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Wednesday, October 29, 2025

कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका

कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका
कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका
कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका
कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका

 


दोस्तों कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कर्नाटक सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस पर सार्वजनिक स्थान पर कार्यक्रम करने, इकट्ठा होने और कोई भी ऐसा कार्यक्रम जो सार्वजनिक स्थान यानी पार्कों पर होता हो। 10 लोगों के इकट्ठे होने पर रोक लगा दी थी। सरकार ने एक आदेश पारित करके कहा था कि यदि 10 से अधिक लोग किसी भी सार्वजनिक जगह पर इकट्ठा हो तो उनको पहले अनुमति लेनी होगी। यानी पूरी तरह से कर्नाटक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जो नित्य प्रति शाखा लगती हैं उनको रोकने का एक तुगलकी फरमान कर्नाटक की सरकार के द्वारा दिया गया था।

इस पर मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे उनका मीडिया में बयान आया था और उन्होंने बकायदा एएनआई को कहा था के जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है वो अब कोई भी गतिविधि नहीं कर सकता। सार्वजनिक स्थान का दुरुपयोग हो रहा है। बिना परमिशन काम हो रहा है। यानी एक ऐसा काम जो बीजेपी, आरएसएस और कोई भी ऐसी एक्टिविटी जो देश हित की है अगर देश में चल रही है, कांग्रेस को उससे दिक्कत है। कांग्रेस देश की आजादी के बाद से सत्ता में रही। 2014 तक अगर अटल जी का काम टाइम छोड़ दें तो पूरे समय कांग्रेस का सत्ता में कब्जा रहा और कांग्रेस का पूरा प्रयास रहा कि कोई भी हिंदूवादी संगठन हिंदू संत महंत हिंदू मंदिर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसा संगठन इसको बैन कर दिया जाए। कांग्रेस ने कभी भी ना तो सिमी पर रोक लगाने की बात की। बाद में उसका नाम पीएफआई हो गया। पीएफआई के लिए कुछ नहीं बोला। इस देश के अंदर कोई भी जिहादी मानसिकता के लोग कुछ भी कार्यक्रम कहीं भी कर सकते हैं। अनुमति दे लेने के लिए कभी नहीं कहा गया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जो राष्ट्रवादी संगठन है और 1925 से देश के अंदर देश हित में काम कर रहा है। नित्य प्रति भारत माता की जय के घोष के साथ और नित्य प्रति भारत माता की जय की कामना से इस भारत माता की पूजा पाठ कर रहा है। जो यह चाहता है कि इस देश में मजबूती आए। देश आत्मनिर्भर बने और देश फिर से हिंदू राष्ट्र था उस पुराने पुरातन स्वरूप में लौटे। तो कांग्रेस को दिक्कत क्या है? कांग्रेस के जितने भी नेता हैं हमेशा आरएसएस को बैन करेंगे। आरएसएस को बैन करना है। इसको लेकर यह हमेशा कहते रहे हैं। लेकिन कल कर्नाटक की हाई कोर्ट ने जस्टिस एम नाग प्रसन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार गृह विभाग और हुबली पुलिस को नोटिस जारी कर दिया। और उन्होंने सीधा कहा कि जो राज्य सरकार का 18 अक्टूबर 2025 का आदेश था। उसको जो कोर्ट में चुनौती दी गई थी संविधान की अनुच्छेद 19 एक ए यह उसका सीधा उसका उल्लंघन है और आप किसी भी ऐसे संगठन के ऊपर जिसके ऊपर कोई अभी तक कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ। कोई ऐसे गलत हरकत उसकी नहीं हुई है जो आप यह कह सकें कि यह संगठन कोई राष्ट्र के नुकसान में है। फिर आप उसको बैन कैसे कर सकते हैं? उसकी एक्टिविटी को बैन कैसे कर सकते हैं? और हालांकि अभी अंतरिम आदेश दिया गया है। अंतरिम रोक लगाई है।

इस पर अभी आगे सुनवाई होगी और अगर यह सुनवाई होगी तो यह भी एक मील का पत्थर साबित होगी और कांग्रेस की पोल खोलने के लिए यह काफी है कि कांग्रेस किस तरह से राष्ट्रवादी संगठनों को इस देश में बैन करती है। यह आपको बता दें तेजस्वी Surya जो कि बेंगलुरु दक्षिण से बीजेपी के सांसद हैं। उन्होंने इस पर कहा कि आरएसएस को शांतिपूर्वक तरीके से अपनी गतिविधि जो चला रहा है। ये जो काम चल रहा है इसको प्रियांक खड़गे को दिक्कत है। प्रियांक खड़गे जो कांग्रेस के अध्यक्ष हैं मल्लिकार्जुन खड़गे उनके बेटे हैं। 

यहां कोर्ट में भी जो बात हुई उसको भी देश को समझने की जरूरत है और कांग्रेसियों को दिमाग में रखने की जरूरत है। जो संविधान की कॉपी रोज लेकर के राहुल गांधी दुनिया में घूमते हैं उनको उस संविधान को पढ़ना चाहिए। जो आरएसएस की तरफ से वकील कोर्ट में प्रस्तुत हुए। उन्होंने कहा कि यह संविधान में दिए गए मौलिक अधिकार पर प्रतिबंध है। अगर किसी पार्क में पार्टी आयोजित की जाती है तो भी सरकार आदेश के अनुसार यह अवैध जमावड़ा है। उन्होंने कहा सरकार ऐसा प्रशासनिक आदेश जारी नहीं कर सकती। जब पुलिस अधिनियम लागू है तो इस नियम की आवश्यकता क्या है? जस्टिस एम नाग प्रसन्ना की एकल पीठ में सुनवाई करते समय राज्य सरकार से पूछा क्या सरकार इस आदेश के माध्यम से कोई विशेष उद्देश्य साधना चाहती थी? इस पर राज्य सरकार की ओर से उपस्थित वकीलों ने अदालत से एक दिन का समय मांगा ताकि वह अपना पक्ष रख सकें। यानी सरकार की तरफ से बेवजह बिन बात बिन तैयारी ये रोक लगा दी गई। इससे स्पष्ट दिखाई दे रहा है। उनके पास जवाब होता तो तुरंत जवाब देते। अब ऐसे में यह सीधा कहा गया कि भाई जब पार्कों में आप योग की कक्षाएं लगती हैं। लोग इकट्ठे होते हैं। शादी विवाह होते हैं और फंक्शन होते हैं। यहां तक कि राजनीतिक दलों की रैलियां होती हैं। मीटिंग होती हैं। अब उसमें आप कह कोई रोक नहीं है। लेकिन आप राष्ट्रवादी संगठन पर रोक लगाओगे। ये कैसे चलेगा? असल में यह कांग्रेस की मानसिकता है। और इस मानसिकता को आपको ध्यान होगा। अभी कुछ दिन पहले पवन खेड़ा जो कांग्रेस के प्रवक्ता हैं वो जो है एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं और वो अपनी दादी की कहानी सुना रहे हैं कि जब मैं छोटा था मेरी दादी ने कहा पार्क में मत जाना वहां खराब लोग हैं। आज मुझे पता लगा कैसे खराब लोग हैं। उस पोस्ट में उसने अपने साथ कुछ हुए अत्याचार व्यभचार की कोई बात की। उसका कोई साक्ष्य नहीं है कि वो व्यक्ति जो आरोप लगा रहा था वो सही था, गलत था। बस एक मुद्दा उठाते हैं।

एक खबर को उठाते हैं और बस उस खबर को फैला देते हैं कि साहब एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली। उसने सुसाइड नोट लिखा और उसमें जो लिखा था वो पत्थर की लकीर था। वो व्यक्तिगत किसी एक व्यक्ति पर आरोप लगा रहा है ना कि संगठन पर। लेकिन कांग्रेस ने उस एक व्यक्ति के लगाए आरोप को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करके और उसके बाद पूरा कांग्रेस का इकोसिस्टम पूरा सोशल मीडिया पर आरएसएस को बैन करो। आरएसएस में व्यभचारी हैं। आरएसएस में बलात्कारी हैं। यह तो आरएसएस है। उनके पास सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ने के लिए बड़े-बड़े वकील हैं। लेकिन उसके बावजूद भी इस तरह की बदतमीजी की भाषा बोलने वाले और झूठे आरोप लगाने वालों पर कभी भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कोई प्रतिक्रिया नहीं देता। कोई केस पलट कर नहीं करता। और इस देश में न्यायपालिका भी कहीं ना कहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अगर केस करेगा उस पर मुझे लग रहा है उतनी तेजी से संज्ञान भी नहीं लेगी। यदि यहां कोई मुस्लिम कम्युनिटी का कोई व्यक्ति हो उसके बारे में कुछ ऐसा बोल दिया जाए। राहुल गांधी गांधी परिवार के बारे में ऐसा बोल दिया जाए। आप देखेंगे सुप्रीम कोर्ट और बड़े-बड़े वकील वहां पहुंच जाएंगे और वहां सुप्रीम कोर्ट तो सुनवाई भी कर देगा। एक मिनट में सजा भी बोल देगा। लेकिन इस देश में भारतीय जनता पार्टी के सबसे बड़े नेता इस समय अगर कोई है तो मोदी प्रधानमंत्री उनको गाली दे लो। गृह मंत्री को गाली दे लो। बीजेपी के किसी नेता के ऊपर कुछ भी कटाक्ष कर दो। आपका कुछ बिगड़ता नहीं है। और इसलिए ये हौसले बढ़े हुए हैं। तो कुल मिलाकर के पवन खेड़ा ने जो बयान दिया कितना विवादित था। रागिनी नायक जो इनकी प्रवक्ता है वह एक्स पोस्ट पे उस वीडियो को डाल रही थी। अब आप सोचें कि इस उसके बाद भी इनकी मंशा क्या है? यह तो आरएसएस को बैन करने के लिए कब से कह रहे हैं? कब से इनके दिमाग में है कि आरएसएस बैन होना चाहिए। इनका मंशा चलती तो कब का यह कभी गांधी की हत्या का आरोप लगाते, कभी कोई और बात करते, कभी ये जो राम मंदिर के पहले बाबरी ढांचा वहां था उसके गिराए जाने के बाद बीजेपी की सरकारें गिराई। तब भी आरएसएस पर बैन की बात की। इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई। उस समय भी आरएसएस पर बैन लगाया गया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट तक में केस चले तो बैन हटा।

अब भी इस मामले में हाई कोर्ट से जो झटका लगा है कर्नाटक की सरकार को अब देखना होगा इसमें अंतिम फैसला कोर्ट क्या करता है। लेकिन एक बात बिल्कुल साफ है कि ये जो कांग्रेस है कांग्रेस आरएसएस से परेशान है। इनको आरएसएस को बैन करना है। हिंदूवादी संगठनों पर बैन लगाना है। हिंदू संतों को जेल भेजना है। जैसा कि आपने देखा प्रज्ञा ठाकुर असीमानंद इनको भेजा गया। लेकिन कभी भी इनको इस देश में पीएफआई और सिमी से कोई दिक्कत नहीं है। यह देशवासियों को सोचने की बात है।



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Tuesday, October 28, 2025

कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका

कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका
कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका
कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका

 


