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Thursday, January 8, 2026

लखनऊ की एमपी एमएलए कोर्ट में राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता- विग्नेश ने सबूतों को दिखाया

लखनऊ की एमपी एमएलए कोर्ट में राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता- विग्नेश ने सबूतों को दिखाया
लखनऊ की एमपी एमएलए कोर्ट में राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता- विग्नेश ने सबूतों को दिखाया

 आखिरकार 6 जनवरी 2026 के दिन लखनऊ की एमपी एमएलए कोर्ट में राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़े मामले में उन तमाम सबूतों को अदालत में पेश कर जज साहब के सामने बकायदा बताया गया जो सबूत यह बात साबित कर रहे हैं कि राहुल गांधी ना सिर्फ ब्रिटिश नागरिक हैं बल्कि पिछले 20 सालों से भारत की संसद के एक सदस्य के तौर पर किस किस तरह राहुल गांधी भारत सरकार को धोखा दे रहे हैं और भारत में भारत के कानूनों का, पासपोर्ट कानून का, भारत की संसद के कानून का हर तरीके से उल्लंघन कर रहे हैं। और खास बात यह रही कि बीते दिन यानी कि 6 जनवरी के दिन इस मामले में बहस खुद अधिवक्ता और इस मामले के याचिकाकर्ता भारतीय जनता पार्टी के नेता एस विग्नेश शिसे ने की।


 2 घंटे तक उन्होंने जज साहब के सामने जबरदस्त तरीके से बहस की और उस पूरी बहस में उन्होंने एक-एक कर उन तमाम सबूतों को दिखाया जिन सबूतों को देख जाने के बाद राहुल गांधी की तरफ से खड़े हुए अधिवक्ता भी कांप गए। पूरी कहानी समझाऊंगा और बताऊंगा कि इसके बाद अब अदालत कौन सा बड़ा फैसला सुनाने वाली है। राहुल गांधी की नागरिकता के मामले में जो सुनवाई होनी थी वो सुनवाई पहले तो रायबरेली के एमपी एमएलए कोर्ट में होनी थी। लेकिन रायबरेली एमपी एमएलए कोर्ट में लगातार भाजपा के जो कार्यकर्ता हैं, नेता हैं और इस पूरे मामले में याचिका करते हैं अग्नेश एस वेग्नेश से उन्हें धमकाया जा रहा था। बार-बार डराया जा रहा था। यहां तक कि जो पिछले महीने हुआ था वहां पर पूरा सुनवाई का कार्यक्रम वहां तो कम से कम 100 से 200 कांग्रेसी वकीलों ने उनके ऊपर हमले तक की कोशिश की थी। लेकिन इंटेलिजेंस की मदद से उन्हें यह बात पता चल गई और उन्होंने रायबरेली से अपना केस ट्रांसफर करवाकर लखनऊ की एमपी एमएलए कोर्ट में लगाया था। अब एमपी एमएलए कोर्ट में लगातार बहस चल रही है। बीते दिनों जो बहस हुई उसमें एस विग्नेश शिर खुद बहस करने के लिए खड़े हुए। दो घंटे उन्होंने जज साहब के सामने वो तमाम सबूत दिखाए और सबूतों के साथ यह भी बताया कि किस तरह राहुल गांधी इस पूरे मामले में कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। किस तरह वो भर्जी नागरिकता के मामले में आरोपी हैं। एस विग्नेश ने दो सबूत सबसे अहम पेश किए और सबसे चौंकाने वाला सबूत जो निकल कर आया उसने पूरी अदालत को हिला कर रख दिया। एस विग्नेश ने बताया कि राहुल गांधी और राहुल विंसी यह दो नाम नहीं है बल्कि यह दोनों एक ही शख्स हैं जो इस वक्त

रायबरेली से सांसद हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष हैं और लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं राहुल गांधी उनका ही नाम राहुल विंसी है। और इस पूरी बात को साबित करने के लिए एस विग्नेश ने जो सबूत पेश किए उसमें उन्होंने बार्कले बैंक अकाउंट्स की डिटेल पूरी दिखाई है अदालत को जिसमें बकायदा राहुल विंसी के नाम पर बैंक अकाउंट है। यूके कैंब्रिज यूनिवर्सिटी का उन्होंने पूरा रिकॉर्ड दिखाया। जिस रिकॉर्ड में बकायदा राहुल विंसी के नाम से राहुल गांधी दाखिला लेते हुए नजर आए। और इसके अलावा विग्नेश ने उन तमाम ईमेल्स को भी दिखाया जो ब्रिटेन की गवर्नमेंट से उन्हें मिले हैं। यूके गवर्नमेंट से उन्हें मिले हैं। इसके अलावा जो यूके की गवर्नमेंट से, वहां से पासपोर्ट डिपार्टमेंट से, इमीग्रेशन डिपार्टमेंट से, सिटीजनशिप डिपार्टमेंट से और भारत के गृह मंत्रालय से जो जो उन्होंने सबूत इकट्ठा किए थे। इन तमाम सबूतों को एस विग्नेश ने अदालत के सामने दिखाया और उन्होंने एक-एक कर राहुल के गुनाह गिनाए। एस विग्नेश ने अदालत में यह भी कहा कि राहुल के पास दो नागरिकता हैं।

उनके पास भारत की भी नागरिकता है और उनके पास ब्रिटेन की भी नागरिकता है और भारत का कानून दोहरी नागरिकता की इजाजत नहीं देता है। इसका मतलब है कि राहुल गांधी की जो भारतीय नागरिकता है वो तत्काल प्रभाव से रद्द नहीं की जानी चाहिए बल्कि इस रद्द करने के साथ-साथ राहुल गांधी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर भी दर्ज की जानी चाहिए। क्योंकि यह जो पूरी बहस चल रही है, यह सिर्फ राहुल गांधी की नागरिकता साबित करने के लिए बहस नहीं चल रही है। यह जो अदालत में मामला एस विग्नेश ने लगाया है, यह सिर्फ राहुल की नागरिकता साबित करने का मामला नहीं है। बल्कि यह पूरा मामला राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए लगाया गया है।

यह जो पूरी सुनवाई चल रही है अदालत में इस सुनवाई के अंत में अदालत से यह मांग की जा रही है कि आप राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दीजिए और एफआईआर ऐसी छोटी-मोटी धाराओं में नहीं एफआईआर उन धाराओं में दर्ज होगी जिसमें एस विग्नेश ने जिक्र किया है कि राहुल गांधी ने जो ऑफिस के सीक्रेट्स होते हैं उन्हें भी दुश्मन देशों को दिया है। उन्होंने भारत में एक फर्जी नागरिक के तौर पर संसद तक का सफर तय किया है। और यह वो किस एवज पर कह रहे हैं? विग्नेश शिसिर का कहना है कि जब राहुल गांधी ब्रिटेन की नागरिकता ले चुके थे और उसके बाद जो उन्होंने भारत में सांसद पद का चुनाव लड़ते हुए शपथ पत्र दिया था। उसमें उन्होंने अपने आप को भारतीय नागरिक दिखाया है। इसका मतलब राहुल ने सीधे तौर पर फ्रॉड किया। और अगर यहां पर फ्रॉड हुआ है तो इसके खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज होना चाहिए। इसके अलावा 2003 में जिस कंपनी में राहुल गांधी डायरेक्टर थे ब्रिटेन में बेकप्स बकायदा उसके भी सबूत यहां पर पेश किए गए और जबरदस्त तरीके से बहस हुई और यह पहली बार नहीं है जब अदालत में राहुल के मामले में बहस हो रही है। लेकिन इस बार मामला बेहद रोचक हो चुका है। मामला बेहद महत्वपूर्ण स्थिति पर पहुंच गया है। क्योंकि अब से पहले सबूत पेश नहीं किए गए और एक बात और जब रायबरेली में एस विग्नेश से पहुंचे हुए थे सुनवाई के लिए तब वहां पर उन्होंने एक बात का खुलासा किया था और उन्होंने कहा था कि क्या राहुल का विदेश में कोई परिवार भी है क्योंकि इस बात की भी उन्होंने आशंका जाहिर की है कि राहुल भारत में तो अपने आप को अविवाहित दिखाते हैं जो वह शपथ पत्र देते हैं चुनाव के दौरान उसमें राहुल का कोई भी बच्चा या कोई भी पतिपत्नी पत्नी ऐसा कोई संबंध नहीं आता लेकिन विग्नेश शिसिर का कहीं ना कहीं यह दावा है कि राहुल इस मामले में भी झूठ बोल रहे हैं। राहुल भारत को गुमराह कर रहे हैं और फर्जी शपथ कहीं ना कहीं लिखकर वह चुनाव लड़ते हैं। उन्होंने पिछली बार भी यह कहा था कि विदेश में राहुल का कोई परिवार है। मैं यह सवाल भी राहुल से पूछना चाहता हूं। यानी अब स्पष्ट हो गया है। हालांकि बीते दिन की जो सुनवाई थी, सुनवाई अभी जारी है। सुनवाई लगातार चल रही है और इस सुनवाई के अंत में अदालत राहुल को पेश होने का वारंट जारी कर सकती है।

 राहुल से सीधे इन सबूतों के बचाव में कोई पक्ष रखना है तो उसके लिए राहुल को बुलाया जा सकता है और सीधे सवाल किया जा सकता है कि आप किस तरह से यह साबित करेंगे कि आपके खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं वो झूठे हैं। अगर राहुल यह साबित नहीं कर पाते हैं और जो राहुल के मामले में दिखाए जा रहे सबूत पेश किए गए अदालत में वह तमाम सबूत सच्चे पाए जाते हैं तो अदालत राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश बहुत जल्दी सुना सकती है क्योंकि अब मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी है। सारे सबूत पेश किए जा चुके हैं। खुद गवाह विग्नेश शिसिर हैं। अदालत इसके बाद राहुल का पक्ष सुनेगी और पक्ष सुनने पर 


