पूरी कहानी का सार क्या है? डॉनल्ड ट्रंप की मध्यस्थता की पेशकश, अमेरिकी हथियारों की नाकामी, चीनी टेक्नोलॉजी का पर्दाफाश और सबसे ऊपर भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का धमाकेदार प्रदर्शन। यह सब मिलकर एक नई तस्वीर बना रहे हैं। यह तस्वीर है एक ऐसे भारत की जो अब किसी के रहमोकरम पर नहीं है। एक ऐसा भारत जो अपनी सुरक्षा खुद करना जानता है और दुनिया को अपनी ताकत का एहसास कराना भी। अमेरिका और उसके साथी देश शायद इसी बात से घबराए हुए हैं। उन्हें डर है कि भारत का बढ़ता कद कहीं उनके ग्लोबल दबदबे को चुनौती ना दे दे। ट्रंप का खेल तो बस एक बहाना है। असली मकसद तो भारत के बढ़ते प्रभाव को किसी तरह रोकना या कम करना हो सकता है। यह लड़ाई सिर्फ हथियारों की नहीं बल्कि आत्मसम्मान और वैश्विक प्रतिष्ठा की भी है और इस लड़ाई में भारत ने साबित कर दिया है कि वह किसी से कम नहीं। कुछ सवाल बनते हैं कि तो क्या भारत अब वाकई दुनिया की नई महाशक्ति बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। क्या अमेरिका और चीन मिलकर इस विजय रथ को रोकने के लिए कोई नई और भी खतरनाक साजिश रचेंगे। आने वाले वक्त में भारत के स्वदेशी हथियार दुनिया के हथियार बाजार में और क्या-क्या हलका मचाने वाले हैं? और इस बदलते वैश्विक समीकरण का आप पर और हम पर क्या असर पड़ेगा? इन सभी सवालों के जवाब भारत ढूंढेंगा


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May 13, 2025 at 08:29AM
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भारत का ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है

भारत का ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है
भारत का ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है
भारत का ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है
Rescue workers clear rubble with an excavator at the site of the missile attack by Indian armed forces, in Muridke
 
पाकिस्तान पर तगड़ी तबाही करने के बाद फिलहाल भारत ने हमला रोक दिया है। लेकिन अभी भारत का ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है। बल्कि जारी है। पाकिस्तान के छह एयरबेस तबाह करने के बाद जब भारत के अगले निशाने पर पाकिस्तान के परमाणु भंडार थे तब पाकिस्तान भारत से युद्ध रोकने के लिए गिड़गिड़ाने लगा था। लेकिन तभी कुछ ऐसा होता है कि अमेरिका जो पहले यह कह रहा था कि इस युद्ध से उसका कोई लेना देना नहीं। अचानक आकर इस युद्ध में सीज फायर के लिए कहता है जो एक चौंकाने वाली बात थी। अब परत दर परत इस मामले में खुलासे हो रहे हैं और अब सीज फायर को लेकर एक ऐसा बड़ा खुलासा हुआ है जिसने दुनिया को हिला कर रख दिया है। क्योंकि भारत के पाकिस्तान पर प्रहार से सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं हिला हुआ था बल्कि अमेरिका भी संकट में था। क्योंकि भारत कुछ ऐसा करने जा रहा था जो पाकिस्तान, चीन और अमेरिका को भी दहशत में ला रहा था। एक ऐसा तूफान जिसने वाशिंगटन से लेकर बीजिंग तक की नींदें उड़ा दी थी। अब सवाल है कि पाकिस्तान के छह एयरबेस तो राख करने के बाद क्या था? भारत का वो सातवां टारगेट जिसके बाद दुनिया हिल उठी थी। ट्रंप ने मिलाया भारत को। फोन भारत ने सके F16 के साथ। भारत की आकाश मिसाइल ने ऐसा क्या किया जिससे बर्बाद हो रहा था अमेरिका। मच गई पेंटागन में खलबली। S400 और ब्रह्मोस से पहले ही खौफ में था अमेरिका। फिर भारत के आकाश मिसाइल सिस्टम ने ऐसा क्या किया जो भारत की टेक्नोलॉजी को दिखा रही थी? क्या पाकिस्तान के साथ में भारत के बनाए हथियार पड़ रहे थे? अमेरिकी हथियारों पर भारी? क्या भारत की तकनीक को सामने आने से जबरदस्ती रोक रहे ट्रंप? क्या भारत का बढ़ता हथियार उद्योग अमेरिका और चीन के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है? पाक के साथ जंग बढ़ती तो दुनिया खरीदने भारत दौड़ती। क्या पाकिस्तान के नूरखान एयरबेस पर हुई स्ट्राइक सिर्फ एक हमला था या पाकिस्तान के न्यूक्लियर कमांड को सीधी चेतावनी? इन सवालों के जवाब इतने सीधे नहीं है।


यह एक ऐसा चक्रव्यूह है जिसमें कई खिलाड़ी अपने-अपने मोहरे चल रहे हैं। लेकिन आज इस चक्रव्यूह को भेद कर सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश करेंगे।ट्रंप का कूदना पर्दे के पीछे का खेल क्या है? तो सबसे पहले बात करते हैं डोनाल्ड ट्रंप की। अचानक से शांतिदूत बनने का यह शौक क्यों जागा? वजह कई हैं और एक से बढ़कर एक चौंकाने वाली। पहली वजह है अमेरिकी हथियारों की सरेआम हुई फजीहत। याद है ना? कैसे पाकिस्तान को दिए F-16 फाइटर जेट्स और दूसरे अमेरिकी हथियार भारतीय कार्यवाही में कबाड़ साबित हुए। यह अमेरिका के लिए सिर्फ एक झटका नहीं बल्कि उसकी ग्लोबल इमेज पर करारा तमाचा था। उनका F35 जिसे कुछ एक्सपर्ट्स पहले ही कबाड़ बता चुके हैं। उसकी डील कई देशों ने रोक दी। अब इस डैमेज को कंट्रोल तो करना ही था। तो ट्रंप कूद पड़े मैदान में क्रेडिट लेने। दूसरी बड़ी वजह है भारत और रूस की दोस्ती खासकर S400 और ब्राह्मोस मिसाइल की जोड़ी। इस जोड़ी ने जो कहर बरपाया उसने सिर्फ ट्रंप की राजनीति नहीं हिलाई बल्कि वाशिंगटन की हथियार मंडी में भूचाल ला दिया। अमेरिका कब से रूस के हथियारों पर रोक लगाने के लिए भारत पर दबाव बना रहा था। लेकिन भारत ने तो अपने दम पर ऐसा खेल कर दिया कि दुनिया देखती रह गई। यह कामयाबी अमेरिका को कैसे हजम होती? इसलिए ट्रंप को बीच में आना पड़ा ताकि कहानी को थोड़ा अपने फेवर में मोड़ा जा सके।

