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Thursday, September 18, 2025

सोशल मीडिया का धमाका मुख्य न्यायाधीश गवई को स्पष्टीकरण देना पड़ा सिब्बल को भी महसूस हुई गड़गड़ाहट

 


जिस तरीके से सोशल मीडिया पर पिछले 24 घंटों में भारत के सीजीआई के उस अनर्गल और अनावश्यक टिप्पणी के बाद एक हंगामा देखने को मिला। बहुत बड़ा एक आक्रोश देखने को मिला। उसके बाद में आज भारत के सीजीआई बी आर गवई ने इस पर सफाई दी है। आप सोच लीजिए सोशल मीडिया की ताकत वास्तव में बहुत ज्यादा हो गई है। इसको लेकर किसी धर्म बड़े धर्माचार्य ने किसी बड़े नेता ने किसी ने कुछ नहीं कहा। लेकिन सोशल मीडिया पर जो कुछ हुआ उसकी धमक अब सुप्रीम कोर्ट में भी सुनी जा रही है। ना केवल सॉलिसिटर जनरल ने इस मुद्दे को उठाया बल्कि कपिल सिब्बल ने भी स्वीकार किया और यह कहा कि माय लॉर्ड हम तो यह सब रोज झेल रहे हैं। यह जो सोशल मीडिया है यह एक बिगड़ैल घोड़ा बन गया है जिस पर काबू नहीं पाया जा सकता। इसको लेकर सीजीआई ने भी चिंता व्यक्त की और यह कहा कि यह सब बहुत ज्यादा हो रहा है। नेपाल में भी सोशल मीडिया की वजह से ऐसा हुआ। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि यहां तो न्यूटन का जो नियम है वो भी एक तरीके से खाली होता हुआ उल्टा  पड़ता हुआ नजर आ रहा है। यहां पर एक्शन का प्रोपोशननेट इक्वल रिएक्शन होने की बजाय एक्शन से कई गुना ज्यादा रिएक्शन होता हुआ दिख रहा है। यह आप लोगों की ताकत है।

आप लोग इसके लिए धन्यवाद के पात्र हैं। वह सभी लोग धन्यवाद के पात्र हैं जिन्होंने हिम्मत दिखाते हुए इस मुद्दे पर सीजीआई के पद पर बैठे हुए एक ऐसे व्यक्ति को सही रास्ता दिखाने का काम किया। सही तरीके से ताकत अपनी दिखाने का काम किया। जो किसी से नहीं डरता। ये जो सुप्रीम कोर्ट के जज होते हैं, हाई कोर्ट के जज होते हैं, यह खुद को खुदा मान बैठे हैं। आज कर्नाटक में माइनिंग के एक मामले की सुनवाई चल रही थी और इस सुनवाई में सुनवाई कर रहे थे जस्टिस बी आर गवई जो सीजीआई है के विनोद चंद्रन और एम एम सुंदरेश। ये तीन जजों की बेंच इसमें सुनवाई कर रही थी। इस पर सॉललीिसिटर जनरल ने कहा कि सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा बातें हो रही हैं। आपने जो खजुराहो के मामले में सुनवाई करते हुए कहा है उसकी वजह से इस पर सीजीआई ने कहा कि मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं। मैं मंदिर भी जाता हूं और मैंने केवल यह बात याचिकाकर्ता के वकील को समझाने के लिए कही थी। हालांकि जिस तरीके से उन्होंने बात कही थी वो बेहद आपत्तिजनक थी। अब वो इस पर सफाई देते हुए नजर आ रहे हैं और वो यह कह रहे हैं कि मैं सभी धर्मों का सम्मान करता हूं। यह बहुत बड़ी जीत है भारत के सोशल मीडिया की हिंदू सनातनी जनमानस की क्योंकि देखिए इस तरीके के पदों पर बैठे हुए व्यक्ति इतनी जल्दी अपनी गलती स्वीकार नहीं करते हैं। इतनी जल्दी वो सफाई नहीं देते। हालांकि माफी तो नहीं मांगी है सीजीआई ने औरकि आप समझ सकते हैं उनकी जो बैकग्राउंड है जिस तरीके से वो सीजीआई बने हैं और सीजीआई का जितना बड़ा उनके पास एक पावर है उसके हिसाब से लेकिन उन्होंने जो सफाई दी है और सोशल मीडिया की धमक को