अगर राहुल साबित नहीं कर पाते हैं। राहुल अपने आप को बेकसूर साबित नहीं कर पाते हैं। अपने आप को भारतीय नागरिक बस साबित नहीं कर पाते हैं। तो एक बात तय है कि ना सिर्फ अब राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी बल्कि राहुल की सांसदी भी जाएगी और राहुल गांधी के खिलाफ भारत में अब तक का सबसे बड़ा मुकदमा भी दर्ज होगा और यह मुकदमा भारत के इतिहास में पहले कभी दर्ज नहीं हुआ होगा क्योंकि राहुल 20 सालों से भारत के सांसद हैं। और अगर गाज गिरेगी तो अब संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक और हर अदालत में राहुल का बच पाना बहुत मुश्किल हो जाएगा। 
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January 08, 2026 at 10:43AM
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January 08, 2026 at 11:13AM

लखनऊ की एमपी एमएलए कोर्ट में राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता- विग्नेश ने सबूतों को दिखाया

लखनऊ की एमपी एमएलए कोर्ट में राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता- विग्नेश ने सबूतों को दिखाया

 आखिरकार 6 जनवरी 2026 के दिन लखनऊ की एमपी एमएलए कोर्ट में राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़े मामले में उन तमाम सबूतों को अदालत में पेश कर जज साहब के सामने बकायदा बताया गया जो सबूत यह बात साबित कर रहे हैं कि राहुल गांधी ना सिर्फ ब्रिटिश नागरिक हैं बल्कि पिछले 20 सालों से भारत की संसद के एक सदस्य के तौर पर किस किस तरह राहुल गांधी भारत सरकार को धोखा दे रहे हैं और भारत में भारत के कानूनों का, पासपोर्ट कानून का, भारत की संसद के कानून का हर तरीके से उल्लंघन कर रहे हैं। और खास बात यह रही कि बीते दिन यानी कि 6 जनवरी के दिन इस मामले में बहस खुद अधिवक्ता और इस मामले के याचिकाकर्ता भारतीय जनता पार्टी के नेता एस विग्नेश शिसे ने की।


 2 घंटे तक उन्होंने जज साहब के सामने जबरदस्त तरीके से बहस की और उस पूरी बहस में उन्होंने एक-एक कर उन तमाम सबूतों को दिखाया जिन सबूतों को देख जाने के बाद राहुल गांधी की तरफ से खड़े हुए अधिवक्ता भी कांप गए। पूरी कहानी समझाऊंगा और बताऊंगा कि इसके बाद अब अदालत कौन सा बड़ा फैसला सुनाने वाली है। राहुल गांधी की नागरिकता के मामले में जो सुनवाई होनी थी वो सुनवाई पहले तो रायबरेली के एमपी एमएलए कोर्ट में होनी थी। लेकिन रायबरेली एमपी एमएलए कोर्ट में लगातार भाजपा के जो कार्यकर्ता हैं, नेता हैं और इस पूरे मामले में याचिका करते हैं अग्नेश एस वेग्नेश से उन्हें धमकाया जा रहा था। बार-बार डराया जा रहा था। यहां तक कि जो पिछले महीने हुआ था वहां पर पूरा सुनवाई का कार्यक्रम वहां तो कम से कम 100 से 200 कांग्रेसी वकीलों ने उनके ऊपर हमले तक की कोशिश की थी। लेकिन इंटेलिजेंस की मदद से उन्हें यह बात पता चल गई और उन्होंने रायबरेली से अपना केस ट्रांसफर करवाकर लखनऊ की एमपी एमएलए कोर्ट में लगाया था। अब एमपी एमएलए कोर्ट में लगातार बहस चल रही है। बीते दिनों जो बहस हुई उसमें एस विग्नेश शिर खुद बहस करने के लिए खड़े हुए। दो घंटे उन्होंने जज साहब के सामने वो तमाम सबूत दिखाए और सबूतों के साथ यह भी बताया कि किस तरह राहुल गांधी इस पूरे मामले में कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। किस तरह वो भर्जी नागरिकता के मामले में आरोपी हैं। एस विग्नेश ने दो सबूत सबसे अहम पेश किए और सबसे चौंकाने वाला सबूत जो निकल कर आया उसने पूरी अदालत को हिला कर रख दिया। एस विग्नेश ने बताया कि राहुल गांधी और राहुल विंसी यह दो नाम नहीं है बल्कि यह दोनों एक ही शख्स हैं जो इस वक्त

रायबरेली से सांसद हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष हैं और लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं राहुल गांधी उनका ही नाम राहुल विंसी है। और इस पूरी बात को साबित करने के लिए एस विग्नेश ने जो सबूत पेश किए उसमें उन्होंने बार्कले बैंक अकाउंट्स की डिटेल पूरी दिखाई है अदालत को जिसमें बकायदा राहुल विंसी के नाम पर बैंक अकाउंट है। यूके कैंब्रिज यूनिवर्सिटी का उन्होंने पूरा रिकॉर्ड दिखाया। जिस रिकॉर्ड में बकायदा राहुल विंसी के नाम से राहुल गांधी दाखिला लेते हुए नजर आए। और इसके अलावा विग्नेश ने उन तमाम ईमेल्स को भी दिखाया जो ब्रिटेन की गवर्नमेंट से उन्हें मिले हैं। यूके गवर्नमेंट से उन्हें मिले हैं। इसके अलावा जो यूके की गवर्नमेंट से, वहां से पासपोर्ट डिपार्टमेंट से, इमीग्रेशन डिपार्टमेंट से, सिटीजनशिप डिपार्टमेंट से और भारत के गृह मंत्रालय से जो जो उन्होंने सबूत इकट्ठा किए थे। इन तमाम सबूतों को एस विग्नेश ने अदालत के सामने दिखाया और उन्होंने एक-एक कर राहुल के गुनाह गिनाए। एस विग्नेश ने अदालत में यह भी कहा कि राहुल के पास दो नागरिकता हैं।

उनके पास भारत की भी नागरिकता है और उनके पास ब्रिटेन की भी नागरिकता है और भारत का कानून दोहरी नागरिकता की इजाजत नहीं देता है। इसका मतलब है कि राहुल गांधी की जो भारतीय नागरिकता है वो तत्काल प्रभाव से रद्द नहीं की जानी चाहिए बल्कि इस रद्द करने के साथ-साथ राहुल गांधी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर भी दर्ज की जानी चाहिए। क्योंकि यह जो पूरी बहस चल रही है, यह सिर्फ राहुल गांधी की नागरिकता साबित करने के लिए बहस नहीं चल रही है। यह जो अदालत में मामला एस विग्नेश ने लगाया है, यह सिर्फ राहुल की नागरिकता साबित करने का मामला नहीं है। बल्कि यह पूरा मामला राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए लगाया गया है।

यह जो पूरी सुनवाई चल रही है अदालत में इस सुनवाई के अंत में अदालत से यह मांग की जा रही है कि आप राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दीजिए और एफआईआर ऐसी छोटी-मोटी धाराओं में नहीं एफआईआर उन धाराओं में दर्ज होगी जिसमें एस विग्नेश ने जिक्र किया है कि राहुल गांधी ने जो ऑफिस के सीक्रेट्स होते हैं उन्हें भी दुश्मन देशों को दिया है। उन्होंने भारत में एक फर्जी नागरिक के तौर पर संसद तक का सफर तय किया है। और यह वो किस एवज पर कह रहे हैं? विग्नेश शिसिर का कहना है कि जब राहुल गांधी ब्रिटेन की नागरिकता ले चुके थे और उसके बाद जो उन्होंने भारत में सांसद पद का चुनाव लड़ते हुए शपथ पत्र दिया था। उसमें उन्होंने अपने आप को भारतीय नागरिक दिखाया है। इसका मतलब राहुल ने सीधे तौर पर फ्रॉड किया। और अगर यहां पर फ्रॉड हुआ है तो इसके खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज होना चाहिए। इसके अलावा 2003 में जिस कंपनी में राहुल गांधी डायरेक्टर थे ब्रिटेन में बेकप्स बकायदा उसके भी सबूत यहां पर पेश किए गए और जबरदस्त तरीके से बहस हुई और यह पहली बार नहीं है जब अदालत में राहुल के मामले में बहस हो रही है। लेकिन इस बार मामला बेहद रोचक हो चुका है। मामला बेहद महत्वपूर्ण स्थिति पर पहुंच गया है। क्योंकि अब से पहले सबूत पेश नहीं किए गए और एक बात और जब रायबरेली में एस विग्नेश से पहुंचे हुए थे सुनवाई के लिए तब वहां पर उन्होंने एक बात का खुलासा किया था और उन्होंने कहा था कि क्या राहुल का विदेश में कोई परिवार भी है क्योंकि इस बात की भी उन्होंने आशंका जाहिर की है कि राहुल भारत में तो अपने आप को अविवाहित दिखाते हैं जो वह शपथ पत्र देते हैं चुनाव के दौरान उसमें राहुल का कोई भी बच्चा या कोई भी पतिपत्नी पत्नी ऐसा कोई संबंध नहीं आता लेकिन विग्नेश शिसिर का कहीं ना कहीं यह दावा है कि राहुल इस मामले में भी झूठ बोल रहे हैं। राहुल भारत को गुमराह कर रहे हैं और फर्जी शपथ कहीं ना कहीं लिखकर वह चुनाव लड़ते हैं। उन्होंने पिछली बार भी यह कहा था कि विदेश में राहुल का कोई परिवार है। मैं यह सवाल भी राहुल से पूछना चाहता हूं। यानी अब स्पष्ट हो गया है। हालांकि बीते दिन की जो सुनवाई थी, सुनवाई अभी जारी है। सुनवाई लगातार चल रही है और इस सुनवाई के अंत में अदालत राहुल को पेश होने का वारंट जारी कर सकती है।

