ईरान ने अब क्लियर कट एक संदेश दिया है कि अब अमेरिका के साथ बातचीत नहीं होगी
ईरान ने अब क्लियर कट एक संदेश दिया है कि अब अमेरिका के साथ बातचीत नहीं होगी
ईरान ने अब क्लियर कट एक संदेश दिया है कि अब अमेरिका के साथ बातचीत नहीं होगी
मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार जारी है। एक सीज फायर यहां पर किया गया है लेकिन वो भी महज ना अमेरिका की तरफ से कहा जाता है कि हमें सीज फायर बरकरार रखना है। लेकिन इजराइल ईरान पर हमले कर देता है। ईरान के तमाम ठिकानों पर हमले होते हैं। कई मौत होती है। लोग घायल होते हैं। लेकिन अब ऐसे में त्रस्त होकर ईरान ने अब क्लियर कट एक संदेश दिया है कि अब अमेरिका के साथ बातचीत नहीं होगी। यह दावा लगातार ईरानी मीडिया की तरफ से किया जा रहा है कि अब बात नहीं होगी। यानी कि जो मध्यस्थता की जा रही थी, जो संदेशों का आदानप्रदान अमेरिका के साथ चल रहा था, अब उस पर ईरान ने पूरी तरीके से रोक लगा दी है जो कि अपने आप में एक विकट स्थिति बना सकता है। क्योंकि बार-बार ये कहा जा रहा था कि 60 दिनों का जो सीज फायर है उसको बढ़ा दिया जाएगा। बातचीत चल रही है। ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका को सौंप सकता है या फिर खुद ही उसे नष्ट करेगा। तमाम अलग-अलग तरीके की जो बातें थी वो निकल कर आ रही थी। लेकिन अब ऐसे में ये अपने आप में चिंताजनक खबर कहीं ना कहीं पूरे मिडिल ईस्ट के साथ-साथ दुनिया भर के लिए है क्योंकि इनफ्लेशन की हम बात करते हैं। स्टेट ऑफ हॉर्मोस की हम बात करते हैं। उन सभी पर एक तनाव जरूर आएगा क्योंकि ईरान ने कहा है कि अब अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं होगी। यानी कि हॉर्मोंस को भी बंद करने की बात अब यहां पर आ सकती है जिस तरीके से मिडिल ईस्ट में तनाव है। अमेरिका की तरफ से कहा जाता है कि वी आर वेरी क्लोज टू सीज फायर। उसके बाद फिर कुछ हमले होते हैं। फिर इजराइल की तरफ से ईरान पर हमले होते हैं। लेकिन अब ऐसे में त्रस्त होकर ईरान ने खुद ही कह दिया कि भाई हम बात-वात अब नहीं कर पाएंगे। आप सीज फायर की बात करते हैं। आप फिर हम पर बम मार देते हैं। तो अब क्या समझे ईरान ने सीधा कहा है कि अब कोई भी संदेश जो है वो अमेरिका की तरफ नहीं जाएगा और अमेरिका कोई भी संदेश हमारी तरफ नहीं आएगा। देखिए रितिक जी यह जो अमेरिका ने जो कारवाई की जॉइंट ऑपरेशन जो इजराइल और अमेरिका ने किया ये अमेरिका ने मसल फ्लेक्सिंग के तरीके से सोचा था और ये उनका सोचना था कि जैसे ही हम टॉप लीडरशिप को हटा देंगे ईरान की तो ईरानी सरेंडर कर देंगे और जो भी हम शर्तें रखेंगे उन
