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Saturday, June 20, 2026

DOCTRINE PRAHAR

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 एक डील जो दिल्ली में बैठकर हुई गौर और अमित शाह के बीच में। एक सीक्रेट मीटिंग था जो नॉर्थ ब्लॉक में किया गया। लेकिन इस मीटिंग में आने से पहले कुछ चीजें हैं जो पहले हुई है। चार न्यूज़ हैं जो इंटररिलेटेड है वो आपको समझनी पड़ेगी।मेरे पास कुछ एक्सक्लूसिव कुछ डिटेल्स हैं जो मैं आपके सामने रखूंगा। पहला काम हुआ था फरवरी 2026 पे जहां पर एक इंडियन ने प्लीट गिल्टी किया न्यूयॉर्क के अंदर कि यस भारत की जो इंटेलिजेंस एजेंसीज हैं वो अननोन गन मैन को भेजती हैं और जाकर वो वेस्ट में उन्होंने निजर को गीला कर दिया था। फरवरी में यह काम होता है मार्च 2026 में। कनाडा सडनली जो पूरा का पूरा सेंसिटिव एविडेंस है उसको छुपा लेता है। मर्डर ट्रायल के अंदर उस आदमी को बचाने के लिए कनाडा अमेरिका को डॉक्यूमेंट देता ही नहीं। ये मार्च में हुआ था। उसके बाद आता है जून में जून 2026। भारत ने अनाउंस कर दिया एक नया एग्रेसिव काउंटर टेररिज्म का एक डॉक्ट्राइन। काउंटर टेररिज्म का मतलब है कि अगर हमारे इंटरेस्ट या भारत की धरती को कोई भी अगर टच करने की कोशिश करेगा या धमकी देगा हम जाकर उसे कहीं भी मार सकते हैं। ये हमने ऑफिशियली डिक्लेअर कर दिया और जैसे ही हमने वो डिक्लेअर किया है अमेरिका का एंबेसडर वो जी7 को छोड़कर वो यहां पे आता है और सीधा अमित शाह के ऑफिस में बैठकर कुछ बातें। ये सारी बातें मैं आपके सामने रखूंगा क्योंकि चार डिफरेंट हेडलाइंस हैं जो आपको दिखती हैं। लेकिन चार डिफरेंट हेडलाइंस तीन डिफरेंट कंट्रीज में ये इंसिडेंट होते हैं।फाइनल मूव मैसिव हाई स्टेक्स का जिओपॉलिटिकल ऑपरेशन है जो हमारे आंखों के सामने हो रहा है। रूल्स चेंज हो रहे हैं ओवरनाइट। अब इस सारे को एक टेप को रिवाइंड करते हैं एक-एक करके कि हुआ क्या था और आगे इस मीटिंग में हुआ क्या? आप पहले आइए समर 2023 में निजर याद है आपको? हरदीप सिंह निजर उसको कुत्ते की तरह पार्किंग लॉट में कनाडा में गोलियों से भून दिया गया। मार दिया उसको। लेकिन उसके बाद जो एफबीआई है उसमें एक और प्लॉट था जहां पर जो पन्नू है उसको मारने की अननोन गवर्नमेंट ने कोशिश करी थी लेकिन  एफबीआई बीच में आ गया और उन्होंने अपने एसेट को पन्नू को उन्होंने बचा लिया न्यूयॉर्क के अंदर। उसके बाद क्या हुआ? यूनाइटेड स्टेट्स और कनाडा दोनों ने कोऑर्डिनेट करना शुरू कर दिया कि एक कैंपेन शुरू करते हैं कि किसी तरीके से भारत की गवर्नमेंट को अब रिस्पांसिबल करेंगे इन चीजों के ऊपर। जो जस्ट आउट जस्टिन था वैसे जस्टिन ट्रूडो अभी जस्ट आउट हो चुका है। ट्रूडो वो पार्लियामेंट में खड़े हो के क्या बोलता है कि हमारे पास एविडेंस है कि भारत की इंटेलिजेंस ने ये काम किया है।यूएसए का जो जस्टिस डिपार्टमेंट है उन्होंने भी एकदम से पूरे दुनिया में उन्होंने रेड नोटिस निकाल दिया कि भारत के कौन से ऑपरेटिव्स हैं जो कि काम कर रहे हैं।अमेरिका ने चार्ज किया एक भारत के नेशनल को जिसका नाम था निखिल गुप्ता। आपको मालूम है साथ में उन्होंने एक और भारत का इंटेलिजेंस का ऑफिसर रिटायर किया हुआ विकास यादव उसको भी इन्होंने इंडक्ट कर दिया कि यार ये दो लोग हैं जो ये सारे काम कर रहे हैं। अब वाशिंगटन को और कनाडा को लगा कि यार हमने हमने पूरा एक वाटर टाइट हमने केस बना लिया। अब ये भारत को हम कटघरे में खड़ा करेंगे। लेकिन उनको लगा कि न्यू दिल्ली ब्लिंक कर जाएगा। मिसकैलकुलेट कर दिया। रीज़न क्या था? अमित शाह होम मिनिस्टर हैं। उन्होंने और अजीत देवाल ने एक ही काम बोला प्रूफ दिखा दो। हम मान जाएंगे। प्रूफ उनके पास था नहीं क्योंकि जो अननोन गन मैन है वो बिना ट्रेस छोड़े वो काम करके आते हैं। कोई पता लगता ही नहीं कि कब आए और कब काम करके चली गई। अब ये तो हो गया जो 2023 में हुआ और 2024 में यह ड्रामा चलता रहा। फास्ट फॉरवर्ड कीजिए 2026 में। लैंडस्केप पूरी की पूरी डिफरेंट हो गई है। फ में निखिल गुप्ता ने प्लीड किया कि यस वो निजर के केस में या पन्नू के केस में वो इनवॉल्व था। वेस्टर्न मीडिया ने बोलना शुरू कर दिया ये तो विक्ट्री है। अमेरिका का जस्टिस सिस्टम ने निखिल गुप्ता को डंडे मारे और उसे सब कुछ उगलवा लिया। लेकिन उसके बाद आया मास्टर स्ट्रोक वो था कनाडा का। कनाडा का जो जस्टिस डिपार्टमेंट है उनके ऑफिशियल्स वो जाते हैं फेडरल कोर्ट के अंदर। और वो बोलते हैं कि हमें परमिशन चाहिए कि जो सेंसिटिव इंफॉर्मेशन हमारे हाथों में है मर्डर केस का निजर के मर्डर केस का वो हम विद होल्ड करना चाहते हैं। क्यों? जब पूछा गया कि अब ये डॉक्यूमेंट्स को रिलीज क्यों नहीं कर रहे? तो उन्होंने बोला हम इंटरनेशनल रिलेशंस को खराब नहीं करना चाहते। इसलिए हम ये डॉक्यूमेंट्स को छुपाना चाहते हैं। कनाडा ने वो डॉक्यूमेंट्स को सीक्रेटली अपने पास रख लिया। अमेरिका के साथ शेयर नहीं किया। यानी कि कनाडा फाइनली क्या बोल रहा है? हम एक ट्रांसपेरेंट ट्रायल हम नहीं चाहते। कनाडा बोल रहा है जो पहले इतना उछल उछल के बोल रहा था कि निजर का हम हिसाब किताब बराबर करेंगे भारत के साथ। अब बोलता है हमें केस चाहिए ही नहीं। आप केस को बंद कर दीजिए। जो एविडेंस ट्रेल था वो लीड करता ही नहीं है निखिल गुप्ता के पास। ना ही हमारे जो रॉ के एजेंट है उन तक यह डॉक्यूमेंट्स वो प्रूव ही नहीं करते कि ये लोग इनवॉल्व थे।कनाडा के अंदर वो एक्सपोज क्या कर रहे थे? वो एक्सपोज कर रहे थे जो डॉक्यूमेंट्स कनाडा के पास है वो एक्सपोज करते हैं नेटवर्क्स ड्रग्स के टेररिज्म के खिस्तानियों के जो गैंग वॉर्स हैं उसके और एक्सटॉशन का जो रैकेट है वो सारा का सारा इन्वॉल्व था उन डॉक्यूमेंट्स के अंदर जब उन्होंने बोला कि हम इंटरनेशनल अपने रिलेशंस को खराब नहीं करना चाहते उसका मतलब था वो ख़स्तानियों से अपने कंट्री को बचाना चाहते हैं इसलिए वो उनको ख़स्तानियों को एक्सपोज नहीं करना चाहते। ये वही चीजें हैं जो भारत इतनी देर से कनाडा को बोलता रहा कि भाई आपके पास ये खस्तानी जो हैं ये ट्रग्स का काम करते हैं। ये ड्रग्स और ड्रग्स ये दोनों का काम करते हैं। कनाडा से अमेरिका में पहुंचाने का काम ये ख़स्तानी कर रहे हैं। और वहां पे जो ड्रग का मनी है उससे ये ख़स्तान की मूवमेंट को इन्होंने जिंदा रखा हुआ है। ये तो हो गया जो अब तक हुआ। अब आते हैं जून 2026। ये जो US Ambassador  गौर की मीटिंग है उससे पहले हमने एक हथौड़ा मारा। गवर्नमेंट ने रिलीज किया एक पॉलिसी को। उसका नाम था प्रहार। अब ये प्रहार क्या है? प्रहार का मतलब है कि हम कोडिफाइड नेशनल काउंटर टेररिज्म की पॉलिसी हमने निकाल दी। मैसेज बड़ा ब्लंट और अनक्प्रोमाइजिंग था कि पूरे दुनिया में कहीं भी कोई सप्लाई चेन है टेरर इकोसिस्टम का। अब उसे डिस्मेंटल किया जाएगा। पूरे दुनिया में अकेला भारत में नहीं कहीं भी हो। यानी कि अब कोई डिफेंसिव पोश्चरिंग नहीं होगा। ना ही हम वैसे से परमिशन मांगेंगे कि जी हमारा पन्नू है हमें वापस कर दो। ठीक है? और नहीं तो उसकी जुड्डी पे आग लगा दो। हम कोई ऐसी बात नहीं करेंगे। खुद जाएंगे जाके आग लगा देंगेअगर किसी ने भी वो खस्तानी हो या आईएसआई हो वो कोई भी हो। अगर उन्होंने टेरर फंडिंग करी भारत के खिलाफ। ये प्रहार किया है जाएंगे प्रहार करेंगे। कहां पर? पहले तो भारत में अगर उनकी कोई एसेट है उसको फ्रीज़ कर दिया जाएगा। उसके बाद पूरे दुनिया में कहीं भी इनका नेटवर्क है कहीं भी यह बैठे हैं उसे हंट किया जाएगा और अननोन गन मैन ये लिखा नहीं है। ये मैं बता रहा हूं। वो अपना काम कराएंगे। जैसे ही आपने प्रहार अनाउंस किया है। उसके बाद क्या हुआ? प्रधानमंत्री मोदी पहुंच जाते हैं फ्रांस के अंदर। वहां पर डॉनल्ड ट्रंप से मिलते हैं। G7 की सबमिट करते हैं और वहां पर स्ट्रेटेजिकली चीजों के ऊपर बात होती है। बात क्या होती है? इंडोपेसिफिक है, मैरिटाइम सिक्योरिटी है। ये सारी बच्चों वाली बातें हमने कर ली। चलिए मैं बच्चों वाले बोल रहा हूं। वैसे डीप डीप टॉपिक्स हैं। अब इसके बाद क्या होता है? रियल डील जो था वो वहां पर नहीं हुआ। वो हुआ बैकग्राउंड में क्योंकि 24 घंटे उसके बाद सारा का सारा जो जो एक्शन है वो शिफ्ट होता है G7 से निकल कर वो न्यू दिल्ली। वो पहुंच गया। यूएसए के एंबेसडर सर्गीय कौर वो भारत पहुंचते हैं भाग-भाग कर और वो मिनिस्टर ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स जयशंकर से मीटिंग नहीं करते। वो बायपास करते हैं सारे डिप्लोमेटिक प्रोटोकॉल्स को। वो चलते हैं सीधा नॉर्थ ब्लॉक के अंदर और वहां पर पहुंचते हैं अमित शाह के सामने उनके ऑफिस में। अब मैं एक्सप्लेन करता हूं पहले तो ये अनप्रेसिडेंटेड क्यों है? और जी7 की मीटिंग को छोड़कर अगर आप वापस आ रहे हैं इसका मतलब है कुछ बड़ा प्रहार हमने कर लिया या करने वाले हैं। एंबेसडर जो होता है गौर एक डिप्लोमेट है। वो एंबेसडर है और वो डिप्लोमेट जो होता है वो हमेशा डिप्लोमेट से मीटिंग करता है। अमित शाह एक डिप्लोमेट नहीं है। वो कंट्रोल करते हैं भारत की इंटरनल सिक्योरिटी को, इंटेलिजेंस ब्यूरोस को और साथ में जो बॉर्डर की फर्सेस हैं वो उसे डील करते हैं अमित शाह। प्लस एक फाइल और है जो अमित शाह के पास है वो है एक्स्ट्राडिशन की फाइल। यानी कि भारत के खिलाफ किसी ने काम पूरे दुनिया में किया उसको पकड़ के उठा के वापस लेके आने का काम वो अमित शाह का है। अब जब यूएसए का एंबेसडर जब अमित शाह को एक जो होम मिनिस्टर है उसे मिलके आता है यानी कि डिप्लोमेसी खत्म हो गया। अब आप ऑपरेशनल मीटिंग के पास की तरफ आप जाना शुरू हो गए। इसलिए अमित शाह से मीटिंग हुआ। अब जो ऑफिशियल स्टेटमेंट है वो रिलीज हो गया। उस पे क्या लिखा गया है वो सुनिए तीन चीजें वो बात करता है काउंटर टेररिज्म के ऊपर काउंटर टेररिज्म तो अमेरिका में कनाडा में पाकिस्तान में बांग्लादेश में यही है काउंटर टेररिज्म के साथ-साथ आपने जोड़ दिया काउंटर नारकोटिक्स कि अब काउंटर टेररिज्म के ऊपर काम अमेरिका और भारत मिलकर करेंगे काउंटर नारकोटिक्स ड्रग्स के ऊपर भी भारत में भी यह एक पेंडेमिक बन चुका है और अमेरिका के अंदर भी यही चीज है इसके ऊपर जॉइंटली काम होगा लेकिन उसके उसके बाद तीसरी जो चीज थी वो स्टैंड अलोन थी ग्लेयरिंग एक वार्निंग है। क्या बोला गया? जॉइंटली हम जो क्रिमिनल्स हैं उसे जस्टिस पे लेके आएंगे बिटवीन बोथ द कंट्रीज। अगर अमेरिका का कोई उग्रवादी या कोई भी ऑपरेटिव अगर भारत में है तो भारत अमेरिका के साथ मिलकर उसे डंडे मारेगा, सीधा करेगा। और अगर भारत का कोई क्रिमिनल वो अमेरिका में बैठा है उसे भी वहीं पर सीधा किया जाएगा। अमेरिका भारत के साथ मिलकर भारत के बिहाफ पर वो काम करेगा। डंडे हम भी मारेंगे वो भी मारेंगे। दोस्तों, यह जेनेरिक टॉकिंग पॉइंट नहीं है। यह टारगेटेड एक एक्शन प्लान है जो स्वर्गीय गौर और अमित शाह ने मिलकर प्रहार के ऊपर काम करना शुरू कर दिया। अब जो जिओपॉलिटिकल रियलिटी है जिसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा। यूनाइटेड स्टेट्स के पास मैसिव एक ड्रग्स की क्राइसिस है। नारकोटिक्स वहां पर फ्रीली वो मूव करते हैं मेक्सिको से भी और कनाडा से भी। कनाडा से कौन लेके आता है? यही निग्जर के पार्टी के सारे के सारे खाली हैं। सारा ट्रकिंग का बिनेस उनके हाथ में है। भारत के अंदर भी जो ड्रग्स की प्रॉब्लम है वो बहुत ज्यादा बढ़ती जा रही है। अब इससे प्रॉब्लम दुगनी है। जब कनाडा में ख़स्तानी जब ड्रग्स में से पैसा कमाते हैं उसके बाद वो टेरर फाइनेंसिंग का काम करते हैं भारत में। जब भी टेरर का काम करना हो जैसे पंजाब में टेररिज्म फैलानी है, खाली मूवमेंट करना है, एक्सट्रीमिज्म करना है तो वो सारा का सारा इन पैसों से किया जाता है। बड़े ऑर्गेनाइज्ड वे से ये जो क्राइम के सिंडिकेट्स हैं वो ऑपरेट करते हैं अमेरिका में और भारत के अंदर। अब ये जो दो प्रॉब्लम्स है ये इंटरसेक्ट कर रही हैं। अमेरिका में ड्रग्स की प्रॉब्लम है और भारत में उसी ड्रग्स के पैसे से ड्रग्स का काम भारत में भी हो रहा है। प्लस एक्सट्रीमिज्म का काम वो भी हो रहा है। इसलिए इंटरसेक्ट कर रहा है उनकी दुगती रग और हमारी वो कॉमन है। इसलिए जो ये जो क्योंकि जो ख़स्तानी वहां पे काम कर रहे हैं वही ख़स्तानी भारत में भी वो काम कर रहे हैं। दोस्तों जो गैंग्स हैं वो क्या कर रहे हैं? ड्रग्स के मनी से अब वो वेपन्स खरीद रहे हैं। उसके बाद कैलिफोर्निया में, ब्रिटिश कोलंबिया में यहां पंजाब में उन्होंने गंध डाल के रखा हुआ है। और ये जो सेपरेटेस्ट जो नेटवर्क्स हैं जो टारगेट करते हैं भारत को कि हमने खाली स्थान बना लेना है। हमने कश्मीर अलग कर देना है।हमेशा काटने की ही बातें वो बोलते हैं। ये अब अमेरिका ने और भारत ने बोल दिया कि अब ये बदतमीजी नहीं चलेगी। आपको याद होगा जब बाइडन की गवर्नमेंट थी उसने इन इंडिविजुअल्स को निजर को पन्नू को उनको क्या बोला ये तो पॉलिटिकल एक्टिविस्ट है इनको फ्रीडम ऑफ स्पीच के अंडर हम इनको पकड़ नहीं सकते वो वहां पे बैठकर भारत की धरती के ऊपर वो बोलते हैं अमित शाह को गोली मार देंगे हम प्लेन उड़ा देंगे लेकिन फ्रीडम ऑफ स्पीच के अंदर उनको पकड़ा नहीं गया जैसे ही ट्रंप आए उन्होंने देखा कि यार ये कार्टल्स एक प्रॉब्लम है इसलिए वाशिंगटन ने फाइनली रियलाइज कर दिया कि भारत की अगर हेल्प मिल जाती है क्योंकि भारत ने ऑलरेडी प्रहार को अनाउंस कर दिया है। अगर हम अलाइन कर ले भारत के साथ तो हमारा जो यहां पे ड्रग्स का प्रॉब्लम है उसे डिस्मेंटल किया जा सकता है। क्योंकि जो करने वाले लोग हैं वो भारतीय ही है। इसलिए आज मीटिंग हुई है। दोस्तों आप सोच के देखिए जो प्लेयर्स है वो इनवॉल्वड कौन है? वो है ट्रांस नेशनल ड्रग्स के गैंग्स, एक्सट्रॉक्शन के रिंग्स। और जहां तक यहां तो पंजाब के अंदर जो हाईली सिक्योर प्रिजंस हैं जेल के अंदर लोग बैठे हैं। वहां से बैठकर वो कनाडा के अंदर ड्रग्स का काम कर रहे हैं। जेल में वो भी पंजाब के अंदर जहां पे पूरी सख्ती है। इसलिए भारत जब चीखता रहा कनाडा को कि आप जिन सांपों को पाल रहे हैं एक दिन आपको डसेंगे वो काम होना शुरू हो गया। इसलिए जो हमारी एजेंसीज हैं आज एफबीआई और कनाडा के जो सीक्रेट एजेंसीज हैं उसके साथ कोऑर्डिनेट कर कर हम उनको डोजियर भेज रहे हैं। हमने  फाइनेंसियल रिकॉर्ड्स जो हैं पूरे इनके नेचर पार्टी के या ख़स्तानियों के हमने एक्सचेंज करने शुरू कर दिए। वेस्ट अब तक हमारी इंटेलिजेंस की रिपोर्ट्स को इग्नोर करता रहा। क्योंकि उनको ख़स्तानियों की जरूरत थी गवर्नमेंट में आने के लिए। लेकिन अब जो कारने की गवर्नमेंट है वो बिना ख़स्तानियों के आई है। इसलिए अब उन्होंने हमारी बात सुननी शुरू कर दी। दोस्तों चेस बोर्ड फ्लिप हो चुका है। जो मीटिंग है भारत की अमित शाह की और सर गौर की वो ट्रांजैक्शनल है। ट्रांजैक्शनल क्यों बोल रहा हूं? क्योंकि जो यूएसए का कोऑपरेशन है वो अब हमें मिलना शुरू हो गया और हमारा कोऑपरेशन उनको मिलना शुरू हो गया। नॉट ओनली इन प्रहार बट इन समथिंग एल्स आल्सो। हम क्या बोल रहे हैं? यूएसए को सप्लाई चेस को डायवर्सिफाई करना है चाइना से। हम मदद कर रहे हैं। उसको इंडोपेसिफिक में भारत की जरूरत है। हम दे रहे हैं। जबकि इंडोपेसिफिक में से इंडो वर्ड निकाल दिया लेकिन इंडिया को नहीं निकाला। सिर्फ नाम में से इंडो निकाला है। अब इसके रिटर्न में यूएसए क्या बोल रहा है? यूएसए बोल रहा है कि जो पन्नू एंड पार्टी को हम प्रोटेक्ट कर रहे थे सीआईए और एफबीआई अब वो प्रोटेक्शन खत्म कर दी जाएगी। इसलिए गौर जब अमित शाह को मिलते हैं उन्होंने एक लिस्ट दिया है अमित शाह को और अमित शाह ने भी एक लिस्ट दे दिया। लिस्ट में कई नाम है जो कॉमन है। उसमें पन्नू का नाम आ चुका है। नाउ डोज़ियर्स दोनों ने एक्सचेंज कर लिए। दोनों मैच कर रहे हैं कि कॉमन आदमी कौन है। उनके लोग भारत में कौन से बैठे हैं और हमारे लोग अमेरिका में कौन से बैठे हैं जिनको पकड़ के अब सीधा करना है। अब कोऑर्डिनेट किया जाएगा कि बैंक अकाउंट्स को वहां पर भी फ्रीज़ किया जाएगा और भारत के अंदर भी फ्रीज़ किया जाएगा। यानी कि दोनों पैरेलली एक ही बंदे के ऊपर