तीसरा पॉइंट भी समझिए। यूक्रेन से लेकर गाजा तक ट्रंप ने जहां-जहां अपनी चौधराहट दिखाने की कोशिश की वहांवहां उनकी हवा निकल गई। अब जब कश्मीर का मुद्दा फिर से ग्लोबल हेडलाइन बना तो ट्रंप को लगा कि यही मौका है अपनी इमेज चमकाने का। लेकिन भारत को यहां अमेरिका से बहुत सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि अमेरिका की दोस्ती और दुश्मनी दोनों का भरोसा नहीं किया जा सकता। अमेरिकन डीएनए में ही धंधा है। चाहे शांति हो या युद्ध। नोट छापने से मतलब ट्रंप ने अपने बयान में कहा भी कि सीज फायर के बदले भारत पाक से धंधा बढ़ाएंगे। वाह क्या सीन है। और हां, ट्रेड वॉर का खेल कौन भूल सकता है? चीन के सामने ट्रंप की अकड़ ढीली पड़ गई थी। स्विट्जरलैंड में चीन के आगे कैसे कंधे झुकाए घूम रहे थे? सबने देखा। उन्हें पता है कि अगर भारत किसी बड़े संघर्ष में उलझता है तो इसका असर सिर्फ भारत पर नहीं बल्कि पूरे यूरोप और अमेरिका पर भी पड़ेगा। इकोनॉमी की जो वाट लगेगी उसका अंदाजा शायद उन्हें है। इसीलिए अपनी साख बचाने के लिए भी ट्रंप यह शांति का राग अलाप रहे हैं। अब आते हैं उस असली चीज पर जिसने अमेरिका और चीन जैसे देशों की नींद उड़ा रखी है और वह है भारत का अपना देसी हथियार उद्योग। इस पूरे घटनाक्रम में अगर किसी का डंका बजा है तो वह है भारत के अपने बनाए हथियार। हमारे आकाश मिसाइल डिफेंस सिस्टम, क्यूआर सैम सिस्टम, बराकेट मिसाइल डिफेंस सिस्टम, एंटी ड्रोन सिस्टम, बीएएमडी मिसाइल डिफेंस सिस्टम, पिनाका मल्टीबैरल रॉकेट लांचर सिस्टम इन सब ने जो कमाल दिखाया है, वह दुनिया की नजरों में आ चुका है। भारत की आर्टिलरी, इसरो के ट्रैकिंग इक्विपमेंट और डीआरडीओ के बनाए दूसरे वेपंस ने साबित कर दिया कि भारत अब किसी पर निर्भर नहीं है और ब्राह्मोस मिसाइल। इस मिसाइल ने तो पाकिस्तान में ऐसा हलका मचाया कि दुश्मन के होश फाखता हो गए। भारत का हथियार बाजार इस वक्त ₹23,000 करोड़ का एक्सपोर्ट कर रहा है और यह तो बस शुरुआत है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कुछ ही सालों में यह आंकड़ा कई लाख करोड़ को पार कर जाएगा। सोचिए यह अमेरिका और चीन के लिए किसी सदमे से कम है क्या? उनका मार्केट जो हिलने लगा है, यह सिर्फ हथियारों की बात नहीं है। यह भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और तकनीकी कौशल की कहानी है। यह कहानी है एक नए भारत की जो अब दुनिया से आंख मिलाकर बात करता है अपने दम पर और यही बात कुछ देशों को हजम नहीं हो रही। अमेरिकी हथियारों का भारत बजा रहा था बैंड। भारत के हथियार पड़ रहे थे भारी। अब जरा उस पहलू पर भी गौर कीजिए जिसने अमेरिका को सबसे ज्यादा परेशान किया है। इस पूरे टकराव में एक बात शीशे की तरह साफ हो गई।

चले तो सिर्फ भारत के अपने हथियार, रूस के साथ मिलकर बनाए हथियार या फिर इजराइल और फ्रांस के हथियार। बाकी सबका क्या हुआ? अमेरिका की बड़ी-बड़ी मिसाइलें, उसके फाइटर जेट्स सब के सब या तो नाकाम रहे या फिर उनकी हवा निकल गई। चीन की तो पूरी तरह से भद पिट गई। उनका एचQ9 मिसाइल डिफेंस सिस्टम जिसे वह अपनी रीड की हड्डी बताते थे, उसे भारत और इजराइल के ड्रोंस ने खिलौने की तरह उड़ा दिया। वह उन्हें रोक तक नहीं पाया। चीन की सबसे घातक कही जाने वाली पीएल-15 मिसाइल का क्या हश्र हुआ। उसे ना सिर्फ भारत के अकैश मिसाइल सिस्टम ने हवा में ही गिरा दिया बल्कि वो मिसाइल जमीन पर बिल्कुल सही सलामत हालत में गिरी। और अब वह डीआरडीओ की लैब में है। सोचिए भारत अब इसकी रिवर्स इंजीनियरिंग करके चीन की पूरी मिसाइल टेक्नोलॉजी की परतें उधेड़ कर रख देगा। यह चीन के लिए कितना बड़ा झटका है इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं। रातोंरात उनकी टेक्नोलॉजी पुरानी हो गई। यही नहीं ईरान की न्यूक्लियर कैपेबल फाह 1और फाह 2 मिसाइलें जिन्हें बहुत खतरनाक बताया जा रहा था उन्हें भी हमारे आकाश सिस्टम ने पलक झपकते ही राख में मिला दिया। तुर्की के तथाकथित घातक ड्रोंस तो ऐसे गिरे जैसे कागज के खिलौने हो। दूसरी तरफ भारत के अपने ड्रोंस ने पाकिस्तान के अंदर तक घुसकर सटीक निशाने लगाए। तो क्या यह सब देखकर आपको नहीं लगता कि ट्रंप का अचानक शांतिदूत बनना सिर्फ अपनी और अपने मित्र देशों की इसी बेइज्जती पर पर्दा डालने की कोशिश है ताकि वो इसका क्रेडिट लेकर दुनिया का ध्यान इन नाकामियों से हटा सकें। यह एक बहुत बड़ा फेस सेविंग एक्सरसाइज हो सकता है।

पाकिस्तान की हालत पतली। नूर खान एयरबेस का सच। इस 2 रात भारत ने पाकिस्तान को ऐसी चोट पहुंचाई है जिसका दर्द उसे लंबे समय तक महसूस होगा। खबरें तो यहां तक हैं कि भारत पाकिस्तान के न्यूक्लियर कमांड को तबाह करने के बहुत करीब पहुंच गया था। पाकिस्तान के नूरखान एयरबेस पर जो भारतीय मिसाइलों ने तबाही मचाई, उससे इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक हड़कंप मच गया। कहते हैं कि शहबाज शरीफ इतने कांप गए थे कि उन्होंने तुरंत अमेरिका को फोन घुमाया। क्यों? क्योंकि नूर खान एयरबेस पर भारतीय मिसाइलों का हमला पाकिस्तान के लिए एक भयानक सपने जैसा था। उनका एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह से फेल हो गया था। वो भारतीय मिसाइलों को इंटरसेप्ट ही नहीं कर पा रहे थे। और यह तो तब था जब भारत ने अपने काफी कम तबाही मचाने वाले हथियारों का इस्तेमाल किया था। पाकिस्तान को डर सताने लगा था कि भारत अगले कुछ ही घंटों में उसके तमाम सैन्य ठिकानों और हथियार भंडारों को नेस्तनाबूद कर देगा। नूर खान एयरबेस कोई मामूली जगह नहीं है। यह पाकिस्तानी एयरफोर्स का सबसे संवेदनशील एयरबेस है और भारत ने वहां डीप स्ट्राइक की थी। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स ने भी माना कि पाकिस्तानी एयर डिफेंस और रडार सिस्टम भारतीय हमलों के सामने बेबस नजर आए। सबसे बड़ी बात नूर खान एयरबेस से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर पाकिस्तान का न्यूक्लियर कमांड ऑफिस का हेड क्वार्टर है स्ट्रेटेजिक प्लांस डिवीजन। यहीं से पाकिस्तान के लगभग 170 परमाणु हथियारों की देखरेख और कंट्रोल होता है। नूर खान पर हुए हमले को पाकिस्तान ने और यहां तक कि कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने भी पाकिस्तान के परमाणु कमांड पर हमले की अघोषित चेतावनी के तौर पर देखा। उन्हें लगा कि भारत का अगला निशाना यही एसपीडी हेडक्वार्टर हो सकता है। यह डर इतना वास्तविक था कि पाकिस्तान के हाथ-पांव फूल गए थे।