दोस्तों कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कर्नाटक सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस पर सार्वजनिक स्थान पर कार्यक्रम करने, इकट्ठा होने और कोई भी ऐसा कार्यक्रम जो सार्वजनिक स्थान यानी पार्कों पर होता हो। 10 लोगों के इकट्ठे होने पर रोक लगा दी थी। सरकार ने एक आदेश पारित करके कहा था कि यदि 10 से अधिक लोग किसी भी सार्वजनिक जगह पर इकट्ठा हो तो उनको पहले अनुमति लेनी होगी। यानी पूरी तरह से कर्नाटक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जो नित्य प्रति शाखा लगती हैं उनको रोकने का एक तुगलकी फरमान कर्नाटक की सरकार के द्वारा दिया गया था।

इस पर मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे उनका मीडिया में बयान आया था और उन्होंने बकायदा एएनआई को कहा था के जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है वो अब कोई भी गतिविधि नहीं कर सकता। सार्वजनिक स्थान का दुरुपयोग हो रहा है। बिना परमिशन काम हो रहा है। यानी एक ऐसा काम जो बीजेपी, आरएसएस और कोई भी ऐसी एक्टिविटी जो देश हित की है अगर देश में चल रही है, कांग्रेस को उससे दिक्कत है। कांग्रेस देश की आजादी के बाद से सत्ता में रही। 2014 तक अगर अटल जी का काम टाइम छोड़ दें तो पूरे समय कांग्रेस का सत्ता में कब्जा रहा और कांग्रेस का पूरा प्रयास रहा कि कोई भी हिंदूवादी संगठन हिंदू संत महंत हिंदू मंदिर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसा संगठन इसको बैन कर दिया जाए। कांग्रेस ने कभी भी ना तो सिमी पर रोक लगाने की बात की। बाद में उसका नाम पीएफआई हो गया। पीएफआई के लिए कुछ नहीं बोला। इस देश के अंदर कोई भी जिहादी मानसिकता के लोग कुछ भी कार्यक्रम कहीं भी कर सकते हैं। अनुमति दे लेने के लिए कभी नहीं कहा गया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जो राष्ट्रवादी संगठन है और 1925 से देश के अंदर देश हित में काम कर रहा है। नित्य प्रति भारत माता की जय के घोष के साथ और नित्य प्रति भारत माता की जय की कामना से इस भारत माता की पूजा पाठ कर रहा है। जो यह चाहता है कि इस देश में मजबूती आए। देश आत्मनिर्भर बने और देश फिर से हिंदू राष्ट्र था उस पुराने पुरातन स्वरूप में लौटे। तो कांग्रेस को दिक्कत क्या है? कांग्रेस के जितने भी नेता हैं हमेशा आरएसएस को बैन करेंगे। आरएसएस को बैन करना है। इसको लेकर यह हमेशा कहते रहे हैं। लेकिन कल कर्नाटक की हाई कोर्ट ने जस्टिस एम नाग प्रसन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार गृह विभाग और हुबली पुलिस को नोटिस जारी कर दिया। और उन्होंने सीधा कहा कि जो राज्य सरकार का 18 अक्टूबर 2025 का आदेश था। उसको जो कोर्ट में चुनौती दी गई थी संविधान की अनुच्छेद 19 एक ए यह उसका सीधा उसका उल्लंघन है और आप किसी भी ऐसे संगठन के ऊपर जिसके ऊपर कोई अभी तक कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ। कोई ऐसे गलत हरकत उसकी नहीं हुई है जो आप यह कह सकें कि यह संगठन कोई राष्ट्र के नुकसान में है। फिर आप उसको बैन कैसे कर सकते हैं? उसकी एक्टिविटी को बैन कैसे कर सकते हैं? और हालांकि अभी अंतरिम आदेश दिया गया है। अंतरिम रोक लगाई है।

इस पर अभी आगे सुनवाई होगी और अगर यह सुनवाई होगी तो यह भी एक मील का पत्थर साबित होगी और कांग्रेस की पोल खोलने के लिए यह काफी है कि कांग्रेस किस तरह से राष्ट्रवादी संगठनों को इस देश में बैन करती है। यह आपको बता दें तेजस्वी Surya जो कि बेंगलुरु दक्षिण से बीजेपी के सांसद हैं। उन्होंने इस पर कहा कि आरएसएस को शांतिपूर्वक तरीके से अपनी गतिविधि जो चला रहा है। ये जो काम चल रहा है इसको प्रियांक खड़गे को दिक्कत है। प्रियांक खड़गे जो कांग्रेस के अध्यक्ष हैं मल्लिकार्जुन खड़गे उनके बेटे हैं। 

यहां कोर्ट में भी जो बात हुई उसको भी देश को समझने की जरूरत है और कांग्रेसियों को दिमाग में रखने की जरूरत है। जो संविधान की कॉपी रोज लेकर के राहुल गांधी दुनिया में घूमते हैं उनको उस संविधान को पढ़ना चाहिए। जो आरएसएस की तरफ से वकील कोर्ट में प्रस्तुत हुए। उन्होंने कहा कि यह संविधान में दिए गए मौलिक अधिकार पर प्रतिबंध है। अगर किसी पार्क में पार्टी आयोजित की जाती है तो भी सरकार आदेश के अनुसार यह अवैध जमावड़ा है। उन्होंने कहा सरकार ऐसा प्रशासनिक आदेश जारी नहीं कर सकती। जब पुलिस अधिनियम लागू है तो इस नियम की आवश्यकता क्या है? जस्टिस एम नाग प्रसन्ना की एकल पीठ में सुनवाई करते समय राज्य सरकार से पूछा क्या सरकार इस आदेश के माध्यम से कोई विशेष उद्देश्य साधना चाहती थी? इस पर राज्य सरकार की ओर से उपस्थित वकीलों ने अदालत से एक दिन का समय मांगा ताकि वह अपना पक्ष रख सकें। यानी सरकार की तरफ से बेवजह बिन बात बिन तैयारी ये रोक लगा दी गई। इससे स्पष्ट दिखाई दे रहा है। उनके पास जवाब होता तो तुरंत जवाब देते। अब ऐसे में यह सीधा कहा गया कि भाई जब पार्कों में आप योग की कक्षाएं लगती हैं। लोग इकट्ठे होते हैं। शादी विवाह होते हैं और फंक्शन होते हैं। यहां तक कि राजनीतिक दलों की रैलियां होती हैं। मीटिंग होती हैं। अब उसमें आप कह कोई रोक नहीं है। लेकिन आप राष्ट्रवादी संगठन पर रोक लगाओगे। ये कैसे चलेगा? असल में यह कांग्रेस की मानसिकता है। और इस मानसिकता को आपको ध्यान होगा। अभी कुछ दिन पहले पवन खेड़ा जो कांग्रेस के प्रवक्ता हैं वो जो है एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं और वो अपनी दादी की कहानी सुना रहे हैं कि जब मैं छोटा था मेरी दादी ने कहा पार्क में मत जाना वहां खराब लोग हैं। आज मुझे पता लगा कैसे खराब लोग हैं। उस पोस्ट में उसने अपने साथ कुछ हुए अत्याचार व्यभचार की कोई बात की। उसका कोई साक्ष्य नहीं है कि वो व्यक्ति जो आरोप लगा रहा था वो सही था, गलत था। बस एक मुद्दा उठाते हैं।

एक खबर को उठाते हैं और बस उस खबर को फैला देते हैं कि साहब एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली। उसने सुसाइड नोट लिखा और उसमें जो लिखा था वो पत्थर की लकीर था। वो व्यक्तिगत किसी एक व्यक्ति पर आरोप लगा रहा है ना कि संगठन पर। लेकिन कांग्रेस ने उस एक व्यक्ति के लगाए आरोप को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करके और उसके बाद पूरा कांग्रेस का इकोसिस्टम पूरा सोशल मीडिया पर आरएसएस को बैन करो। आरएसएस में व्यभचारी हैं। आरएसएस में बलात्कारी हैं। यह तो आरएसएस है। उनके पास सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ने के लिए बड़े-बड़े वकील हैं। लेकिन उसके बावजूद भी इस तरह की बदतमीजी की भाषा बोलने वाले और झूठे आरोप लगाने वालों पर कभी भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कोई प्रतिक्रिया नहीं देता। कोई केस पलट कर नहीं करता। और इस देश में न्यायपालिका भी कहीं ना कहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अगर केस करेगा उस पर मुझे लग रहा है उतनी तेजी से संज्ञान भी नहीं लेगी। यदि यहां कोई मुस्लिम कम्युनिटी का कोई व्यक्ति हो उसके बारे में कुछ ऐसा बोल दिया जाए। राहुल गांधी गांधी परिवार के बारे में ऐसा बोल दिया जाए। आप देखेंगे सुप्रीम कोर्ट और बड़े-बड़े वकील वहां पहुंच जाएंगे और वहां सुप्रीम कोर्ट तो सुनवाई भी कर देगा। एक मिनट में सजा भी बोल देगा। लेकिन इस देश में भारतीय जनता पार्टी के सबसे बड़े नेता इस समय अगर कोई है तो मोदी प्रधानमंत्री उनको गाली दे लो। गृह मंत्री को गाली दे लो। बीजेपी के किसी नेता के ऊपर कुछ भी कटाक्ष कर दो। आपका कुछ बिगड़ता नहीं है। और इसलिए ये हौसले बढ़े हुए हैं। तो कुल मिलाकर के पवन खेड़ा ने जो बयान दिया कितना विवादित था। रागिनी नायक जो इनकी प्रवक्ता है वह एक्स पोस्ट पे उस वीडियो को डाल रही थी। अब आप सोचें कि इस उसके बाद भी इनकी मंशा क्या है? यह तो आरएसएस को बैन करने के लिए कब से कह रहे हैं? कब से इनके दिमाग में है कि आरएसएस बैन होना चाहिए। इनका मंशा चलती तो कब का यह कभी गांधी की हत्या का आरोप लगाते, कभी कोई और बात करते, कभी ये जो राम मंदिर के पहले बाबरी ढांचा वहां था उसके गिराए जाने के बाद बीजेपी की सरकारें गिराई। तब भी आरएसएस पर बैन की बात की। इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई। उस समय भी आरएसएस पर बैन लगाया गया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट तक में केस चले तो बैन हटा।

अब भी इस मामले में हाई कोर्ट से जो झटका लगा है कर्नाटक की सरकार को अब देखना होगा इसमें अंतिम फैसला कोर्ट क्या करता है। लेकिन एक बात बिल्कुल साफ है कि ये जो कांग्रेस है कांग्रेस आरएसएस से परेशान है। इनको आरएसएस को बैन करना है। हिंदूवादी संगठनों पर बैन लगाना है। हिंदू संतों को जेल भेजना है। जैसा कि आपने देखा प्रज्ञा ठाकुर असीमानंद इनको भेजा गया। लेकिन कभी भी इनको इस देश में पीएफआई और सिमी से कोई दिक्कत नहीं है। यह देशवासियों को सोचने की बात है।



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कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका

कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका
कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका

 


दोस्तों कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कर्नाटक सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस पर सार्वजनिक स्थान पर कार्यक्रम करने, इकट्ठा होने और कोई भी ऐसा कार्यक्रम जो सार्वजनिक स्थान यानी पार्कों पर होता हो। 10 लोगों के इकट्ठे होने पर रोक लगा दी थी। सरकार ने एक आदेश पारित करके कहा था कि यदि 10 से अधिक लोग किसी भी सार्वजनिक जगह पर इकट्ठा हो तो उनको पहले अनुमति लेनी होगी। यानी पूरी तरह से कर्नाटक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जो नित्य प्रति शाखा लगती हैं उनको रोकने का एक तुगलकी फरमान कर्नाटक की सरकार के द्वारा दिया गया था।