अब काम करना शुरू करेंगे। लिस्ट इसीलिए एक्सचेंज की गई है। यह जो म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस है उसके ऊपर काम होना शुरू हो गया ताकि लूप होल रहे नहीं। अगर यहां से कोई भाग कर कोई अमेरिका में या यूके में या कनाडा में पहुंच गया है। अब उसको वापस लेके आने का काम दोनों कंट्रीज इकट्ठी मिलकर लीगली उसको वापस करेंगी। दोस्तों कनाडा जो डेस्पिरेटली ट्राई करता रहा कि हमें एक्सपोज करने के लिए आज एविडेंस वो प्रोटेक्ट कर रहा है उसे हाइड कर रहा है क्योंकि उसे एफडीए की जरूरत है भारत के साथ निजर गया तेल लेने कनाडा बोलता है ऐसी तैसी फराए हमें फर्क नहीं पड़ता हम भारत की मार्केट को छोड़ नहीं सकते दूसरी तरफ से यूनाइटेड स्टेट्स उसने भी डिसाइड कर लिया कि ड्रग्स के कार्ट्स को अब खत्म करना है उसके लिए भारत की जरूरत है और इसलिए अगर वो एंटी इंडिया के जो एलिमेंट्स है जिसको मैं एसेट्स बोलता हूं पन्नू जैसे जो सीआईए के एसेट्स थे अगर उसको वो प्रोटेक्ट करता है तो वो अपनी जो पकड़ है भारत की मार्केट के ऊपर वो लूज़ कर जाएगा वो लूज़ करना चाहता नहीं है इसलिए भारत ने क्या किया हमने अपनी लिवरेज को क्रिएट किया हमने अपना खुद का प्रहार का जो पॉलिसी है काउंटर टेरर टेरर का जो डॉक्ट्रिन है हमने खुद उसको क्रिएट किया और ल्च कर दिया इसलिए जब सुपर पावर्स को अब जरूरत है हमारी हमने क्या किया। हमने भी बिल दे दिया उनको। यह हमारा बिल है। बिल के अंदर हमने कुछ नाम दिए हैं कि नाम चाहिए। दोस्तों बिल बिल वाज़ प्रेजेंटेड इन फ्रांस। दैट इज व्हाई G7 में छोड़कर ये बंदा बेचारा वापस आया है और सीधा उसने बिल पे किया नॉर्थ ब्लॉक में अमित शाह के सामने। अब वॉच क्या करना है? अगले कुछ तीन चार महीनों में आप देखेंगे अननोन एक्टिविटीज इंक्रीस हो जाएंगी। आप देखेंगे कि कुछ अरेस्ट हो गए हैं नॉर्थ अमेरिका में कुछ लोग अंडर द गाइस ऑफ दिखाया जाएगा कि नारकोटिक्स को क्रैक डाउन करने में लिए हमने पन्नू को पकड़ लिया। पन्नू मैं एग्जांपल दे रहा हूं वो कोई भी पन्नू शन्नू टन्नू कुछ भी हो सकता है। दूसरा एक और होगा। अब अकाउंट्स जो है वो फ्रीज किए जाएंगे कनाडा के अंदर भी भारत के अंदर भी और अमेरिका के अंदर भी कुछ लोगों के। आप न्यूज़ देखेंगे ये सारी चीजें आपके सामने होती हुई दिखाई देंगी अगले कुछ महीनों में। और क्वाइटली कुछ लोगों को डिपोर्ट किया जाएगा अमेरिका कनाडा से भारत के अंदर। ये सारी चीजें वो है जो इवनिंग न्यूज़ में नहीं आएंगी। दोस्तों ऑपरेशंस ऑलरेडी शुरू हो चुके हैं। मैंने पहले शुरू में बोला था आपको कुछ बहुत बड़ा है जिसके लिए अमित शाह के साथ मीटिंग करी है। ये डिप्लोमेटिक ये डिप्लोमेसी नहीं है। जॉइंट टास्क फोर्स अब क्रिएट की जा रही है अमेरिका, कनाडा और भारत के बीच में। और जो लोग सोचते थे कि अमेरिका में, कनाडा में बैठकर वो अनटचेबल हैं। वो न्यूयॉर्क में और वेंकूवर में बैठकर वो पूरा कार्टल्स का काम चलाएंगे और भारत में दंगे करवाएंगे। वो काम खत्म हो गया। अब ये जो लिस्ट है वो ऑलरेडी गौर के टेबल पे और नॉर्थ ब्लॉक में अमित शाह के टेबल पे वो लिस्ट पहुंच चुकी है।  अगला जो दरवाजा है वो किसका खटकाया जाएगा? भारत में, अमेरिका में और कनाडा में? दो नाम देता हूं पन्नू का या मोहम्मद का।कि आपकी जो रिक्वेस्ट है वो मोहम्मद के डंडे पहले मारने चाहिए या पन्नू के।

 जय हिंद।



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 एक डील जो दिल्ली में बैठकर हुई गौर और अमित शाह के बीच में। एक सीक्रेट मीटिंग था जो नॉर्थ ब्लॉक में किया गया। लेकिन इस मीटिंग में आने से पहले कुछ चीजें हैं जो पहले हुई है। चार न्यूज़ हैं जो इंटररिलेटेड है वो आपको समझनी पड़ेगी।मेरे पास कुछ एक्सक्लूसिव कुछ डिटेल्स हैं जो मैं आपके सामने रखूंगा। पहला काम हुआ था फरवरी 2026 पे जहां पर एक इंडियन ने प्लीट गिल्टी किया न्यूयॉर्क के अंदर कि यस भारत की जो इंटेलिजेंस एजेंसीज हैं वो अननोन गन मैन को भेजती हैं और जाकर वो वेस्ट में उन्होंने निजर को गीला कर दिया था। फरवरी में यह काम होता है मार्च 2026 में। कनाडा सडनली जो पूरा का पूरा सेंसिटिव एविडेंस है उसको छुपा लेता है। मर्डर ट्रायल के अंदर उस आदमी को बचाने के लिए कनाडा अमेरिका को डॉक्यूमेंट देता ही नहीं। ये मार्च में हुआ था। उसके बाद आता है जून में जून 2026। भारत ने अनाउंस कर दिया एक नया एग्रेसिव काउंटर टेररिज्म का एक डॉक्ट्राइन। काउंटर टेररिज्म का मतलब है कि अगर हमारे इंटरेस्ट या भारत की धरती को कोई भी अगर टच करने की कोशिश करेगा या धमकी देगा हम जाकर उसे कहीं भी मार सकते हैं। ये हमने ऑफिशियली डिक्लेअर कर दिया और जैसे ही हमने वो डिक्लेअर किया है अमेरिका का एंबेसडर वो जी7 को छोड़कर वो यहां पे आता है और सीधा अमित शाह के ऑफिस में बैठकर कुछ बातें। ये सारी बातें मैं आपके सामने रखूंगा क्योंकि चार डिफरेंट हेडलाइंस हैं जो आपको दिखती हैं। लेकिन चार डिफरेंट हेडलाइंस तीन डिफरेंट कंट्रीज में ये इंसिडेंट होते हैं।फाइनल मूव मैसिव हाई स्टेक्स का जिओपॉलिटिकल ऑपरेशन है जो हमारे आंखों के सामने हो रहा है। रूल्स चेंज हो रहे हैं ओवरनाइट। अब इस सारे को एक टेप को रिवाइंड करते हैं एक-एक करके कि हुआ क्या था और आगे इस मीटिंग में हुआ क्या? आप पहले आइए समर 2023 में निजर याद है आपको? हरदीप सिंह निजर उसको कुत्ते की तरह पार्किंग लॉट में कनाडा में गोलियों से भून दिया गया। मार दिया उसको। लेकिन उसके बाद जो एफबीआई है उसमें एक और प्लॉट था जहां पर जो पन्नू है उसको मारने की अननोन गवर्नमेंट ने कोशिश करी थी लेकिन  एफबीआई बीच में आ गया और उन्होंने अपने एसेट को पन्नू को उन्होंने बचा लिया न्यूयॉर्क के अंदर। उसके बाद क्या हुआ? यूनाइटेड स्टेट्स और कनाडा दोनों ने कोऑर्डिनेट करना शुरू कर दिया कि एक कैंपेन शुरू करते हैं कि किसी तरीके से भारत की गवर्नमेंट को अब रिस्पांसिबल करेंगे इन चीजों के ऊपर। जो जस्ट आउट जस्टिन था वैसे जस्टिन ट्रूडो अभी जस्ट आउट हो चुका है। ट्रूडो वो पार्लियामेंट में खड़े हो के क्या बोलता है कि हमारे पास एविडेंस है कि भारत की इंटेलिजेंस ने ये काम किया है।यूएसए का जो जस्टिस डिपार्टमेंट है उन्होंने भी एकदम से पूरे दुनिया में उन्होंने रेड नोटिस निकाल दिया कि भारत के कौन से ऑपरेटिव्स हैं जो कि काम कर रहे हैं।अमेरिका ने चार्ज किया एक भारत के नेशनल को जिसका नाम था निखिल गुप्ता। आपको मालूम है साथ में उन्होंने एक और भारत का इंटेलिजेंस का ऑफिसर रिटायर किया हुआ विकास यादव उसको भी इन्होंने इंडक्ट कर दिया कि यार ये दो लोग हैं जो ये सारे काम कर रहे हैं। अब वाशिंगटन को और कनाडा को लगा कि यार हमने हमने पूरा एक वाटर टाइट हमने केस बना लिया। अब ये भारत को हम कटघरे में खड़ा करेंगे। लेकिन उनको लगा कि न्यू दिल्ली ब्लिंक कर जाएगा। मिसकैलकुलेट कर दिया। रीज़न क्या था? अमित शाह होम मिनिस्टर हैं। उन्होंने और अजीत देवाल ने एक ही काम बोला प्रूफ दिखा दो। हम मान जाएंगे। प्रूफ उनके पास था नहीं क्योंकि जो अननोन गन मैन है वो बिना ट्रेस छोड़े वो काम करके आते हैं। कोई पता लगता ही नहीं कि कब आए और कब काम करके चली गई। अब ये तो हो गया जो 2023 में हुआ और 2024 में यह ड्रामा चलता रहा। फास्ट फॉरवर्ड कीजिए 2026 में। लैंडस्केप पूरी की पूरी डिफरेंट हो गई है। फ में निखिल गुप्ता ने प्लीड किया कि यस वो निजर के केस में या पन्नू के केस में वो इनवॉल्व था। वेस्टर्न मीडिया ने बोलना शुरू कर दिया ये तो विक्ट्री है। अमेरिका का जस्टिस सिस्टम ने निखिल गुप्ता को डंडे मारे और उसे सब कुछ उगलवा लिया। लेकिन उसके बाद आया मास्टर स्ट्रोक वो था कनाडा का। कनाडा का जो जस्टिस डिपार्टमेंट है उनके ऑफिशियल्स वो जाते हैं फेडरल कोर्ट के अंदर। और वो बोलते हैं कि हमें परमिशन चाहिए कि जो सेंसिटिव इंफॉर्मेशन हमारे हाथों में है मर्डर केस का निजर के मर्डर केस का वो हम विद होल्ड करना चाहते हैं। क्यों? जब पूछा गया कि अब ये डॉक्यूमेंट्स को रिलीज क्यों नहीं कर रहे? तो उन्होंने बोला हम इंटरनेशनल रिलेशंस को खराब नहीं करना चाहते। इसलिए हम ये डॉक्यूमेंट्स को छुपाना चाहते हैं। कनाडा ने वो डॉक्यूमेंट्स को सीक्रेटली अपने पास रख लिया। अमेरिका के साथ शेयर नहीं किया। यानी कि कनाडा फाइनली क्या बोल रहा है? हम एक ट्रांसपेरेंट ट्रायल हम नहीं चाहते। कनाडा बोल रहा है जो पहले इतना उछल उछल के बोल रहा था कि निजर का हम हिसाब किताब बराबर करेंगे भारत के साथ। अब बोलता है हमें केस चाहिए ही नहीं। आप केस को बंद कर दीजिए। जो एविडेंस ट्रेल था वो लीड करता ही नहीं है निखिल गुप्ता के पास। ना ही हमारे जो रॉ के एजेंट है उन तक यह डॉक्यूमेंट्स वो प्रूव ही नहीं करते कि ये लोग इनवॉल्व थे।कनाडा के अंदर वो एक्सपोज क्या कर रहे थे? वो एक्सपोज कर रहे थे जो डॉक्यूमेंट्स कनाडा के पास है वो एक्सपोज करते हैं नेटवर्क्स ड्रग्स के टेररिज्म के खिस्तानियों के जो गैंग वॉर्स हैं उसके और एक्सटॉशन का जो रैकेट है वो सारा का सारा इन्वॉल्व था उन डॉक्यूमेंट्स के अंदर जब उन्होंने बोला कि हम इंटरनेशनल अपने रिलेशंस को खराब नहीं करना चाहते उसका मतलब था वो ख़स्तानियों से अपने कंट्री को बचाना चाहते हैं इसलिए वो उनको ख़स्तानियों को एक्सपोज नहीं करना चाहते। ये वही चीजें हैं जो भारत इतनी देर से कनाडा को बोलता रहा कि भाई आपके पास ये खस्तानी जो हैं ये ट्रग्स का काम करते हैं। ये ड्रग्स और ड्रग्स ये दोनों का काम करते हैं। कनाडा से अमेरिका में पहुंचाने का काम ये ख़स्तानी कर रहे हैं। और वहां पे जो ड्रग का मनी है उससे ये ख़स्तान की मूवमेंट को इन्होंने जिंदा रखा हुआ है। ये तो हो गया जो अब तक हुआ। अब आते हैं जून 2026। ये जो US Ambassador  गौर की मीटिंग है उससे पहले हमने एक हथौड़ा मारा। गवर्नमेंट ने रिलीज किया एक पॉलिसी को। उसका नाम था प्रहार। अब ये प्रहार क्या है? प्रहार का मतलब है कि हम कोडिफाइड नेशनल काउंटर टेररिज्म की पॉलिसी हमने निकाल दी। मैसेज बड़ा ब्लंट और अनक्प्रोमाइजिंग था कि पूरे दुनिया में कहीं भी कोई सप्लाई चेन है टेरर इकोसिस्टम का। अब उसे डिस्मेंटल किया जाएगा। पूरे दुनिया में अकेला भारत में नहीं कहीं भी हो। यानी कि अब कोई डिफेंसिव पोश्चरिंग नहीं होगा। ना ही हम वैसे से परमिशन मांगेंगे कि जी हमारा पन्नू है हमें वापस कर दो। ठीक है? और नहीं तो उसकी जुड्डी पे आग लगा दो। हम कोई ऐसी बात नहीं करेंगे। खुद जाएंगे जाके आग लगा देंगेअगर किसी ने भी वो खस्तानी हो या आईएसआई हो वो कोई भी हो। अगर उन्होंने टेरर फंडिंग करी भारत के खिलाफ। ये प्रहार किया है जाएंगे प्रहार करेंगे। कहां पर? पहले तो भारत में अगर उनकी कोई एसेट है उसको फ्रीज़ कर दिया जाएगा। उसके बाद पूरे दुनिया में कहीं भी इनका नेटवर्क है कहीं भी यह बैठे हैं उसे हंट किया जाएगा और अननोन गन मैन ये लिखा नहीं है। ये मैं बता रहा हूं। वो अपना काम कराएंगे। जैसे ही आपने प्रहार अनाउंस किया है। उसके बाद क्या हुआ? प्रधानमंत्री मोदी पहुंच जाते हैं फ्रांस के अंदर। वहां पर डॉनल्ड ट्रंप से मिलते हैं। G7 की सबमिट करते हैं और वहां पर स्ट्रेटेजिकली चीजों के ऊपर बात होती है। बात क्या होती है? इंडोपेसिफिक है, मैरिटाइम सिक्योरिटी है। ये सारी बच्चों वाली बातें हमने कर ली। चलिए मैं बच्चों वाले बोल रहा हूं। वैसे डीप डीप टॉपिक्स हैं। अब इसके बाद क्या होता है? रियल डील जो था वो वहां पर नहीं हुआ। वो हुआ बैकग्राउंड में क्योंकि 24 घंटे उसके बाद सारा का सारा जो जो एक्शन है वो शिफ्ट होता है G7 से निकल कर वो न्यू दिल्ली। वो पहुंच गया। यूएसए के एंबेसडर सर्गीय कौर वो भारत पहुंचते हैं भाग-भाग कर और वो मिनिस्टर ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स जयशंकर से मीटिंग नहीं करते। वो बायपास करते हैं सारे डिप्लोमेटिक प्रोटोकॉल्स को। वो चलते हैं सीधा नॉर्थ ब्लॉक के अंदर और वहां पर पहुंचते हैं अमित शाह के सामने उनके ऑफिस में। अब मैं एक्सप्लेन करता हूं पहले तो ये अनप्रेसिडेंटेड क्यों है? और जी7 की मीटिंग को छोड़कर अगर आप वापस आ रहे हैं इसका मतलब है कुछ बड़ा प्रहार हमने कर लिया या करने वाले हैं। एंबेसडर जो होता है गौर एक डिप्लोमेट है। वो एंबेसडर है और वो डिप्लोमेट जो होता है वो हमेशा डिप्लोमेट से मीटिंग करता है। अमित शाह एक डिप्लोमेट नहीं है। वो कंट्रोल करते हैं भारत की इंटरनल सिक्योरिटी को, इंटेलिजेंस ब्यूरोस को और साथ में जो बॉर्डर की फर्सेस हैं वो उसे डील करते हैं अमित शाह। प्लस एक फाइल और है जो अमित शाह के पास है वो है एक्स्ट्राडिशन की फाइल। यानी कि भारत के खिलाफ किसी ने काम पूरे दुनिया में किया उसको पकड़ के उठा के वापस लेके आने का काम वो अमित शाह का है। अब जब यूएसए का एंबेसडर जब अमित शाह को एक जो होम मिनिस्टर है उसे मिलके आता है यानी कि डिप्लोमेसी खत्म हो गया। अब आप ऑपरेशनल मीटिंग के पास की तरफ आप जाना शुरू हो गए। इसलिए अमित शाह से मीटिंग हुआ। अब जो ऑफिशियल स्टेटमेंट है वो रिलीज हो गया। उस पे क्या लिखा गया है वो सुनिए तीन चीजें वो बात करता है काउंटर टेररिज्म के ऊपर काउंटर टेररिज्म तो अमेरिका में कनाडा में पाकिस्तान में बांग्लादेश में यही है काउंटर टेररिज्म के साथ-साथ आपने जोड़ दिया काउंटर नारकोटिक्स कि अब काउंटर टेररिज्म के ऊपर काम अमेरिका और भारत मिलकर करेंगे काउंटर नारकोटिक्स ड्रग्स के ऊपर भी भारत में भी यह एक पेंडेमिक बन चुका है और अमेरिका के अंदर भी यही चीज है इसके ऊपर जॉइंटली काम होगा लेकिन उसके उसके बाद तीसरी जो चीज थी वो स्टैंड अलोन थी ग्लेयरिंग एक वार्निंग है। क्या बोला गया? जॉइंटली हम जो क्रिमिनल्स हैं उसे जस्टिस पे लेके आएंगे बिटवीन बोथ द कंट्रीज। अगर अमेरिका का कोई उग्रवादी या कोई भी ऑपरेटिव अगर भारत में है तो भारत अमेरिका के साथ मिलकर उसे डंडे मारेगा, सीधा करेगा। और अगर भारत का कोई क्रिमिनल वो अमेरिका में बैठा है उसे भी वहीं पर सीधा किया जाएगा। अमेरिका भारत के साथ मिलकर भारत के बिहाफ पर वो काम करेगा। डंडे हम भी मारेंगे वो भी मारेंगे। दोस्तों, यह जेनेरिक टॉकिंग पॉइंट नहीं है। यह टारगेटेड एक एक्शन प्लान है जो स्वर्गीय गौर और अमित शाह ने मिलकर प्रहार के ऊपर काम करना शुरू कर दिया। अब जो जिओपॉलिटिकल रियलिटी है जिसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा। यूनाइटेड स्टेट्स के पास मैसिव एक ड्रग्स की क्राइसिस है। नारकोटिक्स वहां पर फ्रीली वो मूव करते हैं मेक्सिको से भी और कनाडा से भी। कनाडा से कौन लेके आता है? यही निग्जर के पार्टी के सारे के सारे खाली हैं। सारा ट्रकिंग का बिनेस उनके हाथ में है। भारत के अंदर भी जो ड्रग्स की प्रॉब्लम है वो बहुत ज्यादा बढ़ती जा रही है। अब इससे प्रॉब्लम दुगनी है। जब कनाडा में ख़स्तानी जब ड्रग्स में से पैसा कमाते हैं उसके बाद वो टेरर फाइनेंसिंग का काम करते हैं भारत में। जब भी टेरर का काम करना हो जैसे पंजाब में टेररिज्म फैलानी है, खाली मूवमेंट करना है, एक्सट्रीमिज्म करना है तो वो सारा का सारा इन पैसों से किया जाता है। बड़े ऑर्गेनाइज्ड वे से ये जो क्राइम के सिंडिकेट्स हैं वो ऑपरेट करते हैं अमेरिका में और भारत के अंदर। अब ये जो दो प्रॉब्लम्स है ये इंटरसेक्ट कर रही हैं। अमेरिका में ड्रग्स की प्रॉब्लम है और भारत में उसी ड्रग्स के पैसे से ड्रग्स का काम भारत में भी हो रहा है। प्लस एक्सट्रीमिज्म का काम वो भी हो रहा है। इसलिए इंटरसेक्ट कर रहा है उनकी दुगती रग और हमारी वो कॉमन है। इसलिए जो ये जो क्योंकि जो ख़स्तानी वहां पे काम कर रहे हैं वही ख़स्तानी भारत में भी वो काम कर रहे हैं। दोस्तों जो गैंग्स हैं वो क्या कर रहे हैं? ड्रग्स के मनी से अब वो वेपन्स खरीद रहे हैं। उसके बाद कैलिफोर्निया में, ब्रिटिश कोलंबिया में यहां पंजाब में उन्होंने गंध डाल के रखा हुआ है। और ये जो सेपरेटेस्ट जो नेटवर्क्स हैं जो टारगेट करते हैं भारत को कि हमने खाली स्थान बना लेना है। हमने कश्मीर अलग कर देना है।हमेशा काटने की ही बातें वो बोलते हैं। ये अब अमेरिका ने और भारत ने बोल दिया कि अब ये बदतमीजी नहीं चलेगी। आपको याद होगा जब बाइडन की गवर्नमेंट थी उसने इन इंडिविजुअल्स को निजर को पन्नू को उनको क्या बोला ये तो पॉलिटिकल एक्टिविस्ट है इनको फ्रीडम ऑफ स्पीच के अंडर हम इनको पकड़ नहीं सकते वो वहां पे बैठकर भारत की धरती के ऊपर वो बोलते हैं अमित शाह को गोली मार देंगे हम प्लेन उड़ा देंगे लेकिन फ्रीडम ऑफ स्पीच के अंदर उनको पकड़ा नहीं गया जैसे ही ट्रंप आए उन्होंने देखा कि यार ये कार्टल्स एक प्रॉब्लम है इसलिए वाशिंगटन ने फाइनली रियलाइज कर दिया कि भारत की अगर हेल्प मिल जाती है क्योंकि भारत ने ऑलरेडी प्रहार को अनाउंस कर दिया है। अगर हम अलाइन कर ले भारत के साथ तो हमारा जो यहां पे ड्रग्स का प्रॉब्लम है उसे डिस्मेंटल किया जा सकता है। क्योंकि जो करने वाले लोग हैं वो भारतीय ही है। इसलिए आज मीटिंग हुई है। दोस्तों आप सोच के देखिए जो प्लेयर्स है वो इनवॉल्वड कौन है? वो है ट्रांस नेशनल ड्रग्स के गैंग्स, एक्सट्रॉक्शन के रिंग्स। और जहां तक यहां तो पंजाब के अंदर जो हाईली सिक्योर प्रिजंस हैं जेल के अंदर लोग बैठे हैं। वहां से बैठकर वो कनाडा के अंदर ड्रग्स का काम कर रहे हैं। जेल में वो भी पंजाब के अंदर जहां पे पूरी सख्ती है। इसलिए भारत जब चीखता रहा कनाडा को कि आप जिन सांपों को पाल रहे हैं एक दिन आपको डसेंगे वो काम होना शुरू हो गया। इसलिए जो हमारी एजेंसीज हैं आज एफबीआई और कनाडा के जो सीक्रेट एजेंसीज हैं उसके साथ कोऑर्डिनेट कर कर हम उनको डोजियर भेज रहे हैं। हमने  फाइनेंसियल रिकॉर्ड्स जो हैं पूरे इनके नेचर पार्टी के या ख़स्तानियों के हमने एक्सचेंज करने शुरू कर दिए। वेस्ट अब तक हमारी इंटेलिजेंस की रिपोर्ट्स को इग्नोर करता रहा। क्योंकि उनको ख़स्तानियों की जरूरत थी गवर्नमेंट में आने के लिए। लेकिन अब जो कारने की गवर्नमेंट है वो बिना ख़स्तानियों के आई है। इसलिए अब उन्होंने हमारी बात सुननी शुरू कर दी। दोस्तों चेस बोर्ड फ्लिप हो चुका है। जो मीटिंग है भारत की अमित शाह की और सर गौर की वो ट्रांजैक्शनल है। ट्रांजैक्शनल क्यों बोल रहा हूं? क्योंकि जो यूएसए का कोऑपरेशन है वो अब हमें मिलना शुरू हो गया और हमारा कोऑपरेशन उनको मिलना शुरू हो गया। नॉट ओनली इन प्रहार बट इन समथिंग एल्स आल्सो। हम क्या बोल रहे हैं? यूएसए को सप्लाई चेस को डायवर्सिफाई करना है चाइना से। हम मदद कर रहे हैं। उसको इंडोपेसिफिक में भारत की जरूरत है। हम दे रहे हैं। जबकि इंडोपेसिफिक में से इंडो वर्ड निकाल दिया लेकिन इंडिया को नहीं निकाला। सिर्फ नाम में से इंडो निकाला है। अब इसके रिटर्न में यूएसए क्या बोल रहा है? यूएसए बोल रहा है कि जो पन्नू एंड पार्टी को हम प्रोटेक्ट कर रहे थे सीआईए और एफबीआई अब वो प्रोटेक्शन खत्म कर दी जाएगी। इसलिए गौर जब अमित शाह को मिलते हैं उन्होंने एक लिस्ट दिया है अमित शाह को और अमित शाह ने भी एक लिस्ट दे दिया। लिस्ट में कई नाम है जो कॉमन है। उसमें पन्नू का नाम आ चुका है। नाउ डोज़ियर्स दोनों ने एक्सचेंज कर लिए। दोनों मैच कर रहे हैं कि कॉमन आदमी कौन है। उनके लोग भारत में कौन से बैठे हैं और हमारे लोग अमेरिका में कौन से बैठे हैं जिनको पकड़ के अब सीधा करना है। अब कोऑर्डिनेट किया जाएगा कि बैंक अकाउंट्स को वहां पर भी फ्रीज़ किया जाएगा और भारत के अंदर भी फ्रीज़ किया जाएगा। यानी कि दोनों पैरेलली एक ही बंदे के ऊपर

