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Friday, May 30, 2025

विपक्ष सरकारें कपिल सिब्बल पर करोड़ खर्च करती है अली खान केस में कपिल सिब्बल को लाखों रुपए की फीस कौन दे रहा है?

विपक्ष सरकारें कपिल सिब्बल पर करोड़ खर्च करती है अली खान केस में कपिल सिब्बल को लाखों रुपए की फीस कौन दे रहा है?
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विपक्ष सरकारें कपिल सिब्बल पर करोड़ खर्च करती है अली खान केस में कपिल सिब्बल को लाखों रुपए की फीस कौन दे रहा है?

 मोदी सरकार के हर फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले विपक्ष के चहेते वकील कपिल सिब्बल को लेकर बड़ी बात बाहर आई है कि कैसे विपक्ष की सरकारें कपिल सिब्बल पर मोटी रकम खर्च करती है। कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंह भी विपक्ष के दो ऐसे वकील हैं जो विपक्ष की तरफ से लगभग हर मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाते हैं। लेकिन लोगों के मन में यह सवाल हमेशा आता है कि सिब्बल और सिंघवी कितनी फीस लेते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक बार पेश होने के लिए कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंह भी लाखों में चार्ज करते हैं। दोनों देश के महंगे वकीलों की लिस्ट में शामिल हैं। मोदी सरकार के खिलाफ नए वफ कानून को लेकर भी कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंह भी विपक्ष की तरफ से दलीलें दे रहे हैं। वहीं इस बार एक मामले में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल की दाल कोर्ट में नहीं गली है। इसके अलावा कपिल सिब्बल की फीस से जुड़ी एक खबर आई है। सुप्रीम कोर्ट में अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर लिखे पोस्ट के मामले में सुनवाई हुई।

इस दौरान अली खान की तरफ से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि एसआईटी कोर्ट के आदेश का गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने इस आदेश की आड़ में बेवजह दूसरी चीजों की भी जांच करनी शुरू कर दी है। इसके मद्देनजर कोर्ट ने जांच को सीमित रखने का आदेश दिया है। वहीं कपिल सिबल ने कोर्ट से आग्रह किया है कि वह उस शर्त को हटा दें जिसके तहत जांच के विषय से जुड़े विषय पर ऑनलाइन पोस्ट करने पर मनाही थी। कपिल सिबल ने कहा कि वह इस बारे में कोर्ट को आश्वासन देने को तैयार हैं कि वह ऐसा कोई पोस्ट नहीं करेंगे। वह समझदार व्यक्ति हैं। यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं। हालांकि कपिल सिबल को झटका देते हुए कोर्ट ने अभी इससे इंकार कर दिया और कहा कि अभी यह शर्त रहने दीजिए। आप अगली तारीख पर हमें ध्यान दिलाएंगे। वैसे भी हमने अपने आदेश के जरिए सिर्फ इस विषय पर लिखने से रोका है। दूसरे विषयों पर तो वह लिख ही सकते हैं। कोर्ट अगली सुनवाई जुलाई में करेगा तब तक अली खान को मिली अंतरिम जमानत बरकरार रहेगी। कोर्ट ने अली खान को भी जांच में सहयोग करने को कहा है।

वहीं दूसरी तरफ एक खबर यह भी है कि केरल सरकार ने कपिल सिब्बल को सुप्रीम कोर्ट में दो प्रमुख मामलों में पेश होने के लिए 1.37 करोड़ से अधिक का भुगतान किया है। इसमें से एक मामले में केंद्र द्वारा राज्य पर लगाई गई कर्ज सीमा को चुनौती देने और दूसरा मामला कूटनीतिक चैनल के सोना तस्करी मामले में ईडी की गतिविधियों का विरोध करने का है। नवंबर 2024 में सोना तस्करी मामले की सुनवाई के दौरान ईडी की याचिका जिसमें ट्रायल को केरल से बेंगलुरु स्थानांतरित करने की मांग की गई थी के खिलाफ कपिल सिब्बल की पेशी के लिए 15.5 लाख की मंजूरी दी गई थी। कुल मिलाकर कपिल सिब्बल को इस मामले में पेश होने के लिए 46.5 लाख का भुगतान किया गया। व इसके अलावा कपिल सिब्बल ने एक दूसरे मामले में भी केरल का प्रतिनिधित्व किया था। जिसमें राज्य ने केंद्र सरकार की कर्ज सीमा को चुनौती दी थी। इस मामले के लिए सिबल को अब तक 90.5 लाख का भुगतान किया जा चुका है। इन दोनों मामलों में कुल मिलाकर 1.37 करोड़ का भुगतान किया गया है। जो राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के बीच जारी कानूनी लड़ाई के बीच ध्यान आकर्षित कर रहा है। तो देखा कैसे विपक्ष की राज्य सरकारों की तरफ से पक्ष रखने के लिए कपिल सिब्बल मोटी रकम चार्ज करते हैं। मोदी सरकार के नए WAQF कानून के खिलाफ भी कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में दलीलें दे रहे हैं कि कैसे भी करके इस कानून पर स्टे लग जाए। इसके अलावा मोदी विरोधी लोगों की तरफ से भी वह सुप्रीम कोर्ट में हाजिर होते रहते हैं। अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान के मामले में भी वह उनका बचाव कर रहे हैं।अली खान केस के लिए कपिल सिब्बल को लाखों रुपए की फीस कौन दे रहा है? अली खान की तरफ से सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए एफआईआर रद्द करने की मांग की है। वहीं पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अली खान को अंतरिम जमानत दे दी थी। लेकिन मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर जांच करने और कोर्ट को रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। व शर्तों में बदलाव करने की मांग भी कपिल सिब्बल कर रहे थे। लेकिन कोर्ट ने इससे इंकार कर दिया है।


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विपक्ष सरकारें कपिल सिब्बल पर करोड़ खर्च करती है अली खान केस में कपिल सिब्बल को लाखों रुपए की फीस कौन दे रहा है?