इस पूरी कहानी का सार क्या है? डॉनल्ड ट्रंप की मध्यस्थता की पेशकश, अमेरिकी हथियारों की नाकामी, चीनी टेक्नोलॉजी का पर्दाफाश और सबसे ऊपर भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का धमाकेदार प्रदर्शन। यह सब मिलकर एक नई तस्वीर बना रहे हैं। यह तस्वीर है एक ऐसे भारत की जो अब किसी के रहमोकरम पर नहीं है। एक ऐसा भारत जो अपनी सुरक्षा खुद करना जानता है और दुनिया को अपनी ताकत का एहसास कराना भी। अमेरिका और उसके साथी देश शायद इसी बात से घबराए हुए हैं। उन्हें डर है कि भारत का बढ़ता कद कहीं उनके ग्लोबल दबदबे को चुनौती ना दे दे। ट्रंप का खेल तो बस एक बहाना है। असली मकसद तो भारत के बढ़ते प्रभाव को किसी तरह रोकना या कम करना हो सकता है। यह लड़ाई सिर्फ हथियारों की नहीं बल्कि आत्मसम्मान और वैश्विक प्रतिष्ठा की भी है और इस लड़ाई में भारत ने साबित कर दिया है कि वह किसी से कम नहीं। कुछ सवाल बनते हैं कि तो क्या भारत अब वाकई दुनिया की नई महाशक्ति बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। क्या अमेरिका और चीन मिलकर इस विजय रथ को रोकने के लिए कोई नई और भी खतरनाक साजिश रचेंगे। आने वाले वक्त में भारत के स्वदेशी हथियार दुनिया के हथियार बाजार में और क्या-क्या हलका मचाने वाले हैं? और इस बदलते वैश्विक समीकरण का आप पर और हम पर क्या असर पड़ेगा? इन सभी सवालों के जवाब भारत ढूंढेंगा


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भारत का ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है

भारत का ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है
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पाकिस्तान पर तगड़ी तबाही करने के बाद फिलहाल भारत ने हमला रोक दिया है। लेकिन अभी भारत का ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है। बल्कि जारी है। पाकिस्तान के छह एयरबेस तबाह करने के बाद जब भारत के अगले निशाने पर पाकिस्तान के परमाणु भंडार थे तब पाकिस्तान भारत से युद्ध रोकने के लिए गिड़गिड़ाने लगा था। लेकिन तभी कुछ ऐसा होता है कि अमेरिका जो पहले यह कह रहा था कि इस युद्ध से उसका कोई लेना देना नहीं। अचानक आकर इस युद्ध में सीज फायर के लिए कहता है जो एक चौंकाने वाली बात थी। अब परत दर परत इस मामले में खुलासे हो रहे हैं और अब सीज फायर को लेकर एक ऐसा बड़ा खुलासा हुआ है जिसने दुनिया को हिला कर रख दिया है। क्योंकि भारत के पाकिस्तान पर प्रहार से सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं हिला हुआ था बल्कि अमेरिका भी संकट में था। क्योंकि भारत कुछ ऐसा करने जा रहा था जो पाकिस्तान, चीन और अमेरिका को भी दहशत में ला रहा था। एक ऐसा तूफान जिसने वाशिंगटन से लेकर बीजिंग तक की नींदें उड़ा दी थी। अब सवाल है कि पाकिस्तान के छह एयरबेस तो राख करने के बाद क्या था? भारत का वो सातवां टारगेट जिसके बाद दुनिया हिल उठी थी। ट्रंप ने मिलाया भारत को। फोन भारत ने सके F16 के साथ। भारत की आकाश मिसाइल ने ऐसा क्या किया जिससे बर्बाद हो रहा था अमेरिका। मच गई पेंटागन में खलबली। S400 और ब्रह्मोस से पहले ही खौफ में था अमेरिका। फिर भारत के आकाश मिसाइल सिस्टम ने ऐसा क्या किया जो भारत की टेक्नोलॉजी को दिखा रही थी? क्या पाकिस्तान के साथ में भारत के बनाए हथियार पड़ रहे थे? अमेरिकी हथियारों पर भारी? क्या भारत की तकनीक को सामने आने से जबरदस्ती रोक रहे ट्रंप? क्या भारत का बढ़ता हथियार उद्योग अमेरिका और चीन के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है? पाक के साथ जंग बढ़ती तो दुनिया खरीदने भारत दौड़ती। क्या पाकिस्तान के नूरखान एयरबेस पर हुई स्ट्राइक सिर्फ एक हमला था या पाकिस्तान के न्यूक्लियर कमांड को सीधी चेतावनी? इन सवालों के जवाब इतने सीधे नहीं है।


यह एक ऐसा चक्रव्यूह है जिसमें कई खिलाड़ी अपने-अपने मोहरे चल रहे हैं। लेकिन आज इस चक्रव्यूह को भेद कर सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश करेंगे।ट्रंप का कूदना पर्दे के पीछे का खेल क्या है? तो सबसे पहले बात करते हैं डोनाल्ड ट्रंप की। अचानक से शांतिदूत बनने का यह शौक क्यों जागा? वजह कई हैं और एक से बढ़कर एक चौंकाने वाली। पहली वजह है अमेरिकी हथियारों की सरेआम हुई फजीहत। याद है ना? कैसे पाकिस्तान को दिए F-16 फाइटर जेट्स और दूसरे अमेरिकी हथियार भारतीय कार्यवाही में कबाड़ साबित हुए। यह अमेरिका के लिए सिर्फ एक झटका नहीं बल्कि उसकी ग्लोबल इमेज पर करारा तमाचा था। उनका F35 जिसे कुछ एक्सपर्ट्स पहले ही कबाड़ बता चुके हैं। उसकी डील कई देशों ने रोक दी। अब इस डैमेज को कंट्रोल तो करना ही था। तो ट्रंप कूद पड़े मैदान में क्रेडिट लेने। दूसरी बड़ी वजह है भारत और रूस की दोस्ती खासकर S400 और ब्राह्मोस मिसाइल की जोड़ी। इस जोड़ी ने जो कहर बरपाया उसने सिर्फ ट्रंप की राजनीति नहीं हिलाई बल्कि वाशिंगटन की हथियार मंडी में भूचाल ला दिया। अमेरिका कब से रूस के हथियारों पर रोक लगाने के लिए भारत पर दबाव बना रहा था। लेकिन भारत ने तो अपने दम पर ऐसा खेल कर दिया कि दुनिया देखती रह गई। यह कामयाबी अमेरिका को कैसे हजम होती? इसलिए ट्रंप को बीच में आना पड़ा ताकि कहानी को थोड़ा अपने फेवर में मोड़ा जा सके।

