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Tuesday, June 3, 2025

देश की सबसे बड़ी अदालत का अहंकार कि वो सुप्रीम है

इस बात को समझिए कि देश की सबसे बड़ी अदालत जो इस अहंकार में थी कि वो सुप्रीम है,जो इस अहंकार में थी कि उसका कुछ भी नहीं हो सकता, जो इस अहंकार में थी कि वो 142 के तहत उसके पास सुप्रीम अधिकार है। तो एक अनुच्छेद 142 के तहत जस्टिस वर्मा के खिलाफ कारवाई क्यों नहीं की आपने? जस्टिस वर्मा के खिलाफ साक्ष्य जो कुछ भी था वो कोर्ट के पास उस समय भी था अब भी है। लेकिन एक याचिका दाखिल कर जब सुप्रीम कोर्ट से कहा गया कि आप एफआईआर क्यों नहीं दाखिल का आदेश क्यों नहीं देते? तो कहा जाओ प्रधानमंत्री से बात करो राष्ट्रपति से बात करो।

जिस राष्ट्रपति को आप अपना घरेलू नौकर समझ के आदेश जारी कर देते हैं। उस राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से आप कहते हैं कि जाओ उसके पास जाओ और उससे कहो एफआईआर दर्ज करने के लिए। संसद द्वारा पास कानून को आप रौंद देते हैं और कहते हैं जाओ प्रधानमंत्री से एफआईआर दर्ज करने के लिए। दरअसल देश अब इस खेल को समझ चुका है। इस जस्टिस वर्मा के परम पाप को इस इतने बड़े पाप को छुपाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूरी कोशिश कर ली और इस देश को पता चल गया कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रेस रिलीज जारी करके कह दिया कि टाइम्स ऑफ इंडिया की छपी रिपोर्ट जो है वो अफवाह है।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट कोअंदाजा नहीं था कि अमित शाह घाग है। दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अंदर में आता है और तय सी बात है कि जब मामला हाई कोर्ट के जज का होगा तो ये पूरे मामले को लेकर दिल्ली पुलिस ने गृह मंत्री से बात नहीं की होगी इसकी संभावना कतई नहीं है। इसका मतलब है कि गृह मंत्री अमित शाह ने इसकी पूरी तैयारी की और तभी जब पूरा मामला ठंडा पड़ता नजर आया। सुप्रीम कोर्ट ने इसको अपवाह साबित कर दिया तो चुपके से एक पेन ड्राइव थमाया गया और इस पेनड्राइव में वो सब कुछ था जिसको झुठलाना मुश्किल था। सुप्रीम कोर्ट यह भी नहीं कर सकती थी कि उस पेन ड्राइव को दबा देती क्योंकि पेन ड्राइव की कॉपी गृह मंत्रालय के पास होगा। पेन ड्राइव की कॉपी दिल्ली पुलिस के कमिश्नर के पास होगा। इस बात का अंदाजा दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को था।

जिस जुडिशरी से इंसाफ की उम्मीद की जा रही थी उसने कह दिया कि सब अफवाह है। लेकिन एक प्रेशर बना और जुडिशियल आयोग बनाया गया। न्यायिक आयोग बनाया गया। उस आयोग ने साफ-साफ कह दिया कि जस्टिस वर्मा के घर नोटों की गड्डियां जली हुई मिली और जस्टिस वर्मा को सब कुछ पता था। जस्टिस वर्मा इस केस को दबाना चाह रहे थे। इसीलिए सुप्रीम कोर्ट को कमेटी ने कहा कि इस आदमी पर FIR किया जाना चाहिए और इस इस आदमी को इस्तीफा देना चाहिए। जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा तक नहीं दिया और अब पूरा मामला संसद के हवाले है। अब देश की सुप्रीम संसद जो है वो तय करेगी कि जस्टिस वर्मा का क्या हो। इतिहास में आज तक किसी किसी न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग चलाया नहीं जा सका। अंतिम अंजाम तक नहीं पहुंचा। ये जस्टिस वर्मा पहला शख्स होगा क्योंकि इस मामले में विपक्ष भी सरकार के खिलाफ नहीं जा सकती और सुप्रीम कोर्ट का तो क्या होगा जुडिशरी का क्या होगा जस्टिस जस्टिस वर्मा का सच सामने आएगा आखिर इसके पीछे कितने लोग हैं क्या सैकड़ों करोड़ रुपए सिर्फ जस्टिस वर्मा के हो सकते हैं तो पता चलेगा क्या इसके पीछे घाघा कोर्ट फिक्सरों की भी भूमिका है।

Monday, June 2, 2025

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बांग्लादेशियों को पकड़ कर वापस भेजने में तेजी

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बांग्लादेशियों को पकड़ कर वापस भेजने में तेजी
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बांग्लादेशियों को पकड़ कर वापस भेजने में तेजी
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बांग्लादेशियों को पकड़ कर वापस भेजने में तेजी
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बांग्लादेशियों को पकड़ कर वापस भेजने में तेजी

 ऑपरेशन सिंदूर के बाद बांग्लादेशियों को पकड़ कर वापस भेजने में तेजी आई है। एक रिपोर्ट में यह बताया जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद 2000 से ज्यादा बांग्लादेशी घुसपैठियों को डिपोर्ट किया जा चुका है और इस मामले को लेकर दरअसल एक याचिका भी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थी घुसपैठियों के खिलाफ। लेकिन याचिका को खारिज कर दिया गया है। 2000 से ज्यादा ऑपरेशन सिंदूर के बाद बांग्लादेशियों को डिपोर्ट किया गया है। क्या है फिलहाल सरकार की तैयारी? कैसे सरकार काम कर रही है? उसके बाद सुप्रीम कोर्ट पे चर्चा करेंगे।

सरकार की तरफ से साफ-साफ कहा गया कि जितने भी विदेशी हैं उनको आईडेंटिफाई करना है उनको वापस भेजना है। और कल ही 2000 लोगों को बांग्लादेश के नोमैनस लैंड में भेज के उनको उधर विदा किया गया। आइडेंटिफिकेशन होता है। मालूम चलता है यह बांग्लादेशी है। उनको उठा के सीधे-सीधे बॉर्डर के पास ले जाकर के उधर छोड़ दिया जाता है। अभी खबर आ रही है कि वहां के जो बॉर्डर सिक्योरिटी के जो चीफ हैं उन्होंने कहा कि यह तो बहुत अचंभा काम हो रहा है। हम इन लोगों की मदद करेंगे और खबर यह भी आ रही है कुछ लोगों को बोट से ही भेज दिया जा रहा है। क्या आप उसको बोट पे लेकर के गए और सुंदरवन में जो है उनको बोट चढ़ा के कह दिया कि अब निकल आओ।

