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Thursday, June 5, 2025

मोदी सरकार और देश हित के मुद्दे के हमेशा खिलाफ कपिल सिब्बल बार - बार सुप्रीम कोर्ट में

मोदी सरकार और देश हित के मुद्दे के हमेशा खिलाफ कपिल सिब्बल बार - बार सुप्रीम कोर्ट में
मोदी सरकार और देश हित के मुद्दे के हमेशा खिलाफ कपिल सिब्बल बार - बार सुप्रीम कोर्ट में
मोदी सरकार और देश हित के मुद्दे के हमेशा खिलाफ कपिल सिब्बल बार - बार सुप्रीम कोर्ट में
मोदी सरकार और देश हित के मुद्दे के हमेशा खिलाफ कपिल सिब्बल बार - बार सुप्रीम कोर्ट में

पीएम नरेंद्र मोदी अब देश हित के मुद्दे पर एक्शन मोड में हैं। पीएम मोदी ने साफ कर दिया है कि अब देश को धर्मशाला नहीं बनने देंगे। अब देश के संसाधनों पर देश के नागरिकों का ही हक होगा और हमारे देश में जो घुसपैठिए आ गए हैं, अब उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। लेकिन इस मुद्दे पर भी कुछ लोग मोदी सरकार के खिलाफ खड़े हैं।बांग्लादेश हमारा एक ऐसा पड़ोसी देश है जहां से काफी लोग आकर भारत में अवैध तरीके से रह रहे हैं। वह किसी ना किसी तरह से अवैध रूप से भारत में दाखिल होते हैं और भारत के सीमावर्ती इलाकों की डेमोग्राफी बदलने का काम करते हैं।

जिस पर आज तक किसी सरकार ने खुलकर संज्ञान नहीं लिया था। क्योंकि विपक्षी दलों के लोगों को तो हमेशा से ही एक ही डर सता रहा था कि यह चले गए तो हमारा वोट बैंक का क्या होगा? क्योंकि यह लोग जाली दस्तावेज बनाकर भारत में सुख भोगते रहे और भारत को अपराध की सूली पर चढ़ाते रहे।

लेकिन बीजेपी की असम सरकार इन्हें वापस उनके देश भेज रही है। तो कपिल सिब्बल सरी के नेताओं को दर्द हो रहा है और वह इसका विरोध कर रहे हैं। ऐसा ही कुछ हुआ है।कपिल सिब्बल एक ऐसा बयान दे चुके हैं कि देश की सबसे बड़ी सुप्रीम अदालत में वह कहते हैं कि उसे बांग्लादेशी महिला को बाहर निकाल दिया। उसे बांग्लादेश भेज दिया गया। यह दलील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में मोनोवरा बेवा नाम की एक बांग्लादेशी महिला के पक्ष में दी है। इस महिला को असम पुलिस ने उनके मुल्क वापस भेज दिया है। उसके बेटे अनज अली ने इसे चुनौती दी है। एक रिपोर्ट के अनुसार सिब्बल की इस दलील के जवाब में जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने यह कहा कि यदि वह पहले से ही देश में नहीं है तो हम उसे वापस नहीं बुला सकते। इस महिला की पैरवी करते हुए सिब्बल ने ऑपरेशन पुशबैक की वैधता पर भी सवाल उठाए।