अब काम करना शुरू करेंगे। लिस्ट इसीलिए एक्सचेंज की गई है। यह जो म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस है उसके ऊपर काम होना शुरू हो गया ताकि लूप होल रहे नहीं। अगर यहां से कोई भाग कर कोई अमेरिका में या यूके में या कनाडा में पहुंच गया है। अब उसको वापस लेके आने का काम दोनों कंट्रीज इकट्ठी मिलकर लीगली उसको वापस करेंगी। दोस्तों कनाडा जो डेस्पिरेटली ट्राई करता रहा कि हमें एक्सपोज करने के लिए आज एविडेंस वो प्रोटेक्ट कर रहा है उसे हाइड कर रहा है क्योंकि उसे एफडीए की जरूरत है भारत के साथ निजर गया तेल लेने कनाडा बोलता है ऐसी तैसी फराए हमें फर्क नहीं पड़ता हम भारत की मार्केट को छोड़ नहीं सकते दूसरी तरफ से यूनाइटेड स्टेट्स उसने भी डिसाइड कर लिया कि ड्रग्स के कार्ट्स को अब खत्म करना है उसके लिए भारत की जरूरत है और इसलिए अगर वो एंटी इंडिया के जो एलिमेंट्स है जिसको मैं एसेट्स बोलता हूं पन्नू जैसे जो सीआईए के एसेट्स थे अगर उसको वो प्रोटेक्ट करता है तो वो अपनी जो पकड़ है भारत की मार्केट के ऊपर वो लूज़ कर जाएगा वो लूज़ करना चाहता नहीं है इसलिए भारत ने क्या किया हमने अपनी लिवरेज को क्रिएट किया हमने अपना खुद का प्रहार का जो पॉलिसी है काउंटर टेरर टेरर का जो डॉक्ट्रिन है हमने खुद उसको क्रिएट किया और ल्च कर दिया इसलिए जब सुपर पावर्स को अब जरूरत है हमारी हमने क्या किया। हमने भी बिल दे दिया उनको। यह हमारा बिल है। बिल के अंदर हमने कुछ नाम दिए हैं कि नाम चाहिए। दोस्तों बिल बिल वाज़ प्रेजेंटेड इन फ्रांस। दैट इज व्हाई G7 में छोड़कर ये बंदा बेचारा वापस आया है और सीधा उसने बिल पे किया नॉर्थ ब्लॉक में अमित शाह के सामने। अब वॉच क्या करना है? अगले कुछ तीन चार महीनों में आप देखेंगे अननोन एक्टिविटीज इंक्रीस हो जाएंगी। आप देखेंगे कि कुछ अरेस्ट हो गए हैं नॉर्थ अमेरिका में कुछ लोग अंडर द गाइस ऑफ दिखाया जाएगा कि नारकोटिक्स को क्रैक डाउन करने में लिए हमने पन्नू को पकड़ लिया। पन्नू मैं एग्जांपल दे रहा हूं वो कोई भी पन्नू शन्नू टन्नू कुछ भी हो सकता है। दूसरा एक और होगा। अब अकाउंट्स जो है वो फ्रीज किए जाएंगे कनाडा के अंदर भी भारत के अंदर भी और अमेरिका के अंदर भी कुछ लोगों के। आप न्यूज़ देखेंगे ये सारी चीजें आपके सामने होती हुई दिखाई देंगी अगले कुछ महीनों में। और क्वाइटली कुछ लोगों को डिपोर्ट किया जाएगा अमेरिका कनाडा से भारत के अंदर। ये सारी चीजें वो है जो इवनिंग न्यूज़ में नहीं आएंगी। दोस्तों ऑपरेशंस ऑलरेडी शुरू हो चुके हैं। मैंने पहले शुरू में बोला था आपको कुछ बहुत बड़ा है जिसके लिए अमित शाह के साथ मीटिंग करी है। ये डिप्लोमेटिक ये डिप्लोमेसी नहीं है। जॉइंट टास्क फोर्स अब क्रिएट की जा रही है अमेरिका, कनाडा और भारत के बीच में। और जो लोग सोचते थे कि अमेरिका में, कनाडा में बैठकर वो अनटचेबल हैं। वो न्यूयॉर्क में और वेंकूवर में बैठकर वो पूरा कार्टल्स का काम चलाएंगे और भारत में दंगे करवाएंगे। वो काम खत्म हो गया। अब ये जो लिस्ट है वो ऑलरेडी गौर के टेबल पे और नॉर्थ ब्लॉक में अमित शाह के टेबल पे वो लिस्ट पहुंच चुकी है।  अगला जो दरवाजा है वो किसका खटकाया जाएगा? भारत में, अमेरिका में और कनाडा में? दो नाम देता हूं पन्नू का या मोहम्मद का।कि आपकी जो रिक्वेस्ट है वो मोहम्मद के डंडे पहले मारने चाहिए या पन्नू के।