तीसरा पॉइंट भी समझिए। यूक्रेन से लेकर गाजा तक ट्रंप ने जहां-जहां अपनी चौधराहट दिखाने की कोशिश की वहांवहां उनकी हवा निकल गई। अब जब कश्मीर का मुद्दा फिर से ग्लोबल हेडलाइन बना तो ट्रंप को लगा कि यही मौका है अपनी इमेज चमकाने का। लेकिन भारत को यहां अमेरिका से बहुत सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि अमेरिका की दोस्ती और दुश्मनी दोनों का भरोसा नहीं किया जा सकता। अमेरिकन डीएनए में ही धंधा है। चाहे शांति हो या युद्ध। नोट छापने से मतलब ट्रंप ने अपने बयान में कहा भी कि सीज फायर के बदले भारत पाक से धंधा बढ़ाएंगे। वाह क्या सीन है। और हां, ट्रेड वॉर का खेल कौन भूल सकता है? चीन के सामने ट्रंप की अकड़ ढीली पड़ गई थी। स्विट्जरलैंड में चीन के आगे कैसे कंधे झुकाए घूम रहे थे? सबने देखा। उन्हें पता है कि अगर भारत किसी बड़े संघर्ष में उलझता है तो इसका असर सिर्फ भारत पर नहीं बल्कि पूरे यूरोप और अमेरिका पर भी पड़ेगा। इकोनॉमी की जो वाट लगेगी उसका अंदाजा शायद उन्हें है। इसीलिए अपनी साख बचाने के लिए भी ट्रंप यह शांति का राग अलाप रहे हैं। अब आते हैं उस असली चीज पर जिसने अमेरिका और चीन जैसे देशों की नींद उड़ा रखी है और वह है भारत का अपना देसी हथियार उद्योग। इस पूरे घटनाक्रम में अगर किसी का डंका बजा है तो वह है भारत के अपने बनाए हथियार। हमारे आकाश मिसाइल डिफेंस सिस्टम, क्यूआर सैम सिस्टम, बराकेट मिसाइल डिफेंस सिस्टम, एंटी ड्रोन सिस्टम, बीएएमडी मिसाइल डिफेंस सिस्टम, पिनाका मल्टीबैरल रॉकेट लांचर सिस्टम इन सब ने जो कमाल दिखाया है, वह दुनिया की नजरों में आ चुका है। भारत की आर्टिलरी, इसरो के ट्रैकिंग इक्विपमेंट और डीआरडीओ के बनाए दूसरे वेपंस ने साबित कर दिया कि भारत अब किसी पर निर्भर नहीं है और ब्राह्मोस मिसाइल। इस मिसाइल ने तो पाकिस्तान में ऐसा हलका मचाया कि दुश्मन के होश फाखता हो गए। भारत का हथियार बाजार इस वक्त ₹23,000 करोड़ का एक्सपोर्ट कर रहा है और यह तो बस शुरुआत है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कुछ ही सालों में यह आंकड़ा कई लाख करोड़ को पार कर जाएगा। सोचिए यह अमेरिका और चीन के लिए किसी सदमे से कम है क्या? उनका मार्केट जो हिलने लगा है, यह सिर्फ हथियारों की बात नहीं है। यह भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और तकनीकी कौशल की कहानी है। यह कहानी है एक नए भारत की जो अब दुनिया से आंख मिलाकर बात करता है अपने दम पर और यही बात कुछ देशों को हजम नहीं हो रही। अमेरिकी हथियारों का भारत बजा रहा था बैंड। भारत के हथियार पड़ रहे थे भारी। अब जरा उस पहलू पर भी गौर कीजिए जिसने अमेरिका को सबसे ज्यादा परेशान किया है। इस पूरे टकराव में एक बात शीशे की तरह साफ हो गई।

चले तो सिर्फ भारत के अपने हथियार, रूस के साथ मिलकर बनाए हथियार या फिर इजराइल और फ्रांस के हथियार। बाकी सबका क्या हुआ? अमेरिका की बड़ी-बड़ी मिसाइलें, उसके फाइटर जेट्स सब के सब या तो नाकाम रहे या फिर उनकी हवा निकल गई। चीन की तो पूरी तरह से भद पिट गई। उनका एचQ9 मिसाइल डिफेंस सिस्टम जिसे वह अपनी रीड की हड्डी बताते थे, उसे भारत और इजराइल के ड्रोंस ने खिलौने की तरह उड़ा दिया। वह उन्हें रोक तक नहीं पाया। चीन की सबसे घातक कही जाने वाली पीएल-15 मिसाइल का क्या हश्र हुआ। उसे ना सिर्फ भारत के अकैश मिसाइल सिस्टम ने हवा में ही गिरा दिया बल्कि वो मिसाइल जमीन पर बिल्कुल सही सलामत हालत में गिरी। और अब वह डीआरडीओ की लैब में है। सोचिए भारत अब इसकी रिवर्स इंजीनियरिंग करके चीन की पूरी मिसाइल टेक्नोलॉजी की परतें उधेड़ कर रख देगा। यह चीन के लिए कितना बड़ा झटका है इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं। रातोंरात उनकी टेक्नोलॉजी पुरानी हो गई। यही नहीं ईरान की न्यूक्लियर कैपेबल फाह 1और फाह 2 मिसाइलें जिन्हें बहुत खतरनाक बताया जा रहा था उन्हें भी हमारे आकाश सिस्टम ने पलक झपकते ही राख में मिला दिया। तुर्की के तथाकथित घातक ड्रोंस तो ऐसे गिरे जैसे कागज के खिलौने हो। दूसरी तरफ भारत के अपने ड्रोंस ने पाकिस्तान के अंदर तक घुसकर सटीक निशाने लगाए। तो क्या यह सब देखकर आपको नहीं लगता कि ट्रंप का अचानक शांतिदूत बनना सिर्फ अपनी और अपने मित्र देशों की इसी बेइज्जती पर पर्दा डालने की कोशिश है ताकि वो इसका क्रेडिट लेकर दुनिया का ध्यान इन नाकामियों से हटा सकें। यह एक बहुत बड़ा फेस सेविंग एक्सरसाइज हो सकता है।

पाकिस्तान की हालत पतली। नूर खान एयरबेस का सच। इस 2 रात भारत ने पाकिस्तान को ऐसी चोट पहुंचाई है जिसका दर्द उसे लंबे समय तक महसूस होगा। खबरें तो यहां तक हैं कि भारत पाकिस्तान के न्यूक्लियर कमांड को तबाह करने के बहुत करीब पहुंच गया था। पाकिस्तान के नूरखान एयरबेस पर जो भारतीय मिसाइलों ने तबाही मचाई, उससे इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक हड़कंप मच गया। कहते हैं कि शहबाज शरीफ इतने कांप गए थे कि उन्होंने तुरंत अमेरिका को फोन घुमाया। क्यों? क्योंकि नूर खान एयरबेस पर भारतीय मिसाइलों का हमला पाकिस्तान के लिए एक भयानक सपने जैसा था। उनका एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह से फेल हो गया था। वो भारतीय मिसाइलों को इंटरसेप्ट ही नहीं कर पा रहे थे। और यह तो तब था जब भारत ने अपने काफी कम तबाही मचाने वाले हथियारों का इस्तेमाल किया था। पाकिस्तान को डर सताने लगा था कि भारत अगले कुछ ही घंटों में उसके तमाम सैन्य ठिकानों और हथियार भंडारों को नेस्तनाबूद कर देगा। नूर खान एयरबेस कोई मामूली जगह नहीं है। यह पाकिस्तानी एयरफोर्स का सबसे संवेदनशील एयरबेस है और भारत ने वहां डीप स्ट्राइक की थी। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स ने भी माना कि पाकिस्तानी एयर डिफेंस और रडार सिस्टम भारतीय हमलों के सामने बेबस नजर आए। सबसे बड़ी बात नूर खान एयरबेस से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर पाकिस्तान का न्यूक्लियर कमांड ऑफिस का हेड क्वार्टर है स्ट्रेटेजिक प्लांस डिवीजन। यहीं से पाकिस्तान के लगभग 170 परमाणु हथियारों की देखरेख और कंट्रोल होता है। नूर खान पर हुए हमले को पाकिस्तान ने और यहां तक कि कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने भी पाकिस्तान के परमाणु कमांड पर हमले की अघोषित चेतावनी के तौर पर देखा। उन्हें लगा कि भारत का अगला निशाना यही एसपीडी हेडक्वार्टर हो सकता है। यह डर इतना वास्तविक था कि पाकिस्तान के हाथ-पांव फूल गए थे।

इस पूरी कहानी का सार क्या है? डॉनल्ड ट्रंप की मध्यस्थता की पेशकश, अमेरिकी हथियारों की नाकामी, चीनी टेक्नोलॉजी का पर्दाफाश और सबसे ऊपर भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का धमाकेदार प्रदर्शन। यह सब मिलकर एक नई तस्वीर बना रहे हैं। यह तस्वीर है एक ऐसे भारत की जो अब किसी के रहमोकरम पर नहीं है। एक ऐसा भारत जो अपनी सुरक्षा खुद करना जानता है और दुनिया को अपनी ताकत का एहसास कराना भी। अमेरिका और उसके साथी देश शायद इसी बात से घबराए हुए हैं। उन्हें डर है कि भारत का बढ़ता कद कहीं उनके ग्लोबल दबदबे को चुनौती ना दे दे। ट्रंप का खेल तो बस एक बहाना है। असली मकसद तो भारत के बढ़ते प्रभाव को किसी तरह रोकना या कम करना हो सकता है। यह लड़ाई सिर्फ हथियारों की नहीं बल्कि आत्मसम्मान और वैश्विक प्रतिष्ठा की भी है और इस लड़ाई में भारत ने साबित कर दिया है कि वह किसी से कम नहीं। कुछ सवाल बनते हैं कि तो क्या भारत अब वाकई दुनिया की नई महाशक्ति बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। क्या अमेरिका और चीन मिलकर इस विजय रथ को रोकने के लिए कोई नई और भी खतरनाक साजिश रचेंगे। आने वाले वक्त में भारत के स्वदेशी हथियार दुनिया के हथियार बाजार में और क्या-क्या हलका मचाने वाले हैं? और इस बदलते वैश्विक समीकरण का आप पर और हम पर क्या असर पड़ेगा? इन सभी सवालों के जवाब भारत ढूंढेंगा


