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Saturday, June 20, 2026

DOCTRINE PRAHAR

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 एक डील जो दिल्ली में बैठकर हुई गौर और अमित शाह के बीच में। एक सीक्रेट मीटिंग था जो नॉर्थ ब्लॉक में किया गया। लेकिन इस मीटिंग में आने से पहले कुछ चीजें हैं जो पहले हुई है। चार न्यूज़ हैं जो इंटररिलेटेड है वो आपको समझनी पड़ेगी।मेरे पास कुछ एक्सक्लूसिव कुछ डिटेल्स हैं जो मैं आपके सामने रखूंगा। पहला काम हुआ था फरवरी 2026 पे जहां पर एक इंडियन ने प्लीट गिल्टी किया न्यूयॉर्क के अंदर कि यस भारत की जो इंटेलिजेंस एजेंसीज हैं वो अननोन गन मैन को भेजती हैं और जाकर वो वेस्ट में उन्होंने निजर को गीला कर दिया था। फरवरी में यह काम होता है मार्च 2026 में। कनाडा सडनली जो पूरा का पूरा सेंसिटिव एविडेंस है उसको छुपा लेता है। मर्डर ट्रायल के अंदर उस आदमी को बचाने के लिए कनाडा अमेरिका को डॉक्यूमेंट देता ही नहीं। ये मार्च में हुआ था। उसके बाद आता है जून में जून 2026। भारत ने अनाउंस कर दिया एक नया एग्रेसिव काउंटर टेररिज्म का एक डॉक्ट्राइन। काउंटर टेररिज्म का मतलब है कि अगर हमारे इंटरेस्ट या भारत की धरती को कोई भी अगर टच करने की कोशिश करेगा या धमकी देगा हम जाकर उसे कहीं भी मार सकते हैं। ये हमने ऑफिशियली डिक्लेअर कर दिया और जैसे ही हमने वो डिक्लेअर किया है अमेरिका का एंबेसडर वो जी7 को छोड़कर वो यहां पे आता है और सीधा अमित शाह के ऑफिस में बैठकर कुछ बातें। ये सारी बातें मैं आपके सामने रखूंगा क्योंकि चार डिफरेंट हेडलाइंस हैं जो आपको दिखती हैं। लेकिन चार डिफरेंट हेडलाइंस तीन डिफरेंट कंट्रीज में ये इंसिडेंट होते हैं।फाइनल मूव मैसिव हाई स्टेक्स का जिओपॉलिटिकल ऑपरेशन है जो हमारे आंखों के सामने हो रहा है। रूल्स चेंज हो रहे हैं ओवरनाइट। अब इस सारे को एक टेप को रिवाइंड करते हैं एक-एक करके कि हुआ क्या था और आगे इस मीटिंग में हुआ क्या? आप पहले आइए समर 2023 में निजर याद है आपको? हरदीप सिंह निजर उसको कुत्ते की तरह पार्किंग लॉट में कनाडा में गोलियों से भून दिया गया। मार दिया उसको। लेकिन उसके बाद जो एफबीआई है उसमें एक और प्लॉट था जहां पर जो पन्नू है उसको मारने की अननोन गवर्नमेंट ने कोशिश करी थी लेकिन  एफबीआई बीच में आ गया और उन्होंने अपने एसेट को पन्नू को उन्होंने बचा लिया न्यूयॉर्क के अंदर। उसके बाद क्या हुआ? यूनाइटेड स्टेट्स और कनाडा दोनों ने कोऑर्डिनेट करना शुरू कर दिया कि एक कैंपेन शुरू करते हैं कि किसी तरीके से भारत की गवर्नमेंट को अब रिस्पांसिबल करेंगे इन चीजों के ऊपर। जो जस्ट आउट जस्टिन था वैसे जस्टिन ट्रूडो अभी जस्ट आउट हो चुका है। ट्रूडो वो पार्लियामेंट में खड़े हो के क्या बोलता है कि हमारे पास एविडेंस है कि भारत की इंटेलिजेंस ने ये काम किया है।