 जय हिंद।



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DOCTRINE PRAHAR

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 एक डील जो दिल्ली में बैठकर हुई गौर और अमित शाह के बीच में। एक सीक्रेट मीटिंग था जो नॉर्थ ब्लॉक में किया गया। लेकिन इस मीटिंग में आने से पहले कुछ चीजें हैं जो पहले हुई है। चार न्यूज़ हैं जो इंटररिलेटेड है वो आपको समझनी पड़ेगी।मेरे पास कुछ एक्सक्लूसिव कुछ डिटेल्स हैं जो मैं आपके सामने रखूंगा। पहला काम हुआ था फरवरी 2026 पे जहां पर एक इंडियन ने प्लीट गिल्टी किया न्यूयॉर्क के अंदर कि यस भारत की जो इंटेलिजेंस एजेंसीज हैं वो अननोन गन मैन को भेजती हैं और जाकर वो वेस्ट में उन्होंने निजर को गीला कर दिया था। फरवरी में यह काम होता है मार्च 2026 में। कनाडा सडनली जो पूरा का पूरा सेंसिटिव एविडेंस है उसको छुपा लेता है। मर्डर ट्रायल के अंदर उस आदमी को बचाने के लिए कनाडा अमेरिका को डॉक्यूमेंट देता ही नहीं। ये मार्च में हुआ था। उसके बाद आता है जून में जून 2026। भारत ने अनाउंस कर दिया एक नया एग्रेसिव काउंटर टेररिज्म का एक डॉक्ट्राइन। काउंटर टेररिज्म का मतलब है कि अगर हमारे इंटरेस्ट या भारत की धरती को कोई भी अगर टच करने की कोशिश करेगा या धमकी देगा हम जाकर उसे कहीं भी मार सकते हैं। ये हमने ऑफिशियली डिक्लेअर कर दिया और जैसे ही हमने वो डिक्लेअर किया है अमेरिका का एंबेसडर वो जी7 को छोड़कर वो यहां पे आता है और सीधा अमित शाह के ऑफिस में बैठकर कुछ बातें। ये सारी बातें मैं आपके सामने रखूंगा क्योंकि चार डिफरेंट हेडलाइंस हैं जो आपको दिखती हैं। लेकिन चार डिफरेंट हेडलाइंस तीन डिफरेंट कंट्रीज में ये इंसिडेंट होते हैं।फाइनल मूव मैसिव हाई स्टेक्स का जिओपॉलिटिकल ऑपरेशन है जो हमारे आंखों के सामने हो रहा है। रूल्स चेंज हो रहे हैं ओवरनाइट। अब इस सारे को एक टेप को रिवाइंड करते हैं एक-एक करके कि हुआ क्या था और आगे इस मीटिंग में हुआ क्या? आप पहले आइए समर 2023 में निजर याद है आपको? हरदीप सिंह निजर उसको कुत्ते की तरह पार्किंग लॉट में कनाडा में गोलियों से भून दिया गया। मार दिया उसको। लेकिन उसके बाद जो एफबीआई है उसमें एक और प्लॉट था जहां पर जो पन्नू है उसको मारने की अननोन गवर्नमेंट ने कोशिश करी थी लेकिन  एफबीआई बीच में आ गया और उन्होंने अपने एसेट को पन्नू को उन्होंने बचा लिया न्यूयॉर्क के अंदर। उसके बाद क्या हुआ? यूनाइटेड स्टेट्स और कनाडा दोनों ने कोऑर्डिनेट करना शुरू कर दिया कि एक कैंपेन शुरू करते हैं कि किसी तरीके से भारत की गवर्नमेंट को अब रिस्पांसिबल करेंगे इन चीजों के ऊपर। जो जस्ट आउट जस्टिन था वैसे जस्टिन ट्रूडो अभी जस्ट आउट हो चुका है। ट्रूडो वो पार्लियामेंट में खड़े हो के क्या बोलता है कि हमारे पास एविडेंस है कि भारत की इंटेलिजेंस ने ये काम किया है।यूएसए का जो जस्टिस डिपार्टमेंट है उन्होंने भी एकदम से पूरे दुनिया में उन्होंने रेड नोटिस निकाल दिया कि भारत के कौन से ऑपरेटिव्स हैं जो कि काम कर रहे हैं।अमेरिका ने चार्ज किया एक भारत के नेशनल को जिसका नाम था निखिल गुप्ता। आपको मालूम है साथ में उन्होंने एक और भारत का इंटेलिजेंस का ऑफिसर रिटायर किया हुआ विकास यादव उसको भी इन्होंने इंडक्ट कर दिया कि यार ये दो लोग हैं जो ये सारे काम कर रहे हैं। अब वाशिंगटन को और कनाडा को लगा कि यार हमने हमने पूरा एक वाटर टाइट हमने केस बना लिया। अब ये भारत को हम कटघरे में खड़ा करेंगे। लेकिन उनको लगा कि न्यू दिल्ली ब्लिंक कर जाएगा। मिसकैलकुलेट कर दिया। रीज़न क्या था? अमित शाह होम मिनिस्टर हैं। उन्होंने और अजीत देवाल ने एक ही काम बोला प्रूफ दिखा दो। हम मान जाएंगे। प्रूफ उनके पास था नहीं क्योंकि जो अननोन गन मैन है वो बिना ट्रेस छोड़े वो काम करके आते हैं। कोई पता लगता ही नहीं कि कब आए और कब काम करके चली गई। अब ये तो हो गया जो 2023 में हुआ और 2024 में यह ड्रामा चलता रहा। फास्ट फॉरवर्ड कीजिए 2026 में। लैंडस्केप पूरी की पूरी डिफरेंट हो गई है। फ में निखिल गुप्ता ने प्लीड किया कि यस वो निजर के केस में या पन्नू के केस में वो इनवॉल्व था। वेस्टर्न मीडिया ने बोलना शुरू कर दिया ये तो विक्ट्री है। अमेरिका का जस्टिस सिस्टम ने निखिल गुप्ता को डंडे मारे और उसे सब कुछ उगलवा लिया। लेकिन उसके बाद आया मास्टर स्ट्रोक वो था कनाडा का। कनाडा का जो जस्टिस डिपार्टमेंट है उनके ऑफिशियल्स वो जाते हैं फेडरल कोर्ट के अंदर। और वो बोलते हैं कि हमें परमिशन चाहिए कि जो सेंसिटिव इंफॉर्मेशन हमारे हाथों में है मर्डर केस का निजर के मर्डर केस का वो हम विद होल्ड करना चाहते हैं। क्यों? जब पूछा गया कि अब ये डॉक्यूमेंट्स को रिलीज क्यों नहीं कर रहे? तो उन्होंने बोला हम इंटरनेशनल रिलेशंस को खराब नहीं करना चाहते। इसलिए हम ये डॉक्यूमेंट्स को छुपाना चाहते हैं। कनाडा ने वो डॉक्यूमेंट्स को सीक्रेटली अपने पास रख लिया। अमेरिका के साथ शेयर नहीं किया। यानी कि कनाडा फाइनली क्या बोल रहा है? हम एक ट्रांसपेरेंट ट्रायल हम नहीं चाहते। कनाडा बोल रहा है जो पहले इतना उछल उछल के बोल रहा था कि निजर का हम हिसाब किताब बराबर करेंगे भारत के साथ। अब बोलता है हमें केस चाहिए ही नहीं। आप केस को बंद कर दीजिए। जो एविडेंस ट्रेल था वो लीड करता ही नहीं है निखिल गुप्ता के पास। ना ही हमारे जो रॉ के एजेंट है उन तक यह डॉक्यूमेंट्स वो प्रूव ही नहीं करते कि ये लोग इनवॉल्व थे।कनाडा के अंदर वो एक्सपोज क्या कर रहे थे? वो एक्सपोज कर रहे थे जो डॉक्यूमेंट्स कनाडा के पास है वो एक्सपोज करते हैं नेटवर्क्स ड्रग्स के टेररिज्म के खिस्तानियों के जो गैंग वॉर्स हैं उसके और एक्सटॉशन का जो रैकेट है वो सारा का सारा इन्वॉल्व था उन डॉक्यूमेंट्स के अंदर जब उन्होंने बोला कि हम इंटरनेशनल अपने रिलेशंस को खराब नहीं करना चाहते उसका मतलब था वो ख़स्तानियों से अपने कंट्री को बचाना चाहते हैं इसलिए वो उनको ख़स्तानियों को एक्सपोज नहीं करना चाहते। ये वही चीजें हैं जो भारत इतनी देर से कनाडा को बोलता रहा कि भाई आपके पास ये खस्तानी जो हैं ये ट्रग्स का काम करते हैं। ये ड्रग्स और ड्रग्स ये दोनों का काम करते हैं। कनाडा से अमेरिका में पहुंचाने का काम ये ख़स्तानी कर रहे हैं। और वहां पे जो ड्रग का मनी है उससे ये ख़स्तान की मूवमेंट को इन्होंने जिंदा रखा हुआ है। ये तो हो गया जो अब तक हुआ। अब आते हैं जून 2026। ये जो US Ambassador  गौर की मीटिंग है उससे पहले हमने एक हथौड़ा मारा। गवर्नमेंट ने रिलीज किया एक पॉलिसी को। उसका नाम था प्रहार। अब ये प्रहार क्या है? प्रहार का मतलब है कि हम कोडिफाइड नेशनल काउंटर टेररिज्म की पॉलिसी हमने निकाल दी। मैसेज बड़ा ब्लंट और अनक्प्रोमाइजिंग था कि पूरे दुनिया में कहीं भी कोई सप्लाई चेन है टेरर इकोसिस्टम का। अब उसे डिस्मेंटल किया जाएगा। पूरे दुनिया में अकेला भारत में नहीं कहीं भी हो। यानी कि अब कोई डिफेंसिव पोश्चरिंग नहीं होगा। ना ही हम वैसे से परमिशन मांगेंगे कि जी हमारा पन्नू है हमें वापस कर दो। ठीक है? और नहीं तो उसकी जुड्डी पे आग लगा दो। हम कोई ऐसी बात नहीं करेंगे। खुद जाएंगे जाके आग लगा देंगेअगर किसी ने भी वो खस्तानी हो या आईएसआई हो वो कोई भी हो। अगर उन्होंने टेरर फंडिंग करी भारत के खिलाफ। ये प्रहार किया है जाएंगे प्रहार करेंगे। कहां पर? पहले तो भारत में अगर उनकी कोई एसेट है उसको फ्रीज़ कर दिया जाएगा। उसके बाद पूरे दुनिया में कहीं भी इनका नेटवर्क है कहीं भी यह बैठे हैं उसे हंट किया जाएगा और अननोन गन मैन ये लिखा नहीं है। ये मैं बता रहा हूं। वो अपना काम कराएंगे। जैसे ही आपने प्रहार अनाउंस किया है। उसके बाद क्या हुआ? प्रधानमंत्री मोदी पहुंच जाते हैं फ्रांस के अंदर। वहां पर डॉनल्ड ट्रंप से मिलते हैं। G7 की सबमिट करते हैं और वहां पर स्ट्रेटेजिकली चीजों के ऊपर बात होती है। बात क्या होती है? इंडोपेसिफिक है, मैरिटाइम सिक्योरिटी है। ये सारी बच्चों वाली बातें हमने कर ली। चलिए मैं बच्चों वाले बोल रहा हूं। वैसे डीप डीप टॉपिक्स हैं। अब इसके बाद क्या होता है? रियल डील जो था वो वहां पर नहीं हुआ। वो हुआ बैकग्राउंड में क्योंकि 24 घंटे उसके बाद सारा का सारा जो जो एक्शन है वो शिफ्ट होता है G7 से निकल कर वो न्यू दिल्ली। वो पहुंच गया। यूएसए के एंबेसडर सर्गीय कौर वो भारत पहुंचते हैं भाग-भाग कर और वो मिनिस्टर ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स जयशंकर से मीटिंग नहीं करते। वो बायपास करते हैं सारे डिप्लोमेटिक प्रोटोकॉल्स को। वो चलते हैं सीधा नॉर्थ ब्लॉक के अंदर और वहां पर पहुंचते हैं अमित शाह के सामने उनके ऑफिस में। अब मैं एक्सप्लेन करता हूं पहले तो ये अनप्रेसिडेंटेड क्यों है? और जी7 की मीटिंग को छोड़कर अगर आप वापस आ रहे हैं इसका मतलब है कुछ बड़ा प्रहार हमने कर लिया या करने वाले हैं। एंबेसडर जो होता है गौर एक डिप्लोमेट है। वो एंबेसडर है और वो डिप्लोमेट जो होता है वो हमेशा डिप्लोमेट से मीटिंग करता है। अमित शाह एक डिप्लोमेट नहीं है। वो कंट्रोल करते हैं भारत की इंटरनल सिक्योरिटी को, इंटेलिजेंस ब्यूरोस को और साथ में जो बॉर्डर की फर्सेस हैं वो उसे डील करते हैं अमित शाह। प्लस एक फाइल और है जो अमित शाह के पास है वो है एक्स्ट्राडिशन की फाइल। यानी कि भारत के खिलाफ किसी ने काम पूरे दुनिया में किया उसको पकड़ के उठा के वापस लेके आने का काम वो अमित शाह का है। अब जब यूएसए का एंबेसडर जब अमित शाह को एक जो होम मिनिस्टर है उसे मिलके आता है यानी कि डिप्लोमेसी खत्म हो गया। अब आप ऑपरेशनल मीटिंग के पास की तरफ आप जाना शुरू हो गए। इसलिए अमित शाह से मीटिंग हुआ। अब जो ऑफिशियल स्टेटमेंट है वो रिलीज हो गया। उस पे क्या लिखा गया है वो सुनिए तीन चीजें वो बात करता है काउंटर टेररिज्म के ऊपर काउंटर टेररिज्म तो अमेरिका में कनाडा में पाकिस्तान में बांग्लादेश में यही है काउंटर टेररिज्म के साथ-साथ आपने जोड़ दिया काउंटर नारकोटिक्स कि अब काउंटर टेररिज्म के ऊपर काम अमेरिका और भारत मिलकर करेंगे काउंटर नारकोटिक्स ड्रग्स के ऊपर भी भारत में भी यह एक पेंडेमिक बन चुका है और अमेरिका के अंदर भी यही चीज है इसके ऊपर जॉइंटली काम होगा लेकिन उसके उसके बाद तीसरी जो चीज थी वो स्टैंड अलोन थी ग्लेयरिंग एक वार्निंग है। क्या बोला गया? जॉइंटली हम जो क्रिमिनल्स हैं उसे जस्टिस पे लेके आएंगे बिटवीन बोथ द कंट्रीज। अगर अमेरिका का कोई उग्रवादी या कोई भी ऑपरेटिव अगर भारत में है तो भारत अमेरिका के साथ मिलकर उसे डंडे मारेगा, सीधा करेगा। और अगर भारत का कोई क्रिमिनल वो अमेरिका में बैठा है उसे भी वहीं पर सीधा किया जाएगा। अमेरिका भारत के साथ मिलकर भारत के बिहाफ पर वो काम करेगा। डंडे हम भी मारेंगे वो भी मारेंगे। दोस्तों, यह जेनेरिक टॉकिंग पॉइंट नहीं है। यह टारगेटेड एक एक्शन प्लान है जो स्वर्गीय गौर और अमित शाह ने मिलकर प्रहार के ऊपर काम करना शुरू कर दिया। अब जो जिओपॉलिटिकल रियलिटी है जिसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा। यूनाइटेड स्टेट्स के पास मैसिव एक ड्रग्स की क्राइसिस है। नारकोटिक्स वहां पर फ्रीली वो मूव करते हैं मेक्सिको से भी और कनाडा से भी। कनाडा से कौन लेके आता है? यही निग्जर के पार्टी के सारे के सारे खाली हैं। सारा ट्रकिंग का बिनेस उनके हाथ में है। भारत के अंदर भी जो ड्रग्स की प्रॉब्लम है वो बहुत ज्यादा बढ़ती जा रही है। अब इससे प्रॉब्लम दुगनी है। जब कनाडा में ख़स्तानी जब ड्रग्स में से पैसा कमाते हैं उसके बाद वो टेरर फाइनेंसिंग का काम करते हैं भारत में। जब भी टेरर का काम करना हो जैसे पंजाब में टेररिज्म फैलानी है, खाली मूवमेंट करना है, एक्सट्रीमिज्म करना है तो वो सारा का सारा इन पैसों से किया जाता है। बड़े ऑर्गेनाइज्ड वे से ये जो क्राइम के सिंडिकेट्स हैं वो ऑपरेट करते हैं अमेरिका में और भारत के अंदर। अब ये जो दो प्रॉब्लम्स है ये इंटरसेक्ट कर रही हैं। अमेरिका में ड्रग्स की प्रॉब्लम है और भारत में उसी ड्रग्स के पैसे से ड्रग्स का काम भारत में भी हो रहा है। प्लस एक्सट्रीमिज्म का काम वो भी हो रहा है। इसलिए इंटरसेक्ट कर रहा है उनकी दुगती रग और हमारी वो कॉमन है। इसलिए जो ये जो क्योंकि जो ख़स्तानी वहां पे काम कर रहे हैं वही ख़स्तानी भारत में भी वो काम कर रहे हैं। दोस्तों जो गैंग्स हैं वो क्या कर रहे हैं? ड्रग्स के मनी से अब वो वेपन्स खरीद रहे हैं। उसके बाद कैलिफोर्निया में, ब्रिटिश कोलंबिया में यहां पंजाब में उन्होंने गंध डाल के रखा हुआ है। और ये जो सेपरेटेस्ट जो नेटवर्क्स हैं जो टारगेट करते हैं भारत को कि हमने खाली स्थान बना लेना है। हमने कश्मीर अलग कर देना है।हमेशा काटने की ही बातें वो बोलते हैं। ये अब अमेरिका ने और भारत ने बोल दिया कि अब ये बदतमीजी नहीं चलेगी। आपको याद होगा जब बाइडन की गवर्नमेंट थी उसने इन इंडिविजुअल्स को निजर को पन्नू को उनको क्या बोला ये तो पॉलिटिकल एक्टिविस्ट है इनको फ्रीडम ऑफ स्पीच के अंडर हम इनको पकड़ नहीं सकते वो वहां पे बैठकर भारत की धरती के ऊपर वो बोलते हैं अमित शाह को गोली मार देंगे हम प्लेन उड़ा देंगे लेकिन फ्रीडम ऑफ स्पीच के अंदर उनको पकड़ा नहीं गया जैसे ही ट्रंप आए उन्होंने देखा कि यार ये कार्टल्स एक प्रॉब्लम है इसलिए वाशिंगटन ने फाइनली रियलाइज कर दिया कि भारत की अगर हेल्प मिल जाती है क्योंकि भारत ने ऑलरेडी प्रहार को अनाउंस कर दिया है। अगर हम अलाइन कर ले भारत के साथ तो हमारा जो यहां पे ड्रग्स का प्रॉब्लम है उसे डिस्मेंटल किया जा सकता है। क्योंकि जो करने वाले लोग हैं वो भारतीय ही है। इसलिए आज मीटिंग हुई है। दोस्तों आप सोच के देखिए जो प्लेयर्स है वो इनवॉल्वड कौन है? वो है ट्रांस नेशनल ड्रग्स के गैंग्स, एक्सट्रॉक्शन के रिंग्स। और जहां तक यहां तो पंजाब के अंदर जो हाईली सिक्योर प्रिजंस हैं जेल के अंदर लोग बैठे हैं। वहां से बैठकर वो कनाडा के अंदर ड्रग्स का काम कर रहे हैं। जेल में वो भी पंजाब के अंदर जहां पे पूरी सख्ती है। इसलिए भारत जब चीखता रहा कनाडा को कि आप जिन सांपों को पाल रहे हैं एक दिन आपको डसेंगे वो काम होना शुरू हो गया। इसलिए जो हमारी एजेंसीज हैं आज एफबीआई और कनाडा के जो सीक्रेट एजेंसीज हैं उसके साथ कोऑर्डिनेट कर कर हम उनको डोजियर भेज रहे हैं। हमने  फाइनेंसियल रिकॉर्ड्स जो हैं पूरे इनके नेचर पार्टी के या ख़स्तानियों के हमने एक्सचेंज करने शुरू कर दिए। वेस्ट अब तक हमारी इंटेलिजेंस की रिपोर्ट्स को इग्नोर करता रहा। क्योंकि उनको ख़स्तानियों की जरूरत थी गवर्नमेंट में आने के लिए। लेकिन अब जो कारने की गवर्नमेंट है वो बिना ख़स्तानियों के आई है। इसलिए अब उन्होंने हमारी बात सुननी शुरू कर दी। दोस्तों चेस बोर्ड फ्लिप हो चुका है। जो मीटिंग है भारत की अमित शाह की और सर गौर की वो ट्रांजैक्शनल है। ट्रांजैक्शनल क्यों बोल रहा हूं? क्योंकि जो यूएसए का कोऑपरेशन है वो अब हमें मिलना शुरू हो गया और हमारा कोऑपरेशन उनको मिलना शुरू हो गया। नॉट ओनली इन प्रहार बट इन समथिंग एल्स आल्सो। हम क्या बोल रहे हैं? यूएसए को सप्लाई चेस को डायवर्सिफाई करना है चाइना से। हम मदद कर रहे हैं। उसको इंडोपेसिफिक में भारत की जरूरत है। हम दे रहे हैं। जबकि इंडोपेसिफिक में से इंडो वर्ड निकाल दिया लेकिन इंडिया को नहीं निकाला। सिर्फ नाम में से इंडो निकाला है। अब इसके रिटर्न में यूएसए क्या बोल रहा है? यूएसए बोल रहा है कि जो पन्नू एंड पार्टी को हम प्रोटेक्ट कर रहे थे सीआईए और एफबीआई अब वो प्रोटेक्शन खत्म कर दी जाएगी। इसलिए गौर जब अमित शाह को मिलते हैं उन्होंने एक लिस्ट दिया है अमित शाह को और अमित शाह ने भी एक लिस्ट दे दिया। लिस्ट में कई नाम है जो कॉमन है। उसमें पन्नू का नाम आ चुका है। नाउ डोज़ियर्स दोनों ने एक्सचेंज कर लिए। दोनों मैच कर रहे हैं कि कॉमन आदमी कौन है। उनके लोग भारत में कौन से बैठे हैं और हमारे लोग अमेरिका में कौन से बैठे हैं जिनको पकड़ के अब सीधा करना है। अब कोऑर्डिनेट किया जाएगा कि बैंक अकाउंट्स को वहां पर भी फ्रीज़ किया जाएगा और भारत के अंदर भी फ्रीज़ किया जाएगा। यानी कि दोनों पैरेलली एक ही बंदे के ऊपर

