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Monday, November 3, 2025

सुप्रीम कोर्ट ने आरोप तय करने के समय सीमा पूरे भारत में एक गाइडलाइंस बनाने का सुझाव दिया

 


राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने पिछले हफ्ते लालू यादव, राबरी देवी, तेजस्वी यादव समेत 14 एक्यूज़्ड के ऊपर चार्ज फ्रेम कर दिया। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्देश जारी किया है कि अब चार्ज फ्रेम जिस मामले में चार्ज फ्रेम होना है उसमें देरी ना किया जाए। इसके लिए एक रूल बनाया जाए। क्या इस देश में और कोई वकील नहीं है? सिबल सिंह भी, प्रशांत भूषण इन सब के अलावा इस खेल को समझने की कोशिश की। क्या सुप्रीम कोर्ट को ये समझ में आने लगा कि इस देश की आम जनता के दिमाग में हो गया है कि इस देश की सुप्रीम कोर्ट सिर्फ सफेद पोषणों और फिक्सरों की बात सुनती है?भारत की सबसे बड़ी अदालत गजब मूड में है। वो कह रही है कि चार्जेस फ्रेम मतलब आरोप तय करने में इतनी देरी क्यों लग रही है? दरअसल इस देश में सफेद पोषों को डर ही नहीं लगता। पांच मामले का सदायाफ्ता अपराधी है लालू यादव। छुट्टा घूम रहा है। बेल पर चल रहे हैं राहुल गांधी, सोनिया गांधी, तेजस्वी यादव। लेकिन बेल पर चलने वाले इन लोगों को कानून से कोई डर नहीं लगता। क्योंकि इन सबको लगता है कि वो सालों तक इस मामले को टाल सकते हैं। देखिए ना चार्जेस फ्रेम हो गए। आरोप तय हो गए लालू के पूरे कुबे पर। राव रेवेन्यू कोर्ट ने पिछले हफ्ते लालू यादव, राबरी देवी, तेजस्वी यादव समेत 14 एक्यूज़्ड के ऊपर चार्ज फ्रेम कर दिया। जो ही चार्ज फ्रेम हुआ कोर्ट ने कहा रेगुलर हियरिंग होगी इन सबकी। लालू अपने वकील के माध्यम से हाई कोर्ट चला गया और यह कहने के लिए कि माय लॉर्ड रेगुलर हियरिंग ना होने दीजिए। रेगुलर हियरिंग होने से हम राजनेता हैं। चुनाव का समय है और हमारा स्वास्थ्य भी ठीक नहीं है। रेगुलर हियरिंग नहीं होना चाहिए। क्योंकि लालू को ये लगता है कि रेगुलर ये हियरिंग यदि हुई तो महीने डेढ़ महीने के अंदर बेटा भी सजायाफ्ता अपराधी हो जाएगा। तेजस्वी प्रताप, तेज प्रताप यादव ये सब के सब अपराधी सजायाफ्ता हो जाएंगे और बिहार में चुनावी करियर खत्म हो जाएगा तो लालू हाई कोर्ट पहुंच गया।

