https://www.profitableratecpm.com/shc711j7ic?key=ff7159c55aa2fea5a5e4cdda1135ce92 Best Information at Shuksgyan: कॉलेजियम को हटाने के लिए देश के आम नागरिकों को एकजुट होना पड़ेगा

Pages

Monday, November 3, 2025

कॉलेजियम को हटाने के लिए देश के आम नागरिकों को एकजुट होना पड़ेगा

कॉलेजियम को हटाने के लिए देश के आम नागरिकों को एकजुट होना पड़ेगा
कॉलेजियम को हटाने के लिए देश के आम नागरिकों को एकजुट होना पड़ेगा
कॉलेजियम को हटाने के लिए देश के आम नागरिकों को एकजुट होना पड़ेगा
कॉलेजियम को हटाने के लिए देश के आम नागरिकों को एकजुट होना पड़ेगा

 


पिछले 50 सालों में या फिर कहें कि 52 सालों में इस देश की जुडिशरी पर एक सोच विशेष के लोगों का कब्जा है और इन 52 सालों में भारत ने 40 सीजीआई देखे हैं। 40वें अब आने वाले हैं। उससे पहले 27 साल के दौरान भारत में जो टोटल सीजीआई हुए थे वह हुए थे 13 यानी भारत जब से आजाद हुआ तब से लेकर 1973 तक केवल 13 सीजीआई हुए।1973 से लेके 2025 तक भारत में 40 सीजीआई हो जाएंगे। लेकिन इन सब में एक चीज बड़ी कॉमन है कि ये सब के सब CONgy कंपनी से आते हैं। अब आप कहेंगे कि ये CON कंपनी क्या है? तो ये कंपनी है कांग्रेस या कम्युनिस्ट विचारधारा। यह जितने सीजीआई पिछले 52 सालों में देश ने देखे हैं यानी कि 40 के 40 CON कंपनी से ही ताल्लुक रखते हैं। इसकी शुरुआत की थी इंदिरा गांधी ने जब अजीतनाथ राय को चार सीनियर जजों को बाईपास करते हुए 4 साल के लिए सीजीआई बना दिया था। ना केवल अजीतनाथ राय, मिर्जा हिदायतुल्लाह बेग और चंद्रचूड़ के पिता विष्णु चंद्रचूड़ इन लोगों को इसलिए सीजीआई बनाया गया था क्योंकि उन्होंने कांग्रेस की जो अध्यक्षा थी या प्रधानमंत्री थी इंदिरा गांधी उनके पक्ष में डिसेंट नोट दिया था जो फैसला उनके खिलाफ गया था इमरजेंसी वाला। इसलिए इन तीनों को इनाम दिया गया और 73 से लेकर 93 तक इन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में अपना दबदबा कायम कर लिया।

 यही वजह है कि जब 93 में कांग्रेस बहुत कमजोर हो गई थी और कांग्रेस को यह लगा कि अब सुप्रीम कोर्ट में उसका दबदबा कायम नहीं रह पाएगा क्योंकि दूसरी सरकारें आएंगी और दूसरी सरकारें अपने हिसाब से जजों की नियुक्ति करेंगी। तो फिर कांग्रेस के द्वारा जो घोटाले जो बेईमानियां जो भ्रष्टाचार किया गया है उसकी वजह से हो सकता है कांग्रेसी नेताओं को जेल जाना पड़ जाए। इसके लिए एक षड्यंत्र रचा गया। इसमें चार बड़े वकीलों की मदद ली गई और इस देश पर कॉलेजियम नाम का एक दूसरा कांग्रेसी सिस्टम थोप दिया गया। 1993 से लेकर अब तक यह कॉलेजियम सिस्टम चल रहा है। यानी पहले कांग्रेस डायरेक्टली अपनी सरकारों के माध्यम से जजों की नियुक्ति करती थी। अब कांग्रेस जो है वह कॉलेजियम के नाम से

