https://www.profitableratecpm.com/shc711j7ic?key=ff7159c55aa2fea5a5e4cdda1135ce92 Best Information at Shuksgyan: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट को एक फैसला- मंदिर का पैसा किसी भी सरकार का पैसा नहीं है

Pages

Thursday, October 16, 2025

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट को एक फैसला- मंदिर का पैसा किसी भी सरकार का पैसा नहीं है

 


हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट को एक फैसला देना पड़ गया जिसके तहत उन्होंने यह कहा कि जो मंदिर है उनमें जो चढ़ावा होता है जो पैसा चढ़ता है उस पर सिर्फ मंदिर का अधिकार है भक्तों का अधिकार है किसी भी सरकार का पैसा नहीं है उस पैसे का इस्तेमाल दूसरी जगहों पर कतई नहीं किया जा सकता  बहुत सिग्निफिकेंट रूलिंग है जो हिमाचल हाईको का रूलिंग आया है और सिग्निफिकेंट इसलिए है कि तो ये डबल बेंच जो है दो लोगों का जजमेंट है हिमाचलहाई कोर्ट का।  दूसरा कि हाई कोर्ट का जो जजमेंट होता है किसी भी हाई कोर्ट का जजमेंट हो तो वो और हाई कोर्ट में भी रेफर किया जाता है और जब हाई कोर्ट कोई चीज कहता है वो भी दो जजेस की बेंच अगर कोई चीज कहती है तो उसका जो महत्व होता है वो बहुत बढ़ जाता है। दूसरी बात यहां पर बहुत इंपॉर्टेंट ये है कि यहां पे जो कहा गया है वहां पे आप देखेंगे जब जजमेंट को तो उस जजमेंट में एक एक्ट की बात की गई है। वो एक्ट के द्वारा हिमाचल में जितने भी हिंदू मंदिर हैं और जितने भी चैरिटेबल ट्रस्ट है जो हिंदू मंदिरों को या हिंदू

धर्मशाला जो ऐसी चीजें हैं उनको गवर्न करते हैं जिसके द्वारा उसको वो चलाने का जो प्रक्रिया है जो रूल रेगुलेशन है वो उस एक्ट में दिए गए हैं। इस पूरे जजमेंट के अंदर उस एक्ट की बात कही गई और यह कहा गया है कि यह जो पैसा डाइवर्ट किया गया क्योंकि इन जितने भी मंदिर आप सब हम सब लोग जानते हैं कि जो मंदिर है चाहे वो हिमाचल के में हो या हिमाचल के बाहर भी सभी जगह चाहे केरल में हो ऐसे मंदिर जिसमें डोनेशन बहुत ज्यादा आता है वो ज्यादातर राज्य सरकारें जो है उन्होंने अपने अधिकरण में किया हुआ है और उसमें एक एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में किसी ना किसी व्यक्ति को बैठाया गया है। सरकारी व्यक्ति को बैठाया गया है। तो उसमें जो डोनेशन आता है वो सरकार डायवर्ट करती है अलग-अलग तरीके से। तो जो ये जजमेंट आया है वो बड़ा और सिग्निफिकेंट इसलिए है क्योंकि इस जजमेंट में ये कहा गया है कि जो पैसा मंदिर में आया जिसने दान दिया उसने अपनी इच्छा से दान दिया धर्म के लिए अपने डाइटटी के लिए। आप उस फंड को डाइवर्ट नहीं कर सकते। आप उस फंड का पब्लिक वेलफेयर यानी कि सरकारी जो योजनाएं होती है उसके अंदर आप उसका यूज नहीं कर सकते। तो यह बहुत बड़ा जजमेंट है। धर्म की बात जहां आती है वहां पे जो फंड धर्म के नाम पर इकट्ठा किया गया वो उसके प्रचार प्रसार के लिए होना चाहिए। और हमारा कॉन्सिट्यूशन भी यही कहता है।