 मोदी सरकार के हर फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले विपक्ष के चहेते वकील कपिल सिब्बल को लेकर बड़ी बात बाहर आई है कि कैसे विपक्ष की सरकारें कपिल सिब्बल पर मोटी रकम खर्च करती है। कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंह भी विपक्ष के दो ऐसे वकील हैं जो विपक्ष की तरफ से लगभग हर मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाते हैं। लेकिन लोगों के मन में यह सवाल हमेशा आता है कि सिब्बल और सिंघवी कितनी फीस लेते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक बार पेश होने के लिए कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंह भी लाखों में चार्ज करते हैं। दोनों देश के महंगे वकीलों की लिस्ट में शामिल हैं। मोदी सरकार के खिलाफ नए वफ कानून को लेकर भी कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंह भी विपक्ष की तरफ से दलीलें दे रहे हैं। वहीं इस बार एक मामले में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल की दाल कोर्ट में नहीं गली है। इसके अलावा कपिल सिब्बल की फीस से जुड़ी एक खबर आई है। सुप्रीम कोर्ट में अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर लिखे पोस्ट के मामले में सुनवाई हुई।

इस दौरान अली खान की तरफ से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि एसआईटी कोर्ट के आदेश का गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने इस आदेश की आड़ में बेवजह दूसरी चीजों की भी जांच करनी शुरू कर दी है। इसके मद्देनजर कोर्ट ने जांच को सीमित रखने का आदेश दिया है। वहीं कपिल सिबल ने कोर्ट से आग्रह किया है कि वह उस शर्त को हटा दें जिसके तहत जांच के विषय से जुड़े विषय पर ऑनलाइन पोस्ट करने पर मनाही थी। कपिल सिबल ने कहा कि वह इस बारे में कोर्ट को आश्वासन देने को तैयार हैं कि वह ऐसा कोई पोस्ट नहीं करेंगे। वह समझदार व्यक्ति हैं। यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं। हालांकि कपिल सिबल को झटका देते हुए कोर्ट ने अभी इससे इंकार कर दिया और कहा कि अभी यह शर्त रहने दीजिए। आप अगली तारीख पर हमें ध्यान दिलाएंगे। वैसे भी हमने अपने आदेश के जरिए सिर्फ इस विषय पर लिखने से रोका है। दूसरे विषयों पर तो वह लिख ही सकते हैं। कोर्ट अगली सुनवाई जुलाई में करेगा तब तक अली खान को मिली अंतरिम जमानत बरकरार रहेगी। कोर्ट ने अली खान को भी जांच में सहयोग करने को कहा है।

वहीं दूसरी तरफ एक खबर यह भी है कि केरल सरकार ने कपिल सिब्बल को सुप्रीम कोर्ट में दो प्रमुख मामलों में पेश होने के लिए 1.37 करोड़ से अधिक का भुगतान किया है। इसमें से एक मामले में केंद्र द्वारा राज्य पर लगाई गई कर्ज सीमा को चुनौती देने और दूसरा मामला कूटनीतिक चैनल के सोना तस्करी मामले में ईडी की गतिविधियों का विरोध करने का है। नवंबर 2024 में सोना तस्करी मामले की सुनवाई के दौरान ईडी की याचिका जिसमें ट्रायल को केरल से बेंगलुरु स्थानांतरित करने की मांग की गई थी के खिलाफ कपिल सिब्बल की पेशी के लिए 15.5 लाख की मंजूरी दी गई थी। कुल मिलाकर कपिल सिब्बल को इस मामले में पेश होने के लिए 46.5 लाख का भुगतान किया गया। व इसके अलावा कपिल सिब्बल ने एक दूसरे मामले में भी केरल का प्रतिनिधित्व किया था। जिसमें राज्य ने केंद्र सरकार की कर्ज सीमा को चुनौती दी थी। इस मामले के लिए सिबल को अब तक 90.5 लाख का भुगतान किया जा चुका है। इन दोनों मामलों में कुल मिलाकर 1.37 करोड़ का भुगतान किया गया है। जो राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के बीच जारी कानूनी लड़ाई के बीच ध्यान आकर्षित कर रहा है। तो देखा कैसे विपक्ष की राज्य सरकारों की तरफ से पक्ष रखने के लिए कपिल सिब्बल मोटी रकम चार्ज करते हैं। मोदी सरकार के नए WAQF कानून के खिलाफ भी कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में दलीलें दे रहे हैं कि कैसे भी करके इस कानून पर स्टे लग जाए। इसके अलावा मोदी विरोधी लोगों की तरफ से भी वह सुप्रीम कोर्ट में हाजिर होते रहते हैं। अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान के मामले में भी वह उनका बचाव कर रहे हैं।अली खान केस के लिए कपिल सिब्बल को लाखों रुपए की फीस कौन दे रहा है? अली खान की तरफ से सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए एफआईआर रद्द करने की मांग की है। वहीं पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अली खान को अंतरिम जमानत दे दी थी। लेकिन मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर जांच करने और कोर्ट को रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। व शर्तों में बदलाव करने की मांग भी कपिल सिब्बल कर रहे थे। लेकिन कोर्ट ने इससे इंकार कर दिया है।


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विपक्ष सरकारें कपिल सिब्बल पर करोड़ खर्च करती है अली खान केस में कपिल सिब्बल को लाखों रुपए की फीस कौन दे रहा है?