वैसे यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह से देश के मामले पर कोर्ट में कपिल सिब्बल खड़े हो गए हो। राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद में मस्जिद की पैरवी हो, वफ का मामला हो। इस तरह के एक खास एजेंडे को भुनाने में कोर्ट के सामने काला कोट पहने कपिल सिब्बल का चेहरा उठकर सामने आ जाता है। मोदी सरकार और बीजेपी के खिलाफ हर मामले को लेकर कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट पहुंचते हैं। इसी तरह सुप्रीम कोर्ट में मुनवरा बेवा के बेटे अनच अली की याचिका के लिए कपिल सिब्बल कोर्ट में खड़े हुए। अनज ने याचिका में आरोप लगाया कि पुलिस ने उसकी मां को जबरन बांग्लादेश भेज दिया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया। कोर्ट से सिब्बल ने कहा कि महिला मुनवरा बेवा को धुबरी पुलिस ने उठाया और जबरन बांग्लादेश भेज दिया। याचिका पर जस्टिस संजय करोल और सतीश चंद्र शर्मा सुनवाई कर रहे थे। सिब्बल ने कोर्ट से पूछा कि धुबरी एसपी किस आधार पर किसी व्यक्ति को बांग्लादेशी नागरिक घोषित कर सकते हैं। क्या महिला को हिरासत में लेने के बाद किसी मैजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया? क्या कोर्ट इस पर भरोसा कर सकती है? सिबल यहीं पर नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि अनज को यह तक नहीं पता कि उसकी मां भारत में है या फिर बांग्लादेश भेज दी गई हैं। सरकार को अनज की मां की मौजूदा स्थिति के बारे में बताना चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने याचिका के तहत केंद्र सरकार का नोटिस जारी किया। अनज अली का यह भी कहना है कि ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ उसकी मां की याचिका 2017 से अब तक सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। 26 साल के अनज अली ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उसका दावा था कि उसकी मां मुनव्वरा बेवा को असम पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में रखा है। साथ ही देश में रातोंरात लोगों को बांग्लादेश भेज दिया जा रहा है।

मुनवरा बेवा को 17 मार्च 2016 को दुबरी फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित कर दिया था। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 28 फरवरी 2017 के आदेश में भी ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा था। इसके बाद बेवा ने सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी तब से अब तक यह मामला लंबित है और अब जब मोदी सरकार और असम की बीजेपी सरकार घुसपैठियों पर कार्यवाही कर रही है तब कुछ लोगों को तकलीफ हो रही है। लेकिन सवाल है कि इन लोगों के पास इतना पैसा कहां से आ रहा है जो वह कपिल सिब्बल जैसे इतने बड़े वकील को हायर कर रहे हैं।



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मोदी सरकार और देश हित के मुद्दे के हमेशा खिलाफ कपिल सिब्बल बार - बार सुप्रीम कोर्ट में

मोदी सरकार और देश हित के मुद्दे के हमेशा खिलाफ कपिल सिब्बल बार - बार सुप्रीम कोर्ट में
मोदी सरकार और देश हित के मुद्दे के हमेशा खिलाफ कपिल सिब्बल बार - बार सुप्रीम कोर्ट में
मोदी सरकार और देश हित के मुद्दे के हमेशा खिलाफ कपिल सिब्बल बार - बार सुप्रीम कोर्ट में

पीएम नरेंद्र मोदी अब देश हित के मुद्दे पर एक्शन मोड में हैं। पीएम मोदी ने साफ कर दिया है कि अब देश को धर्मशाला नहीं बनने देंगे। अब देश के संसाधनों पर देश के नागरिकों का ही हक होगा और हमारे देश में जो घुसपैठिए आ गए हैं, अब उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। लेकिन इस मुद्दे पर भी कुछ लोग मोदी सरकार के खिलाफ खड़े हैं।बांग्लादेश हमारा एक ऐसा पड़ोसी देश है जहां से काफी लोग आकर भारत में अवैध तरीके से रह रहे हैं। वह किसी ना किसी तरह से अवैध रूप से भारत में दाखिल होते हैं और भारत के सीमावर्ती इलाकों की डेमोग्राफी बदलने का काम करते हैं।

जिस पर आज तक किसी सरकार ने खुलकर संज्ञान नहीं लिया था। क्योंकि विपक्षी दलों के लोगों को तो हमेशा से ही एक ही डर सता रहा था कि यह चले गए तो हमारा वोट बैंक का क्या होगा? क्योंकि यह लोग जाली दस्तावेज बनाकर भारत में सुख भोगते रहे और भारत को अपराध की सूली पर चढ़ाते रहे।

लेकिन बीजेपी की असम सरकार इन्हें वापस उनके देश भेज रही है। तो कपिल सिब्बल सरी के नेताओं को दर्द हो रहा है और वह इसका विरोध कर रहे हैं। ऐसा ही कुछ हुआ है।कपिल सिब्बल एक ऐसा बयान दे चुके हैं कि देश की सबसे बड़ी सुप्रीम अदालत में वह कहते हैं कि उसे बांग्लादेशी महिला को बाहर निकाल दिया। उसे बांग्लादेश भेज दिया गया। यह दलील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में मोनोवरा बेवा नाम की एक बांग्लादेशी महिला के पक्ष में दी है। इस महिला को असम पुलिस ने उनके मुल्क वापस भेज दिया है। उसके बेटे अनज अली ने इसे चुनौती दी है। एक रिपोर्ट के अनुसार सिब्बल की इस दलील के जवाब में जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने यह कहा कि यदि वह पहले से ही देश में नहीं है तो हम उसे वापस नहीं बुला सकते। इस महिला की पैरवी करते हुए सिब्बल ने ऑपरेशन पुशबैक की वैधता पर भी सवाल उठाए।