अब काम करना शुरू करेंगे। लिस्ट इसीलिए एक्सचेंज की गई है। यह जो म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस है उसके ऊपर काम होना शुरू हो गया ताकि लूप होल रहे नहीं। अगर यहां से कोई भाग कर कोई अमेरिका में या यूके में या कनाडा में पहुंच गया है। अब उसको वापस लेके आने का काम दोनों कंट्रीज इकट्ठी मिलकर लीगली उसको वापस करेंगी। दोस्तों कनाडा जो डेस्पिरेटली ट्राई करता रहा कि हमें एक्सपोज करने के लिए आज एविडेंस वो प्रोटेक्ट कर रहा है उसे हाइड कर रहा है क्योंकि उसे एफडीए की जरूरत है भारत के साथ निजर गया तेल लेने कनाडा बोलता है ऐसी तैसी फराए हमें फर्क नहीं पड़ता हम भारत की मार्केट को छोड़ नहीं सकते दूसरी तरफ से यूनाइटेड स्टेट्स उसने भी डिसाइड कर लिया कि ड्रग्स के कार्ट्स को अब खत्म करना है उसके लिए भारत की जरूरत है और इसलिए अगर वो एंटी इंडिया के जो एलिमेंट्स है जिसको मैं एसेट्स बोलता हूं पन्नू जैसे जो सीआईए के एसेट्स थे अगर उसको वो प्रोटेक्ट करता है तो वो अपनी जो पकड़ है भारत की मार्केट के ऊपर वो लूज़ कर जाएगा वो लूज़ करना चाहता नहीं है इसलिए भारत ने क्या किया हमने अपनी लिवरेज को क्रिएट किया हमने अपना खुद का प्रहार का जो पॉलिसी है काउंटर टेरर टेरर का जो डॉक्ट्रिन है हमने खुद उसको क्रिएट किया और ल्च कर दिया इसलिए जब सुपर पावर्स को अब जरूरत है हमारी हमने क्या किया। हमने भी बिल दे दिया उनको। यह हमारा बिल है। बिल के अंदर हमने कुछ नाम दिए हैं कि नाम चाहिए। दोस्तों बिल बिल वाज़ प्रेजेंटेड इन फ्रांस। दैट इज व्हाई G7 में छोड़कर ये बंदा बेचारा वापस आया है और सीधा उसने बिल पे किया नॉर्थ ब्लॉक में अमित शाह के सामने। अब वॉच क्या करना है? अगले कुछ तीन चार महीनों में आप देखेंगे अननोन एक्टिविटीज इंक्रीस हो जाएंगी। आप देखेंगे कि कुछ अरेस्ट हो गए हैं नॉर्थ अमेरिका में कुछ लोग अंडर द गाइस ऑफ दिखाया जाएगा कि नारकोटिक्स को क्रैक डाउन करने में लिए हमने पन्नू को पकड़ लिया। पन्नू मैं एग्जांपल दे रहा हूं वो कोई भी पन्नू शन्नू टन्नू कुछ भी हो सकता है। दूसरा एक और होगा। अब अकाउंट्स जो है वो फ्रीज किए जाएंगे कनाडा के अंदर भी भारत के अंदर भी और अमेरिका के अंदर भी कुछ लोगों के। आप न्यूज़ देखेंगे ये सारी चीजें आपके सामने होती हुई दिखाई देंगी अगले कुछ महीनों में। और क्वाइटली कुछ लोगों को डिपोर्ट किया जाएगा अमेरिका कनाडा से भारत के अंदर। ये सारी चीजें वो है जो इवनिंग न्यूज़ में नहीं आएंगी। दोस्तों ऑपरेशंस ऑलरेडी शुरू हो चुके हैं। मैंने पहले शुरू में बोला था आपको कुछ बहुत बड़ा है जिसके लिए अमित शाह के साथ मीटिंग करी है। ये डिप्लोमेटिक ये डिप्लोमेसी नहीं है। जॉइंट टास्क फोर्स अब क्रिएट की जा रही है अमेरिका, कनाडा और भारत के बीच में। और जो लोग सोचते थे कि अमेरिका में, कनाडा में बैठकर वो अनटचेबल हैं। वो न्यूयॉर्क में और वेंकूवर में बैठकर वो पूरा कार्टल्स का काम चलाएंगे और भारत में दंगे करवाएंगे। वो काम खत्म हो गया। अब ये जो लिस्ट है वो ऑलरेडी गौर के टेबल पे और नॉर्थ ब्लॉक में अमित शाह के टेबल पे वो लिस्ट पहुंच चुकी है।  अगला जो दरवाजा है वो किसका खटकाया जाएगा? भारत में, अमेरिका में और कनाडा में? दो नाम देता हूं पन्नू का या मोहम्मद का।कि आपकी जो रिक्वेस्ट है वो मोहम्मद के डंडे पहले मारने चाहिए या पन्नू के।

 जय हिंद।



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2026-06-20T16:08:01+05:30
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DOCTRINE PRAHAR

DOCTRINE PRAHAR

 एक डील जो दिल्ली में बैठकर हुई गौर और अमित शाह के बीच में। एक सीक्रेट मीटिंग था जो नॉर्थ ब्लॉक में किया गया। लेकिन इस मीटिंग में आने से पहले कुछ चीजें हैं जो पहले हुई है। चार न्यूज़ हैं जो इंटररिलेटेड है वो आपको समझनी पड़ेगी।मेरे पास कुछ एक्सक्लूसिव कुछ डिटेल्स हैं जो मैं आपके सामने रखूंगा। पहला काम हुआ था फरवरी 2026 पे जहां पर एक इंडियन ने प्लीट गिल्टी किया न्यूयॉर्क के अंदर कि यस भारत की जो इंटेलिजेंस एजेंसीज हैं वो अननोन गन मैन को भेजती हैं और जाकर वो वेस्ट में उन्होंने निजर को गीला कर दिया था। फरवरी में यह काम होता है मार्च 2026 में। कनाडा सडनली जो पूरा का पूरा सेंसिटिव एविडेंस है उसको छुपा लेता है। मर्डर ट्रायल के अंदर उस आदमी को बचाने के लिए कनाडा अमेरिका को डॉक्यूमेंट देता ही नहीं। ये मार्च में हुआ था। उसके बाद आता है जून में जून 2026। भारत ने अनाउंस कर दिया एक नया एग्रेसिव काउंटर टेररिज्म का एक डॉक्ट्राइन। काउंटर टेररिज्म का मतलब है कि अगर हमारे इंटरेस्ट या भारत की धरती को कोई भी अगर टच करने की कोशिश करेगा या धमकी देगा हम जाकर उसे कहीं भी मार सकते हैं। ये हमने ऑफिशियली डिक्लेअर कर दिया और जैसे ही हमने वो डिक्लेअर किया है अमेरिका का एंबेसडर वो जी7 को छोड़कर वो यहां पे आता है और सीधा अमित शाह के ऑफिस में बैठकर कुछ बातें। ये सारी बातें मैं आपके सामने रखूंगा क्योंकि चार डिफरेंट हेडलाइंस हैं जो आपको दिखती हैं। लेकिन चार डिफरेंट हेडलाइंस तीन डिफरेंट कंट्रीज में ये इंसिडेंट होते हैं।फाइनल मूव मैसिव हाई स्टेक्स का जिओपॉलिटिकल ऑपरेशन है जो हमारे आंखों के सामने हो रहा है। रूल्स चेंज हो रहे हैं ओवरनाइट। अब इस सारे को एक टेप को रिवाइंड करते हैं एक-एक करके कि हुआ क्या था और आगे इस मीटिंग में हुआ क्या? आप पहले आइए समर 2023 में निजर याद है आपको? हरदीप सिंह निजर उसको कुत्ते की तरह पार्किंग लॉट में कनाडा में गोलियों से भून दिया गया। मार दिया उसको। लेकिन उसके बाद जो एफबीआई है उसमें एक और प्लॉट था जहां पर जो पन्नू है उसको मारने की अननोन गवर्नमेंट ने कोशिश करी थी लेकिन  एफबीआई बीच में आ गया और उन्होंने अपने एसेट को पन्नू को उन्होंने बचा लिया न्यूयॉर्क के अंदर। उसके बाद क्या हुआ? यूनाइटेड स्टेट्स और कनाडा दोनों ने कोऑर्डिनेट करना शुरू कर दिया कि एक कैंपेन शुरू करते हैं कि किसी तरीके से भारत की गवर्नमेंट को अब रिस्पांसिबल करेंगे इन चीजों के ऊपर। जो जस्ट आउट जस्टिन था वैसे जस्टिन ट्रूडो अभी जस्ट आउट हो चुका है। ट्रूडो वो पार्लियामेंट में खड़े हो के क्या बोलता है कि हमारे पास एविडेंस है कि भारत की इंटेलिजेंस ने ये काम किया है।यूएसए का जो जस्टिस डिपार्टमेंट है उन्होंने भी एकदम से पूरे दुनिया में उन्होंने रेड नोटिस निकाल दिया कि भारत के कौन से ऑपरेटिव्स हैं जो कि काम कर रहे हैं।अमेरिका ने चार्ज किया एक भारत के नेशनल को जिसका नाम था निखिल गुप्ता। आपको मालूम है साथ में उन्होंने एक और भारत का इंटेलिजेंस का ऑफिसर रिटायर किया हुआ विकास यादव उसको भी इन्होंने इंडक्ट कर दिया कि यार ये दो लोग हैं जो ये सारे काम कर रहे हैं। अब वाशिंगटन को और कनाडा को लगा कि यार हमने हमने पूरा एक वाटर टाइट हमने केस बना लिया। अब ये भारत को हम कटघरे में खड़ा करेंगे। लेकिन उनको लगा कि न्यू दिल्ली ब्लिंक कर जाएगा। मिसकैलकुलेट कर दिया। रीज़न क्या था? अमित शाह होम मिनिस्टर हैं। उन्होंने और अजीत देवाल ने एक ही काम बोला प्रूफ दिखा दो। हम मान जाएंगे। प्रूफ उनके पास था नहीं क्योंकि जो अननोन गन मैन है वो बिना ट्रेस छोड़े वो काम करके आते हैं। कोई पता लगता ही नहीं कि कब आए और कब काम करके चली गई। अब ये तो हो गया जो 2023 में हुआ और 2024 में यह ड्रामा चलता रहा। फास्ट फॉरवर्ड कीजिए 2026 में। लैंडस्केप पूरी की पूरी डिफरेंट हो गई है। फ में निखिल गुप्ता ने प्लीड किया कि यस वो निजर के केस में या पन्नू के केस में वो इनवॉल्व था। वेस्टर्न मीडिया ने बोलना शुरू कर दिया ये तो विक्ट्री है। अमेरिका का जस्टिस सिस्टम ने निखिल गुप्ता को डंडे मारे और उसे सब कुछ उगलवा लिया। लेकिन उसके बाद आया मास्टर स्ट्रोक वो था कनाडा का। कनाडा का जो जस्टिस डिपार्टमेंट है उनके ऑफिशियल्स वो जाते हैं फेडरल कोर्ट के अंदर। और वो बोलते हैं कि हमें परमिशन चाहिए कि जो सेंसिटिव इंफॉर्मेशन हमारे हाथों में है मर्डर केस का निजर के मर्डर केस का वो हम विद होल्ड करना चाहते हैं। क्यों? जब पूछा गया कि अब ये डॉक्यूमेंट्स को रिलीज क्यों नहीं कर रहे? तो उन्होंने बोला हम इंटरनेशनल रिलेशंस को खराब नहीं करना चाहते। इसलिए हम ये डॉक्यूमेंट्स को छुपाना चाहते हैं। कनाडा ने वो डॉक्यूमेंट्स को सीक्रेटली अपने पास रख लिया। अमेरिका के साथ शेयर नहीं किया। यानी कि कनाडा फाइनली क्या बोल रहा है? हम एक ट्रांसपेरेंट ट्रायल हम नहीं चाहते। कनाडा बोल रहा है जो पहले इतना उछल उछल के बोल रहा था कि निजर का हम हिसाब किताब बराबर करेंगे भारत के साथ। अब बोलता है हमें केस चाहिए ही नहीं। आप केस को बंद कर दीजिए। जो एविडेंस ट्रेल था वो लीड करता ही नहीं है निखिल गुप्ता के पास। ना ही हमारे जो रॉ के एजेंट है उन तक यह डॉक्यूमेंट्स वो प्रूव ही नहीं करते कि ये लोग इनवॉल्व थे।कनाडा के अंदर वो एक्सपोज क्या कर रहे थे? वो एक्सपोज कर रहे थे जो डॉक्यूमेंट्स कनाडा के पास है वो एक्सपोज करते हैं नेटवर्क्स ड्रग्स के टेररिज्म के खिस्तानियों के जो गैंग वॉर्स हैं उसके और एक्सटॉशन का जो रैकेट है वो सारा का सारा इन्वॉल्व था उन डॉक्यूमेंट्स के अंदर जब उन्होंने बोला कि हम इंटरनेशनल अपने रिलेशंस को खराब नहीं करना चाहते उसका मतलब था वो ख़स्तानियों से अपने कंट्री को बचाना चाहते हैं इसलिए वो उनको ख़स्तानियों को एक्सपोज नहीं करना चाहते। ये वही चीजें हैं जो भारत इतनी देर से कनाडा को बोलता रहा कि भाई आपके पास ये खस्तानी जो हैं ये ट्रग्स का काम करते हैं। ये ड्रग्स और ड्रग्स ये दोनों का काम करते हैं। कनाडा से अमेरिका में पहुंचाने का काम ये ख़स्तानी कर रहे हैं। और वहां पे जो ड्रग का मनी है उससे ये ख़स्तान की मूवमेंट को इन्होंने जिंदा रखा हुआ है। ये तो हो गया जो अब तक हुआ। अब आते हैं जून 2026। ये जो US Ambassador  गौर की मीटिंग है उससे पहले हमने एक हथौड़ा मारा। गवर्नमेंट ने रिलीज किया एक पॉलिसी को। उसका नाम था प्रहार। अब ये प्रहार क्या है? प्रहार का मतलब है कि हम कोडिफाइड नेशनल काउंटर टेररिज्म की पॉलिसी हमने निकाल दी। मैसेज बड़ा ब्लंट और अनक्प्रोमाइजिंग था कि पूरे दुनिया में कहीं भी कोई सप्लाई चेन है टेरर इकोसिस्टम का। अब उसे डिस्मेंटल किया जाएगा। पूरे दुनिया में अकेला भारत में नहीं कहीं भी हो। यानी कि अब कोई डिफेंसिव पोश्चरिंग नहीं होगा। ना ही हम वैसे से परमिशन मांगेंगे कि जी हमारा पन्नू है हमें वापस कर दो। ठीक है? और नहीं तो उसकी जुड्डी पे आग लगा दो। हम कोई ऐसी बात नहीं करेंगे। खुद जाएंगे जाके आग लगा देंगेअगर किसी ने भी वो खस्तानी हो या आईएसआई हो वो कोई भी हो। अगर उन्होंने टेरर फंडिंग करी भारत के खिलाफ। ये प्रहार किया है जाएंगे प्रहार करेंगे। कहां पर? पहले तो भारत में अगर उनकी कोई एसेट है उसको फ्रीज़ कर दिया जाएगा। उसके बाद पूरे दुनिया में कहीं भी इनका नेटवर्क है कहीं भी यह बैठे हैं उसे हंट किया जाएगा और अननोन गन मैन ये लिखा नहीं है। ये मैं बता रहा हूं। वो अपना काम कराएंगे। जैसे ही आपने प्रहार अनाउंस किया है। उसके बाद क्या हुआ? प्रधानमंत्री मोदी पहुंच जाते हैं फ्रांस के अंदर। वहां पर डॉनल्ड ट्रंप से मिलते हैं। G7 की सबमिट करते हैं और वहां पर स्ट्रेटेजिकली चीजों के ऊपर बात होती है। बात क्या होती है? इंडोपेसिफिक है, मैरिटाइम सिक्योरिटी है। ये सारी बच्चों वाली बातें हमने कर ली। चलिए मैं बच्चों वाले बोल रहा हूं। वैसे डीप डीप टॉपिक्स हैं। अब इसके बाद क्या होता है? रियल डील जो था वो वहां पर नहीं हुआ। वो हुआ बैकग्राउंड में क्योंकि 24 घंटे उसके बाद सारा का सारा जो जो एक्शन है वो शिफ्ट होता है G7 से निकल कर वो न्यू दिल्ली। वो पहुंच गया। यूएसए के एंबेसडर सर्गीय कौर वो भारत पहुंचते हैं भाग-भाग कर और वो मिनिस्टर ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स जयशंकर से मीटिंग नहीं करते। वो बायपास करते हैं सारे डिप्लोमेटिक प्रोटोकॉल्स को। वो चलते हैं सीधा नॉर्थ ब्लॉक के अंदर और वहां पर पहुंचते हैं अमित शाह के सामने उनके ऑफिस में। अब मैं एक्सप्लेन करता हूं पहले तो ये अनप्रेसिडेंटेड क्यों है? और जी7 की मीटिंग को छोड़कर अगर आप वापस आ रहे हैं इसका मतलब है कुछ बड़ा प्रहार हमने कर लिया या करने वाले हैं। एंबेसडर जो होता है गौर एक डिप्लोमेट है। वो एंबेसडर है और वो डिप्लोमेट जो होता है वो हमेशा डिप्लोमेट से मीटिंग करता है। अमित शाह एक डिप्लोमेट नहीं है। वो कंट्रोल करते हैं भारत की इंटरनल सिक्योरिटी को, इंटेलिजेंस ब्यूरोस को और साथ में जो बॉर्डर की फर्सेस हैं वो उसे डील करते हैं अमित शाह। प्लस एक फाइल और है जो अमित शाह के पास है वो है एक्स्ट्राडिशन की फाइल। यानी कि भारत के खिलाफ किसी ने काम पूरे दुनिया में किया उसको पकड़ के उठा के वापस लेके आने का काम वो अमित शाह का है। अब जब यूएसए का एंबेसडर जब अमित शाह को एक जो होम मिनिस्टर है उसे मिलके आता है यानी कि डिप्लोमेसी खत्म हो गया। अब आप ऑपरेशनल मीटिंग के पास की तरफ आप जाना शुरू हो गए। इसलिए अमित शाह से मीटिंग हुआ। अब जो ऑफिशियल स्टेटमेंट है वो रिलीज हो गया। उस पे क्या लिखा गया है वो सुनिए तीन चीजें वो बात करता है काउंटर टेररिज्म के ऊपर काउंटर टेररिज्म तो अमेरिका में कनाडा में पाकिस्तान में बांग्लादेश में यही है काउंटर टेररिज्म के साथ-साथ आपने जोड़ दिया काउंटर नारकोटिक्स कि अब काउंटर टेररिज्म के ऊपर काम अमेरिका और भारत मिलकर करेंगे काउंटर नारकोटिक्स ड्रग्स के ऊपर भी भारत में भी यह एक पेंडेमिक बन चुका है और अमेरिका के अंदर भी यही चीज है इसके ऊपर जॉइंटली काम होगा लेकिन उसके उसके बाद तीसरी जो चीज थी वो स्टैंड अलोन थी ग्लेयरिंग एक वार्निंग है। क्या बोला गया? जॉइंटली हम जो क्रिमिनल्स हैं उसे जस्टिस पे लेके आएंगे बिटवीन बोथ द कंट्रीज। अगर अमेरिका का कोई उग्रवादी या कोई भी ऑपरेटिव अगर भारत में है तो भारत अमेरिका के साथ मिलकर उसे डंडे मारेगा, सीधा करेगा। और अगर भारत का कोई क्रिमिनल वो अमेरिका में बैठा है उसे भी वहीं पर सीधा किया जाएगा। अमेरिका भारत के साथ मिलकर भारत के बिहाफ पर वो काम करेगा। डंडे हम भी मारेंगे वो भी मारेंगे। दोस्तों, यह जेनेरिक टॉकिंग पॉइंट नहीं है। यह टारगेटेड एक एक्शन प्लान है जो स्वर्गीय गौर और अमित शाह ने मिलकर प्रहार के ऊपर काम करना शुरू कर दिया। अब जो जिओपॉलिटिकल रियलिटी है जिसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा। यूनाइटेड स्टेट्स के पास मैसिव एक ड्रग्स की क्राइसिस है। नारकोटिक्स वहां पर फ्रीली वो मूव करते हैं मेक्सिको से भी और कनाडा से भी। कनाडा से कौन लेके आता है? यही निग्जर के पार्टी के सारे के सारे खाली हैं। सारा ट्रकिंग का बिनेस उनके हाथ में है। भारत के अंदर भी जो ड्रग्स की प्रॉब्लम है वो बहुत ज्यादा बढ़ती जा रही है। अब इससे प्रॉब्लम दुगनी है। जब कनाडा में ख़स्तानी जब ड्रग्स में से पैसा कमाते हैं उसके बाद वो टेरर फाइनेंसिंग का काम करते हैं भारत में। जब भी टेरर का काम करना हो जैसे पंजाब में टेररिज्म फैलानी है, खाली मूवमेंट करना है, एक्सट्रीमिज्म करना है तो वो सारा का सारा इन पैसों से किया जाता है। बड़े ऑर्गेनाइज्ड वे से ये जो क्राइम के सिंडिकेट्स हैं वो ऑपरेट करते हैं अमेरिका में और भारत के अंदर। अब ये जो दो प्रॉब्लम्स है ये इंटरसेक्ट कर रही हैं। अमेरिका में ड्रग्स की प्रॉब्लम है और भारत में उसी ड्रग्स के पैसे से ड्रग्स का काम भारत में भी हो रहा है। प्लस एक्सट्रीमिज्म का काम वो भी हो रहा है। इसलिए इंटरसेक्ट कर रहा है उनकी दुगती रग और हमारी वो कॉमन है। इसलिए जो ये जो क्योंकि जो ख़स्तानी वहां पे काम कर रहे हैं वही ख़स्तानी भारत में भी वो काम कर रहे हैं। दोस्तों जो गैंग्स हैं वो क्या कर रहे हैं? ड्रग्स के मनी से अब वो वेपन्स खरीद रहे हैं। उसके बाद कैलिफोर्निया में, ब्रिटिश कोलंबिया में यहां पंजाब में उन्होंने गंध डाल के रखा हुआ है। और ये जो सेपरेटेस्ट जो नेटवर्क्स हैं जो टारगेट करते हैं भारत को कि हमने खाली स्थान बना लेना है। हमने कश्मीर अलग कर देना है।हमेशा काटने की ही बातें वो बोलते हैं। ये अब अमेरिका ने और भारत ने बोल दिया कि अब ये बदतमीजी नहीं चलेगी। आपको याद होगा जब बाइडन की गवर्नमेंट थी उसने इन इंडिविजुअल्स को निजर को पन्नू को उनको क्या बोला ये तो पॉलिटिकल एक्टिविस्ट है इनको फ्रीडम ऑफ स्पीच के अंडर हम इनको पकड़ नहीं सकते वो वहां पे बैठकर भारत की धरती के ऊपर वो बोलते हैं अमित शाह को गोली मार देंगे हम प्लेन उड़ा देंगे लेकिन फ्रीडम ऑफ स्पीच के अंदर उनको पकड़ा नहीं गया जैसे ही ट्रंप आए उन्होंने देखा कि यार ये कार्टल्स एक प्रॉब्लम है इसलिए वाशिंगटन ने फाइनली रियलाइज कर दिया कि भारत की अगर हेल्प मिल जाती है क्योंकि भारत ने ऑलरेडी प्रहार को अनाउंस कर दिया है। अगर हम अलाइन कर ले भारत के साथ तो हमारा जो यहां पे ड्रग्स का प्रॉब्लम है उसे डिस्मेंटल किया जा सकता है। क्योंकि जो करने वाले लोग हैं वो भारतीय ही है। इसलिए आज मीटिंग हुई है। दोस्तों आप सोच के देखिए जो प्लेयर्स है वो इनवॉल्वड कौन है? वो है ट्रांस नेशनल ड्रग्स के गैंग्स, एक्सट्रॉक्शन के रिंग्स। और जहां तक यहां तो पंजाब के अंदर जो हाईली सिक्योर प्रिजंस हैं जेल के अंदर लोग बैठे हैं। वहां से बैठकर वो कनाडा के अंदर ड्रग्स का काम कर रहे हैं। जेल में वो भी पंजाब के अंदर जहां पे पूरी सख्ती है। इसलिए भारत जब चीखता रहा कनाडा को कि आप जिन सांपों को पाल रहे हैं एक दिन आपको डसेंगे वो काम होना शुरू हो गया। इसलिए जो हमारी एजेंसीज हैं आज एफबीआई और कनाडा के जो सीक्रेट एजेंसीज हैं उसके साथ कोऑर्डिनेट कर कर हम उनको डोजियर भेज रहे हैं। हमने  फाइनेंसियल रिकॉर्ड्स जो हैं पूरे इनके नेचर पार्टी के या ख़स्तानियों के हमने एक्सचेंज करने शुरू कर दिए। वेस्ट अब तक हमारी इंटेलिजेंस की रिपोर्ट्स को इग्नोर करता रहा। क्योंकि उनको ख़स्तानियों की जरूरत थी गवर्नमेंट में आने के लिए। लेकिन अब जो कारने की गवर्नमेंट है वो बिना ख़स्तानियों के आई है। इसलिए अब उन्होंने हमारी बात सुननी शुरू कर दी। दोस्तों चेस बोर्ड फ्लिप हो चुका है। जो मीटिंग है भारत की अमित शाह की और सर गौर की वो ट्रांजैक्शनल है। ट्रांजैक्शनल क्यों बोल रहा हूं? क्योंकि जो यूएसए का कोऑपरेशन है वो अब हमें मिलना शुरू हो गया और हमारा कोऑपरेशन उनको मिलना शुरू हो गया। नॉट ओनली इन प्रहार बट इन समथिंग एल्स आल्सो। हम क्या बोल रहे हैं? यूएसए को सप्लाई चेस को डायवर्सिफाई करना है चाइना से। हम मदद कर रहे हैं। उसको इंडोपेसिफिक में भारत की जरूरत है। हम दे रहे हैं। जबकि इंडोपेसिफिक में से इंडो वर्ड निकाल दिया लेकिन इंडिया को नहीं निकाला। सिर्फ नाम में से इंडो निकाला है। अब इसके रिटर्न में यूएसए क्या बोल रहा है? यूएसए बोल रहा है कि जो पन्नू एंड पार्टी को हम प्रोटेक्ट कर रहे थे सीआईए और एफबीआई अब वो प्रोटेक्शन खत्म कर दी जाएगी। इसलिए गौर जब अमित शाह को मिलते हैं उन्होंने एक लिस्ट दिया है अमित शाह को और अमित शाह ने भी एक लिस्ट दे दिया। लिस्ट में कई नाम है जो कॉमन है। उसमें पन्नू का नाम आ चुका है। नाउ डोज़ियर्स दोनों ने एक्सचेंज कर लिए। दोनों मैच कर रहे हैं कि कॉमन आदमी कौन है। उनके लोग भारत में कौन से बैठे हैं और हमारे लोग अमेरिका में कौन से बैठे हैं जिनको पकड़ के अब सीधा करना है। अब कोऑर्डिनेट किया जाएगा कि बैंक अकाउंट्स को वहां पर भी फ्रीज़ किया जाएगा और भारत के अंदर भी फ्रीज़ किया जाएगा। यानी कि दोनों पैरेलली एक ही बंदे के ऊपर