हमारा कॉन्सिट्यूशन में आर्टिकल 19 के अंदर ये कहा गया है कि आपका जो धर्म है उसको प्रचार प्रसार करने का आपका अधिकार है। और कोई व्यक्ति जब हिंदू मंदिर के अंदर कोई डोनेशन देता है तो वो इसी इसी प्रक्रिया के लिए देता है। इसीलिए देता है। लेकिन सरकारें क्योंकि अधिकरण करा हुआ है हिंदू मंदिरों का तो वो उसके पैसों को डायवर्ट करती है। बहुत महत्वपूर्ण जजमेंट है और मुझे लगता है कि सभी लोगों के लिए जो मंदिर ऐसा कर रहे हैं अब हिमाचल में उन मंदिर बहुत बड़े मंदिर है ज्वाला जी है और बहुत सारे मंदिर है जो ऐसे बड़े-बड़े मंदिर है धर्म नगरी भी कहा जाता है हिमाचल को तो इतने बड़े मंदिर वहां पर है तो कहीं ना कहीं बहुत बड़ा असर जो है धर्म के प्रचार प्रसार के ऊपर इस जजमेंट के ऊपर जो है उसके बाद पड़ने की जरूर आशा है और वहां पर जो कांग्रेस की सरकार है उन्होंने तो बहुत सारा पैसा ऑलरेडी डायवर्ट किया हुआ है सरकारी योजनाओं में उनका इस्तेमाल हो रहा क्योंकि तब तो यह दलील दी गई थी कि ये तो जनता का पैसा है। जनता की भलाई में लगा रहे हैं। लेकिन अब तो साफ कर दिया है हाई कोर्ट ने कि यह पैसा भक्तों का पैसा है। मंदिर का पैसा है। इसके अलावा इसका इस्तेमाल कहीं और नहीं होना चाहिए। धर्म के प्रचार प्रसार में होना चाहिए। और अगर यह पैसा खर्च किया गया है। ये कोर्ट ने कहा है तो उसकी वसूली की जाएगी।

 तो इसका मतलब यह हुआ कि अभी तक हिमाचल की सरकार ने कांग्रेस सरकार ने जो पैसा यहां वहां खर्च किया है मंदिरों से लेकर उस पैसे की भरपाई अब उनको करनी पड़ेगी।जजमेंट में सरकार पैसे को डायवर्ट पब्लिक वेलफेयर यानी कि पुल बनाने में जो गवर्नमेंट की स्कीम्स है उसके लिए जो मंदिरों का पैसा है उसको डाइवर्ट करके वहां यूज़ नहीं कर सकती वो पैसा धर्म के प्रचार प्रसार के लिए ही यूज़ होना चाहिए दूसरी महत्वपूर्ण बात ये कही गई कि अगर पैसा जो है वोवर्ट किया गया है तो उस पैसे को अगर कोई व्यक्ति जो वहां पर जो वहां का ट्रस्टी है उसने अगर कोई पैसा डवर्ट किया गया तो उसकी पर्सनल इनकम पर्सनल प्रॉपर्टी से वसूला जाएगा। मंदिरों को ये डायरेक्शन दी गई है किआप पूरा अपना पूरा खाता जो है वो बनाए। कितना पैसा आया, कितना खर्च हुआ, कहां से कितना पैसा कहांहां खर्च किया गया। तो ये बहुत बड़ा डायरेश है और मुझे लगता है कि इसके बाद जो सरकारें हैं उनको ये समझना चाहिए कि आप देखिए हिंदू बहुसंख्यक है और जितना पैसा हिंदू मंदिरों में चढ़ाया जाता है हम सभी को पता है कि बहुत बड़े स्केल पर हिंदुओं में डेवोशन बहुत होता है तो अपने धर्म के नाम पर लोग पैसा देते हैं और वो धर्म के प्रचार प्रसार के लिए देते है लेकिन सरकारे उसको अपने पर्सनल यूज़ के लिए पब्लिक वेलफेयर के लिए और बहुत सी गलत चीजें भी होती है जजमेंट में भी ये कहा गया कि डाइवर्ट जो पैसा किया जाता है वो सिर्फ पब्लिक वेलफेयर के लिए नहीं किए जा रहे है उसके अलावा ऐसी बहुत सी चीजें है जिनका डिस्क्लोजर नहीं दिया गया। इसीलिए डायरेक्शन दी गई कि जो मंदिरों का पैसा है वो कितना पैसा आया और कहांहां खर्च हुआ। ये आपको पूरा जो बरा है वो रखना पड़ेगा और वो फाइल करने की बात भी इस लिटिगेशन इस पिटीशन के अंदर कही गई है।

मुझे लगता है कि बहुत बड़ा एक डायरेक्शन है और अब जो मंदिरों ने जो एडमिनिस्ट्रेटर क्योंकि एसडीएम, डीएम या और सरकारें जो है वो अपने लोगों को वहां एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में बैठा देती हैं। तो वह जो बैठाए गए एडमिनिस्ट्रेटर है कहीं ना कहीं अब उनकी लायबिलिटी जो है वो इस जजमेंट के द्वारा हिमाचल सरकार के अंदर हिमाचल सरकार के जो लोग हैं जिनको मंदिरों पर बैठाया गया उनके ऊपर जरूर हाई कोर्ट ने बांध दी और अब मुश्किलें जो है वो उन लोगों के लिए जरूर बढ़गी। पर एक चीज और है कि क्या इस फैसले के खिलाफ हिमाचल सरकार सुप्रीम कोर्ट जा सकती है?