एक्शन हो रहा है इस एक्शन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल क्यों की गई? देखिए सुप्रीम कोर्ट खबर ये आई है कि बहुत सारे लोग हिंदुस्तान के वो पहुंच गए। यह वकीलों का सुप्रीम कोर्ट में एक नेक्सेस है। वह एनजीओ वाले लोगों वह पहुंच गए। यह कम से कम 10 वां या 12वां याचिका है जो वहां पहुंचते हैं किसी किसी केस को लेकर के। ये लोग आज सुप्रीम कोर्ट पहुंचे यह याचिका लेकर के छाती पीटने के लिए कि बहुत गड़बड़ हो रहा है। इस बार केस आसम का था कि यहां बांग्लादेशियों को भगाने के कारण उनको रात-रात में जाते हैं लोग उठाते हैं और जबरन उनको वापस भेज देते हैं। ये बड़ा अन्याय हो रहा है और हेमंत विश्व शर्मा यही काम कर भी रहे हैं कि मोहल्ला को टारगेट किया जाता है। मालूम चलता है कि वहां पे बांग्लादेशी लोग हैं। रात में पुलिस जाती है, जगाती है, गाड़ी में बिठाती है और सीधे-सीधे बॉर्डर के पास ले जाकर के नोमंस लैंड में कि उधर आप जाइए जहां से आप सुबह-सुबह बुलडोजर भी चला रहे थे और घर जो है वो तो सवेरे रात के अंधेरे में ही बुलडोजर खत्म।

कारवाई इसलिए भी तेज हो रही है क्योंकि यह केंद्र सरकार ने फैसला कर लिया है कि बांग्लादेशियों को खदेड़ खदेड़ के भगाएंगे। हिंदुस्तान कोई धर्मशाला नहीं है। अब जब इस तरह की चीजें हो रही है तो वोट बैंक पॉलिटिक्स भी इंपैक्ट हो रहा है।एनजीओ वाले वो जॉर्ज सोरोस के कांग्रेसी इकोसिस्टम ये सारे लोग वो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं कि ये विदेशी हैं तो क्या हुआ? इनका भी एक फंडामेंटल राइट है। और यह काम बड़ा गड़बड़ हो रहा है। तो आज फिर पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने डांट के भगा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये सब बेकार की बातें हैं।ये हमने ही आदेश दिया है।

एक बड़ा बयान आया इस तरीके का जब पूछा गया हेमंत विश्वकर्मा से कि भाई बड़ा अत्याचार आप कर रहे हैं क्योंकि वहां हजारों हजार की संख्या में रोज जो है बॉर्डर के पार भेजा जा रहा है। तो उन्होंने कहा कि नहीं हम कुछ नहीं कर रहे हैं। फरवरी में जो सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया था हम सुप्रीम कोर्ट का आदेश पालन कर रहे हैं। और मैं आपको बता दूं कि सुप्रीम कोर्ट इस चीज को लेकर के इतना सख्त है कि कई सारे केसेस में जो हम लोग कहते हैं कि हिंदुस्तान को धर्मशाला मत बना दो। ये कोई धर्मशाला थोड़ी है कि कहीं-कहीं से लोग आ जाएंगे और यहां पे रहेंगे और उसके बाद आप उसको जो है एक पॉलिटिकल टूल बना लीजिए।ये सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है। तो उन्होंने कहा कि देखिए हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही आगे बढ़ा रहे हैं। अब एक और उन्होंने बड़ी बात कह दी।उन्होंने कहा कि मैं जब फरवरी में आया तो जब हम लोगों ने चिन्हित किया कि भाई कौन फॉरेनर है कौन बांग्लादेशी है कौन बांग्लादेश से आया हुआ है वो तो लैंग्वेज से भी मालूम चल जाता है तो उन्होंने कहा कि रातोंरात 3000 लोग गायब हो गए जो आइडेंटिफिकेशन की लिस्ट थी उसमें पिछले सप्ताह 300 लोगों को ढूंढते हुए पुलिस पहुंची कि भाई यह एड्रेस है यहां बांग्लादेशी रहता तो कहां है मालूम चल रहा है गायब हो गए गायब कहां कहां हो गए?

सब भाग रहे हैं। लोग आधार कार्ड दिखा देते हैं इलेक्शन कार्ड दिखा देते हैं राशन कार्ड दिखा देते हैं लेकिन ये जो पुलिस ने इस बार नई विधा अपनाई कि उनका फोन उनका बैंक अकाउंट उनका सोशल मीडिया WhatsApp उनसे फोन जब्त करके उसका पूरा खंगाला जाता था तो मालूम यह चलता था कि अपने आपको यह बता रहा है कि हम तो हावड़ा के हैं और हावड़ा में कोई परिवार नहीं, कोई दोस्त नहीं, कोई स्कूल नहीं, कोई कुछ नहीं। सोशल मीडिया में बातचीत चल रही है ढाका में। तो ऐसे ये लोग पकड़े गए। अब जब पकड़े गए तो फिर उनको भी भेजा जाने लग गया। तो फिर वकील लोग पहुंच गए सुप्रीम कोर्ट कि ये क्या तरीका है? आधार कार्ड है, सब कुछ है। ये हमारे लोगों को जो है वो मुसलमान बता करके समझा करके भाई मुसलमानों को के साथ अत्याचार हो रहा है। उठा के बाहर किया जा रहा है। ये वही सब गैंग वफ गैंग वाले जो वकील सब हैं वही सब पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने एक बात कह दी जिनसे इनकी होश उड़ गई। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी है तो वह आधार कार्ड बनाया हुआ हो, इलेक्शन कार्ड बनाया हो, राशन कार्ड हो इससे कोई लेना देना नहीं। नहीं उठा के बाहर फेंको। यह कोई धर्मशाला नहीं है। आपने बना रखा है। सालों सालों से रह रहे हैं। उन्हें भी नहीं बख्शा जाएगा।