विपक्ष सरकारें कपिल सिब्बल पर करोड़ खर्च करती है अली खान केस में कपिल सिब्बल को लाखों रुपए की फीस कौन दे रहा है?
विपक्ष सरकारें कपिल सिब्बल पर करोड़ खर्च करती है अली खान केस में कपिल सिब्बल को लाखों रुपए की फीस कौन दे रहा है?

 मोदी सरकार के हर फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले विपक्ष के चहेते वकील कपिल सिब्बल को लेकर बड़ी बात बाहर आई है कि कैसे विपक्ष की सरकारें कपिल सिब्बल पर मोटी रकम खर्च करती है। कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंह भी विपक्ष के दो ऐसे वकील हैं जो विपक्ष की तरफ से लगभग हर मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाते हैं। लेकिन लोगों के मन में यह सवाल हमेशा आता है कि सिब्बल और सिंघवी कितनी फीस लेते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक बार पेश होने के लिए कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंह भी लाखों में चार्ज करते हैं। दोनों देश के महंगे वकीलों की लिस्ट में शामिल हैं। मोदी सरकार के खिलाफ नए वफ कानून को लेकर भी कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंह भी विपक्ष की तरफ से दलीलें दे रहे हैं। वहीं इस बार एक मामले में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल की दाल कोर्ट में नहीं गली है। इसके अलावा कपिल सिब्बल की फीस से जुड़ी एक खबर आई है। सुप्रीम कोर्ट में अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर लिखे पोस्ट के मामले में सुनवाई हुई।

इस दौरान अली खान की तरफ से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि एसआईटी कोर्ट के आदेश का गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने इस आदेश की आड़ में बेवजह दूसरी चीजों की भी जांच करनी शुरू कर दी है। इसके मद्देनजर कोर्ट ने जांच को सीमित रखने का आदेश दिया है। वहीं कपिल सिबल ने कोर्ट से आग्रह किया है कि वह उस शर्त को हटा दें जिसके तहत जांच के विषय से जुड़े विषय पर ऑनलाइन पोस्ट करने पर मनाही थी। कपिल सिबल ने कहा कि वह इस बारे में कोर्ट को आश्वासन देने को तैयार हैं कि वह ऐसा कोई पोस्ट नहीं करेंगे। वह समझदार व्यक्ति हैं। यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं। हालांकि कपिल सिबल को झटका देते हुए कोर्ट ने अभी इससे इंकार कर दिया और कहा कि अभी यह शर्त रहने दीजिए। आप अगली तारीख पर हमें ध्यान दिलाएंगे। वैसे भी हमने अपने आदेश के जरिए सिर्फ इस विषय पर लिखने से रोका है। दूसरे विषयों पर तो वह लिख ही सकते हैं। कोर्ट अगली सुनवाई जुलाई में करेगा तब तक अली खान को मिली अंतरिम जमानत बरकरार रहेगी। कोर्ट ने अली खान को भी जांच में सहयोग करने को कहा है।

वहीं दूसरी तरफ एक खबर यह भी है कि केरल सरकार ने कपिल सिब्बल को सुप्रीम कोर्ट में दो प्रमुख मामलों में पेश होने के लिए 1.37 करोड़ से अधिक का भुगतान किया है। इसमें से एक मामले में केंद्र द्वारा राज्य पर लगाई गई कर्ज सीमा को चुनौती देने और दूसरा मामला कूटनीतिक चैनल के सोना तस्करी मामले में ईडी की गतिविधियों का विरोध करने का है। नवंबर 2024 में सोना तस्करी मामले की सुनवाई के दौरान ईडी की याचिका जिसमें ट्रायल को केरल से बेंगलुरु स्थानांतरित करने की मांग की गई थी के खिलाफ कपिल सिब्बल की पेशी के लिए 15.5 लाख की मंजूरी दी गई थी। कुल मिलाकर कपिल सिब्बल को इस मामले में पेश होने के लिए 46.5 लाख का भुगतान किया गया। व इसके अलावा कपिल सिब्बल ने एक दूसरे मामले में भी केरल का प्रतिनिधित्व किया था। जिसमें राज्य ने केंद्र सरकार की कर्ज सीमा को चुनौती दी थी। इस मामले के लिए सिबल को अब तक 90.5 लाख का भुगतान किया जा चुका है। इन दोनों मामलों में कुल मिलाकर 1.37 करोड़ का भुगतान किया गया है। जो राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के बीच जारी कानूनी लड़ाई के बीच ध्यान आकर्षित कर रहा है। तो देखा कैसे विपक्ष की राज्य सरकारों की तरफ से पक्ष रखने के लिए कपिल सिब्बल मोटी रकम चार्ज करते हैं। मोदी सरकार के नए WAQF कानून के खिलाफ भी कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में दलीलें दे रहे हैं कि कैसे भी करके इस कानून पर स्टे लग जाए। इसके अलावा मोदी विरोधी लोगों की तरफ से भी वह सुप्रीम कोर्ट में हाजिर होते रहते हैं। अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान के मामले में भी वह उनका बचाव कर रहे हैं।अली खान केस के लिए कपिल सिब्बल को लाखों रुपए की फीस कौन दे रहा है? अली खान की तरफ से सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए एफआईआर रद्द करने की मांग की है। वहीं पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अली खान को अंतरिम जमानत दे दी थी। लेकिन मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर जांच करने और कोर्ट को रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। व शर्तों में बदलाव करने की मांग भी कपिल सिब्बल कर रहे थे। लेकिन कोर्ट ने इससे इंकार कर दिया है।


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विपक्ष सरकारें कपिल सिब्बल पर करोड़ खर्च करती है अली खान केस में कपिल सिब्बल को लाखों रुपए की फीस कौन दे रहा है?