यूएसए का जो जस्टिस डिपार्टमेंट है उन्होंने भी एकदम से पूरे दुनिया में उन्होंने रेड नोटिस निकाल दिया कि भारत के कौन से ऑपरेटिव्स हैं जो कि काम कर रहे हैं।अमेरिका ने चार्ज किया एक भारत के नेशनल को जिसका नाम था निखिल गुप्ता। आपको मालूम है साथ में उन्होंने एक और भारत का इंटेलिजेंस का ऑफिसर रिटायर किया हुआ विकास यादव उसको भी इन्होंने इंडक्ट कर दिया कि यार ये दो लोग हैं जो ये सारे काम कर रहे हैं। अब वाशिंगटन को और कनाडा को लगा कि यार हमने हमने पूरा एक वाटर टाइट हमने केस बना लिया। अब ये भारत को हम कटघरे में खड़ा करेंगे। लेकिन उनको लगा कि न्यू दिल्ली ब्लिंक कर जाएगा। मिसकैलकुलेट कर दिया। रीज़न क्या था? अमित शाह होम मिनिस्टर हैं। उन्होंने और अजीत देवाल ने एक ही काम बोला प्रूफ दिखा दो। हम मान जाएंगे। प्रूफ उनके पास था नहीं क्योंकि जो अननोन गन मैन है वो बिना ट्रेस छोड़े वो काम करके आते हैं। कोई पता लगता ही नहीं कि कब आए और कब काम करके चली गई। अब ये तो हो गया जो 2023 में हुआ और 2024 में यह ड्रामा चलता रहा। फास्ट फॉरवर्ड कीजिए 2026 में। लैंडस्केप पूरी की पूरी डिफरेंट हो गई है। फ में निखिल गुप्ता ने प्लीड किया कि यस वो निजर के केस में या पन्नू के केस में वो इनवॉल्व था। वेस्टर्न मीडिया ने बोलना शुरू कर दिया ये तो विक्ट्री है। अमेरिका का जस्टिस सिस्टम ने निखिल गुप्ता को डंडे मारे और उसे सब कुछ उगलवा लिया। लेकिन उसके बाद आया मास्टर स्ट्रोक वो था कनाडा का। कनाडा का जो जस्टिस डिपार्टमेंट है उनके ऑफिशियल्स वो जाते हैं फेडरल कोर्ट के अंदर। और वो बोलते हैं कि हमें परमिशन चाहिए कि जो सेंसिटिव इंफॉर्मेशन हमारे हाथों में है मर्डर केस का निजर के मर्डर केस का वो हम विद होल्ड करना चाहते हैं। क्यों? जब पूछा गया कि अब ये डॉक्यूमेंट्स को रिलीज क्यों नहीं कर रहे? तो उन्होंने बोला हम इंटरनेशनल रिलेशंस को खराब नहीं करना चाहते। इसलिए हम ये डॉक्यूमेंट्स को छुपाना चाहते हैं। कनाडा ने वो डॉक्यूमेंट्स को सीक्रेटली अपने पास रख लिया। अमेरिका के साथ शेयर नहीं किया। यानी कि कनाडा फाइनली क्या बोल रहा है? हम एक ट्रांसपेरेंट ट्रायल हम नहीं चाहते। कनाडा बोल रहा है जो पहले इतना उछल उछल के बोल रहा था कि निजर का हम हिसाब किताब बराबर करेंगे भारत के साथ। अब बोलता है हमें केस चाहिए ही नहीं। आप केस को बंद कर दीजिए। जो एविडेंस ट्रेल था वो लीड करता ही नहीं है निखिल गुप्ता के पास। ना ही हमारे जो रॉ के एजेंट है उन तक यह डॉक्यूमेंट्स वो प्रूव ही नहीं करते कि ये लोग इनवॉल्व थे।