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ऑपरेशन सिंदूर के बाद बांग्लादेशियों को पकड़ कर वापस भेजने में तेजी

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ऑपरेशन सिंदूर के बाद बांग्लादेशियों को पकड़ कर वापस भेजने में तेजी

 ऑपरेशन सिंदूर के बाद बांग्लादेशियों को पकड़ कर वापस भेजने में तेजी आई है। एक रिपोर्ट में यह बताया जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद 2000 से ज्यादा बांग्लादेशी घुसपैठियों को डिपोर्ट किया जा चुका है और इस मामले को लेकर दरअसल एक याचिका भी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थी घुसपैठियों के खिलाफ। लेकिन याचिका को खारिज कर दिया गया है। 2000 से ज्यादा ऑपरेशन सिंदूर के बाद बांग्लादेशियों को डिपोर्ट किया गया है। क्या है फिलहाल सरकार की तैयारी? कैसे सरकार काम कर रही है? उसके बाद सुप्रीम कोर्ट पे चर्चा करेंगे।

सरकार की तरफ से साफ-साफ कहा गया कि जितने भी विदेशी हैं उनको आईडेंटिफाई करना है उनको वापस भेजना है। और कल ही 2000 लोगों को बांग्लादेश के नोमैनस लैंड में भेज के उनको उधर विदा किया गया। आइडेंटिफिकेशन होता है। मालूम चलता है यह बांग्लादेशी है। उनको उठा के सीधे-सीधे बॉर्डर के पास ले जाकर के उधर छोड़ दिया जाता है। अभी खबर आ रही है कि वहां के जो बॉर्डर सिक्योरिटी के जो चीफ हैं उन्होंने कहा कि यह तो बहुत अचंभा काम हो रहा है। हम इन लोगों की मदद करेंगे और खबर यह भी आ रही है कुछ लोगों को बोट से ही भेज दिया जा रहा है। क्या आप उसको बोट पे लेकर के गए और सुंदरवन में जो है उनको बोट चढ़ा के कह दिया कि अब निकल आओ।

एक्शन हो रहा है इस एक्शन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल क्यों की गई? देखिए सुप्रीम कोर्ट खबर ये आई है कि बहुत सारे लोग हिंदुस्तान के वो पहुंच गए। यह वकीलों का सुप्रीम कोर्ट में एक नेक्सेस है। वह एनजीओ वाले लोगों वह पहुंच गए। यह कम से कम 10 वां या 12वां याचिका है जो वहां पहुंचते हैं किसी किसी केस को लेकर के। ये लोग आज सुप्रीम कोर्ट पहुंचे यह याचिका लेकर के छाती पीटने के लिए कि बहुत गड़बड़ हो रहा है। इस बार केस आसम का था कि यहां बांग्लादेशियों को भगाने के कारण उनको रात-रात में जाते हैं लोग उठाते हैं और जबरन उनको वापस भेज देते हैं। ये बड़ा अन्याय हो रहा है और हेमंत विश्व शर्मा यही काम कर भी रहे हैं कि मोहल्ला को टारगेट किया जाता है। मालूम चलता है कि वहां पे बांग्लादेशी लोग हैं। रात में पुलिस जाती है, जगाती है, गाड़ी में बिठाती है और सीधे-सीधे बॉर्डर के पास ले जाकर के नोमंस लैंड में कि उधर आप जाइए जहां से आप सुबह-सुबह बुलडोजर भी चला रहे थे और घर जो है वो तो सवेरे रात के अंधेरे में ही बुलडोजर खत्म।

कारवाई इसलिए भी तेज हो रही है क्योंकि यह केंद्र सरकार ने फैसला कर लिया है कि बांग्लादेशियों को खदेड़ खदेड़ के भगाएंगे। हिंदुस्तान कोई धर्मशाला नहीं है। अब जब इस तरह की चीजें हो रही है तो वोट बैंक पॉलिटिक्स भी इंपैक्ट हो रहा है।एनजीओ वाले वो जॉर्ज सोरोस के कांग्रेसी इकोसिस्टम ये सारे लोग वो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं कि ये विदेशी हैं तो क्या हुआ? इनका भी एक फंडामेंटल राइट है। और यह काम बड़ा गड़बड़ हो रहा है। तो आज फिर पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने डांट के भगा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये सब बेकार की बातें हैं।ये हमने ही आदेश दिया है।

एक बड़ा बयान आया इस तरीके का जब पूछा गया हेमंत विश्वकर्मा से कि भाई बड़ा अत्याचार आप कर रहे हैं क्योंकि वहां हजारों हजार की संख्या में रोज जो है बॉर्डर के पार भेजा जा रहा है। तो उन्होंने कहा कि नहीं हम कुछ नहीं कर रहे हैं। फरवरी में जो सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया था हम सुप्रीम कोर्ट का आदेश पालन कर रहे हैं। और मैं आपको बता दूं कि सुप्रीम कोर्ट इस चीज को लेकर के इतना सख्त है कि कई सारे केसेस में जो हम लोग कहते हैं कि हिंदुस्तान को धर्मशाला मत बना दो। ये कोई धर्मशाला थोड़ी है कि कहीं-कहीं से लोग आ जाएंगे और यहां पे रहेंगे और उसके बाद आप उसको जो है एक पॉलिटिकल टूल बना लीजिए।ये सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है। तो उन्होंने कहा कि देखिए हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही आगे बढ़ा रहे हैं। अब एक और उन्होंने बड़ी बात कह दी।उन्होंने कहा कि मैं जब फरवरी में आया तो जब हम लोगों ने चिन्हित किया कि भाई कौन फॉरेनर है कौन बांग्लादेशी है कौन बांग्लादेश से आया हुआ है वो तो लैंग्वेज से भी मालूम चल जाता है तो उन्होंने कहा कि रातोंरात 3000 लोग गायब हो गए जो आइडेंटिफिकेशन की लिस्ट थी उसमें पिछले सप्ताह 300 लोगों को ढूंढते हुए पुलिस पहुंची कि भाई यह एड्रेस है यहां बांग्लादेशी रहता तो कहां है मालूम चल रहा है गायब हो गए गायब कहां कहां हो गए?

