क्या ऐसा भी होता है कि आप मेरे दफ्तर में आए? मैं कुछ तंत्र मंत्र करूं, कुछ चाय पिला दूं और आप पर असर हो जाए उसका। तांत्रिक विधा में ऐसी चीजें आती हैं। लोग बताते हैं कि कहते भी हैं गांव देहात में कि उसके हाथ का कुछ मत खा लेना, सफेद चीज मत खा लेना। ऐसी बातें हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण इन सब का खंडन करता है। लेकिन तांत्रिक विधा होती है। यह ज्योतिष मानता है। अब मेरे को तो ज्योतिष में रुचि है। राज नारायण जी आते हैं। मेरे शो करते हैं। मैंने केवल मोहन भागवत के भाषण का सच जानने के लिए कि कहानी क्या है? मोदी से रिश्ते क्या है? नागपुर में राजीव रंजन जो संघ मुख्यालय से और गडकरी के घर से छ सात किलोमीटर दूर रहते हैं। मुख्यमंत्री फनवीस का घर भी दोाई किलोमीटर दूर है उनका। तो नागपुर की एक एक चीज जानते हैं। मैंने उनसे बातचीत की तो उन्होंने कहा कि नागपुर में बड़ी चर्चा है कि संजय जोशी और गडकरी की जान को खतरा है। मैं चौका और फिर उस बातचीत में क्या-क्या राज निकले आप सुने तो दंग रह जाएंगे। जल्दी से फोर पीएम यूपी को सब्सक्राइब कर लीजिए। ज्वाइन कर लीजिए। चलते हैं राजीव रंजन के पास। स्वागत है भाई राजीव भाई आपका। आप नागपुर बैठे हैं। विजय दशमी का पर्व भागवत जी के बड़े बड़े लंबे चौड़े भाषण। मुझे हंसी आ रही है कि जब भागवत जी जो प्रवचन दे रहे थे उनको मोदी और योगी तो मानते नहीं है। सबको सामाजिक सद्भाव के साथ रहना चाहिए। सभी लोगों को एक दूसरे के धर्मों का सम्मान करना चाहिए। जरा जरा सी बात पर सड़कों पर नहीं निकलना चाहिए। प्रशासन जो है सबको समान भाव से देखे ऐसा धारणा बननी चाहिए। लंबी चौड़ी नौटंकी वाली बातें हैं। मुझे बात देख के बड़े हैरानी हुई कि मैंने कई सालों से देखा है विजय दशमी का पर्व जो संघ के लिए बड़ा महत्वपूर्ण होता है। पहली बार मुझे देखा कि भागवत जी के इधर उधर पिक्चर वाले इस टाइम में जैसे अक्षय कुमार आते हैं उधर उधर डॉन बनके और सिक्योरिटी गार्ड चल रहे होते हैं। तो बढ़िया बढ़िया गन लेकर इधर उधर भागवत के चल रहे थे। तो जब इतनी सिक्योरिटी मोदी जी ने दे दी इसका भी लुत्फ लगा दिया मोदी जी ने मैंने देखा था मुलायम सिंह यादव को माना जाता था कि वो धरती पुत्र कहते थे क्योंकि बड़ी मेहनत किया करते थे जिंदगी में पाश्चात संस्कृति से दूर रहा करते थे लेकिन फिर बाद में एक अमर सिंह नाम के मित्र उनके बन गए और फिर अमर सिंह ने उनको बॉलीवुड की जिंदगी भी दिखा दी उसके बाद मुलायम सिंह की राजनीति काफी बदली तो इनकी जिंदगी में भी भागवत की जिंदगी में मोदी जी आ गए संघ के प्रचारक जो दफ्तर में खिचड़ी बनाकर खाते थे वह जमीनों का धंधा करने लगे। लखनऊ में एक क्षेत्रीय संगठन मंत्री बीजेपी के आए बड़े एक बड़े बेस साह साहब बड़ा बेस कर गए लोगों को उनके संग धंधे में लग गए। करोड़ों की जमीनों के सौदे हो गए। इनकम टैक्स में छापा मारा। 500 600 करोड़ की जमीन जब्त हुई और साह साहब आजकल तरह तरह की कहानियां बताते हैं हमने कि ये कर दिया उसका अफसर का ये कर दिया। पीछे संघ के संगठन मंत्री तो संघ के लोग इस तरह दफ्तर में धंध हो गए क्योंकि हर जिले में फाइव स्टार होटल जैसा संघ का दफ्तर बन गया तो मोदी जी भी अमर सिंह की तरह आ गए भागवत की जिंदगी में मैं समझना चाहता हूं कि अब इस राजनीति का मतलब क्या है भागवत के ये संकेतों में बात करना पहले कहना कि 75 साल पूरे होने पर आदमी को साइड में हो जाना चाहिए रिटायरमेंट लेना चाहिए और फिर बाद में कि मैंने तो ऐसा कुछ कहा नहीं