राहुल गांधी ना सांसद रहेंगे ना एलओपी रहेंगे --निशिकांत दुबे ने की यह मांग
राहुल गांधी ना सांसद रहेंगे ना एलओपी रहेंगे --निशिकांत दुबे ने की यह मांग
राहुल गांधी ना सांसद रहेंगे ना एलओपी रहेंगे --निशिकांत दुबे ने की यह मांग
राहुल गांधी ना सांसद रहेंगे ना एलओपी रहेंगे --निशिकांत दुबे ने की यह मांग
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ सांसद निशिकांत दुबे ने अब राहुल गांधी के खिलाफ संसद में जो प्रस्ताव रखा है वो प्रस्ताव राहुल गांधी की न केवल संसद की सदस्यता बल्कि एलओपी के पद को भी खत्म कर देगा। यानी इस प्रस्ताव के संसद से पास होने के बाद राहुल गांधी ना सांसद रहेंगे ना एलओपी रहेंगे और इस प्रस्ताव में निशिकांत दुबे ने यह मांग भी की है कि इस व्यक्ति को चुनाव लड़ने से भी रोका जाए और इसे पास होने के लिए सिर्फ बहुमत की जरूरत है जो भारतीय जनता पार्टी के पास है। इसको पास करने के लिए संसद का एक साधारण बहुमत चाहिए और जब सदन में इसकी वोटिंग हो तो उपस्थित जो सदस्य हैं उनका दो तिह बहुमत होना चाहिए। यानी यहां राहुल गांधी पूरी तरीके से इस केस को हारते हुए नजर आ रहे हैं। और बड़ी बात तो इसमें यह है कि अब उन्हें बचाने के लिए ना तो सिबल और सिंघवी जैसे कुतर्क की वकीलों को कोई उन्हें मदद मिल सकती है ना ही गवई जैसे जजों का कोई आशीर्वाद उन्हें मिल सकता है। यह जो प्रस्ताव रखा गया है उसके पहले जो निशिकांत दुबे ने कहा और जिस भाषा में कहा उससे पूरी कांग्रेस हिल गई है। कांग्रेस को पता चल गया है कि अब भारतीय जनता पार्टी या मोदी सरकार राहुल गांधी पर किसी भी तरीके का रहम करने के मूड में नहीं है। क्योंकि दुबे ने राहुल को राहुल कहा और साफ शब्दों में कहा कि यह व्यक्ति देश विरोधी ताकतों के साथ मिलकर यानी जॉर्ज सोरोस के साथ मिलकर फोर्ट फाउंडेशन के साथ मिलकर यूएसए जैसी जो देश को तोड़ने की साजिश करने वाली विदेशी ताकतें हैं उनके साथ मिलकर देश के खिलाफ साजिश में शामिल है। यह व्यक्ति वियतनाम, कंबोडिया, थाईलैंड जैसे देशों में विदेशी ताकतों, विदेशी लोगों के साथ मिलता है और देश के खिलाफ साजिश करने का काम करता है। यह देश को बदनाम करता है। देश की सेना पर सवाल उठाता है। तमाम संसदीय पदों पर बैठे हुए व्यक्तियों पर झूठे आरोप लगाता है। इसलिए इस व्यक्ति की सदस्यता रद्द की जाए और इसको चुनाव लड़ने से भी रोका जाए।
अब आप समझ लीजिए कि निशिकांत दुबे जो प्रस्ताव लेकर आए हैं, वह केवल निशिकांत दुबे का एक प्राइवेट मेंबर के तौर पर प्रस्ताव नहीं है बल्कि यह भारत सरकार का प्रस्ताव है क्योंकि इसे संसद से पास होने के लिए बहुमत की जरूरत है और बहुमत पार्टी के पास है। यहां एक और बड़ी बात है कि राहुल गांधी अब इस मामले में इसलिए भी कुछ नहीं कर पाएंगे क्योंकि उन्हें अपने बचाव में जो कुछ कहना है, वो राहुल को ही कहना पड़ेगा, सबूत रखने पड़ेंगे और उन सारे आरोपों का खंडन करना पड़ेगा, जिनको के ऋषिकांत दुबे संसद में बड़ी आसानी से साबित कर सकते हैं। जॉर्ज सोरोज़ की संस्था से राहुल के क्या संबंध है यह सबको पता है। फ़ोर्ट फाउंडेशन से उनका जो एनजीओ है उनका और उनकी माता का वह पैसा लेता है यह सबको पता है। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के साथ कांग्रेस ने क्या एमओयू साइन किया था सबको पता है। राहुल विदेश जाकर किन लोगों से मिलते हैं ये भी सबको पता है। और इसको लेकर भारत की तमाम अदालतों में पहले केस भी चल चुके हैं। लेकिन हमारे देश की जो जुडिशरी है वह गांधी खानदान की इतनी ज्यादा एहसानमंद है कि कभी भी राहुल पर कोई आंच नहीं आ पाती है। दसियों साल केस चलते रहते हैं। मामलों को लटकाया जाता है। सुनवाई पे सुनवाई होती रहती है। तारीख पे तारीख और फिर जमानत पे जमानत। राहुल गांधी, सोनिया गांधी, राहुल का जीजा, रावट बटरा यह सब जमानत पर चल रहे हैं और यह जमानत अनंत काल तक चलती रहती है।