जजों की नियुक्ति करती है। आप सोच कर देखिए कि 1973 से ले 1993 तक पूरी तरीके से कांग्रेस के ही जज जब हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में बैठे हुए थे और उन्हीं लोगों ने आगे चलकर उन्हीं के में से पांच लोगों ने आगे चलकर पहले तीन जजों का कॉलेजियम बनाया और बाद में पांच या फिर विशेष स्थिति में छह जजों के कॉलेजियम की बात उन्होंने कर दी। यह सब के सब कांग्रेस या कम्युनिस्ट विचारधारा से ही आने वाले थे।

इन 40 के 40 में से जस्टिस सूर्यकांत जो 24 नवंबर को 53व सीजीआई बनने वाले हैं। वो सब के सब किसी ना किसी तरह से कांग्रेस या कम्युनिस्ट विचारधारा से ही संबंध रखते हैं। कॉलेजियम का भाई भतीजावाद और चेलापंती तो सबको पता है लेकिन यह भाई भतीजावाद और चेलामपंथी व्यापक रूप से कांग्रेसी या कम्युनिस्ट विचारधारा से संबंधित व्यक्तियों के लिए ही है। जो व्यक्ति कांग्रेस की या कम्युनिस्ट विचारधारा को नहीं मानता या फिर दूसरे शब्दों में कहें कि इस देश की भारतीय सनातनी संस्कृति को मानने वाले व्यक्ति को भारत में सीजीआई बनने का मौका नहीं मिल पाता है।