था ये खेल क्या है भारतीय जनता पार्टी और संघ के बीच चल क्या रहा है? देखिए संजय जी बहुत बढ़िया सवाल है। इसमें दो बातें हैं। पहली चीज तो यह कि जो नेपाल में घटनाएं हुई है विगत एक महीने के अंदर में उससे ना केवल भारतीय जनता पार्टी बल्कि संघ भी अंदर से हिला हुआ है। और यह जो भय और डर जो है आज के भाषण में आपको उसका पुट जो है प्रतिबिंब जो है वह नजर आया है। आपने 11 साल से लोगों के घर जो है वो बिना कोर्ट कचहरी में केस में फाइनल डिसीजन आए आपने बुलडोजर के माध्यम से जो है पूरा का पूरा घर आपने गिरा दिया। आपने लोगों को इस तरीके से परेशान किया है कि लोगों के घर ले लिए गए वहां मंदिर के लिए कॉरिडोर बनाने के नाम पे। तो यह बात जो आज की गई है वो ऐसी है कि 100 चूहे खा के बिल्ली चली हज को। आपने जो एक लाइन बोला शुरुआत में कि ना तो योगी मानते हैं ना मोदी मानते हैं। तो यह मोहन जी भागवत ने किसके लिए भाषण दिया है? जो आज का भाषण हुआ है किसके लिए हुआ है? ये आज का भाषण मोदी योगी और पूरे भाजपा के लिए ही उन्होंने दिया है। उन्होंने संकेत में समझाया है कि जो नेपाल में हो रहा है और जिस तरीके से आतताई के रूप में आप लोगों का एक इमेज क्रिएट हो रहा है। ये टाइम है रहते संभल जाओ। या अगर नहीं आप संभले तो फिर इसके विनाशकारी परिणाम जो है वो ना केवल नेताओं को बल्कि पूरी पार्टी को झेलना पड़ेगा। प्रॉब्लम ये हो गई है अभी ऐसा संजय जी कि भारतीय जनता पार्टी के अंदर में दो फाड़ हो गए हैं। ठीक है? और एक बहुत बड़ा जो तबका है जो सीनियर लोगों का है जिसमें मुरली मनोहर जोशी जी आते हैं जिसमें लाल कृष्ण आडवाणी हैं और इनके चाहने वाले जो लोग हैं। ठीक है? शाहनवाज हुसैन हुए, नितिन गडकरी हुए। यह एक अलग गुट है। दुख की बात यह है कि इस गुट के अंदर में एक में नितिन गडकरी को छोड़ दे तो आज की डेट में कोई भी व्यक्ति जो है वो मेन फोकस में नहीं है। वो पावर के उसमें नहीं है। डोमेन में नहीं है। तो मोहन भागवत की बात मानने वाला यही गुट है। दूसरा जो गुट है वो तो पूरे कैपिटलिस्ट पूंजीवादी लोगों के साथ में बैठा हुआ है। जो जो मोदी बोल लीजिए आप अमित शाह बोल लीजिए जो गुजरात लॉबी जो है वो पूरी तरीके से जो है वो आप यह समझ लीजिए कि आरएसएस के हाथ से बाहर लगभग निकल चुकी है और इनको यह लगता है कि देश की पूंजी जो है और पूंजीवादी लोग जो है वो हमारे साथ में खड़े हैं तो हम अपना संगठन बना डालेंगे। हमें किसी बात का भय नहीं है और बार-बार मोहन भागवत जो है वह कई बार आह्वान कर चुके हैं, इशारा कर चुके हैं। परंतु ऐसा समझ में नहीं आ रहा कि भाई इस मतलब उनके सारे आह्वान भी जो हैं वो डी फेयर पे जा मतलब उस पर कोई असर ही नहीं पड़ रहा है। और ये आपको मैं अंदर की बात बता रहा हूं कि मतलब नागपुर के अंदर में ये बहुत गर्म चर्चा है कि नितिन गडकरी जी जो हैं उनके जो चाहने वाले लोग हैं कई लोगों से जो है मुझे एक ही तरीके के संदेश मिले मैसेज मिला है कि गडकरी साहब की जीवन को खतरा है। बात यहां तक बढ़ गई है। यह अंदर की बात है। मुझे लोगों ने भेजे हैं उनकी कुंडली कि आप कृपया करके राजीव नारायण शर्मा जी को ये बढ़ाइए कुंडली गडकरी साहब की और संजय जोशी की और दिखाइए कि कहीं इनके ऊपर में घात तो नहीं हो सकता है। ये मैं आपको अंदर की बात बता रहा हूं। ये किस लिए भेजा था? नागपुर के लोग हैं। नागपुर के गडकरी साहब के चाहने वाले जो लोग हैं, उनके जो करीबी लोग हैं, उन लोगों को यह लग रहा है। वो यह बोल रहे हैं कि जो जो व्यक्ति जाके पीएमओ में चाय पिया