https://www.profitableratecpm.com/shc711j7ic?key=ff7159c55aa2fea5a5e4cdda1135ce92 Best Information at Shuksgyan: कभी सत्ता के रथ का सारथी था RSS और आज खुद मोदी के अहंकार के कारण चौराहे पर खड़ा है

Pages

Sunday, July 20, 2025

कभी सत्ता के रथ का सारथी था RSS और आज खुद मोदी के अहंकार के कारण चौराहे पर खड़ा है

कभी कहा था विचारधारा ही असली ताकत है आज वही विचारधारा पीछे खड़ी होकर पूछ रही है अब. जी हां ये कहानी उसे आरएसएस की है जो कभी सत्ता के रथ का सारथी था और आज खुद चौराहे पर खड़ा है. ना आगे रास्ता है ना पीछे हटने की गुंजाइश और सामने खड़ा है एक ऐसा प्रधानमंत्री जो संघ की मर्यादा को अब व्हाट्सएप फॉरवर्ड समझता है. 

संघ के लिए यह खेल कब हाथ से निकल गया. कहानी शुरू होती है दौ हज़ार चौदह से संघ ने कहा मोदी को दो हम देश बदल देंगे. फिर दौ हज़ार उन्नीस में कहा मोदी शाह को खुली छूट दो, हम संभाल लेंगे. लेकिन दौ हज़ार चौदहबीस के बाद जब आंख खुली तो दिखा ना संविधान बचा ना संगठन की सुनी गई. जो हेड गिवार और गोलवलकर की नीतियों की बात करता था वो अब एक आदमी के मन की बात में सिमट चुका है. और अब संघ ने जो बोला था वही आज गले की हड्डी बन गया है. 

मोदी को रोको लेकिन कैसे अब संग चाह रहा है कि मोदी जी थोड़ा रुके, थोड़ा सुने लेकिन मोदी जी तो अब मोदी हैं वो ना सुनते हैं ना रुकते हैं. संघ नेताओं ने मीटिंग पर मीटिंग कि हमें प्रधानमंत्री से इस्तीफा लेना होगा नहीं तो संघ की साख खत्म हो जाएगी. लेकिन मजेदार देखिए मोदी जी एक तक नहीं उठाते. मीटिंग में भले मुस्कुराकर बैठे लेकिन फैसले अकेले लेते है. RSS सोच में है जिसे हमने बनाया. अब उसी को हटाने के लिए दस चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. 

संघ आज ऐसी हालत में है की अगर बोले हम मोदी से अलग है तो लोग कहेंगे इतने साल तक क्या कर रहे थे. अगर चुप रहे तो कहेंगे मोदी की गुलामी कर रहे हैं संघ. ना इधर का रहा ना उधर का ना समर्थन की औकात बची ना विरोध की ताकत. अब हाल ये है कि संघ के प्रवक्ता मीडिया से ज्यादा खुद को सफाई दे रहे हैं. अगर मोदी नहीं हटे तो संघ की क्या बचेगी. आरएसएस के भीतर चिंता इस बात कि अगर वह रह गए तो संघ की साख बची रहेगी या नहीं. दौ हज़ार चौदह में लोकसभा में हश्र देखा ही है. जनता सवाल पूछ रही है संघ क्या कर रहा है और ऊपर से मोदी शाह का वन मैन शो जिसमें हर फैसला हर पद, हर योजना दो लोगों की मोहर से ही पास होती है.अब संघ की दशा कुछ ऐसी है जैसे नाव भी खुद बनाई और अब उसी नाव से हाथ काटने की नौबत आ गई. 

 अब सूत्रों की माने तो नागपुर में रोज इंटरनल मीटिंग हो रही हैं. मोहन भागवत और दत्तात्रे होज बोले दोनों काफी नाराज हैं. कुछ पुराने प्रचारकों ने यहां तक कह दिया अगर संघ मोदी से इस्तीफा नहीं लेते तो हम त्यागपत्र दे देंगे. 

लेकिन सवाल यह है संघ किसे लाएगा. नितिन गडकरी मोदी नहीं चाहेंगे. योगी शाह नहीं चाहेंगे संघ का कोई चेहरा जनता कितनी मानेगी. यानी दुविधा में संघ है सत्ता में मोदी हैं और जनता है जो सब समझ रही है।संकेतों की भाषा अब सं सीधे नहीं बोल रहा लेकिन इशारों से जंग छेड़ दी है. आरएसएस के मुख्यख पत्र ऑर्गेनाइजर और पांचजन्य में मोदी की आलोचना वाले लेख आ रहे हैं. संघ के पुराने नेता एक नेतृत्व की जरूरत की बात कर रहे हैं. गडगरी, योगी, संजय जोशी जैसे नामों को आगे लाया जा  है परंतु अफसोस मोदी के पास ना तो संघ से डरने की जरूरत है और ना ही संघ की. नैतिकता अब उन पर असर डालती है. 

क्या अब संघ को खुद को बदलना होगा? अब संघ के पास दो ही रास्ते हैं. या तो पूरी ताकत से मोदी को रोकें. भला ही पार्टी टूटे या फिर चुप रहे और इतिहास के कठघरे में खड़े हो तोुष्टिकरण की चुप्पी लेकर. क्योंकि अगर दौ हज़ार पच्चीस सौ छब्बीस में मोदी नहीं हटे तो दौ हज़ार सत्ताईस में योगी को हटाने की कोशिश होगी. और दौ हज़ार उन्नीसतीस में संघ की हैसियत सिर्फ शाखाओं तक सिमट जाएगी. 

न की औकात बची ना विरोध की ताकत. अब हाल यह है कि संघ के प्रवक्ता मीडिया से ज्यादा खुद को सफाई दे रहे हैं. अगर मोदी नहीं हटे तो संघ की क्या बचेगी. आरएसएस के भीतर चिंता इस बात की नहीं है कि ब रहेंगे या नहीं. चिंता यह है कि अगर वो रह गए तो संघ की साख बची रहेगी या नहीं. दौ हज़ार चौबीस में लोकसभा में देखा ही है. जनता सवाल पूछ रही है संघ क्या कर रहा है और ऊपर से मोदी शाह का वन मैन शो जिसमें हर फैसला, हर पद, हर योजना दो लोगों की मोहर से ही पास होती है. अब संघ की दशा कुछ ऐसी है जैसे नाव भी खुद बनाई और अब उसी नाव से हाथ काटने की नौबत आ गई. 

संघ बोलेगा तो भी फंसेगा. नहीं. बोलेगा तो भी फसेगा. जिसने बोाया था वह आज काटने से डर रहा है. जो बोला था आज वही बोलने से कतराता है. और जो बनवाया था अब वही बनना नहीं चाहता. यह आरएसएस. कि वह हालत है जहां चुप रहो तो कायर कहलाओ. बोलो तो दगावासज दौ हज़ार चौदह में साफ कर दिया है. अब विचारधारा से ज्यादा जरूरी है नेतृत्व की. जवाब देही. 

अब संघ को तय करना होगा हम विचार हैं या सिर्फ एक व्यक्ति के प्रचार तंत्र का हिस्सा. 

No comments:

Exclusive research on PM Narendra Modi Govt Spending on SC ST OBC & Muslims of India- 2014-2026

Exclusive research on PM Narendra Modi Govt Spending on SC ST OBC & Muslims of India- 2014-2026 Exclusive research on PM Narendra Modi ...