कनाडा के अंदर वो एक्सपोज क्या कर रहे थे? वो एक्सपोज कर रहे थे जो डॉक्यूमेंट्स कनाडा के पास है वो एक्सपोज करते हैं नेटवर्क्स ड्रग्स के टेररिज्म के खिस्तानियों के जो गैंग वॉर्स हैं उसके और एक्सटॉशन का जो रैकेट है वो सारा का सारा इन्वॉल्व था उन डॉक्यूमेंट्स के अंदर जब उन्होंने बोला कि हम इंटरनेशनल अपने रिलेशंस को खराब नहीं करना चाहते उसका मतलब था वो ख़स्तानियों से अपने कंट्री को बचाना चाहते हैं इसलिए वो उनको ख़स्तानियों को एक्सपोज नहीं करना चाहते। ये वही चीजें हैं जो भारत इतनी देर से कनाडा को बोलता रहा कि भाई आपके पास ये खस्तानी जो हैं ये ट्रग्स का काम करते हैं। ये ड्रग्स और ड्रग्स ये दोनों का काम करते हैं। कनाडा से अमेरिका में पहुंचाने का काम ये ख़स्तानी कर रहे हैं। और वहां पे जो ड्रग का मनी है उससे ये ख़स्तान की मूवमेंट को इन्होंने जिंदा रखा हुआ है। ये तो हो गया जो अब तक हुआ। अब आते हैं जून 2026। ये जो US Ambassador  गौर की मीटिंग है उससे पहले हमने एक हथौड़ा मारा। गवर्नमेंट ने रिलीज किया एक पॉलिसी को। उसका नाम था प्रहार। अब ये प्रहार क्या है? प्रहार का मतलब है कि हम कोडिफाइड नेशनल काउंटर टेररिज्म की पॉलिसी हमने निकाल दी। मैसेज बड़ा ब्लंट और अनक्प्रोमाइजिंग था कि पूरे दुनिया में कहीं भी कोई सप्लाई चेन है टेरर इकोसिस्टम का। अब उसे डिस्मेंटल किया जाएगा। पूरे दुनिया में अकेला भारत में नहीं कहीं भी हो। यानी कि अब कोई डिफेंसिव पोश्चरिंग नहीं होगा। ना ही हम वैसे से परमिशन मांगेंगे कि जी हमारा पन्नू है हमें वापस कर दो। ठीक है? और नहीं तो उसकी जुड्डी पे आग लगा दो। हम कोई ऐसी बात नहीं करेंगे। खुद जाएंगे जाके आग लगा देंगेअगर किसी ने भी वो खस्तानी हो या आईएसआई हो वो कोई भी हो। अगर उन्होंने टेरर फंडिंग करी भारत के खिलाफ। ये प्रहार किया है जाएंगे प्रहार करेंगे। कहां पर? पहले तो भारत में अगर उनकी कोई एसेट है उसको फ्रीज़ कर दिया जाएगा। उसके बाद पूरे दुनिया में कहीं भी इनका नेटवर्क है कहीं भी यह बैठे हैं उसे हंट किया जाएगा और अननोन गन मैन ये लिखा नहीं है। ये मैं बता रहा हूं। वो अपना काम कराएंगे। जैसे ही आपने प्रहार अनाउंस किया है। उसके बाद क्या हुआ? प्रधानमंत्री मोदी पहुंच जाते हैं फ्रांस के अंदर। वहां पर डॉनल्ड ट्रंप से मिलते हैं। G7 की सबमिट करते हैं और वहां पर स्ट्रेटेजिकली चीजों के ऊपर बात होती है। बात क्या होती है? इंडोपेसिफिक है, मैरिटाइम सिक्योरिटी है। ये सारी बच्चों वाली बातें हमने कर ली। चलिए मैं बच्चों वाले बोल रहा हूं। वैसे डीप डीप टॉपिक्स हैं। अब इसके बाद क्या होता है? रियल डील जो था वो वहां पर नहीं हुआ। वो हुआ बैकग्राउंड में क्योंकि 24 घंटे उसके बाद सारा का सारा जो जो एक्शन है वो शिफ्ट होता है G7 से निकल कर वो न्यू दिल्ली। वो पहुंच गया। यूएसए के एंबेसडर सर्गीय कौर वो भारत पहुंचते हैं भाग-भाग कर और वो मिनिस्टर ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स जयशंकर से मीटिंग नहीं करते। वो बायपास करते हैं सारे डिप्लोमेटिक प्रोटोकॉल्स को। वो चलते हैं सीधा नॉर्थ ब्लॉक के अंदर और वहां पर पहुंचते हैं अमित शाह के सामने उनके ऑफिस में। अब मैं एक्सप्लेन करता हूं पहले तो ये अनप्रेसिडेंटेड क्यों है? और जी7 की मीटिंग को छोड़कर अगर आप वापस आ रहे हैं इसका मतलब है कुछ बड़ा प्रहार हमने कर लिया या करने वाले हैं। एंबेसडर जो होता है गौर एक डिप्लोमेट है। वो एंबेसडर है और वो डिप्लोमेट जो होता है वो हमेशा डिप्लोमेट से मीटिंग करता है। अमित शाह एक डिप्लोमेट नहीं है। वो कंट्रोल करते हैं भारत की इंटरनल सिक्योरिटी को, इंटेलिजेंस ब्यूरोस को और साथ में जो बॉर्डर की फर्सेस हैं वो उसे डील करते हैं अमित शाह। प्लस एक फाइल और है जो अमित शाह के पास है वो है एक्स्ट्राडिशन की फाइल। यानी कि भारत के खिलाफ किसी ने काम पूरे दुनिया में किया उसको पकड़ के उठा के वापस लेके आने का काम वो अमित शाह का है। अब जब यूएसए का एंबेसडर जब अमित शाह को एक जो होम मिनिस्टर है उसे मिलके आता है यानी कि डिप्लोमेसी खत्म हो गया। अब आप ऑपरेशनल मीटिंग के पास की तरफ आप जाना शुरू हो गए। इसलिए अमित शाह से मीटिंग हुआ। अब जो ऑफिशियल स्टेटमेंट है वो रिलीज हो गया। उस पे क्या लिखा गया है वो सुनिए तीन चीजें वो बात करता है काउंटर टेररिज्म के ऊपर काउंटर टेररिज्म तो अमेरिका में कनाडा में पाकिस्तान में बांग्लादेश में यही है काउंटर टेररिज्म के साथ-साथ आपने जोड़ दिया काउंटर नारकोटिक्स कि अब काउंटर टेररिज्म के ऊपर काम अमेरिका और भारत मिलकर करेंगे काउंटर नारकोटिक्स ड्रग्स के ऊपर भी भारत में भी यह एक पेंडेमिक बन चुका है और अमेरिका के अंदर भी यही चीज है इसके ऊपर जॉइंटली काम होगा लेकिन उसके उसके बाद तीसरी जो चीज थी वो स्टैंड अलोन थी ग्लेयरिंग एक वार्निंग है। क्या बोला गया? जॉइंटली हम जो क्रिमिनल्स हैं उसे जस्टिस पे लेके आएंगे बिटवीन बोथ द कंट्रीज। अगर अमेरिका का कोई उग्रवादी या कोई भी ऑपरेटिव अगर भारत में है तो भारत अमेरिका के साथ मिलकर उसे डंडे मारेगा, सीधा करेगा। और अगर भारत का कोई क्रिमिनल वो अमेरिका में बैठा है उसे भी वहीं पर सीधा किया जाएगा। अमेरिका भारत के साथ मिलकर भारत के बिहाफ पर वो काम करेगा। डंडे हम भी मारेंगे वो भी मारेंगे। दोस्तों, यह जेनेरिक टॉकिंग पॉइंट नहीं है। यह टारगेटेड एक एक्शन प्लान है जो स्वर्गीय गौर और अमित शाह ने मिलकर प्रहार के ऊपर काम करना शुरू कर दिया। अब जो जिओपॉलिटिकल रियलिटी है जिसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा। यूनाइटेड स्टेट्स के पास मैसिव एक ड्रग्स की क्राइसिस है। नारकोटिक्स वहां पर फ्रीली वो मूव करते हैं मेक्सिको से भी और कनाडा से भी। कनाडा