सुप्रीम कोर्ट में जिस तरीके से सुना गया है वो अपने आप में एक बहुत बड़ी जीत है सोशल मीडिया की इसीलिए हम बार-बार कहते हैं कि इस देश से कॉलेजियम नाम की जो वेल बो दी गई है, जो एक असंवैधानिक व्यवस्था इस देश पर थोप दी गई है, उसको सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता फैलाकर आसानी से इस देश को मुक्त कराया जा सकता है।आज हम जैसे लोगों के दिमाग में यह बात आ रही है। उसके पीछे वजह यह है कि जिस तरीके से जुडिशरी में तमाम भ्रष्टाचार उजागर हो रहे हैं। बर्मा का घटना सामने आई, पारदी वाला वाला केस सामने आया। तो इस वजह से भी जो सेंटीमेंट है वो जनता के भी उभरे और हमारे जैसे लोगों के भी उभरे। लेकिन यहां एक और बड़ी बात है जो हमारे तथाकथित शंकराचार्य हैं, धर्माचार्य हैं उन लोगों ने इस पर कोई बहुत ज्यादा एग्रेसिव रूप नहीं अपनाया था। बहुत ज्यादा मुखालफित नहीं की थी। को हो सकता है उन्होंने ऐसा करने से पहले अपने वकीलों से सलाह ली हो और वकीलों ने कह दिया हो कि आप ज्यादा बोलोगे तो कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट में अंदर चले जाओगे। इस वजह से वो लोग डर गए। जबकि कहा तो यह जाता है कि जो सच्चा सनातनी होता है वो अधर्म करने वालों से कभी नहीं डरता। वो धर्म की राह पर चलने से कभी नहीं डरता। और जो बुराई का विरोध ना कर सके, अच्छाई का साथ ना दे सके। धर्म के लिए लड़ ना सके वो सच्चा सनातनी नहीं हो सकता और जो सच्चा सनातनी नहीं है वो सच्चा हिंदू भी नहीं हो सकता। भगवान श्री कृष्ण ने गीता में यही समझाया है। यही सबसे बड़ा कर्म योग है कि अगर तुम्हारे सामने अधर्म हो रहा है। तुम्हारा सबसे पहला पूजा कहो या उसको कर्तव्य कहो, यज्ञ कहो या धर्म कहो वो यही है कि आप बुराई का विरोध करें। बुराई को चुपचाप सहें नहीं। हम भी आज कॉलेजियम का जो विरोध कर रहे हैं इसी वजह से कर रहे हैं क्योंकि आज इस देश में सबसे बड़ी जो समस्या है वो भ्रष्टाचार की समस्या है। अपराध की समस्या है। अपराधियों को दंड नहीं मिलता। देशद्रोहियों को दंड नहीं मिलता है। और इस सब के लिए अगर कोई जिम्मेदार है तो भारत की जुडिशरी ही जिम्मेदार है। भारत की जुडिशरी में बैठे हुए वो सीजीआई, वो सुप्रीम कोर्ट के जज, वो हाई कोर्ट के जजेस ही जिम्मेदार हैं।