शर्तों पे वो सरेंडर कर देंगे। पर ईरान ने इस वॉर को प्रोग करके इसे एक ब्लडी वॉर ऑफ एट्रिशन बना दी जिसकी कीमत अमेरिकी जनता देने के लिए तैयार नहीं है। डोन्ड ट्रंप साहब के पास अपनी जनता को जवाब देने के लिए कुछ नहीं है। वो हमेशा आपने देखा होगा पिछले कई महीनों से वो कह रहे हैं कि सीज फायर जब उन्होंने किया था कि हमारी बातें चल रही है और ईरान सरेंडर करने के लिए तैयार है। परंतु उनकी जो सबसे बड़ी शर्त है, उनकी अमेरिका की सबसे बड़ी शर्त यह है कि ईरान अपने न्यूक्लियर एस्पिरेशंस को पूरी तरीके से सरेंडर करे। जो उसके पास न्यूक्लियर मटेरियल है, वो उसको अमेरिका के सपोर्ट करें। जिसके लिए ईरानी कहीं से कहीं तक भी तैयार हो नहीं सकते। उसका मैं कारण बताता हूं। जिस दिन ईरान की जिस भी लीडर ने ये बात कही कि हम अपने न्यूक्लियर एस्पिरेशंस को त्याग रहे हैं। उस लीडर को ईरान की जनता ईरान में रहने ही नहीं देगी। उस लीडर को छोड़िए उसके परिवार को भी ईरान में नहीं रहने देगी। वो गद्दार की श्रेणी में आ जाएगा। एक देश का एक आत्मसम्मान होता है। तो उस देश का आत्मसम्मान ये कहता है कि हमें जब पाकिस्तान के पास न्यूक्लियर वेपंस हो सकते हैं, इजराइल के पास न्यूक्लियर वेपन्स हो सकते हैं तो ईरान क्यों नहीं न्यूक्लियर एस्पिरेशंस रख सकता। ईरान अकेला एक शिया बहुल मुस्लिम कंट्री है जिसके पास संसाधनों की कमी नहीं है। उसके पास ऑयल परचूर मात्रा में है। तो वो कहता है कि हमारी सुरक्षा के हिसाब से ईरान की जैसी इजराइल के साथ उनकी दुश्मनी चल ही रही है। उनका कहना ये है कि हमें न्यूक्लियर वेपंस चाहिए ही चाहिए। और पास्ट के आप एग्जांपल्स देखिए। म्यांमार गद्दाफी के साथ म्यांमार गद्दाफी लेबलान के जो थे उन्होंने पूरी तरीके से अपना सब कुछ सरेंडर कर दिया था। लीबिया के जो थे
डिक्टेटर उन्होंने अपना सब कुछ सरेंडर कर दिया। न्यूक्लियर वेपन सरेंडर कर दिए थे। उनके साथ कैसे बर्ताव किया गया नाटो द्वारा और यूएस के द्वारा वो जग जाहिर है। सद्दाम हुसैन इराक के वो भी किसी जमाने में यूरोप के बड़े ही खास हुआ करते थे। अमेरिका के बड़े खास हुआ करते थे। उन्होंने जब अपने ये कहा कि हमें न्यूक्लियर वेपंस चाहिए और इन्होंने झूठा बिल्कुल सफेद झूठ अमेरिका ने बोला कि इराक के पास वेपन्स ऑफ मास डिस्ट्रक्शन है जो कि कुछ भी नहीं मिला। अगर न्यूक्लियर वेपंस उसके पास होते तो अमेरिका उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाता। आप नॉर्थ कोरिया के
किंग जोंग उनका एग्जांपल ले सकते हैं। उन्होंने न्यूक्लियर एस्पिरेशंस रखे और आज वो न्यूक्लियर पावर है। इसीलिए उसके ऊपर कोई हमला नहीं कर सकता। तो ईरानी ये समझ गए हैं कि हमें अपने न्यूक्लियर एस्पिरेशंस को पूरा करना ही करना है। आज नहीं अगले 10 साल बाद। तो ये जो टॉक्स हैं वो सारी बातें शर्तें मान जाएंगे अमेरिका की कि वो निवेश के लिए भी मान जाएंगे कि अमेरिकी कंपनियां यहां आ जाए। वो सबके लिए मान जाएंगे। पर यह जो बात है कि कंप्लीटली सरेंडर योर न्यूक्लियर एस्पिरेशंस यह होता हुआ कहीं मुझे नजर नहीं आ रहा है। जी क्योंकि तीन मेन जो शर्तें हैं वो ये है कि ईरान सबसे पहली शर्त ही ये है कि अपने यूरेनियम को पूरी तरीके से नष्ट कर दे और अगले 20 साल तक ईरान ऐसा सपना भी ना देखे। तीसरा स्टेट ऑफ वर्क उसका था। ये तीन मेन कंडीशन एक समय में तो हालांकि ट्रंप कह रहे थे अनकंडीशनल सीजन की जो भी बातें वो कर रहे थे लेकिन अब ऐसे में क्योंकि चलिए ये तो यूरेनियम की बात