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May 13, 2025 at 09:13AM

भारत का ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है

भारत का ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है
Rescue workers clear rubble with an excavator at the site of the missile attack by Indian armed forces, in Muridke
 
पाकिस्तान पर तगड़ी तबाही करने के बाद फिलहाल भारत ने हमला रोक दिया है। लेकिन अभी भारत का ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है। बल्कि जारी है। पाकिस्तान के छह एयरबेस तबाह करने के बाद जब भारत के अगले निशाने पर पाकिस्तान के परमाणु भंडार थे तब पाकिस्तान भारत से युद्ध रोकने के लिए गिड़गिड़ाने लगा था। लेकिन तभी कुछ ऐसा होता है कि अमेरिका जो पहले यह कह रहा था कि इस युद्ध से उसका कोई लेना देना नहीं। अचानक आकर इस युद्ध में सीज फायर के लिए कहता है जो एक चौंकाने वाली बात थी। अब परत दर परत इस मामले में खुलासे हो रहे हैं और अब सीज फायर को लेकर एक ऐसा बड़ा खुलासा हुआ है जिसने दुनिया को हिला कर रख दिया है। क्योंकि भारत के पाकिस्तान पर प्रहार से सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं हिला हुआ था बल्कि अमेरिका भी संकट में था। क्योंकि भारत कुछ ऐसा करने जा रहा था जो पाकिस्तान, चीन और अमेरिका को भी दहशत में ला रहा था। एक ऐसा तूफान जिसने वाशिंगटन से लेकर बीजिंग तक की नींदें उड़ा दी थी। अब सवाल है कि पाकिस्तान के छह एयरबेस तो राख करने के बाद क्या था? भारत का वो सातवां टारगेट जिसके बाद दुनिया हिल उठी थी। ट्रंप ने मिलाया भारत को। फोन भारत ने सके F16 के साथ। भारत की आकाश मिसाइल ने ऐसा क्या किया जिससे बर्बाद हो रहा था अमेरिका। मच गई पेंटागन में खलबली। S400 और ब्रह्मोस से पहले ही खौफ में था अमेरिका। फिर भारत के आकाश मिसाइल सिस्टम ने ऐसा क्या किया जो भारत की टेक्नोलॉजी को दिखा रही थी? क्या पाकिस्तान के साथ में भारत के बनाए हथियार पड़ रहे थे? अमेरिकी हथियारों पर भारी? क्या भारत की तकनीक को सामने आने से जबरदस्ती रोक रहे ट्रंप? क्या भारत का बढ़ता हथियार उद्योग अमेरिका और चीन के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है? पाक के साथ जंग बढ़ती तो दुनिया खरीदने भारत दौड़ती। क्या पाकिस्तान के नूरखान एयरबेस पर हुई स्ट्राइक सिर्फ एक हमला था या पाकिस्तान के न्यूक्लियर कमांड को सीधी चेतावनी? इन सवालों के जवाब इतने सीधे नहीं है।


यह एक ऐसा चक्रव्यूह है जिसमें कई खिलाड़ी अपने-अपने मोहरे चल रहे हैं। लेकिन आज इस चक्रव्यूह को भेद कर सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश करेंगे।ट्रंप का कूदना पर्दे के पीछे का खेल क्या है? तो सबसे पहले बात करते हैं डोनाल्ड ट्रंप की। अचानक से शांतिदूत बनने का यह शौक क्यों जागा? वजह कई हैं और एक से बढ़कर एक चौंकाने वाली। पहली वजह है अमेरिकी हथियारों की सरेआम हुई फजीहत। याद है ना? कैसे पाकिस्तान को दिए F-16 फाइटर जेट्स और दूसरे अमेरिकी हथियार भारतीय कार्यवाही में कबाड़ साबित हुए। यह अमेरिका के लिए सिर्फ एक झटका नहीं बल्कि उसकी ग्लोबल इमेज पर करारा तमाचा था। उनका F35 जिसे कुछ एक्सपर्ट्स पहले ही कबाड़ बता चुके हैं। उसकी डील कई देशों ने रोक दी। अब इस डैमेज को कंट्रोल तो करना ही था। तो ट्रंप कूद पड़े मैदान में क्रेडिट लेने। दूसरी बड़ी वजह है भारत और रूस की दोस्ती खासकर S400 और ब्राह्मोस मिसाइल की जोड़ी। इस जोड़ी ने जो कहर बरपाया उसने सिर्फ ट्रंप की राजनीति नहीं हिलाई बल्कि वाशिंगटन की हथियार मंडी में भूचाल ला दिया। अमेरिका कब से रूस के हथियारों पर रोक लगाने के लिए भारत पर दबाव बना रहा था। लेकिन भारत ने तो अपने दम पर ऐसा खेल कर दिया कि दुनिया देखती रह गई। यह कामयाबी अमेरिका को कैसे हजम होती? इसलिए ट्रंप को बीच में आना पड़ा ताकि कहानी को थोड़ा अपने फेवर में मोड़ा जा सके।

तीसरा पॉइंट भी समझिए। यूक्रेन से लेकर गाजा तक ट्रंप ने जहां-जहां अपनी चौधराहट दिखाने की कोशिश की वहांवहां उनकी हवा निकल गई। अब जब कश्मीर का मुद्दा फिर से ग्लोबल हेडलाइन बना तो ट्रंप को लगा कि यही मौका है अपनी इमेज चमकाने का। लेकिन भारत को यहां अमेरिका से बहुत सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि अमेरिका की दोस्ती और दुश्मनी दोनों का भरोसा नहीं किया जा सकता। अमेरिकन डीएनए में ही धंधा है। चाहे शांति हो या युद्ध। नोट छापने से मतलब ट्रंप ने अपने बयान में कहा भी कि सीज फायर के बदले भारत पाक से धंधा बढ़ाएंगे। वाह क्या सीन है। और हां, ट्रेड वॉर का खेल कौन भूल सकता है? चीन के सामने ट्रंप की अकड़ ढीली पड़ गई थी। स्विट्जरलैंड में चीन के आगे कैसे कंधे झुकाए घूम रहे थे? सबने देखा। उन्हें पता है कि अगर भारत किसी बड़े संघर्ष में उलझता है तो इसका असर सिर्फ भारत पर नहीं बल्कि पूरे यूरोप और अमेरिका पर भी पड़ेगा। इकोनॉमी की जो वाट लगेगी उसका अंदाजा शायद उन्हें है। इसीलिए अपनी साख बचाने के लिए भी ट्रंप यह शांति का राग अलाप रहे हैं। अब आते हैं उस असली चीज पर जिसने अमेरिका और चीन जैसे देशों की नींद उड़ा रखी है और वह है भारत का अपना देसी हथियार उद्योग। इस पूरे घटनाक्रम में अगर किसी का डंका बजा है तो वह है भारत के अपने बनाए हथियार। हमारे आकाश मिसाइल डिफेंस सिस्टम, क्यूआर सैम सिस्टम, बराकेट मिसाइल डिफेंस सिस्टम, एंटी ड्रोन सिस्टम, बीएएमडी मिसाइल डिफेंस सिस्टम, पिनाका मल्टीबैरल रॉकेट लांचर सिस्टम इन सब ने जो कमाल दिखाया है, वह दुनिया की नजरों में आ चुका है। भारत की आर्टिलरी, इसरो के ट्रैकिंग इक्विपमेंट और डीआरडीओ के बनाए दूसरे वेपंस ने साबित कर दिया कि भारत अब किसी पर निर्भर नहीं है और ब्राह्मोस मिसाइल। इस मिसाइल ने तो पाकिस्तान में ऐसा हलका मचाया कि दुश्मन के होश फाखता हो गए। भारत का हथियार बाजार इस वक्त ₹23,000 करोड़ का एक्सपोर्ट कर रहा है और यह तो बस शुरुआत है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कुछ ही सालों में यह आंकड़ा कई लाख करोड़ को पार कर जाएगा। सोचिए यह अमेरिका और चीन के लिए किसी सदमे से कम है क्या? उनका मार्केट जो हिलने लगा है, यह सिर्फ हथियारों की बात नहीं है। यह भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और तकनीकी कौशल की कहानी है। यह कहानी है एक नए भारत की जो अब दुनिया से आंख मिलाकर बात करता है अपने दम पर और यही बात कुछ देशों को हजम नहीं हो रही। अमेरिकी हथियारों का भारत बजा रहा था बैंड। भारत के हथियार पड़ रहे थे भारी। अब जरा उस पहलू पर भी गौर कीजिए जिसने अमेरिका को सबसे ज्यादा परेशान किया है। इस पूरे टकराव में एक बात शीशे की तरह साफ हो गई।