है, बिस्किट खाया है, उन सबको कैंसर हो गया है। तो अभी तो सुनने में आया ऐसा बताया जा रहा है कि गडकरी साहब जो है वो तो जा भी नहीं रहे पीएमओ। चाय पीने ही छोड़ दिया उन्होंने इस भय में। तो मतलब यह आपको मैं जो बात जो नागपुर में गम चर्चा है उसके बारे में मैं आपको यह सारी चीजें बता रहा हूं। आप कह रहे टाइप पे चर्चा इतनी भारी हो गई कि उन सबकी मौत हो गई। एक अरे आप देखिए ना मुझे ये बताइए कैंसर जो है किसी भी जूनियर टाइप के लीडर को हुआ ही नहीं आज तक भाजपा के अंदर में। अनंत कुमार कैंसर से गए। सुषमा स्वराज कैंसर से गई। सुशील मोदी कैंसर से गए। मनोहर परिकर कैंसर से गए। आप मेरे को नाम मैं आरोप नहीं लगा रहा हूं पर जो यहां पे लोगों का ऐसे तो अरुण जेटली भी वो तो मोदी जी के करीब अरुण नहीं अरुण जेटली भी गए बिल्कुल अरुण जेटली जी जो है किसी वक्त में करीब थे गडकरी जी भी करीब थे राजनाथ सिंह भी करीब थे यही लोग तो थे जिन्होंने नरेंद्र मोदी को जो है वो बोला था कि भैया ये पीएम के कैंडिडेट 2013 में रहेंगे ठीक है तो ये कहना पीएमओ की चाय से क्या मतलब है आपका मतलब है कि कुछ तांत्रिक वंत्रिक क्रियाएं एक दिन आप बता रहे देखिए मैंने मैंने पहले भी आपके इसमें बताया है कि मुझे बहुत ही करीबी लोगों ने बताया है कि नरेंद्र मोदी तंत्र मंत्र विद्या के बहुत ही पारंगत व्यक्ति हैं। विशेषज्ञ हैं। ऐसा मुझे बहुत ही खुफिया सूत्रों ने मेरे बताया है। ठीक है। अब मैं ये नहीं बोल आपकी बातों में मजा इसलिए आ रहा है कि आपके घर से संघ मुख्यालय कितनी दूर होगा? कितने दो किलोमीटर? 3 किलोमीटर नहीं 8 किलोमीटर के आसपास नहीं। किलोमीटर जी का घर है। हां मोहन भागवत जी जहां रहते हैं वो आपके घर से और उनके घर के बीच में 8 किलोमीटर की दूरी 8 किलोमीटर तो होता नहीं है। हमारे घर से हजरतगंज चले जाओ तो 8 किलोमीटर हो जाता है। गोमती नगर से हजरत 8 कि.मी. तो कुछ होता ही नहीं है। दूसरा बात गडकरी साहब आपके घर से कितनी दूर रहते हैं? गडकरी साहब पहले 2ाई किलोमीटर था घर। अभी एयरपोर्ट के पास चलेंगे तो होगा 8 9 किलोमीटर होगी। किलोमीटर दूरी पे सन मुख्यालय है। 8 किलोमीटर की दूरी पर गडकरी साहब है। फनवी साहब दो दो ढाई किलोमीटर दो किलोमीटर यानी एक देश का एक ऐसा पत्रकार जो खोजी पत्रकार है राजीव रंजन सिंह जिसका नाम है वो अंदर की खुफिया खवा भी निकाल लाता है। वो संघ मुख्यालय से मोहन भागवत जी जहां खाना खाते हैं जहां चिंतन करते हैं जहां सोते हैं उनसे 8 किलोमीटर की दूरी पर गडकरी साहब जो वेटिंग इन प्राइम मिनिस्टर है उनके घर से 8 किलोमीटर की दूरी पे और मुख्यमंत्री फीस के घर से दो ढाई किलोमीटर की दूरी पर नागपुर के सीनियर जर्नलिस्ट में राजीव रंजन का नाम आता है तो ये तो मैं मान सकता हूं कि आपके पास जानकारियों का इतना बड़ा खजाना होता है क्योंकि मेरी ज्योतिष विद्या में रुचि भी है अध्ययन भी है और कर्तव शो एक बड़ा वर्ग जो है उसको खराब कहता है। एक बड़ा वर्ग प्रशंसा है। अलग-अलग विषय मेरा ज्योतिष में रुचि है। मैं मानता भी हूं। ऐसा व्यक्ति कह रहा है कि नागपुर में चर्चा है। इस बात की चर्चा है कि गडकरी की जान को खतरा है और वो प्रधानमंत्री कार्यालय में चाय पीने नहीं जा रहे हैं। वो लोग कहते हैं मुझसे कई लोगों ने कहा कि नेताओं के यहां ये होता है कि भैया उनके घर का जो ज्योतिष में और तांत्रिक क्रियाओं में माना जाता है कि उसके उसका कुछ छुआ खा मत लेना। उसके इस तरह की बातें की जाती है। तो मतलब प्रधानमंत्री कार्यालय की घर की चाय के