इस पर मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे उनका मीडिया में बयान आया था और उन्होंने बकायदा एएनआई को कहा था के जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है वो अब कोई भी गतिविधि नहीं कर सकता। सार्वजनिक स्थान का दुरुपयोग हो रहा है। बिना परमिशन काम हो रहा है। यानी एक ऐसा काम जो बीजेपी, आरएसएस और कोई भी ऐसी एक्टिविटी जो देश हित की है अगर देश में चल रही है, कांग्रेस को उससे दिक्कत है। कांग्रेस देश की आजादी के बाद से सत्ता में रही। 2014 तक अगर अटल जी का काम टाइम छोड़ दें तो पूरे समय कांग्रेस का सत्ता में कब्जा रहा और कांग्रेस का पूरा प्रयास रहा कि कोई भी हिंदूवादी संगठन हिंदू संत महंत हिंदू मंदिर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसा संगठन इसको बैन कर दिया जाए। कांग्रेस ने कभी भी ना तो सिमी पर रोक लगाने की बात की। बाद में उसका नाम पीएफआई हो गया। पीएफआई के लिए कुछ नहीं बोला। इस देश के अंदर कोई भी जिहादी मानसिकता के लोग कुछ भी कार्यक्रम कहीं भी कर सकते हैं। अनुमति दे लेने के लिए कभी नहीं कहा गया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जो राष्ट्रवादी संगठन है और 1925 से देश के अंदर देश हित में काम कर रहा है। नित्य प्रति भारत माता की जय के घोष के साथ और नित्य प्रति भारत माता की जय की कामना से इस भारत माता की पूजा पाठ कर रहा है। जो यह चाहता है कि इस देश में मजबूती आए। देश आत्मनिर्भर बने और देश फिर से हिंदू राष्ट्र था उस पुराने पुरातन स्वरूप में लौटे। तो कांग्रेस को दिक्कत क्या है? कांग्रेस के जितने भी नेता हैं हमेशा आरएसएस को बैन करेंगे। आरएसएस को बैन करना है। इसको लेकर यह हमेशा कहते रहे हैं। लेकिन कल कर्नाटक की हाई कोर्ट ने जस्टिस एम नाग प्रसन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार गृह विभाग और हुबली पुलिस को नोटिस जारी कर दिया। और उन्होंने सीधा कहा कि जो राज्य सरकार का 18 अक्टूबर 2025 का आदेश था। उसको जो कोर्ट में चुनौती दी गई थी संविधान की अनुच्छेद 19 एक ए यह उसका सीधा उसका उल्लंघन है और आप किसी भी ऐसे संगठन के ऊपर जिसके ऊपर कोई अभी तक कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ। कोई ऐसे गलत हरकत उसकी नहीं हुई है जो आप यह कह सकें कि यह संगठन कोई राष्ट्र के नुकसान में है। फिर आप उसको बैन कैसे कर सकते हैं? उसकी एक्टिविटी को बैन कैसे कर सकते हैं? और हालांकि अभी अंतरिम आदेश दिया गया है। अंतरिम रोक लगाई है।

इस पर अभी आगे सुनवाई होगी और अगर यह सुनवाई होगी तो यह भी एक मील का पत्थर साबित होगी और कांग्रेस की पोल खोलने के लिए यह काफी है कि कांग्रेस किस तरह से राष्ट्रवादी संगठनों को इस देश में बैन करती है। यह आपको बता दें तेजस्वी Surya जो कि बेंगलुरु दक्षिण से बीजेपी के सांसद हैं। उन्होंने इस पर कहा कि आरएसएस को शांतिपूर्वक तरीके से अपनी गतिविधि जो चला रहा है। ये जो काम चल रहा है इसको प्रियांक खड़गे को दिक्कत है। प्रियांक खड़गे जो कांग्रेस के अध्यक्ष हैं मल्लिकार्जुन खड़गे उनके बेटे हैं। 

यहां कोर्ट में भी जो बात हुई उसको भी देश को समझने की जरूरत है और कांग्रेसियों को दिमाग में रखने की जरूरत है। जो संविधान की कॉपी रोज लेकर के राहुल गांधी दुनिया में घूमते हैं उनको उस संविधान को पढ़ना चाहिए। जो आरएसएस की तरफ से वकील कोर्ट में प्रस्तुत हुए। उन्होंने कहा कि यह संविधान में दिए गए मौलिक अधिकार पर प्रतिबंध है। अगर किसी पार्क में पार्टी आयोजित की जाती है तो भी सरकार आदेश के अनुसार यह अवैध जमावड़ा है। उन्होंने कहा सरकार ऐसा प्रशासनिक आदेश जारी नहीं कर सकती। जब पुलिस अधिनियम लागू है तो इस नियम की आवश्यकता क्या है? जस्टिस एम नाग प्रसन्ना की एकल पीठ में सुनवाई करते समय राज्य सरकार से पूछा क्या सरकार इस आदेश के माध्यम से कोई विशेष उद्देश्य साधना चाहती थी? इस पर राज्य सरकार की ओर से उपस्थित वकीलों ने अदालत से एक दिन का समय मांगा ताकि वह अपना पक्ष रख सकें। यानी सरकार की तरफ से बेवजह बिन बात बिन तैयारी ये रोक लगा दी गई। इससे स्पष्ट दिखाई दे रहा है। उनके पास जवाब होता तो तुरंत जवाब देते। अब ऐसे में यह सीधा कहा गया कि भाई जब पार्कों में आप योग की कक्षाएं लगती हैं। लोग इकट्ठे होते हैं। शादी विवाह होते हैं और फंक्शन होते हैं। यहां तक कि राजनीतिक दलों की रैलियां होती हैं। मीटिंग होती हैं। अब उसमें आप कह कोई रोक नहीं है। लेकिन आप राष्ट्रवादी संगठन पर रोक लगाओगे। ये कैसे चलेगा? असल में यह कांग्रेस की मानसिकता है। और इस मानसिकता को आपको ध्यान होगा। अभी कुछ दिन पहले पवन खेड़ा जो कांग्रेस के प्रवक्ता हैं वो जो है एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं और वो अपनी दादी की कहानी सुना रहे हैं कि जब मैं छोटा था मेरी दादी ने कहा पार्क में मत जाना वहां खराब लोग हैं। आज मुझे पता लगा कैसे खराब लोग हैं। उस पोस्ट में उसने अपने साथ कुछ हुए अत्याचार व्यभचार की कोई बात की। उसका कोई साक्ष्य नहीं है कि वो व्यक्ति जो आरोप लगा रहा था वो सही था, गलत था। बस एक मुद्दा उठाते हैं।

एक खबर को उठाते हैं और बस उस खबर को फैला देते हैं कि साहब एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली। उसने सुसाइड नोट लिखा और उसमें जो लिखा था वो पत्थर की लकीर था। वो व्यक्तिगत किसी एक व्यक्ति पर आरोप लगा रहा है ना कि संगठन पर। लेकिन कांग्रेस ने उस एक व्यक्ति के लगाए आरोप को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करके और उसके बाद पूरा कांग्रेस का इकोसिस्टम पूरा सोशल मीडिया पर आरएसएस को बैन करो। आरएसएस में व्यभचारी हैं। आरएसएस में बलात्कारी हैं। यह तो आरएसएस है। उनके पास सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ने के लिए बड़े-बड़े वकील हैं। लेकिन उसके बावजूद भी इस तरह की बदतमीजी की भाषा बोलने वाले और झूठे आरोप लगाने वालों पर कभी भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कोई प्रतिक्रिया नहीं देता। कोई केस पलट कर नहीं करता। और इस देश में न्यायपालिका भी कहीं ना कहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अगर केस करेगा उस पर मुझे लग रहा है उतनी तेजी से संज्ञान भी नहीं लेगी। यदि यहां कोई मुस्लिम कम्युनिटी का कोई व्यक्ति हो उसके बारे में कुछ ऐसा बोल दिया जाए। राहुल गांधी गांधी परिवार के बारे में ऐसा बोल दिया जाए। आप देखेंगे सुप्रीम कोर्ट और बड़े-बड़े वकील वहां पहुंच जाएंगे और वहां सुप्रीम कोर्ट तो सुनवाई भी कर देगा। एक मिनट में सजा भी बोल देगा। लेकिन इस देश में भारतीय जनता पार्टी के सबसे बड़े नेता इस समय अगर कोई है तो मोदी प्रधानमंत्री उनको गाली दे लो। गृह मंत्री को गाली दे लो। बीजेपी के किसी नेता के ऊपर कुछ भी कटाक्ष कर दो। आपका कुछ बिगड़ता नहीं है। और इसलिए ये हौसले बढ़े हुए हैं। तो कुल मिलाकर के पवन खेड़ा ने जो बयान दिया कितना विवादित था। रागिनी नायक जो इनकी प्रवक्ता है वह एक्स पोस्ट पे उस वीडियो को डाल रही थी। अब आप सोचें कि इस उसके बाद भी इनकी मंशा क्या है? यह तो आरएसएस को बैन करने के लिए कब से कह रहे हैं? कब से इनके दिमाग में है कि आरएसएस बैन होना चाहिए। इनका मंशा चलती तो कब का यह कभी गांधी की हत्या का आरोप लगाते, कभी कोई और बात करते, कभी ये जो राम मंदिर के पहले बाबरी ढांचा वहां था उसके गिराए जाने के बाद बीजेपी की सरकारें गिराई। तब भी आरएसएस पर बैन की बात की। इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई। उस समय भी आरएसएस पर बैन लगाया गया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट तक में केस चले तो बैन हटा।

अब भी इस मामले में हाई कोर्ट से जो झटका लगा है कर्नाटक की सरकार को अब देखना होगा इसमें अंतिम फैसला कोर्ट क्या करता है। लेकिन एक बात बिल्कुल साफ है कि ये जो कांग्रेस है कांग्रेस आरएसएस से परेशान है। इनको आरएसएस को बैन करना है। हिंदूवादी संगठनों पर बैन लगाना है। हिंदू संतों को जेल भेजना है। जैसा कि आपने देखा प्रज्ञा ठाकुर असीमानंद इनको भेजा गया। लेकिन कभी भी इनको इस देश में पीएफआई और सिमी से कोई दिक्कत नहीं है। यह देशवासियों को सोचने की बात है।



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October 28, 2025 at 08:48PM
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October 28, 2025 at 09:13PM

कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका

कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका

 


दोस्तों कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कर्नाटक सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस पर सार्वजनिक स्थान पर कार्यक्रम करने, इकट्ठा होने और कोई भी ऐसा कार्यक्रम जो सार्वजनिक स्थान यानी पार्कों पर होता हो। 10 लोगों के इकट्ठे होने पर रोक लगा दी थी। सरकार ने एक आदेश पारित करके कहा था कि यदि 10 से अधिक लोग किसी भी सार्वजनिक जगह पर इकट्ठा हो तो उनको पहले अनुमति लेनी होगी। यानी पूरी तरह से कर्नाटक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जो नित्य प्रति शाखा लगती हैं उनको रोकने का एक तुगलकी फरमान कर्नाटक की सरकार के द्वारा दिया गया था।