 मोदी सरकार के हर फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले विपक्ष के चहेते वकील कपिल सिब्बल को लेकर बड़ी बात बाहर आई है कि कैसे विपक्ष की सरकारें कपिल सिब्बल पर मोटी रकम खर्च करती है। कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंह भी विपक्ष के दो ऐसे वकील हैं जो विपक्ष की तरफ से लगभग हर मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाते हैं। लेकिन लोगों के मन में यह सवाल हमेशा आता है कि सिब्बल और सिंघवी कितनी फीस लेते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक बार पेश होने के लिए कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंह भी लाखों में चार्ज करते हैं। दोनों देश के महंगे वकीलों की लिस्ट में शामिल हैं। मोदी सरकार के खिलाफ नए वफ कानून को लेकर भी कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंह भी विपक्ष की तरफ से दलीलें दे रहे हैं। वहीं इस बार एक मामले में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल की दाल कोर्ट में नहीं गली है। इसके अलावा कपिल सिब्बल की फीस से जुड़ी एक खबर आई है। सुप्रीम कोर्ट में अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर लिखे पोस्ट के मामले में सुनवाई हुई।

इस दौरान अली खान की तरफ से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि एसआईटी कोर्ट के आदेश का गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने इस आदेश की आड़ में बेवजह दूसरी चीजों की भी जांच करनी शुरू कर दी है। इसके मद्देनजर कोर्ट ने जांच को सीमित रखने का आदेश दिया है। वहीं कपिल सिबल ने कोर्ट से आग्रह किया है कि वह उस शर्त को हटा दें जिसके तहत जांच के विषय से जुड़े विषय पर ऑनलाइन पोस्ट करने पर मनाही थी। कपिल सिबल ने कहा कि वह इस बारे में कोर्ट को आश्वासन देने को तैयार हैं कि वह ऐसा कोई पोस्ट नहीं करेंगे। वह समझदार व्यक्ति हैं। यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं। हालांकि कपिल सिबल को झटका देते हुए कोर्ट ने अभी इससे इंकार कर दिया और कहा कि अभी यह शर्त रहने दीजिए। आप अगली तारीख पर हमें ध्यान दिलाएंगे। वैसे भी हमने अपने आदेश के जरिए सिर्फ इस विषय पर लिखने से रोका है। दूसरे विषयों पर तो वह लिख ही सकते हैं। कोर्ट अगली सुनवाई जुलाई में करेगा तब तक अली खान को मिली अंतरिम जमानत बरकरार रहेगी। कोर्ट ने अली खान को भी जांच में सहयोग करने को कहा है।

वहीं दूसरी तरफ एक खबर यह भी है कि केरल सरकार ने कपिल सिब्बल को सुप्रीम कोर्ट में दो प्रमुख मामलों में पेश होने के लिए 1.37 करोड़ से अधिक का भुगतान किया है। इसमें से एक मामले में केंद्र द्वारा राज्य पर लगाई गई कर्ज सीमा को चुनौती देने और दूसरा मामला कूटनीतिक चैनल के सोना तस्करी मामले में ईडी की गतिविधियों का विरोध करने का है। नवंबर 2024 में सोना तस्करी मामले की सुनवाई के दौरान ईडी की याचिका जिसमें ट्रायल को केरल से बेंगलुरु स्थानांतरित करने की मांग की गई थी के खिलाफ कपिल सिब्बल की पेशी के लिए 15.5 लाख की मंजूरी दी गई थी। कुल मिलाकर कपिल सिब्बल को इस मामले में पेश होने के लिए 46.5 लाख का भुगतान किया गया। व इसके अलावा कपिल सिब्बल ने एक दूसरे मामले में भी केरल का प्रतिनिधित्व किया था। जिसमें राज्य ने केंद्र सरकार की कर्ज सीमा को चुनौती दी थी। इस मामले के लिए सिबल को अब तक 90.5 लाख का भुगतान किया जा चुका है। इन दोनों मामलों में कुल मिलाकर 1.37 करोड़ का भुगतान किया गया है। जो राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के बीच जारी कानूनी लड़ाई के बीच ध्यान आकर्षित कर रहा है। तो देखा कैसे विपक्ष की राज्य सरकारों की तरफ से पक्ष रखने के लिए कपिल सिब्बल मोटी रकम चार्ज करते हैं। मोदी सरकार के नए WAQF कानून के खिलाफ भी कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में दलीलें दे रहे हैं कि कैसे भी करके इस कानून पर स्टे लग जाए। इसके अलावा मोदी विरोधी लोगों की तरफ से भी वह सुप्रीम कोर्ट में हाजिर होते रहते हैं। अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान के मामले में भी वह उनका बचाव कर रहे हैं।अली खान केस के लिए कपिल सिब्बल को लाखों रुपए की फीस कौन दे रहा है? अली खान की तरफ से सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए एफआईआर रद्द करने की मांग की है। वहीं पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अली खान को अंतरिम जमानत दे दी थी। लेकिन मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर जांच करने और कोर्ट को रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। व शर्तों में बदलाव करने की मांग भी कपिल सिब्बल कर रहे थे। लेकिन कोर्ट ने इससे इंकार कर दिया है।


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विपक्ष सरकारें कपिल सिब्बल पर करोड़ खर्च करती है अली खान केस में कपिल सिब्बल को लाखों रुपए की फीस कौन दे रहा है?