व्यक्ति अनिवार्य रूप से नास्तिक होना चाहिए। खुली विचारधारा का होना चाहिए और कांग्रेस और कम्युनिस्टों की विचारधारा यही है। अगर वह क्रिश्चियन है तो भी वो बन सकता है।मजहबी मुस्लिम है तो भी बन सकता है। लेकिन अगर वो प्रैक्टिसिंग हिंदू है, सनातनी है तो फिर वो सीजीआई नहीं बन सकता। अब लोग सवाल करेंगे कि चंद्रचूड़ के बारे में आप क्या कहेंगे? चंद्रचूड़ प्रैक्टिसिंग हिंदू नहीं थे। उन्होंने जो कुछ राम मंदिर के फैसले को लेकर बातें की थी वो एक साइड में मानी जा सकती है। अन्यथा उनके पिता जैसा हमने बताया भारत के इतिहास में सबसे ज्यादा लंबे समय तक के लिए सीजीआई रहने वाले व्यक्ति थे जो 7 साल तक इस देश के सीजीआई बने रहे। 78 से लेकर 85 तक उनके बेटे होने की वजह से डीवाई चंद्रचूड़ को यह मौका मिला था। यानी जो व्यक्ति इस देश की संस्कृति के खिलाफ नहीं है उसको ना कम्युनिस्ट पसंद करते हैं ना कांग्रेस पसंद करती है। कांग्रेस हमेशा ऐसे लोगों को बढ़ावा देती है जो भारतीय संस्कृति, भारतीय सोच, भारतीय नैतिकता को ताव पर रखते हो। उसके खिलाफ बोलने का काम करते हो। उसके खिलाफ फैसले लेते हो। ताजा उदाहरण  जस्टिस सूर्यकांत को आप ले सकते हैं। इनकी जो टिप्पणियां हैं, इनके जो फैसले हैं, इनकी जो सोच है, वो किसी भी तरीके से भारतीय संस्कृति के अनुरूप नहीं है। ताजा इनका एक भाषण है जब वो जो परिवार विवाह की एक संस्था होती है उस पर टिप्पणी करते हुए नजर आते हैं और उन्होंने यह कहा कि हजारों साल से विवाह के द्वारा महिलाओं को गुलाम बनाने की एक प्रक्रिया चली आ रही है। यानी जिस पारिवारिक संस्था को दुनिया की सबसे बड़ी ही दार्शनिक तौर पर सोची समझी संस्था माना जाता है। उसी को सूर्यकांत ने महिलाओं को गुलाम बनाने की संस्था बताने की कोशिश की। क्योंकि परिवार का सबसे बड़ा आधार होता है विवाह। विवाह के द्वारा ही परिवार की संरचना आगे बढ़ती है। उसी विवाह को विदेशी सोच के आधार पर उन्होंने कह दिया कि ये तो महिलाओं को गुलाम बनाने की प्रथा है। यानी आप अगर देखें तो चमचूर के जो फैसले हैं जिसमें उन्होंने समलैंगिक विवाहों की वकालत की थी। जो व्यक्तिगत स्वतंत्रता के नाम पर विदेशी कल्चर को इस देश में लागू करने के लिए बहुत ज्यादा अग्रसर दिखाई दिए थे। उसी तरीके से आप सीजीआई गवई को देख सकते हैं जो कोर्ट में साफ कह देते हैं कि जाओ अपने ईश्वर से जाकर कहो कि वो आपकी सहायता करें। यह सब वही सोच है जो कम्युनिस्टों और कांग्रेसियों की होती है। यानी कांग्रेस एक तरीके से सत्ता से तो बेदखल हो गई लेकिन सत्ता के जो तीन अंग कहे जाते हैं न्यायपालिका, कार्यपालिका और विधायिका। कार्यपालिका और विधायिका में कांग्रेस का एक तरीके से सूपड़ा साफ हो चुका है। लेकिन कांग्रेस अभी भी जो न्यायपालिका की सत्ता है उसमें कंट्रोल किए हुए हैं। देखने को तो ये जज होते हैं ये अलग-अलग क्षेत्रों से आते हुए दिखते हैं। लेकिन इनकी जो जड़े हैं वो कांग्रेसी नेताओं तक ही पहुंचती हुई नजर आती है। या तो ये डायरेक्टली कांग्रेसी नेताओं के भाई भतीजे बेटा बेटी होते हैं या फिर उनके चेले चपाटे होते हैं। आज अगर भारत के सुप्रीम कोर्ट के 34 जजों की कुंडली खंगाली जाए तो उनमें से 20 से ज्यादा ऐसे हैं जो सीधे तौर पर कांग्रेसी नेताओं के बेटा बेटी भाई भतीजे वगैरह हैं या फिर उनके द्वारा बनाए हुए जजों के भाई भतीजे वगैरह है या फिर उनके चेले चपाटे हैं। आने वाले जो छह सीजीआई हैं वो भी उसी फेयरिस्त में हैं। यानी 40 हो गए हैं। पांच छह और होने वाले हैं।