इस पर मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे उनका मीडिया में बयान आया था और उन्होंने बकायदा एएनआई को कहा था के जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है वो अब कोई भी गतिविधि नहीं कर सकता। सार्वजनिक स्थान का दुरुपयोग हो रहा है। बिना परमिशन काम हो रहा है। यानी एक ऐसा काम जो बीजेपी, आरएसएस और कोई भी ऐसी एक्टिविटी जो देश हित की है अगर देश में चल रही है, कांग्रेस को उससे दिक्कत है। कांग्रेस देश की आजादी के बाद से सत्ता में रही। 2014 तक अगर अटल जी का काम टाइम छोड़ दें तो पूरे समय कांग्रेस का सत्ता में कब्जा रहा और कांग्रेस का पूरा प्रयास रहा कि कोई भी हिंदूवादी संगठन हिंदू संत महंत हिंदू मंदिर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसा संगठन इसको बैन कर दिया जाए। कांग्रेस ने कभी भी ना तो सिमी पर रोक लगाने की बात की। बाद में उसका नाम पीएफआई हो गया। पीएफआई के लिए कुछ नहीं बोला। इस देश के अंदर कोई भी जिहादी मानसिकता के लोग कुछ भी कार्यक्रम कहीं भी कर सकते हैं। अनुमति दे लेने के लिए कभी नहीं कहा गया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जो राष्ट्रवादी संगठन है और 1925 से देश के अंदर देश हित में काम कर रहा है। नित्य प्रति भारत माता की जय के घोष के साथ और नित्य प्रति भारत माता की जय की कामना से इस भारत माता की पूजा पाठ कर रहा है। जो यह चाहता है कि इस देश में मजबूती आए। देश आत्मनिर्भर बने और देश फिर से हिंदू राष्ट्र था उस पुराने पुरातन स्वरूप में लौटे। तो कांग्रेस को दिक्कत क्या है? कांग्रेस के जितने भी नेता हैं हमेशा आरएसएस को बैन करेंगे। आरएसएस को बैन करना है। इसको लेकर यह हमेशा कहते रहे हैं। लेकिन कल कर्नाटक की हाई कोर्ट ने जस्टिस एम नाग प्रसन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार गृह विभाग और हुबली पुलिस को नोटिस जारी कर दिया। और उन्होंने सीधा कहा कि जो राज्य सरकार का 18 अक्टूबर 2025 का आदेश था। उसको जो कोर्ट में चुनौती दी गई थी संविधान की अनुच्छेद 19 एक ए यह उसका सीधा उसका उल्लंघन है और आप किसी भी ऐसे संगठन के ऊपर जिसके ऊपर कोई अभी तक कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ। कोई ऐसे गलत हरकत उसकी नहीं हुई है जो आप यह कह सकें कि यह संगठन कोई राष्ट्र के नुकसान में है। फिर आप उसको बैन कैसे कर सकते हैं? उसकी एक्टिविटी को बैन कैसे कर सकते हैं? और हालांकि अभी अंतरिम आदेश दिया गया है। अंतरिम रोक लगाई है।

इस पर अभी आगे सुनवाई होगी और अगर यह सुनवाई होगी तो यह भी एक मील का पत्थर साबित होगी और कांग्रेस की पोल खोलने के लिए यह काफी है कि कांग्रेस किस तरह से राष्ट्रवादी संगठनों को इस देश में बैन करती है। यह आपको बता दें तेजस्वी Surya जो कि बेंगलुरु दक्षिण से बीजेपी के सांसद हैं। उन्होंने इस पर कहा कि आरएसएस को शांतिपूर्वक तरीके से अपनी गतिविधि जो चला रहा है। ये जो काम चल रहा है इसको प्रियांक खड़गे को दिक्कत है। प्रियांक खड़गे जो कांग्रेस के अध्यक्ष हैं मल्लिकार्जुन खड़गे उनके बेटे हैं। 

यहां कोर्ट में भी जो बात हुई उसको भी देश को समझने की जरूरत है और कांग्रेसियों को दिमाग में रखने की जरूरत है। जो संविधान की कॉपी रोज लेकर के राहुल गांधी दुनिया में घूमते हैं उनको उस संविधान को पढ़ना चाहिए। जो आरएसएस की तरफ से वकील कोर्ट में प्रस्तुत हुए। उन्होंने कहा कि यह संविधान में दिए गए मौलिक अधिकार पर प्रतिबंध है। अगर किसी पार्क में पार्टी आयोजित की जाती है तो भी सरकार आदेश के अनुसार यह अवैध जमावड़ा है। उन्होंने कहा सरकार ऐसा प्रशासनिक आदेश जारी नहीं कर सकती। जब पुलिस अधिनियम लागू है तो इस नियम की आवश्यकता क्या है? जस्टिस एम नाग प्रसन्ना की एकल पीठ में सुनवाई करते समय राज्य सरकार से पूछा क्या सरकार इस आदेश के माध्यम से कोई विशेष उद्देश्य साधना चाहती थी? इस पर राज्य सरकार की ओर से उपस्थित वकीलों ने अदालत से एक दिन का समय मांगा ताकि वह अपना पक्ष रख सकें। यानी सरकार की तरफ से बेवजह बिन बात बिन तैयारी ये रोक लगा दी गई। इससे स्पष्ट दिखाई दे रहा है। उनके पास जवाब होता तो तुरंत जवाब देते। अब ऐसे में यह सीधा कहा गया कि भाई जब पार्कों में आप योग की कक्षाएं लगती हैं। लोग इकट्ठे होते हैं। शादी विवाह होते हैं और फंक्शन होते हैं। यहां तक कि राजनीतिक दलों की रैलियां होती हैं। मीटिंग होती हैं। अब उसमें आप कह कोई रोक नहीं है। लेकिन आप राष्ट्रवादी संगठन पर रोक लगाओगे। ये कैसे चलेगा? असल में यह कांग्रेस की मानसिकता है। और इस मानसिकता को आपको ध्यान होगा। अभी कुछ दिन पहले पवन खेड़ा जो कांग्रेस के प्रवक्ता हैं वो जो है एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं और वो अपनी दादी की कहानी सुना रहे हैं कि जब मैं छोटा था मेरी दादी ने कहा पार्क में मत जाना वहां खराब लोग हैं। आज मुझे पता लगा कैसे खराब लोग हैं। उस पोस्ट में उसने अपने साथ कुछ हुए अत्याचार व्यभचार की कोई बात की। उसका कोई साक्ष्य नहीं है कि वो व्यक्ति जो आरोप लगा रहा था वो सही था, गलत था। बस एक मुद्दा उठाते हैं।

एक खबर को उठाते हैं और बस उस खबर को फैला देते हैं कि साहब एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली। उसने सुसाइड नोट लिखा और उसमें जो लिखा था वो पत्थर की लकीर था। वो व्यक्तिगत किसी एक व्यक्ति पर आरोप लगा रहा है ना कि संगठन पर। लेकिन कांग्रेस ने उस एक व्यक्ति के लगाए आरोप को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करके और उसके बाद पूरा कांग्रेस का इकोसिस्टम पूरा सोशल मीडिया पर आरएसएस को बैन करो। आरएसएस में व्यभचारी हैं। आरएसएस में बलात्कारी हैं। यह तो आरएसएस है। उनके पास सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ने के लिए बड़े-बड़े वकील हैं। लेकिन उसके बावजूद भी इस तरह की बदतमीजी की भाषा बोलने वाले और झूठे आरोप लगाने वालों पर कभी भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कोई प्रतिक्रिया नहीं देता। कोई केस पलट कर नहीं करता। और इस देश में न्यायपालिका भी कहीं ना कहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अगर केस करेगा उस पर मुझे लग रहा है उतनी तेजी से संज्ञान भी नहीं लेगी। यदि यहां कोई मुस्लिम कम्युनिटी का कोई व्यक्ति हो उसके बारे में कुछ ऐसा बोल दिया जाए। राहुल गांधी गांधी परिवार के बारे में ऐसा बोल दिया जाए। आप देखेंगे सुप्रीम कोर्ट और बड़े-बड़े वकील वहां पहुंच जाएंगे और वहां सुप्रीम कोर्ट तो सुनवाई भी कर देगा। एक मिनट में सजा भी बोल देगा। लेकिन इस देश में भारतीय जनता पार्टी के सबसे बड़े नेता इस समय अगर कोई है तो मोदी प्रधानमंत्री उनको गाली दे लो। गृह मंत्री को गाली दे लो। बीजेपी के किसी नेता के ऊपर कुछ भी कटाक्ष कर दो। आपका कुछ बिगड़ता नहीं है। और इसलिए ये हौसले बढ़े हुए हैं। तो कुल मिलाकर के पवन खेड़ा ने जो बयान दिया कितना विवादित था। रागिनी नायक जो इनकी प्रवक्ता है वह एक्स पोस्ट पे उस वीडियो को डाल रही थी। अब आप सोचें कि इस उसके बाद भी इनकी मंशा क्या है? यह तो आरएसएस को बैन करने के लिए कब से कह रहे हैं? कब से इनके दिमाग में है कि आरएसएस बैन होना चाहिए। इनका मंशा चलती तो कब का यह कभी गांधी की हत्या का आरोप लगाते, कभी कोई और बात करते, कभी ये जो राम मंदिर के पहले बाबरी ढांचा वहां था उसके गिराए जाने के बाद बीजेपी की सरकारें गिराई। तब भी आरएसएस पर बैन की बात की। इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई। उस समय भी आरएसएस पर बैन लगाया गया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट तक में केस चले तो बैन हटा।

अब भी इस मामले में हाई कोर्ट से जो झटका लगा है कर्नाटक की सरकार को अब देखना होगा इसमें अंतिम फैसला कोर्ट क्या करता है। लेकिन एक बात बिल्कुल साफ है कि ये जो कांग्रेस है कांग्रेस आरएसएस से परेशान है। इनको आरएसएस को बैन करना है। हिंदूवादी संगठनों पर बैन लगाना है। हिंदू संतों को जेल भेजना है। जैसा कि आपने देखा प्रज्ञा ठाकुर असीमानंद इनको भेजा गया। लेकिन कभी भी इनको इस देश में पीएफआई और सिमी से कोई दिक्कत नहीं है। यह देशवासियों को सोचने की बात है।



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कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका

 


दोस्तों कर्नाटक सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कर्नाटक सरकार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस पर सार्वजनिक स्थान पर कार्यक्रम करने, इकट्ठा होने और कोई भी ऐसा कार्यक्रम जो सार्वजनिक स्थान यानी पार्कों पर होता हो। 10 लोगों के इकट्ठे होने पर रोक लगा दी थी। सरकार ने एक आदेश पारित करके कहा था कि यदि 10 से अधिक लोग किसी भी सार्वजनिक जगह पर इकट्ठा हो तो उनको पहले अनुमति लेनी होगी। यानी पूरी तरह से कर्नाटक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जो नित्य प्रति शाखा लगती हैं उनको रोकने का एक तुगलकी फरमान कर्नाटक की सरकार के द्वारा दिया गया था।