चार्जेस फ्रेम आज ही होना था सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ। लेकिन इस मामले में तारीख लग गई। सोचिए बेल पर चल रहे बेईमानों का गिरोह बिहार चुनाव में बवाल काट रहा है और प्रधानमंत्री ने कहा कि ये बेल पर जो होते हैं लोग गांव देहात में ऐसे लोग मुंह नहीं दिखाते छुपा रहते हैं घर में छुपे रहते हैं लेकिन इन बेईमानों को देखिए ये बेल पर चल रहे हैं और ये हमें गाली दे रहे हैं। देश के प्रधानमंत्री को गाली सफेदपश अपराधी दे रहा है। सजायाफ्ता अपराधी दे रहा है क्योंकि उसे कानून से डर ही नहीं लगता क्योंकि इस देश में सुप्रीम कोर्ट को के बारे में लोगों का यह मानना हो गया है कि ट्रायल कोर्ट भले ही सजा दे दे इस देश की सुप्रीम कोर्ट में सिबल और सिंघियों के माध्यम से सफेदपश मौज करने लगेंगे। इस देश में सुप्रीम कोर्ट को बेल कोर्ट बना दिया गया है। भारत की महामहिम राष्ट्रपति ने उस समय के चीफ जस्टिस के सामने कई बार कहा सुप्रीम कोर्ट को बेल कोर्ट मत बनाइए। आम आदमी की कोर्ट बनाकर रखी। लेकिन इस देश में सुप्रीम कोर्ट बेल कोर्ट बन गया तो सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी लगा के कहा गया कि माय लॉर्ड आपको शरिया कोर्ट कहा जाता है। आपको सुप्रीम कोठा कहा जाता है। हद ये हो गई कि जब भारत के सबसे बड़ बड़ी अदालत के सबसे बड़े मिलड के कोर्ट में जूते चल गए। और जूता इसलिए चला क्योंकि मिलड बड़बोले हो गए थे। भारत के मुख्य न्यायाधीश एक याचिका की सुनवाई कर रहे थे और उस याचिका में एक अजंता एलोरा वाले मंदिर वहां जो विष्णु के भगवान के जो मूर्ति थे उस पर एक याचिका थी तो उनके अंदर का सनातन घृणा हिंदुत्व से घृणा जग गया और उन्होंने कह दिया कि जाओ अपने भगवान से कि इंसाफ मांग लो यदि इतने बड़े भक्त हो फिर क्या था सीजीआई के ऊपर और जूता फेंक दिया गया। जूता प्रकरण से जो षड्यंत्र किया गया वो षड्यंत्र भी खुल गया। क्यों खुल गया? क्योंकि जब कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट की अर्जी लगाई गई तो सुप्रीम कोर्ट ने कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट सुनने से इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट अपना अपमान पर इस याचिका को खारिज कर देना बताता है कि सुप्रीम कोर्ट को क्या डर लगने लगा कि उसकी कलई खुल रही है। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने एक निर्देश जारी किया है कि अब चार्ज फ्रेम जिस मामले में चार्ज फ्रेम होना है उसमें देरी ना किया जाए। इसके लिए एक रूल बनाया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने आरोप तय करने के समय सीमा पूरे भारत में एक गाइडलाइंस बनाने का सुझाव दिया। अब जरा समझने की कोशिश जिएगा तो आप चौंक जाइएगा। जरा खेल को समझिए। परत दर परत हम आपको इस खेल को समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि दरअसल इस देश में सुप्रीम मिल ने खेल क्या किया है। और यह डर कहां से है? यदि यह डर है तो सोचिए यह डर अच्छा है। ऐसे डर होने चाहिए। और मैं क्यों कह रहा हूं ये डर अच्छा है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब ये गाइडलाइन बने कि लंबे समय तक कोई मामला टले नहीं। ट्रायल कोई टाल नहीं सके। खेल गजब है साहब। यह सब तब हो रहा है जब इस देश में सफेद पोष जब चाहे तारीख ले लेते हैं। अब जरा समझने की कोशिश कीजिएगा। नेशनल हेराल्ड केस में 30 अक्टूबर को सुनवाई होनी थी। 30 अक्टूबर को सोनिया गांधी राहुल गांधी के खिलाफ नेशनल हेराल्ड केस में चार्ज फ्रेम होना था। मतलब चार्ज फ्रेम होते ही सोनिया गांधी को रेगुलर कोर्ट में बतौर एक्यूज कटघरे में खड़ा होना होगा। ये भारत के इतिहास में अलग चीज होगा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी कटघरे में खड़े होंगे क्योंकि जो ही चार्जेस फ्रेम हो जाता है आप अदालत की नजर में प्रथम दृष्ट्याय एक्यूज हो जाते हैं और फिर आपको कटघरे में खड़ा होना पड़ता है।