 राहुल से सीधे इन सबूतों के बचाव में कोई पक्ष रखना है तो उसके लिए राहुल को बुलाया जा सकता है और सीधे सवाल किया जा सकता है कि आप किस तरह से यह साबित करेंगे कि आपके खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं वो झूठे हैं। अगर राहुल यह साबित नहीं कर पाते हैं और जो राहुल के मामले में दिखाए जा रहे सबूत पेश किए गए अदालत में वह तमाम सबूत सच्चे पाए जाते हैं तो अदालत राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश बहुत जल्दी सुना सकती है क्योंकि अब मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी है। सारे सबूत पेश किए जा चुके हैं। खुद गवाह विग्नेश शिसिर हैं। अदालत इसके बाद राहुल का पक्ष सुनेगी और पक्ष सुनने पर 


अगर राहुल साबित नहीं कर पाते हैं। राहुल अपने आप को बेकसूर साबित नहीं कर पाते हैं। अपने आप को भारतीय नागरिक बस साबित नहीं कर पाते हैं। तो एक बात तय है कि ना सिर्फ अब राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी बल्कि राहुल की सांसदी भी जाएगी और राहुल गांधी के खिलाफ भारत में अब तक का सबसे बड़ा मुकदमा भी दर्ज होगा और यह मुकदमा भारत के इतिहास में पहले कभी दर्ज नहीं हुआ होगा क्योंकि राहुल 20 सालों से भारत के सांसद हैं। और अगर गाज गिरेगी तो अब संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक और हर अदालत में राहुल का बच पाना बहुत मुश्किल हो जाएगा। 
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January 08, 2026 at 10:43AM

RAHUL GANDHI | BRITISH CITIZEN | EVIDENCE PROVEN



 

लखनऊ की एमपी एमएलए कोर्ट में राहुल गांधी की ब्रिटिश नागरिकता- विग्नेश ने सबूतों को दिखाया

 आखिरकार 6 जनवरी 2026 के दिन लखनऊ की एमपी एमएलए कोर्ट में राहुल गांधी की नागरिकता से जुड़े मामले में उन तमाम सबूतों को अदालत में पेश कर जज साहब के सामने बकायदा बताया गया जो सबूत यह बात साबित कर रहे हैं कि राहुल गांधी ना सिर्फ ब्रिटिश नागरिक हैं बल्कि पिछले 20 सालों से भारत की संसद के एक सदस्य के तौर पर किस किस तरह राहुल गांधी भारत सरकार को धोखा दे रहे हैं और भारत में भारत के कानूनों का, पासपोर्ट कानून का, भारत की संसद के कानून का हर तरीके से उल्लंघन कर रहे हैं। और खास बात यह रही कि बीते दिन यानी कि 6 जनवरी के दिन इस मामले में बहस खुद अधिवक्ता और इस मामले के याचिकाकर्ता भारतीय जनता पार्टी के नेता एस विग्नेश शिसे ने की।


 2 घंटे तक उन्होंने जज साहब के सामने जबरदस्त तरीके से बहस की और उस पूरी बहस में उन्होंने एक-एक कर उन तमाम सबूतों को दिखाया जिन सबूतों को देख जाने के बाद राहुल गांधी की तरफ से खड़े हुए अधिवक्ता भी कांप गए। पूरी कहानी समझाऊंगा और बताऊंगा कि इसके बाद अब अदालत कौन सा बड़ा फैसला सुनाने वाली है। राहुल गांधी की नागरिकता के मामले में जो सुनवाई होनी थी वो सुनवाई पहले तो रायबरेली के एमपी एमएलए कोर्ट में होनी थी। लेकिन रायबरेली एमपी एमएलए कोर्ट में लगातार भाजपा के जो कार्यकर्ता हैं, नेता हैं और इस पूरे मामले में याचिका करते हैं अग्नेश एस वेग्नेश से उन्हें धमकाया जा रहा था। बार-बार डराया जा रहा था। यहां तक कि जो पिछले महीने हुआ था वहां पर पूरा सुनवाई का कार्यक्रम वहां तो कम से कम 100 से 200 कांग्रेसी वकीलों ने उनके ऊपर हमले तक की कोशिश की थी। लेकिन इंटेलिजेंस की मदद से उन्हें यह बात पता चल गई और उन्होंने रायबरेली से अपना केस ट्रांसफर करवाकर लखनऊ की एमपी एमएलए कोर्ट में लगाया था। अब एमपी एमएलए कोर्ट में लगातार बहस चल रही है। बीते दिनों जो बहस हुई उसमें एस विग्नेश शिर खुद बहस करने के लिए खड़े हुए। दो घंटे उन्होंने जज साहब के सामने वो तमाम सबूत दिखाए और सबूतों के साथ यह भी बताया कि किस तरह राहुल गांधी इस पूरे मामले में कानून का उल्लंघन कर रहे हैं। किस तरह वो भर्जी नागरिकता के मामले में आरोपी हैं। एस विग्नेश ने दो सबूत सबसे अहम पेश किए और सबसे चौंकाने वाला सबूत जो निकल कर आया उसने पूरी अदालत को हिला कर रख दिया। एस विग्नेश ने बताया कि राहुल गांधी और राहुल विंसी यह दो नाम नहीं है बल्कि यह दोनों एक ही शख्स हैं जो इस वक्त

रायबरेली से सांसद हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष हैं और लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं राहुल गांधी उनका ही नाम राहुल विंसी है। और इस पूरी बात को साबित करने के लिए एस विग्नेश ने जो सबूत पेश किए उसमें उन्होंने बार्कले बैंक अकाउंट्स की डिटेल पूरी दिखाई है अदालत को जिसमें बकायदा राहुल विंसी के नाम पर बैंक अकाउंट है। यूके कैंब्रिज यूनिवर्सिटी का उन्होंने पूरा रिकॉर्ड दिखाया। जिस रिकॉर्ड में बकायदा राहुल विंसी के नाम से राहुल गांधी दाखिला लेते हुए नजर आए। और इसके अलावा विग्नेश ने उन तमाम ईमेल्स को भी दिखाया जो ब्रिटेन की गवर्नमेंट से उन्हें मिले हैं। यूके गवर्नमेंट से उन्हें मिले हैं। इसके अलावा जो यूके की गवर्नमेंट से, वहां से पासपोर्ट डिपार्टमेंट से, इमीग्रेशन डिपार्टमेंट से, सिटीजनशिप डिपार्टमेंट से और भारत के गृह मंत्रालय से जो जो उन्होंने सबूत इकट्ठा किए थे। इन तमाम सबूतों को एस विग्नेश ने अदालत के सामने दिखाया और उन्होंने एक-एक कर राहुल के गुनाह गिनाए। एस विग्नेश ने अदालत में यह भी कहा कि राहुल के पास दो नागरिकता हैं।

उनके पास भारत की भी नागरिकता है और उनके पास ब्रिटेन की भी नागरिकता है और भारत का कानून दोहरी नागरिकता की इजाजत नहीं देता है। इसका मतलब है कि राहुल गांधी की जो भारतीय नागरिकता है वो तत्काल प्रभाव से रद्द नहीं की जानी चाहिए बल्कि इस रद्द करने के साथ-साथ राहुल गांधी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर भी दर्ज की जानी चाहिए। क्योंकि यह जो पूरी बहस चल रही है, यह सिर्फ राहुल गांधी की नागरिकता साबित करने के लिए बहस नहीं चल रही है। यह जो अदालत में मामला एस विग्नेश ने लगाया है, यह सिर्फ राहुल की नागरिकता साबित करने का मामला नहीं है। बल्कि यह पूरा मामला राहुल गांधी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए लगाया गया है।

यह जो पूरी सुनवाई चल रही है अदालत में इस सुनवाई के अंत में अदालत से यह मांग की जा रही है कि आप राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दीजिए और एफआईआर ऐसी छोटी-मोटी धाराओं में नहीं एफआईआर उन धाराओं में दर्ज होगी जिसमें एस विग्नेश ने जिक्र किया है कि राहुल गांधी ने जो ऑफिस के सीक्रेट्स होते हैं उन्हें भी दुश्मन देशों को दिया है। उन्होंने भारत में एक फर्जी नागरिक के तौर पर संसद तक का सफर तय किया है। और यह वो किस एवज पर कह रहे हैं? विग्नेश शिसिर का कहना है कि जब राहुल गांधी ब्रिटेन की नागरिकता ले चुके थे और उसके बाद जो उन्होंने भारत में सांसद पद का चुनाव लड़ते हुए शपथ पत्र दिया था। उसमें उन्होंने अपने आप को भारतीय नागरिक दिखाया है। इसका मतलब राहुल ने सीधे तौर पर फ्रॉड किया। और अगर यहां पर फ्रॉड हुआ है तो इसके खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज होना चाहिए। इसके अलावा 2003 में जिस कंपनी में राहुल गांधी डायरेक्टर थे ब्रिटेन में बेकप्स बकायदा उसके भी सबूत यहां पर पेश किए गए और जबरदस्त तरीके से बहस हुई और यह पहली बार नहीं है जब अदालत में राहुल के मामले में बहस हो रही है। लेकिन इस बार मामला बेहद रोचक हो चुका है। मामला बेहद महत्वपूर्ण स्थिति पर पहुंच गया है। क्योंकि अब से पहले सबूत पेश नहीं किए गए और एक बात और जब रायबरेली में एस विग्नेश से पहुंचे हुए थे सुनवाई के लिए तब वहां पर उन्होंने एक बात का खुलासा किया था और उन्होंने कहा था कि क्या राहुल का विदेश में कोई परिवार भी है क्योंकि इस बात की भी उन्होंने आशंका जाहिर की है कि राहुल भारत में तो अपने आप को अविवाहित दिखाते हैं जो वह शपथ पत्र देते हैं चुनाव के दौरान उसमें राहुल का कोई भी बच्चा या कोई भी पतिपत्नी पत्नी ऐसा कोई संबंध नहीं आता लेकिन विग्नेश शिसिर का कहीं ना कहीं यह दावा है कि राहुल इस मामले में भी झूठ बोल रहे हैं। राहुल भारत को गुमराह कर रहे हैं और फर्जी शपथ कहीं ना कहीं लिखकर वह चुनाव लड़ते हैं। उन्होंने पिछली बार भी यह कहा था कि विदेश में राहुल का कोई परिवार है। मैं यह सवाल भी राहुल से पूछना चाहता हूं। यानी अब स्पष्ट हो गया है। हालांकि बीते दिन की जो सुनवाई थी, सुनवाई अभी जारी है। सुनवाई लगातार चल रही है और इस सुनवाई के अंत में अदालत राहुल को पेश होने का वारंट जारी कर सकती है।