बिल्कुल मुझे लगता है बिल्कुल जाएगी कि देखिए एक बड़ी अजीब सी चीज यहां पर हम सब लोग जानते ही हैं कोई बड़ा नया मामला नहीं है। आप देखिए कि हिंदू मंदिरों की जहां बात आती है वहां पर सरकारें उनको अधिग्रह भी करती है। अपने एडमिनिस्ट्रेटर भी बैठाती है। लेकिन दूसरी तरफ ऐसी बहुत सी मस्जिदें हैं, ऐसी बहुत सी गुरुद्वारे हैं, ऐसे बहुत से चर्च हैं जहां पर बहुत बड़ा बहुत ज्यादा पैसा आता है लेकिन उन जगहों को छेड़ा नहीं जाता। अब आपने बहुत बड़ा मुद्दा यहां उठाया कि क्या हिमाचल सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट आएगी? तो यह बहुत बड़ा सवाल इसलिए है कि देखिए हमारा संविधान कहता है कि हर व्यक्ति को अपने धर्म को मानने की आजादी है। अपने धर्म के प्रचार प्रसार की आजादी है। मैंने अगर किसी हिंदू मंदिर के अंदर दान दिया तो मैंने वो दान दिया अपने धर्म के प्रचार प्रसार के लिए। यानी कि उस व्यक्ति का जिस व्यक्ति ने दान दिया उस व्यक्ति के दान देने का अधिकार को उसके जो कॉन्स्टिट्यूशन राइट है उसका वलेशन किया उस सरकार ने बिना मेरी मर्जी के बिना मेरे को डिस्क्लोजर दिए हुए लेकिन वहीं दूसरी तरफ जो और धर्म है उन धर्मों की जगहों को छेड़ा नहीं जा रहा और अगर इस मामले में हिमाचल सरकार सर्वोच्च न्यायालय में आती है तो मेरा मानना ये है कि जो हम लोग मानते हैं और हम कहते भी हैं सरकारों के दो रूप होते हैं। 

कांग्रेस सरकार हिमाचल में है तो हम सब जानते हैं कि कांग्रेस हिंदू को हिंदुओं को लेकर क्या मेंटालिटी रखती है तो मुझे लगता है एक तो मेंटालिटी क्लियर होती है। दूसरी बात ये होती है कि जहां धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने की बात सरकारें करती है वो कहीं ना कहीं यहां पे साफ दिखेगा कि जजमेंट आने के बाद हिमाचल सरकार जानबूझ के हिंदुओं के हिंदू के सनातन के प्रचार प्रसार को रोकने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में जा रही है। तो ये बहुत गलत मैसेज मुझे लगता है जाना जाएगा ये देखने में आ सकता है क्योंकि उनको हिंदुओं की कांग्रेस सरकार को कभी भी हिंदुओं की आस्था से उनकी चीजों से कभी कोई कोई सरोकार रहा नहीं है। तो ये अगर होता है तो कोई बहुत बड़ा आश्चर्य नहीं होगा। लेकिन कहीं ना कहीं दोबारा से हम ये कह सकते हैं कि जो कांग्रेस की हिंदू विरोधी जो छवि है उसको जरूर हम ये कह सकते हैं कि वो सामने जरूर आ जाएगी। लेकिन यह आपने एक बड़ी इंपॉर्टेंट बात की कि अगर इस फैसले के खिलाफ सुखू सरकार चली जाती है कांग्रेस सरकार हिमाचल की चली जाती है सुप्रीम कोर्ट तो फिर तो यही बात सामने आएगी ना कि वो हिंदू धर्म के सनातन के प्रचार प्रसार की बात जो हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कही है उसको रोकना चाहती है तो ये तो उन पर उल्टा पड़ेगा क्योंकि भले ही कांग्रेस को हिंदू वोटों की दरकारना हो लेकिन हिमाचल ऐसा राज्य है जहां पर 98.9% हिंदू रहते हैं। 

वहां पर मुस्लिम आबादी बहुत कम है और कांग्रेस की सरकार भी वहां हिंदू वोटरों से ही बनती है। इसीलिए संजोली में मस्जिद का मामला वहां के सुखू सरकार के कैबिनेट के मिनिस्टर अनुद सिंह ने ही उठाया था। किसी और ने नहीं उठाया था। क्योंकि उनको भी तो हिंदू वोट चाहिए। तो इस फैसले पर तो बड़े सोच विचार कर काम करना पड़ेगा वहां की कांग्रेस सरकार को। 