 मोदी सरकार के हर फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाले विपक्ष के चहेते वकील कपिल सिब्बल को लेकर बड़ी बात बाहर आई है कि कैसे विपक्ष की सरकारें कपिल सिब्बल पर मोटी रकम खर्च करती है। कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंह भी विपक्ष के दो ऐसे वकील हैं जो विपक्ष की तरफ से लगभग हर मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच जाते हैं। लेकिन लोगों के मन में यह सवाल हमेशा आता है कि सिब्बल और सिंघवी कितनी फीस लेते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक बार पेश होने के लिए कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंह भी लाखों में चार्ज करते हैं। दोनों देश के महंगे वकीलों की लिस्ट में शामिल हैं। मोदी सरकार के खिलाफ नए वफ कानून को लेकर भी कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंह भी विपक्ष की तरफ से दलीलें दे रहे हैं। वहीं इस बार एक मामले में सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल की दाल कोर्ट में नहीं गली है। इसके अलावा कपिल सिब्बल की फीस से जुड़ी एक खबर आई है। सुप्रीम कोर्ट में अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान के ऑपरेशन सिंदूर को लेकर लिखे पोस्ट के मामले में सुनवाई हुई।

इस दौरान अली खान की तरफ से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि एसआईटी कोर्ट के आदेश का गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने इस आदेश की आड़ में बेवजह दूसरी चीजों की भी जांच करनी शुरू कर दी है। इसके मद्देनजर कोर्ट ने जांच को सीमित रखने का आदेश दिया है। वहीं कपिल सिबल ने कोर्ट से आग्रह किया है कि वह उस शर्त को हटा दें जिसके तहत जांच के विषय से जुड़े विषय पर ऑनलाइन पोस्ट करने पर मनाही थी। कपिल सिबल ने कहा कि वह इस बारे में कोर्ट को आश्वासन देने को तैयार हैं कि वह ऐसा कोई पोस्ट नहीं करेंगे। वह समझदार व्यक्ति हैं। यूनिवर्सिटी में पढ़ाते हैं। हालांकि कपिल सिबल को झटका देते हुए कोर्ट ने अभी इससे इंकार कर दिया और कहा कि अभी यह शर्त रहने दीजिए। आप अगली तारीख पर हमें ध्यान दिलाएंगे। वैसे भी हमने अपने आदेश के जरिए सिर्फ इस विषय पर लिखने से रोका है। दूसरे विषयों पर तो वह लिख ही सकते हैं। कोर्ट अगली सुनवाई जुलाई में करेगा तब तक अली खान को मिली अंतरिम जमानत बरकरार रहेगी। कोर्ट ने अली खान को भी जांच में सहयोग करने को कहा है।

वहीं दूसरी तरफ एक खबर यह भी है कि केरल सरकार ने कपिल सिब्बल को सुप्रीम कोर्ट में दो प्रमुख मामलों में पेश होने के लिए 1.37 करोड़ से अधिक का भुगतान किया है। इसमें से एक मामले में केंद्र द्वारा राज्य पर लगाई गई कर्ज सीमा को चुनौती देने और दूसरा मामला कूटनीतिक चैनल के सोना तस्करी मामले में ईडी की गतिविधियों का विरोध करने का है। नवंबर 2024 में सोना तस्करी मामले की सुनवाई के दौरान ईडी की याचिका जिसमें ट्रायल को केरल से बेंगलुरु स्थानांतरित करने की मांग की गई थी के खिलाफ कपिल सिब्बल की पेशी के लिए 15.5 लाख की मंजूरी दी गई थी। कुल मिलाकर कपिल सिब्बल को इस मामले में पेश होने के लिए 46.5 लाख का भुगतान किया गया। व इसके अलावा कपिल सिब्बल ने एक दूसरे मामले में भी केरल का प्रतिनिधित्व किया था। जिसमें राज्य ने केंद्र सरकार की कर्ज सीमा को चुनौती दी थी। इस मामले के लिए सिबल को अब तक 90.5 लाख का भुगतान किया जा चुका है। इन दोनों मामलों में कुल मिलाकर 1.37 करोड़ का भुगतान किया गया है। जो राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के बीच जारी कानूनी लड़ाई के बीच ध्यान आकर्षित कर रहा है। तो देखा कैसे विपक्ष की राज्य सरकारों की तरफ से पक्ष रखने के लिए कपिल सिब्बल मोटी रकम चार्ज करते हैं। मोदी सरकार के नए WAQF कानून के खिलाफ भी कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट में दलीलें दे रहे हैं कि कैसे भी करके इस कानून पर स्टे लग जाए। इसके अलावा मोदी विरोधी लोगों की तरफ से भी वह सुप्रीम कोर्ट में हाजिर होते रहते हैं। अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान के मामले में भी वह उनका बचाव कर रहे हैं।अली खान केस के लिए कपिल सिब्बल को लाखों रुपए की फीस कौन दे रहा है? अली खान की तरफ से सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए एफआईआर रद्द करने की मांग की है। वहीं पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अली खान को अंतरिम जमानत दे दी थी। लेकिन मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर जांच करने और कोर्ट को रिपोर्ट देने का आदेश दिया था। व शर्तों में बदलाव करने की मांग भी कपिल सिब्बल कर रहे थे। लेकिन कोर्ट ने इससे इंकार कर दिया है।

Thursday, May 29, 2025

पीएम क्या बीजेपी नियम है 75 वर्ष पार वाले उसको मानेंगे या संघ तय अध्यक्ष संजय जोशी ?