सोनिया गांधी कटघरे में खड़ा ना हो पाए इसलिए नेशनल हेराल्ड केस को लंबे समय से टाला जाता है। कई बार पब्लिक को गुस्सा आता है कि सरकार कर क्यों नहीं रही है? सोनिया गांधी के खिलाफ सख्ती क्यों नहीं करती? अदालत में ही खेल हो जाता है। नेशनल हैडल्ड मामले में सुनवाई फिर टली। यह टलती रहती है सुनवाई साहब। ये आज का मामला जब हम बात कर रहे हैं। आज चार्जेस फ्रेम हो जाना था और हमने आपको दो दिन पहले इसका विश्लेषण किया था कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी की के आरोप तय होते ही रेगुलर इनको अब कोर्ट में पेश होना होगा और कुछ ही दिनों बाद इन्हें सजायाफ्ता अपराधी हो जाएगी। सोनिया गांधी। सजायाफ्ता अपराधी होते ही संसद की सदस्यता चली जाएगी राहुल गांधी की। सोनिया गांधी की तो राहुल और सोनिया की संसद की सदस्यता ना जाए इसलिए इस नेशनल हैरांड मामले को लगातार टाला जा रहा है। सालों से इतना मामला अब तक चार्ज फ्रेम ना हो पाया है। आज चार्ज फ्रेम होना था फिर सुनवाई टल गई। ये कब तक टलेगी जरा और देखिए सोचिए साहब। लालू यादव के खिलाफ आईआरसीटीसी घोटाला मामले में आरोप तय हो गए। मतलब जो लालू यादव अंबानी का भोज खाने के लिए लाइन में लग के पूरा कुवा चला गया था। ये व्हील चेयर पर पहन के भोज खाने और गिफ्ट लेने चला गया था लालू यादव। अपनी बीवी बच्चों के साथ उस मामले में जब ट्रायल कोर्ट ने इनके ऊपर चार्जेस फ्रेम किए तो लालू यादव व्हीलचेयर पर भी कोर्ट पहुंचे। राबरी के साथ बेटों के साथ रोजाना ट्रायल ना चले मिलट आईआरसीटी घोटाला में केस में लालू राबरी ने की राहत की मांग अब देखिए जरा खेल नेशनल है केस में डेट ले लिया चार्ज फ्रेम नहीं होने दिया सोनिया गांधी के वकीलों ने राहुल गांधी वकीलों ने और इसके ऊपर जब चार्ज फ्रेम हो चुका है