वैसे यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह से देश के मामले पर कोर्ट में कपिल सिब्बल खड़े हो गए हो। राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद में मस्जिद की पैरवी हो, वफ का मामला हो। इस तरह के एक खास एजेंडे को भुनाने में कोर्ट के सामने काला कोट पहने कपिल सिब्बल का चेहरा उठकर सामने आ जाता है। मोदी सरकार और बीजेपी के खिलाफ हर मामले को लेकर कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट पहुंचते हैं। इसी तरह सुप्रीम कोर्ट में मुनवरा बेवा के बेटे अनच अली की याचिका के लिए कपिल सिब्बल कोर्ट में खड़े हुए। अनज ने याचिका में आरोप लगाया कि पुलिस ने उसकी मां को जबरन बांग्लादेश भेज दिया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया। कोर्ट से सिब्बल ने कहा कि महिला मुनवरा बेवा को धुबरी पुलिस ने उठाया और जबरन बांग्लादेश भेज दिया। याचिका पर जस्टिस संजय करोल और सतीश चंद्र शर्मा सुनवाई कर रहे थे। सिब्बल ने कोर्ट से पूछा कि धुबरी एसपी किस आधार पर किसी व्यक्ति को बांग्लादेशी नागरिक घोषित कर सकते हैं। क्या महिला को हिरासत में लेने के बाद किसी मैजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया? क्या कोर्ट इस पर भरोसा कर सकती है? सिबल यहीं पर नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि अनज को यह तक नहीं पता कि उसकी मां भारत में है या फिर बांग्लादेश भेज दी गई हैं। सरकार को अनज की मां की मौजूदा स्थिति के बारे में बताना चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने याचिका के तहत केंद्र सरकार का नोटिस जारी किया। अनज अली का यह भी कहना है कि ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ उसकी मां की याचिका 2017 से अब तक सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। 26 साल के अनज अली ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उसका दावा था कि उसकी मां मुनव्वरा बेवा को असम पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में रखा है। साथ ही देश में रातोंरात लोगों को बांग्लादेश भेज दिया जा रहा है।

मुनवरा बेवा को 17 मार्च 2016 को दुबरी फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित कर दिया था। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 28 फरवरी 2017 के आदेश में भी ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा था। इसके बाद बेवा ने सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी तब से अब तक यह मामला लंबित है और अब जब मोदी सरकार और असम की बीजेपी सरकार घुसपैठियों पर कार्यवाही कर रही है तब कुछ लोगों को तकलीफ हो रही है। लेकिन सवाल है कि इन लोगों के पास इतना पैसा कहां से आ रहा है जो वह कपिल सिब्बल जैसे इतने बड़े वकील को हायर कर रहे हैं।



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मोदी सरकार और देश हित के मुद्दे के हमेशा खिलाफ कपिल सिब्बल बार - बार सुप्रीम कोर्ट में
मोदी सरकार और देश हित के मुद्दे के हमेशा खिलाफ कपिल सिब्बल बार - बार सुप्रीम कोर्ट में

पीएम नरेंद्र मोदी अब देश हित के मुद्दे पर एक्शन मोड में हैं। पीएम मोदी ने साफ कर दिया है कि अब देश को धर्मशाला नहीं बनने देंगे। अब देश के संसाधनों पर देश के नागरिकों का ही हक होगा और हमारे देश में जो घुसपैठिए आ गए हैं, अब उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। लेकिन इस मुद्दे पर भी कुछ लोग मोदी सरकार के खिलाफ खड़े हैं।बांग्लादेश हमारा एक ऐसा पड़ोसी देश है जहां से काफी लोग आकर भारत में अवैध तरीके से रह रहे हैं। वह किसी ना किसी तरह से अवैध रूप से भारत में दाखिल होते हैं और भारत के सीमावर्ती इलाकों की डेमोग्राफी बदलने का काम करते हैं।

