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Thursday, June 5, 2025

मोदी सरकार और देश हित के मुद्दे के हमेशा खिलाफ कपिल सिब्बल बार - बार सुप्रीम कोर्ट में

पीएम नरेंद्र मोदी अब देश हित के मुद्दे पर एक्शन मोड में हैं। पीएम मोदी ने साफ कर दिया है कि अब देश को धर्मशाला नहीं बनने देंगे। अब देश के संसाधनों पर देश के नागरिकों का ही हक होगा और हमारे देश में जो घुसपैठिए आ गए हैं, अब उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। लेकिन इस मुद्दे पर भी कुछ लोग मोदी सरकार के खिलाफ खड़े हैं।बांग्लादेश हमारा एक ऐसा पड़ोसी देश है जहां से काफी लोग आकर भारत में अवैध तरीके से रह रहे हैं। वह किसी ना किसी तरह से अवैध रूप से भारत में दाखिल होते हैं और भारत के सीमावर्ती इलाकों की डेमोग्राफी बदलने का काम करते हैं।

जिस पर आज तक किसी सरकार ने खुलकर संज्ञान नहीं लिया था। क्योंकि विपक्षी दलों के लोगों को तो हमेशा से ही एक ही डर सता रहा था कि यह चले गए तो हमारा वोट बैंक का क्या होगा? क्योंकि यह लोग जाली दस्तावेज बनाकर भारत में सुख भोगते रहे और भारत को अपराध की सूली पर चढ़ाते रहे।

लेकिन बीजेपी की असम सरकार इन्हें वापस उनके देश भेज रही है। तो कपिल सिब्बल सरी के नेताओं को दर्द हो रहा है और वह इसका विरोध कर रहे हैं। ऐसा ही कुछ हुआ है।कपिल सिब्बल एक ऐसा बयान दे चुके हैं कि देश की सबसे बड़ी सुप्रीम अदालत में वह कहते हैं कि उसे बांग्लादेशी महिला को बाहर निकाल दिया। उसे बांग्लादेश भेज दिया गया। यह दलील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में मोनोवरा बेवा नाम की एक बांग्लादेशी महिला के पक्ष में दी है। इस महिला को असम पुलिस ने उनके मुल्क वापस भेज दिया है। उसके बेटे अनज अली ने इसे चुनौती दी है। एक रिपोर्ट के अनुसार सिब्बल की इस दलील के जवाब में जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने यह कहा कि यदि वह पहले से ही देश में नहीं है तो हम उसे वापस नहीं बुला सकते। इस महिला की पैरवी करते हुए सिब्बल ने ऑपरेशन पुशबैक की वैधता पर भी सवाल उठाए।

वैसे यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह से देश के मामले पर कोर्ट में कपिल सिब्बल खड़े हो गए हो। राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद में मस्जिद की पैरवी हो, वफ का मामला हो। इस तरह के एक खास एजेंडे को भुनाने में कोर्ट के सामने काला कोट पहने कपिल सिब्बल का चेहरा उठकर सामने आ जाता है। मोदी सरकार और बीजेपी के खिलाफ हर मामले को लेकर कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट पहुंचते हैं। इसी तरह सुप्रीम कोर्ट में मुनवरा बेवा के बेटे अनच अली की याचिका के लिए कपिल सिब्बल कोर्ट में खड़े हुए। अनज ने याचिका में आरोप लगाया कि पुलिस ने उसकी मां को जबरन बांग्लादेश भेज दिया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया। कोर्ट से सिब्बल ने कहा कि महिला मुनवरा बेवा को धुबरी पुलिस ने उठाया और जबरन बांग्लादेश भेज दिया। याचिका पर जस्टिस संजय करोल और सतीश चंद्र शर्मा सुनवाई कर रहे थे। सिब्बल ने कोर्ट से पूछा कि धुबरी एसपी किस आधार पर किसी व्यक्ति को बांग्लादेशी नागरिक घोषित कर सकते हैं। क्या महिला को हिरासत में लेने के बाद किसी मैजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया? क्या कोर्ट इस पर भरोसा कर सकती है? सिबल यहीं पर नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि अनज को यह तक नहीं पता कि उसकी मां भारत में है या फिर बांग्लादेश भेज दी गई हैं। सरकार को अनज की मां की मौजूदा स्थिति के बारे में बताना चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने याचिका के तहत केंद्र सरकार का नोटिस जारी किया। अनज अली का यह भी कहना है कि ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ उसकी मां की याचिका 2017 से अब तक सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। 26 साल के अनज अली ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उसका दावा था कि उसकी मां मुनव्वरा बेवा को असम पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में रखा है। साथ ही देश में रातोंरात लोगों को बांग्लादेश भेज दिया जा रहा है।

मुनवरा बेवा को 17 मार्च 2016 को दुबरी फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित कर दिया था। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 28 फरवरी 2017 के आदेश में भी ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा था। इसके बाद बेवा ने सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी तब से अब तक यह मामला लंबित है और अब जब मोदी सरकार और असम की बीजेपी सरकार घुसपैठियों पर कार्यवाही कर रही है तब कुछ लोगों को तकलीफ हो रही है। लेकिन सवाल है कि इन लोगों के पास इतना पैसा कहां से आ रहा है जो वह कपिल सिब्बल जैसे इतने बड़े वकील को हायर कर रहे हैं।


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