अगर इसको नहीं रोका गया, इसके खिलाफ जनता में जागृति नहीं आई। जनता ने इसका विरोध नहीं किया, तो आप यह मानकर चलिए कि आने वाले चार पांच सालों में इस देश के अस्तित्व पर ही खतरा उत्पन्न हो जाएगा। क्योंकि जिस तेजी के साथ अब सुप्रीम कोर्ट के जज भारतीय संस्कृति पर लगातार चोट कर रहे हैं। आपकी आस्था पर लगातार चोट कर रहे हैं। आपकी एकता अखंडता पर लगातार चोट कर रहे हैं। भाषा के नाम पर वो उन लोगों को संरक्षण दे रहे हैं। या फिर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर ऐसे लोगों को संरक्षण देते हुए नजर आ रहे हैं जो इस सनातन को मिटा देना चाहते हैं। इस सनातनी संस्कृति के तार-तार कर देना चाहते हैं। इसको कमजोर कर देना चाहते हैं। क्योंकि पूरी दुनिया यह किसी भी हालत में स्वीकार नहीं कर पा रही है कि ये जो भारतीय संस्कृति है ये 7000 सालों से लगातार चली आ रही है। दुनिया की जितनी भी दूसरी सभ्यताएं हैं कोई दो ढाई हज़ार साल पुरानी है, कोई 1500 साल पुरानी सोच है, कोई 500, कोई 1000 इस तरीके से वहां स्थितियां हैं। और वो जानते हैं कि भारतीय संस्कृति का जो सबसे बड़ा आधार है, सनातनी परंपरा का जो सबसे बड़ा आधार है, वो परिवार है और परिवार को तोड़ने के लिए आए दिन वो ऐसे फैसले देते रहते हैं। चाहे 498 ए वाले मामले हो या फिर समलैंगिकता के मामले हो, व्यक्तिगत स्वतंत्रता के नाम पर जो वो करने जा रहे हैं। रेप के मामलों में वो जिस तरीके की टिप्पणियां करते हैं। अपराधियों को छोड़ने के लिए वो व्यक्तिगत गरिमा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के जिस तरीके से हवाले देते हैं। जिस तरीके से विदेशी विचारकों के विचारों को देश में थोपने की कोशिश करते हैं। परिणाम यह होगा कि भारतीय अपराधी दुष्ट प्रवृत्ति के जो लोग हैं बेईमान चोर उचक्के आतंकवादी सब के सब जमानत पर रिहा हो जाएंगे और इसके साथ-साथ क्षेत्रवाद के भी कई सारी बुराइयां देखने को मिलती है। अभी जो जस्टिस सूर्यकांत भारत के सीजीआई बनने वाले हैं। इन्होंने अपने जिले से आने वाले एक अपराधी मुख्यमंत्री को जिस पर भ्रष्टाचार के बड़े आरोप थे उसको ईडी के मामले में जमानत दे दी थी। जी हां आप बिल्कुल सही समझे। मैं केजरीवाल की बात कर रहा हूं। केजरीवाल और सूर्यकांत शर्मा दोनों ही हिसार जिले से आते हैं। यहां सीधे तौर पर जिले का या क्षेत्रवाद का मामला दिखाई देता है। क्योंकि ईडी के मामलों में पहले जमानत नहीं दी जाती थी। लेकिन सूर्यकांत ने केजरीवाल को ईडी के मामले में भी जमानत देने का काम किया। यह सिर्फ और सिर्फ कांग्रेसी और कम्युनिस्ट विचारधारा को आगे बढ़ाने में ही अपना एकमात्र धेय मानकर चलते हैं और उसी को यह पूरा करने की कोशिश करते हुए नजर आते हैं।


 पिछले 40 जो सीजीआई हुए हैं उनके नामों में अंतर देखा जा सकता है। वो किस जिले से किस प्रदेश से आए हैं इसमें अंतर देखा जा सकता है। लेकिन उन सबकी कार्य करने की जो प्रणाली रही है, जो सोच रही है, जो कार्य करने के तरीके रहे हैं, वो लगभग एक जैसे हैं। यानी कि किसी भी हालत में कांग्रेसी कम्युनिस्ट विचारधारा या उसके संरक्षण में पलने वाली जो परिवारवादी पार्टियां हैं उनके किसी भी व्यक्ति का अहित नहीं होना चाहिए। उसको सजा नहीं होनी चाहिए। चाहे उसने कितना भी जघन्य अपराध क्यों ना किया हो। दूसरी तरफ इन्होंने जजों को तो इम्यूनिटी दे ही रखी है। लेकिन कोर्ट में यह जमानत के नाम पर नेताओं को भी इम्यूनिटी प्रदान कर देते हैं। उनको भी राहत देने का काम करते हैं। नया खेल और शुरू हुआ है कि अब भारत में वकीलों के खिलाफ भी बहुत ज्यादा कड़े एक्शन कोई एजेंसी नहीं ले पाएगी। इस तरीके के फैसले भी अब कोर्ट देने लगी है। यानी इस देश में अगर कोई वकील है, कोई जज है तो उसके खिलाफ कुछ हो नहीं सकता। और अगर वो जज वकील नहीं है, कांग्रेसी, कम्युनिस्ट या परिवारवादी पार्टियों से संबंध रखता है तो भी वो हर अपराध को करने के बाद बच जाएगा।