इस पर मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे उनका मीडिया में बयान आया था और उन्होंने बकायदा एएनआई को कहा था के जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है वो अब कोई भी गतिविधि नहीं कर सकता। सार्वजनिक स्थान का दुरुपयोग हो रहा है। बिना परमिशन काम हो रहा है। यानी एक ऐसा काम जो बीजेपी, आरएसएस और कोई भी ऐसी एक्टिविटी जो देश हित की है अगर देश में चल रही है, कांग्रेस को उससे दिक्कत है। कांग्रेस देश की आजादी के बाद से सत्ता में रही। 2014 तक अगर अटल जी का काम टाइम छोड़ दें तो पूरे समय कांग्रेस का सत्ता में कब्जा रहा और कांग्रेस का पूरा प्रयास रहा कि कोई भी हिंदूवादी संगठन हिंदू संत महंत हिंदू मंदिर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसा संगठन इसको बैन कर दिया जाए। कांग्रेस ने कभी भी ना तो सिमी पर रोक लगाने की बात की। बाद में उसका नाम पीएफआई हो गया। पीएफआई के लिए कुछ नहीं बोला। इस देश के अंदर कोई भी जिहादी मानसिकता के लोग कुछ भी कार्यक्रम कहीं भी कर सकते हैं। अनुमति दे लेने के लिए कभी नहीं कहा गया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जो राष्ट्रवादी संगठन है और 1925 से देश के अंदर देश हित में काम कर रहा है। नित्य प्रति भारत माता की जय के घोष के साथ और नित्य प्रति भारत माता की जय की कामना से इस भारत माता की पूजा पाठ कर रहा है। जो यह चाहता है कि इस देश में मजबूती आए। देश आत्मनिर्भर बने और देश फिर से हिंदू राष्ट्र था उस पुराने पुरातन स्वरूप में लौटे। तो कांग्रेस को दिक्कत क्या है? कांग्रेस के जितने भी नेता हैं हमेशा आरएसएस को बैन करेंगे। आरएसएस को बैन करना है। इसको लेकर यह हमेशा कहते रहे हैं। लेकिन कल कर्नाटक की हाई कोर्ट ने जस्टिस एम नाग प्रसन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य सरकार गृह विभाग और हुबली पुलिस को नोटिस जारी कर दिया। और उन्होंने सीधा कहा कि जो राज्य सरकार का 18 अक्टूबर 2025 का आदेश था। उसको जो कोर्ट में चुनौती दी गई थी संविधान की अनुच्छेद 19 एक ए यह उसका सीधा उसका उल्लंघन है और आप किसी भी ऐसे संगठन के ऊपर जिसके ऊपर कोई अभी तक कोई आरोप सिद्ध नहीं हुआ। कोई ऐसे गलत हरकत उसकी नहीं हुई है जो आप यह कह सकें कि यह संगठन कोई राष्ट्र के नुकसान में है। फिर आप उसको बैन कैसे कर सकते हैं? उसकी एक्टिविटी को बैन कैसे कर सकते हैं? और हालांकि अभी अंतरिम आदेश दिया गया है। अंतरिम रोक लगाई है।

इस पर अभी आगे सुनवाई होगी और अगर यह सुनवाई होगी तो यह भी एक मील का पत्थर साबित होगी और कांग्रेस की पोल खोलने के लिए यह काफी है कि कांग्रेस किस तरह से राष्ट्रवादी संगठनों को इस देश में बैन करती है। यह आपको बता दें तेजस्वी Surya जो कि बेंगलुरु दक्षिण से बीजेपी के सांसद हैं। उन्होंने इस पर कहा कि आरएसएस को शांतिपूर्वक तरीके से अपनी गतिविधि जो चला रहा है। ये जो काम चल रहा है इसको प्रियांक खड़गे को दिक्कत है। प्रियांक खड़गे जो कांग्रेस के अध्यक्ष हैं मल्लिकार्जुन खड़गे उनके बेटे हैं। 

यहां कोर्ट में भी जो बात हुई उसको भी देश को समझने की जरूरत है और कांग्रेसियों को दिमाग में रखने की जरूरत है। जो संविधान की कॉपी रोज लेकर के राहुल गांधी दुनिया में घूमते हैं उनको उस संविधान को पढ़ना चाहिए। जो आरएसएस की तरफ से वकील कोर्ट में प्रस्तुत हुए। उन्होंने कहा कि यह संविधान में दिए गए मौलिक अधिकार पर प्रतिबंध है। अगर किसी पार्क में पार्टी आयोजित की जाती है तो भी सरकार आदेश के अनुसार यह अवैध जमावड़ा है। उन्होंने कहा सरकार ऐसा प्रशासनिक आदेश जारी नहीं कर सकती। जब पुलिस अधिनियम लागू है तो इस नियम की आवश्यकता क्या है? जस्टिस एम नाग प्रसन्ना की एकल पीठ में सुनवाई करते समय राज्य सरकार से पूछा क्या सरकार इस आदेश के माध्यम से कोई विशेष उद्देश्य साधना चाहती थी? इस पर राज्य सरकार की ओर से उपस्थित वकीलों ने अदालत से एक दिन का समय मांगा ताकि वह अपना पक्ष रख सकें। यानी सरकार की तरफ से बेवजह बिन बात बिन तैयारी ये रोक लगा दी गई। इससे स्पष्ट दिखाई दे रहा है। उनके पास जवाब होता तो तुरंत जवाब देते। अब ऐसे में यह सीधा कहा गया कि भाई जब पार्कों में आप योग की कक्षाएं लगती हैं। लोग इकट्ठे होते हैं। शादी विवाह होते हैं और फंक्शन होते हैं। यहां तक कि राजनीतिक दलों की रैलियां होती हैं। मीटिंग होती हैं। अब उसमें आप कह कोई रोक नहीं है। लेकिन आप राष्ट्रवादी संगठन पर रोक लगाओगे। ये कैसे चलेगा? असल में यह कांग्रेस की मानसिकता है। और इस मानसिकता को आपको ध्यान होगा। अभी कुछ दिन पहले पवन खेड़ा जो कांग्रेस के प्रवक्ता हैं वो जो है एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं और वो अपनी दादी की कहानी सुना रहे हैं कि जब मैं छोटा था मेरी दादी ने कहा पार्क में मत जाना वहां खराब लोग हैं। आज मुझे पता लगा कैसे खराब लोग हैं। उस पोस्ट में उसने अपने साथ कुछ हुए अत्याचार व्यभचार की कोई बात की। उसका कोई साक्ष्य नहीं है कि वो व्यक्ति जो आरोप लगा रहा था वो सही था, गलत था। बस एक मुद्दा उठाते हैं।

एक खबर को उठाते हैं और बस उस खबर को फैला देते हैं कि साहब एक व्यक्ति ने आत्महत्या कर ली। उसने सुसाइड नोट लिखा और उसमें जो लिखा था वो पत्थर की लकीर था। वो व्यक्तिगत किसी एक व्यक्ति पर आरोप लगा रहा है ना कि संगठन पर। लेकिन कांग्रेस ने उस एक व्यक्ति के लगाए आरोप को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करके और उसके बाद पूरा कांग्रेस का इकोसिस्टम पूरा सोशल मीडिया पर आरएसएस को बैन करो। आरएसएस में व्यभचारी हैं। आरएसएस में बलात्कारी हैं। यह तो आरएसएस है। उनके पास सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ने के लिए बड़े-बड़े वकील हैं। लेकिन उसके बावजूद भी इस तरह की बदतमीजी की भाषा बोलने वाले और झूठे आरोप लगाने वालों पर कभी भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कोई प्रतिक्रिया नहीं देता। कोई केस पलट कर नहीं करता। और इस देश में न्यायपालिका भी कहीं ना कहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अगर केस करेगा उस पर मुझे लग रहा है उतनी तेजी से संज्ञान भी नहीं लेगी। यदि यहां कोई मुस्लिम कम्युनिटी का कोई व्यक्ति हो उसके बारे में कुछ ऐसा बोल दिया जाए। राहुल गांधी गांधी परिवार के बारे में ऐसा बोल दिया जाए। आप देखेंगे सुप्रीम कोर्ट और बड़े-बड़े वकील वहां पहुंच जाएंगे और वहां सुप्रीम कोर्ट तो सुनवाई भी कर देगा। एक मिनट में सजा भी बोल देगा। लेकिन इस देश में भारतीय जनता पार्टी के सबसे बड़े नेता इस समय अगर कोई है तो मोदी प्रधानमंत्री उनको गाली दे लो। गृह मंत्री को गाली दे लो। बीजेपी के किसी नेता के ऊपर कुछ भी कटाक्ष कर दो। आपका कुछ बिगड़ता नहीं है। और इसलिए ये हौसले बढ़े हुए हैं। तो कुल मिलाकर के पवन खेड़ा ने जो बयान दिया कितना विवादित था। रागिनी नायक जो इनकी प्रवक्ता है वह एक्स पोस्ट पे उस वीडियो को डाल रही थी। अब आप सोचें कि इस उसके बाद भी इनकी मंशा क्या है? यह तो आरएसएस को बैन करने के लिए कब से कह रहे हैं? कब से इनके दिमाग में है कि आरएसएस बैन होना चाहिए। इनका मंशा चलती तो कब का यह कभी गांधी की हत्या का आरोप लगाते, कभी कोई और बात करते, कभी ये जो राम मंदिर के पहले बाबरी ढांचा वहां था उसके गिराए जाने के बाद बीजेपी की सरकारें गिराई। तब भी आरएसएस पर बैन की बात की। इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई। उस समय भी आरएसएस पर बैन लगाया गया। लेकिन सुप्रीम कोर्ट तक में केस चले तो बैन हटा।

अब भी इस मामले में हाई कोर्ट से जो झटका लगा है कर्नाटक की सरकार को अब देखना होगा इसमें अंतिम फैसला कोर्ट क्या करता है। लेकिन एक बात बिल्कुल साफ है कि ये जो कांग्रेस है कांग्रेस आरएसएस से परेशान है। इनको आरएसएस को बैन करना है। हिंदूवादी संगठनों पर बैन लगाना है। हिंदू संतों को जेल भेजना है। जैसा कि आपने देखा प्रज्ञा ठाकुर असीमानंद इनको भेजा गया। लेकिन कभी भी इनको इस देश में पीएफआई और सिमी से कोई दिक्कत नहीं है। यह देशवासियों को सोचने की बात है।


Friday, October 17, 2025

सीजीआई गवाई- हर चीज के लिए हमारे पास मत आइए सरकार से गुहार लगाइए

सीजीआई गवाई- हर चीज के लिए हमारे पास मत आइए सरकार से गुहार लगाइए
सीजीआई गवाई- हर चीज के लिए हमारे पास मत आइए सरकार से गुहार लगाइए
सीजीआई गवाई- हर चीज के लिए हमारे पास मत आइए सरकार से गुहार लगाइए
सीजीआई गवाई- हर चीज के लिए हमारे पास मत आइए सरकार से गुहार लगाइए
सीजीआई गवाई- हर चीज के लिए हमारे पास मत आइए सरकार से गुहार लगाइए
सीजीआई गवाई- हर चीज के लिए हमारे पास मत आइए सरकार से गुहार लगाइए

 


 भारत के चीफ जस्टिस चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बी आर गवई अपनी बयानबाजी के लिए सुर्खियों में रहते हैं। ऐसा लगता है कि रिटायरमेंट के बाद बड़ी योजना है गवई साहब यह चाह रहे हैं कि बहुत जल्द रिटायर होते उन्हें कोई पॉलिटिकल पार्टी बना लेंगे। लेकिन एकाएक सनातन द्रोह का चेहरा बी आर गवई का बेनकाब होते जो पूरे भारत में विद्रोह हुआ सनातनियों का भारत के इतिहास में पहली बार सीजीआई से माफी मांगने के लिए मुहिम चला। उसने हिला कर रख दिया इस सुप्रीम अहंकार को। दरअसल गवई साहब के पास एक याचिका पहुंची खुजुराहो के मंदिर खुजुराहो में भगवान विष्णु की जो एक मूर्ति है वो खंडित है। याचिका इस बात को लेकर की थी कि आप सरकार को इस तरह के निर्देश दीजिए। इसके लिए आप कुछ कीजिए मी लॉर्ड। लेकिन गवई साहब ना सिर्फ उस याचिका को खारिज किया बल्कि एक घिनौना टिप्पणी कर दिया कि बहुत भक्त बनते हो जाओ अपने भगवान विष्णु से कहो उसमें यदि इतनी शक्ति है तो वही अपनी मूर्ति ठीक कर ले ये हिरण्यकश्यप से भी घृणित अहंकार था इस अहंकार ने भारत की सुप्रीम अदालत की चूने हिला दी उसके बाद जो बदलाव हुआ है वह आपको निरंतर दिख रहा है।