पीएम क्या बीजेपी नियम है 75 वर्ष पार वाले उसको मानेंगे या संघ तय अध्यक्ष संजय जोशी ?

 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75 साल के हो जाएंगे और बीजेपी का यह नियम है कि 75 पार तो आप रिटायर माने जाएंगे। तो क्या पीएम अपने इस नियम को मानेंगे या फिर बीजेपी के इस नियम को मानेंगे? पीएम क्या बीजेपी जो नियम है 75 वर्ष पार वाले उस नियम को मानेंगे? इसके अलावा राजनाथ सिंह को लेकर क्या खबरें सामने आ रही हैं?

क्या होने वाला है भारतीय जनता पार्टी में। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान बहुत दिनों से अटका पड़ा है। नहीं हो पा रहा है राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान और क्या अब राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान होने जा रहा है? क्योंकि जब मैं आपसे इस मसले पर बात कर रहा हूं तो एक खबर और आपको दे रहा हूं कि 31 मई और 1 जून इन दो तारीखों में दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की एक बड़ी मीटिंग है। इस मीटिंग में प्रधानमंत्री भी होंगे, अमित शाह भी होंगे और कहा जा रहा है कुछ बुद्धिजीवी, कुछ इंटेलेक्चुअल्स, कुछ बड़े लोग बीजेपी के कुछ बड़े नेता संघ के कुछ लोग इस बैठक में शामिल हो सकते हैं। 31 मई और 1 जून को यह बैठक है। 31 मई को प्रधानमंत्री का मध्य प्रदेश का दौरा भी है। लेकिन, क्या होने वाला है? क्या कोई बड़ी हलचल है? इस बीच मैं आपको दो बातें और बताना चाहता हूं। दो नाम अचानक से चर्चाओं में है।

जनवरी 2024 में जेपी नड्डा का कार्यकाल खत्म होता है। बार-बार एक्सटेंशन दिया जाता है। आखिरी एक्सटेंशन 20 अप्रैल 2025 तक था। उसके बाद इस पर कोई खबर नहीं आई। लेकिन जेपी नड्डा अपने पद पर बने हुए हैं। पहली बात। अब यह कहा जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष कौन होगा? नरेंद्र मोदी और अमित शाह अपना अध्यक्ष बनाना चाहते हैं। संघ की लॉबी अपना अध्यक्ष बनाना चाहती है। संघ की तरफ से संजय जोशी पर अड़ा है

कुछ नाम मीडिया ने आगे कर दिए। कुछ नाम गुजरात लॉबी ने आगे उछाल दिए। लेकिन संघ अपने नामों पर अड़ा है संजय जोशी । लेकिन भारतीय जनता पार्टी में अभी तक राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो सकी है। बिहार का चुनाव आ रहा है।अब दो बातें मैं आपको बताता हूं। राजनाथ सिंह इस देश के रक्षा मंत्री हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारतीय जनता पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाने में जो महत्वपूर्ण किरदार था वो राजनाथ सिंह का था। लेकिन आपने देखा कि उसके बाद से राजनाथ सिंह कैसे कैसे साइडलाइन हुए। एक मंत्री बनकर रह गए। पहले कार्यकाल में तो गृह मंत्री भी रहे। उसके बाद से तो रक्षा मंत्री हो गए। अब लेकिन जब ऑपरेशन सिंदूर हुआ तो जो मीडिया है वो पूरी इमेज बिल्डिंग कर रहा था प्रधानमंत्री की। आपने देखा हमने देखा सबने देखा इमेज बिल्डिंग की जा रही थी। लेकिन अचानक से राजनाथ सिंह की तारीफों के पुल बांधे जाने लगे हैं। 25 मई को देश के एक बड़े चैनल ने राजनाथ सिंह पर बाकायदा एक डॉक्यूमेंट्री दिखाई है। क्यों? सवाल यह है कि राजनाथ सिंह की इमेज बिल्डिंग क्यों की जा रही है? राजनाथ सिंह पहले भी बीजेपी के अध्यक्ष दो बार रह चुके हैं। क्या राजनाथ सिंह तीसरी बार बनेंगे? बिल्कुल नहीं।

तो क्या राजनाथ सिंह 17 सितंबर के बाद नरेंद्र मोदी रिप्लेस करेंगे? एक और नाम है शिवराज सिंह चौहान। केंद्रीय मंत्री हैं। कृषि मंत्रालय उनके पास है। लंबे वक्त तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे।लेकिन शिवराज सिंह चौहान को मध्य प्रदेश से हटाकर दिल्ली बुला लिया गया। और उनकी जगह मोहन यादव मोहन यादव मुख्यमंत्री बन गए लेकिन शिवराज सिंह चौहान का जो अटूट प्रेम मध्य प्रदेश से है वो अभी भी टूटा नहीं है तो शिवराज सिंह चौहान तो इन दिनों बहाने तलाशते हैं भोपाल जाने के इंदौर जाने के खंडवा जाने के उज्जैन जाने के कोई बहाना मिल जाए और मध्य प्रदेश का दौरा लग जाए तो अब वो विकसित भारत तिरंगा यात्रा लेकर पहुंच गए साथ साधना सिंह चौहान भी थी उनकी धर्मपत्नी एक और नया चेहरा था साथ में और वो चेहरा था शिवराज सिंह चौहान की बहू का। वो भी उनके साथ-साथ नजर आई।