जिस पर आज तक किसी सरकार ने खुलकर संज्ञान नहीं लिया था। क्योंकि विपक्षी दलों के लोगों को तो हमेशा से ही एक ही डर सता रहा था कि यह चले गए तो हमारा वोट बैंक का क्या होगा? क्योंकि यह लोग जाली दस्तावेज बनाकर भारत में सुख भोगते रहे और भारत को अपराध की सूली पर चढ़ाते रहे।

लेकिन बीजेपी की असम सरकार इन्हें वापस उनके देश भेज रही है। तो कपिल सिब्बल सरी के नेताओं को दर्द हो रहा है और वह इसका विरोध कर रहे हैं। ऐसा ही कुछ हुआ है।कपिल सिब्बल एक ऐसा बयान दे चुके हैं कि देश की सबसे बड़ी सुप्रीम अदालत में वह कहते हैं कि उसे बांग्लादेशी महिला को बाहर निकाल दिया। उसे बांग्लादेश भेज दिया गया। यह दलील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में मोनोवरा बेवा नाम की एक बांग्लादेशी महिला के पक्ष में दी है। इस महिला को असम पुलिस ने उनके मुल्क वापस भेज दिया है। उसके बेटे अनज अली ने इसे चुनौती दी है। एक रिपोर्ट के अनुसार सिब्बल की इस दलील के जवाब में जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने यह कहा कि यदि वह पहले से ही देश में नहीं है तो हम उसे वापस नहीं बुला सकते। इस महिला की पैरवी करते हुए सिब्बल ने ऑपरेशन पुशबैक की वैधता पर भी सवाल उठाए।

वैसे यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह से देश के मामले पर कोर्ट में कपिल सिब्बल खड़े हो गए हो। राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद में मस्जिद की पैरवी हो, वफ का मामला हो। इस तरह के एक खास एजेंडे को भुनाने में कोर्ट के सामने काला कोट पहने कपिल सिब्बल का चेहरा उठकर सामने आ जाता है। मोदी सरकार और बीजेपी के खिलाफ हर मामले को लेकर कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट पहुंचते हैं। इसी तरह सुप्रीम कोर्ट में मुनवरा बेवा के बेटे अनच अली की याचिका के लिए कपिल सिब्बल कोर्ट में खड़े हुए। अनज ने याचिका में आरोप लगाया कि पुलिस ने उसकी मां को जबरन बांग्लादेश भेज दिया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया। कोर्ट से सिब्बल ने कहा कि महिला मुनवरा बेवा को धुबरी पुलिस ने उठाया और जबरन बांग्लादेश भेज दिया। याचिका पर जस्टिस संजय करोल और सतीश चंद्र शर्मा सुनवाई कर रहे थे। सिब्बल ने कोर्ट से पूछा कि धुबरी एसपी किस आधार पर किसी व्यक्ति को बांग्लादेशी नागरिक घोषित कर सकते हैं। क्या महिला को हिरासत में लेने के बाद किसी मैजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया? क्या कोर्ट इस पर भरोसा कर सकती है? सिबल यहीं पर नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि अनज को यह तक नहीं पता कि उसकी मां भारत में है या फिर बांग्लादेश भेज दी गई हैं। सरकार को अनज की मां की मौजूदा स्थिति के बारे में बताना चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने याचिका के तहत केंद्र सरकार का नोटिस जारी किया। अनज अली का यह भी कहना है कि ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ उसकी मां की याचिका 2017 से अब तक सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। 26 साल के अनज अली ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उसका दावा था कि उसकी मां मुनव्वरा बेवा को असम पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में रखा है। साथ ही देश में रातोंरात लोगों को बांग्लादेश भेज दिया जा रहा है।

मुनवरा बेवा को 17 मार्च 2016 को दुबरी फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित कर दिया था। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 28 फरवरी 2017 के आदेश में भी ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा था। इसके बाद बेवा ने सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी तब से अब तक यह मामला लंबित है और अब जब मोदी सरकार और असम की बीजेपी सरकार घुसपैठियों पर कार्यवाही कर रही है तब कुछ लोगों को तकलीफ हो रही है। लेकिन सवाल है कि इन लोगों के पास इतना पैसा कहां से आ रहा है जो वह कपिल सिब्बल जैसे इतने बड़े वकील को हायर कर रहे हैं।