लेकिन संसद में जो सब्सटेंटिव मोशन है इसका मतलब यह है कि ये अब मामला लंबा नहीं चलेगा और भारतीय जनता पार्टी ने यह सब इसलिए किया क्योंकि अब जो पानी है वो सर से ऊपर गुजर गया है। राहुल गांधी अब तक बाहर थे तो उसमें मोदी जी की नरम दिली थी या उससे पहले जो बीजेपी के प्रधानमंत्री रहे थे अटल बिहारी वाजपेयी जी उन्होंने राहुल को बच्चा समझ के बचाने का काम किया था। लेकिन एक कहावत है ना कि जब हद से ज्यादा कुछ चीज होती है आचार्य चाणक्य ने कहा था कि अति सर्वत्र वयत यानी किसी चीज की अति हो जाती है तो फिर विध्वंस होता है। उनका एक पुराना उस चाणक्य नाटक का एक डायलॉग था कि राजसत्ता का या सत्ता का दुरुपयोग होने पर साधु सन्यासी भी क्रुद्ध हो जाते हैं। यानी वो लोग भी जो उदासीन है जिन्हें कुछ मतलब नहीं है उनको भी गुस्सा आने लगता है और राहुल के केस में यही होता हुआ दिखाई दे रहा है। अभी पिछले दिनों बिगनेस सिसर के केस को जिस तरीके से जज ने खारिज कर दिया कह दिया ये हमारी ताकत नहीं है। जबकि वो उसको आठ दिन तक सुनते रहे थे। उससे पहले गवई ने जो ड्रामा किया था कि सूरत की एक कोर्ट ने राहुल को सजा दी। हाई कोर्ट ने उसको बरकरार रखा और भारत के सुप्रीम कोर्ट के जज ने कह दिया कि नहीं राहुल गांधी को अगर सजा दे दी तो इनके इलाके का प्रतिनिधित्व कौन करेगा? यानी जो बात कानून में नहीं है, जो बात संविधान में नहीं है उन चीजों को लाकर भी यह लोग अब तक राहुल गांधी को बचाते रहे हैं। राहुल गांधी को अदालतों से सजा नहीं मिलती है। या तो जमानत मिलती है या थोड़ी बहुत डांटपट हो जाती है।
लेकिन अब क्योंकि संसद का मामला है और सबस्टेंटिव जो प्रस्ताव है इसके माध्यम से अब तक कई दर्जन सांसदों को बर्खास्त किया जा चुका है। तो इसका मतलब यह नहीं है कि इस प्रस्ताव से कुछ होगा नहीं। यह एक तरीके का अविश्वास प्रस्ताव है। लेकिन
अविश्वास प्रस्ताव जो संविधान में वर्णित पद है उन्हीं के खिलाफ लाया जाता है। जब कोई व्यक्ति अविश्वास प्रस्ताव के दायरे में नहीं होता है या सांसद होता है तो फिर इस तरीके से मूल प्रस्ताव यानी कि सब्सटेंटिव मोशन रखा जाता है। यहां एक और बड़ी बड़ा खेल कर दिया बीजेपी ने। पहले यह अफवाह उड़ाई गई कि राहुल के खिलाफ प्रिविलेज मोशन यानी कि विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव आ रहा है और इसका मतलब यह था कि राहुल ने जो कुछ संसद में कहा था उसको ऑथेंटिकेट करना पड़ेगा अन्यथा कार्यवाही होगी। इसमें राहुल की सदस्यता नहीं जा सकती थी। यानी इसे अगर मिलिट्री की भाषा में कहें तो मिलिट्री साइंस में एक टैक्टिक्स सिखाई जाती है। वो है डोजिंग की टैिक्स। डोज देना। यानी आप अपने शत्रु को दिखा कुछ रहे हैं और कच कुछ और अलग कर देते हैं। जैसे कि क्रिकेट में भी होता है कि अगर लेग स्पिनर ऑफ स्पिन फेंक दे तो भी बल्लेबाज आउट हो जाता है। चकमा खा जाता है और ऑफ स्पिनर अगर लेग स्पिनर फेंक देता है तो भी चकमा खा के बल्लेबाज आउट हो जाता है। यहां बीजेपी ने या फिर कहें कि बीजेपी ने निशिकांत दुबे के माध्यम से राहुल गांधी और पूरी कांग्रेस को डोज दे दी है,