है वो कंट्री अपने ऊपर लेकर के चल रही है तमाम सारी चीजें होती हैं। अभी फिलहाल ये जो सीज फायर है क्योंकि अब्बास अरागची की अगर बात करें जो मंत्री हैं ईरान के विदेश मंत्री हैंउन्होंने स्पष्ट रूप से सोमवार को एक ट्वीट किया कि लगातार जो है ईरान पर तो हमले हो ही रहे हैं। भाई यह जो फ्रजाइल सीज फायर था फ्रजाइल इसलिए क्योंकि बहुत ही कमजोर सीज फायर है। आप सीज फायर भी कह रहे हो उसके बाद आप उसको ईरान के ऊपर बम भी बरसा रहे हैं। तो उस पर अब्बास सरागची ने कहा कि किसी भी तरीके की अगर ये फायरिंग होती है या फिर गोला बारूद फेंका जाता है तो इसे हम सीज फायर का उल्लंघन मांगेंगे और उसके बाद अब ये बातचीत बंद की गई है। तो इसका खतरा क्या हो सकता है? देखिए अमेरिका की कथनी और करनी में अंतर है। ईरानियों का यह कहना है कि वर्ल्ड्स पे हम अमेरिका के भरोसा नहीं कर सकते। अगर अमेरिका को हमें भरोसा दिलाना है तो एक्शंस करने होंगे। तो उनका कहना ये है कि अपना मिलिट्री बिल्ड अप जो है आप उसको पीछे हटाइए। जो आपका नेवल अरमाडा है जो घेरे पड़ा है ईरान को जो दिल्ली बम बरसा रहा है ईरान के ऊपर वो कह रहे हैं इनको पहले आप हटाइए। हमारे चारों तरफ से इसे हटाइए। स्टेट ऑफ हॉर्मोस का जो जो ये आज स्थिति है जो उस पे बंद हुआ हुआ है उसमें अकेला ईरान जिम्मेदार नहीं है उसके लिए अमेरिका भी जिम्मेदार है जो शिप्स ईरान जाना चाहते हैं जो ईरान चाहता है कि उसके यहां शिप्स आए उन्हें अमेरिका नहीं आने दे रहा है तो ईरान पे की सबसे पहले तो यही कहना है कि आप आप तो खोलिए स्टेट ऑफ होमोस अपनी तरफ से तब मुझसे उम्मीद करिए हमसे उम्मीद करिए कि हम स्टेट ऑफ होमोंस को खुला छोड़ें तो ये कहीं ना कहीं यह बात यह जंग मुझे आगे बढ़ती हुईज़ आती है। यह मामला अभी सुलझने से कोसों दूर मुझे नजर आता है।अमेरिका भी इस युद्ध में अपने आप को झोंक दिया था। 8 अप्रैल को इस पर सीज फायर की बात आई। लेकिन 8 अप्रैल के बाद से हमने देखा है कितनी बार एक दूसरे के ऊपर फिर भी जो हमले हैं वो कर दिए गए। ये सीज फायर एक तरीके से क्योंकि समझ में भी नहीं आ रहा है। नजर में भी नहीं आ रहा ये सीज फायर। तो क्या यह माना जाए कि अब जो स्थिति है कहीं ना कहीं मिडिल ईस्ट की सब्र करके देख लिया है। अब 60 दिन के सीज फायर की बात की गई थी लेकिन उसके बीच में भी इतनी सारी बातें हो रही है। मिसअंडरस्टैंडिंग्स लगातार हो रही है। किसी भी निष्कर्ष पर मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजराइल और ईरान नहीं पहुंच पा रहे हैं। खबर ये भी थी कि अमेरिका की तरफ से ट्रंप ने इजराइल में बेंजामिन नेतन याू को भी धमका दिया था फोनकरके कि आप कर क्या रहे हो? करना क्या चाह रहे हो? मैं नहीं होता तो तुम जेल में भी होते। तो क्या समझा जाए? मिडिल ईस्ट में अभी जो यह तनाव है कब तक रह सकता है और इसका निष्कर्ष अगर निकलेगा तो इसके पीछे क्या रीज़ंस होंगे? देखिए ईरान जो है वो अमेरिका के लिए डायरेक्टली कभी कोई थ्रेट नहीं रहा है। वो थ्रेट है इजराइल के लिए। इजराइल के लिए एकिस्टेंशियल थ्रेट है ईरान स्वयं में। क्योंकि जितना भी जो भी इजराइल की प्रॉब्लम्स हैं उसका सबसे बड़ा प्रोपोनेंट जो है जो उनके जो ये हिजबुल्ला हो गए हमास हो गए इन सब की जड़े कहीं ना कहीं ईरान से