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पीएम नरेंद्र मोदी अब देश हित के मुद्दे पर एक्शन मोड में हैं। पीएम मोदी ने साफ कर दिया है कि अब देश को धर्मशाला नहीं बनने देंगे। अब देश के संसाधनों पर देश के नागरिकों का ही हक होगा और हमारे देश में जो घुसपैठिए आ गए हैं, अब उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। लेकिन इस मुद्दे पर भी कुछ लोग मोदी सरकार के खिलाफ खड़े हैं।बांग्लादेश हमारा एक ऐसा पड़ोसी देश है जहां से काफी लोग आकर भारत में अवैध तरीके से रह रहे हैं। वह किसी ना किसी तरह से अवैध रूप से भारत में दाखिल होते हैं और भारत के सीमावर्ती इलाकों की डेमोग्राफी बदलने का काम करते हैं।

जिस पर आज तक किसी सरकार ने खुलकर संज्ञान नहीं लिया था। क्योंकि विपक्षी दलों के लोगों को तो हमेशा से ही एक ही डर सता रहा था कि यह चले गए तो हमारा वोट बैंक का क्या होगा? क्योंकि यह लोग जाली दस्तावेज बनाकर भारत में सुख भोगते रहे और भारत को अपराध की सूली पर चढ़ाते रहे।

लेकिन बीजेपी की असम सरकार इन्हें वापस उनके देश भेज रही है। तो कपिल सिब्बल सरी के नेताओं को दर्द हो रहा है और वह इसका विरोध कर रहे हैं। ऐसा ही कुछ हुआ है।कपिल सिब्बल एक ऐसा बयान दे चुके हैं कि देश की सबसे बड़ी सुप्रीम अदालत में वह कहते हैं कि उसे बांग्लादेशी महिला को बाहर निकाल दिया। उसे बांग्लादेश भेज दिया गया। यह दलील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में मोनोवरा बेवा नाम की एक बांग्लादेशी महिला के पक्ष में दी है। इस महिला को असम पुलिस ने उनके मुल्क वापस भेज दिया है। उसके बेटे अनज अली ने इसे चुनौती दी है। एक रिपोर्ट के अनुसार सिब्बल की इस दलील के जवाब में जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने यह कहा कि यदि वह पहले से ही देश में नहीं है तो हम उसे वापस नहीं बुला सकते। इस महिला की पैरवी करते हुए सिब्बल ने ऑपरेशन पुशबैक की वैधता पर भी सवाल उठाए।

वैसे यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह से देश के मामले पर कोर्ट में कपिल सिब्बल खड़े हो गए हो। राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद में मस्जिद की पैरवी हो, वफ का मामला हो। इस तरह के एक खास एजेंडे को भुनाने में कोर्ट के सामने काला कोट पहने कपिल सिब्बल का चेहरा उठकर सामने आ जाता है। मोदी सरकार और बीजेपी के खिलाफ हर मामले को लेकर कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट पहुंचते हैं। इसी तरह सुप्रीम कोर्ट में मुनवरा बेवा के बेटे अनच अली की याचिका के लिए कपिल सिब्बल कोर्ट में खड़े हुए। अनज ने याचिका में आरोप लगाया कि पुलिस ने उसकी मां को जबरन बांग्लादेश भेज दिया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया। कोर्ट से सिब्बल ने कहा कि महिला मुनवरा बेवा को धुबरी पुलिस ने उठाया और जबरन बांग्लादेश भेज दिया। याचिका पर जस्टिस संजय करोल और सतीश चंद्र शर्मा सुनवाई कर रहे थे। सिब्बल ने कोर्ट से पूछा कि धुबरी एसपी किस आधार पर किसी व्यक्ति को बांग्लादेशी नागरिक घोषित कर सकते हैं। क्या महिला को हिरासत में लेने के बाद किसी मैजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया? क्या कोर्ट इस पर भरोसा कर सकती है? सिबल यहीं पर नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि अनज को यह तक नहीं पता कि उसकी मां भारत में है या फिर बांग्लादेश भेज दी गई हैं। सरकार को अनज की मां की मौजूदा स्थिति के बारे में बताना चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने याचिका के तहत केंद्र सरकार का नोटिस जारी किया। अनज अली का यह भी कहना है कि ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ उसकी मां की याचिका 2017 से अब तक सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। 26 साल के अनज अली ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उसका दावा था कि उसकी मां मुनव्वरा बेवा को असम पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में रखा है। साथ ही देश में रातोंरात लोगों को बांग्लादेश भेज दिया जा रहा है।