 राहुल से सीधे इन सबूतों के बचाव में कोई पक्ष रखना है तो उसके लिए राहुल को बुलाया जा सकता है और सीधे सवाल किया जा सकता है कि आप किस तरह से यह साबित करेंगे कि आपके खिलाफ जो आरोप लगाए गए हैं वो झूठे हैं। अगर राहुल यह साबित नहीं कर पाते हैं और जो राहुल के मामले में दिखाए जा रहे सबूत पेश किए गए अदालत में वह तमाम सबूत सच्चे पाए जाते हैं तो अदालत राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश बहुत जल्दी सुना सकती है क्योंकि अब मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी है। सारे सबूत पेश किए जा चुके हैं। खुद गवाह विग्नेश शिसिर हैं। अदालत इसके बाद राहुल का पक्ष सुनेगी और पक्ष सुनने पर 


अगर राहुल साबित नहीं कर पाते हैं। राहुल अपने आप को बेकसूर साबित नहीं कर पाते हैं। अपने आप को भारतीय नागरिक बस साबित नहीं कर पाते हैं। तो एक बात तय है कि ना सिर्फ अब राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी बल्कि राहुल की सांसदी भी जाएगी और राहुल गांधी के खिलाफ भारत में अब तक का सबसे बड़ा मुकदमा भी दर्ज होगा और यह मुकदमा भारत के इतिहास में पहले कभी दर्ज नहीं हुआ होगा क्योंकि राहुल 20 सालों से भारत के सांसद हैं। और अगर गाज गिरेगी तो अब संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक और हर अदालत में राहुल का बच पाना बहुत मुश्किल हो जाएगा। 

Saturday, January 3, 2026

क्या मोहन भागवत गुजराती लॉबी के मुखिया नरेंद्र मोदी अमित शाह से इतने ज्यादा निराश और हताश हो गए हैं कि वो बीजेपी से पल्ला झाड़ रहे हैं?

क्या मोहन भागवत गुजराती लॉबी के मुखिया नरेंद्र मोदी अमित शाह से इतने ज्यादा निराश और हताश हो गए हैं कि वो बीजेपी से पल्ला झाड़ रहे हैं?
क्या मोहन भागवत गुजराती लॉबी के मुखिया नरेंद्र मोदी अमित शाह से इतने ज्यादा निराश और हताश हो गए हैं कि वो बीजेपी से पल्ला झाड़ रहे हैं?
क्या मोहन भागवत गुजराती लॉबी के मुखिया नरेंद्र मोदी अमित शाह से इतने ज्यादा निराश और हताश हो गए हैं कि वो बीजेपी से पल्ला झाड़ रहे हैं?
क्या मोहन भागवत गुजराती लॉबी के मुखिया नरेंद्र मोदी अमित शाह से इतने ज्यादा निराश और हताश हो गए हैं कि वो बीजेपी से पल्ला झाड़ रहे हैं?

 


इंदौर में जो कुछ हुआ वो तो अपने आप में शर्मनाक था ही लेकिन उसके बाद जो कुछ हो रहा है जो कुछ किया जा रहा है मध्य प्रदेश की सरकार द्वारा वो तो अपने आप में उससे भी कहीं ज्यादा शर्मनाक है। हमें चार, 10 और 15 के खेले में उलझाया जा रहा है। लेकिन इससे भी बड़ी बात है कि भारतीय जनता पार्टी को राजनीतिक संजीवनी देने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत लगातार भारतीय जनता पार्टी के साथ पल्ला झाड़ते हुए नजर आ रहे हैं। यूं कहूं कि भारतीय जनता पार्टी से पल्ला झाड़ते हुए नजर आ रहे हैं और इंदौर से महज 200 किलोमीटर दूर प्रदेश की राजधानी भोपाल पहुंचकर मोहन भागवत कुछ इस तरह का बयान देते हैं। जिस बयान के बाद एक बार फिर से यही सवाल खड़ा हो जाता है कि क्या मोहन भागवत भारतीय जनता पार्टी को चलाने वाली गुजराती लॉबी के मुखिया यानी नरेंद्र मोदी और अमित शाह से इतने ज्यादा निराश और हताश हो गए हैं कि वो बीजेपी से पल्ला झाड़ रहे हैं।

क्या नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने मोहन भागवत को भारतीय जनता पार्टी से फैसला लेने वाले एक महत्वपूर्ण नेता के पद से पूरी तरह से बेदखल कर दिया है। इससे पहले कि तमाम लोग कहे कि भाजपा से मोहन भागवत साहब का क्या लेना देना है। तो कई इतिहास है कि भारतीय जनता पार्टी से मोहन भागवत का क्या लेना देना है।लेकिन शुरुआत मोहन भागवत के उस बयान से करूंगा और ये भी बताऊंगा कि भोपाल पहुंचकर एक कार्यक्रम में शामिल होते हैं। जहां से मुख्यमंत्री आवास की दूरी कोई बहुत ज्यादा नहीं है। लेकिन उनकी जुबान तक नहीं खुलती। इंदौर में हुई मौतों पर लेकिन वो बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और भारतीय जनता पार्टी से किनारा करते हुए नजर आते हैं।

तो सवाल ये उठ रहा है कि क्या वाकई मोहन भागवत निराश और हताश हो गए हैं या वो जानबूझकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक को और खासतौर से इस देश के करोड़ों हिंदुओं को अपने एक नए जाल में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वो कह सके कि हमारी तो कोई सुन नहीं रहा। हमारी तो कुछ चलती नहीं है। तो उमा भारती का बयान जो कि उन्होंने मध्य प्रदेश के शासन और प्रशासन के लिए कल पोस्ट किया था। मैं कहूंगा कि मोहन भागवत साहब उसको भी याद कर ले कि अगर कोई आपकी सुन नहीं रहा है तो फिर आप क्यों आरएसएस के मुखिया के तौर पर देश भर में घूम घूम कर हिंदुत्व का प्रचार कर रहे हैं और हिंदुत्व के बहाने भारतीय जनता पार्टी को चुनाव जिताने के लिए प्रचार कर रहे हैं। आप राष्ट्र निर्माण में लगे हुए हैं या सत्ता निर्माण में लगे हुए हैं? इन तमाम सवालों के जवाब आपको देने चाहिए। मैं तो चाहूंगा कि स्वयंसेवक ये सवाल पूछे। देश के हिंदू ये सवाल पूछे कि मोहन भागवत साहब आखिर कर क्या रहे हैं? मोहन भागवत साहब आखिर चाहते क्या हैं? और मोहन यादव मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कैसे एक के बाद एक लोगों की आंखों में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं? वो भी आपके सामने बताऊंगा। लेकिन शुरुआत मोहन भागवत से करता हूं। भोपाल की धरती पर पहुंचते हैं मोहन भागवत साहब। और एक बार फिर से बोल देते हैं कि भैया भाजपा को आरएसएस कंट्रोल नहीं करता। संघ को पार्टी के यानी भारतीय जनता पार्टी के नजरिए से देखना गलत है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक पैराबिलिटी फोर्स नहीं है। जरा मैं बता दूं कि भोपाल की धरती पर पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत ने शुक्रवार को उसी दिन जिस दिन उमा भारती ने खुली बगावत कर दी थी भारतीय जनता पार्टी के इको सिस्टम के खिलाफ पोस्ट करके महापाप की बात करके भ्रष्टाचार या घोर दंड की बात करके उसी दिन मोहन भागवत उसी मध्य प्रदेश की धरती पर थे। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की धरती पर थे और उन्होंने कहा कि भाजपा या विश्व हिंदू परिषद के नजरिए से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को देखना समझना गलत है। सभी स्वतंत्र रूप से काम करते हैं और संघ किसी को कंट्रोल नहीं करता। भाजपा को कंट्रोल नहीं करता। इस ये संदर्भ था उनका। संघ का उद्देश्य सत्ता टिकट या चुनाव नहीं बल्कि समाज की गुणवत्ता और चरित्र निर्माण है और ये कितना बढ़िया चरित्र निर्माण कर रहे हैं। उत्तराखंड के भाजपा नेता के बयान से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