 लेकिन अबकी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक तरह से भारत सरकार से के पास जाने को कहा है। अब सोचिए गवई यही बात खुजुराहो वाले मामले में भी तो कह सकते थे। इसीलिए मैं कहता हूं कि आप जैसा सोचेंगे। इस देश की आम जन जो सोचेगा इस देश का सुप्रीम अहंकार उसी से टूटेगा। बी द पीपल ऑफ इंडिया वाला देश है ये और यहां वही होगा जो भारत की जनता चाहेगी। जरा समझने की कोशिश कीजिए।

सुप्रीम कोर्ट में एक ऐसी याचिका गुरुवार को आई और उस याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने जो जवाब दिया वह चौंकाने वाला है। हर चीज के लिए हमारे पास मत आइए। जाइए सरकार से गुहार लगाइए। सीजीआई गवाई ने क्यों कहा ऐसा? अब जरा इसी से समझ जाइए। तब आपको हर चीज आपका क्लियर हो जाएगा। हर चीज के लिए हमारे पास मत आइए। जाइए सरकार से गुहार लगाइए। सीजीआई गवई ने ऐसा क्यों कहा? दरअसल एक याचिका को खारिज करते हुए बी आर गवई ने जब यह बात कही तो बात याद आ गई ये वाली बात आपको याद है ना जाओ भगवान से कहो भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति के बदले को बदलने पर सीजीआई गवई ने कहा अब दोनों में जरा फर्क को समझने की कोशिश कीजिए जाओ भगवान से कहो भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति को बदलने पर सीजीआई गवई ने ऐसा क्या कहा? ऐसा क्यों कहा? कितना फर्क है? इस एक महीने के अंदर एक जैसी दो याचिकाओं पर भारत के एक ही मुख्य न्यायाधीश की इस सोच में इतना फर्क क्यों है? क्यों सीजीआई गवाही है? उस समय कह रहे थे महीना भर पहले कि जाओ अपने भगवान से कहो तुम्हारा भगवान यदि ये कर सकता है तो तुम्हें अपने भगवान से ही कहना चाहिए। अब वही का वही कह रहे हैं कि हर चीज के लिए हमारे पास मत आइए। है ना? जाइए अपने भगवान से कहिए। ऐसा क्यों हो गया? ऐसा क्यों हो गया? आइए अपने जाइए अपने देवता से कहिए कि वह खुद करें टूटी प्रतिमा को बदलने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा कि कितना घिनौना था सुप्रीम कोर्ट का यह रवैया सुप्रीम कोर्ट का ये रवैया 100 करोड़ सवा सौ करोड़ हिंदुओं की आस्था को चोट था जो गवई इस बात के लिए कहते हैं कि वो देश के पहले दूसरे दलित चीफ जस्टिस नहीं है। वो इस देश के पहले बौद्ध चीफ जस्टिस है। लेकिन जब दलित कार्ड उन्हें खेलना होता है तो हर मामले में राजनेता की तरह वो दलित कार्ड खेलने लगते हैं। अब सवाल ये है कि जो चीफ जस्टिस ये कहता है कि जाओ अपने भगवान विष्णु से कहो बहुत भक्त बनते हो तो वही तुम्हारा मूर्ति ठीक कर देगा।


वो याचिकाकर्ता की याचिका को खारिज करते हुए यह भी कह सकते थे कि जाओ सरकार के पास कहो। यह काम सरकार का है। यह मामला तो सरकार के पास जाना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं है कि इस तरह के मामले को सुप्रीम कोर्ट इंटरफेयर नहीं करता रहा। सुप्रीम कोर्ट तो हर मामले में घुसपैठ करता रहा है और अहंकार इस कदर रहा है कि सरकार से बड़ी चीज है। वो संसद से बड़ी चीज है। वो सिर्फ संविधान के सामने वो छोटा है। संविधान की रट राहुल गांधी की तरह सीजीआई गवाई भी लगाते हैं। और जब उन्होंने भगवान विष्णु का इस कदर अपमान किया। इस देश में तो लोग राम का अपमान कहते हैं ना कि जो राम का नहीं वो किसी काम का नहीं। और भगवान राम तो स्वयं भगवान विष्णु के अवतार हैं। हर अवतार भगवान विष्णु का ही तो है। तो आप उस विष्णु का अपमान कर रहे हैं। विष्णु का अपमान हिरण्यकश्यप ने भी किया था। उस हिरण्यकश्यप को जिसको यह वरदान था कि उसे ना कोई दिन में मार सकता है, ना रात में मार सकता है। ना उसे हवा में मारा जा सकता है। ना जमीन पर, ना पानी पर, ना आकाश में। उस हिरण्यकश्यप को जिसके लिए कहा जाता था कि ना उसे कोई हथियार से मारा जा सकता ना आग में जलाया जा सकता ना पानी में डूबाया जा सकता था तो भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया क्योंकि उसे उसे यह भी वरदान था कि ना उसे आदमी मार सकता है ना जानवर मार सकता है हथियार से ना मारा जा सकता तो नरसिंह अवतार में भगवान ने अपने नाखून से मारा उसे जमीन पर नहीं मारा जा सकता उसे आसमान में नहीं मारा जा सकता तो भगवान विष्णु ने उसे अपने जंघे पर रखा उसे ना घर के अंदर मारा जा सकता था ना घर के बाहर मारा जा सकता था तो भगवान विष्णु ने उसे दरवाजे के चौखट पे ही मार डाला। अत्याचारी का तो अंत होता है। कोई भी व्यक्ति यदि हिरणाकश्यप की तरह अहंकार तार लेगा तो उसकी दुर्गति तो सनातन भारत करता है।

यही वजह है कि जब पूरे देश में विद्रोह अपने विष्णु को लेकर के हुआ तो चूले हिल गई सुप्रीम अदालत की और उसके बाद वो कोर्ट में आकर कहने लगे कि सोशल मीडिया पर मेरा बहुत विरोध हो रहा है। हमारी खबर को हमारे बयान को गलत ढंग से लिया गया। माय लॉर्ड आपको बयानबाजी करने के लिए खबर देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में नहीं बैठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज का काम बयान बहादुर बनना नहीं है। टिप्पणी करना नहीं है कि जाओ नपुर शर्मा पर टिप्पणी कर दिए। भगवान विष्णु पर टिप्पणी कर दिए। कभी भाईजान पे भी टिप्पणी करके देखो। जिहादियों पर भी टिप्पणी करके देखो तो पता चले कि सर तन से जुदा कैसे हो जाता है। इतनी हिम्मत तो कभी उत्तर प्रदेश में नहीं हुई मुख्तार अंसारियों अतीक अहमदों पर कुछ भी करने की। यही इलाहाबाद से प्रमोट हो के आते हैं इलाहाबाद हाई कोर्ट से। अब जरा समझिए कि जब इतना सब कुछ हुआ उसके बाद ये मिजाज लगातार क्यों बदले? सेम याचिका थी। जैसे खुजुराहो मंदिर की याचिका थी लगभग वैसे ही याचिका थी। इस याचिका में याचिकाकर्ता ने डिमांड किया था कि जबकि यह ज्यादा का मायने ये मानवाधिकार से जुड़ा हुआ ज्यादा महत्वपूर्ण मामला है।

बिहार यूपी में जहां पर सघन आबादी है। हम देखते हैं कि बसों के छत पर लोग बैठते हैं। अब तो थोड़ा सा कम हो गया है। एक समय में छत पर बैठने की परंपरा थी। ओवरलोडिंग होती थी। दिल्ली में ब्लू लाइन की बसों में ओवरलोडिंग होती थी। ब्लू लाइन के मामले को सुप्रीम कोर्ट ने सुलझाया है। लेकिन ऐसी याचिका जब सुप्रीम कोर्ट के पास अब की बार आया और याचिकाकर्ता ने कहा कि अत्यधिक भीड़भाड़ वाले इलाके में जो बसों पे जो में जो अत्यधिक भीड़ होती है उसमें आप उसके लिए कुछ कीजिए। याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए गवाही ने दो कहा कि जाइए सरकार के सामने जाकर अपनी बात रखिए। संविधान के अन्य अंग भी काम करते हैं। हर बात के लिए हमारी अदालत में मत आ जाइए। संविधान के हर अंग काम करते हैं। तो इतने दिनों से चुनाव आयोग के खिलीफ उंगली बाल क्यों बने हुए हैं ? चुनाव आयोग एक स्वत संस्था है। चुनाव आयोग ने कह दिया कि जैसे आप स्वत हैं वैसे हम भी स्वत हैं। तो हमें ज्यादा उंगली मत कीजिए। यह सब चीजें अब सुप्रीम कोर्ट को समझ में आने लगा है। सीजीआई ने स्पष्ट कहा कि सरकार के कई अंग है जो इसकी व्यवस्था देखते हैं। इसीलिए याचिकाकर्ता को सरकार के संपर्क कर इस मुद्दे को उठाना चाहिए। बता दें कि त्यहारी सीजन में बसों और ट्रेनों में निर्धारित क्षमता से ज्यादा संख्या में यात्रा यात्री सफर करते हैं। बसों में 16 से 18 घंटे 18 टन तक का वजन होने की क्षमता होती है। लेकिन इस सीमा से ज्यादा लोग छतों पर बैठे रहते हैं। इससे दुर्घटना होती है। कायदे से इस याचिका को तो सुप्रीम कोर्ट को सुनना चाहिए। याचिका बड़ा महत्वपूर्ण था। याचिकाकर्ता की दलील यह पीआईएल सही मायने में पीआईएल है। यह जो पीआईएल थी वो नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हुए पीआईएल दाखिल की गई कि सड़क दुर्घटना जो इस कदर होती है उसकी एक बड़ी वजह ये है कि ओवरलोडिंग होती है और त्यहारी मौसम और सनातनियों के सबसे बड़े त्यौहार दीपावली के समय में था। हो सकता है कि एक बड़ी साजिश के तहत भी हो लेकिन ये याचिका तो महत्वपूर्ण थी। हर मामले में घुसपैठ करने वाला जलीकट्टू मामले में गोविंदा मामले में घुसपैठ करने वाले सबरीवाला मंदिर वाले मामले में घुसपैठ करने वाले सुप्रीम कोर्ट इस मामले में मतलब आप कल्पना कीजिए कि जो सुप्रीम कोर्ट सबरी वाला मामले में मामले में घुसपैठ कर दे वैसे किसी भी आदेश का सुप्रीम कोर्ट के किसी भी आदेश का पालन नहीं हुआ ना तो सबरी वाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश का पालन अब तक हुआ स्वयं महिलाओं ने नहीं किया रजवा जो स्त्रियां होती है जो 13 साल की बच्ची जब मासिक धर्म ग्रहण करती है उससे लेकर के 50 साल तक की महिलाएं का उस मंदिर में नियम है कि वो नहीं एंट्री करती है। ऐसे भी सनातनी महिलाएं सामान्यतः उस कंडीशन में जब वो मासिक में होती हैं तो मंदिरों में नहीं जाती। पूजा पाठ नहीं करती हैं। दशहरा जैसे पर्व में नवरात्र जैसे पर्व में वो पूजा नहीं करती। वो सीधे दूर से प्रणाम करती है।