दूसरी तरफ बिहार इलेक्शन भी है। राजनीति की अगर हम बात करते हैं राजनीति ग्लोबल राजनीति होती है। राजनीति पूरे भारत की राजनीति होती है। वहां सरकार है तो मेरा मुझे ये लगता है कि कांग्रेस कहीं ना कहीं इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय आएगी और उसका कारण ये है कि वो ये मैसेज हिमाचल में उसका इफेक्ट दे कि हमारी हिंदुओं की एक बहुत बड़ी दिक्कत है जो मैं मानता हूं शुरू से। हम लोग भूल बहुत जल्दी जाते हैं। जो भी होता है हम लोग भूल जाते हैं। तो अगर हमारे साथ कुछ गलत होता है हम लोग भूल जाते हैं। कुछ अच्छा होता है तो हम भूल जाते हैं। लेकिन दूसरे धर्म ऐसा नहीं करते। तो वो जो मैसेज है उस मैसेज का इंपैक्ट क्या हिमाचल में जो चुनाव आएंगे जब विधानसभा तो क्या वो मैसेज जो भी अगर सुखू सरकार जाती है या नहीं जाती है तो उसका इंपैक्ट क्या होगा उस समय पे? तो मेरा मानना ये है कि कांग्रेस इस बात को बहुत अच्छे से समझती है। देखिए हिंदुओं ने ही कांग्रेस की सरकार वहां बनवाई है। 98% हिंदू है। हम सब लोग जानते हैं। लेकिन उसके बाद भी सरकार बनी कांग्रेस की।बिहार सर पर है तो जो मैसेज दूसरे ग्रुप्स को या दूसरे धर्मों को देना है वो बहुत इंपॉर्टेंट होगा मुझे लगता है यहां पे और उसी को लेकर शायद सुखू सरकार कांग्रेस सरकार जो है वो सर्वोच्च न्यायालय में इस जजमेंट के खिलाफ आए पर एक चीज और है विनीत जी कि ये चर्चा हमेशा होती है कि जो मंदिर है वही क्यों सरकार के नियंत्रण में रहे सरकार ऐसा नियम क्यों नहीं बनाती कि इतनी सारी दरगाहें हैं इतने सारी सारी मज़ारे हैं। इतने सारी और जगह हैं। चाहे वो ईसाई धर्म से जुड़ी हुई हो या मुस्लिम धर्म से जुड़ी हुई हो। वहां पर भी तो इतने सारा पैसा आता है। आप अगर राजस्थान की बात कर ले, अजमेर शरीफ की बात कर लें तो क्या वहां पैसा नहीं आता है? लेकिन उनको ये लोग अपने अधिकरण में नहीं ले पाते हैं। इसकी वजह क्या है? वो इसकी वजह आप ये मानते हैं कि क्योंकि इस देश पर कांग्रेस की सरकारें सबसे ज्यादा रही है तो इसलिए उस तरफ तुष्टीरण की राजनीति के चलते कदम नहीं उठाए गए।