चले तो सिर्फ भारत के अपने हथियार, रूस के साथ मिलकर बनाए हथियार या फिर इजराइल और फ्रांस के हथियार। बाकी सबका क्या हुआ? अमेरिका की बड़ी-बड़ी मिसाइलें, उसके फाइटर जेट्स सब के सब या तो नाकाम रहे या फिर उनकी हवा निकल गई। चीन की तो पूरी तरह से भद पिट गई। उनका एचQ9 मिसाइल डिफेंस सिस्टम जिसे वह अपनी रीड की हड्डी बताते थे, उसे भारत और इजराइल के ड्रोंस ने खिलौने की तरह उड़ा दिया। वह उन्हें रोक तक नहीं पाया। चीन की सबसे घातक कही जाने वाली पीएल-15 मिसाइल का क्या हश्र हुआ। उसे ना सिर्फ भारत के अकैश मिसाइल सिस्टम ने हवा में ही गिरा दिया बल्कि वो मिसाइल जमीन पर बिल्कुल सही सलामत हालत में गिरी। और अब वह डीआरडीओ की लैब में है। सोचिए भारत अब इसकी रिवर्स इंजीनियरिंग करके चीन की पूरी मिसाइल टेक्नोलॉजी की परतें उधेड़ कर रख देगा। यह चीन के लिए कितना बड़ा झटका है इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं। रातोंरात उनकी टेक्नोलॉजी पुरानी हो गई। यही नहीं ईरान की न्यूक्लियर कैपेबल फाह 1और फाह 2 मिसाइलें जिन्हें बहुत खतरनाक बताया जा रहा था उन्हें भी हमारे आकाश सिस्टम ने पलक झपकते ही राख में मिला दिया। तुर्की के तथाकथित घातक ड्रोंस तो ऐसे गिरे जैसे कागज के खिलौने हो। दूसरी तरफ भारत के अपने ड्रोंस ने पाकिस्तान के अंदर तक घुसकर सटीक निशाने लगाए। तो क्या यह सब देखकर आपको नहीं लगता कि ट्रंप का अचानक शांतिदूत बनना सिर्फ अपनी और अपने मित्र देशों की इसी बेइज्जती पर पर्दा डालने की कोशिश है ताकि वो इसका क्रेडिट लेकर दुनिया का ध्यान इन नाकामियों से हटा सकें। यह एक बहुत बड़ा फेस सेविंग एक्सरसाइज हो सकता है।

पाकिस्तान की हालत पतली। नूर खान एयरबेस का सच। इस 2 रात भारत ने पाकिस्तान को ऐसी चोट पहुंचाई है जिसका दर्द उसे लंबे समय तक महसूस होगा। खबरें तो यहां तक हैं कि भारत पाकिस्तान के न्यूक्लियर कमांड को तबाह करने के बहुत करीब पहुंच गया था। पाकिस्तान के नूरखान एयरबेस पर जो भारतीय मिसाइलों ने तबाही मचाई, उससे इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक हड़कंप मच गया। कहते हैं कि शहबाज शरीफ इतने कांप गए थे कि उन्होंने तुरंत अमेरिका को फोन घुमाया। क्यों? क्योंकि नूर खान एयरबेस पर भारतीय मिसाइलों का हमला पाकिस्तान के लिए एक भयानक सपने जैसा था। उनका एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह से फेल हो गया था। वो भारतीय मिसाइलों को इंटरसेप्ट ही नहीं कर पा रहे थे। और यह तो तब था जब भारत ने अपने काफी कम तबाही मचाने वाले हथियारों का इस्तेमाल किया था। पाकिस्तान को डर सताने लगा था कि भारत अगले कुछ ही घंटों में उसके तमाम सैन्य ठिकानों और हथियार भंडारों को नेस्तनाबूद कर देगा। नूर खान एयरबेस कोई मामूली जगह नहीं है। यह पाकिस्तानी एयरफोर्स का सबसे संवेदनशील एयरबेस है और भारत ने वहां डीप स्ट्राइक की थी। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स ने भी माना कि पाकिस्तानी एयर डिफेंस और रडार सिस्टम भारतीय हमलों के सामने बेबस नजर आए। सबसे बड़ी बात नूर खान एयरबेस से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर पाकिस्तान का न्यूक्लियर कमांड ऑफिस का हेड क्वार्टर है स्ट्रेटेजिक प्लांस डिवीजन। यहीं से पाकिस्तान के लगभग 170 परमाणु हथियारों की देखरेख और कंट्रोल होता है। नूर खान पर हुए हमले को पाकिस्तान ने और यहां तक कि कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने भी पाकिस्तान के परमाणु कमांड पर हमले की अघोषित चेतावनी के तौर पर देखा। उन्हें लगा कि भारत का अगला निशाना यही एसपीडी हेडक्वार्टर हो सकता है। यह डर इतना वास्तविक था कि पाकिस्तान के हाथ-पांव फूल गए थे।

इस पूरी कहानी का सार क्या है? डॉनल्ड ट्रंप की मध्यस्थता की पेशकश, अमेरिकी हथियारों की नाकामी, चीनी टेक्नोलॉजी का पर्दाफाश और सबसे ऊपर भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का धमाकेदार प्रदर्शन। यह सब मिलकर एक नई तस्वीर बना रहे हैं। यह तस्वीर है एक ऐसे भारत की जो अब किसी के रहमोकरम पर नहीं है। एक ऐसा भारत जो अपनी सुरक्षा खुद करना जानता है और दुनिया को अपनी ताकत का एहसास कराना भी। अमेरिका और उसके साथी देश शायद इसी बात से घबराए हुए हैं। उन्हें डर है कि भारत का बढ़ता कद कहीं उनके ग्लोबल दबदबे को चुनौती ना दे दे। ट्रंप का खेल तो बस एक बहाना है। असली मकसद तो भारत के बढ़ते प्रभाव को किसी तरह रोकना या कम करना हो सकता है। यह लड़ाई सिर्फ हथियारों की नहीं बल्कि आत्मसम्मान और वैश्विक प्रतिष्ठा की भी है और इस लड़ाई में भारत ने साबित कर दिया है कि वह किसी से कम नहीं। कुछ सवाल बनते हैं कि तो क्या भारत अब वाकई दुनिया की नई महाशक्ति बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। क्या अमेरिका और चीन मिलकर इस विजय रथ को रोकने के लिए कोई नई और भी खतरनाक साजिश रचेंगे। आने वाले वक्त में भारत के स्वदेशी हथियार दुनिया के हथियार बाजार में और क्या-क्या हलका मचाने वाले हैं? और इस बदलते वैश्विक समीकरण का आप पर और हम पर क्या असर पड़ेगा? इन सभी सवालों के जवाब भारत ढूंढेंगा