से कौन लेके आता है? यही निग्जर के पार्टी के सारे के सारे खाली हैं। सारा ट्रकिंग का बिनेस उनके हाथ में है। भारत के अंदर भी जो ड्रग्स की प्रॉब्लम है वो बहुत ज्यादा बढ़ती जा रही है। अब इससे प्रॉब्लम दुगनी है। जब कनाडा में ख़स्तानी जब ड्रग्स में से पैसा कमाते हैं उसके बाद वो टेरर फाइनेंसिंग का काम करते हैं भारत में। जब भी टेरर का काम करना हो जैसे पंजाब में टेररिज्म फैलानी है, खाली मूवमेंट करना है, एक्सट्रीमिज्म करना है तो वो सारा का सारा इन पैसों से किया जाता है। बड़े ऑर्गेनाइज्ड वे से ये जो क्राइम के सिंडिकेट्स हैं वो ऑपरेट करते हैं अमेरिका में और भारत के अंदर। अब ये जो दो प्रॉब्लम्स है ये इंटरसेक्ट कर रही हैं। अमेरिका में ड्रग्स की प्रॉब्लम है और भारत में उसी ड्रग्स के पैसे से ड्रग्स का काम भारत में भी हो रहा है। प्लस एक्सट्रीमिज्म का काम वो भी हो रहा है। इसलिए इंटरसेक्ट कर रहा है उनकी दुगती रग और हमारी वो कॉमन है। इसलिए जो ये जो क्योंकि जो ख़स्तानी वहां पे काम कर रहे हैं वही ख़स्तानी भारत में भी वो काम कर रहे हैं। दोस्तों जो गैंग्स हैं वो क्या कर रहे हैं? ड्रग्स के मनी से अब वो वेपन्स खरीद रहे हैं। उसके बाद कैलिफोर्निया में, ब्रिटिश कोलंबिया में यहां पंजाब में उन्होंने गंध डाल के रखा हुआ है। और ये जो सेपरेटेस्ट जो नेटवर्क्स हैं जो टारगेट करते हैं भारत को कि हमने खाली स्थान बना लेना है। हमने कश्मीर अलग कर देना है।हमेशा काटने की ही बातें वो बोलते हैं। ये अब अमेरिका ने और भारत ने बोल दिया कि अब ये बदतमीजी नहीं चलेगी। आपको याद होगा जब बाइडन की गवर्नमेंट थी उसने इन इंडिविजुअल्स को निजर को पन्नू को उनको क्या बोला ये तो पॉलिटिकल एक्टिविस्ट है इनको फ्रीडम ऑफ स्पीच के अंडर हम इनको पकड़ नहीं सकते वो वहां पे बैठकर भारत की धरती के ऊपर वो बोलते हैं अमित शाह को गोली मार देंगे हम प्लेन उड़ा देंगे लेकिन फ्रीडम ऑफ स्पीच के अंदर उनको पकड़ा नहीं गया जैसे ही ट्रंप आए उन्होंने देखा कि यार ये कार्टल्स एक प्रॉब्लम है इसलिए वाशिंगटन ने फाइनली रियलाइज कर दिया कि भारत की अगर हेल्प मिल जाती है क्योंकि भारत ने ऑलरेडी प्रहार को अनाउंस कर दिया है। अगर हम अलाइन कर ले भारत के साथ तो हमारा जो यहां पे ड्रग्स का प्रॉब्लम है उसे डिस्मेंटल किया जा सकता है। क्योंकि जो करने वाले लोग हैं वो भारतीय ही है। इसलिए आज मीटिंग हुई है। दोस्तों आप सोच के देखिए जो प्लेयर्स है वो इनवॉल्वड कौन है? वो है ट्रांस नेशनल ड्रग्स के गैंग्स, एक्सट्रॉक्शन के रिंग्स। और जहां तक यहां तो पंजाब के अंदर जो हाईली सिक्योर प्रिजंस हैं जेल के अंदर लोग बैठे हैं। वहां से बैठकर वो कनाडा के अंदर ड्रग्स का काम कर रहे हैं। जेल में वो भी पंजाब के अंदर जहां पे पूरी सख्ती