दूसरी तरफ जब मंदिरों की बात आती है तो यही सरकारें कोई सरकार नहीं कहती कि आप मंदिरों को हम वापस देने को तैयार हैं। एक बहुत बड़ा मूवमेंट आपने देखा होगा। अभी कुछ समय से शांत है। लेकिन वो बहुत बड़ा मूवमेंट लगभग एक साल तक पूरे सोशल मीडिया पर चलता रहा और ये बात उठाई गई लगातार सभी बहुत से हैंडल्स के द्वारा, बहुत से सोशल इनफ्लुएंसर्स द्वारा, पॉलिटिकल इनफ्लुएंशियल लोगों के द्वारा कि भाई जो हिंदू मंदिर हैं उन मंदिरों को वापस दे देना चाहिए। उन मंदिर को छोड़ देना चाहिए। पर किसी भी सरकार पूरे भारत की किसी भी सरकार ने एक भी मंदिर को किसी भी सरकार ने चाहे वो किसी भी पार्टी की सरकार हो किसी भी सरकार ने किसी हिंदू मंदिर को किसी ट्रस्ट को वापस नहीं दिया। आज भी सब में एडमिनिस्ट्रेटर बैठे हुए हैं। बहुत होल्ला मचाया गया। लोगों ने लेटर्स लिखे। प्रधानमंत्री जी तक ये बात पहुंचाई गई कि भाई मंदिरों को अब छोड़ देना चाहिए और ना ही किसी मस्जिद को किसी चर्च को अधिग्रहित किया गया। तो ये बड़ा लेकिन यहां पे एक छोटा सा डिफरेंस जहां पे हम बात करते हैं कांग्रेस की सरकारों की और बीजेपी की सरकार की अगर हम बात करें तो यहां पे एक मामला मैं जरूर इसमें डिफरशिएट करना चाहूंगा कि व बोर्ड का जब मामला आया तो मुझे कि वहां पे सरकार ने कोशिश की कि जो पारदर्शिता है वो रहनी चाहिए। अगर हिंदू मंदिरों को हम अधिग्रह कर सकते हैं तो क्यों नहीं हम जो व बोर्ड की जमीनें हैं या व बोर्ड के जो डिस्प्यूट होते हैं उसके अंदर क्लेरिटी के लिए सरकारी जो भाग्यता है सहभागिता है वो बढ़नी चाहिए और ऐसे लोग जो लोग उससे इफेक्टेड है उनको इंसर्ट करना चाहिए लेकिन वहीं पर हमारे सर्वोच्च न्यायालय ने उस बात को लेकर स्टे लगा दिया कि नहीं भाई ऐसा नहीं हो सकता तो यहां पे दिक्कत दोनों जगह से है दिक्कत सरकारों से भी है दिक्कत कोर्ट से भी है जब बात होती है देखिए ये शुरू कैसे हुआ ये शुरू ऐसे हुआ मंदिरों का अधिग्रह शुरू ऐसे हुआ कि यह कहा गया कुछ मंदिरों को ले कि भाई यहां मंदिरों में पैसा बहुत है डिस्प्यूट बहुत हो रहे हैं और इसको लेकर कोर्ट में जाया गया और कोर्ट में जाने के बाद वहां से डिस्प्यूट को लेकर वहां से आर्डर पास कराए गए कि भाई यहां पर एसडीएम को नियुक्त कर दिया जाए या किसी सरकारी अधिकारी को नियुक्त कर दिया जाए या सरकार किसी व्यक्ति को नियुक्त करे इसको ओवरसी करने के लिए। धीरे-धीरे वो चीजें बढ़ती गई और अब राज्यों में ऐसे एक्ट बना दिए गए हैं जिसके द्वारा हिंदू मंदिरों को अधिग्रह किया जा सकता है सरकार द्वारा। लेकिन शर्म की बात यह है कि कोई भी सरकार हो वो सरकार सिर्फ उन मंदिर को अधिग्रह करती है जिसके अंदर डोनेशन आता है, पैसा आता है। ऐसा कोई मंदिर आपको अधिकृत नहीं दिखेगा जिसके अंदर डोनेशन नहीं आता। तो बड़ी अजीब बात है अगर आप इतने पारदर्शी हैं और आपको धर्म की और डिस्प्यूट्स ना हो इनकी इतनी चिंता है तो आप सभी धर्म सभी जो मंदिर हैं उन हिंदू मंदिरों को आप अधगित

 लीजिए। वहां पर जो पुजारी है उनको सैलरी दीजिए। वहां पर जो डाइटी है उनका रखरखाव कीजिए। मंदिरों का रखरखाव कीजिए। वो पैसा जो इतने बड़े मंदिरों में इतनी बड़ी मात्रा में आ रहे हैं वो पैसा क्यों नहीं उन मंदिरों को के ऊपर खर्च हो जिन मंदिरों के अंदर दान कम आता है। भाई वो तो धर्म के लिए दिया गया है ना। तो आप उनको वहां खर्च क्यों नहीं करते? आप क्यों डाइवर्ट कर लेते हैं अपनी सोशल स्कीम के लिए? उसके लिए तो भाई अगर मैं हूं और मेरे को अगर सोशल स्कीम के लिए पैसा देना है तो मैं मुख्यमंत्री राहत कोष में पैसा दूंगा।


मैं अलग-अलग स्कीम में पैसा दूंगा। मैं पीएम राहत स्कीम में पैसा दूंगा या अलग-अलग स्कीम में दूंगा। हिंदू मंदिरों का पैसा आप क्यों यूज करते हैं? तो ये बहुत बड़ा सवाल है और मुझे लगता है कि इसके ऊपर हम सभी लोगों को मिलकर आवाज उठानी चाहिए। सिर्फ यह कोर्ट का मामला नहीं है। कोर्ट से आगे यह मामला सरकारों का भी है। तो मुझे लगता है कि यह चीजों को लेकर हमें बोलने की जरूरत है कि अगर आपके अंदर इतनी हिम्मत नहीं है कि आप और धर्मों के धार्मिक स्थलों को आप अग्रित करें तो आपके अंदर यह हिम्मत भी नहीं होनी चाहिए कि आप हिंदू धर्म का पैसा जो सनातन का