सजायाफ्ता अपराधी राहुल गांधी लालू यादव पहले से हैं और जब चार्ज फ्रेम हो गया राबरी देवी तेजस्वी यादव निषा भारती इन सब पर जब चार्जेस फ्रेम हो गए तो अब ये कह रहा है कि माय लॉर्ड रोजाना ट्रायल नहीं होना चाहिए रोजाना ट्रायल ना चले मिलॉर्ड आईआरसीटीसी घोटाला केस में लालू राबड़ी की राहत की मांग क्यों रोजाना नहीं चलनी चाहिए क्योंकि वकील कह रहा है हम 10 और केस में होते हैं इसीलिए हमें रोजाना ट्रायल नहीं चलना चाहिए क्या इस देश में और कोई वकील नहीं है सिबल सिंह भी प्रशांत भूषण इन सब के अलावा इस खेल को समझने की कोशिश कीजिए दरअसल ये खेल अब पब्लिक में खुलने लगा है कि क्या सुप्रीम मिल लॉट के साथ मिलीभगत होती है। फिक्सरों के साथ मिलीभगत की वजह से ही सोनिया को सालों से सजा नहीं हो पा रही है। राहुल को सजा नहीं हो पा रही है। और ये बेल पर चल रहे बेईमानों की ये टोली भारत के प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाते हैं। अब जरा इस तीसरे पक्ष को सोचिए। अब सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? ट्रायल में देरी। सुप्रीम कोर्ट ने आरोप तय करने के लिए समय सीमा पूरे भारत के लिए गाइडलाइन बनाने की मांग की। कोर्ट ने बुधवार संकेत दिए हैं कि पूरे भारत के लिए गाइडलाइन जारी किया जा सकता है। ट्रायल कोर्ट क्रिमिनल क्रिमिनल ट्रायल में कितने समय में आरोप तय हो इसके लिए पूरी कोर्ट ने तैयारी कर ली है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया ये नए-नए जजों से उम्मीद लोगों की बढ़ रही है। क्या सुप्रीम कोर्ट आम आदमी में साख सही में बना लेगा? पुलिस ने इस मामले में 30 सितंबर 2024 को चार्जशीट फाइल की थी। सोचिए 2024 में 30 सितंबर को चार्जशीट फाइल हो गए और अपनी बेल याचिका में कुमार ने तर्क दिया कि उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है और इस पूरे मामले में चार्जेस फ्रेम नहीं हो पाए। यह तो मान लीजिए एक साल पुराना मामला है। सालों से ऐसे मामले में चार्जेस फ्रेम नहीं हो पाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे मामले में कहा है कि देश भर में एक गाइडलाइन बनाया जाए ताकि चार्जेस फ्रेम आसानी से हो जाए। भारत की सबसे बड़ी अदालत इस बात को लेकर बेहद चिंतित है कि इस देश में सफेद पोस्ट बड़े-बड़े लोग अदालत की सुनवाई टालवा टलवाते हैं। चार्जेस फ्रेम नहीं हो पाता। प्रभावशाली वकीलों की वजह से, फिक्सरों की वजह से यह पूरा केस लंबा खींचता है और यही वजह है कि इस देश के सफेद पोषों को कानून से डर नहीं लगता। उन्हें लगता है कि 100 एफआईआर हो गई तो क्या हो गया? आजम खान के खिलाफ 100 के आसपास एफआईआर है। आज आप जाकर के आजम खान को इसलिए डर लगने लगा है क्योंकि उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ का शासन है। योगी मुख्तार अंसारियों, अतीक हमदों को मिट्टी में मिला चुके हो। उत्तर प्रदेश को छोड़ के हर राज्यों का ट्रायल रेट एकदम से नगण्य है। लालू यादव का मामला 1990 के का है और चार्ज फ्रेम होते 2010 11 हो गए। 2013 में लालू को सजा मिली। 23 साल से ज्यादा का समय लग गया इस पूरे मामले में और यही इसी इसी बात को लेकर के सुप्रीम कोर्ट ने चिंता व्यक्त की है और कहा है कि हम गाइडलाइन बनाना चाहते हैं। तो क्या सुप्रीम मिलड जिनने इस देश के अदालतों को एक मजाक का पात्र बना दिया उन जजों को इस जूता प्रकरण के बाद ये लगने लगा है कि जनता में गुस्सा ज्यादा है। क्योंकि इस देश के वकीलों ने कुछ याचिका दाखिल करके कहा कि आपको शरिया कोर्ट कहा जाता है। आपको सुप्रीम कोठा कहा जाता है। पूरे देश में सुप्रीम कोर्ट को लेकर के एक गजब की नाराजगी है। क्या सुप्रीम कोर्ट को देश की आम जनता की नाराजगी समझ में आने लगा है? क्या सुप्रीम कोर्ट को समझ में आने लगा कि इस देश की आम जनता के दिमाग में हो गया है कि इस देश की सुप्रीम कोर्ट सिर्फ सफेद पोषों और फिक्सरों की बात सुनती है। यही वजह है कि इन सफेद पोषों के ऊपर जो अरबों का घोटाला है वो सिर्फ उसकी तारीखें लगती है। जैसे नेशनल हेराल्ड को केस में सोनिया और राहुल ने फिर तारीखें ले ली। जैसे चार्ज फ्रेम होने के बाद भी राहुल गांधी लालू प्रसाद यादव कह रहे हैं कि नहीं हमें रोज हियरिंग मत करा करने दीजिए। इस ये खेल बेहद खतरनाक हो चुका हुआ है और देश की जनता को समझ में आ गया है कि कानून