चकमा दे दिया है। अगर वह प्रिविलेज मोशन लाते तो राहुल गांधी के खिलाफ बातें तो होती पर हटाए जाने की कोई संभावना नहीं थी। लेकिन यहांकि यह मूल प्रस्ताव है। सब्सटेंटिव मोशन है। इसलिए अब निशिकांत दुबे और राहुल गांधी के बीच वन टू वन मुकाबला होना है। चर्चा होगी सदन में। तमाम पार्टियों को बोलने का मौका मिलेगा। कुछ लोग राहुल के पक्ष में बोलेंगे, कुछ विपक्ष में बोलेंगे। लेकिन आरोप लगाना और उनका खंडन करने का जो काम है वो केवल और केवल राहुल गांधी ही कर सकते हैं। उससे आप समझ सकते हैं कि यह व्यक्ति अपनी बात को कैसे बचा पाएगा। क्योंकि राहुल गांधी अब तक जितने आरोप लगाए हैं वह सब के सब झूठे साबित हुए हैं। और निशिकांत दुबे जो आरोप लगा रहे हैं वो पूरी तरीके से तथ्यों पर आधारित है। राहुल गांधी से प्रतदा के साथ क्या संबंध है? राहुल गांधी जब यूएस जाते हैं तो जॉर्ज सोरोस की कंपनी या उसके एनजीओ से जुड़े हुए लोगों से मिलते हैं। ये बकायदा फोटो और वीडियो से साबित है। राहुल गांधी जब भारत यात्रा करते हैं तब भी वो जॉर्ज सोरस के जो लोग हैं उनके साथ मिलते जुलते बातचीत करते हुए दिखाई देते हैं। राहुल गांधी जब कंबोडिया, वियतनाम, थाईलैंड जैसे देशों में जाते हैं तो वो किन लोगों से मिलते हैं? ये भी वीडियो सबके सामने है। यानी निशिकांत दुबे को साबित करने के लिए बहुत सारे सबूत हैं और जब वो अपने इस आरोप को साबित कर देंगे तो फिर लोकसभा के जो अध्यक्ष हैं या तो ओम बिरला जी या कोई उनकी जगह और बैठा होगा तो उसे इस प्रस्ताव को स्वीकार करना ही होगा। उसके बाद सदन में इस पर वोटिंग हो सकती है, चर्चा हो सकती है। लेकिन उसका परिणाम भी पहले से सबको पता है। भारतीय जनता पार्टी एनडीए इस समय बहुमत में है और बहुमत की सरकार जो प्रस्ताव पास कराना चाहती है वो प्रस्ताव पास होता ही है। अगर
यह प्रस्ताव गिरेगा यानी सरकार ही गिर जाएगी। यानी इस प्रस्ताव के पास होने की 100% संभावना है। उसके बाद जांच कमेटी बनेगी। कमेटी इन आरोपों की जांच करेगी औरकि इनमें कोई भी आरोप झूठा नहीं है। सब कुछ शीशे की तरह साफ है। ओपन एंड सक्स केस है तो कुछ दिनों के बाद जब वो जांच कमेटी अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। उसके बाद संसद में इस पर फिर से वोटिंग होगी। और वोटिंग होने के बाद यह प्रस्ताव अगर स्वीकार कर लिया जाता है जिसकी पूरी संभावना है उसके बाद राहुल गांधी की संसद की सदस्यता भी जाएगी। एलओपी का पद भी जाएगा और उसके बाद उन्हें कोई
सुप्रीम कोर्ट का जज बचा भी नहीं पाएगा। यह सबसे बड़ा दर्द अब कांग्रेस को सता रहा है। क्योंकि किसी कोर्ट में जब मामला जाता है तो कांग्रेसी और गांधी परिवार इसलिए निश्चिंत हो जाता है कि जुडिशरी में उनके एहसानों तले दबे हुए तमाम जज हैं जो उनके ऊपर आंच नहीं आने देंगे। और अब तक इसी वजह से गांधी परिवार तमाम घोटालों में फंसने के बावजूद बचा हुआ और बड़े मौज के तरीके से जिंदगी जीता हुआ नजर आ रहा है। लेकिन संसद से पास हुए किसी भी प्रस्ताव को सुप्रीम कोर्ट पलट नहीं सकता है। यह भारत का संविधान कहता है। और अब तक जितने भी सब्सटेंटिव मोशन के द्वारा सांसदों को हटाया गया है, उन सबको सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत कभी नहीं मिली है। यह भी इतिहास है। यानी आप कह सकते हैं कि राहुल गांधी के खिलाफ जो कोर्ट की अब तक की एक भावना रही थी, उसको देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने बड़ा ही कैलकुलेटेड जाल बिछाया है। इस व्यक्ति को फंसाने के लिए, इसकी सांसदी खत्म करने के लिए और इसकी उददंडता पर लगाम लगाने के लिए।