पैसा है वो आप डाइवर्ट करके अपने पर्सनल यूज़ के लिए या सरकारी कामों के लिए आप उसको यूज़ करें। ये सनातन का पैसा है। सनातन के लिए ही यूज़ होना चाहिए। पर यह एक प्रोपेगेंडा ही रहा होगा ना जब यह कहा गया होगा कि देखिए फला मंदिर में बड़ा चंद आ रहा है। वहां पर बड़े डिस्प्यूट हो रहे हैं। यह सब कुछ प्रोपेगेंडा होगा। ये एक एजेंडे के तहत किया गया होगा और फिर अदालत गए और फिर वहां से ये ऑर्डर निकलवा लिया कि नहीं नहीं यहां पर तो डीएम को अपॉइंट करने की जरूरत है। एडमिनिस्ट्रेटर अपॉइंट करने की जरूरत है ताकि इस तरह के डिस्प्यूट ना हो।


बाकी जगहों की आप बात करो। क्या अजमेर शरीफ में पैसा नहीं आता है? वो जो मुंबई में इतनी बड़ी दरगाह है वहां पैसा नहीं आता है। उसके बारे में कभी कोई डिस्प्यूट नहीं होता। उसके मामले तो खुद ही सुलझा लेते हैं ये लोग। तो सिर्फ हिंदू धर्म को या सनातन को ही टारगेट किया गया है ना। आप केरल में देखिए केरल में कितने मंदिर है जहां पर पहले सोने से बने हुए थे अंदर वो मंदिर और अब तो एक खुलासा ये हुआ है विनीत जी की चोरी छुपके वहां की सरकारों ने या किसने वहां साजिश करके उस सोने को नकली सोने से रिप्लेस कर दिया। अब तो उन


मंदिरों में खाली सोना ही नहीं रहा। ये बातें भी तो सामने आई है। तो ये चालबाजियां किस लिए? बिल्कुल। अब देखिए अंजू जी ये मामला एक जगह का नहीं है। ऐसे और भी मामले हैं। महाराष्ट्र के अंदर एक एक मंदिर की जो उसका जो एसेट था उसको कन्वर्ट कर दिया गया। जैसे सोने को कम हो गया वो बेच दिया गया। इस तरीके की चीजें हुई। उसमें एफआईआर तक दर्ज कराई गई और ऐसे ही सनाती पांच छ साल लगे उस एफआई को दर्ज कराने में। एक ऑ्गेनाइजेशन ऑर्गेनाइजेशन है महाराष्ट्र की। उसने पूरी लड़ाई लड़ी और पांच साल के बाद वो एफआईआर दर्ज हुई। मतलब पांच साल तक


उस एफआई को दर्ज करने के लिए हमें लड़ना पड़ा। सनातन को लड़ना पड़ा कोर्ट के अंदर। तो बहुत दनीय स्थिति है और मुझे लगता है कि ऐसे मामलों में जहां पे आपने बिल्कुल सही कहा। अब हम बात करते हैं अजमेर शरीफ दरगाह की। अब अजमेर शरीफ के अंदर जितने ज्यादा हम सबको पता है। क्या-क्या कांड वहां हुए हैं। इतने बड़े-बड़े कांड हो गए। लेकिन उसके बाद भी सरकारों की इतनी हिम्मत नहीं हुई कि वो अजमेर शरीफ को अधिग्रह कर ले। तो देखिए ये ये बात जो मुझे लगती है कि मैंने और ये बात भी बहुत बार बोल चुका हूं कि हिंदू जो है वो हिंदू बहुसंख्यक


होने का भारत के अंदर जो नुकसान है वो नुकसान उठा रहे हैं। आप हर व्यक्ति जो भी हो चाहे भारत का हो चाहे बाहर का हो वो हर व्यक्ति यही कह देता है कि भाई हिंदू तो बहुसंख्यक है। हम तो हिंदुओं को तो कोई दिक्कत नहीं है भारत में। हमें पता है कि हम लोगों को क्या-क्या यहां फेस करना पड़ रहा है। हम लोगों को अपने धर्म के ऊपर दिए गए पैसे को कैसे खर्च किया जाए उस चीज को हम लोग नहीं बता पा रहे हैं। हमारा पैसा हमारे हिसाब से खर्च नहीं हो रहा। सनातन का पैसा सनातन पे खर्च नहीं हो रहा। तो इससे बड़ी दुर्गति क्या होगी? इससे बड़ा