मुनवरा बेवा को 17 मार्च 2016 को दुबरी फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित कर दिया था। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 28 फरवरी 2017 के आदेश में भी ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा था। इसके बाद बेवा ने सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी तब से अब तक यह मामला लंबित है और अब जब मोदी सरकार और असम की बीजेपी सरकार घुसपैठियों पर कार्यवाही कर रही है तब कुछ लोगों को तकलीफ हो रही है। लेकिन सवाल है कि इन लोगों के पास इतना पैसा कहां से आ रहा है जो वह कपिल सिब्बल जैसे इतने बड़े वकील को हायर कर रहे हैं।



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जिस पर आज तक किसी सरकार ने खुलकर संज्ञान नहीं लिया था। क्योंकि विपक्षी दलों के लोगों को तो हमेशा से ही एक ही डर सता रहा था कि यह चले गए तो हमारा वोट बैंक का क्या होगा? क्योंकि यह लोग जाली दस्तावेज बनाकर भारत में सुख भोगते रहे और भारत को अपराध की सूली पर चढ़ाते रहे।

लेकिन बीजेपी की असम सरकार इन्हें वापस उनके देश भेज रही है। तो कपिल सिब्बल सरी के नेताओं को दर्द हो रहा है और वह इसका विरोध कर रहे हैं। ऐसा ही कुछ हुआ है।कपिल सिब्बल एक ऐसा बयान दे चुके हैं कि देश की सबसे बड़ी सुप्रीम अदालत में वह कहते हैं कि उसे बांग्लादेशी महिला को बाहर निकाल दिया। उसे बांग्लादेश भेज दिया गया। यह दलील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में मोनोवरा बेवा नाम की एक बांग्लादेशी महिला के पक्ष में दी है। इस महिला को असम पुलिस ने उनके मुल्क वापस भेज दिया है। उसके बेटे अनज अली ने इसे चुनौती दी है। एक रिपोर्ट के अनुसार सिब्बल की इस दलील के जवाब में जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने यह कहा कि यदि वह पहले से ही देश में नहीं है तो हम उसे वापस नहीं बुला सकते। इस महिला की पैरवी करते हुए सिब्बल ने ऑपरेशन पुशबैक की वैधता पर भी सवाल उठाए।

वैसे यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह से देश के मामले पर कोर्ट में कपिल सिब्बल खड़े हो गए हो। राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद में मस्जिद की पैरवी हो, वफ का मामला हो। इस तरह के एक खास एजेंडे को भुनाने में कोर्ट के सामने काला कोट पहने कपिल सिब्बल का चेहरा उठकर सामने आ जाता है। मोदी सरकार और बीजेपी के खिलाफ हर मामले को लेकर कपिल सिब्बल सुप्रीम कोर्ट पहुंचते हैं। इसी तरह सुप्रीम कोर्ट में मुनवरा बेवा के बेटे अनच अली की याचिका के लिए कपिल सिब्बल कोर्ट में खड़े हुए। अनज ने याचिका में आरोप लगाया कि पुलिस ने उसकी मां को जबरन बांग्लादेश भेज दिया। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी किया। कोर्ट से सिब्बल ने कहा कि महिला मुनवरा बेवा को धुबरी पुलिस ने उठाया और जबरन बांग्लादेश भेज दिया। याचिका पर जस्टिस संजय करोल और सतीश चंद्र शर्मा सुनवाई कर रहे थे। सिब्बल ने कोर्ट से पूछा कि धुबरी एसपी किस आधार पर किसी व्यक्ति को बांग्लादेशी नागरिक घोषित कर सकते हैं। क्या महिला को हिरासत में लेने के बाद किसी मैजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया? क्या कोर्ट इस पर भरोसा कर सकती है? सिबल यहीं पर नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा कि अनज को यह तक नहीं पता कि उसकी मां भारत में है या फिर बांग्लादेश भेज दी गई हैं। सरकार को अनज की मां की मौजूदा स्थिति के बारे में बताना चाहिए। इसके बाद कोर्ट ने याचिका के तहत केंद्र सरकार का नोटिस जारी किया। अनज अली का यह भी कहना है कि ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ उसकी मां की याचिका 2017 से अब तक सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। 26 साल के अनज अली ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। उसका दावा था कि उसकी मां मुनव्वरा बेवा को असम पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में रखा है। साथ ही देश में रातोंरात लोगों को बांग्लादेश भेज दिया जा रहा है।