नए कानून बनाने की बात करते हैं। लेकिन नए कानून बनाने से इसका कुछ होने वाला नहीं है। एक और लोग हैं जो कहते हैं कि इंदिरा या राजीव जैसा कोई प्रधानमंत्री होता तो शायद जुडिशरी इस स्थिति में नहीं होती। वो लोग भूल जाते हैं कि आज जो जुडिशरी है वो वास्तव में इंदिरा की लगाई हुई विश्वेल के ही फल हैं। और ये इंदिरा के खिलाफ नहीं होते। क्योंकि इनकी जो आईडियोलॉजी है यह जो ग्रुप से आते हैं वो ग्रुप इंदिरा राजीव को सपोर्ट करता है तो उन्हें तो इनके खिलाफ कुछ कहने की जरूरत ही नहीं पड़ती। आज ये मोदी का विरोध इसलिए करते हैं कि ज्यादातर जो हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जज जिस कॉलेजियम की लॉबी से और जिन वकीलों की लॉबी के माध्यम से चुनकर आते हैं वो सब के सब कम्युनिस्ट और कांग्रेसी विचारधारा से ही संबंध रखते हैं। इसी वजह से वो आज की जो वर्तमान सरकार है उसके हर फैसले में अड़ंगा लगा रहे हैं। इसीलिए वह सनातन के खिलाफ है। इसीलिए वह आतंकवादियों के पक्ष में रात के 2:00 बजे कोर्ट खुलवा लेते हैं। इसीलिए वह फोन पर तीस्ता शीतलवाड़ जैसे लोगों को जमानत दिला देते हैं। इसीलिए वो केजरीवाल जैसे विदेशी चंदे पर पलने वाले नौटंकीबाज राजनीतिक को जमानत दिलाने के लिए अदालत का घंटों सैकड़ों घंटों का समय बर्बाद कर देते हैं। ये सब उसी एक आईडियोलॉजी से संबंधित है। उसी इको सिस्टम का हिस्सा है। तो इसलिए जो लोग ऐसे कमेंट करते हैं कि  इंदिरा होती तो यह कर देती उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि ये जो आज हैं वो इंदिरा के बनाए हुए तीन चीफ जस्टिस के ही चेले चपाटे या उनके चेले चपाटों के चेले चपाटे हैं। इंदिरा ने जो इमरजेंसी का फैसला उसके खिलाफ जिन लोगों ने लिया था उनको सजा दी थी। चार सीनियर जजों को बाईपास करके तीन जूनियर जजों को चीफ जस्टिस बनाया था। एक के बाद एक उसमें सबसे पहले थे अजीतनाथ राय। उसके बाद जिस तरीके से मिर्जा जी को बनाया गया और फिर बाद में बनाया गया चंचू के बड़े जो पिता थे यानी बड़े चंचू जी को जिसके बाद में यह फिर 93 की नौबत आई जब नरसिम्हा राव सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे थे। उस समय यह सब किया गया था। तो इसके पीछे भी कांग्रेसी सांसद ही थे। कांग्रेस के ही लोग थे। और इसीलिए कॉलेजियम को बनाने का जो प्रस्ताव था वो इतनी आसानी से सुप्रीम कोर्ट ने जब उसको पास किया या ऑर्डर दिया तो उसको सरकार ने मान लिया था। तो यह जो कॉलेजियम है इसको अगर कोई रोक सकता है, इसको कोई नकेल लगा सकता है, इसको कोई काबू में कर सकता है, तो इस देश की संप्रभु जनता ही है और उस जनता ने अपनी एक झलक या फिर कहें कि ट्रेलर इस एपिसोड के माध्यम से दे दिया है। हालांकि हम माफी नहीं मांगी है। इसलिए हम उन्हें इतनी आसानी से माफ़ तो नहीं कर सकते हैं। लेकिन फिर भी अगर सीजीआई ने इस पर सफाई दी है और कोर्ट के अंदर सिबल अगर यह कह रहा है कि सोशल मीडिया एक बिगड़ैल घोड़ा है जिसको काबू कर पाना मुश्किल है। आप समझ लीजिए कि आपकी बात बहुत दूर तक जा रही है। जरूरी नहीं कि डायरेक्टली वो आपकी बात को देख रहे हैं। YouTube पर देख रहे हैं या दूसरे माध्यमों से देख रहे हैं। लेकिन यह धमक महसूस की जा रही है। यह जो धमक महसूस की जा रही है, यह देश के लिए अच्छा है। नेपाल के जो उपद्रव हुआ है, उस पर भी इस सुनवाई के दौरान चर्चा हुई और यह  कहा गया कि नेपाल में भी जो कुछ हुआ है वो सोशल मीडिया की वजह से हुआ है। सोशल मीडिया बहुत जल्दी रिएक्ट करता है और पहलेकि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया होता था। वो अपने मालिक से पूछते थे या फिर रवश कुमार टाइप के अभिसार शर्मा पुण्य प्रसुम टाइप के जो चिंदी वाले पत्रकार थे वो पहले से ही सेट सेटिंग हुआ करती थी। तो सरकार जो चाहती थी वैसी ही बातें वो किया करते थे। बहुत सारी चीजों को छुपा दिया जाता था। उससे पहले अखबार हुआ करते थे। तो अखबार में लिखे जाने पर अगर मान लो किसी पत्रकार ने कुछ रिपोर्ट बना भी दी तो संपादक उसको  रुकवा देता था। उसको हटवा देता था या फिर उसको बहुत छोटा कर देता था। लेकिन अब सोशल मीडिया के आने की वजह से ऐसा नहीं है। अब हर कोई पत्रकार है, हर कोई विचारक है, हर कोई प्रतिक्रिया दे सकता है। हालांकि