दुस्साहस क्या होगा सरकारों का? आप देखिए ना ये इससे ज्यादा क्या हो सकता है? लेकिन वही बात आप देखिए कोई भी चाहे किसी भी दरगाह की बात कीजिए किसी मस्जिद की बात कीजिए लोगों इतनी वहां पे तलवारे चलती हैं गोलियां चलती है इतनी चीजें होती है लेकिन कभी किसी को एक्वायर नहीं किया गया किसी के ऊपर एडमिनिस्ट्रेटर नहीं बैठाया गया क्यों तो अल्पसंख्यकों के नाम पर एक मैं मैं ये मानता हूं कि अल्पसंख्यकों के नाम पर एक फ्री हैंड दे दिया गया है कुछ स्पेसिफिक लोगों को चाहे वो मुस्लिम कम्युनिटी के लोग हो चाहे वो क्रिश्चियन कम्युनिटी के


लोग हो इन लोगों को ये कह दिया गया कि आप जो मर्जी कीजिए ये आपका राइट है और जोरा सा आप कुछ करेंगे तो फिर वो 58 देश तैयार है और 120 देश तैयार है वो आपके नाम पे आवाज हिंदू के लिए कोई आवाज उठाने वाला नहीं है कोई देश बोलने वाला नहीं है तो हमें अपने लिए खुद ही आवाज उठानी पड़ेगी इसीलिए आपके माध्यम से मैं यही कहना चाहूंगा कि जितने भी सनाती है उन सबको इस चीज के ऊपर दोबारा से वो मुहिम जो है वो जो एक साल तक लगातार चलती रही लेकिन अभी तीन चार महीने से मैं देख रहा हूं कि वो मुहिम में वो दम नहीं है लेकिन इस जजमेंट


के आने के बाद कहीं ना कहीं एक बल मिलेगा। कानूनी रूप से कहीं ना कहीं यह बात साफ होती है कि देखिए जो चीज मैंने जिस ध से दी मंदिर में जिस इच्छा से दी अगर वो पैसा उस इच्छा से नहीं खर्च हो रहा तो कहीं ना कहीं वो मेरा कॉन्स्टिट्यूशनल राइट जो है मेरे धर्म के प्रचार प्रसार का जो राइट है वो कहीं ना कहीं सरकार ने डिफिट किया और उस डिफिट को कहीं ना कहीं आवाज उठाने की जरूरत जरूर है। बिल्कुल। और दूसरा एक चीज और देखिए ना आप जब कहीं पे चाहे उत्तर प्रदेश हो या पश्चिम बंगाल भी हो आप देखो अगर वहां पर कोई दंगे भड़कते हैं तो आप


सोचिए उस जमात के लोगों को मदद करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के बड़े-बड़े वकील एक झटके में आ जाते हैं। वो वकील जिनकी लाखों की फीस है एक सुनवाई में और जिन लोगों ने दंगा किया तो देखकर लगता नहीं कि वो इतने महंगे वकील कभी हायर भी कर पाए। लेकिन उनकी फंडिंग कहीं से तो होती है। तो जो पैसा इन बाकी इनके धार्मिक स्थलों पर इकट्ठा होता है उस पैसे का इस तरह से भी इस्तेमाल होता है। तिरुपति बालाजी का मंदिर देख लीजिए वहां पर तो आपने जो बोर्ड था उसमें ईसाइयों को भी बैठा दिया था। बिल्कुल देखिए मैं वही इसलिए मैंने बोला


अंजू जी कि ये जो पूरा मामला है ये मामला ऐसा है कि अब बहुसंख्यक होने की कीमत हम लोग चुका रहे हैं। आप ऐसा लगता है कि हिंदू होके कोई गुनाह हो गया। तो वो जो चीज है कि सबके दिमाग में कि भाई हिंदू जो है भारत के अंदर बहुत सुरक्षित है। उनको तो प्रिविलेज है। ऐसा एक पिक्चर दिखा दिया गया है और कुछ नहीं है। ऐसा एक पिक्चर दिखा दिया गया और अशकों को चाहे वो मुस्लिम हो चाहे वो क्रिश्चियन हो उनको ऐसा दिखा दिया गया कि भैया ये तो बहुत ज्यादा वहां पर डिप्र्राइव किया जाता है। अब यहां पे जब कोई कोर्ट में आप जाते हैं


तो कोर्ट के अंदर भी इस तरीके की चीजें आपको देखने को बड़ी अमूमन होंगी कि वहां पर जैसे ही कोई मुस्लिम कम्युनिटी का आदमी जाएगा तो उसको रिलीफ बहुत जल्दी मिलेगा। कह रहे ये तो अल्पसंख्यक आदमी है। अरे क्रिश्चियन है तो अल्पसंख्यक आदमी है। लेकिन वहीं पे जब बात होगी हिंदू धर्म की सनातन की तो आपको लड़ना पड़ेगा। काफी दिनों तक आपको लड़ना पड़ेगा। हम सब लोगों ने देखा है कैसे सीजीआई वाले मामले में किस तरीके की टिप्पणी यहां कर दी गई और अगर यही टिप्पणी किसी और धर्म के लिए कर दी गई होती तो अब तक तो आग लग गई होती घरों में लोगों के। तो ये सब चीजें हैं और