राजनीतिक विश्लेषक ने एक खबर ट्वीट कर दी है। उन्होंने जो बात लिखी है मैं अक्षरश उनकी बात आपको बता रहा हूं। वो लिखते हैं कि मोदी की आपदा में संघ को मिला अवसर। पहलगाम हमले के बाद तेजी से हुए घटनाक्रम में मोदी सरकार की कूटनीति, विदेश नीति, सामरिक नीति और राजनीति की कलाई खुल गई है। आज मोदी अपने जीवन के सबसे बड़े संकट में फंस गए हैं। मोदी की इस आपदा में संघ अपने लिए दो बड़े अवसर देख रहा है। मेरे सूत्रों के मुताबिक संघ के भीतर चर्चा हो रही है कि मोदी को हटाने का सबसे अच्छा समय है। अतः उन्हें आगामी सितंबर में 75 वर्ष पूरा होने हटाने पर विचार हो रहा है। यह बड़ी चौंकाने वाली बात है। और दूसरे संघ में चर्चा है कि अब अपनी पसंद के व्यक्ति को भाजपा अध्यक्ष बनाकर गुजरात लॉबी की राजनीति का पटाक्षेप भी किया जा सकता है। आज मोदी इतने कमजोर हैं कि उन्हें इनमें से कम से कम एक मामले में तो संघ का निर्देश मानना ही होगा। चाहे अध्यक्ष या प्रधानमंत्री। मोदी की इस आपदा में भाजपा के कई अन्य नेता भी अपने लिए अवसर ढूंढ रहे हैं। अब देखना है कि तमाम मोर्चों पर विफल रहे मोदी भीतर से उठ रहे इस तूफान से कैसे निपटते हैं सूत्र। एक खबर भारतीय जनता पार्टी के एक बहुत बहुत बड़े नेता संघ मुख्यालय गए थे। खुद के लिए अध्यक्ष पद की लॉबिंग करने लेकिन संघ की तरफ से उनको फटकार मिली है। इसका मतलब है संघ तय कर चुका है कि अध्यक्ष संजय जोशी को बनाना है। तो 17 सितंबर से पहले क्या कुछ होने वाला है और 31 मई और 1 जून को क्या होने वाला है। इस पर नजर बनाकर रखनी होगी क्योंकि भारतीय जनता पार्टी और संघ के बीच जो टकराव था अब उसका क्लाइमेक्स आ रहा है। बीजेपी या फिर संघ अपनी तरफ से किसे अध्यक्ष बनाते हैं, यह हमें आने वाले वक्त में पता चलेगा। साथ ही यह भी पता चलेगा कि क्या पीएम बीजेपी के उस रूल को मानेंगे जो कि 75 साल बाद रिटायरमेंट का है। इसके लिए हमें थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा।


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May 29, 2025 at 11:26AM

पीएम क्या बीजेपी नियम है 75 वर्ष पार वाले उसको मानेंगे या संघ तय अध्यक्ष संजय जोशी ?

 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75 साल के हो जाएंगे और बीजेपी का यह नियम है कि 75 पार तो आप रिटायर माने जाएंगे। तो क्या पीएम अपने इस नियम को मानेंगे या फिर बीजेपी के इस नियम को मानेंगे? पीएम क्या बीजेपी जो नियम है 75 वर्ष पार वाले उस नियम को मानेंगे? इसके अलावा राजनाथ सिंह को लेकर क्या खबरें सामने आ रही हैं?

क्या होने वाला है भारतीय जनता पार्टी में। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान बहुत दिनों से अटका पड़ा है। नहीं हो पा रहा है राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान और क्या अब राष्ट्रीय अध्यक्ष का ऐलान होने जा रहा है? क्योंकि जब मैं आपसे इस मसले पर बात कर रहा हूं तो एक खबर और आपको दे रहा हूं कि 31 मई और 1 जून इन दो तारीखों में दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी की एक बड़ी मीटिंग है। इस मीटिंग में प्रधानमंत्री भी होंगे, अमित शाह भी होंगे और कहा जा रहा है कुछ बुद्धिजीवी, कुछ इंटेलेक्चुअल्स, कुछ बड़े लोग बीजेपी के कुछ बड़े नेता संघ के कुछ लोग इस बैठक में शामिल हो सकते हैं। 31 मई और 1 जून को यह बैठक है। 31 मई को प्रधानमंत्री का मध्य प्रदेश का दौरा भी है। लेकिन, क्या होने वाला है? क्या कोई बड़ी हलचल है? इस बीच मैं आपको दो बातें और बताना चाहता हूं। दो नाम अचानक से चर्चाओं में है।

जनवरी 2024 में जेपी नड्डा का कार्यकाल खत्म होता है। बार-बार एक्सटेंशन दिया जाता है। आखिरी एक्सटेंशन 20 अप्रैल 2025 तक था। उसके बाद इस पर कोई खबर नहीं आई। लेकिन जेपी नड्डा अपने पद पर बने हुए हैं। पहली बात। अब यह कहा जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष कौन होगा? नरेंद्र मोदी और अमित शाह अपना अध्यक्ष बनाना चाहते हैं। संघ की लॉबी अपना अध्यक्ष बनाना चाहती है। संघ की तरफ से संजय जोशी पर अड़ा है