भोपाल में आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में बोलते हुए भागवत ने कहा कि हम वर्दी पहनते हैं, मार्च निकालते हैं और लाठी का अभ्यास करते हैं। ऐसे में अगर कोई सोचता है कि यह एक पैरामिलिट्री फोर्स है तो यह एक गलती होगी। भागवत ने आगे कहा कि हमारा मत, पंथ संप्रदाय, भाषा और जाति अलग हो सकती है। लेकिन हिंदू पहचान हम सबको जोड़ती है। हमारी संस्कृति एक है, धर्म एक है और हमारे पूर्वज भी समान है। भागवत साहब इंदौर में जिन लोगों ने आपकी सरकार, आपके मुख्यमंत्री की लापरवाही और निकम्मेपन के कारण दूषित पानी पीकर अपनी जान गवाई है वो हिंदू ही थे। आगे देखिए मोहन भागवत ने राजनीति, स्वदेशी अर्थव्यवस्था, युवाओं की दिशा, पारिवारिक जीवन और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर खुलकर बातचीत की। अनुशासन की बात कही। टेरी विदेशी निर्भरता की बात कही। उन्होंने नई पीढ़ी को भारतीयता से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। फैशन, फास्ट फूड और परिवार पर चिंता जताई। संघ को समझने की जरूरत की बात कही। संघ कैसे पैदा हुआ इसको लेकर उन्होंने बात कही। समाज बदलेगा तभी देश बदले जाने की बात कही। उन्होंने प्रेशर ग्रुप नहीं संपूर्ण समाज के संगठन की बात कही और यह भी कहा कि संघ केवल स्वयंसेवक बनाता है। यानी संघ जो है वो राष्ट्र निर्माण है। लेकिन मैं तो इस सीधे कहूंगा कि संघ जो है वो सरकार के निर्माण में लगा हुआ है। सत्ता हासिल करने में लगा हुआ है। नहीं तो क्या फर्क है? क्या जरूरत पड़ती है कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक आपके स्वयंसेवक सिर्फ और सिर्फ भारतीय जनता पार्टी को चुनाव जितवाने में लगे रहते हैं। अगर संघ को सत्ता से कोई लेना देना नहीं है तो संघ के नेता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर जाकर क्यों बैठक करते हैं? अगर संघ को सत्ता से कुछ लेना देना नहीं है तो संघ के नेता राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के दिग्गज नेताओं के साथ क्यों बैठक करते हैं? राज्यों के स्तर पर जहां-जहां सरकारें वहां जाकर भारतीय जनता पार्टी के मुख्यंत्रियों से क्यों मिलते हैं और जहांजहां भी सरकारें नहीं है वहां भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से क्यों मिलते हैं? और फिर अखबार में इस तरह की खबरें क्यों छपवाई जाती है? छपवाई जाती है कि महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव को जिताने में आरएसएस ने कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई? हरियाणा के विधानसभा चुनाव को जितवाने में आरएसएस ने कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, बिहार, दिल्ली इन विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में पहुंचाने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लेकिन सबसे बड़ी बात है कि आप मध्य प्रदेश की धरती पर पहुंचकर भी अपने ही प्रचार द्वारा बनाई गई सरकार और मुख्यमंत्री के रवैया पर कुछ नहीं बोलते। अब आप देखिए कि इंदौर में जो कुछ हुआ पत्रकार के साथ जो कुछ हुआ हंसते हुए नजर आए कैलाश विजयवर्गीय उससे आगे बढ़कर क्या कर दिया उन्होंने वहां पर 15 व्यक्तियों की मौत की बात कही जा रही है सैकड़ों लोग अस्पताल में भर्ती है वहां के मेयर जो है वो खुद कह चुके हैं कि 10 लोगों का तो कंफर्म कर चुके हैं कि उनकी मृत्यु हुई है लेकिन वहां के हाई कोर्ट में सरकार ने जो एफिडेविट दिया उसने बताया कि भाई दूषित पानी पीने से सिर्फ चार लोग मरे हैं। उमा भारती ने जब बगावत का बिगुल बजा दिया तो एक पोस्ट करते हुए मोहन यादव नजर आए जिसमें एक आध लोगों को हटाने की बात थी कारण बताओ नोटिस जारी करने की बात थी लेकिन बवाल बढ़ता गया तो देर रात एक और पोस्ट किया उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव हाई कोर्ट की आंख में तो आंख हाई कोर्ट की आंख में तो धूल झोंक चुके हैं। कह रहे हैं कि चार ही लोग मरे हैं दूषित पानी पीने से और अब वो जनता की आंख में भी कैसे धूल झोंक रहे हैं। को देखिए कि उन्होंने दोपहर में क्या ट्वीट किया और कल को देर रात क्या ट्वीट किया और

देर रात जो उन्होंने पोस्ट कियाकि प्रेशर बहुत ज्यादा है तो देर रात को उन्होंने 9:21 पर पोस्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण कोई घटना में राज्य सरकार लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। इस संबंध में कठोर निर्णय लिए जा रहे हैं। निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया पीएचडी के प्रभारी अधीक्षक यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है और इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को भी हटाने के निर्देश दे दिए गए हैं। ध्यान से सुनिएगा। इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को भी हटाने के निर्देश दे दिए गए हैं।उसने उनहीं दिलीप कुमार यादव के ट्रांसफर के आर्डर की कॉपी को पोस्ट कर दिया है। और ये जो ट्रांसफर के आर्डर की कॉपी है 2 जनवरी की और इसमें ये बताया गया है कि दिलीप कुमार यादव 2014 बैच के जो है आयुक्त है और इंदौर के आयुक्त है उनको ट्रांसफर करके उप सचिव मध्य प्रदेश शासन का बना दिया गया है पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में। अब सवाल यह है कि मोहन यादव साहब पहली बार मुख्यमंत्री बने हैं। लेकिन उनको इतना तो पता होगा कि ट्रांसफर करने का मतलब हटाना नहीं होता। आपने एक जगह से पद से हटाकर दूसरी जगह भेज दिया। क्या इसको आप सजा देना कहेंगे? क्या आप इसको दंड देना कहेंगे? या आप सीधे-सीधे जनता की आंखों में धूल झोंक रहे हैं और यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत अब भारतीय जनता पार्टी से लगातार पल्ला झाड़ते हुए नजर आ रहे हैं।

मैंने आपको बताया कि मोहन भागवत क्यों बीजेपी से पल्ला झाड़ रहे हैं? क्या वो नरेंद्र मोदी और अमित शाह के रवय से इतने ज्यादा हताश, निराश और दुखी हो गए हैं? क्या भारतीय जनता पार्टी के फैसला करने में उनकी सुनी नहीं जा रही? उनकी चल नहीं रही। इसलिए वो उससे किनारा कर रहे हैं। क्या भारतीय जनता पार्टी के नेता एक के बाद एक उसको क्या कहे वो भारती की नजरों में पाप और महापाप किए जा रहे हैं। उससे डरकर मोहन भागवत पल्ला झाड़ रहे हैं। या उनको लगता है कि जहांजहां वो प्रवास पर जाते हैं वहां स्वयंसेवक उनसे सवाल ना पूछ ले। हिंदू उनसे सवाल ना पूछ ले। इसलिए वो जानबूझकर स्वयं सैनिकों की आंखों में धूल झोंकने के लिए हिंदुओं को भरमाने के लिए हिंदुओं की आंखों में धूल झोंकने के लिए अपने आप को भारतीय जनता पार्टी के कर्मों से उमा भारती के शब्दों में कहूं तो पाप और महापापों से पिंड छुड़ाने के लिए भारतीय जनता पार्टी से अलग थलग होने का सिर्फ और सिर्फ नाटक कर रहे हैं। सच क्या है? अपने तमाम दर्शकों से कहूंगा कि मुझे कमेंट करके जरूर बताइएगा और ये भी बताइएगा मोहन यादव के लिए कम से कम बता दीजिएगा भैया कि अधिकारी को हटाना क्या दंड देना होता है? अधिकारी को हटाना क्या सजा देना होता है? और आखिर ऐसा करके मोहन यादव क्या हासिल करना चाहते हैं? कारवाई कब? जिम्मेदार लोगों पर कारवाई कब?

 उमा भारती ने जो मांग की कि नीचे से ऊपर तक सब जिम्मेदार है। उन लोगों पर कारवाई कब? प्रायश्चित या दंड? ये कब? ये तमाम सवाल आप भी पूछते रहिए। हम भी पूछते रहेंगे जब तक ये जवाब नहीं मिलेगा। और यह सवाल मेरे मन में जरूर आएगा कि इंदौर से 200 किलोमीटर से भी कम की दूरी पर खड़े होकर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में खड़े होकर मोहन भागवत को मध्य प्रदेश के बच्चों की याद क्यों नहीं आती? जो कप सिरप पीकर अपनी जान गवा चुके हैं। इंदौर के लोगों की याद क्यों नहीं आती? जो दूषित पानी पीकर अपनी जान गवा चुके हैं। वहां मरने वाले बच्चों की याद क्यों नहीं आती? 

Jai Hind  Jai Sanatan


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क्या मोहन भागवत गुजराती लॉबी के मुखिया नरेंद्र मोदी अमित शाह से इतने ज्यादा निराश और हताश हो गए हैं कि वो बीजेपी से पल्ला झाड़ रहे हैं?

क्या मोहन भागवत गुजराती लॉबी के मुखिया नरेंद्र मोदी अमित शाह से इतने ज्यादा निराश और हताश हो गए हैं कि वो बीजेपी से पल्ला झाड़ रहे हैं?
क्या मोहन भागवत गुजराती लॉबी के मुखिया नरेंद्र मोदी अमित शाह से इतने ज्यादा निराश और हताश हो गए हैं कि वो बीजेपी से पल्ला झाड़ रहे हैं?
क्या मोहन भागवत गुजराती लॉबी के मुखिया नरेंद्र मोदी अमित शाह से इतने ज्यादा निराश और हताश हो गए हैं कि वो बीजेपी से पल्ला झाड़ रहे हैं?