सब भाग रहे हैं। लोग आधार कार्ड दिखा देते हैं इलेक्शन कार्ड दिखा देते हैं राशन कार्ड दिखा देते हैं लेकिन ये जो पुलिस ने इस बार नई विधा अपनाई कि उनका फोन उनका बैंक अकाउंट उनका सोशल मीडिया WhatsApp उनसे फोन जब्त करके उसका पूरा खंगाला जाता था तो मालूम यह चलता था कि अपने आपको यह बता रहा है कि हम तो हावड़ा के हैं और हावड़ा में कोई परिवार नहीं, कोई दोस्त नहीं, कोई स्कूल नहीं, कोई कुछ नहीं। सोशल मीडिया में बातचीत चल रही है ढाका में। तो ऐसे ये लोग पकड़े गए। अब जब पकड़े गए तो फिर उनको भी भेजा जाने लग गया। तो फिर वकील लोग पहुंच गए सुप्रीम कोर्ट कि ये क्या तरीका है? आधार कार्ड है, सब कुछ है। ये हमारे लोगों को जो है वो मुसलमान बता करके समझा करके भाई मुसलमानों को के साथ अत्याचार हो रहा है। उठा के बाहर किया जा रहा है। ये वही सब गैंग वफ गैंग वाले जो वकील सब हैं वही सब पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने एक बात कह दी जिनसे इनकी होश उड़ गई। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी है तो वह आधार कार्ड बनाया हुआ हो, इलेक्शन कार्ड बनाया हो, राशन कार्ड हो इससे कोई लेना देना नहीं। नहीं उठा के बाहर फेंको। यह कोई धर्मशाला नहीं है। आपने बना रखा है। सालों सालों से रह रहे हैं। उन्हें भी नहीं बख्शा जाएगा।


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 ऑपरेशन सिंदूर के बाद बांग्लादेशियों को पकड़ कर वापस भेजने में तेजी आई है। एक रिपोर्ट में यह बताया जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद 2000 से ज्यादा बांग्लादेशी घुसपैठियों को डिपोर्ट किया जा चुका है और इस मामले को लेकर दरअसल एक याचिका भी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थी घुसपैठियों के खिलाफ। लेकिन याचिका को खारिज कर दिया गया है। 2000 से ज्यादा ऑपरेशन सिंदूर के बाद बांग्लादेशियों को डिपोर्ट किया गया है। क्या है फिलहाल सरकार की तैयारी? कैसे सरकार काम कर रही है? उसके बाद सुप्रीम कोर्ट पे चर्चा करेंगे।

सरकार की तरफ से साफ-साफ कहा गया कि जितने भी विदेशी हैं उनको आईडेंटिफाई करना है उनको वापस भेजना है। और कल ही 2000 लोगों को बांग्लादेश के नोमैनस लैंड में भेज के उनको उधर विदा किया गया। आइडेंटिफिकेशन होता है। मालूम चलता है यह बांग्लादेशी है। उनको उठा के सीधे-सीधे बॉर्डर के पास ले जाकर के उधर छोड़ दिया जाता है। अभी खबर आ रही है कि वहां के जो बॉर्डर सिक्योरिटी के जो चीफ हैं उन्होंने कहा कि यह तो बहुत अचंभा काम हो रहा है। हम इन लोगों की मदद करेंगे और खबर यह भी आ रही है कुछ लोगों को बोट से ही भेज दिया जा रहा है। क्या आप उसको बोट पे लेकर के गए और सुंदरवन में जो है उनको बोट चढ़ा के कह दिया कि अब निकल आओ।

एक्शन हो रहा है इस एक्शन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल क्यों की गई? देखिए सुप्रीम कोर्ट खबर ये आई है कि बहुत सारे लोग हिंदुस्तान के वो पहुंच गए। यह वकीलों का सुप्रीम कोर्ट में एक नेक्सेस है। वह एनजीओ वाले लोगों वह पहुंच गए। यह कम से कम 10 वां या 12वां याचिका है जो वहां पहुंचते हैं किसी किसी केस को लेकर के। ये लोग आज सुप्रीम कोर्ट पहुंचे यह याचिका लेकर के छाती पीटने के लिए कि बहुत गड़बड़ हो रहा है। इस बार केस आसम का था कि यहां बांग्लादेशियों को भगाने के कारण उनको रात-रात में जाते हैं लोग उठाते हैं और जबरन उनको वापस भेज देते हैं। ये बड़ा अन्याय हो रहा है और हेमंत विश्व शर्मा यही काम कर भी रहे हैं कि मोहल्ला को टारगेट किया जाता है। मालूम चलता है कि वहां पे बांग्लादेशी लोग हैं। रात में पुलिस जाती है, जगाती है, गाड़ी में बिठाती है और सीधे-सीधे बॉर्डर के पास ले जाकर के नोमंस लैंड में कि उधर आप जाइए जहां से आप सुबह-सुबह बुलडोजर भी चला रहे थे और घर जो है वो तो सवेरे रात के अंधेरे में ही बुलडोजर खत्म।

कारवाई इसलिए भी तेज हो रही है क्योंकि यह केंद्र सरकार ने फैसला कर लिया है कि बांग्लादेशियों को खदेड़ खदेड़ के भगाएंगे। हिंदुस्तान कोई धर्मशाला नहीं है। अब जब इस तरह की चीजें हो रही है तो वोट बैंक पॉलिटिक्स भी इंपैक्ट हो रहा है।एनजीओ वाले वो जॉर्ज सोरोस के कांग्रेसी इकोसिस्टम ये सारे लोग वो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं कि ये विदेशी हैं तो क्या हुआ? इनका भी एक फंडामेंटल राइट है। और यह काम बड़ा गड़बड़ हो रहा है। तो आज फिर पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने डांट के भगा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये सब बेकार की बातें हैं।ये हमने ही आदेश दिया है।

