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Tuesday, June 3, 2025

देश की सबसे बड़ी अदालत का अहंकार कि वो सुप्रीम है

इस बात को समझिए कि देश की सबसे बड़ी अदालत जो इस अहंकार में थी कि वो सुप्रीम है,जो इस अहंकार में थी कि उसका कुछ भी नहीं हो सकता, जो इस अहंकार में थी कि वो 142 के तहत उसके पास सुप्रीम अधिकार है। तो एक अनुच्छेद 142 के तहत जस्टिस वर्मा के खिलाफ कारवाई क्यों नहीं की आपने? जस्टिस वर्मा के खिलाफ साक्ष्य जो कुछ भी था वो कोर्ट के पास उस समय भी था अब भी है। लेकिन एक याचिका दाखिल कर जब सुप्रीम कोर्ट से कहा गया कि आप एफआईआर क्यों नहीं दाखिल का आदेश क्यों नहीं देते? तो कहा जाओ प्रधानमंत्री से बात करो राष्ट्रपति से बात करो।

जिस राष्ट्रपति को आप अपना घरेलू नौकर समझ के आदेश जारी कर देते हैं। उस राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से आप कहते हैं कि जाओ उसके पास जाओ और उससे कहो एफआईआर दर्ज करने के लिए। संसद द्वारा पास कानून को आप रौंद देते हैं और कहते हैं जाओ प्रधानमंत्री से एफआईआर दर्ज करने के लिए। दरअसल देश अब इस खेल को समझ चुका है। इस जस्टिस वर्मा के परम पाप को इस इतने बड़े पाप को छुपाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूरी कोशिश कर ली और इस देश को पता चल गया कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रेस रिलीज जारी करके कह दिया कि टाइम्स ऑफ इंडिया की छपी रिपोर्ट जो है वो अफवाह है।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट कोअंदाजा नहीं था कि अमित शाह घाग है। दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अंदर में आता है और तय सी बात है कि जब मामला हाई कोर्ट के जज का होगा तो ये पूरे मामले को लेकर दिल्ली पुलिस ने गृह मंत्री से बात नहीं की होगी इसकी संभावना कतई नहीं है। इसका मतलब है कि गृह मंत्री अमित शाह ने इसकी पूरी तैयारी की और तभी जब पूरा मामला ठंडा पड़ता नजर आया। सुप्रीम कोर्ट ने इसको अपवाह साबित कर दिया तो चुपके से एक पेन ड्राइव थमाया गया और इस पेनड्राइव में वो सब कुछ था जिसको झुठलाना मुश्किल था। सुप्रीम कोर्ट यह भी नहीं कर सकती थी कि उस पेन ड्राइव को दबा देती क्योंकि पेन ड्राइव की कॉपी गृह मंत्रालय के पास होगा। पेन ड्राइव की कॉपी दिल्ली पुलिस के कमिश्नर के पास होगा। इस बात का अंदाजा दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को था।

जिस जुडिशरी से इंसाफ की उम्मीद की जा रही थी उसने कह दिया कि सब अफवाह है। लेकिन एक प्रेशर बना और जुडिशियल आयोग बनाया गया। न्यायिक आयोग बनाया गया। उस आयोग ने साफ-साफ कह दिया कि जस्टिस वर्मा के घर नोटों की गड्डियां जली हुई मिली और जस्टिस वर्मा को सब कुछ पता था। जस्टिस वर्मा इस केस को दबाना चाह रहे थे। इसीलिए सुप्रीम कोर्ट को कमेटी ने कहा कि इस आदमी पर FIR किया जाना चाहिए और इस इस आदमी को इस्तीफा देना चाहिए। जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा तक नहीं दिया और अब पूरा मामला संसद के हवाले है। अब देश की सुप्रीम संसद जो है वो तय करेगी कि जस्टिस वर्मा का क्या हो। इतिहास में आज तक किसी किसी न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग चलाया नहीं जा सका। अंतिम अंजाम तक नहीं पहुंचा। ये जस्टिस वर्मा पहला शख्स होगा क्योंकि इस मामले में विपक्ष भी सरकार के खिलाफ नहीं जा सकती और सुप्रीम कोर्ट का तो क्या होगा जुडिशरी का क्या होगा जस्टिस जस्टिस वर्मा का सच सामने आएगा आखिर इसके पीछे कितने लोग हैं क्या सैकड़ों करोड़ रुपए सिर्फ जस्टिस वर्मा के हो सकते हैं तो पता चलेगा क्या इसके पीछे घाघा कोर्ट फिक्सरों की भी भूमिका है।

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