राहुल गांधी ऐसा व्यक्ति है जो ना केवल देश के अंदर बल्कि विदेशों में जाकर भी भारत की जो संवैधानिक संस्थाएं हैं, प्रधानमंत्री है, सरकार है, राष्ट्रपति है ये सबका अपमान करता है। इसने कोई सीमा नहीं छोड़ी है। और ये केवल भारत में होता है कि कोई व्यक्ति अगर देश के खिलाफ बोलता है तब भी लोग उसके जिंदाबाद के नारे लगाने उसके पीछे खड़े हो जाते हैं। नहीं तो दुनिया के छोटे से छोटे और बड़े से बड़े देश में देश के खिलाफ बोलने वालों को स्वीकार नहीं किया जाता है। उनको या तो जेल में डाला जाता है या फिर उनके ऊपर और भी बड़ी कार्यवाही की जाती है। लेकिन हमारे देश में हमारे देश की जुडिशरी की वजह से जो लोग देश के खिलाफ बोलते हैं, देश को तोड़ने की बात करते हैं, देश के खिलाफ विद्रोह करते हैं। उनको भी रूल ऑफ लॉ के नाम पर संरक्षण देने का काम किया जाता है। उनकी खातिरदारी की जाती है। उनको बचाने का प्रयास किया जाता है और यह कहा जाता है कि संदेह से परे सबूत होने चाहिए। लेकिन संसद में संदेह से परे सबूतों की जरूरत नहीं है। वहां अगर फोटोग्राफ है, वीडियोग्राफी है और दूसरे सबूत है तो व्यक्ति बच नहीं पाएगा। यही चिंता अब सिबल सिंह भी और तमाम वकीलों को भी है कि अब वह राहुल बाबा को कैसे बचाएं क्योंकि निशिकांत दुबे इस बार राहुल की जिस तरीके से फजीहत करने वाले हैं उसका नमूना तो उन्होंने अपने जब प्रस्ताव रखा तभी दे दिया है।
संसद की प्रक्रिया है। एक दिन में यह प्रस्ताव स्वीकार हो जाएगा। उसके बाद निशिकांत दुबे विस्तार से राहुल गांधी की पूरी कुंडली संसद के सामने खोलेंगे। यह भी निश्चित है। उसकी भी लाइव टेलीकास्ट होगी। राहुल गांधी को बड़ा शौक है ना कैमरों के सामने देश के प्रधानमंत्री पर, चुनाव आयोग पर, दूसरी संवैधानिक संस्थाओं पर झूठे आरोप लगाने का। अब उन्हें सच्चे आरोप सबूतों के सह जो आरोप लगाए जाएंगे उनका प्रसारण होते हुए भी देखना पड़ेगा। कांग्रेस इस पर हो हल्ला मचा सकती है। हंगामा कर सकती है। विपक्षी पार्टियां उसका साथ दे सकती हैं। लेकिन किसी भी हालत
में अब इस प्रस्ताव से सब्सटेंटिव मोशन की जो आने वाले जो उसके प्रभाव है उनसे राहुल गांधी को नहीं बचा सकते हैं। यह बात लगभग निश्चित हो गई है। आप इस पूरे मामले पर क्या सोचते हैं? आपकी क्या राय है? लोगों की भी बहुत दिनों से यही इच्छा थी कि इस व्यक्ति के ऊपर कार्यवाई होनी ही चाहिए। हम भी बार-बार कहते रहे थे कि कारवाई होगी कैसे? जब कोर्ट इसको बचाने के लिए बैठे हैं तो इसका भी तोड़ अब भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने ढूंढ लिया है। एनडीए ने ढूंढ लिया है। और यह मामला इस पूरी समस्या का समाधान करके ही हटेगा। क्योंकि संसद में जब यह प्रस्ताव स्वीकार हो जाएगा उस पर वोटिंग होनी भी निश्चित है और उस वोटिंग में एनडीए का बहुमत काम आएगा यानी विपक्ष के नेता हल्ला मचाकर चीख कर चिल्लाकर हंगामा कर कर कुछ भी करके राहुल गांधी को बचा नहीं पाएंगे।टिव मोशन का एक शब्द आया है लोगों की समझ में नहीं आ रहा कि ये है क्या? तो हमने आपको विस्तार से बता दिया है। आप भी समझकर लोगों को समझाइए कि इसका मतलब क्या है और इसके परिणाम क्या होंगे।
जय हिंद जय भारत।
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