एक बड़ा बयान आया इस तरीके का जब पूछा गया हेमंत विश्वकर्मा से कि भाई बड़ा अत्याचार आप कर रहे हैं क्योंकि वहां हजारों हजार की संख्या में रोज जो है बॉर्डर के पार भेजा जा रहा है। तो उन्होंने कहा कि नहीं हम कुछ नहीं कर रहे हैं। फरवरी में जो सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया था हम सुप्रीम कोर्ट का आदेश पालन कर रहे हैं। और मैं आपको बता दूं कि सुप्रीम कोर्ट इस चीज को लेकर के इतना सख्त है कि कई सारे केसेस में जो हम लोग कहते हैं कि हिंदुस्तान को धर्मशाला मत बना दो। ये कोई धर्मशाला थोड़ी है कि कहीं-कहीं से लोग आ जाएंगे और यहां पे रहेंगे और उसके बाद आप उसको जो है एक पॉलिटिकल टूल बना लीजिए।ये सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है। तो उन्होंने कहा कि देखिए हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही आगे बढ़ा रहे हैं। अब एक और उन्होंने बड़ी बात कह दी।उन्होंने कहा कि मैं जब फरवरी में आया तो जब हम लोगों ने चिन्हित किया कि भाई कौन फॉरेनर है कौन बांग्लादेशी है कौन बांग्लादेश से आया हुआ है वो तो लैंग्वेज से भी मालूम चल जाता है तो उन्होंने कहा कि रातोंरात 3000 लोग गायब हो गए जो आइडेंटिफिकेशन की लिस्ट थी उसमें पिछले सप्ताह 300 लोगों को ढूंढते हुए पुलिस पहुंची कि भाई यह एड्रेस है यहां बांग्लादेशी रहता तो कहां है मालूम चल रहा है गायब हो गए गायब कहां कहां हो गए?

सब भाग रहे हैं। लोग आधार कार्ड दिखा देते हैं इलेक्शन कार्ड दिखा देते हैं राशन कार्ड दिखा देते हैं लेकिन ये जो पुलिस ने इस बार नई विधा अपनाई कि उनका फोन उनका बैंक अकाउंट उनका सोशल मीडिया WhatsApp उनसे फोन जब्त करके उसका पूरा खंगाला जाता था तो मालूम यह चलता था कि अपने आपको यह बता रहा है कि हम तो हावड़ा के हैं और हावड़ा में कोई परिवार नहीं, कोई दोस्त नहीं, कोई स्कूल नहीं, कोई कुछ नहीं। सोशल मीडिया में बातचीत चल रही है ढाका में। तो ऐसे ये लोग पकड़े गए। अब जब पकड़े गए तो फिर उनको भी भेजा जाने लग गया। तो फिर वकील लोग पहुंच गए सुप्रीम कोर्ट कि ये क्या तरीका है? आधार कार्ड है, सब कुछ है। ये हमारे लोगों को जो है वो मुसलमान बता करके समझा करके भाई मुसलमानों को के साथ अत्याचार हो रहा है। उठा के बाहर किया जा रहा है। ये वही सब गैंग वफ गैंग वाले जो वकील सब हैं वही सब पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने एक बात कह दी जिनसे इनकी होश उड़ गई। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी है तो वह आधार कार्ड बनाया हुआ हो, इलेक्शन कार्ड बनाया हो, राशन कार्ड हो इससे कोई लेना देना नहीं। नहीं उठा के बाहर फेंको। यह कोई धर्मशाला नहीं है। आपने बना रखा है। सालों सालों से रह रहे हैं। उन्हें भी नहीं बख्शा जाएगा।


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सरकार की तरफ से साफ-साफ कहा गया कि जितने भी विदेशी हैं उनको आईडेंटिफाई करना है उनको वापस भेजना है। और कल ही 2000 लोगों को बांग्लादेश के नोमैनस लैंड में भेज के उनको उधर विदा किया गया। आइडेंटिफिकेशन होता है। मालूम चलता है यह बांग्लादेशी है। उनको उठा के सीधे-सीधे बॉर्डर के पास ले जाकर के उधर छोड़ दिया जाता है। अभी खबर आ रही है कि वहां के जो बॉर्डर सिक्योरिटी के जो चीफ हैं उन्होंने कहा कि यह तो बहुत अचंभा काम हो रहा है। हम इन लोगों की मदद करेंगे और खबर यह भी आ रही है कुछ लोगों को बोट से ही भेज दिया जा रहा है। क्या आप उसको बोट पे लेकर के गए और सुंदरवन में जो है उनको बोट चढ़ा के कह दिया कि अब निकल आओ।

एक्शन हो रहा है इस एक्शन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल क्यों की गई? देखिए सुप्रीम कोर्ट खबर ये आई है कि बहुत सारे लोग हिंदुस्तान के वो पहुंच गए। यह वकीलों का सुप्रीम कोर्ट में एक नेक्सेस है। वह एनजीओ वाले लोगों वह पहुंच गए। यह कम से कम 10 वां या 12वां याचिका है जो वहां पहुंचते हैं किसी किसी केस को लेकर के। ये लोग आज सुप्रीम कोर्ट पहुंचे यह याचिका लेकर के छाती पीटने के लिए कि बहुत गड़बड़ हो रहा है। इस बार केस आसम का था कि यहां बांग्लादेशियों को भगाने के कारण उनको रात-रात में जाते हैं लोग उठाते हैं और जबरन उनको वापस भेज देते हैं। ये बड़ा अन्याय हो रहा है और हेमंत विश्व शर्मा यही काम कर भी रहे हैं कि मोहल्ला को टारगेट किया जाता है। मालूम चलता है कि वहां पे बांग्लादेशी लोग हैं। रात में पुलिस जाती है, जगाती है, गाड़ी में बिठाती है और सीधे-सीधे बॉर्डर के पास ले जाकर के नोमंस लैंड में कि उधर आप जाइए जहां से आप सुबह-सुबह बुलडोजर भी चला रहे थे और घर जो है वो तो सवेरे रात के अंधेरे में ही बुलडोजर खत्म।

कारवाई इसलिए भी तेज हो रही है क्योंकि यह केंद्र सरकार ने फैसला कर लिया है कि बांग्लादेशियों को खदेड़ खदेड़ के भगाएंगे। हिंदुस्तान कोई धर्मशाला नहीं है। अब जब इस तरह की चीजें हो रही है तो वोट बैंक पॉलिटिक्स भी इंपैक्ट हो रहा है।एनजीओ वाले वो जॉर्ज सोरोस के कांग्रेसी इकोसिस्टम ये सारे लोग वो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं कि ये विदेशी हैं तो क्या हुआ? इनका भी एक फंडामेंटल राइट है। और यह काम बड़ा गड़बड़ हो रहा है। तो आज फिर पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने डांट के भगा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये सब बेकार की बातें हैं।ये हमने ही आदेश दिया है।