अब काम करना शुरू करेंगे। लिस्ट इसीलिए एक्सचेंज की गई है। यह जो म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस है उसके ऊपर काम होना शुरू हो गया ताकि लूप होल रहे नहीं। अगर यहां से कोई भाग कर कोई अमेरिका में या यूके में या कनाडा में पहुंच गया है। अब उसको वापस लेके आने का काम दोनों कंट्रीज इकट्ठी मिलकर लीगली उसको वापस करेंगी। दोस्तों कनाडा जो डेस्पिरेटली ट्राई करता रहा कि हमें एक्सपोज करने के लिए आज एविडेंस वो प्रोटेक्ट कर रहा है उसे हाइड कर रहा है क्योंकि उसे एफडीए की जरूरत है भारत के साथ निजर गया तेल लेने कनाडा बोलता है ऐसी तैसी फराए हमें फर्क नहीं पड़ता हम भारत की मार्केट को छोड़ नहीं सकते दूसरी तरफ से यूनाइटेड स्टेट्स उसने भी डिसाइड कर लिया कि ड्रग्स के कार्ट्स को अब खत्म करना है उसके लिए भारत की जरूरत है और इसलिए अगर वो एंटी इंडिया के जो एलिमेंट्स है जिसको मैं एसेट्स बोलता हूं पन्नू जैसे जो सीआईए के एसेट्स थे अगर उसको वो प्रोटेक्ट करता है तो वो अपनी जो पकड़ है भारत की मार्केट के ऊपर वो लूज़ कर जाएगा वो लूज़ करना चाहता नहीं है इसलिए भारत ने क्या किया हमने अपनी लिवरेज को क्रिएट किया हमने अपना खुद का प्रहार का जो पॉलिसी है काउंटर टेरर टेरर का जो डॉक्ट्रिन है हमने खुद उसको क्रिएट किया और ल्च कर दिया इसलिए जब सुपर पावर्स को अब जरूरत है हमारी हमने क्या किया। हमने भी बिल दे दिया उनको। यह हमारा बिल है। बिल के अंदर हमने कुछ नाम दिए हैं कि नाम चाहिए। दोस्तों बिल बिल वाज़ प्रेजेंटेड इन फ्रांस। दैट इज व्हाई G7 में छोड़कर ये बंदा बेचारा वापस आया है और सीधा उसने बिल पे किया नॉर्थ ब्लॉक में अमित शाह के सामने। अब वॉच क्या करना है? अगले कुछ तीन चार महीनों में आप देखेंगे अननोन एक्टिविटीज इंक्रीस हो जाएंगी। आप देखेंगे कि कुछ अरेस्ट हो गए हैं नॉर्थ अमेरिका में कुछ लोग अंडर द गाइस ऑफ दिखाया जाएगा कि नारकोटिक्स को क्रैक डाउन करने में लिए हमने पन्नू को पकड़ लिया। पन्नू मैं एग्जांपल दे रहा हूं वो कोई भी पन्नू शन्नू टन्नू कुछ भी हो सकता है। दूसरा एक और होगा। अब अकाउंट्स जो है वो फ्रीज किए जाएंगे कनाडा के अंदर भी भारत के अंदर भी और अमेरिका के अंदर भी कुछ लोगों के। आप न्यूज़ देखेंगे ये सारी चीजें आपके सामने होती हुई दिखाई देंगी अगले कुछ महीनों में। और क्वाइटली कुछ लोगों को डिपोर्ट किया जाएगा अमेरिका कनाडा से भारत के अंदर। ये सारी चीजें वो है जो इवनिंग न्यूज़ में नहीं आएंगी। दोस्तों ऑपरेशंस ऑलरेडी शुरू हो चुके हैं। मैंने पहले शुरू में बोला था आपको कुछ बहुत बड़ा है जिसके लिए अमित शाह के साथ मीटिंग करी है। ये डिप्लोमेटिक ये डिप्लोमेसी नहीं है। जॉइंट टास्क फोर्स अब क्रिएट की जा रही है अमेरिका, कनाडा और भारत के बीच में। और जो लोग सोचते थे कि अमेरिका में, कनाडा में बैठकर वो अनटचेबल हैं। वो न्यूयॉर्क में और वेंकूवर में बैठकर वो पूरा कार्टल्स का काम चलाएंगे और भारत में दंगे करवाएंगे। वो काम खत्म हो गया। अब ये जो लिस्ट है वो ऑलरेडी गौर के टेबल पे और नॉर्थ ब्लॉक में अमित शाह के टेबल पे वो लिस्ट पहुंच चुकी है।  अगला जो दरवाजा है वो किसका खटकाया जाएगा? भारत में, अमेरिका में और कनाडा में? दो नाम देता हूं पन्नू का या मोहम्मद का।कि आपकी जो रिक्वेस्ट है वो मोहम्मद के डंडे पहले मारने चाहिए या पन्नू के।