लिए भी मैं ये बिल्कुल कह रहा हूं कि बिल्कुल यकीन मत करिए इस बात पर। मैं सब दर्शकों से कह रहा हूं। एकदम यकीन मत करिए। लेकिन कभी-कभी होता है कि जब समाज में ये चर्चाएं फैल जाती है। तो उसका बड़ा महत्व होता है। अब आपके सामने हमारे साथी राजीव रंजन हमारे तमाम दर्शकों से मैं कह रहा हूं। आपके सामने हमारे मित्र राजीव रंजन जो इतनी इंपॉर्टेंट जगह पर रहते हैं और वो कह रहे हैं नागपुर में यानी नागपुर मतलब संघ मुख्यालय जहां भागवत ने भाषण दिया था भागवत जी ने भाषण दिया था वहां पर बैठा आदमी कह रहा है कि नागपुर में चर्चा है कि प्रधानमंत्री के कार्यालय में गए चाय पी और गए और फिर वो एक लंबी लिस्ट निकाल रहे हैं कैंसर वालों की उसे ये बात और भी लोगों ने कही थी लेकिन मैंने बात को हंसी मिटा दिया कि मैंने कहा इसकी चर्चा नहीं होनी चाहिए ठीक नहीं लगता है लेकिन आप जब कह रहे हो क्योंकि ये चर्चा नागपुर तक पहुंच गई। मैंने तो चर्चा लखनऊ में सुनी थी कि जिसने जिसने जिसने चाय पी मुझसे तो दूसरे संदर्भ में कहा कि जो राफेल का सच जानते थे वो सब निकल गए हैं। अलग-अलग संदर्भ में लोग कहते हैं मतलब देखिए कारण संजय जी बात समझिए आप एक मेव नेता जो भारतीय जनता पार्टी के अंदर में डेवलपमेंट के लिए जाना जाता है। जिसने कुछ काम किया है उस व्यक्ति के पीछे यह दुर्भाग्य है भारतीय जनता पार्टी का अंदर में आप भारतीय जनता पार्टी की संस्कृति समझिए कार्य किस तरीके की संस्कृति है पार्टी के अंदर में कि जिस जो सबसे मोस्ट परफॉर्मिंग नेता था बीजेपी के अंदर में आज उसी को किस तरीके से सूली पे लटकाया जाए उसकी तैयारी चल रही है। आप देखिए जब वायर वायर ने जब अमित शाह के बेटे के ऊपर में स्टोरी किया था कि उनका कमोडिटी का बिजनेस
का किस तरीके से रेवेन्यू बढ़ा। तो जय शाह और अमित शाह ने वायर को क्या मैसेज रिप्लाई क्या दिया था कि कमोडिटी के बिजनेस में रेवेन्यू मायने नहीं रखता है। अब वही गुजरात लॉबी जो है वो फीड कर रही है कि गडकरी नितिन गडकरी के जो बेटे हैं निखिल गडकरी उनकी जो कंपनी है उसका रेवेन्यू जो है कुछ 1520 करोड़ से बढ़के 500 600 करोड़ हो गया। कुछ नंबर है। मेरे को एग्जैक्ट नंबर अभी ध्यान में नहीं है। परंतु कमोडिटी बिजनेस के अंदर में जो जय शाह के ऊपर में फंडा लागू नहीं होता वो नितिन गडकरी के बेटे के ऊपर में लागू होता है। ये अपने आप में हास्यास्पद बात है कि नहीं है? भाई मैं बिजनेस जर्नलिस्ट हूं। 23 साल से बिजनेस जर्नलिज्म कर रहा हूं। बड़े-बड़े अखबारों और मैगजीन के लिए मैंने काम किया है। मैं आपको अपने एक्सपीरियंस के बेसिस पर बता रहा हूं कि कमोडिटी बिजनेस में वाकई में रेवेन्यू मायने नहीं रखता है। अगर मुकेश अंबानी का 10 लाख करोड़ के ऊपर का टर्नओवर है तो वो टर्नओवर इसलिए है क्योंकि भाई आप ऑयल जैसी कमोडिटी में डील करते हो। आपका प्रॉफिट मार्जिन जो है वह मायने रखता है कोई भी कमोडिटी बिजनेस में और यह बहुत ही थिन 2% 3% 4% के मार्जिन पर काम करते हैं। जिस नितिन गडकरी ने 107 लाख करोड़ के रोड प्रोजेक्ट्स पूरे इंडिया में जो है उसके लिए काम किया। जिसमें से 35 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट पीएम ऑफिस ने नरेंद्र मोदी ने रोक दिया। किसी कारणवश एनएचआई का सेक्रेटरी भी पीएमओ से भेजा गया। हाईवे मिनिस्ट्री का सेक्रेटरी भी पीएमओ से गया। फाइल मिनिस्टर पास कर रहा है। सेक्रेटरी लोग अटका दे रहे हैं। उस व्यक्ति के पीछे में जिसने सबसे ज्यादा काम किया है। उसके पीछे में अब पूरी एक भयानक लॉबी