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Friday, May 9, 2025

बड़ी खबर- सुप्रीम कोर्ट ने इस देश में अवैध तरीके से रहने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को वापस जाने का आदेश दे दिया है

  इस वक्त भारत पाकिस्तान के बीच जो जंग जैसे हालात है उस पर सबकी नजर है। सारी मीडिया इसी को लेकर खबरें दिखा रही है कि पाकिस्तान के कितने जहाज भारत ने मार के गिराए। पाकिस्तान ने रात में अटैक कैसा किया। लेकिन इस बीच देश में और भी कुछ खबरें हो रही है। एक खबर सुप्रीम कोर्ट से आई है और सुप्रीम कोर्ट से यह है। खबर इस देश में घुसे हुए घुसपैठियों और रोहिंग्याओं से जुड़ी हुई है। जी हां, खबर यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस देश में अवैध तरीके से रहने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को वापस जाने का आदेश दे दिया है। और सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भारत में सिर्फ भारतीय रहेंगे। घुसपैठियों के लिए, रोहिंग्याओं के लिए इस देश में कोई जगह नहीं है। इस देश के कुछ वकील इन रोहिंग्याओं की तरफदारी करते हुए सुप्रीम कोर्ट में पहुंचे थे। उन्होंने कहा था कि यूनाइटेड नेशंस की ओर से इनको शरणार्थियों के कार्ड दिए गए हैं। इसलिए इनको भारत में रहने दिया जाना चाहिए। इनको भारत में जगह दी जानी चाहिए। इनको भारत में शरण दी जानी चाहिए। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन वकीलों को दो टूक कह दिया है कि भारत कोई धर्मशाला नहीं है जो कोई भी आकर आकर यहां रहने लगेगा। भारत सिर्फ भारतीयों का है और यहां सिर्फ भारतीय रह सकते हैं। क्या है पूरा मामला? तफसील से आपको बताते हैं। दरअसल सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को गुरुवार के दिन दिल्ली से रोहिंग्या मुसलमानों के जो निर्वासन को लेकर है उस पर रोक लगाने से इंकार कर दिया गया था। क्योंकि कई रोहिंग्याओं को यहां डिटेक्ट किया गया है और जो यहां पर अवैध तरीके से रह रहे हैं, इललीगल तरीके से रह रहे हैं, उनको देश से बाहर निकालने की बात हो रही थी। जिस पर कुछ वकील सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए और उन्होंने कहा था कि रोहिंग्या जो है म्यांमार में जो कथित तौर पर अत्याचार हो रहा है, नरसंहार हो रहा है उसकी वजह से वो भारत में जो है शरण लेने आए हुए हैं और यह शरणार्थी है। इसलिए सुप्रीम कोर्ट से इस याचिका में अपील की गई थी कि उन्हें भारत में रहने का अधिकार दिया जाए। यह याचिका न्यायमूर्ति सूर्यकांत दीपांकर दत्ता और एन कोटेश्वर सिंह की पीठ ये इस याचिका पर सुनवाई कर रही थी और उन्होंने कहा इस पीठ ने कहा कि भारत के संविधान के मुताबिक देश में रहने का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को है और विदेशी नागरिकों के मामले में विदेशी धिनियम के तहत कारवाई की जाएगी। पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंजालविस और वकील प्रशांत भूषण की ओर से दायर याचिकाओं पर विचार करते हुए कहा कि मामले की विस्तृत सुनवाई 31 जुलाई को की जाएगी। लेकिन इन दोनों वकीलों को यह बता दिया गया है कि भारतीय संविधान में जो लिखा गया है उसमें किसी विदेशी नागरिक के यहां जगह नहीं है। यहां सिर्फ भारत के लोग रह सकते हैं। और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अधिवक्ता जो है कानू अग्रवाल उन्होंने कोर्ट को यह बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने असम और जम्मू कश्मीर में रोहिंग्या मुसलमानों के निर्वासन पर पहले भी रोक लगाने से इंकार कर दी है। केंद्र सरकार ने उस समय राष्ट्रीय सुरक्षा पर इनको गंभीर खतरा जताया था और तब सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई थी। इस पर प्रशांत भूषण और बोंजालवी साहब ने यह कहा कि रोहिंग्या समुदाय को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग यानी कि यूएचसीआर ने शरणार्थी के रूप में मान्यता दी है। उनके पास शरणार्थी कार्ड भी है। ऐसे में उन्हें भारत में रहने और जीवन जीने का अधिकार है। गोंजाल्विस वही वकील हैं जो साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन में मुसलमानों द्वारा जलाए गए हिंदुओं के मामलों मुसलमानों की पैरवी कर रहे हैं और जकिया जाफरी के भी वकील हैं। अब सॉलिसिटर जनरल ने इसका जवाब देते हुए कहा कि भारत यूएन जो रिफ्यूजी कन्वेंशन है 1951 का उस पर भारत ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं और एन यूएसीआर की ओर से दी गई शरणार्थी मान्यता भारत के लिए बाध्यकारी नहीं है। यहां वो कार्ड लागू नहीं होता है। उन्होंने आगे कहा कि रोहिंग्या विदेशी नागरिक है और सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि निर्वासन से सुरक्षा का अधिकार भारतीय नागरिकों को निवास अधिकार के तहत मिला हुआ है। तो पीठ ने अब स्पष्ट कर दिया है कि अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार रोहिंग्या प्रवासियों पर लागू होता है। लेकिन वे सब के सब विदेशी है। इसलिए उनके मामले में विदेशी अधिनियम जो है उसके अनुसार कानूनी कारवाई की जाएगी क्योंकि वो भारत के नागरिक नहीं है। इसलिए भारत के नागरिक में जो संविधान में लिखित जिस बात की आप जिक्र कर रहे हैं वो इन पर लागू नहीं होता है। तो उन्हें घुसपैठिया रोहिंग्या ही माना जाएगा और उनके लिए इस देश में कोई जगह नहीं है। यह सुप्रीम कोर्ट ने अब साफ कह दिया है और एक बड़ा झटका इसके साथ ही प्रशांत भूषण जैसे वकीलों को लगा है जो घुसपैठियों और रोहिंग्याओं की तरफदारी करते हुए उनकी अपील लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। अब इस मामले में विस्तृत सुनवाई 31 तारीख को होगी जुलाई महीने में

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