 


इंदौर में जो कुछ हुआ वो तो अपने आप में शर्मनाक था ही लेकिन उसके बाद जो कुछ हो रहा है जो कुछ किया जा रहा है मध्य प्रदेश की सरकार द्वारा वो तो अपने आप में उससे भी कहीं ज्यादा शर्मनाक है। हमें चार, 10 और 15 के खेले में उलझाया जा रहा है। लेकिन इससे भी बड़ी बात है कि भारतीय जनता पार्टी को राजनीतिक संजीवनी देने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत लगातार भारतीय जनता पार्टी के साथ पल्ला झाड़ते हुए नजर आ रहे हैं। यूं कहूं कि भारतीय जनता पार्टी से पल्ला झाड़ते हुए नजर आ रहे हैं और इंदौर से महज 200 किलोमीटर दूर प्रदेश की राजधानी भोपाल पहुंचकर मोहन भागवत कुछ इस तरह का बयान देते हैं। जिस बयान के बाद एक बार फिर से यही सवाल खड़ा हो जाता है कि क्या मोहन भागवत भारतीय जनता पार्टी को चलाने वाली गुजराती लॉबी के मुखिया यानी नरेंद्र मोदी और अमित शाह से इतने ज्यादा निराश और हताश हो गए हैं कि वो बीजेपी से पल्ला झाड़ रहे हैं।

क्या नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने मोहन भागवत को भारतीय जनता पार्टी से फैसला लेने वाले एक महत्वपूर्ण नेता के पद से पूरी तरह से बेदखल कर दिया है। इससे पहले कि तमाम लोग कहे कि भाजपा से मोहन भागवत साहब का क्या लेना देना है। तो कई इतिहास है कि भारतीय जनता पार्टी से मोहन भागवत का क्या लेना देना है।लेकिन शुरुआत मोहन भागवत के उस बयान से करूंगा और ये भी बताऊंगा कि भोपाल पहुंचकर एक कार्यक्रम में शामिल होते हैं। जहां से मुख्यमंत्री आवास की दूरी कोई बहुत ज्यादा नहीं है। लेकिन उनकी जुबान तक नहीं खुलती। इंदौर में हुई मौतों पर लेकिन वो बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और भारतीय जनता पार्टी से किनारा करते हुए नजर आते हैं।

तो सवाल ये उठ रहा है कि क्या वाकई मोहन भागवत निराश और हताश हो गए हैं या वो जानबूझकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक को और खासतौर से इस देश के करोड़ों हिंदुओं को अपने एक नए जाल में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वो कह सके कि हमारी तो कोई सुन नहीं रहा। हमारी तो कुछ चलती नहीं है। तो उमा भारती का बयान जो कि उन्होंने मध्य प्रदेश के शासन और प्रशासन के लिए कल पोस्ट किया था। मैं कहूंगा कि मोहन भागवत साहब उसको भी याद कर ले कि अगर कोई आपकी सुन नहीं रहा है तो फिर आप क्यों आरएसएस के मुखिया के तौर पर देश भर में घूम घूम कर हिंदुत्व का प्रचार कर रहे हैं और हिंदुत्व के बहाने भारतीय जनता पार्टी को चुनाव जिताने के लिए प्रचार कर रहे हैं। आप राष्ट्र निर्माण में लगे हुए हैं या सत्ता निर्माण में लगे हुए हैं? इन तमाम सवालों के जवाब आपको देने चाहिए। मैं तो चाहूंगा कि स्वयंसेवक ये सवाल पूछे। देश के हिंदू ये सवाल पूछे कि मोहन भागवत साहब आखिर कर क्या रहे हैं? मोहन भागवत साहब आखिर चाहते क्या हैं? और मोहन यादव मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कैसे एक के बाद एक लोगों की आंखों में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं? वो भी आपके सामने बताऊंगा। लेकिन शुरुआत मोहन भागवत से करता हूं। भोपाल की धरती पर पहुंचते हैं मोहन भागवत साहब। और एक बार फिर से बोल देते हैं कि भैया भाजपा को आरएसएस कंट्रोल नहीं करता। संघ को पार्टी के यानी भारतीय जनता पार्टी के नजरिए से देखना गलत है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक पैराबिलिटी फोर्स नहीं है। जरा मैं बता दूं कि भोपाल की धरती पर पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत ने शुक्रवार को उसी दिन जिस दिन उमा भारती ने खुली बगावत कर दी थी भारतीय जनता पार्टी के इको सिस्टम के खिलाफ पोस्ट करके महापाप की बात करके भ्रष्टाचार या घोर दंड की बात करके उसी दिन मोहन भागवत उसी मध्य प्रदेश की धरती पर थे। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की धरती पर थे और उन्होंने कहा कि भाजपा या विश्व हिंदू परिषद के नजरिए से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को देखना समझना गलत है। सभी स्वतंत्र रूप से काम करते हैं और संघ किसी को कंट्रोल नहीं करता। भाजपा को कंट्रोल नहीं करता। इस ये संदर्भ था उनका। संघ का उद्देश्य सत्ता टिकट या चुनाव नहीं बल्कि समाज की गुणवत्ता और चरित्र निर्माण है और ये कितना बढ़िया चरित्र निर्माण कर रहे हैं। उत्तराखंड के भाजपा नेता के बयान से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

भोपाल में आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में बोलते हुए भागवत ने कहा कि हम वर्दी पहनते हैं, मार्च निकालते हैं और लाठी का अभ्यास करते हैं। ऐसे में अगर कोई सोचता है कि यह एक पैरामिलिट्री फोर्स है तो यह एक गलती होगी। भागवत ने आगे कहा कि हमारा मत, पंथ संप्रदाय, भाषा और जाति अलग हो सकती है। लेकिन हिंदू पहचान हम सबको जोड़ती है। हमारी संस्कृति एक है, धर्म एक है और हमारे पूर्वज भी समान है। भागवत साहब इंदौर में जिन लोगों ने आपकी सरकार, आपके मुख्यमंत्री की लापरवाही और निकम्मेपन के कारण दूषित पानी पीकर अपनी जान गवाई है वो हिंदू ही थे। आगे देखिए मोहन भागवत ने राजनीति, स्वदेशी अर्थव्यवस्था, युवाओं की दिशा, पारिवारिक जीवन और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर खुलकर बातचीत की। अनुशासन की बात कही। टेरी विदेशी निर्भरता की बात कही। उन्होंने नई पीढ़ी को भारतीयता से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। फैशन, फास्ट फूड और परिवार पर चिंता जताई। संघ को समझने की जरूरत की बात कही। संघ कैसे पैदा हुआ इसको लेकर उन्होंने बात कही। समाज बदलेगा तभी देश बदले जाने की बात कही। उन्होंने प्रेशर ग्रुप नहीं संपूर्ण समाज के संगठन की बात कही और यह भी कहा कि संघ केवल स्वयंसेवक बनाता है। यानी संघ जो है वो राष्ट्र निर्माण है। लेकिन मैं तो इस सीधे कहूंगा कि संघ जो है वो सरकार के निर्माण में लगा हुआ है। सत्ता हासिल करने में लगा हुआ है। नहीं तो क्या फर्क है? क्या जरूरत पड़ती है कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक आपके स्वयंसेवक सिर्फ और सिर्फ भारतीय जनता पार्टी को चुनाव जितवाने में लगे रहते हैं। अगर संघ को सत्ता से कोई लेना देना नहीं है तो संघ के नेता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर जाकर क्यों बैठक करते हैं? अगर संघ को सत्ता से कुछ लेना देना नहीं है तो संघ के नेता राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के दिग्गज नेताओं के साथ क्यों बैठक करते हैं? राज्यों के स्तर पर जहां-जहां सरकारें वहां जाकर भारतीय जनता पार्टी के मुख्यंत्रियों से क्यों मिलते हैं और जहांजहां भी सरकारें नहीं है वहां भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से क्यों मिलते हैं? और फिर अखबार में इस तरह की खबरें क्यों छपवाई जाती है? छपवाई जाती है कि महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव को जिताने में आरएसएस ने कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई? हरियाणा के विधानसभा चुनाव को जितवाने में आरएसएस ने कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, बिहार, दिल्ली इन विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में पहुंचाने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लेकिन सबसे बड़ी बात है कि आप मध्य प्रदेश की धरती पर पहुंचकर भी अपने ही प्रचार द्वारा बनाई गई सरकार और मुख्यमंत्री के रवैया पर कुछ नहीं बोलते। अब आप देखिए कि इंदौर में जो कुछ हुआ पत्रकार के साथ जो कुछ हुआ हंसते हुए नजर आए कैलाश विजयवर्गीय उससे आगे बढ़कर क्या कर दिया उन्होंने वहां पर 15 व्यक्तियों की मौत की बात कही जा रही है सैकड़ों लोग अस्पताल में भर्ती है वहां के मेयर जो है वो खुद कह चुके हैं कि 10 लोगों का तो कंफर्म कर चुके हैं कि उनकी मृत्यु हुई है लेकिन वहां के हाई कोर्ट में सरकार ने जो एफिडेविट दिया उसने बताया कि भाई दूषित पानी पीने से सिर्फ चार लोग मरे हैं। उमा भारती ने जब बगावत का बिगुल बजा दिया तो एक पोस्ट करते हुए मोहन यादव नजर आए जिसमें एक आध लोगों को हटाने की बात थी कारण बताओ नोटिस जारी करने की बात थी लेकिन बवाल बढ़ता गया तो देर रात एक और पोस्ट किया उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव हाई कोर्ट की आंख में तो आंख हाई कोर्ट की आंख में तो धूल झोंक चुके हैं। कह रहे हैं कि चार ही लोग मरे हैं दूषित पानी पीने से और अब वो जनता की आंख में भी कैसे धूल झोंक रहे हैं। को देखिए कि उन्होंने दोपहर में क्या ट्वीट किया और कल को देर रात क्या ट्वीट किया और