लग गई है। और उस लॉबी के अंदर जो है तमाम तरीके के जो है प्रचार तंत्र लग गए हैं कि ये व्यक्ति जो है वो किस तरीके से गलत कार्यों में लिप्त है। अंदर की बात बता रहा हूं। इनकी कंपनी की हालत ऐसी है कि बैंकों को पैसे देने के लिए भी इनके पास में अगर टाइम से पैसे नहीं आए ना पैसे भी ना दे पाए। आपको अंदर बता रहा हूं। धड़करी के बेटों की एक्सजेक्टली यही यही हालत है उनकी। वो तो बता रहे हजारों करोड़ की कंपनी हो गई है। उसके शेयर इतने वो टर्नओवर है। वो रेवेन्यू है। मैं वही बता रहा हूं। रेवेन्यू है। रेवेन्यू पर रेवेन्यू आपके पास बचता नहीं है ना। आपके पास बचता है प्रॉफिट। प्रॉफिट कितना कमा रही है? इनकी एक कंपनी है सियान एग्रो जो मार्केट में लिस्टेड है। इन लोगों को खुद नहीं मालूम कि उसके शेयर कौन खरीद रहा है। पूरे गुजरात के जो है वो ब्रोकर्स लग गए हैं। वो पूरा का पूरा शेयर ही खरीद डाल रहे हैं। फ्लोटिंग शेयर है ही नहीं। रोज अपर सर्किट के कारण क्या गुजरात लॉबी को भाई कुछ भी करके इनको इनका नाम खराब करना है। इनको बदनाम करना है। गुजरात वो शेयर जो भी फ्लोटिंग शेयर है वो खुद ही खरीद बेच के खरीद ले रहे हैं वो लोग। इनको खुद को नहीं मालूम है कि कौन खरीद रहा है शेयर। मेरा 20 दिन अपर सर्किट लगा है गडकरी के जो निखिल गडकरी की जो कंपनी का रेट बढ़ेगा शेयर का रेट बढ़ेगा तो कंपनी
की वैल्यू बढ़ेगी। हां और उसके वैल्यू बढ़ेगी तो बदनामी होगी कि कंपनी इतनी ओके इतनी बड़ी होगी और दूसरा फिर इंक्वायरी बैठेगी सेबी इंक्वायरी करेगा कि ये कौन है भाई ये कैसे सियान एग्रो के शेयर्स जो है 25 दिन से लगातार जो है अपर सर्किट मार रहे हैं। ये संजय जी मैं अपने प्यारे 4 पीएम के दर्शकों के लिए बता देना चाह रहा हूं कि बहुत बड़े लेवल की साजिश अंदर चल रही है। ठीक है? मेरे को गडकरी साहब से कोई लेना देना नहीं है। ना उनके बेटों से मैं आज तक मिला हूं। ना मेरे को ₹1 का महाराष्ट्र गवर्नमेंट से काम है। ना भारत सरकार से काम है ना नितिन गडकरी से काम है। किसी से कोई वास्ता नहीं है। परंतु मैं जो नागपुर के अंदर में गरम चर्चा है उससे मैं दर्शकों को अवगत कराना चाहता हूं क्योंकि आप लोगों को यह भी पता होना चाहिए। इनको कहा जाता है कि इथेनॉल के धंधे में पैसा बना रहे। अरे सबसे ज्यादा इथेनॉल जो है वो उड़ीसा और उत्तर प्रदेश के लोग जो है वो बेच रहे हैं। जहां शुगर की फैक्ट्री रहेगी और महाराष्ट्र के अंदर में सारे कांग्रेस और एनसीपी लीडर्स जो हैं उनके पास में गन्ने की जो है वो शुगर केन शुगर इंडस्ट्री है। तो ये गडकरी का बेटा कहां से ये बेच रहा है यार? 33 कांग्रेस के मिनिस्टर हैं। नेता हैं जो आज की डेट में इथेनॉल में टेंडरिंग में पार्टिसिपेट कर रहे हैं। यह मेरे को जानकारी मिली है। तो एक आप गडकरी को निकाल रहे हो वो छुटपुट सा कुछ एक% भी नहीं होगा 2% जो बेच रहा पर इथेनॉल स्कैम इथेनॉल स्कैम ऐसा बना दिया है कि नितिन गडकरी पूरा का पूरा कोई इथेनॉल का स्कैम करने बैठे हैं। यह बहुत बड़ा दुष्प्रचार तंत्र जो है वह भारतीय जनता पार्टी का जो सबसे परफॉर्मिंग लीडर था जिसने 11 साल में सबसे ज्यादा काम किया उसके इमेज को टार्निश करने के लिए चलाए इसी को राजनीति कहते हैं। मेरे प्यारे 4 पीएम के दर्शकों इस बात को समझिए। जिस व्यक्ति ने 2014 से लेकर 2019 तक सबसे बेस्ट परफॉर्म किया इस गवर्नमेंट के बाद और 2019 में आने के बाद में गुजरात लॉबी ने बैंड बजा दी इनकी और 2000 और उसमें बहुत बड़ा श्रेय जो है वो 4 पीएम को भी दिया जा रहा है संजय जी मेरे को और आपको कि जो हमने संजय जोशी का नाम जो है जो हमने एक्सपोज मतलब जो बताया हमने अगर हम नहीं बताते तो शायद संजय जोशी सही में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष रहते। अब लोग जो है मेरे को बद्दुआ दे रहे हैं नागपुर में कि ना आप 4 पीm में बोलते और