मुनवरा बेवा को 17 मार्च 2016 को दुबरी फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल ने विदेशी घोषित कर दिया था। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 28 फरवरी 2017 के आदेश में भी ट्रिब्यूनल के आदेश को बरकरार रखा था। इसके बाद बेवा ने सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी तब से अब तक यह मामला लंबित है और अब जब मोदी सरकार और असम की बीजेपी सरकार घुसपैठियों पर कार्यवाही कर रही है तब कुछ लोगों को तकलीफ हो रही है। लेकिन सवाल है कि इन लोगों के पास इतना पैसा कहां से आ रहा है जो वह कपिल सिब्बल जैसे इतने बड़े वकील को हायर कर रहे हैं।


Tuesday, June 3, 2025

लालू यादव के खिलाफ ट्रायल अंतिम घड़ी में क्या सुप्रीम कोर्ट में सिबल लालू को मौज दिलाएगा ?

 लालू यादव के खिलाफ यह पूरा ट्रायल का मामला अंतिम घड़ी में लालू यादव के खिलाफ चार्शीटें दाखिल हो चुकी हुई है। कोर्ट का संज्ञान है। अब इस मामले में लालू यादव ही नहीं लालू यादव की पत्नी राबरी देवी, डिप्टी सीएम पूर्व डिप्टी सीएम रहा बेटा तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव,षा भारती समेत लालू का पूरा कुवा जेल जाना है। क्योंकि लालू ने अपने रेल मंत्री रहते हुए जो इतना भ्रष्टाचार किया उसका पूरा मौ पत्नियों के नाम पर अथाह संपत्ति बनाई

लालू गरीबों का मसीहा बना सामाजिक न्याय का नायक बना और लूट का धंधा करता रहा। यह आईआरसीटीसी घोटाला यह लैंड फॉर जॉब घोटाला लालू के उन पापों की बानगी है। उन पापों की कहानी है जो बताता है एक सफेदपश नेता किस तरह से जनता को मूर्ख बनाते हुए लूट का धंधा करता है। जातिवाद के नशे में देश की जनता को बरगलाता है और फिर अपने पूरे खानदान और पूरे पूर्णवे के लिए लूट का राज स्थापित करता है। लालू प्रसाद यादव पांच मामले का सजायाफ्ता अपराधी है। लेकिन सिब्बल की वजह से मौज ले रहा है।

वही लालू प्रसाद यादव अब जब अंडर ट्रायल दो मामले में जेल जाने के करीब है तो फिर इस देश के कानून को ठेंगा दिखाने की तैयारी चल रही है। मतलब ट्रायल अंतिम दौर में है और सिब्बल कोर्ट से ये कहने ला हैं कि इसकी एफआईआर ही रद्द कर दो। ये कहानी ही गलत है। तो क्या सिबल वो सब खेल करवा पाएंगे जो लालू यादव चाहते हैं। यही सबसे महत्वपूर्ण है। और देखना दिलचस्प ये है कि सिबल अपनी ताकत सुप्रीम कोर्ट में किस तरह से दिखाते हैं। क्योंकि आम आदमी का मानना है कि सिब्बल की हाई कोर्ट में तो नहीं चलेगी लेकिन सुप्रीम कोर्ट सिबल कोर्ट बनकर सिबल को न्याय दिलाएगा। क्या सिबल लालू को मौज दिलाएगा।