 जय हिंद।



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2026-06-20T16:08:01+05:30

DOCTRINE PRAHAR

 एक डील जो दिल्ली में बैठकर हुई गौर और अमित शाह के बीच में। एक सीक्रेट मीटिंग था जो नॉर्थ ब्लॉक में किया गया। लेकिन इस मीटिंग में आने से पहले कुछ चीजें हैं जो पहले हुई है। चार न्यूज़ हैं जो इंटररिलेटेड है वो आपको समझनी पड़ेगी।मेरे पास कुछ एक्सक्लूसिव कुछ डिटेल्स हैं जो मैं आपके सामने रखूंगा। पहला काम हुआ था फरवरी 2026 पे जहां पर एक इंडियन ने प्लीट गिल्टी किया न्यूयॉर्क के अंदर कि यस भारत की जो इंटेलिजेंस एजेंसीज हैं वो अननोन गन मैन को भेजती हैं और जाकर वो वेस्ट में उन्होंने निजर को गीला कर दिया था। फरवरी में यह काम होता है मार्च 2026 में। कनाडा सडनली जो पूरा का पूरा सेंसिटिव एविडेंस है उसको छुपा लेता है। मर्डर ट्रायल के अंदर उस आदमी को बचाने के लिए कनाडा अमेरिका को डॉक्यूमेंट देता ही नहीं। ये मार्च में हुआ था। उसके बाद आता है जून में जून 2026। भारत ने अनाउंस कर दिया एक नया एग्रेसिव काउंटर टेररिज्म का एक डॉक्ट्राइन। काउंटर टेररिज्म का मतलब है कि अगर हमारे इंटरेस्ट या भारत की धरती को कोई भी अगर टच करने की कोशिश करेगा या धमकी देगा हम जाकर उसे कहीं भी मार सकते हैं। ये हमने ऑफिशियली डिक्लेअर कर दिया और जैसे ही हमने वो डिक्लेअर किया है अमेरिका का एंबेसडर वो जी7 को छोड़कर वो यहां पे आता है और सीधा अमित शाह के ऑफिस में बैठकर कुछ बातें। ये सारी बातें मैं आपके सामने रखूंगा क्योंकि चार डिफरेंट हेडलाइंस हैं जो आपको दिखती हैं। लेकिन चार डिफरेंट हेडलाइंस तीन डिफरेंट कंट्रीज में ये इंसिडेंट होते हैं।फाइनल मूव मैसिव हाई स्टेक्स का जिओपॉलिटिकल ऑपरेशन है जो हमारे आंखों के सामने हो रहा है। रूल्स चेंज हो रहे हैं ओवरनाइट। अब इस सारे को एक टेप को रिवाइंड करते हैं एक-एक करके कि हुआ क्या था और आगे इस मीटिंग में हुआ क्या? आप पहले आइए समर 2023 में निजर याद है आपको? हरदीप सिंह निजर उसको कुत्ते की तरह पार्किंग लॉट में कनाडा में गोलियों से भून दिया गया। मार दिया उसको। लेकिन उसके बाद जो एफबीआई है उसमें एक और प्लॉट था जहां पर जो पन्नू है उसको मारने की अननोन गवर्नमेंट ने कोशिश करी थी लेकिन  एफबीआई बीच में आ गया और उन्होंने अपने एसेट को पन्नू को उन्होंने बचा लिया न्यूयॉर्क के अंदर। उसके बाद क्या हुआ? यूनाइटेड स्टेट्स और कनाडा दोनों ने कोऑर्डिनेट करना शुरू कर दिया कि एक कैंपेन शुरू करते हैं कि किसी तरीके से भारत की गवर्नमेंट को अब रिस्पांसिबल करेंगे इन चीजों के ऊपर। जो जस्ट आउट जस्टिन था वैसे जस्टिन ट्रूडो अभी जस्ट आउट हो चुका है। ट्रूडो वो पार्लियामेंट में खड़े हो के क्या बोलता है कि हमारे पास एविडेंस है कि भारत की इंटेलिजेंस ने ये काम किया है।यूएसए का जो जस्टिस डिपार्टमेंट है उन्होंने भी एकदम से पूरे दुनिया में उन्होंने रेड नोटिस निकाल दिया कि भारत के कौन से ऑपरेटिव्स हैं जो कि काम कर रहे हैं।अमेरिका ने चार्ज किया एक भारत के नेशनल को जिसका नाम था निखिल गुप्ता। आपको मालूम है साथ में उन्होंने एक और भारत का इंटेलिजेंस का ऑफिसर रिटायर किया हुआ विकास यादव उसको भी इन्होंने इंडक्ट कर दिया कि यार ये दो लोग हैं जो ये सारे काम कर रहे हैं। अब वाशिंगटन को और कनाडा को लगा कि यार हमने हमने पूरा एक वाटर टाइट हमने केस बना लिया। अब ये भारत को हम कटघरे में खड़ा करेंगे। लेकिन उनको लगा कि न्यू दिल्ली ब्लिंक कर जाएगा। मिसकैलकुलेट कर दिया। रीज़न क्या था? अमित शाह होम मिनिस्टर हैं। उन्होंने और अजीत देवाल ने एक ही काम बोला प्रूफ दिखा दो। हम मान जाएंगे। प्रूफ उनके पास था नहीं क्योंकि जो अननोन गन मैन है वो बिना ट्रेस छोड़े वो काम करके आते हैं। कोई पता लगता ही नहीं कि कब आए और कब काम करके चली गई। अब ये तो हो गया जो 2023 में हुआ और 2024 में यह ड्रामा चलता रहा। फास्ट फॉरवर्ड कीजिए 2026 में। लैंडस्केप पूरी की पूरी डिफरेंट हो गई है। फ में निखिल गुप्ता ने प्लीड किया कि यस वो निजर के केस में या पन्नू के केस में वो इनवॉल्व था। वेस्टर्न मीडिया ने बोलना शुरू कर दिया ये तो विक्ट्री है। अमेरिका का जस्टिस सिस्टम ने निखिल गुप्ता को डंडे मारे और उसे सब कुछ उगलवा लिया। लेकिन उसके बाद आया मास्टर स्ट्रोक वो था कनाडा का। कनाडा का जो जस्टिस डिपार्टमेंट है उनके ऑफिशियल्स वो जाते हैं फेडरल कोर्ट के अंदर। और वो बोलते हैं कि हमें परमिशन चाहिए कि जो सेंसिटिव इंफॉर्मेशन हमारे हाथों में है मर्डर केस का निजर के मर्डर केस का वो हम विद होल्ड करना चाहते हैं। क्यों? जब पूछा गया कि अब ये डॉक्यूमेंट्स को रिलीज क्यों नहीं कर रहे? तो उन्होंने बोला हम इंटरनेशनल रिलेशंस को खराब नहीं करना चाहते। इसलिए हम ये डॉक्यूमेंट्स को छुपाना चाहते हैं। कनाडा ने वो डॉक्यूमेंट्स को सीक्रेटली अपने पास रख लिया। अमेरिका के साथ शेयर नहीं किया। यानी कि कनाडा फाइनली क्या बोल रहा है? हम एक ट्रांसपेरेंट ट्रायल हम नहीं चाहते। कनाडा बोल रहा है जो पहले इतना उछल उछल के बोल रहा था कि निजर का हम हिसाब किताब बराबर करेंगे भारत के साथ। अब बोलता है हमें केस चाहिए ही नहीं। आप केस को बंद कर दीजिए। जो एविडेंस ट्रेल था वो लीड करता ही नहीं है निखिल गुप्ता के पास। ना ही हमारे जो रॉ के एजेंट है उन तक यह डॉक्यूमेंट्स वो प्रूव ही नहीं करते कि ये लोग इनवॉल्व थे।कनाडा के अंदर वो एक्सपोज क्या कर रहे थे? वो एक्सपोज कर रहे थे जो डॉक्यूमेंट्स कनाडा के पास है वो एक्सपोज करते हैं नेटवर्क्स ड्रग्स के टेररिज्म के खिस्तानियों के जो गैंग वॉर्स हैं उसके और एक्सटॉशन का जो रैकेट है वो सारा का सारा इन्वॉल्व था उन डॉक्यूमेंट्स के अंदर जब उन्होंने बोला कि हम इंटरनेशनल अपने रिलेशंस को खराब नहीं करना चाहते उसका मतलब था वो ख़स्तानियों से अपने कंट्री को बचाना चाहते हैं इसलिए वो उनको ख़स्तानियों को एक्सपोज नहीं करना चाहते। ये वही चीजें हैं जो भारत इतनी देर से कनाडा को बोलता रहा कि भाई आपके पास ये खस्तानी जो हैं ये ट्रग्स का काम करते हैं। ये ड्रग्स और ड्रग्स ये दोनों का काम करते हैं। कनाडा से अमेरिका में पहुंचाने का काम ये ख़स्तानी कर रहे हैं। और वहां पे जो ड्रग का मनी है उससे ये ख़स्तान की मूवमेंट को इन्होंने जिंदा रखा हुआ है। ये तो हो गया जो अब तक हुआ। अब आते हैं जून 2026। ये जो US Ambassador  गौर की मीटिंग है उससे पहले हमने एक हथौड़ा मारा। गवर्नमेंट ने रिलीज किया एक पॉलिसी को। उसका नाम था प्रहार। अब ये प्रहार क्या है? प्रहार का मतलब है कि हम कोडिफाइड नेशनल काउंटर टेररिज्म की पॉलिसी हमने निकाल दी। मैसेज बड़ा ब्लंट और अनक्प्रोमाइजिंग था कि पूरे दुनिया में कहीं भी कोई सप्लाई चेन है टेरर इकोसिस्टम का। अब उसे डिस्मेंटल किया जाएगा। पूरे दुनिया में अकेला भारत में नहीं कहीं भी हो। यानी कि अब कोई डिफेंसिव पोश्चरिंग नहीं होगा। ना ही हम वैसे से परमिशन मांगेंगे कि जी हमारा पन्नू है हमें वापस कर दो। ठीक है? और नहीं तो उसकी जुड्डी पे आग लगा दो। हम कोई ऐसी बात नहीं करेंगे। खुद जाएंगे जाके आग लगा देंगेअगर किसी ने भी वो खस्तानी हो या आईएसआई हो वो कोई भी हो। अगर उन्होंने टेरर फंडिंग करी भारत के खिलाफ। ये प्रहार किया है जाएंगे प्रहार करेंगे। कहां पर? पहले तो भारत में अगर उनकी कोई एसेट है उसको फ्रीज़ कर दिया जाएगा। उसके बाद पूरे दुनिया में कहीं भी इनका नेटवर्क है कहीं भी यह बैठे हैं उसे हंट किया जाएगा और अननोन गन मैन ये लिखा नहीं है। ये मैं बता रहा हूं। वो अपना काम कराएंगे। जैसे ही आपने प्रहार अनाउंस किया है। उसके बाद क्या हुआ? प्रधानमंत्री मोदी पहुंच जाते हैं फ्रांस के अंदर। वहां पर डॉनल्ड ट्रंप से मिलते हैं। G7 की सबमिट करते हैं और वहां पर स्ट्रेटेजिकली चीजों के ऊपर बात होती है। बात क्या होती है? इंडोपेसिफिक है, मैरिटाइम सिक्योरिटी है। ये सारी बच्चों वाली बातें हमने कर ली। चलिए मैं बच्चों वाले बोल रहा हूं। वैसे डीप डीप टॉपिक्स हैं। अब इसके बाद क्या होता है? रियल डील जो था वो वहां पर नहीं हुआ। वो हुआ बैकग्राउंड में क्योंकि 24 घंटे उसके बाद सारा का सारा जो जो एक्शन है वो शिफ्ट होता है G7 से निकल कर वो न्यू दिल्ली। वो पहुंच गया। यूएसए के एंबेसडर सर्गीय कौर वो भारत पहुंचते हैं भाग-भाग कर और वो मिनिस्टर ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स जयशंकर से मीटिंग नहीं करते। वो बायपास करते हैं सारे डिप्लोमेटिक प्रोटोकॉल्स को। वो चलते हैं सीधा नॉर्थ ब्लॉक के अंदर और वहां पर पहुंचते हैं अमित शाह के सामने उनके ऑफिस में। अब मैं एक्सप्लेन करता हूं पहले तो ये अनप्रेसिडेंटेड क्यों है? और जी7 की मीटिंग को छोड़कर अगर आप वापस आ रहे हैं इसका मतलब है कुछ बड़ा प्रहार हमने कर लिया या करने वाले हैं। एंबेसडर जो होता है गौर एक डिप्लोमेट है। वो एंबेसडर है और वो डिप्लोमेट जो होता है वो हमेशा डिप्लोमेट से मीटिंग करता है। अमित शाह एक डिप्लोमेट नहीं है। वो कंट्रोल करते हैं भारत की इंटरनल सिक्योरिटी को, इंटेलिजेंस ब्यूरोस को और साथ में जो बॉर्डर की फर्सेस हैं वो उसे डील करते हैं अमित शाह। प्लस एक फाइल और है जो अमित शाह के पास है वो है एक्स्ट्राडिशन की फाइल। यानी कि भारत के खिलाफ किसी ने काम पूरे दुनिया में किया उसको पकड़ के उठा के वापस लेके आने का काम वो अमित शाह का है। अब जब यूएसए का एंबेसडर जब अमित शाह को एक जो होम मिनिस्टर है उसे मिलके आता है यानी कि डिप्लोमेसी खत्म हो गया। अब आप ऑपरेशनल मीटिंग के पास की तरफ आप जाना शुरू हो गए। इसलिए अमित शाह से मीटिंग हुआ। अब जो ऑफिशियल स्टेटमेंट है वो रिलीज हो गया। उस पे क्या लिखा गया है वो सुनिए तीन चीजें वो बात करता है काउंटर टेररिज्म के ऊपर काउंटर टेररिज्म तो अमेरिका में कनाडा में पाकिस्तान में बांग्लादेश में यही है काउंटर टेररिज्म के साथ-साथ आपने जोड़ दिया काउंटर नारकोटिक्स कि अब काउंटर टेररिज्म के ऊपर काम अमेरिका और भारत मिलकर करेंगे काउंटर नारकोटिक्स ड्रग्स के ऊपर भी भारत में भी यह एक पेंडेमिक बन चुका है और अमेरिका के अंदर भी यही चीज है इसके ऊपर जॉइंटली काम होगा लेकिन उसके उसके बाद तीसरी जो चीज थी वो स्टैंड अलोन थी ग्लेयरिंग एक वार्निंग है। क्या बोला गया? जॉइंटली हम जो क्रिमिनल्स हैं उसे जस्टिस पे लेके आएंगे बिटवीन बोथ द कंट्रीज। अगर अमेरिका का कोई उग्रवादी या कोई भी ऑपरेटिव अगर भारत में है तो भारत अमेरिका के साथ मिलकर उसे डंडे मारेगा, सीधा करेगा। और अगर भारत का कोई क्रिमिनल वो अमेरिका में बैठा है उसे भी वहीं पर सीधा किया जाएगा। अमेरिका भारत के साथ मिलकर भारत के बिहाफ पर वो काम करेगा। डंडे हम भी मारेंगे वो भी मारेंगे। दोस्तों, यह जेनेरिक टॉकिंग पॉइंट नहीं है। यह टारगेटेड एक एक्शन प्लान है जो स्वर्गीय गौर और अमित शाह ने मिलकर प्रहार के ऊपर काम करना शुरू कर दिया। अब जो जिओपॉलिटिकल रियलिटी है जिसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा। यूनाइटेड स्टेट्स के पास मैसिव एक ड्रग्स की क्राइसिस है। नारकोटिक्स वहां पर फ्रीली वो मूव करते हैं मेक्सिको से भी और कनाडा से भी। कनाडा से कौन लेके आता है? यही निग्जर के पार्टी के सारे के सारे खाली हैं। सारा ट्रकिंग का बिनेस उनके हाथ में है। भारत के अंदर भी जो ड्रग्स की प्रॉब्लम है वो बहुत ज्यादा बढ़ती जा रही है। अब इससे प्रॉब्लम दुगनी है। जब कनाडा में ख़स्तानी जब ड्रग्स में से पैसा कमाते हैं उसके बाद वो टेरर फाइनेंसिंग का काम करते हैं भारत में। जब भी टेरर का काम करना हो जैसे पंजाब में टेररिज्म फैलानी है, खाली मूवमेंट करना है, एक्सट्रीमिज्म करना है तो वो सारा का सारा इन पैसों से किया जाता है। बड़े ऑर्गेनाइज्ड वे से ये जो क्राइम के सिंडिकेट्स हैं वो ऑपरेट करते हैं अमेरिका में और भारत के अंदर। अब ये जो दो प्रॉब्लम्स है ये इंटरसेक्ट कर रही हैं। अमेरिका में ड्रग्स की प्रॉब्लम है और भारत में उसी ड्रग्स के पैसे से ड्रग्स का काम भारत में भी हो रहा है। प्लस एक्सट्रीमिज्म का काम वो भी हो रहा है। इसलिए इंटरसेक्ट कर रहा है उनकी दुगती रग और हमारी वो कॉमन है। इसलिए जो ये जो क्योंकि जो ख़स्तानी वहां पे काम कर रहे हैं वही ख़स्तानी भारत में भी वो काम कर रहे हैं। दोस्तों जो गैंग्स हैं वो क्या कर रहे हैं? ड्रग्स के मनी से अब वो वेपन्स खरीद रहे हैं। उसके बाद कैलिफोर्निया में, ब्रिटिश कोलंबिया में यहां पंजाब में उन्होंने गंध डाल के रखा हुआ है। और ये जो सेपरेटेस्ट जो नेटवर्क्स हैं जो टारगेट करते हैं भारत को कि हमने खाली स्थान बना लेना है। हमने कश्मीर अलग कर देना है।हमेशा काटने की ही बातें वो बोलते हैं। ये अब अमेरिका ने और भारत ने बोल दिया कि अब ये बदतमीजी नहीं चलेगी। आपको याद होगा जब बाइडन की गवर्नमेंट थी उसने इन इंडिविजुअल्स को निजर को पन्नू को उनको क्या बोला ये तो पॉलिटिकल एक्टिविस्ट है इनको फ्रीडम ऑफ स्पीच के अंडर हम इनको पकड़ नहीं सकते वो वहां पे बैठकर भारत की धरती के ऊपर वो बोलते हैं अमित शाह को गोली मार देंगे हम प्लेन उड़ा देंगे लेकिन फ्रीडम ऑफ स्पीच के अंदर उनको पकड़ा नहीं गया जैसे ही ट्रंप आए उन्होंने देखा कि यार ये कार्टल्स एक प्रॉब्लम है इसलिए वाशिंगटन ने फाइनली रियलाइज कर दिया कि भारत की अगर हेल्प मिल जाती है क्योंकि भारत ने ऑलरेडी प्रहार को अनाउंस कर दिया है। अगर हम अलाइन कर ले भारत के साथ तो हमारा जो यहां पे ड्रग्स का प्रॉब्लम है उसे डिस्मेंटल किया जा सकता है। क्योंकि जो करने वाले लोग हैं वो भारतीय ही है। इसलिए आज मीटिंग हुई है। दोस्तों आप सोच के देखिए जो प्लेयर्स है वो इनवॉल्वड कौन है? वो है ट्रांस नेशनल ड्रग्स के गैंग्स, एक्सट्रॉक्शन के रिंग्स। और जहां तक यहां तो पंजाब के अंदर जो हाईली सिक्योर प्रिजंस हैं जेल के अंदर लोग बैठे हैं। वहां से बैठकर वो कनाडा के अंदर ड्रग्स का काम कर रहे हैं। जेल में वो भी पंजाब के अंदर जहां पे पूरी सख्ती है। इसलिए भारत जब चीखता रहा कनाडा को कि आप जिन सांपों को पाल रहे हैं एक दिन आपको डसेंगे वो काम होना शुरू हो गया। इसलिए जो हमारी एजेंसीज हैं आज एफबीआई और कनाडा के जो सीक्रेट एजेंसीज हैं उसके साथ कोऑर्डिनेट कर कर हम उनको डोजियर भेज रहे हैं। हमने  फाइनेंसियल रिकॉर्ड्स जो हैं पूरे इनके नेचर पार्टी के या ख़स्तानियों के हमने एक्सचेंज करने शुरू कर दिए। वेस्ट अब तक हमारी इंटेलिजेंस की रिपोर्ट्स को इग्नोर करता रहा। क्योंकि उनको ख़स्तानियों की जरूरत थी गवर्नमेंट में आने के लिए। लेकिन अब जो कारने की गवर्नमेंट है वो बिना ख़स्तानियों के आई है। इसलिए अब उन्होंने हमारी बात सुननी शुरू कर दी। दोस्तों चेस बोर्ड फ्लिप हो चुका है। जो मीटिंग है भारत की अमित शाह की और सर गौर की वो ट्रांजैक्शनल है। ट्रांजैक्शनल क्यों बोल रहा हूं? क्योंकि जो यूएसए का कोऑपरेशन है वो अब हमें मिलना शुरू हो गया और हमारा कोऑपरेशन उनको मिलना शुरू हो गया। नॉट ओनली इन प्रहार बट इन समथिंग एल्स आल्सो। हम क्या बोल रहे हैं? यूएसए को सप्लाई चेस को डायवर्सिफाई करना है चाइना से। हम मदद कर रहे हैं। उसको इंडोपेसिफिक में भारत की जरूरत है। हम दे रहे हैं। जबकि इंडोपेसिफिक में से इंडो वर्ड निकाल दिया लेकिन इंडिया को नहीं निकाला। सिर्फ नाम में से इंडो निकाला है। अब इसके रिटर्न में यूएसए क्या बोल रहा है? यूएसए बोल रहा है कि जो पन्नू एंड पार्टी को हम प्रोटेक्ट कर रहे थे सीआईए और एफबीआई अब वो प्रोटेक्शन खत्म कर दी जाएगी। इसलिए गौर जब अमित शाह को मिलते हैं उन्होंने एक लिस्ट दिया है अमित शाह को और अमित शाह ने भी एक लिस्ट दे दिया। लिस्ट में कई नाम है जो कॉमन है। उसमें पन्नू का नाम आ चुका है। नाउ डोज़ियर्स दोनों ने एक्सचेंज कर लिए। दोनों मैच कर रहे हैं कि कॉमन आदमी कौन है। उनके लोग भारत में कौन से बैठे हैं और हमारे लोग अमेरिका में कौन से बैठे हैं जिनको पकड़ के अब सीधा करना है। अब कोऑर्डिनेट किया जाएगा कि बैंक अकाउंट्स को वहां पर भी फ्रीज़ किया जाएगा और भारत के अंदर भी फ्रीज़ किया जाएगा। यानी कि दोनों पैरेलली एक ही बंदे के ऊपर

अब काम करना शुरू करेंगे। लिस्ट इसीलिए एक्सचेंज की गई है। यह जो म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस है उसके ऊपर काम होना शुरू हो गया ताकि लूप होल रहे नहीं। अगर यहां से कोई भाग कर कोई अमेरिका में या यूके में या कनाडा में पहुंच गया है। अब उसको वापस लेके आने का काम दोनों कंट्रीज इकट्ठी मिलकर लीगली उसको वापस करेंगी। दोस्तों कनाडा जो डेस्पिरेटली ट्राई करता रहा कि हमें एक्सपोज करने के लिए आज एविडेंस वो प्रोटेक्ट कर रहा है उसे हाइड कर रहा है क्योंकि उसे एफडीए की जरूरत है भारत के साथ निजर गया तेल लेने कनाडा बोलता है ऐसी तैसी फराए हमें फर्क नहीं पड़ता हम भारत की मार्केट को छोड़ नहीं सकते दूसरी तरफ से यूनाइटेड स्टेट्स उसने भी डिसाइड कर लिया कि ड्रग्स के कार्ट्स को अब खत्म करना है उसके लिए भारत की जरूरत है और इसलिए अगर वो एंटी इंडिया के जो एलिमेंट्स है जिसको मैं एसेट्स बोलता हूं पन्नू जैसे जो सीआईए के एसेट्स थे अगर उसको वो प्रोटेक्ट करता है तो वो अपनी जो पकड़ है भारत की मार्केट के ऊपर वो लूज़ कर जाएगा वो लूज़ करना चाहता नहीं है इसलिए भारत ने क्या किया हमने अपनी लिवरेज को क्रिएट किया हमने अपना खुद का प्रहार का जो पॉलिसी है काउंटर टेरर टेरर का जो डॉक्ट्रिन है हमने खुद उसको क्रिएट किया और ल्च कर दिया इसलिए जब सुपर पावर्स को अब जरूरत है हमारी हमने क्या किया। हमने भी बिल दे दिया उनको। यह हमारा बिल है। बिल के अंदर हमने कुछ नाम दिए हैं कि नाम चाहिए। दोस्तों बिल बिल वाज़ प्रेजेंटेड इन फ्रांस। दैट इज व्हाई G7 में छोड़कर ये बंदा बेचारा वापस आया है और सीधा उसने बिल पे किया नॉर्थ ब्लॉक में अमित शाह के सामने। अब वॉच क्या करना है? अगले कुछ तीन चार महीनों में आप देखेंगे अननोन एक्टिविटीज इंक्रीस हो जाएंगी। आप देखेंगे कि कुछ अरेस्ट हो गए हैं नॉर्थ अमेरिका में कुछ लोग अंडर द गाइस ऑफ दिखाया जाएगा कि नारकोटिक्स को क्रैक डाउन करने में लिए हमने पन्नू को पकड़ लिया। पन्नू मैं एग्जांपल दे रहा हूं वो कोई भी पन्नू शन्नू टन्नू कुछ भी हो सकता है। दूसरा एक और होगा। अब अकाउंट्स जो है वो फ्रीज किए जाएंगे कनाडा के अंदर भी भारत के अंदर भी और अमेरिका के अंदर भी कुछ लोगों के। आप न्यूज़ देखेंगे ये सारी चीजें आपके सामने होती हुई दिखाई देंगी अगले कुछ महीनों में। और क्वाइटली कुछ लोगों को डिपोर्ट किया जाएगा अमेरिका कनाडा से भारत के अंदर। ये सारी चीजें वो है जो इवनिंग न्यूज़ में नहीं आएंगी। दोस्तों ऑपरेशंस ऑलरेडी शुरू हो चुके हैं। मैंने पहले शुरू में बोला था आपको कुछ बहुत बड़ा है जिसके लिए अमित शाह के साथ मीटिंग करी है। ये डिप्लोमेटिक ये डिप्लोमेसी नहीं है। जॉइंट टास्क फोर्स अब क्रिएट की जा रही है अमेरिका, कनाडा और भारत के बीच में। और जो लोग सोचते थे कि अमेरिका में, कनाडा में बैठकर वो अनटचेबल हैं। वो न्यूयॉर्क में और वेंकूवर में बैठकर वो पूरा कार्टल्स का काम चलाएंगे और भारत में दंगे करवाएंगे। वो काम खत्म हो गया। अब ये जो लिस्ट है वो ऑलरेडी गौर के टेबल पे और नॉर्थ ब्लॉक में अमित शाह के टेबल पे वो लिस्ट पहुंच चुकी है।  अगला जो दरवाजा है वो किसका खटकाया जाएगा? भारत में, अमेरिका में और कनाडा में? दो नाम देता हूं पन्नू का या मोहम्मद का।कि आपकी जो रिक्वेस्ट है वो मोहम्मद के डंडे पहले मारने चाहिए या पन्नू के।

 जय हिंद।


Thursday, June 18, 2026

G7 के मंच पर मोदी और ट्रंप की मुलाकात से ठीक पहले क्यों बवाल मच गया है?

G7 के मंच पर मोदी और ट्रंप की मुलाकात से ठीक पहले क्यों बवाल मच गया है?
G7 के मंच पर मोदी और ट्रंप की मुलाकात से ठीक पहले क्यों बवाल मच गया है?
G7 के मंच पर मोदी और ट्रंप की मुलाकात से ठीक पहले क्यों बवाल मच गया है?
G7 के मंच पर मोदी और ट्रंप की मुलाकात से ठीक पहले क्यों बवाल मच गया है?