एक बड़ा बयान आया इस तरीके का जब पूछा गया हेमंत विश्वकर्मा से कि भाई बड़ा अत्याचार आप कर रहे हैं क्योंकि वहां हजारों हजार की संख्या में रोज जो है बॉर्डर के पार भेजा जा रहा है। तो उन्होंने कहा कि नहीं हम कुछ नहीं कर रहे हैं। फरवरी में जो सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया था हम सुप्रीम कोर्ट का आदेश पालन कर रहे हैं। और मैं आपको बता दूं कि सुप्रीम कोर्ट इस चीज को लेकर के इतना सख्त है कि कई सारे केसेस में जो हम लोग कहते हैं कि हिंदुस्तान को धर्मशाला मत बना दो। ये कोई धर्मशाला थोड़ी है कि कहीं-कहीं से लोग आ जाएंगे और यहां पे रहेंगे और उसके बाद आप उसको जो है एक पॉलिटिकल टूल बना लीजिए।ये सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है। तो उन्होंने कहा कि देखिए हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही आगे बढ़ा रहे हैं। अब एक और उन्होंने बड़ी बात कह दी।उन्होंने कहा कि मैं जब फरवरी में आया तो जब हम लोगों ने चिन्हित किया कि भाई कौन फॉरेनर है कौन बांग्लादेशी है कौन बांग्लादेश से आया हुआ है वो तो लैंग्वेज से भी मालूम चल जाता है तो उन्होंने कहा कि रातोंरात 3000 लोग गायब हो गए जो आइडेंटिफिकेशन की लिस्ट थी उसमें पिछले सप्ताह 300 लोगों को ढूंढते हुए पुलिस पहुंची कि भाई यह एड्रेस है यहां बांग्लादेशी रहता तो कहां है मालूम चल रहा है गायब हो गए गायब कहां कहां हो गए?

सब भाग रहे हैं। लोग आधार कार्ड दिखा देते हैं इलेक्शन कार्ड दिखा देते हैं राशन कार्ड दिखा देते हैं लेकिन ये जो पुलिस ने इस बार नई विधा अपनाई कि उनका फोन उनका बैंक अकाउंट उनका सोशल मीडिया WhatsApp उनसे फोन जब्त करके उसका पूरा खंगाला जाता था तो मालूम यह चलता था कि अपने आपको यह बता रहा है कि हम तो हावड़ा के हैं और हावड़ा में कोई परिवार नहीं, कोई दोस्त नहीं, कोई स्कूल नहीं, कोई कुछ नहीं। सोशल मीडिया में बातचीत चल रही है ढाका में। तो ऐसे ये लोग पकड़े गए। अब जब पकड़े गए तो फिर उनको भी भेजा जाने लग गया। तो फिर वकील लोग पहुंच गए सुप्रीम कोर्ट कि ये क्या तरीका है? आधार कार्ड है, सब कुछ है। ये हमारे लोगों को जो है वो मुसलमान बता करके समझा करके भाई मुसलमानों को के साथ अत्याचार हो रहा है। उठा के बाहर किया जा रहा है। ये वही सब गैंग वफ गैंग वाले जो वकील सब हैं वही सब पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने एक बात कह दी जिनसे इनकी होश उड़ गई। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी है तो वह आधार कार्ड बनाया हुआ हो, इलेक्शन कार्ड बनाया हो, राशन कार्ड हो इससे कोई लेना देना नहीं। नहीं उठा के बाहर फेंको। यह कोई धर्मशाला नहीं है। आपने बना रखा है। सालों सालों से रह रहे हैं। उन्हें भी नहीं बख्शा जाएगा।


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June 02, 2025 at 04:29PM

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बांग्लादेशियों को पकड़ कर वापस भेजने में तेजी

 ऑपरेशन सिंदूर के बाद बांग्लादेशियों को पकड़ कर वापस भेजने में तेजी आई है। एक रिपोर्ट में यह बताया जा रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद 2000 से ज्यादा बांग्लादेशी घुसपैठियों को डिपोर्ट किया जा चुका है और इस मामले को लेकर दरअसल एक याचिका भी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई थी घुसपैठियों के खिलाफ। लेकिन याचिका को खारिज कर दिया गया है। 2000 से ज्यादा ऑपरेशन सिंदूर के बाद बांग्लादेशियों को डिपोर्ट किया गया है। क्या है फिलहाल सरकार की तैयारी? कैसे सरकार काम कर रही है? उसके बाद सुप्रीम कोर्ट पे चर्चा करेंगे।

सरकार की तरफ से साफ-साफ कहा गया कि जितने भी विदेशी हैं उनको आईडेंटिफाई करना है उनको वापस भेजना है। और कल ही 2000 लोगों को बांग्लादेश के नोमैनस लैंड में भेज के उनको उधर विदा किया गया। आइडेंटिफिकेशन होता है। मालूम चलता है यह बांग्लादेशी है। उनको उठा के सीधे-सीधे बॉर्डर के पास ले जाकर के उधर छोड़ दिया जाता है। अभी खबर आ रही है कि वहां के जो बॉर्डर सिक्योरिटी के जो चीफ हैं उन्होंने कहा कि यह तो बहुत अचंभा काम हो रहा है। हम इन लोगों की मदद करेंगे और खबर यह भी आ रही है कुछ लोगों को बोट से ही भेज दिया जा रहा है। क्या आप उसको बोट पे लेकर के गए और सुंदरवन में जो है उनको बोट चढ़ा के कह दिया कि अब निकल आओ।

एक्शन हो रहा है इस एक्शन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल क्यों की गई? देखिए सुप्रीम कोर्ट खबर ये आई है कि बहुत सारे लोग हिंदुस्तान के वो पहुंच गए। यह वकीलों का सुप्रीम कोर्ट में एक नेक्सेस है। वह एनजीओ वाले लोगों वह पहुंच गए। यह कम से कम 10 वां या 12वां याचिका है जो वहां पहुंचते हैं किसी किसी केस को लेकर के। ये लोग आज सुप्रीम कोर्ट पहुंचे यह याचिका लेकर के छाती पीटने के लिए कि बहुत गड़बड़ हो रहा है। इस बार केस आसम का था कि यहां बांग्लादेशियों को भगाने के कारण उनको रात-रात में जाते हैं लोग उठाते हैं और जबरन उनको वापस भेज देते हैं। ये बड़ा अन्याय हो रहा है और हेमंत विश्व शर्मा यही काम कर भी रहे हैं कि मोहल्ला को टारगेट किया जाता है। मालूम चलता है कि वहां पे बांग्लादेशी लोग हैं। रात में पुलिस जाती है, जगाती है, गाड़ी में बिठाती है और सीधे-सीधे बॉर्डर के पास ले जाकर के नोमंस लैंड में कि उधर आप जाइए जहां से आप सुबह-सुबह बुलडोजर भी चला रहे थे और घर जो है वो तो सवेरे रात के अंधेरे में ही बुलडोजर खत्म।