 यही इस देश की जो सी कंपनी इस देश की जुडिशरी को चला रही है उसका एकमात्र एजेंडा है और इसको अगर रोकना है तो देश की जनता को जागना पड़ेगा। कॉलेजियम को खत्म करना ही पड़ेगा। एनजेएसी को दोबारा लाने के लिए सरकार का साथ देना पड़ेगा और उसके लिए जनता अगर रेफरेंडम के द्वारा अपनी राय व्यक्त करती है तो यह सी कंपनी फिर उसका सामना नहीं कर पाएगी। सरकार का पूरा प्लान है कि वह एनजेसी के केस को दोबारा से सुप्रीम कोर्ट में रखें। लेकिन सुप्रीम कोर्ट पर जब तक जनता का दबाव नहीं बनेगा तब तक एनजेसी के मामले में यह सही फैसला नहीं करेंगे। एक और बड़ी बात पिछले 52 सालों में भारत के संविधान में सैकड़ों अमेंडमेंट्स किए गए हैं और उन अमेंडमेंट्स के द्वारा देश के संविधान को तोड़ने मरोड़ने और मनमाने ढंग से व्याख्या किया गया है। इस सब के लिए दो ही लोग जिम्मेदार हैं। या तो कांग्रेस की सरकारें या फिर कांग्रेस के द्वारा बनाए हुए कॉलेजियम के जज यानी सी कंपनी ने ही इस देश के संविधान को जो मूल रूप में था पूरी तरीके से बदल कर रख दिया है। आज जो कुछ संविधान के नाम पर ये हो हल्ला करते हैं। वास्तव में यही लोग जिम्मेदार हैं संविधान को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने के लिए। चाहे राहुल गांधी हो या फिर सीजीआई जैसे लोग हो क्योंकि कोर्ट ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है जो कि असंवैधानिक तौर पर और कांग्रेस ने संवैधानिक तौर पर के नाम पर जिस तरीके से पार्लियामेंट को हाईजैक करके पूरी तरीके से संविधान को बदल दिया था वही आगे बढ़ाया कॉलेजियम ने या फिर कॉलेजियम से आए हुए जजों ने। उस फहरिस्त में पारदीवाला, सूर्यकांत जैसे लोगों के नाम लिए जा सकते हैं। पारदीवाला ने किस तरीके से राष्ट्रपति को आदेश देने का काम किया था। जो अधिकार क्षेत्र में ही नहीं था सुप्रीम कोर्ट के उसी तरीके से कांग्रेस की जो प्रधानमंत्री थी इंदिरा गांधी उसने पूरा का पूरा संविधान बदल दिया था। तो इस सबको अगर रोकना है, देश को बचाना है, देश में न्याय के शासन की स्थापना करनी है, तो इस कॉलेजियम को हटाने के लिए देश के आम नागरिकों को एकजुट होना पड़ेगा। अपनी राय व्यक्त करनी पड़ेगी और यह जो सी कंपनी का एक अघोषित तानाशाही इस देश पर जुडिशरी के माध्यम से चल रही है, इसको तहसनहस करना ही पड़ेगा।

Jai Hind


via Blogger https://ift.tt/lManhIm
November 02, 2025 at 08:40PM
via Blogger https://ift.tt/nJCgWIE
November 02, 2025 at 09:13PM
via Blogger https://ift.tt/CZEURqk
November 02, 2025 at 10:13PM
via Blogger https://ift.tt/fdu8qgQ
November 02, 2025 at 11:13PM

No comments:

Exclusive research on PM Narendra Modi Govt Spending on SC ST OBC & Muslims of India- 2014-2026

Exclusive research on PM Narendra Modi Govt Spending on SC ST OBC & Muslims of India- 2014-2026 Exclusive research on PM Narendra Modi ...