है। इसलिए भारत जब चीखता रहा कनाडा को कि आप जिन सांपों को पाल रहे हैं एक दिन आपको डसेंगे वो काम होना शुरू हो गया। इसलिए जो हमारी एजेंसीज हैं आज एफबीआई और कनाडा के जो सीक्रेट एजेंसीज हैं उसके साथ कोऑर्डिनेट कर कर हम उनको डोजियर भेज रहे हैं। हमने  फाइनेंसियल रिकॉर्ड्स जो हैं पूरे इनके नेचर पार्टी के या ख़स्तानियों के हमने एक्सचेंज करने शुरू कर दिए। वेस्ट अब तक हमारी इंटेलिजेंस की रिपोर्ट्स को इग्नोर करता रहा। क्योंकि उनको ख़स्तानियों की जरूरत थी गवर्नमेंट में आने के लिए। लेकिन अब जो कारने की गवर्नमेंट है वो बिना ख़स्तानियों के आई है। इसलिए अब उन्होंने हमारी बात सुननी शुरू कर दी। दोस्तों चेस बोर्ड फ्लिप हो चुका है। जो मीटिंग है भारत की अमित शाह की और सर गौर की वो ट्रांजैक्शनल है। ट्रांजैक्शनल क्यों बोल रहा हूं? क्योंकि जो यूएसए का कोऑपरेशन है वो अब हमें मिलना शुरू हो गया और हमारा कोऑपरेशन उनको मिलना शुरू हो गया। नॉट ओनली इन प्रहार बट इन समथिंग एल्स आल्सो। हम क्या बोल रहे हैं? यूएसए को सप्लाई चेस को डायवर्सिफाई करना है चाइना से। हम मदद कर रहे हैं। उसको इंडोपेसिफिक में भारत की जरूरत है। हम दे रहे हैं। जबकि इंडोपेसिफिक में से इंडो वर्ड निकाल दिया लेकिन इंडिया को नहीं निकाला। सिर्फ नाम में से इंडो निकाला है। अब इसके रिटर्न में यूएसए क्या बोल रहा है? यूएसए बोल रहा है कि जो पन्नू एंड पार्टी को हम प्रोटेक्ट कर रहे थे सीआईए और एफबीआई अब वो प्रोटेक्शन खत्म कर दी जाएगी। इसलिए गौर जब अमित शाह को मिलते हैं उन्होंने एक लिस्ट दिया है अमित शाह को और अमित शाह ने भी एक लिस्ट दे दिया। लिस्ट में कई नाम है जो कॉमन है। उसमें पन्नू का नाम आ चुका है। नाउ डोज़ियर्स दोनों ने एक्सचेंज कर लिए। दोनों मैच कर रहे हैं कि कॉमन आदमी कौन है। उनके लोग भारत में कौन से बैठे हैं और हमारे लोग अमेरिका में कौन से बैठे हैं जिनको पकड़ के अब सीधा करना है। अब कोऑर्डिनेट किया जाएगा कि बैंक अकाउंट्स को वहां पर भी फ्रीज़ किया जाएगा और भारत के अंदर भी फ्रीज़ किया जाएगा। यानी कि दोनों पैरेलली एक ही बंदे के ऊपर

अब काम करना शुरू करेंगे। लिस्ट इसीलिए एक्सचेंज की गई है। यह जो म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस है उसके ऊपर काम होना शुरू हो गया ताकि लूप होल रहे नहीं। अगर यहां से कोई भाग कर कोई अमेरिका में या यूके में या कनाडा में पहुंच गया है। अब उसको वापस लेके आने का काम दोनों कंट्रीज इकट्ठी मिलकर लीगली उसको वापस करेंगी। दोस्तों कनाडा जो डेस्पिरेटली ट्राई करता रहा कि हमें एक्सपोज करने के लिए आज एविडेंस वो प्रोटेक्ट कर रहा है उसे हाइड कर रहा है क्योंकि उसे एफडीए की जरूरत है भारत के साथ निजर गया तेल लेने कनाडा बोलता है ऐसी तैसी फराए