देर रात जो उन्होंने पोस्ट कियाकि प्रेशर बहुत ज्यादा है तो देर रात को उन्होंने 9:21 पर पोस्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण कोई घटना में राज्य सरकार लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। इस संबंध में कठोर निर्णय लिए जा रहे हैं। निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया पीएचडी के प्रभारी अधीक्षक यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है और इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को भी हटाने के निर्देश दे दिए गए हैं। ध्यान से सुनिएगा। इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को भी हटाने के निर्देश दे दिए गए हैं।उसने उनहीं दिलीप कुमार यादव के ट्रांसफर के आर्डर की कॉपी को पोस्ट कर दिया है। और ये जो ट्रांसफर के आर्डर की कॉपी है 2 जनवरी की और इसमें ये बताया गया है कि दिलीप कुमार यादव 2014 बैच के जो है आयुक्त है और इंदौर के आयुक्त है उनको ट्रांसफर करके उप सचिव मध्य प्रदेश शासन का बना दिया गया है पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में। अब सवाल यह है कि मोहन यादव साहब पहली बार मुख्यमंत्री बने हैं। लेकिन उनको इतना तो पता होगा कि ट्रांसफर करने का मतलब हटाना नहीं होता। आपने एक जगह से पद से हटाकर दूसरी जगह भेज दिया। क्या इसको आप सजा देना कहेंगे? क्या आप इसको दंड देना कहेंगे? या आप सीधे-सीधे जनता की आंखों में धूल झोंक रहे हैं और यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत अब भारतीय जनता पार्टी से लगातार पल्ला झाड़ते हुए नजर आ रहे हैं।

मैंने आपको बताया कि मोहन भागवत क्यों बीजेपी से पल्ला झाड़ रहे हैं? क्या वो नरेंद्र मोदी और अमित शाह के रवय से इतने ज्यादा हताश, निराश और दुखी हो गए हैं? क्या भारतीय जनता पार्टी के फैसला करने में उनकी सुनी नहीं जा रही? उनकी चल नहीं रही। इसलिए वो उससे किनारा कर रहे हैं। क्या भारतीय जनता पार्टी के नेता एक के बाद एक उसको क्या कहे वो भारती की नजरों में पाप और महापाप किए जा रहे हैं। उससे डरकर मोहन भागवत पल्ला झाड़ रहे हैं। या उनको लगता है कि जहांजहां वो प्रवास पर जाते हैं वहां स्वयंसेवक उनसे सवाल ना पूछ ले। हिंदू उनसे सवाल ना पूछ ले। इसलिए वो जानबूझकर स्वयं सैनिकों की आंखों में धूल झोंकने के लिए हिंदुओं को भरमाने के लिए हिंदुओं की आंखों में धूल झोंकने के लिए अपने आप को भारतीय जनता पार्टी के कर्मों से उमा भारती के शब्दों में कहूं तो पाप और महापापों से पिंड छुड़ाने के लिए भारतीय जनता पार्टी से अलग थलग होने का सिर्फ और सिर्फ नाटक कर रहे हैं। सच क्या है? अपने तमाम दर्शकों से कहूंगा कि मुझे कमेंट करके जरूर बताइएगा और ये भी बताइएगा मोहन यादव के लिए कम से कम बता दीजिएगा भैया कि अधिकारी को हटाना क्या दंड देना होता है? अधिकारी को हटाना क्या सजा देना होता है? और आखिर ऐसा करके मोहन यादव क्या हासिल करना चाहते हैं? कारवाई कब? जिम्मेदार लोगों पर कारवाई कब?

 उमा भारती ने जो मांग की कि नीचे से ऊपर तक सब जिम्मेदार है। उन लोगों पर कारवाई कब? प्रायश्चित या दंड? ये कब? ये तमाम सवाल आप भी पूछते रहिए। हम भी पूछते रहेंगे जब तक ये जवाब नहीं मिलेगा। और यह सवाल मेरे मन में जरूर आएगा कि इंदौर से 200 किलोमीटर से भी कम की दूरी पर खड़े होकर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में खड़े होकर मोहन भागवत को मध्य प्रदेश के बच्चों की याद क्यों नहीं आती? जो कप सिरप पीकर अपनी जान गवा चुके हैं। इंदौर के लोगों की याद क्यों नहीं आती? जो दूषित पानी पीकर अपनी जान गवा चुके हैं। वहां मरने वाले बच्चों की याद क्यों नहीं आती? 

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क्या मोहन भागवत गुजराती लॉबी के मुखिया नरेंद्र मोदी अमित शाह से इतने ज्यादा निराश और हताश हो गए हैं कि वो बीजेपी से पल्ला झाड़ रहे हैं?

क्या मोहन भागवत गुजराती लॉबी के मुखिया नरेंद्र मोदी अमित शाह से इतने ज्यादा निराश और हताश हो गए हैं कि वो बीजेपी से पल्ला झाड़ रहे हैं?
क्या मोहन भागवत गुजराती लॉबी के मुखिया नरेंद्र मोदी अमित शाह से इतने ज्यादा निराश और हताश हो गए हैं कि वो बीजेपी से पल्ला झाड़ रहे हैं?

 


इंदौर में जो कुछ हुआ वो तो अपने आप में शर्मनाक था ही लेकिन उसके बाद जो कुछ हो रहा है जो कुछ किया जा रहा है मध्य प्रदेश की सरकार द्वारा वो तो अपने आप में उससे भी कहीं ज्यादा शर्मनाक है। हमें चार, 10 और 15 के खेले में उलझाया जा रहा है। लेकिन इससे भी बड़ी बात है कि भारतीय जनता पार्टी को राजनीतिक संजीवनी देने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत लगातार भारतीय जनता पार्टी के साथ पल्ला झाड़ते हुए नजर आ रहे हैं। यूं कहूं कि भारतीय जनता पार्टी से पल्ला झाड़ते हुए नजर आ रहे हैं और इंदौर से महज 200 किलोमीटर दूर प्रदेश की राजधानी भोपाल पहुंचकर मोहन भागवत कुछ इस तरह का बयान देते हैं। जिस बयान के बाद एक बार फिर से यही सवाल खड़ा हो जाता है कि क्या मोहन भागवत भारतीय जनता पार्टी को चलाने वाली गुजराती लॉबी के मुखिया यानी नरेंद्र मोदी और अमित शाह से इतने ज्यादा निराश और हताश हो गए हैं कि वो बीजेपी से पल्ला झाड़ रहे हैं।

क्या नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी ने मोहन भागवत को भारतीय जनता पार्टी से फैसला लेने वाले एक महत्वपूर्ण नेता के पद से पूरी तरह से बेदखल कर दिया है। इससे पहले कि तमाम लोग कहे कि भाजपा से मोहन भागवत साहब का क्या लेना देना है। तो कई इतिहास है कि भारतीय जनता पार्टी से मोहन भागवत का क्या लेना देना है।लेकिन शुरुआत मोहन भागवत के उस बयान से करूंगा और ये भी बताऊंगा कि भोपाल पहुंचकर एक कार्यक्रम में शामिल होते हैं। जहां से मुख्यमंत्री आवास की दूरी कोई बहुत ज्यादा नहीं है। लेकिन उनकी जुबान तक नहीं खुलती। इंदौर में हुई मौतों पर लेकिन वो बड़ी-बड़ी बातें करते हैं और भारतीय जनता पार्टी से किनारा करते हुए नजर आते हैं।

तो सवाल ये उठ रहा है कि क्या वाकई मोहन भागवत निराश और हताश हो गए हैं या वो जानबूझकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक को और खासतौर से इस देश के करोड़ों हिंदुओं को अपने एक नए जाल में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वो कह सके कि हमारी तो कोई सुन नहीं रहा। हमारी तो कुछ चलती नहीं है। तो उमा भारती का बयान जो कि उन्होंने मध्य प्रदेश के शासन और प्रशासन के लिए कल पोस्ट किया था। मैं कहूंगा कि मोहन भागवत साहब उसको भी याद कर ले कि अगर कोई आपकी सुन नहीं रहा है तो फिर आप क्यों आरएसएस के मुखिया के तौर पर देश भर में घूम घूम कर हिंदुत्व का प्रचार कर रहे हैं और हिंदुत्व के बहाने भारतीय जनता पार्टी को चुनाव जिताने के लिए प्रचार कर रहे हैं। आप राष्ट्र निर्माण में लगे हुए हैं या सत्ता निर्माण में लगे हुए हैं? इन तमाम सवालों के जवाब आपको देने चाहिए। मैं तो चाहूंगा कि स्वयंसेवक ये सवाल पूछे। देश के हिंदू ये सवाल पूछे कि मोहन भागवत साहब आखिर कर क्या रहे हैं? मोहन भागवत साहब आखिर चाहते क्या हैं? और मोहन यादव मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कैसे एक के बाद एक लोगों की आंखों में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं? वो भी आपके सामने बताऊंगा। लेकिन शुरुआत मोहन भागवत से करता हूं। भोपाल की धरती पर पहुंचते हैं मोहन भागवत साहब। और एक बार फिर से बोल देते हैं कि भैया भाजपा को आरएसएस कंट्रोल नहीं करता। संघ को पार्टी के यानी भारतीय जनता पार्टी के नजरिए से देखना गलत है और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एक पैराबिलिटी फोर्स नहीं है। जरा मैं बता दूं कि भोपाल की धरती पर पहुंचे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत ने शुक्रवार को उसी दिन जिस दिन उमा भारती ने खुली बगावत कर दी थी भारतीय जनता पार्टी के इको सिस्टम के खिलाफ पोस्ट करके महापाप की बात करके भ्रष्टाचार या घोर दंड की बात करके उसी दिन मोहन भागवत उसी मध्य प्रदेश की धरती पर थे। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की धरती पर थे और उन्होंने कहा कि भाजपा या विश्व हिंदू परिषद के नजरिए से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को देखना समझना गलत है। सभी स्वतंत्र रूप से काम करते हैं और संघ किसी को कंट्रोल नहीं करता। भाजपा को कंट्रोल नहीं करता। इस ये संदर्भ था उनका। संघ का उद्देश्य सत्ता टिकट या चुनाव नहीं बल्कि समाज की गुणवत्ता और चरित्र निर्माण है और ये कितना बढ़िया चरित्र निर्माण कर रहे हैं। उत्तराखंड के भाजपा नेता के बयान से इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