ना जो है यह संजय जोशी जो है वो ये बनते। तो कहने का अर्थ यह है कि पूरी तरीके से गुजरात लॉबी सक्रिय हो गई है। 4 पीm देखते हैं ये लोग और इनको यह समझ में आ रहा है कि भाई इन इन लोगों के बारे में बात हो रही है क्योंकि वैकल्पिक मीडिया में ही बात हो रही है। जो मेन स्ट्रीम मीडिया है वो तो सिर्फ मोदी गुणगान कर रहे हैं। सच्चाई कोई बता नहीं रहा है। ठीक है? तो सच्चाई जो है यह मैंने आज दर्शकों के सामने रखा है। आप देखिए अंजलि दमानिया जी जो आम आदमी पार्टी की एक टाइम में लीडर थी 2014 में जिन्होंने नागपुर से इलेक्शन लड़ा था नितिन गडकरी के खिलाफ में 2014 में। उन्होंने अभी चार-प दिन पहले खुलासा किया कि इथेनॉल का बहुत बड़ा स्कैम हुआ। बहुत उन्होंने बोला मैं 17 अलग-अलग एडिशन में निकालूंगा ऐसे मुझे पता चला। कहां गए? सारे एडिशन कहां गायब गए भाई? बोला ये तो पहले एडिशन का खुलासा किया मैंने। तो बाकी एडिशन क्यों रुक गए? आप ले आइए और उसके ऊपर में बैठाइए आप जांच। आपको समझ में आएगा कि इथेनॉल में शुगर में खेल करने वाले कौन लोग हैं। मैं तो बोलता हूं सीबीआई से एक बार इथेनॉल की पूरी इंक्वायरी हो जानी चाहिए और ये समझ लिया जाना चाहिए कि भाई गडकरी कितना इथेनॉल में कर रहे हैं। कितने कांग्रेस के लीडर हैं? कितने जो समाजवादी पार्टी के लीडर हैं, कितने उड़ीसा के लीडर हैं। वो सारा पिक्चर जो है वो क्लियर हो जाएगा। तो यह सिर्फ नाम ले जो है बदनाम करने का विदाउट एनी एविडेंस यह बहुत दिनों से कार्यक्रम चल रहा है और मैंने जैसे पहले ही बताया कि 107 लाख करोड़ का प्रोजेक्ट जिस व्यक्ति ने आप पंजाब में चले जाइए मेरा बचपना पूरा पंजाब में बीता है। मुझे वहां भी मेरे दोस्त बोलते हैं कि भाई आपके गडकरी साहब ने हमारे यहां कितने हाईवे बनवा दिए। तो मैं गडकरी जी का कोई प्रचार नहीं कर रहा ना मेरे को कोई लेना देना उनसे। परंतु मैं वास्तविकता बता रहा हूं कि क्या वास्तविकता मोदी सरकार की रही है और किस तरीके से इनको ट्रीटमेंट मिल रहा है नितिन गडकरी को जो उनको नहीं मिलना चाहिए था। आज आप देखिए हमारी विदेश नीति बहुत बड़ी फ्लॉप शो हुई है। आप देखिए नेपाल से लेके बांग्लादेश तक हर सार्क कंट्रीज जो हमारे आजूबाजू में सब आज भारत के खिलाफ है। कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल बड़े जीरो फ्लॉप शो बहुत बड़े फ्लॉप शो जीरो साबित हुए। अमेरिका ने जो 50% टेरिफ लगाया यह कुछ रोक नहीं पाए। आप देखिए किस तरीके से जो है ट्रेन के हादसे हो रहे हैं। अश्विनी वैष्णव बिग जीरो शून्य पर इन लोगों को ऐसा हीरो बनाया जा रहा है कि ये लोग जो है ये विकास पुरुष है। नरेंद्र मोदी बिग फ्लॉप शो जीरो अमित शाह जीरो मणिपुर जल रहा है। लद्दाख जल रहा है। जीरो है ये लोग। इन लोगों ने इतना बड़ा फेलियर किया। पर इन सभी लोगों का मीडिया प्रचार कर रहा है विकास पुरुष और यह सब बता के और जिस आदमी ने वाकई में काम किया उस आदमी की पूरी की पूरी बैंड बजाने की जो है तैयारी लग गई है। जी संजय जी आपने तो बड़े भयंकर भयंकर खुलासे कर लिए। इस बीच में संजय जोशी कहां है? मेरे सूत्र बता रहे थे कि फिर बात चली संजय जोशी का नाम चलता है खत्म हो जाता