कारवाई इसलिए भी तेज हो रही है क्योंकि यह केंद्र सरकार ने फैसला कर लिया है कि बांग्लादेशियों को खदेड़ खदेड़ के भगाएंगे। हिंदुस्तान कोई धर्मशाला नहीं है। अब जब इस तरह की चीजें हो रही है तो वोट बैंक पॉलिटिक्स भी इंपैक्ट हो रहा है।एनजीओ वाले वो जॉर्ज सोरोस के कांग्रेसी इकोसिस्टम ये सारे लोग वो सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा रहे हैं कि ये विदेशी हैं तो क्या हुआ? इनका भी एक फंडामेंटल राइट है। और यह काम बड़ा गड़बड़ हो रहा है। तो आज फिर पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने डांट के भगा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये सब बेकार की बातें हैं।ये हमने ही आदेश दिया है।

एक बड़ा बयान आया इस तरीके का जब पूछा गया हेमंत विश्वकर्मा से कि भाई बड़ा अत्याचार आप कर रहे हैं क्योंकि वहां हजारों हजार की संख्या में रोज जो है बॉर्डर के पार भेजा जा रहा है। तो उन्होंने कहा कि नहीं हम कुछ नहीं कर रहे हैं। फरवरी में जो सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया था हम सुप्रीम कोर्ट का आदेश पालन कर रहे हैं। और मैं आपको बता दूं कि सुप्रीम कोर्ट इस चीज को लेकर के इतना सख्त है कि कई सारे केसेस में जो हम लोग कहते हैं कि हिंदुस्तान को धर्मशाला मत बना दो। ये कोई धर्मशाला थोड़ी है कि कहीं-कहीं से लोग आ जाएंगे और यहां पे रहेंगे और उसके बाद आप उसको जो है एक पॉलिटिकल टूल बना लीजिए।ये सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है। तो उन्होंने कहा कि देखिए हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ही आगे बढ़ा रहे हैं। अब एक और उन्होंने बड़ी बात कह दी।उन्होंने कहा कि मैं जब फरवरी में आया तो जब हम लोगों ने चिन्हित किया कि भाई कौन फॉरेनर है कौन बांग्लादेशी है कौन बांग्लादेश से आया हुआ है वो तो लैंग्वेज से भी मालूम चल जाता है तो उन्होंने कहा कि रातोंरात 3000 लोग गायब हो गए जो आइडेंटिफिकेशन की लिस्ट थी उसमें पिछले सप्ताह 300 लोगों को ढूंढते हुए पुलिस पहुंची कि भाई यह एड्रेस है यहां बांग्लादेशी रहता तो कहां है मालूम चल रहा है गायब हो गए गायब कहां कहां हो गए?

सब भाग रहे हैं। लोग आधार कार्ड दिखा देते हैं इलेक्शन कार्ड दिखा देते हैं राशन कार्ड दिखा देते हैं लेकिन ये जो पुलिस ने इस बार नई विधा अपनाई कि उनका फोन उनका बैंक अकाउंट उनका सोशल मीडिया WhatsApp उनसे फोन जब्त करके उसका पूरा खंगाला जाता था तो मालूम यह चलता था कि अपने आपको यह बता रहा है कि हम तो हावड़ा के हैं और हावड़ा में कोई परिवार नहीं, कोई दोस्त नहीं, कोई स्कूल नहीं, कोई कुछ नहीं। सोशल मीडिया में बातचीत चल रही है ढाका में। तो ऐसे ये लोग पकड़े गए। अब जब पकड़े गए तो फिर उनको भी भेजा जाने लग गया। तो फिर वकील लोग पहुंच गए सुप्रीम कोर्ट कि ये क्या तरीका है? आधार कार्ड है, सब कुछ है। ये हमारे लोगों को जो है वो मुसलमान बता करके समझा करके भाई मुसलमानों को के साथ अत्याचार हो रहा है। उठा के बाहर किया जा रहा है। ये वही सब गैंग वफ गैंग वाले जो वकील सब हैं वही सब पहुंचे थे। सुप्रीम कोर्ट ने एक बात कह दी जिनसे इनकी होश उड़ गई। उन्होंने कहा कि बांग्लादेशी है तो वह आधार कार्ड बनाया हुआ हो, इलेक्शन कार्ड बनाया हो, राशन कार्ड हो इससे कोई लेना देना नहीं। नहीं उठा के बाहर फेंको। यह कोई धर्मशाला नहीं है। आपने बना रखा है। सालों सालों से रह रहे हैं। उन्हें भी नहीं बख्शा जाएगा।

Saturday, May 31, 2025

जुडिशरी में भ्रष्टाचार की गहरी जड़े

 जब से चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बी आर गवई ने भारत की न्यायपालिका की कमान संभाली है तब से जुडिशरी में भ्रष्टाचार की गहरी जड़े जमाए जजों, रजिस्ट्रारों और बिचौलियों के होश उड़े हुए हैं। न्यायपालिका में एक के बाद एक भ्रष्टाचार की कई परतें खुलती जा रही हैं। जो इस पवित्र मंदिर की नींव को भी हिला रही हैं। हाल ही में मुंबई में ₹1.5 करोड़ में फेवरेबल फैसले की सेटिंग और दिल्ली के एक कोर्ट में ब्राइट फॉर बेल का सनसनीखेज मामला अभी सुलग ही रहा था कि एक और काला कारनामा सामने आ गया। इस बार कोर्ट के डिप्टी रजिस्ट्रार को गिरफ्तार किया गया है। जुडिशरी की ऐसी दुर्दशा हो सकती है इस पर सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना ने पहले ही गंभीर चेतावनी दी थी। आज वह सच साबित होती दिखाई पड़ रही हैं।