भोपाल में आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर आयोजित प्रमुख जन गोष्ठी में बोलते हुए भागवत ने कहा कि हम वर्दी पहनते हैं, मार्च निकालते हैं और लाठी का अभ्यास करते हैं। ऐसे में अगर कोई सोचता है कि यह एक पैरामिलिट्री फोर्स है तो यह एक गलती होगी। भागवत ने आगे कहा कि हमारा मत, पंथ संप्रदाय, भाषा और जाति अलग हो सकती है। लेकिन हिंदू पहचान हम सबको जोड़ती है। हमारी संस्कृति एक है, धर्म एक है और हमारे पूर्वज भी समान है। भागवत साहब इंदौर में जिन लोगों ने आपकी सरकार, आपके मुख्यमंत्री की लापरवाही और निकम्मेपन के कारण दूषित पानी पीकर अपनी जान गवाई है वो हिंदू ही थे। आगे देखिए मोहन भागवत ने राजनीति, स्वदेशी अर्थव्यवस्था, युवाओं की दिशा, पारिवारिक जीवन और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर खुलकर बातचीत की। अनुशासन की बात कही। टेरी विदेशी निर्भरता की बात कही। उन्होंने नई पीढ़ी को भारतीयता से जोड़ने की जरूरत पर जोर दिया। फैशन, फास्ट फूड और परिवार पर चिंता जताई। संघ को समझने की जरूरत की बात कही। संघ कैसे पैदा हुआ इसको लेकर उन्होंने बात कही। समाज बदलेगा तभी देश बदले जाने की बात कही। उन्होंने प्रेशर ग्रुप नहीं संपूर्ण समाज के संगठन की बात कही और यह भी कहा कि संघ केवल स्वयंसेवक बनाता है। यानी संघ जो है वो राष्ट्र निर्माण है। लेकिन मैं तो इस सीधे कहूंगा कि संघ जो है वो सरकार के निर्माण में लगा हुआ है। सत्ता हासिल करने में लगा हुआ है। नहीं तो क्या फर्क है? क्या जरूरत पड़ती है कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक आपके स्वयंसेवक सिर्फ और सिर्फ भारतीय जनता पार्टी को चुनाव जितवाने में लगे रहते हैं। अगर संघ को सत्ता से कोई लेना देना नहीं है तो संघ के नेता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास पर जाकर क्यों बैठक करते हैं? अगर संघ को सत्ता से कुछ लेना देना नहीं है तो संघ के नेता राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा के दिग्गज नेताओं के साथ क्यों बैठक करते हैं? राज्यों के स्तर पर जहां-जहां सरकारें वहां जाकर भारतीय जनता पार्टी के मुख्यंत्रियों से क्यों मिलते हैं और जहांजहां भी सरकारें नहीं है वहां भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से क्यों मिलते हैं? और फिर अखबार में इस तरह की खबरें क्यों छपवाई जाती है? छपवाई जाती है कि महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव को जिताने में आरएसएस ने कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई? हरियाणा के विधानसभा चुनाव को जितवाने में आरएसएस ने कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, बिहार, दिल्ली इन विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में पहुंचाने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ताओं ने कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लेकिन सबसे बड़ी बात है कि आप मध्य प्रदेश की धरती पर पहुंचकर भी अपने ही प्रचार द्वारा बनाई गई सरकार और मुख्यमंत्री के रवैया पर कुछ नहीं बोलते। अब आप देखिए कि इंदौर में जो कुछ हुआ पत्रकार के साथ जो कुछ हुआ हंसते हुए नजर आए कैलाश विजयवर्गीय उससे आगे बढ़कर क्या कर दिया उन्होंने वहां पर 15 व्यक्तियों की मौत की बात कही जा रही है सैकड़ों लोग अस्पताल में भर्ती है वहां के मेयर जो है वो खुद कह चुके हैं कि 10 लोगों का तो कंफर्म कर चुके हैं कि उनकी मृत्यु हुई है लेकिन वहां के हाई कोर्ट में सरकार ने जो एफिडेविट दिया उसने बताया कि भाई दूषित पानी पीने से सिर्फ चार लोग मरे हैं। उमा भारती ने जब बगावत का बिगुल बजा दिया तो एक पोस्ट करते हुए मोहन यादव नजर आए जिसमें एक आध लोगों को हटाने की बात थी कारण बताओ नोटिस जारी करने की बात थी लेकिन बवाल बढ़ता गया तो देर रात एक और पोस्ट किया उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव हाई कोर्ट की आंख में तो आंख हाई कोर्ट की आंख में तो धूल झोंक चुके हैं। कह रहे हैं कि चार ही लोग मरे हैं दूषित पानी पीने से और अब वो जनता की आंख में भी कैसे धूल झोंक रहे हैं। को देखिए कि उन्होंने दोपहर में क्या ट्वीट किया और कल को देर रात क्या ट्वीट किया और

देर रात जो उन्होंने पोस्ट कियाकि प्रेशर बहुत ज्यादा है तो देर रात को उन्होंने 9:21 पर पोस्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण कोई घटना में राज्य सरकार लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। इस संबंध में कठोर निर्णय लिए जा रहे हैं। निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया पीएचडी के प्रभारी अधीक्षक यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित किया गया है और इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को भी हटाने के निर्देश दे दिए गए हैं। ध्यान से सुनिएगा। इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को भी हटाने के निर्देश दे दिए गए हैं।उसने उनहीं दिलीप कुमार यादव के ट्रांसफर के आर्डर की कॉपी को पोस्ट कर दिया है। और ये जो ट्रांसफर के आर्डर की कॉपी है 2 जनवरी की और इसमें ये बताया गया है कि दिलीप कुमार यादव 2014 बैच के जो है आयुक्त है और इंदौर के आयुक्त है उनको ट्रांसफर करके उप सचिव मध्य प्रदेश शासन का बना दिया गया है पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में। अब सवाल यह है कि मोहन यादव साहब पहली बार मुख्यमंत्री बने हैं। लेकिन उनको इतना तो पता होगा कि ट्रांसफर करने का मतलब हटाना नहीं होता। आपने एक जगह से पद से हटाकर दूसरी जगह भेज दिया। क्या इसको आप सजा देना कहेंगे? क्या आप इसको दंड देना कहेंगे? या आप सीधे-सीधे जनता की आंखों में धूल झोंक रहे हैं और यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया मोहन भागवत अब भारतीय जनता पार्टी से लगातार पल्ला झाड़ते हुए नजर आ रहे हैं।

मैंने आपको बताया कि मोहन भागवत क्यों बीजेपी से पल्ला झाड़ रहे हैं? क्या वो नरेंद्र मोदी और अमित शाह के रवय से इतने ज्यादा हताश, निराश और दुखी हो गए हैं? क्या भारतीय जनता पार्टी के फैसला करने में उनकी सुनी नहीं जा रही? उनकी चल नहीं रही। इसलिए वो उससे किनारा कर रहे हैं। क्या भारतीय जनता पार्टी के नेता एक के बाद एक उसको क्या कहे वो भारती की नजरों में पाप और महापाप किए जा रहे हैं। उससे डरकर मोहन भागवत पल्ला झाड़ रहे हैं। या उनको लगता है कि जहांजहां वो प्रवास पर जाते हैं वहां स्वयंसेवक उनसे सवाल ना पूछ ले। हिंदू उनसे सवाल ना पूछ ले। इसलिए वो जानबूझकर स्वयं सैनिकों की आंखों में धूल झोंकने के लिए हिंदुओं को भरमाने के लिए हिंदुओं की आंखों में धूल झोंकने के लिए अपने आप को भारतीय जनता पार्टी के कर्मों से उमा भारती के शब्दों में कहूं तो पाप और महापापों से पिंड छुड़ाने के लिए भारतीय जनता पार्टी से अलग थलग होने का सिर्फ और सिर्फ नाटक कर रहे हैं। सच क्या है? अपने तमाम दर्शकों से कहूंगा कि मुझे कमेंट करके जरूर बताइएगा और ये भी बताइएगा मोहन यादव के लिए कम से कम बता दीजिएगा भैया कि अधिकारी को हटाना क्या दंड देना होता है? अधिकारी को हटाना क्या सजा देना होता है? और आखिर ऐसा करके मोहन यादव क्या हासिल करना चाहते हैं? कारवाई कब? जिम्मेदार लोगों पर कारवाई कब?

 उमा भारती ने जो मांग की कि नीचे से ऊपर तक सब जिम्मेदार है। उन लोगों पर कारवाई कब? प्रायश्चित या दंड? ये कब? ये तमाम सवाल आप भी पूछते रहिए। हम भी पूछते रहेंगे जब तक ये जवाब नहीं मिलेगा। और यह सवाल मेरे मन में जरूर आएगा कि इंदौर से 200 किलोमीटर से भी कम की दूरी पर खड़े होकर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में खड़े होकर मोहन भागवत को मध्य प्रदेश के बच्चों की याद क्यों नहीं आती? जो कप सिरप पीकर अपनी जान गवा चुके हैं। इंदौर के लोगों की याद क्यों नहीं आती? जो दूषित पानी पीकर अपनी जान गवा चुके हैं। वहां मरने वाले बच्चों की याद क्यों नहीं आती? 

Jai Hind  Jai Sanatan


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