है। राष्ट्रीय अध्यक्ष बनेगा कोई पार्टी का ऐसे चलता रहेगा। देखिए संजय जोशी जी जो है वो जब तक मोदी जी हैं ऐसा सुनने में आया है कि वो उन्होंने बोला है कि आरएसएस को कि मैं इसको तो आने नहीं दूंगा। किस पर्सनल लेवल की खुंदस है? क्यों खुंदस है? ये संजय जोशी और अपना नरेंद्र मोदी जी यही दोनों क्लेरिफाई कर सकते हैं। बहुत सारे लोगों ने संजय जोशी को बोला भी कि जाके आप मोदी से मिलिए और पता कीजिए कि भाई क्या उनको गवेंस है। क्यों आपके खिलाफ है? संघ के भी कई लोगों ने उनको बोला। ऐसा मेरे सुनने में आया है। कि आठ बार संजय जोशी ने टाइम मांगा नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए। आठों बार जो है इनके मतलब इनके फोन तक को रिसीव नहीं किया गया। कोई बहुत ही जूनियर सेक्रेटरी लेवल पर बोल दिया गया कि टाइम नहीं है आपसे मिलने। तो अब आप समझ लीजिए कि एक तरफ से एक व्यक्ति जो है आगे से खुद चल के चीजों को क्लियर करने के लिए आ रहा है और दूसरा व्यक्ति बोल रहा है कि मुझे आपसे कोई बात करने में दिलचस्पी नहीं है कि इससे आप घमंड इससे आप दंब इससे आप अहंकार जो है वो समझ सकते हैं और नरेंद्र मोदी का अहंकार इतना ज्यादा है कि आज जो पूरा भारत भुगत रहा है टेरिफ की मार डोनाल्ड ट्रंप की ये सिर्फ और सिर्फ एक व्यक्ति के कारण है जिसका नाम नरेंद्र मोदी। डोनाल्ड ट्रंप को भारत से कोई प्रॉब्लम नहीं है। डोन्ड ट्रंप को नरेंद्र मोदी से प्रॉब्लम है। नरेंद्र मोदी सरकार ने जिस तरीके से डोनाल्ड ट्रंप को हैंडल किया है। उसका पूरा का पूरा जो परिणाम है वो परिणाम पूरा देश भुगत रहा है आज की डेट में ये जो टेरिफ की मार पड़ रही है। सिर्फ और सिर्फ एक व्यक्ति के कारण पड़ रही है जिसका नाम है नरेंद्र मोदी। और ये मैं नहीं बोल रहा हूं। ये आप किसी से भी पूछिए संघ के अंदर में सब व्यक्ति ये स्वीकार करेंगे। भारतीय जनता पार्टी के अंदर स्वीकार करेंगे। यहां तक कि कांग्रेस के अंदर भी नेता स्वीकार करेंगे कि सिर्फ और सिर्फ एक व्यक्ति के दंभ, अहंकार, घमंड के कारण जो है पूरा का पूरा देश जो है आज भुगत रहा है। और अंदर ये बात चल रही है कि भाई जो एसेट था आज वो लायबिलिटी बन गया है। अब इस लायबिलिटी से कैसे पिंड छुड़ाया जाए? यही इन लोग के जी का जंजाल बना हुआ है। मुरली मनोहर जोशी जी जो रहरह के अपनी सरकार के खिलाफ जा रहे हैं और कोर्ट में वक्तव्य दे रहे हैं और जो पिटीशन फाइल कर रहे हैं। आपको क्या लग रहा है? ये लार्जर पिक्चर अगर कोई देखेगा तो उसको समझ में आएगा। इनिशिएटिव शुरू हो गया है। प्रॉब्लम यह है कि इस देश के जितने भी कैपिटलिस्ट हैं, वह सब के सब नरेंद्र मोदी के पीछे अपनी पूंजी ले खड़े हुए हैं। और वहीं वही सबसे बड़ी समस्या आ रही है। आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी के जो लीडर्स वृद्ध लीडर्स हैं या वयोवृद्ध लीडर्स हैं या जिनको कहीं हाशिय पे धकेल दिया गया है। वो पूंजीपतियों से नहीं लड़ पा रहे। वो नरेंद्र मोदी से तो लड़ लेंगे इंटरनली पार्टी के अंदर में। पर पूंजीवादी लोग जो है जो जिनके पास पूंजी है वो सब के सब नरेंद्र मोदी के साथ खड़े हैं और यही आज की डेट में सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है वयोवृद्ध और वृद्ध लीडर्स के लिए। जी बिल्कुल ठीक कह रहे हैं एक आखरी सवाल क्या लगता है कि अब मोहन भागवत के तेवर वैसे ही हैं। मोदी जी पे दबाव बनाएंगे या फिर मोदी जी इतने लंबे लंबे लेख अखबारों में भागवत की संघ की जो चमचागिरी करने के लिए लिख रहे हैं। क्या भागवत की बर्फ पिघलेगी? कुछ थोड़े ठंडे होंगे भागवत या संघ प्लानिंग करता रहता है माफ नहीं करता जो जेपी नड्डा ने कहा था कि हमें संघ की जरूरत नहीं है।