यह परंपरा रही है और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जरूरत नहीं होती है। जब सबरा क्योंकि सबरी वाला मंदिर में ये था कि आपकी रोक थी इस उम्र की महिलाओं को। वैसे स्वत महिलाएं नहीं जाती है लेकिन रोक थी। तो दरअसल इस तरह की हरकतें जिहादने कर रही थी, वामपंथन कर रही थी। ये याचिकाएं भी उसी ढंग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दिया भाई साहब। लेकिन जब रोक लगा तो रोक लगाने की जरूरत नहीं क्योंकि महिलाओं ने हिंदू महिलाओं ने तो मांग ही नहीं किया था। उत्तमपंथन गुंडन ने जाकर के उसमें एंट्री की और मंदिर में घुसने का प्रयास किया। वहां पर उनका विरोध हुआ। वो नहीं घुस पाए। और आज भी उस मंदिर में 13 साल से लेकर 50 साल की महिला स्वतः नहीं जाती। कोई रोक की बात ही नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने घुसपैठ कर दिया। उसमें जली कट्टू वाले मामले में घुसपैठ कर दिया। दही हांडी में घुसपैठ कर दिया। राम मंदिर पर सालों तक हियरिंग नहीं हुई क्योंकि सिब्बल नहीं चाह रहा था। अब इस तरह के हर मामले में 370 वाला मामला इस संसद के संविधान से के तहत संसद से पास कानून था। फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने सुना। हर मामले को सुना। लेकिन जब राष्ट्रीय राजमार्ग पर किसानों के रूप में गुंडों का एक का साम्राज्य था सुप्रीम कोर्ट ने उस पर घुसपैठ नहीं किया। मैंने कई बार बताया लेकिन शाहीन साजिश के जब तंबू बंबू उखड़ गए तो ज्ञान दिया कि आपका मौलिक अधिकार दूसरे के मौलिक अधिकार का हनन नहीं कर सकता। आप यदि कोई डिमांड करते हैं तो आप धरना प्रदर्शन कर सकते हैं। लेकिन नेशनल हाईवेज पर नहीं कर सकते। ये सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन साजिश के तंबू खरने के बाद कहा। तो फिर सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल हाईवे पर बैठे लोगों को लठ से उठाकर मारने का निर्देश क्यों नहीं दिया?क्यों कहता हूं कि फिक्सरों के कब्जे में। लेकिन देश का जब मिजाज बदला जब देश ने समझा कि इस देश का सुप्रीम कोर्ट तो सनातन द्रोही एजेंडा चलाता है। वो तो हमारे भगवान का अपमान कर रहा है। तो आवाज देश से उठी सोशल मीडिया के माध्यम से तो माय लॉर्ड तक भी पहुंचा। उसके बाद पूरा मिजाज बदल गया है। यह सुप्रीम कोर्ट का आदेश कि जाओ अपने सरकार से कहो। निश्चित रूप से सरकार से कहनी चाहिए। इस तरह की याचिकाओं पर यही जवाब होना चाहिए। ये पूरा लॉ एंड ऑर्डर से जुड़ा हुआ मामला है। ये सरकार का नीतिगत फैसला है। हर मामले में विदेश मामले में भी सुप्रीम कोर्ट का घुसपैठ हो जाता है। याचिकाएं आ जाती है। अब सुप्रीम कोर्ट में ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि ये काम सरकार का है और सरकार की कई सारे बल्कि क्लियरली सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार का काम है। सरकार के पास जाइए। सरकार ने इसके लिए कई सारे डिपार्टमेंट बना रखे हैं। सरकार ही इस पर अमल करेगी।

हो सकता है इस मामले में कोई फिक्सर टाइप वकील नहीं रहा हो। वरना फिक्सर टाइप वकील होते तो याचिका सुना जाता। उस पर कमाई होती। इसीलिए देश को सजग रहने की जरूरत है। एक ही चीफ जस्टिस का एक जैसे दो पीआईएल पर दो अलग-अलग तरह के संदेश आदेश इस देश की जीत है। यह बदला हुआ मौसम दिखा रहा है। यह सनातन भारत और सजग राष्ट्र की जीत है। यह फिक्सरों पर सुप्रीम हथौड़ा है। और ये हथौड़ा सुप्रीम कोर्ट नहीं मार रहा है। ये हथौड़ा आम आदमी के द्वारा मारा गया है। ये आम आदमी के मिजाज को जब सुप्रीम कोर्ट ने जाना है।यह बदलाव बेहतर है। इसीलिए इस देश को सजग रहने की जरूरत है ताकि सुप्रीम अदालत से भारत द्रोही फैसले पर सनातन द्रोही फैसले पर अंकुश लगाया जा सके।

 जय हिंद



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सीजीआई गवाई- हर चीज के लिए हमारे पास मत आइए सरकार से गुहार लगाइए

सीजीआई गवाई- हर चीज के लिए हमारे पास मत आइए सरकार से गुहार लगाइए
सीजीआई गवाई- हर चीज के लिए हमारे पास मत आइए सरकार से गुहार लगाइए
सीजीआई गवाई- हर चीज के लिए हमारे पास मत आइए सरकार से गुहार लगाइए
सीजीआई गवाई- हर चीज के लिए हमारे पास मत आइए सरकार से गुहार लगाइए
सीजीआई गवाई- हर चीज के लिए हमारे पास मत आइए सरकार से गुहार लगाइए

 


 भारत के चीफ जस्टिस चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बी आर गवई अपनी बयानबाजी के लिए सुर्खियों में रहते हैं। ऐसा लगता है कि रिटायरमेंट के बाद बड़ी योजना है गवई साहब यह चाह रहे हैं कि बहुत जल्द रिटायर होते उन्हें कोई पॉलिटिकल पार्टी बना लेंगे। लेकिन एकाएक सनातन द्रोह का चेहरा बी आर गवई का बेनकाब होते जो पूरे भारत में विद्रोह हुआ सनातनियों का भारत के इतिहास में पहली बार सीजीआई से माफी मांगने के लिए मुहिम चला। उसने हिला कर रख दिया इस सुप्रीम अहंकार को। दरअसल गवई साहब के पास एक याचिका पहुंची खुजुराहो के मंदिर खुजुराहो में भगवान विष्णु की जो एक मूर्ति है वो खंडित है। याचिका इस बात को लेकर की थी कि आप सरकार को इस तरह के निर्देश दीजिए। इसके लिए आप कुछ कीजिए मी लॉर्ड। लेकिन गवई साहब ना सिर्फ उस याचिका को खारिज किया बल्कि एक घिनौना टिप्पणी कर दिया कि बहुत भक्त बनते हो जाओ अपने भगवान विष्णु से कहो उसमें यदि इतनी शक्ति है तो वही अपनी मूर्ति ठीक कर ले ये हिरण्यकश्यप से भी घृणित अहंकार था इस अहंकार ने भारत की सुप्रीम अदालत की चूने हिला दी उसके बाद जो बदलाव हुआ है वह आपको निरंतर दिख रहा है।

 लेकिन अबकी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक तरह से भारत सरकार से के पास जाने को कहा है। अब सोचिए गवई यही बात खुजुराहो वाले मामले में भी तो कह सकते थे। इसीलिए मैं कहता हूं कि आप जैसा सोचेंगे। इस देश की आम जन जो सोचेगा इस देश का सुप्रीम अहंकार उसी से टूटेगा। बी द पीपल ऑफ इंडिया वाला देश है ये और यहां वही होगा जो भारत की जनता चाहेगी। जरा समझने की कोशिश कीजिए।

सुप्रीम कोर्ट में एक ऐसी याचिका गुरुवार को आई और उस याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने जो जवाब दिया वह चौंकाने वाला है। हर चीज के लिए हमारे पास मत आइए। जाइए सरकार से गुहार लगाइए। सीजीआई गवाई ने क्यों कहा ऐसा? अब जरा इसी से समझ जाइए। तब आपको हर चीज आपका क्लियर हो जाएगा। हर चीज के लिए हमारे पास मत आइए। जाइए सरकार से गुहार लगाइए। सीजीआई गवई ने ऐसा क्यों कहा? दरअसल एक याचिका को खारिज करते हुए बी आर गवई ने जब यह बात कही तो बात याद आ गई ये वाली बात आपको याद है ना जाओ भगवान से कहो भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति के बदले को बदलने पर सीजीआई गवई ने कहा अब दोनों में जरा फर्क को समझने की कोशिश कीजिए जाओ भगवान से कहो भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति को बदलने पर सीजीआई गवई ने ऐसा क्या कहा? ऐसा क्यों कहा? कितना फर्क है? इस एक महीने के अंदर एक जैसी दो याचिकाओं पर भारत के एक ही मुख्य न्यायाधीश की इस सोच में इतना फर्क क्यों है? क्यों सीजीआई गवाही है? उस समय कह रहे थे महीना भर पहले कि जाओ अपने भगवान से कहो तुम्हारा भगवान यदि ये कर सकता है तो तुम्हें अपने भगवान से ही कहना चाहिए। अब वही का वही कह रहे हैं कि हर चीज के लिए हमारे पास मत आइए। है ना? जाइए अपने भगवान से कहिए। ऐसा क्यों हो गया? ऐसा क्यों हो गया? आइए अपने जाइए अपने देवता से कहिए कि वह खुद करें टूटी प्रतिमा को बदलने की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा क्यों कहा कि कितना घिनौना था सुप्रीम कोर्ट का यह रवैया सुप्रीम कोर्ट का ये रवैया 100 करोड़ सवा सौ करोड़ हिंदुओं की आस्था को चोट था जो गवई इस बात के लिए कहते हैं कि वो देश के पहले दूसरे दलित चीफ जस्टिस नहीं है। वो इस देश के पहले बौद्ध चीफ जस्टिस है। लेकिन जब दलित कार्ड उन्हें खेलना होता है तो हर मामले में राजनेता की तरह वो दलित कार्ड खेलने लगते हैं। अब सवाल ये है कि जो चीफ जस्टिस ये कहता है कि जाओ अपने भगवान विष्णु से कहो बहुत भक्त बनते हो तो वही तुम्हारा मूर्ति ठीक कर देगा।


वो याचिकाकर्ता की याचिका को खारिज करते हुए यह भी कह सकते थे कि जाओ सरकार के पास कहो। यह काम सरकार का है। यह मामला तो सरकार के पास जाना चाहिए। लेकिन ऐसा नहीं है कि इस तरह के मामले को सुप्रीम कोर्ट इंटरफेयर नहीं करता रहा। सुप्रीम कोर्ट तो हर मामले में घुसपैठ करता रहा है और अहंकार इस कदर रहा है कि सरकार से बड़ी चीज है। वो संसद से बड़ी चीज है। वो सिर्फ संविधान के सामने वो छोटा है। संविधान की रट राहुल गांधी की तरह सीजीआई गवाई भी लगाते हैं। और जब उन्होंने भगवान विष्णु का इस कदर अपमान किया। इस देश में तो लोग राम का अपमान कहते हैं ना कि जो राम का नहीं वो किसी काम का नहीं। और भगवान राम तो स्वयं भगवान विष्णु के अवतार हैं। हर अवतार भगवान विष्णु का ही तो है। तो आप उस विष्णु का अपमान कर रहे हैं। विष्णु का अपमान हिरण्यकश्यप ने भी किया था। उस हिरण्यकश्यप को जिसको यह वरदान था कि उसे ना कोई दिन में मार सकता है, ना रात में मार सकता है। ना उसे हवा में मारा जा सकता है। ना जमीन पर, ना पानी पर, ना आकाश में। उस हिरण्यकश्यप को जिसके लिए कहा जाता था कि ना उसे कोई हथियार से मारा जा सकता ना आग में जलाया जा सकता ना पानी में डूबाया जा सकता था तो भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया क्योंकि उसे उसे यह भी वरदान था कि ना उसे आदमी मार सकता है ना जानवर मार सकता है हथियार से ना मारा जा सकता तो नरसिंह अवतार में भगवान ने अपने नाखून से मारा उसे जमीन पर नहीं मारा जा सकता उसे आसमान में नहीं मारा जा सकता तो भगवान विष्णु ने उसे अपने जंघे पर रखा उसे ना घर के अंदर मारा जा सकता था ना घर के बाहर मारा जा सकता था तो भगवान विष्णु ने उसे दरवाजे के चौखट पे ही मार डाला। अत्याचारी का तो अंत होता है। कोई भी व्यक्ति यदि हिरणाकश्यप की तरह अहंकार तार लेगा तो उसकी दुर्गति तो सनातन भारत करता है।