हमें फर्क नहीं पड़ता हम भारत की मार्केट को छोड़ नहीं सकते दूसरी तरफ से यूनाइटेड स्टेट्स उसने भी डिसाइड कर लिया कि ड्रग्स के कार्ट्स को अब खत्म करना है उसके लिए भारत की जरूरत है और इसलिए अगर वो एंटी इंडिया के जो एलिमेंट्स है जिसको मैं एसेट्स बोलता हूं पन्नू जैसे जो सीआईए के एसेट्स थे अगर उसको वो प्रोटेक्ट करता है तो वो अपनी जो पकड़ है भारत की मार्केट के ऊपर वो लूज़ कर जाएगा वो लूज़ करना चाहता नहीं है इसलिए भारत ने क्या किया हमने अपनी लिवरेज को क्रिएट किया हमने अपना खुद का प्रहार का जो पॉलिसी है काउंटर टेरर टेरर का जो डॉक्ट्रिन है हमने खुद उसको क्रिएट किया और ल्च कर दिया इसलिए जब सुपर पावर्स को अब जरूरत है हमारी हमने क्या किया। हमने भी बिल दे दिया उनको। यह हमारा बिल है। बिल के अंदर हमने कुछ नाम दिए हैं कि नाम चाहिए। दोस्तों बिल बिल वाज़ प्रेजेंटेड इन फ्रांस। दैट इज व्हाई G7 में छोड़कर ये बंदा बेचारा वापस आया है और सीधा उसने बिल पे किया नॉर्थ ब्लॉक में अमित शाह के सामने। अब वॉच क्या करना है? अगले कुछ तीन चार महीनों में आप देखेंगे अननोन एक्टिविटीज इंक्रीस हो जाएंगी। आप देखेंगे कि कुछ अरेस्ट हो गए हैं नॉर्थ अमेरिका में कुछ लोग अंडर द गाइस ऑफ दिखाया जाएगा कि नारकोटिक्स को क्रैक डाउन करने में लिए हमने पन्नू को पकड़ लिया। पन्नू मैं एग्जांपल दे रहा हूं वो कोई भी पन्नू शन्नू टन्नू कुछ भी हो सकता है। दूसरा एक और होगा। अब अकाउंट्स जो है वो फ्रीज किए जाएंगे कनाडा के अंदर भी भारत के अंदर भी और अमेरिका के अंदर भी कुछ लोगों के। आप न्यूज़ देखेंगे ये सारी चीजें आपके सामने होती हुई दिखाई देंगी अगले कुछ महीनों में। और क्वाइटली कुछ लोगों को डिपोर्ट किया जाएगा अमेरिका कनाडा से भारत के अंदर। ये सारी चीजें वो है जो इवनिंग न्यूज़ में नहीं आएंगी। दोस्तों ऑपरेशंस ऑलरेडी शुरू हो चुके हैं। मैंने पहले शुरू में बोला था आपको कुछ बहुत बड़ा है जिसके लिए अमित शाह के साथ मीटिंग करी है। ये डिप्लोमेटिक ये डिप्लोमेसी नहीं है। जॉइंट टास्क फोर्स अब क्रिएट की जा रही है अमेरिका, कनाडा और भारत के बीच में। और जो लोग सोचते थे कि अमेरिका में, कनाडा में बैठकर वो अनटचेबल हैं। वो न्यूयॉर्क में और वेंकूवर में बैठकर वो पूरा कार्टल्स का काम चलाएंगे और भारत में दंगे करवाएंगे। वो काम खत्म हो गया। अब ये जो लिस्ट है वो ऑलरेडी गौर के टेबल पे और नॉर्थ ब्लॉक में अमित शाह के टेबल पे वो लिस्ट पहुंच चुकी है।  अगला जो दरवाजा है वो किसका खटकाया जाएगा? भारत में, अमेरिका में और कनाडा में? दो नाम देता हूं पन्नू का या मोहम्मद का।कि आपकी जो रिक्वेस्ट है वो मोहम्मद के डंडे पहले मारने चाहिए या पन्नू के।

 जय हिंद।



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