का डर सिर्फ आम आदमी को लगता है। इस लुटेरे सफेदपश माफियाओं को इस देश के नेताओं को कानून का कोई डर नहीं लगता। दरअसल सुप्रीम कोर्ट की साख पिछले कुछ दिनों में जबरदस्त डैमेज हुई है। ये साख सुधारने का एक प्रयास लगता है। यदि सुप्रीम कोर्ट के जज इस साख को सुधार पाए। यदि सुप्रीम कोर्ट ने यह गाइडलाइन जारी कर दिया कि देश भर में चार्जेस फ्रेम इस समय सीमा तय होगी। कमाल की बात है। नए कानून में सरकार ने व्यवस्था कर दी है। लेकिन आज की तारीख में भी जिस सुप्रीम कोर्ट जिस तरह से इनको तारीख दर तारीख देती है। इनको जिस तरह से मौज दिलाती है इन सफेद पोषों को सिब्बलों और सिंघियों के माध्यम से उससे लगता है कि सुप्रीम खेल जबरदस्त रहा है। अब साख समाप्ति के भय में खौफ में सुप्रीम कोर्ट को सब समझ में आने लगा है और उम्मीद की जानी चाहिए कि आने वाले दिनों में बहुत जल्द चार्जेस फ्रेम सोनिया और राहुल पर होंगे। वो सलाखों के पीछे होंगे। उनकी संसद की सदस्यता जाएगी और देश को लगने लगेगा कि अब यह कानून हमारे और आपके सफेद पोशों के लिए सबके लिए बराबर है। इस देश को इस बात का इंतजार करना है।

अभी सुप्रीम कोर्ट के मिजाज से लगता है कुछ बदलाव होने वाला है। क्योंकि इस देश में एक अजीब सा माहौल है। हम और आप पुलिस के दरवाजे पर पहुंचने से सहरन हो जाती है। एफआईआर दर्ज होते ही लगता है जिंदगी कैसे कटेगी? यदि किसी आम आदमी को हो जाए एक बार अदालत के चक्कर में लगता है। लोग कहते हैं कि भगवान बचाए आपको डॉक्टर और कोर्ट के चक्कर से। ये सामान्य सोच है। एक बार आप डॉक्टर के चंगुल में फंस गए तो चूसते चले जाएंगे। और यदि कोर्ट के चक्कर में फंस गए तो बर्बाद हो जाएंगे। लेकिन इन सफेदपशों को डर ही नहीं लगता। क्योंकि इनके बेल के लिए अपने पैसे नहीं देने पड़ते। इन्हें अदालत में किसी सिबल और सिंवी के लिए चौन्नी खर्च नहीं करने पड़ते। उनका घर द्वार नहीं बिकता। इसीलिए उन्हें कोई खौफ नहीं होता। क्योंकि इन्हें कुछ होना नहीं है। ये इन्हें पूरा लगता है कि इनकी पूरी जिंदगी बीत जाएगी। इन्हें सजा नहीं हो पाएगी। ट्रायल में तारीख दर तारीख लेते रहेंगे। लोअर कोर्ट ने यदि सजा दे भी दी तो हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से बेल पा लेंगे। फिर उसके बाद खेल खेलते रही। लालू पांच मामले का सजायाफ्ता अपराधी है और बेल पर छुट्टा घूम रहा है क्योंकि हाई कोर्ट में सिर्फ तारीख ली जा रही है। हाई कोर्ट ने पांच में से एक भी मामले में फाइनल जजमेंट नहीं दिया है। यदि हाई कोर्ट का जजमेंट

 आजाए तो लालू को दोबारा जेल हो जाए। ट्रायल कोर्ट से इन पांच मामले के सजा के भी क्या मायने रह गए। तो मिलडो को समझना पड़ेगा कि सिर्फ चार्जेस फ्रेम हो जाने से नहीं होगा। ये सख्त रूल बनना पड़ेगा कि सजा मतलब सजा होनी चाहिए। सिर्फ बुढ़ापे का बहाना, बीमारी के बहाने से इतने बड़े अपराध में मौज नहीं होनी चाहिए। इससे साख गिरती है सुप्रीम कोर्ट की। अदालत के पास साख के अलावा कुछ होता नहीं है। मिलडो को अपनी गिरते हुए साख की वजह से चिंता हुई है और अब उन्होंने हंटर उठा दिया है। उम्मीद की जाए इस हंटर के खौफ में सफेद पोश के अंदर सिहरण होगी। देश में कानून का राज होगा और हर किसी को लगेगा कि अब माफियों में भी सफेद पोशों में भी डर समा रहा है।

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