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May 13, 2025 at 08:29AM

भारत का ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है

Rescue workers clear rubble with an excavator at the site of the missile attack by Indian armed forces, in Muridke
 
पाकिस्तान पर तगड़ी तबाही करने के बाद फिलहाल भारत ने हमला रोक दिया है। लेकिन अभी भारत का ऑपरेशन सिंदूर खत्म नहीं हुआ है। बल्कि जारी है। पाकिस्तान के छह एयरबेस तबाह करने के बाद जब भारत के अगले निशाने पर पाकिस्तान के परमाणु भंडार थे तब पाकिस्तान भारत से युद्ध रोकने के लिए गिड़गिड़ाने लगा था। लेकिन तभी कुछ ऐसा होता है कि अमेरिका जो पहले यह कह रहा था कि इस युद्ध से उसका कोई लेना देना नहीं। अचानक आकर इस युद्ध में सीज फायर के लिए कहता है जो एक चौंकाने वाली बात थी। अब परत दर परत इस मामले में खुलासे हो रहे हैं और अब सीज फायर को लेकर एक ऐसा बड़ा खुलासा हुआ है जिसने दुनिया को हिला कर रख दिया है। क्योंकि भारत के पाकिस्तान पर प्रहार से सिर्फ पाकिस्तान ही नहीं हिला हुआ था बल्कि अमेरिका भी संकट में था। क्योंकि भारत कुछ ऐसा करने जा रहा था जो पाकिस्तान, चीन और अमेरिका को भी दहशत में ला रहा था। एक ऐसा तूफान जिसने वाशिंगटन से लेकर बीजिंग तक की नींदें उड़ा दी थी। अब सवाल है कि पाकिस्तान के छह एयरबेस तो राख करने के बाद क्या था? भारत का वो सातवां टारगेट जिसके बाद दुनिया हिल उठी थी। ट्रंप ने मिलाया भारत को। फोन भारत ने सके F16 के साथ। भारत की आकाश मिसाइल ने ऐसा क्या किया जिससे बर्बाद हो रहा था अमेरिका। मच गई पेंटागन में खलबली। S400 और ब्रह्मोस से पहले ही खौफ में था अमेरिका। फिर भारत के आकाश मिसाइल सिस्टम ने ऐसा क्या किया जो भारत की टेक्नोलॉजी को दिखा रही थी? क्या पाकिस्तान के साथ में भारत के बनाए हथियार पड़ रहे थे? अमेरिकी हथियारों पर भारी? क्या भारत की तकनीक को सामने आने से जबरदस्ती रोक रहे ट्रंप? क्या भारत का बढ़ता हथियार उद्योग अमेरिका और चीन के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन गया है? पाक के साथ जंग बढ़ती तो दुनिया खरीदने भारत दौड़ती। क्या पाकिस्तान के नूरखान एयरबेस पर हुई स्ट्राइक सिर्फ एक हमला था या पाकिस्तान के न्यूक्लियर कमांड को सीधी चेतावनी? इन सवालों के जवाब इतने सीधे नहीं है।


यह एक ऐसा चक्रव्यूह है जिसमें कई खिलाड़ी अपने-अपने मोहरे चल रहे हैं। लेकिन आज इस चक्रव्यूह को भेद कर सच्चाई तक पहुंचने की कोशिश करेंगे।ट्रंप का कूदना पर्दे के पीछे का खेल क्या है? तो सबसे पहले बात करते हैं डोनाल्ड ट्रंप की। अचानक से शांतिदूत बनने का यह शौक क्यों जागा? वजह कई हैं और एक से बढ़कर एक चौंकाने वाली। पहली वजह है अमेरिकी हथियारों की सरेआम हुई फजीहत। याद है ना? कैसे पाकिस्तान को दिए F-16 फाइटर जेट्स और दूसरे अमेरिकी हथियार भारतीय कार्यवाही में कबाड़ साबित हुए। यह अमेरिका के लिए सिर्फ एक झटका नहीं बल्कि उसकी ग्लोबल इमेज पर करारा तमाचा था। उनका F35 जिसे कुछ एक्सपर्ट्स पहले ही कबाड़ बता चुके हैं। उसकी डील कई देशों ने रोक दी। अब इस डैमेज को कंट्रोल तो करना ही था। तो ट्रंप कूद पड़े मैदान में क्रेडिट लेने। दूसरी बड़ी वजह है भारत और रूस की दोस्ती खासकर S400 और ब्राह्मोस मिसाइल की जोड़ी। इस जोड़ी ने जो कहर बरपाया उसने सिर्फ ट्रंप की राजनीति नहीं हिलाई बल्कि वाशिंगटन की हथियार मंडी में भूचाल ला दिया। अमेरिका कब से रूस के हथियारों पर रोक लगाने के लिए भारत पर दबाव बना रहा था। लेकिन भारत ने तो अपने दम पर ऐसा खेल कर दिया कि दुनिया देखती रह गई। यह कामयाबी अमेरिका को कैसे हजम होती? इसलिए ट्रंप को बीच में आना पड़ा ताकि कहानी को थोड़ा अपने फेवर में मोड़ा जा सके।

तीसरा पॉइंट भी समझिए। यूक्रेन से लेकर गाजा तक ट्रंप ने जहां-जहां अपनी चौधराहट दिखाने की कोशिश की वहांवहां उनकी हवा निकल गई। अब जब कश्मीर का मुद्दा फिर से ग्लोबल हेडलाइन बना तो ट्रंप को लगा कि यही मौका है अपनी इमेज चमकाने का। लेकिन भारत को यहां अमेरिका से बहुत सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि अमेरिका की दोस्ती और दुश्मनी दोनों का भरोसा नहीं किया जा सकता। अमेरिकन डीएनए में ही धंधा है। चाहे शांति हो या युद्ध। नोट छापने से मतलब ट्रंप ने अपने बयान में कहा भी कि सीज फायर के बदले भारत पाक से धंधा बढ़ाएंगे। वाह क्या सीन है। और हां, ट्रेड वॉर का खेल कौन भूल सकता है? चीन के सामने ट्रंप की अकड़ ढीली पड़ गई थी। स्विट्जरलैंड में चीन के आगे कैसे कंधे झुकाए घूम रहे थे? सबने देखा। उन्हें पता है कि अगर भारत किसी बड़े संघर्ष में उलझता है तो इसका असर सिर्फ भारत पर नहीं बल्कि पूरे यूरोप और अमेरिका पर भी पड़ेगा। इकोनॉमी की जो वाट लगेगी उसका अंदाजा शायद उन्हें है। इसीलिए अपनी साख बचाने के लिए भी ट्रंप यह शांति का राग अलाप रहे हैं। अब आते हैं उस असली चीज पर जिसने अमेरिका और चीन जैसे देशों की नींद उड़ा रखी है और वह है भारत का अपना देसी हथियार उद्योग। इस पूरे घटनाक्रम में अगर किसी का डंका बजा है तो वह है भारत के अपने बनाए हथियार। हमारे आकाश मिसाइल डिफेंस सिस्टम, क्यूआर सैम सिस्टम, बराकेट मिसाइल डिफेंस सिस्टम, एंटी ड्रोन सिस्टम, बीएएमडी मिसाइल डिफेंस सिस्टम, पिनाका मल्टीबैरल रॉकेट लांचर सिस्टम इन सब ने जो कमाल दिखाया है, वह दुनिया की नजरों में आ चुका है। भारत की आर्टिलरी, इसरो के ट्रैकिंग इक्विपमेंट और डीआरडीओ के बनाए दूसरे वेपंस ने साबित कर दिया कि भारत अब किसी पर निर्भर नहीं है और ब्राह्मोस मिसाइल। इस मिसाइल ने तो पाकिस्तान में ऐसा हलका मचाया कि दुश्मन के होश फाखता हो गए। भारत का हथियार बाजार इस वक्त ₹23,000 करोड़ का एक्सपोर्ट कर रहा है और यह तो बस शुरुआत है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कुछ ही सालों में यह आंकड़ा कई लाख करोड़ को पार कर जाएगा। सोचिए यह अमेरिका और चीन के लिए किसी सदमे से कम है क्या? उनका मार्केट जो हिलने लगा है, यह सिर्फ हथियारों की बात नहीं है। यह भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और तकनीकी कौशल की कहानी है। यह कहानी है एक नए भारत की जो अब दुनिया से आंख मिलाकर बात करता है अपने दम पर और यही बात कुछ देशों को हजम नहीं हो रही। अमेरिकी हथियारों का भारत बजा रहा था बैंड। भारत के हथियार पड़ रहे थे भारी। अब जरा उस पहलू पर भी गौर कीजिए जिसने अमेरिका को सबसे ज्यादा परेशान किया है। इस पूरे टकराव में एक बात शीशे की तरह साफ हो गई।