कुछ इसका गलत इस्तेमाल भी करते हैं। उसकी भाषा भी अभद्र हो जाती है। लेकिन फिर भी अच्छे लोग भी हैं और अच्छी बातें भी हो रही हैं। सोशल मीडिया पर तमाम बुराइयां हो सकती हैं। तमाम बुरी बातें सोशल मीडिया के माध्यम से हो रही है। लेकिन अच्छी चीजों को अच्छे लोगों तक आसानी से पहुंचाने में भी सोशल मीडिया जिस तरीके की भूमिका निभा  रहा है वह पिछले 24 घंटों में आसानी से देखा जा सकता है कि कम से कम 100 से ज्यादा ऐसे लोग थे जिन्होंने इस पर प्रतिक्रिया दी। उस प्रतिक्रिया को लोगों तक पहुंचाया गया हमारा मतलब भी सिर्फ इतना है कि वो सूचनाएं सही तरीके से लोगों तक पहुंचे। चाहे हमारे माध्यम से पहुंचे या हमारे किसी मित्र के माध्यम से पहुंचे। अल्टीमेट गोल यह है कि लोगों तक वो चीजें पहुंचे और लोग उस पर अपनी राय दें। जिस तरीके से इस मामले में लोगों ने राय दी है वह देश के लिए उम्मीद जगाने वाला है। इस देश के जो लोग न्यायपालिका के अन्यायों से पीड़ित हैं। देश में जो 5 करोड़ से ज्यादा केसेस पेंडिंग है या फिर अकेले सुप्रीम कोर्ट में लगभग 80 हजार के से ज्यादा केस पेंडिंग है। उन सबसे जो चिंतित है, जो पीड़ित है, जो जेलों में जिनके परिवार के  लोग पड़े हुए हैं क्योंकि वो कपिल सिबल सिंघवी टाइप के वकीलों की सेवाएं नहीं खरीद सकते हैं। उन लोगों को इससे एक उम्मीद जगती है और हम तो पहले से कह रहे हैं कि अगर दो चार महीने 5 महीने हम लोग इकट्ठे होकर इस पर अगर राष्ट्र सेवा के नाम पर अपना समय देने लगे इस पर थोड़ा ध्यान देने लगे तो इसका रिजल्ट बहुत जल्दी आएगा। बहुत ज्यादा हमें इंतजार नहीं करना पड़ेगा। जिस तरीके से सीजीआई ने जो कुछ कहा और उस पर इतनी बड़ी प्रतिक्रिया हुई। हालांकि अखबारों ने इसको जब या दूसरी वेबसाइट ने इसको जब कवर किया तो आधी बात कवर की गई थी। उसमें केवल यह बताया गया कि  उन्होंने इतना कहा है कि जाके भगवान विष्णु से पूछो। लेकिन उसमें जो दूसरी चीज थी वो बहुत ज्यादातर लोगों ने उसको बाईपास कर दिया। फिर जो बेंच थी उसके जजों के नाम भी कुछ लोग गलत रिपोर्ट कर रहे थे। उसी तरीके से जो सीजीआई गवई ने इसी कटाक्ष में एक और चीज जोड़ी थी कि उसी खजुराहो कैंपस में एक मातंगेश्वर का शिवजी का मंदिर भी है जिसमें दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग है जिसकी जो ऊंचाई है वो छ 7 फीट से ज्यादा है उससे जाके आप प्रार्थना कर लो क्या जरूरत है आपको बरा भगवान की पूजा करने की क्योंकि जो जिस मूर्ति की बात हो रही है  जिसका धड़ है लेकिन सिर नहीं है। वो बरा भगवान की ही मूर्ति है जो कि विष्णु भगवान के ही एक अवतार हैं। तो यह जो चीजें हैं ये बेहद सुखद है और हमें लगा कि इस बात को आप तक पहुंचाया जाए क्योंकि अगर हम कोई संघर्ष कर रहे हैं, किसी बात के लिए जुट रहे हैं तो केवल यह देखते रहना कि यह नहीं हो रहा है, वो नहीं हो रहा है। उसके साथ-साथ यह भी जरूरी है कि हम लोगों के प्रयास कितने सफल हो रहे हैं और 24 घंटे के अंदर इस चीज का सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की सुनवाई में उठना और वहां पर भारत के उस सीजीआई का सफाई देना जो अपने भाषणों के लिए दो-तीन महीने में ही बहुत ज्यादा चर्चित हो चुके हैं। संविधान की सर्वोच्चता की बातें करते हैं। बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। लेकिन उन्होंने सफाई दे दी है और सफाई के साथ-साथ यहां पर जो कपिल सिब्बल है वह जिस तरीके से हंसते हुए रियाता नजर आया और यह कहता हुआ नजर आया माय लॉर्ड ये अनरली हॉर्स बन गया है। हम तो रोज झेल रहे हैं। ये बहुत अच्छा लगा। सुनवाई के दौरान हमें सबसे अच्छा जो डायलॉग लगा वो कपिल सिब्बल का ही लगा कि उसको गिड़गिड़ाते हुए उसको रिते हुए जब देखते हैं तो बड़ा अच्छा लगता है क्योंकि इस तरीके के जो कुटिल लोग होते हैं वो अपने आगे किसी को कुछ नहीं समझते हैं।

कॉलेजियम जो देश की सबसे बड़ी समस्या है, हम उस पर आपको हमेशा अपडेट करते रहेंगे और कोई भी मुद्दा जो राष्ट्र से संबंधित है, भारतीय संस्कृति से संबंधित है, भारतीय सम्मान से संबंधित है,आपके सामने लाते रहेंगे। अपनी राय दीजिए और शब्दों की मर्यादा बनाए रखिए।

जय हिंद।

कर्नल राजेंद्र शुक्ल


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