कुछ नाम मीडिया ने आगे कर दिए। कुछ नाम गुजरात लॉबी ने आगे उछाल दिए। लेकिन संघ अपने नामों पर अड़ा है संजय जोशी । लेकिन भारतीय जनता पार्टी में अभी तक राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो सकी है। बिहार का चुनाव आ रहा है।अब दो बातें मैं आपको बताता हूं। राजनाथ सिंह इस देश के रक्षा मंत्री हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भारतीय जनता पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री पद का चेहरा बनाने में जो महत्वपूर्ण किरदार था वो राजनाथ सिंह का था। लेकिन आपने देखा कि उसके बाद से राजनाथ सिंह कैसे कैसे साइडलाइन हुए। एक मंत्री बनकर रह गए। पहले कार्यकाल में तो गृह मंत्री भी रहे। उसके बाद से तो रक्षा मंत्री हो गए। अब लेकिन जब ऑपरेशन सिंदूर हुआ तो जो मीडिया है वो पूरी इमेज बिल्डिंग कर रहा था प्रधानमंत्री की। आपने देखा हमने देखा सबने देखा इमेज बिल्डिंग की जा रही थी। लेकिन अचानक से राजनाथ सिंह की तारीफों के पुल बांधे जाने लगे हैं। 25 मई को देश के एक बड़े चैनल ने राजनाथ सिंह पर बाकायदा एक डॉक्यूमेंट्री दिखाई है। क्यों? सवाल यह है कि राजनाथ सिंह की इमेज बिल्डिंग क्यों की जा रही है? राजनाथ सिंह पहले भी बीजेपी के अध्यक्ष दो बार रह चुके हैं। क्या राजनाथ सिंह तीसरी बार बनेंगे? बिल्कुल नहीं।

तो क्या राजनाथ सिंह 17 सितंबर के बाद नरेंद्र मोदी रिप्लेस करेंगे? एक और नाम है शिवराज सिंह चौहान। केंद्रीय मंत्री हैं। कृषि मंत्रालय उनके पास है। लंबे वक्त तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे।लेकिन शिवराज सिंह चौहान को मध्य प्रदेश से हटाकर दिल्ली बुला लिया गया। और उनकी जगह मोहन यादव मोहन यादव मुख्यमंत्री बन गए लेकिन शिवराज सिंह चौहान का जो अटूट प्रेम मध्य प्रदेश से है वो अभी भी टूटा नहीं है तो शिवराज सिंह चौहान तो इन दिनों बहाने तलाशते हैं भोपाल जाने के इंदौर जाने के खंडवा जाने के उज्जैन जाने के कोई बहाना मिल जाए और मध्य प्रदेश का दौरा लग जाए तो अब वो विकसित भारत तिरंगा यात्रा लेकर पहुंच गए साथ साधना सिंह चौहान भी थी उनकी धर्मपत्नी एक और नया चेहरा था साथ में और वो चेहरा था शिवराज सिंह चौहान की बहू का। वो भी उनके साथ-साथ नजर आई।


राजनीतिक विश्लेषक ने एक खबर ट्वीट कर दी है। उन्होंने जो बात लिखी है मैं अक्षरश उनकी बात आपको बता रहा हूं। वो लिखते हैं कि मोदी की आपदा में संघ को मिला अवसर। पहलगाम हमले के बाद तेजी से हुए घटनाक्रम में मोदी सरकार की कूटनीति, विदेश नीति, सामरिक नीति और राजनीति की कलाई खुल गई है। आज मोदी अपने जीवन के सबसे बड़े संकट में फंस गए हैं। मोदी की इस आपदा में संघ अपने लिए दो बड़े अवसर देख रहा है। मेरे सूत्रों के मुताबिक संघ के भीतर चर्चा हो रही है कि मोदी को हटाने का सबसे अच्छा समय है। अतः उन्हें आगामी सितंबर में 75 वर्ष पूरा होने हटाने पर विचार हो रहा है। यह बड़ी चौंकाने वाली बात है। और दूसरे संघ में चर्चा है कि अब अपनी पसंद के व्यक्ति को भाजपा अध्यक्ष बनाकर गुजरात लॉबी की राजनीति का पटाक्षेप भी किया जा सकता है। आज मोदी इतने कमजोर हैं कि उन्हें इनमें से कम से कम एक मामले में तो संघ का निर्देश मानना ही होगा। चाहे अध्यक्ष या प्रधानमंत्री। मोदी की इस आपदा में भाजपा के कई अन्य नेता भी अपने लिए अवसर ढूंढ रहे हैं। अब देखना है कि तमाम मोर्चों पर विफल रहे मोदी भीतर से उठ रहे इस तूफान से कैसे निपटते हैं सूत्र। एक खबर भारतीय जनता पार्टी के एक बहुत बहुत बड़े नेता संघ मुख्यालय गए थे। खुद के लिए अध्यक्ष पद की लॉबिंग करने लेकिन संघ की तरफ से उनको फटकार मिली है। इसका मतलब है संघ तय कर चुका है कि अध्यक्ष संजय जोशी को बनाना है। तो 17 सितंबर से पहले क्या कुछ होने वाला है और 31 मई और 1 जून को क्या होने वाला है। इस पर नजर बनाकर रखनी होगी क्योंकि भारतीय जनता पार्टी और संघ के बीच जो टकराव था अब उसका क्लाइमेक्स आ रहा है। बीजेपी या फिर संघ अपनी तरफ से किसे अध्यक्ष बनाते हैं, यह हमें आने वाले वक्त में पता चलेगा। साथ ही यह भी पता चलेगा कि क्या पीएम बीजेपी के उस रूल को मानेंगे जो कि 75 साल बाद रिटायरमेंट का है। इसके लिए हमें थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा।

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