जहां आपने बात की पैसे की फंडिंग की कि जो कानूनी लड़ाई हो या सपोर्ट करने की बात हो लोगों को जो इनके लोग होते हैं चाहे वो दंगे के समय पर हो या दंगे के बाद हो चाहे मेडिकल फैसिलिटी या एनिमेशन जो है प्रोवाइड कराने की बात हो ये सब चीजों के ऊपर वो पैसा आता कहां से है तो बिल्कुल देखिए यूपी के अंदर जब माननीय योगी आदित्यनाथ जी ने जब पूरा मुहिम चलाया तो आपको याद होगा कि 1000 से ज्यादा ऐसे मदरसे मिले जो नकली मदरसे थे जिनका कोई डाटा ही नहीं था और बहुत से मदरसे ऐसे थे जो बांग्लादेश, नेपाल बॉर्डर के ऊपर जो बने हुए थे। तो इससे यह पता चलता है कि


किस तरीके से कुछ चीजें ऐसी प्लांट कर दी गई है और उनका जो पैसा है वो किस तरीके से डायवर्ट करके कहां-कहां पहुंचाया जाता है और किस तरीके से हेल्प की जाती है। आप देखिए बुलडोजर जस्टिस वाला जो मामला पूरा बनाया गया जिस तरीके से वो कह दिया गया बुलडोजर जस्टिस तो वो जो पूरा मामला बनाया गया उस मामले के अंदर दिन में कारवाई हुई शुरू हुई। शाम को आपकी पिटीशन फाइल हो जाती है, सुनवाई हो जाती है। सेम डे सुप्रीम कोर्ट में तो वो ऐसे मामले सुप्रीम कोर्ट तक इतनी जल्दी नेटवर्क क्या नेटवर्क बनाया गया उसके अंदर आप सोचिए कि


कितना पैसा खर्च हुआ होगा। कपिल सिब्बल जैसे वकील जो कि एक डेट पर एक टाइम पर आने का 15 लाख चार्ज करते हैं वो कम से कम वो आके आपका केस लड़ रहे हैं उसी टाइम पे तो सोचिए कि किस तरीके के कितना बड़ा फंडिंग कहां से आ रहा है भाई कोई पूछने वाला नहीं है तो ये बहुत दुखद है और ऐसा जो पूरा मैं कहूं कि पूरा स्ट्रक्चर जो बनाया गया है वो पूरा स्ट्रक्चर हिंदू के लिए नहीं है सनातन के लिए नहीं है सनातन के लिए आपको लड़ने वाले लड़ने के लिए आपके पास पैसे नहीं मिलेंगे आपको लड़ने वाले आपको एडवोकेट्स नहीं मिलेंगे क्योंकि आपके पैसे


नहीं है। आपका पैसा तो सरकारें ले रही है। आपका पैसा तो डायवर्ट किया जा रहा है। तो बिल्कुल ये चीजें कहीं ना कहीं मुझे लगता है कि कहीं ना कहीं इन चीजों को रोकने की जरूरत है। और जो जजमेंट आज जो हिमाचल हाई कोर्ट का आया है वो कहीं ना कहीं इस मामले को आगे बढ़ाने में एक लैंडमार्क और एक सिग्निफिकेंट काम करेगा। लोगों के माइंड में कानूनी रूप से भी कि किस तरीके तरीके से उनके अधिकारों का हनन जो मंदिरों का पैसा है डाइवर्ट करके किया जा रहा है वो कहीं ना कहीं इस जजमेंट से बिल्कुल साफ होता है। ये जो फैसला आया है मुझे लगता है ये बहुत


ऐतिहासिक फैसला है। आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। लैंडमार्क है और इसकी चर्चा होगी। बात निकली है तो दूर तलक जाएगी और अब देखते हैं इस फैसले को लेकर किस तरह की सुगुवाहट होती है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचता है या नहीं पहुंचता है और अगर पहुंचता है तो क्या कुछ रवैया सुप्रीम कोर्ट में देखने को मिलता है।

No comments:

Exclusive research on PM Narendra Modi Govt Spending on SC ST OBC & Muslims of India- 2014-2026

Exclusive research on PM Narendra Modi Govt Spending on SC ST OBC & Muslims of India- 2014-2026 Exclusive research on PM Narendra Modi ...