तो इतने बड़े-बड़े रेप करने के बाद इतनी तारीफ करने के बाद क्या संघ पिघलेगा या मोदी जी को निपटाएगा ही निपटाएगा? देखिए मोदी जी तो पूरी तरीके से चमचागिरी करने में लगे। इसमें कोई शक नहीं। आप बताइए कौन है आरएसएस? आपने क्यों ₹100 का सिक्का निकाला आरएसएस के नाम पे? कितने एनजीओस के नाम पे निकलता है? और यह एनजीओ है भी कि नहीं है? सर्टिफिकेट है क्या एनजीओ का आरएसएस के पास में? बहुत सारे ऐसे सवाल हैं जो आज भी जो है लोग उसके जवाब ढूंढ रहे हैं। तो एक देश का प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचर से आरएसएस की तारीफ करता है। आरएसएस के लिए सिक्के निकालता है 100 का। ये क्या न्यूज़ दे रहा है? क्या मैसेजिंग कर रहा है? मैं ये नहीं बोल रहा कि आरएसएस गलत संस्था है। मेरे बहुत सारे दोस्त जो है आरएसएस में हैं और मैं मतलब वो उतने ही देशभक्त हैं जितना मैं देशभक्त हूं। और या जितने आप देशभक्त होंगे या दूसरे देशभक्त होंगे। आरएसएस से कोई मुझे तकलीफ नहीं है क्योंकि मेरे खुद के बहुत सारे दोस्त हैं। ठीक है? आरएसएस के अंदर में परंतु मैं आपको यह बता रहा हूं यदि उनकी थिंकिंग सोची जाए तो वो थिंकिंग ठीक नहीं है भारत देश के लिए। आरएसएस की जो थिंकिंग है और ये चीज मोहन भागवत जी को बहुत बार समझाया गया है। तब जाके मोहन भागवत जी आज की डेट में जो है ये भाषण देने लगे हैं कि समाज में कोहेशन होना चाहिए। समाज अलग नहीं जाना चाहिए। इस चीज से जो भारतीय जनता पार्टी के अंदर में एक्सट्रीमिस्ट फ्रैक्शन है जिस जो नरेंद्र मोदी कहीं ना कहीं उस एक्सट्रीमिस्ट फ्रैक्शन को लीड करते हैं वो लोग के अंदर में अंदर ही अंदर कहीं जो है वो कंपन पैदा हो रखी है और वो लोग किसी भी तरीके से पैचअप करना चाह रहे हैं। समस्या ये है भारत के अंदर में कि पॉलिटिकल एनालिसिस करने वाले भी बहुत कम लोग हैं जो आरएसएस या बीजेपी के लोग बताते हैं ऊपर ऊपर में बड़े लेवल पे वो लोग वही जाके टीवी पे बोल देते हैं। ऊपर के लोग तो कभी अपनी संस्था के बारे में गलत या खुफिया जानकारी नहीं देंगे। आपको चीजें नीचे से ही मिलती है इंफॉर्मेशन। परंतु कहने का अर्थ यह है कि आरएसएस जो है बहुत ही स्ट्रांगली खड़ा हुआ है। और नरेंद्र मोदी जो भी अभी स्टेप्स ले रहे हैं चाहे सिक्का निकालना हो, ₹100 का जो आज निकाला या लाल किले की प्राचर से आरएसएस की तारीफ करना हो। लोग मेरे जैसे लोग सवाल पूछ रहे हैं। कांग्रेस के नेता सवाल पूछ रहे हैं। बहुत सारे मेरे कांग्रेस के नेता जो मित्र हैं वो सवाल पूछ रहे हैं कि आरएसएस कौन है भाई? क्यों निकाला आपने इसके नाम का सिक्का? ये बहुत गलत इमेज बहुत गलत मैसेज दे रहा है और एकदम सही बोल रहे हैं कांग्रेस के लीडर्स। तो मेरा कहना है कि ये चमचागिरी का ही जो है वो एक सबूत जो है नरेंद्र मोदी दे रहे हैं। अब यह देखना होगा कि आरएसएस के टॉप पे जो 8-10 लोग बैठे हुए हैं वो कब तक इस चीज को स्वीकार करते हैं। कितने मोदी जी के घेरे में आते हैं? यह हमको भविष्य में पता चलेगा। जी संजय जी बहुत-बहुत शुक्रिया। बहुत-बहुत थैंक यू। आपने इतनी बातचीत की, बताया। बहुत-बत थैंक
यू। ये तो राजीव रंजन जी पूरी बातचीत सुनी आपने। आपका इस पूरी बातचीत पर क्या सोचना है? मुझे कमेंट करके जरूर बताइएगा। शुक्रिया। थैंक यू। [संगीत] मैं [संगीत]
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