चले तो सिर्फ भारत के अपने हथियार, रूस के साथ मिलकर बनाए हथियार या फिर इजराइल और फ्रांस के हथियार। बाकी सबका क्या हुआ? अमेरिका की बड़ी-बड़ी मिसाइलें, उसके फाइटर जेट्स सब के सब या तो नाकाम रहे या फिर उनकी हवा निकल गई। चीन की तो पूरी तरह से भद पिट गई। उनका एचQ9 मिसाइल डिफेंस सिस्टम जिसे वह अपनी रीड की हड्डी बताते थे, उसे भारत और इजराइल के ड्रोंस ने खिलौने की तरह उड़ा दिया। वह उन्हें रोक तक नहीं पाया। चीन की सबसे घातक कही जाने वाली पीएल-15 मिसाइल का क्या हश्र हुआ। उसे ना सिर्फ भारत के अकैश मिसाइल सिस्टम ने हवा में ही गिरा दिया बल्कि वो मिसाइल जमीन पर बिल्कुल सही सलामत हालत में गिरी। और अब वह डीआरडीओ की लैब में है। सोचिए भारत अब इसकी रिवर्स इंजीनियरिंग करके चीन की पूरी मिसाइल टेक्नोलॉजी की परतें उधेड़ कर रख देगा। यह चीन के लिए कितना बड़ा झटका है इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं। रातोंरात उनकी टेक्नोलॉजी पुरानी हो गई। यही नहीं ईरान की न्यूक्लियर कैपेबल फाह 1और फाह 2 मिसाइलें जिन्हें बहुत खतरनाक बताया जा रहा था उन्हें भी हमारे आकाश सिस्टम ने पलक झपकते ही राख में मिला दिया। तुर्की के तथाकथित घातक ड्रोंस तो ऐसे गिरे जैसे कागज के खिलौने हो। दूसरी तरफ भारत के अपने ड्रोंस ने पाकिस्तान के अंदर तक घुसकर सटीक निशाने लगाए। तो क्या यह सब देखकर आपको नहीं लगता कि ट्रंप का अचानक शांतिदूत बनना सिर्फ अपनी और अपने मित्र देशों की इसी बेइज्जती पर पर्दा डालने की कोशिश है ताकि वो इसका क्रेडिट लेकर दुनिया का ध्यान इन नाकामियों से हटा सकें। यह एक बहुत बड़ा फेस सेविंग एक्सरसाइज हो सकता है।

पाकिस्तान की हालत पतली। नूर खान एयरबेस का सच। इस 2 रात भारत ने पाकिस्तान को ऐसी चोट पहुंचाई है जिसका दर्द उसे लंबे समय तक महसूस होगा। खबरें तो यहां तक हैं कि भारत पाकिस्तान के न्यूक्लियर कमांड को तबाह करने के बहुत करीब पहुंच गया था। पाकिस्तान के नूरखान एयरबेस पर जो भारतीय मिसाइलों ने तबाही मचाई, उससे इस्लामाबाद से लेकर रावलपिंडी तक हड़कंप मच गया। कहते हैं कि शहबाज शरीफ इतने कांप गए थे कि उन्होंने तुरंत अमेरिका को फोन घुमाया। क्यों? क्योंकि नूर खान एयरबेस पर भारतीय मिसाइलों का हमला पाकिस्तान के लिए एक भयानक सपने जैसा था। उनका एयर डिफेंस सिस्टम पूरी तरह से फेल हो गया था। वो भारतीय मिसाइलों को इंटरसेप्ट ही नहीं कर पा रहे थे। और यह तो तब था जब भारत ने अपने काफी कम तबाही मचाने वाले हथियारों का इस्तेमाल किया था। पाकिस्तान को डर सताने लगा था कि भारत अगले कुछ ही घंटों में उसके तमाम सैन्य ठिकानों और हथियार भंडारों को नेस्तनाबूद कर देगा। नूर खान एयरबेस कोई मामूली जगह नहीं है। यह पाकिस्तानी एयरफोर्स का सबसे संवेदनशील एयरबेस है और भारत ने वहां डीप स्ट्राइक की थी। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स ने भी माना कि पाकिस्तानी एयर डिफेंस और रडार सिस्टम भारतीय हमलों के सामने बेबस नजर आए। सबसे बड़ी बात नूर खान एयरबेस से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर पाकिस्तान का न्यूक्लियर कमांड ऑफिस का हेड क्वार्टर है स्ट्रेटेजिक प्लांस डिवीजन। यहीं से पाकिस्तान के लगभग 170 परमाणु हथियारों की देखरेख और कंट्रोल होता है। नूर खान पर हुए हमले को पाकिस्तान ने और यहां तक कि कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने भी पाकिस्तान के परमाणु कमांड पर हमले की अघोषित चेतावनी के तौर पर देखा। उन्हें लगा कि भारत का अगला निशाना यही एसपीडी हेडक्वार्टर हो सकता है। यह डर इतना वास्तविक था कि पाकिस्तान के हाथ-पांव फूल गए थे।

इस पूरी कहानी का सार क्या है? डॉनल्ड ट्रंप की मध्यस्थता की पेशकश, अमेरिकी हथियारों की नाकामी, चीनी टेक्नोलॉजी का पर्दाफाश और सबसे ऊपर भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का धमाकेदार प्रदर्शन। यह सब मिलकर एक नई तस्वीर बना रहे हैं। यह तस्वीर है एक ऐसे भारत की जो अब किसी के रहमोकरम पर नहीं है। एक ऐसा भारत जो अपनी सुरक्षा खुद करना जानता है और दुनिया को अपनी ताकत का एहसास कराना भी। अमेरिका और उसके साथी देश शायद इसी बात से घबराए हुए हैं। उन्हें डर है कि भारत का बढ़ता कद कहीं उनके ग्लोबल दबदबे को चुनौती ना दे दे। ट्रंप का खेल तो बस एक बहाना है। असली मकसद तो भारत के बढ़ते प्रभाव को किसी तरह रोकना या कम करना हो सकता है। यह लड़ाई सिर्फ हथियारों की नहीं बल्कि आत्मसम्मान और वैश्विक प्रतिष्ठा की भी है और इस लड़ाई में भारत ने साबित कर दिया है कि वह किसी से कम नहीं। कुछ सवाल बनते हैं कि तो क्या भारत अब वाकई दुनिया की नई महाशक्ति बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। क्या अमेरिका और चीन मिलकर इस विजय रथ को रोकने के लिए कोई नई और भी खतरनाक साजिश रचेंगे। आने वाले वक्त में भारत के स्वदेशी हथियार दुनिया के हथियार बाजार में और क्या-क्या हलका मचाने वाले हैं? और इस बदलते वैश्विक समीकरण का आप पर और हम पर क्या असर पड़ेगा? इन सभी सवालों के जवाब भारत ढूंढेंगा

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