29 मई 2025 को सीबीआई ने एक ऐसी कारवाई की जिसने कॉर्पोरेट जगत को हिला कर रख दिया। राष्ट्रीय कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ट्रिब्यूनल कोर्ट जिसे एनसीएलटी भी कहते हैं। उसकी मुंबई बेंच में एक डिप्टी रजिस्ट्रार चरण प्रताप सिंह है। उन्हें सीबीआई ने गिरफ्तार किया। उनके सहयोगी को भी गिरफ्तार किया। यह लोग ₹ लाख की रिश्वत ले रहे थे ताकि एक होटल मालिक को उसके मामले में फायदा पहुंचाया जा सके। यह मामला 2020 से ही चल रहा था। जिसमें एक होटल मालिक ने अपने भाइयों पर फर्जी शेयर, हस्तांतरण वित्तीय कुप्रबंधन और होटल को बंद करने की साजिश जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। लेकिन 5 साल बाद भी फैसला नहीं हुआ। और फिर डिप्टी रजिस्ट्रार ने मौके का फायदा उठाया। उसने 11 मई 2025 को ₹3.5 लाख की डिमांड की और बाद में इसे 3 लाख पर सेटल किया। सीबीआई ने एक ट्रैप ऑपरेशन चलाया और रिश्वत लेते हुए इन दोनों कों हाथों धर लिया। मुंबई और लखनऊ में इनके ठिकानों पर छापेमारी की गई और अब सीबीआई इस रैकेट के पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है।जो संस्था कॉर्पोरेट जगत के बड़े विवाद सुलझाने के लिए बनी है वहां इतना घिनौना खेल कैसे चल रहा है? सीजीआई गवई साहब ने हाल ही में कहा था कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लेकिन क्या उनकी यह बातें एनसीएलटी तक पहुंच पाएंगी? समझना जरूरी है।दरअसल यह कोई पहला मामला नहीं है।

मार्च 2025 में एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ जिसने एनसीएलटी की साख को दागदार किया। सीबीआई ने एक ऐसे रैकेट का भंडाफोड़ किया जिसमें एनसीएलटी की बेंच को फिक्स करने के लिए ₹1.5 करोड़ की रिश्वत ली जा रही थी। जी हां, ₹1.5 करोड़ में एक फैसला खरीदा जा रहा था। माइक्रो कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी ने एनसीएलटी मुंबई में एक दिवालियापन से जुड़ा मामला दायर किया था। इस मामले में एक प्रोफेशनल पुनर्मूल्यांकनकर्ता धर्मेंद्र ढेलरिया को नियुक्त किया गया। लेकिन जब कंपनी ने अपना पुनर्मूल्यांकन प्लान जमा किया तो उसे मंजूरी दिलाने के लिए रिश्वत की मांग हुई। रिपोर्ट में एक नाम सामने आया महावेश जो एयू कॉर्पोरेट एडवाइज़री एंड लीगल सर्विज में काम करती थी। महावेश ने कंपनी के डायरेक्टर विनय सर्राफ से संपर्क किया और कहा कि वह एनसीएलटी की जुडिशियल मेंबर रीता कोहली से उनके पक्ष में फैसला करवा सकती हैं लेकिन कीमत लगेगी ₹1.5 करोड़। सीबीआई ने पाया कि रजिस्ट्री के अधिकारी, रिश्वतखोरों और एनसीएलटी के सदस्यों के बीच की कड़ी थी। एक रिटायर्ड रजिस्ट्री अधिकारी को इस रैकेट का सरगना बताया गया। सीबीआई के सूत्रों ने कहा यह एक सुनियोजित रैकेट था जो देश भर में एनसीएलटी की बेंच को फिक्स करता था। सोचिए अगर इंसाफ की कीमत डेढ़ करोड़ हो तो आम आदमी का क्या होगा? सीजीआई गवई साहब ने हाल ही में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कारवाई की बात कही थी। लेकिन क्या यह रैकेट उनकी नजरों से बच पाएगा?

यहां एक और मामला हम आपको बताते हैं। दिल्ली की  राउज़ एवेन्यू कोर्ट की ओर आपका ध्यान आकर्षित करते हैं। जहां एक और घिनौना खेल सामने आया। मई महीने में ही दिल्ली की एंटी करप्शन ब्रांच के एसीबी ने कैश फॉर बेल का एक ऐसा मामला पकड़ा जिसने सबको हिला कर रख दिया। आरोप था कि यहां जमानत के लिए ₹40 लाख की रिश्वत ली गई। जांच में यह भी पता चला कि कोर्ट के अहलमद मुकेश और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट विशाल ने मिलकर यह रिश्वत ली थी ताकि एक आरोपी को जमानत मिल सके। एसीबी ने ऑडियो रिकॉर्डिंग्स जुटाए जिसमें अहमद को यह कहते सुना गया बात खराब हो जाएगी अगर पैसे नहीं दिए। इन रिकॉर्डिंग्स में एक स्पेशल जज की भूमिका पर भी सवाल उठे। एसीबी ने जज के खिलाफ कारवाई की अनुमति मांगी लॉ मिनिस्ट्री से लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि अभी पर्याप्त सबूत नहीं है। हालांकि जज को दूसरी कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया। अहमद ने अग्रिम जमानत की अर्जी दी लेकिन कोर्ट ने उसे फिलहाल खारिज कर दिया। जज साहब बच गए। कोर्ट ने कहा यह शख्स मुख्य अपराधी है और सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है। दिल्ली से मुंबई तक भ्रष्टाचार की यह आग फैलती जा रही है। सीजीआई गवई साहब ने कहा कि हम जीरो टॉलरेंस पर यकीन रखते हैं। कोई करप्शन बर्दाश्त नहीं करेंगे। लेकिन क्या उनकी आवाज इन कोर्ट्स तक पहुंच पा रही है? ये एक सवाल हमेशा रहेगा।

यह बात RSS और 2014 से पहले वाली भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता ने लिखी है

यह बात RSS और 2014 से पहले वाली भाजपा के किसी वरिष्ठ नेता ने लिखी है  "सिंहासन ख़ाली करो, के संजय जी आते हैं" संजय विनायक जोशी ...