देश की सबसे बड़ी अदालत का अहंकार कि वो सुप्रीम है

इस बात को समझिए कि देश की सबसे बड़ी अदालत जो इस अहंकार में थी कि वो सुप्रीम है,जो इस अहंकार में थी कि उसका कुछ भी नहीं हो सकता, जो इस अहंकार में थी कि वो 142 के तहत उसके पास सुप्रीम अधिकार है। तो एक अनुच्छेद 142 के तहत जस्टिस वर्मा के खिलाफ कारवाई क्यों नहीं की आपने? जस्टिस वर्मा के खिलाफ साक्ष्य जो कुछ भी था वो कोर्ट के पास उस समय भी था अब भी है। लेकिन एक याचिका दाखिल कर जब सुप्रीम कोर्ट से कहा गया कि आप एफआईआर क्यों नहीं दाखिल का आदेश क्यों नहीं देते? तो कहा जाओ प्रधानमंत्री से बात करो राष्ट्रपति से बात करो।

जिस राष्ट्रपति को आप अपना घरेलू नौकर समझ के आदेश जारी कर देते हैं। उस राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से आप कहते हैं कि जाओ उसके पास जाओ और उससे कहो एफआईआर दर्ज करने के लिए। संसद द्वारा पास कानून को आप रौंद देते हैं और कहते हैं जाओ प्रधानमंत्री से एफआईआर दर्ज करने के लिए। दरअसल देश अब इस खेल को समझ चुका है। इस जस्टिस वर्मा के परम पाप को इस इतने बड़े पाप को छुपाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूरी कोशिश कर ली और इस देश को पता चल गया कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रेस रिलीज जारी करके कह दिया कि टाइम्स ऑफ इंडिया की छपी रिपोर्ट जो है वो अफवाह है।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट कोअंदाजा नहीं था कि अमित शाह घाग है। दिल्ली पुलिस गृह मंत्रालय के अंदर में आता है और तय सी बात है कि जब मामला हाई कोर्ट के जज का होगा तो ये पूरे मामले को लेकर दिल्ली पुलिस ने गृह मंत्री से बात नहीं की होगी इसकी संभावना कतई नहीं है। इसका मतलब है कि गृह मंत्री अमित शाह ने इसकी पूरी तैयारी की और तभी जब पूरा मामला ठंडा पड़ता नजर आया। सुप्रीम कोर्ट ने इसको अपवाह साबित कर दिया तो चुपके से एक पेन ड्राइव थमाया गया और इस पेनड्राइव में वो सब कुछ था जिसको झुठलाना मुश्किल था। सुप्रीम कोर्ट यह भी नहीं कर सकती थी कि उस पेन ड्राइव को दबा देती क्योंकि पेन ड्राइव की कॉपी गृह मंत्रालय के पास होगा। पेन ड्राइव की कॉपी दिल्ली पुलिस के कमिश्नर के पास होगा। इस बात का अंदाजा दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को था।

जिस जुडिशरी से इंसाफ की उम्मीद की जा रही थी उसने कह दिया कि सब अफवाह है। लेकिन एक प्रेशर बना और जुडिशियल आयोग बनाया गया। न्यायिक आयोग बनाया गया। उस आयोग ने साफ-साफ कह दिया कि जस्टिस वर्मा के घर नोटों की गड्डियां जली हुई मिली और जस्टिस वर्मा को सब कुछ पता था। जस्टिस वर्मा इस केस को दबाना चाह रहे थे। इसीलिए सुप्रीम कोर्ट को कमेटी ने कहा कि इस आदमी पर FIR किया जाना चाहिए और इस इस आदमी को इस्तीफा देना चाहिए। जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा तक नहीं दिया और अब पूरा मामला संसद के हवाले है। अब देश की सुप्रीम संसद जो है वो तय करेगी कि जस्टिस वर्मा का क्या हो। इतिहास में आज तक किसी किसी न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग चलाया नहीं जा सका। अंतिम अंजाम तक नहीं पहुंचा। ये जस्टिस वर्मा पहला शख्स होगा क्योंकि इस मामले में विपक्ष भी सरकार के खिलाफ नहीं जा सकती और सुप्रीम कोर्ट का तो क्या होगा जुडिशरी का क्या होगा जस्टिस जस्टिस वर्मा का सच सामने आएगा आखिर इसके पीछे कितने लोग हैं क्या सैकड़ों करोड़ रुपए सिर्फ जस्टिस वर्मा के हो सकते हैं तो पता चलेगा क्या इसके पीछे घाघा कोर्ट फिक्सरों की भी भूमिका है।

India at the Crossroads: Reservation Politics, Minority Appeasement, Islamic Terror & Modi's Political Future

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