यही वजह है कि जब पूरे देश में विद्रोह अपने विष्णु को लेकर के हुआ तो चूले हिल गई सुप्रीम अदालत की और उसके बाद वो कोर्ट में आकर कहने लगे कि सोशल मीडिया पर मेरा बहुत विरोध हो रहा है। हमारी खबर को हमारे बयान को गलत ढंग से लिया गया। माय लॉर्ड आपको बयानबाजी करने के लिए खबर देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में नहीं बैठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जज का काम बयान बहादुर बनना नहीं है। टिप्पणी करना नहीं है कि जाओ नपुर शर्मा पर टिप्पणी कर दिए। भगवान विष्णु पर टिप्पणी कर दिए। कभी भाईजान पे भी टिप्पणी करके देखो। जिहादियों पर भी टिप्पणी करके देखो तो पता चले कि सर तन से जुदा कैसे हो जाता है। इतनी हिम्मत तो कभी उत्तर प्रदेश में नहीं हुई मुख्तार अंसारियों अतीक अहमदों पर कुछ भी करने की। यही इलाहाबाद से प्रमोट हो के आते हैं इलाहाबाद हाई कोर्ट से। अब जरा समझिए कि जब इतना सब कुछ हुआ उसके बाद ये मिजाज लगातार क्यों बदले? सेम याचिका थी। जैसे खुजुराहो मंदिर की याचिका थी लगभग वैसे ही याचिका थी। इस याचिका में याचिकाकर्ता ने डिमांड किया था कि जबकि यह ज्यादा का मायने ये मानवाधिकार से जुड़ा हुआ ज्यादा महत्वपूर्ण मामला है।

बिहार यूपी में जहां पर सघन आबादी है। हम देखते हैं कि बसों के छत पर लोग बैठते हैं। अब तो थोड़ा सा कम हो गया है। एक समय में छत पर बैठने की परंपरा थी। ओवरलोडिंग होती थी। दिल्ली में ब्लू लाइन की बसों में ओवरलोडिंग होती थी। ब्लू लाइन के मामले को सुप्रीम कोर्ट ने सुलझाया है। लेकिन ऐसी याचिका जब सुप्रीम कोर्ट के पास अब की बार आया और याचिकाकर्ता ने कहा कि अत्यधिक भीड़भाड़ वाले इलाके में जो बसों पे जो में जो अत्यधिक भीड़ होती है उसमें आप उसके लिए कुछ कीजिए। याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए गवाही ने दो कहा कि जाइए सरकार के सामने जाकर अपनी बात रखिए। संविधान के अन्य अंग भी काम करते हैं। हर बात के लिए हमारी अदालत में मत आ जाइए। संविधान के हर अंग काम करते हैं। तो इतने दिनों से चुनाव आयोग के खिलीफ उंगली बाल क्यों बने हुए हैं ? चुनाव आयोग एक स्वत संस्था है। चुनाव आयोग ने कह दिया कि जैसे आप स्वत हैं वैसे हम भी स्वत हैं। तो हमें ज्यादा उंगली मत कीजिए। यह सब चीजें अब सुप्रीम कोर्ट को समझ में आने लगा है। सीजीआई ने स्पष्ट कहा कि सरकार के कई अंग है जो इसकी व्यवस्था देखते हैं। इसीलिए याचिकाकर्ता को सरकार के संपर्क कर इस मुद्दे को उठाना चाहिए। बता दें कि त्यहारी सीजन में बसों और ट्रेनों में निर्धारित क्षमता से ज्यादा संख्या में यात्रा यात्री सफर करते हैं। बसों में 16 से 18 घंटे 18 टन तक का वजन होने की क्षमता होती है। लेकिन इस सीमा से ज्यादा लोग छतों पर बैठे रहते हैं। इससे दुर्घटना होती है। कायदे से इस याचिका को तो सुप्रीम कोर्ट को सुनना चाहिए। याचिका बड़ा महत्वपूर्ण था। याचिकाकर्ता की दलील यह पीआईएल सही मायने में पीआईएल है। यह जो पीआईएल थी वो नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े बताते हुए पीआईएल दाखिल की गई कि सड़क दुर्घटना जो इस कदर होती है उसकी एक बड़ी वजह ये है कि ओवरलोडिंग होती है और त्यहारी मौसम और सनातनियों के सबसे बड़े त्यौहार दीपावली के समय में था। हो सकता है कि एक बड़ी साजिश के तहत भी हो लेकिन ये याचिका तो महत्वपूर्ण थी। हर मामले में घुसपैठ करने वाला जलीकट्टू मामले में गोविंदा मामले में घुसपैठ करने वाले सबरीवाला मंदिर वाले मामले में घुसपैठ करने वाले सुप्रीम कोर्ट इस मामले में मतलब आप कल्पना कीजिए कि जो सुप्रीम कोर्ट सबरी वाला मामले में मामले में घुसपैठ कर दे वैसे किसी भी आदेश का सुप्रीम कोर्ट के किसी भी आदेश का पालन नहीं हुआ ना तो सबरी वाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का आदेश का पालन अब तक हुआ स्वयं महिलाओं ने नहीं किया रजवा जो स्त्रियां होती है जो 13 साल की बच्ची जब मासिक धर्म ग्रहण करती है उससे लेकर के 50 साल तक की महिलाएं का उस मंदिर में नियम है कि वो नहीं एंट्री करती है। ऐसे भी सनातनी महिलाएं सामान्यतः उस कंडीशन में जब वो मासिक में होती हैं तो मंदिरों में नहीं जाती। पूजा पाठ नहीं करती हैं। दशहरा जैसे पर्व में नवरात्र जैसे पर्व में वो पूजा नहीं करती। वो सीधे दूर से प्रणाम करती है।

यह परंपरा रही है और इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जरूरत नहीं होती है। जब सबरा क्योंकि सबरी वाला मंदिर में ये था कि आपकी रोक थी इस उम्र की महिलाओं को। वैसे स्वत महिलाएं नहीं जाती है लेकिन रोक थी। तो दरअसल इस तरह की हरकतें जिहादने कर रही थी, वामपंथन कर रही थी। ये याचिकाएं भी उसी ढंग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दिया भाई साहब। लेकिन जब रोक लगा तो रोक लगाने की जरूरत नहीं क्योंकि महिलाओं ने हिंदू महिलाओं ने तो मांग ही नहीं किया था। उत्तमपंथन गुंडन ने जाकर के उसमें एंट्री की और मंदिर में घुसने का प्रयास किया। वहां पर उनका विरोध हुआ। वो नहीं घुस पाए। और आज भी उस मंदिर में 13 साल से लेकर 50 साल की महिला स्वतः नहीं जाती। कोई रोक की बात ही नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने घुसपैठ कर दिया। उसमें जली कट्टू वाले मामले में घुसपैठ कर दिया। दही हांडी में घुसपैठ कर दिया। राम मंदिर पर सालों तक हियरिंग नहीं हुई क्योंकि सिब्बल नहीं चाह रहा था। अब इस तरह के हर मामले में 370 वाला मामला इस संसद के संविधान से के तहत संसद से पास कानून था। फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने सुना। हर मामले को सुना। लेकिन जब राष्ट्रीय राजमार्ग पर किसानों के रूप में गुंडों का एक का साम्राज्य था सुप्रीम कोर्ट ने उस पर घुसपैठ नहीं किया। मैंने कई बार बताया लेकिन शाहीन साजिश के जब तंबू बंबू उखड़ गए तो ज्ञान दिया कि आपका मौलिक अधिकार दूसरे के मौलिक अधिकार का हनन नहीं कर सकता। आप यदि कोई डिमांड करते हैं तो आप धरना प्रदर्शन कर सकते हैं। लेकिन नेशनल हाईवेज पर नहीं कर सकते। ये सुप्रीम कोर्ट ने शाहीन साजिश के तंबू खरने के बाद कहा। तो फिर सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल हाईवे पर बैठे लोगों को लठ से उठाकर मारने का निर्देश क्यों नहीं दिया?क्यों कहता हूं कि फिक्सरों के कब्जे में। लेकिन देश का जब मिजाज बदला जब देश ने समझा कि इस देश का सुप्रीम कोर्ट तो सनातन द्रोही एजेंडा चलाता है। वो तो हमारे भगवान का अपमान कर रहा है। तो आवाज देश से उठी सोशल मीडिया के माध्यम से तो माय लॉर्ड तक भी पहुंचा। उसके बाद पूरा मिजाज बदल गया है। यह सुप्रीम कोर्ट का आदेश कि जाओ अपने सरकार से कहो। निश्चित रूप से सरकार से कहनी चाहिए। इस तरह की याचिकाओं पर यही जवाब होना चाहिए। ये पूरा लॉ एंड ऑर्डर से जुड़ा हुआ मामला है। ये सरकार का नीतिगत फैसला है। हर मामले में विदेश मामले में भी सुप्रीम कोर्ट का घुसपैठ हो जाता है। याचिकाएं आ जाती है। अब सुप्रीम कोर्ट में ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि ये काम सरकार का है और सरकार की कई सारे बल्कि क्लियरली सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार का काम है। सरकार के पास जाइए। सरकार ने इसके लिए कई सारे डिपार्टमेंट बना रखे हैं। सरकार ही इस पर अमल करेगी।

हो सकता है इस मामले में कोई फिक्सर टाइप वकील नहीं रहा हो। वरना फिक्सर टाइप वकील होते तो याचिका सुना जाता। उस पर कमाई होती। इसीलिए देश को सजग रहने की जरूरत है। एक ही चीफ जस्टिस का एक जैसे दो पीआईएल पर दो अलग-अलग तरह के संदेश आदेश इस देश की जीत है। यह बदला हुआ मौसम दिखा रहा है। यह सनातन भारत और सजग राष्ट्र की जीत है। यह फिक्सरों पर सुप्रीम हथौड़ा है। और ये हथौड़ा सुप्रीम कोर्ट नहीं मार रहा है। ये हथौड़ा आम आदमी के द्वारा मारा गया है। ये आम आदमी के मिजाज को जब सुप्रीम कोर्ट ने जाना है।यह बदलाव बेहतर है। इसीलिए इस देश को सजग रहने की जरूरत है ताकि सुप्रीम अदालत से भारत द्रोही फैसले पर सनातन द्रोही फैसले पर अंकुश लगाया जा सके।

 जय हिंद



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