 क्या अमेरिका ने दिखा दी है अपनी असली औकात? चाइना के लिए क्या भारत को हमेशा के लिए दूर कर चुके हैं ट्रंप? भारत की पीठ में खंजर घोंपने वाले दुनिया के सबसे पुराने लोकतंत्र पर अब पल भर का भी भरोसा क्यों नहीं किया जा सकता है? G7 के मंच पर मोदी और ट्रंप की मुलाकात से ठीक पहले क्यों बवाल मच गया है? क्यों इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजरें टिक गई है? आखिर क्यों अमेरिका ने भारत का गलत नक्शा दिखा के करोड़ों भारतीयों के स्वाभिमान को सीधे तौर पर ललकार दिया है? क्या भारत को अब अमेरिका के बनाए क्वाड चक्रव्यूह से हमेशा के लिए बाहर आ जाना चाहिए। दोस्तों आज 17 जून 2026 है और आज ग्लोबल पॉलिटिक्स यानी कि वैश्विक राजनीति के अंदर एक ऐसा भूचाल आ चुका है जिसकी गूंज वाशिंगटन से लेकर के नई दिल्ली के सत्ता के गलियारों तक बहुत तेजी से सुनाई जा रही है। अमेरिका के रक्षा विभाग यानी पेंटागन ने एक ऐसा फैसला ले लिया है जिसने पूरी दुनिया के जिओपॉलिटिकल समीकरणों को पूरी तरीके से पलट करके रख दिया है। डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने दुनिया की सबसे अहम इंडोपेसिफिक कमांड के नाम से इंडो शब्द को हमेशा के लिए मिटा दिया है। जी हां, अब यह सिर्फ पेसिफिक कमांड रह गया है।

 यह कोई मामूली टाइपिंग मिस्टेक या फिर एक नाम का बदलाव नहीं है बल्कि यह अमेरिका की नई विदेश नीति और रक्षा नीति का वो खतरनाक एजेंडा है जो सीधे तौर पर भारत को रणनीतिक मंच से साइडलाइन करने की एक बहुत बड़ी साजिश है। दोस्तों मई 2026 के शंग्रीला डायलॉग के अंदर अमेरिकी युद्ध सचिव पीट हेग्सेथ ने जो एकतरफ़ा भाषण दिया था उसी दिन यह साफ हो गया था कि अमेरिका अब भारत के साथ में कंधे से कंधा मिलाकर के नहीं चलना चाहता है और आंकड़े और घटनाएं दोस्तों गवाह हैं कि अमेरिका के ओबामा प्रशासन से लेकर के ट्रंप के पहले कार्यकाल और फिर बाइडन प्रशासन के दौरान जिस इंडोपेसिफिक विज़न को दुनिया का भविष्य बताया जा रहा था उसे ट्रंप के दूसरे कार्यकाल ने एक ही झटके के अंदर किनारे कर दिया है। लेकिन दोस्तों इसके पीछे का असली खेल क्या है? आखिर दोस्तों अमेरिका ठीक उस वक्त ऐसा क्यों करने जा रहा है जब दुनिया को सबसे ज्यादा स्थिरता की जरूरत है। दोस्तों यह सवाल हर उस इंसान के दिमाग के अंदर है जो दुनिया की राजनीति को समझता है। लेकिन असली सस्पेंस तो अभी शुरू हुआ है। अब जरा इस फैसले की गहराई में चलते हैं। तो दोस्तों आपको बता दूं कि अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान को मिलाकर के जो एक बहुत मजबूत गठबंधन यानी कि क्वाड बना है, उसका पूरा का पूरा आधार ही इंडोपेसिफिक रीजन की सुरक्षा और विकास है। ऐसे में दोस्तों, इंडो शब्द को ही जड़ से उखाड़ फेंकने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या भारत को अब इस क्वाड से बाहर निकल जाना चाहिए? तो दोस्तों इंडोपेसिफिक कमांड से भारत की पहचान को मिटाने का बहुत साफ और सीधा मतलब यह निकलता है कि अमेरिका अब पूरे हिंद प्रशांत क्षेत्र को एक साथ लेकर के चलने के आदर्शवाद से पीछे हट चुका है। अमेरिका अब सिर्फ और सिर्फ अपने मुख्य प्रशांत महासागरीय हितों यानी कि पेसिफिक ओशन की सिक्योरिटी के ऊपर ही अपना पूरा फोकस करना चाहता है।

अमेरिका यह गुरूर पाल करके बैठ गया है कि उसे अब चाइना को कंट्रोल करने के लिए या एशिया के अंदर अपना दबदबा बनाए रखने के लिए भारत की कोई जरूरत नहीं है। यह सीधे तौर पर अमेरिका और चाइना के बीच जी2 यानी कि ग्रेट टू की उस खतरनाक सोच को आगे बढ़ाता है जहां दुनिया की दो बड़ी ताकतें मिलकर के पूरी दुनिया को अपने हिसाब से चलाना चाहती हैं। लेकिन क्या भारत इस अमेरिकी गुरूर को चुपचाप सह लेगा? तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। आगे दोस्तों जो कुछ होने वाला है वो और भी  ज्यादा हैरान करने वाला है। दोस्तों जरा इतिहास के पन्नों को थोड़ा पीछे पलटें तो साल 2018 के अंदर जब डोन्ड ट्रंप का पहला कार्यकाल चल रहा था तब उन्होंने ही अमेरिकी सैन्य कमान का नाम यूएस पेसिफिक कमांड यानी कि यूएस पैकम से बदलकर के यूएस इंडोपेसिफिक कमांड यानी कि इंडोपैकम किया था। उस वक्त अमेरिका के तत्कालीन रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने बहुत ही जोर शोर से कहा था कि यह बदलाव भारत की बदलती रणनीतिक ताकत और हिंद महासागर से लेकर के प्रशांत महासागर तक की जुड़ी हुई सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर के किया गया है। जेम्स मैटिस ने तब बड़े ही गर्व के साथ कहा था कि यह कमांड बॉलीवुड से हॉलीवुड तक फैली हुई है।

 लेकिन आज यानी कि 2026 के अंदर पेंटागन ने अपना ही थूका हुआ चार्ट करके उसे फिर से पुराना नाम यानी कि पेसिफिक कमांड दे दिया है। दोस्तों अमेरिका इसके पीछे यह खोखला तर्क दे रहा है कि यह उनके ऐतिहासिक रूट और लेगसी को बहाल करने के लिए किया गया है। अमेरिका का कहना है कि कमांड का क्षेत्र या मिशन नहीं बदल रहा है। लेकिन दोस्तों जिओपॉलिटिक्स में सिर्फ वो नहीं होता है जो आंखों से दिखाई देता है। यहां बड़े-बड़े नेताओं के मुंह से निकले एक-एक शब्द और हटाए गए एक-एक अक्षर के बहुत गहरे मायने होते हैं। एक्सपर्ट साफ तौर पर आशंका जता रहे हैं कि एशिया पेसिफिक रीजन के अंदर अब अमेरिका की नजर में भारत का कोई जिओपॉलिटिकलेंस नहीं रह गया है। लेकिन दोस्तों क्या आपने कभी सोचा है कि यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका से ज्यादा मनमानी करने वाला दुनिया के अंदर कोई दूसरा मुल्क नहीं है? दोस्तों इसके लिए जिओपॉलिटिकल एक्सपर्ट आर जगन्नाथन ने बिल्कुल सटीक बात कही है। उन्होंने साफ कहा है कि अमेरिका पर दुनिया का कोई भी अंतरराष्ट्रीय नियम या कानून लागू नहीं होता। अमेरिका जो नियम बनाता है वो पूरी दुनिया पर थोप देना चाहता है सिवाय उस स्थिति के जब सामने वाले देश के पास ना कहने की बहुत बड़ी ताकत हो और दोस्तों आज की डेट में सिर्फ चाइना और रशिया ही अमेरिका की आंखों के अंदर आंखें डालकर के ऐसी बात कह पा रहे हैं। अब दोस्तों भारत का सबसे पहला और सबसे अहम मकसद अब अपनी राष्ट्रीय आर्थिक और राजनीतिक ताकत के दम पर ऐसी बेजोड़ संप्रभुता हासिल करनी चाहिए कि अमेरिका भी हमें डिक्टेट ना कर सके।

भारत को अब अमेरिका पर अपनी निर्भरता को तुरंत प्रभाव से कम करना शुरू कर देना चाहिए। इसी निर्भरता का फायदा उठा के पिछले एक साल में डोनल्ड ट्रंप से लेकर के उनके कॉमर्स सेक्रेटरी हावर्ड लटनिक पीटर नवारो और अब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो तक ने भारत के खिलाफ बहुत ही बेतुकी और अहंकार भरी बातें कही हैं। दोस्तों ऊपरी तौर पर देखने में लगता है कि सिर्फ एक सैन्य कमान का नाम ही तो बदला है। लेकिन जरा टाइमिंग पर गौर कीजिए। यह नाम ठीक उस वक्त बदला गया है जब आज ही फ्रांस की राजधानी पेरिस के अंदर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आमने-सामने की बहुत ही हाई वोल्टेज मुलाकात होने वाली है। यह कोई संयोग नहीं  है। यह एक बहुत बड़ा रणनीतिक प्रयोग है और धमकी भरा संदेश है। दोस्तों जरा याद कर लीजिए पिछले साल फरवरी के अंदर मोदी से मिलने से पहले ट्रंप ने रेसिप्रोकल टेरिफ को लेकर के भारत के खिलाफ ट्वीट किया था और बाद में भारत के ऊपर 50% का भारी भरकम टेरिफ थोप दिया जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा| अब इंडो शब्द को हटाने का साफ मतलब है कि अमेरिका भारत को यह संदेश दे रहा है कि अगर भारत पूरी तरह से अमेरिका की शर्तों के ऊपर नहीं चलता है तो अमेरिका को कोई फर्क नहीं पड़ता है। ट्रंप प्रशासन यह संदेश दे रहे हैं, यह संकेत दे रहे हैं कि अमेरिका का मुख्य सैन्य फोकस अब सिर्फ ताइवान, जापान, फिलीपींस और चाइना से जुड़ी चुनौतियों के ऊपर है। भारत उनके लिए एक साझेदार जरूर हो सकता है। लेकिन अब भारत उनकी एशिया रणनीति का केंद्र बिंदु नहीं है। यह भारत के लिए एक बहुत बड़ा अलार्म है। लेकिन अमेरिका का अहंकार सिर्फ नाम बदलने तक सीमित नहीं रहा।

अमेरिका ने अपनी सारी हदें पार करते हुए भारत के खिलाफ एक और बड़ा ही भड़काऊ कदम उठाया है। दोस्तों, अमेरिकी रक्षा विभाग ने जो अपना नया रणनीतिक मैप यानी कि नक्शा जारी किया है, उसमें भारत की संप्रभुता के साथ में सीधे तौर पर छेड़छाड़ की गई है। यूएस कमांड ने भारत का एकदम गलत और भ्रामक नक्शा इस्तेमाल किया है। इस नए अमेरिकी नक्शे के अंदर पूरा जम्मू कश्मीर शामिल नहीं है। और सबसे हैरानी की बात तो यह है कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को सीधे तौर पर पाकिस्तानी इलाका दिखाया गया है। इस नक्शे के अंदर भारत को हल्के हरे रंग से दिखाया गया है। लेकिन जम्मू कश्मीर के ऊपरी और पश्चिमी हिस्सों यानी पीओके और अक्साई चैन को भारत के मुख्य नक्शे से बिल्कुल अलग कर दिया गया है। दोस्तों भारत हमेशा से अपनी पूरी थलीय और समुद्री सीमा की सुरक्षा को अखंड मानता है। लेकिन अमेरिकी सैन्य कमान का यह नक्शा भारत और पाकिस्तान को दो अलग-अलग सैन्य कमानों यानी सेंट कॉम और यूएस पैकोकॉम में बांट करके देखता है। इसमें भारत के ठीक बीच से एक काली रेखा गुजर रही है।

डॉन्ड ट्रंप का प्रशासन लगातार भारत के खिलाफ एक्शन ले रहा है। मैप में साफ दिख रहा है कि पाकिस्तान को अमेरिका ने यूएस सेंट कॉम के अधीन दिखाया है और इसके चलते उसे भारत से अलग रंग में दिखाया गया है। यह ट्रंप प्रशासन का पाकिस्तान के प्रति अचानक उमड़ा हुआ प्रेम है जो भारत के लिए बहुत बड़े खतरे की घंटी है। लेकिन दोस्तों क्या भारत इस कूटनीतिक अपमान को बर्दाश्त करेगा तो ऐसा हरगिज़ नहीं है। दोस्तों देशों के बीच में तनाव तो चलते रहते हैं लेकिन जब बात हमारे देश के नागरिकों की जान पर आ जाए तो कोई भी भारतीय चुप नहीं बैठ सकता है। यह पूरा विवाद तब और ज्यादा गहरा और दर्दनाक हो गया जब हॉर्मोज स्टेट के अंदर एक कमर्शियल जहाज पर हुए अमेरिकी एक्शन के दौरान तीन निर्दोष भारतीय नाविकों को अपनी जान गवानी पड़ी। दोस्तों ये भारत के लिए एक बहुत बड़ा और गहरा सदमा है। अहंकार की हद तो देखिए कि इस भयंकर और दुखद घटना के बाद ही ट्रंप प्रशासन के शुरुआती बयानों में इन तीन भारतीयों की मौत का कोई जिक्र तक नहीं किया गया। अमेरिका ने सिर्फ इतनी सी बात कही कि उन्होंने एक ऐसे जहाज को टारगेट किया जो अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा था और जो उनकी सेना के साथ में सहयोग नहीं कर रहा था। दोस्तों अमेरिका ने अभी तक इन तीन भारतीय नागरिकों के दुखद अंत पर कोई माफी नहीं मांगी है। उल्टा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने तो भारत को ही धमकाने वाले अंदाज के अंदर बयान दे दिया है। जब भारत सरकार ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और अमेरिकी डिप्लोमेट्स को तलब किया तब भी अमेरिका का रवैया एकदम बेरुखा


रहा है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मार्को रूबियो से सख्त लहजे के अंदर बातचीत की है। लेकिन अमेरिकी बयान में रत्ती भर भी पछतावा नहीं आया है। दोस्तों अमेरिका ने घमंड में कहा है कि उनकी नाकाबंदी का उल्लंघन किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोस्तों इस पूरी घटना ने भारत के अंदर भयंकर गुस्सा भर दिया है। जिन तीन भारतीय नाविकों ने अमेरिकी हमले के अंदर अपनी जान गवाई है, उनके परिवारों का रो-रो करके बुरा हाल है। जान गवाने वाले 23 साल के युवा नाविक आदित्य शर्मा के पिता राजेश शर्मा ने जो कहा है, वह किसी भी इंसान का दिल चीर देगा। उन्होंने रूंधे हुए गले से कहा है कि मेरी बस एक ही मांग है कि मेरे बेटे का शरीर मुझे वापस दिया जाए। मैं जानना चाहता हूं कि उसके आखिरी पलों में उसके साथ में क्या हुआ था।” था। क्या उसे बचाने के लिए कोई भी मदद दी गई थी? किन हालातों में हमारे देश के इन तीन होनहार युवाओं की जान चली गई? दोस्तों, अमेरिकी एक्सपर्ट डरक जे ग्रासमैन जो एशिया मामलों के अंदर बहुत बड़े जानकार हैं। उन्होंने भी खुद अपनी सरकार के ऊपर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है कि आखिर अमेरिका भारत का दोस्त कैसा दोस्त है? रिपीट। दोस्तों, उन्होंने पूछा है कि आखिर अमेरिका भारत का कैसा दोस्त है? ग्रासमैन ने कहा कि रूबियों के शब्द एकदम बेतुके थे और ट्रंप का अमेरिका भारत के लिए कतई कोई अच्छा दोस्त नहीं हो सकता है। इस दुखद घटना ने भारत में अमेरिका विरोधी भावनाओं को चरम पर पहुंचा दिया है। अब पूरी दुनिया की नजरें फ्रांस में चल रहे G7 समिट के ऊपर टिकी हुई है।

 भारत के प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस पहुंचे हुए हैं और आज शाम को ही उनकी डोनल्ड ट्रंप के साथ में मुलाकात होने वाली है। दोस्तों पूरे 16 महीने के बाद में इन दोनों नेताओं की आमने-सामने की मुलाकात होने वाली है और इन 16 महीनों के अंदर भारत और अमेरिका के रिश्ते 20 साल पीछे खिसक चुके हैं। लेकिन दोस्तों सवाल है कि क्या पीएम मोदी आज बंद कमरों में होने वाली इस मीटिंग में उन तीन भारतीय नाविकों का मुद्दा उठाएंगे। क्या ट्रंप की आंखों में आंखें डाल करके भारत अपना कड़ा विरोध दर्ज कराएगा? जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान कुछ तस्वीरें सामने आई हैं। जहां पोडियम पर चढ़ते वक्त पीएम मोदी ने हाथ बढ़ाकर के डोन्ड ट्रंप को सहारा दिया और ट्रंप ने भी उनका हाथ पकड़ा। दोनों की कुर्सियां भी एक साथ लगाई गई थी। लेकिन दोस्तों, यह सिर्फ कैमरों के लिए की गई एक कूटनीतिक औपचारिकता है या इसके पीछे रिश्तों को सुधारने की कोई ठोस रणनीति है। दोस्तों, पीएम मोदी ने कल ही ट्रंप की मौजूदगी में G7 के मंच से एक बहुत ही कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने पूरी दुनिया के सामने दहाड़ते हुए कहा था कि समुद्री कर्मचारियों को बिना किसी डर के अपना काम करने की आजादी होनी चाहिए। यह सीधे तौर पर अमेरिका और उसके मनमाने नौसैनिक रवैया की तरफ एक बहुत ही कड़ा संदेश था, कड़ा इशारा था। आज भारत के पास में अमेरिका के पास शिकायत करने के लिए एक या दो नहीं बल्कि दर्जनों मुद्दे हैं। दोस्तों ट्रंप की नई वीजा और इमीग्रेशन पॉलिसी ने भारतीय छात्रों और कामगारों का भविष्य अधर के अंदर लटका दिया है। भारीभरकम टेरिफ ने भारतीय बाजार और अर्थव्यवस्था को तगड़ी चोट पहुंचाई है। यूएस इंडिया बिजनेस काउंसिल के प्रेसिडेंट अतुल केशव ने बिल्कुल सही चेतावनी दी है कि पिछले 25 सालों में दिल्ली और वाशिंगटन के बीच जो भी भरोसा डेवलप हुआ था वह अब बहुत तेजी के साथ में टूट चुका है और ऐसा लग रहा है कि दोनों देशों के रास्ते अब हमेशा के लिए अलग-अलग होने वाले हैं।

डोनाल्ड ट्रंप भले ही कैमरे के सामने कितनी भी बार पीएम मोदी को अपना अच्छा दोस्त बता लें लेकिन उनके प्रशासन ने बार-बार हमारे हिंदुस्तान के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाई है। दोस्तों क्या भारत इस अपमान को इतनी आसानी से भूल जाएगा? तो ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह 2026 का वो भारत है जो अपनी शर्तों पर दुनिया से बात करता है जो अपनी सुरक्षा और अपने नागरिकों के सम्मान के लिए किसी भी सुपर पावर से टकराने का माद्दा रखता है। दोस्तों अमेरिका की यह चालबाजियां और पाकिस्तान के प्रति उनका यह नया प्यार भारत के लिए एक बहुत बड़ा सबक है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कोई किसी का सगा नहीं होता। दोस्तों आज फ्रांस के उस बंद कमरे में जो भी बातचीत होगी वो आने वाले कई दशकों तक एशिया और पूरी दुनिया का भविष्य तय करने वाली है। दोस्तों आपको क्या लगता है? क्या पीएम मोदी को आज डोनल्ड ट्रंप को उसी की भाषा के अंदर करारा जवाब देना चाहिए? क्या भारत को अब क्वाड से किनारा कर लेना चाहिए? टाटा बाय-ब बोल देना चाहिए। और आप इस मामले में क्या सोचते हैं? कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें। नमस्कार



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दो बहुत बड़ी-बड़ी मछलियां मारी गई अननोन गन मैन की तरफ से

दो बहुत बड़ी-बड़ी मछलियां मारी गई अननोन गन मैन की तरफ से दो बहुत बड़ी-बड़ी मछलियां मारी गई अननोन गन मैन की तरफ से दो बहुत बड़ी-बड़ी मछलिया...