निकलती है। तो इजराइलियों का ये कहना है कि जब तक पूरी तरीके से ये अपने ये जो आतंकवादी इन्होंने हमारे खिलाफ खड़े कर रखे हैं। जब तक ये पूरी तरह सरेंडर नहीं कर देंगे तब तक हम पीछे नहीं हटेंगे क्योंकि जाने बहुत गई है। निर्दोषों की निर्दोष इजराइलियों की जाने गई हैं। इससे कोई झूठ नहीं बोल सकता। इससे मुंह नहीं मोड़ा जा सकता। तो उनके लिए तो एकिस्टेंशियल थ्रेट है ईरान। पर अमेरिका के लिए तो ये केवल उनकी वॉर मिलिट्री जो उनका डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग कॉम्प्लेक्स है उसके लिए एक और एक ओपोरर्चुनिटी है। नथिंग एल्स। उन्हें हथियार बेचने हैं, हथियार इस्तेमाल करने हैं, उन्हें रिप्लनिश करना है। और उसके बाद जब वो किसी देश को नेस्तोनाबूत कर देते हैं तो अपनी ही उनकी फिर कंस्ट्रक्शन कंपनीज़ होती है। तो बहुत मिलियंस एंड बिलियंस ऑफ डॉलर्स का धंधा करना है उन्हें। तो तो उनके लिए तो धंधा है। ऑयल उन्हें चाहिए ईरान का। वो चाहते हैं कि ईरानी जो ट्रेड करें ऑयल का वो डॉलर्स में करें। क्योंकि ईरान नहीं कर रहा था डॉलर्स में ट्रेड। परंतु ईरान ने जिस तरीके से सस्टेन करके दिखाया ईरानियों ने वो कहीं ना कहीं सुपर पावर की डिमिनिशिंग सुपर पावर होते हुए का एक उदाहरण दुनिया के सामने पेश किया है और ट्रंप साहब अपनी जनता के सामने इस समय मुंह दिखाने के लिए तैयार नहीं है। अब वो बेंजामिन नितिन याू पे दबाव बना रहे हैं और कहीं ना कहीं जिस तरीके के बयानात उनके सामने आ रहे हैं वो कहीं ना कहीं इस डिबकल के लिए नितिन याू साहब को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश कर रहे हैं और उसमें वो मुझे कामयाब होते हुए दिखाई नहीं दे रहे क्योंकि इजराइल कहीं से कहीं तक भी बैकडाउन करने के लिए तैयार नहीं है। आज भी उसने सदर्न लेबनान में बहुत बड़ी कारवाई करी है। तो अभी फिलहाल ईरान की तरफ से यह कह दिया गया है कि अमेरिका के साथ हमारी कोई बातचीत नहीं होगी। यह जो भी तरीके से इजराइल और अमेरिका की तरफ से कभी भी जो हमले किए गए हैं हर मोर्चों पर उसे सीज फायर का उल्लंघन माना जा रहा है। अभी देखना होगा कि आने वाले समय में मिडिल ईस्ट की स्थिति और कितनी ज्यादा तनावपूर्ण होती है। क्योंकि तमाम दुनिया की अगर हम बात करें लगभग 20% का जो तेल है वो वहां से पहुंचता है स्टेट ऑफ हार्मोस से होकर के। इसके साथ ही और भी अलग-अलग तरीके की जो दुविधाएं हैं वो मिडिल ईस्ट की वजह से तमाम देशों को झेलनी भी पड़ रही है और इसकी वजह से ट्रंप भी अब कहीं ना कहीं जिम्मेदार होते जा रहे हैं। ट्रंप खुद भी मजबूर होते जा रहे हैं। जिसकी वजह से अब ट्रंप भी इजराइल पर दबाव बना रहे हैं। देखना होगा आने वाले समय में इसके क्या कंक्लूजन निकलता है? किस तरीके का असर अब मिडिल ईस्ट में आता है।
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